दखल क्यों


खुदरा महंगाई

  चुनावी मौसम के बीच नवंबर महीने में भी आम जनता को महंगाई से राहत नहीं मिली ,दिसम्बर में भी महंगाई कम हो इसके आसार नजर नहीं आ रहे हैं । कम से उपभोक्ता मूल्य आधारित मूल्य सूचकांक के मुताबिक खुदरा महंगाई दर नवंबर में ( सीपीआई) 4.8 फीसद रही। खुदरा महंगाई की ये दर पिछले 15 महीनों में सबसे ज्यादा है। आपको बता दें कि अक्टूबर महीने में यह 3.58 फीसद रही थी। आपको बता दें कि रायटर्स के एक सर्वे में भी नवंबर के दौरान सीपीआई मुद्रास्फीति के बढ़ने के कयास लगाए गए थे।वहीं अक्टूबर महीने में औद्योगिक उत्पादन की दर भी 2.2 फीसद रही है।  

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Dakhal News 14 December 2017


adb

  एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान सात फीसद से घटाकर 6.7 फीसद कर दिया है। नोटबंदी का असर अभी भी जारी रहने, जीएसटी की दिक्कतों और कृषि पर मौसम संबंधी जोखिम को देखते हुए विकास दर कम की गई है। एडीबी ने अगले वित्त वर्ष 2018-19 का भी विकास दर अनुमान घटाकर 7.3 फीसद तय किया है। पहले उसने 7.4 फीसद विकास दर की उम्मीद जताई थी। एडीबी ने यह कदम देश की विकास दर दूसरी तिमाही में बढ़कर 6.3 फीसद होने के बावजूद उठाया है। पिछली पांच तिमाहियों से रफ्तार धीमी रहने के बाद जुलाई-सितंबर तिमाही में सुधार आया था। बैंक ने एशियन डवलपमेंट आउटलुक सप्लिमेंट में कहा है कि अगले 31 मार्च 2018 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष की बाकी दो तिमाहियों में रफ्तार सुधरेगी क्योंकि सरकार जीएसटी का अनुपालन आसान करने के लिए कदम उठा रही है। बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए कदम उठाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माहौल सुधरने से विकास को रफ्तार मिलेगी। उसका कहना है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सुस्ती रही क्योंकि नोटबंदी का असर ज्यादा समय तक बना रहा। इसके अलावा जीएसटी लागू होने से भी नई दिक्कतें पैदा हो गईं। इसके अलावा मानसून कमजोर रहने से भी कृषि क्षेत्र की विकास दर धीमी रह सकती है। अगले वित्त वर्ष में विकास की रफ्तार पर रिपोर्ट का कहना है कि अगले साल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें नई चुनौतियां पैदा करेंगी। इससे वित्तीय मोर्चे पर दिक्कतें रह सकती हैं। निजी क्षेत्र से कमजोर निवेश भी तेज रफ्तार में बाधा बनेगा। एडीबी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में महंगाई की औसत दर 2.7 फीसद पर रही। इससे कोई परेशानी नहीं है लेकिन नोटबंदी के चलते मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। इससे जहां महंगाई कम रही लेकिन विकास की रफ्तार बाधित हो रही है।  

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Dakhal News 14 December 2017


cbi raipur

रायपुर में  मंत्री के कथित अश्लील सीडी कांड को लेकर सियासी प्याले में एक बार फिर तूफान उठ गया है। सीबीआई ने रायपुर आते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। बघेल और कथित पत्रकार विनोद वर्मा के खिलाफ राज्य पुलिस की रिपोर्ट में एफआईआर पहले से ही दर्ज है। माना जा रहा है कि इससे भूपेश की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सीबीआई ने मंत्री की शिकायत के आधार पर ही दोनों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके साथ ही सीबीआई ने भाजपा नेता प्रकाश बजाज की शिकायत पर धारा 384, 50 (6) के तहत दूसरी एफआईआर भी दर्ज की है। सीबीआई दिल्ली की चार सदस्यीय टीम बुधवार को रायपुर पहुंची। इसमें डीएसपी स्तर के दो अधिकारी शामिल हैं। सीडी कांड की जांच करने रायपुर पहुंचे सीबीआई के डीएसपी रिचपाल सिंह और एसएस रावत के साथ दो इंस्पेक्टरों ने आईजी प्रदीप गुप्ता से मुलाकात की। फिर एसपी डा.संजीव शुक्ला, एसपी क्राइम अजातशत्रु बहादुर से मिलकर एसआईटी द्वारा अब तक की गई जांच की प्रगति की जानकारी ली। उसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक एसआईटी के साथ पुलिस कंट्रोल रूम के एक बंद कमरे में बैठक की और सीडी कांड में जुटाए गए सुबूतों पर चर्चा की। सीबीआई अफसरों ने गुरुवार को केस डायरी लेने के संकेत दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि केस डायरी का होमवर्क करने बाद विनोद वर्मा को रिमांड पर लेने के लिए सीबीआई कोर्ट में आवेदन देगी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीडी कांड की अब तक हुई एसआईटी की जांच में मामले से जुड़े 50 से अधिक संदेहियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं। रायपुर के अलावा दुर्ग-भिलाई के कारोबारी, कांग्रेसी नेता और रसूखदार संदेह के घेरे में हैं। हालांकि इनमें से केवल विनोद वर्मा, भिलाई के कारोबारी विजय भाटिया, एक महापौर समेत पांच लोगों के खिलाफ ही ठोस सुबूत मिलने का दावा किया जा रहा है। सीबीआई टीम के रायपुर आने की खबर से सीडी कांड से जुड़े संदेहियों और कांग्रेसियों में हड़कंप मच गया। टीवी चैनलों, ऑनलाइन प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया में खबर प्रसारित होने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। कांग्रेसी यह चर्चा करते मिले कि सीबीआई पहली गिरफ्तारी किसकी करेगी।  

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Dakhal News 14 December 2017


शिक्षाकर्मियों ने खत्म की हड़ताल

  छत्तीसगढ़ में 15 दिनों से जारी शिक्षाकर्मियों की हड़ताल अचानक सोमवार रात 1.30 बजे खत्म हो गई। जिला प्रशासन की ओर से एडीएम हरवंश मिरी, शिक्षाकर्मियों के आला नेताओं के साथ सर्किट हाउस पहुंचे और वहां घोषणा कर दी गई कि मंगलवार से सभी आंदोलनकारी शिक्षाकर्मी स्कूल लौट जाएंगे। शिक्षाकर्मियों के नेताओं ने रायपुर में जमा सभी साथियों से वापस अपने स्कूल जाने की अपील भी की। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के पीछे का राज क्या है, यह खुलकर सामने नहीं आ सका है। सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि हड़ताल जीरो यानी बिना कोई मांग माने समाप्त की गई है। तो क्या शिक्षाकर्मियों के बैकफुट पर जाने की वजह सरकार का कड़ा रुख रहा? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन स्कूली शिक्षा के लिहाज से यह राहत देने वाली खबर है। इधर सभी जिला पंचायत के सीईओ को शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी रद्द करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि शिक्षाकर्मी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर 20 नवंबर से हड़ताल कर रहे थे। रोजाना इनका प्रदर्शन उग्र होता जा रहा था। राजधानी में शनिवार, रविवार और सोमवार को कर्फ्यू जैसे हालात थे। सरकार की तरफ से यह साफ किया गया था की वह संविलियन संभव नहीं है। जेल में मिले एसपी, कलेक्टर- उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सोमवार रात 9:30 बजे के करीब कलेक्टर ओपी चौधरी, एसपी डॉ. संजीव शुक्ला केंद्रीय जेल में बंद शिक्षाकर्मियों के नेताओं से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान जेल अधीक्षक के केबिन में इनके बीच बातचीत हुई थी। हालांकि वार्ता क्या हुई, यह स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन दोनों अफसरों ने सरकार का रुख यहां स्पष्ट किया, जो कड़े तेवर वाला था। शिक्षाकर्मी संघ के नेता वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, संजय शर्मा ने कहा हम छात्रहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल वापस ले रहे हैं। हरवंश मिरी, एडीएम, रायपुर ने कहा शिक्षाकर्मियों की कोई भी मांग नहीं मानी गई है। उनके नेता केदार जैन, वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा ने शासन-प्रशासन से बात की और हड़ताल खत्म कर दी है। वे सभी मंगलवार से काम पर लौटेंगे। शासन से वार्ता के दौरान नेताओं ने सरकार के निर्णय पर सहमति जताई है। बाकी निर्णय शासन स्तर पर होंगे।

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Dakhal News 5 December 2017


rajasthan

  राजस्थान में पाकिस्तान से लगे चार जिलों में ऐसी सड़क बनाई जाएगी, जिस पर युद्ध या आपदा की स्थिति में विमान उतर सकेंगे। इस सड़क की चौड़ाई 10 मीटर होगी। सड़क का निर्माण जम्मू से कांडला तक चल रहे भारत माला प्रोजेक्ट के तहत होगा। इस में राजस्थान के सीमांत चार जिलों श्रीगंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर को भी शामिल किया है। इस उच्च गुणवत्ता की 10 मीटर चौड़ी सड़क बनने के बाद युद्ध एवं आपातकालीन परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों को उतरा जा सकेगा। केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। अकेले श्रीगंगानगर जिले में ही 256 किमी. सड़क बनेगी और 650 करोड़ रुपए इस पर खर्च होने प्रस्तावित हैं। सड़क का प्रोजेक्ट फाइनल हो चुका है। 2018 के अंत तक इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।किसानों को जमीनों का वर्तमान डीएलसी से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा।

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Dakhal News 28 November 2017


gujrat chunav

  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात में हो रहा विधानसभा चुनाव बड़ा ही रोचक हो गया है। चुनाव सूबे का है पर जंग राष्ट्रीय मुद्दों पर हो रही है। जीएसटी और नोटबंदी को कांग्रेस खूब जोर-शोर से उछाल रही है तो वहीं भाजपा विकास के रथ से उतरने को तैयार नहीं है। बीते दो दशक में यह पहला चुनाव होगा जिसमें मोदी खुद मैदान में नहीं हैं, गुजरात की अस्मिता और गुजराती स्वाभिमान पहले भी मुद्दा बना आज भी है। लेकिन बीते तीन चुनाव जिन नारे जिन मुद्दों पर लड़े गए इस बार के चुनाव में वे अप्रासंगिक हो गए हैं। गोधरा कांड के बाद साल 2002 में हुए चुनाव में दंगे बनाम हिनदुत्व की लहर बड़ा मुद्दा बना था तब मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विेदशी होने के मुद्दे को उठाया था। लेकिन, अब ये कोई मुद्दा ही नहीं रह गया है। अपने पहले चुनाव में मोदी ने जनता से पहले मतदान फिर कन्यादान, आप एक दिन जागो, मैं 5 साल जागुंगा जैसे नारे दिए। इसके साथ ही साथ गुजरात के गौरव के लिए उन्होंने आपणुं गुजरात आगवुं गुजरात मतलब अपना गुजरात, आगे गुजरात जैसा नारा दिया। कांग्रेस गुजरात में हुए दंगों के मुद्दों से अब तक आगे नहीं बढ़ पाई। साल 2007 के चुनाव में कांग्रेस ने चक दे गुजरात का नारा दिया। मोदी को घेरने के लिए सवा लाख चेकडेम और सुजलाम सुफलाम में भ्रष्टााचार के भी आरोप जड़े। लेकिन, मोदी ने जीतेगा गुजरात के नारे पर पूरा चुनाव लड़ लिया। मोदी ने वायब्रेंट गुजरात निवेशक सम्मेलन में हुए निवेश को भी मुद्दा बनाना शुरू कर दिया था। इसके साथ कच्छ रण महोत्सव, शाला प्रवेशोत्सव, कृषि महोत्सव, पतंग महोत्सव भी मोदी के तरकश के तीर बनते गए। साथ ही ज्योतिग्राम योजना जिसमें गांव और शहरों को 24 घंटे थ्री फेज बिजली मिलने लगी थी। नर्मदा बांध के निर्माण को लेकर आ रही बाधाओं को मोदी ने बड़ा मुद्दा बना दिया था। मोदी के 51 घंटे के उपवास के बाद लोगों की भावनाएं भी इससे जुडती चली गई। उधर, कांग्रेस ने पहले सोहराबुद्दीन मुठभेड़ को उछाला। ‍फिर कांग्रेस अध्यीक्ष सोनिया गांधी ने मोदी को मौत का सौदागर बताकर चुनावी माहौल को गरमा दिया। मोदी ने इसे मुद्दा बनाकर जमकर भुनाया, कांग्रेस एक नारे की वजह से बेकफुट पर आ गई। वर्ष 2012 का चुनाव प्रचार मोदी ने गुजरात के साथ केन्‍द्र सरकार के अन्याुय के मुद्रदे पर फोकस किया। बकायदा गुजरात के विकास से जुड़े मुद्दे, अनुदान और रॉयल्टीर के मामलों को उठाकर मोदी ने चुनाव को केन्द्रु बनाम राज्यत बना दिया। मोदी को सत्तान में अब एक दशक हो गया था लिहाजा हर क्षेत्र में मोदी अपनी उपलब्धिबयां भी गिनाने लगे। कृषि उत्पादन, नर्मदा कैनाल, गीर जंगल में शेरों की संख्या बढ़ने, राज्य में इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज की संख्याम बढ़ने, साणंद में नैनो प्रोजेक्ट, बीआरटीएस, साबरमती पर रिवर फ्रंट, निजी क्षेत्र में रोज़गार सृजन, गरीब कल्याभण मेले आदि। इसी दौरान मोदी ने आई लव गुजरात, मैं नहीं हम के भी नारे देकर गुजरात को एक टीम बताना शुरु किया। पिछला चुनाव मोदी ने सबका साथ सबका विकास के मुद्रदे पर लड़ा। साथ ही वे कालाधन, कर्फ्यू मुक्त गुजरात के साथ उनके खिलाफ सीबीआई, इन्कम टैक्स, सेबी, ईडी आदि लगाने के मामलों को उठाया। कांग्रेस अब अदाणी और अंबानी सहित मोदी के करीबी उद्योगपतियों को घेरने लगी है। मोदी केन्द्रस के अन्याऔय को केन्द्रन में रखकर चुनाव लड़ते रहे। इस बार के चुनाव में भी नर्मदा मुख्य हथियार बना है। अमित शाह और मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने राहुल गांधी से पूछे 5 सवालों में इसे ऊपर रखा है। भाजपा ने इस बार नारा दिया है- मैं हूं गुजरात, मैं हूं विकास। वहीं कांग्रेस नवसृजन गुजरात के नारे पर चुनाव लड़ रही है। केन्द्र की यूपीए सरकार का भ्रष्टाचार पहले भी प्रमुख चुनावी मुद्दा था और इस बार के चुनाव में भी यह छाया हुआ है। पिछले चुनाव में भाजपा कालेधन के मुद्रदे को उठा रही थी इस बार नोटबंदी से जोड़कर कांग्रेस इसे उठा रही है। इस बार मुद्दे प्रदेश की बजाए देश के उठाए जा रहे हैं, मसला आतंकवाद हो, घुसपैठ हो या फिर जम्मूु कश्मी र का हो। भाजपा ने विकास के मुद्दे के साथ गुजरात की शांति, कर्फ्यू मुक्तस गुजरात, शहरी विकास, मेहसाणा में सुजूकी प्लां ट, बुलैट ट्रेन के साथ नोटबंदी, जीएसटी को अपनी उपलब्धि बता रही है तो वहीं कांग्रेस महंगाई, गैस सिलेंडर के दाम, किसानों को फसल के दाम, युवाओं को रोज़गार के मुद्दों को हवा दे रही है।  

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Dakhal News 28 November 2017


कबीर महोत्सव

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि संत कबीर ने अन्याय और आडम्बर से मुक्त समानता पर आधारित समाज का ताना-बाना बुना था। उनकी शिक्षा समाज के लिये संजीवनी है। वे गहरे अर्थों में निर्बल लोगों के पक्षधर थे। वे संत से बड़े समाज सुधारक थे। राष्ट्रपति श्री कोविंद आज यहाँ लाल परेड मैदान पर सदगुरू कबीर महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा है कि संत कबीर ने अंधविश्वास और पाखण्ड पर कठोर प्रहार किया था। संविधान में न्याय, समानता और बंधुत्व के आदर्श कबीर से प्रेरित है। संत कबीर मानव प्रेम के पक्षधर थे। संत कबीर की वाणी का उल्लेख गुरू नानक ने गुरू ग्रंथ साहिब में किया है। संत कबीर की शिक्षा समानता और समरसता की है। साहस के साथ अंध विश्वास को समाप्त करना ही निर्भीकता है। कबीर ने अपने जीवन में इसका उदाहरण प्रस्तुत किया था। उन्होंने आव्हान किया कि मानवता से प्रेम करने के आदर्श पर चलकर देहदान करें। मानव अंगों के दान से कई लोगों को जीवन मिल सकता है। समावेशी और संवेदनशील सोच पर आधारित विकास राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि संत कबीर के जीवन का मुख्य संदेश सबको समानता के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में राज्य सरकार इसी दिशा में समावेशी विकास के लिये कार्य कर रही है। आर्थिक विकास में सफलतम प्रदेश मध्यप्रदेश में सबको विकास के अवसर उपलब्ध कराये गये हैं। प्रदेश की जीडीपी एक लाख करोड़ रूपये से बढ़ कर पाँच लाख करोड़ रूपये तक पहुँच गयी है। यह विकास समावेशी और संवेदनशील सोच पर आधारित है। इसी सोच से लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजना बनी है। कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास को ध्यान में रखकर योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। संत कबीर का मध्यप्रदेश से गहरा नाता रहा है। प्रदेश के बाँधवगढ़ में उन्होंने लम्बा प्रवास किया था। वहाँ पर कबीर गुफा तीर्थ-स्थल है। मध्यप्रदेश की हर हिस्से की अपनी गौरव गाथा है। यहाँ साँची में बौद्ध स्तूप तथा अमरकंटक में प्रथम जैन तीर्थंकर श्री ऋषभदेव का मंदिर है। उज्जैन और ओंकारेश्वर में ज्योर्तिलिंग हैं। उज्जैन का सिंहस्थ कुंभ प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश की धरती ने संगीत सम्राट तानसेन, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी, नानाजी देशमुख, सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और बाबा साहेब अंबेडकर जैसे अनगिनत रत्न पैदा किये है। कबीर एक निर्भीक संत थे राज्यपाल श्री ओ.पी. कोहली ने कहा है कि भारत धर्म प्रधान देश है। जिसमें साधु-संतों को समाज में आदर मिलता है। कबीर एक निर्भीक संत थे, जिन्होंने किताबी ज्ञान से परे हटकर अनुभवों के आधार पर सत्य का दर्शन करवाया। उन्होंने पाखण्डों का घोर विरोध किया और आँखिन देखी पर बल दिया। कबीर की वाणी कल्याणकारी और जीवन अनुभवों को सुदृढ़ करने वाली है। संत कबीर लोक कवि थे, जिन्होंने लोक जागरण किया। पुरानी रूढ़ियों को तोड़कर प्रगति के पथ पर बढ़ाने वाली विचारधारा के संत थे। उन्होंने समाज में समानता की भावना को बढ़ाने का काम किया। सामाजिक समरसता का संदेश मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संत कबीर का दर्शन आज भी प्रासंगिक है। उनका यह दर्शन पूरे जीवन को बदल सकता है। साथ ही भौतिकता के अग्नि में दग्ध विश्व को शाश्वत शांति का दिग्दर्शन कराने में सक्षम हैं। संत कबीर ने समानता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया है। संत कबीर ने जाँत-पाँत को महत्व न देते हुए ज्ञान और प्रेम को महत्व दिया है। उन्होंने रूढ़ियों और पाखण्डों का विरोध किया। श्री चौहान ने संत कबीर के दोहे और साखियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान उसी तरह हर घट में रहते हैं जिस तरह मेहंदी के पत्तों में लाल रंग छिपा रहता है। यदि कहीं भगवान हैं तो गरीबों में हैं। गरीब की सेवा ही भगवान की पूजा है। उसी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार गरीबों के कल्याण का कार्य कर रही है। श्री चौहान ने कहा है कि गरीबों के रोटी-कपड़ा और मकान तथा उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और दवाई के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। मध्यप्रदेश एक मात्र राज्य है जहाँ हर आवासहीन को भूखण्ड प्रदाय का कानून बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सभी गरीबों को चार वर्ष में पक्के मकान मुहैया करवाये जायेंगे। अनुसूचित जाति, जनजाति सहित सभी गरीबों को एक रूपये किलो गेहूँ और चावल मुहैया करवाया जा रहा है। पैसों के अभाव में कोई विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिये मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी सहायता योजना शुरू की गई है। शहरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को रहने के कमरे का किराया तथा विदेश अध्ययन के लिये छात्रवृत्ति भी उपलब्ध करवायी जा रही है। हर वर्ष डेढ़ लाख युवाओं को स्व-रोजगार के लिये मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानोदय, श्रमोदय, एकलव्य, विद्यालयों का जाल बिछाया जायेगा। मध्यप्रदेश के अनुसूचित जाति-जनजाति के ड़ेढ़ लाख युवाओं को हर वर्ष रोजगार के लिये ऋण-अनुदान सहायता तथा पाँच वर्ष तक पाँच प्रतिशत ब्याज अनुदान मुहैया करवाया जायेगा। एक लाख बच्चों को स्व-रोजगार के लिये मदद दी जायेगी। तीन वर्षों में तीन लाख युवाओं को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जायेगा। संत कबीर के दर्शन पर शोध के लिये दो विश्वविद्यालय में कबीर सृजन पीठ की स्थापना की जायेगी। आत्मा का गान करने वाली कबीर भजन मंडलियों को एकतारा के लिये सहायता दी जायेगी। प्रदेश में स्थित कबीर चौराहों, मठों का पुनउद्धार किया जायेगा। हर वर्ष कबीर महाकुंभ का आयोजन किया जायेगा तथा कबीर के विचारों को आगे बढ़ाने वाले स्वैच्छिक संगठनों को सहायता दी जायेगी। कबीर की जन्म-स्थली को मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में शामिल किया जायेगा। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सामाजिक समरसता का संदेश देने का काम राज्य सरकार ने किया है। प्रदेश में गरीब, शोषित और पीड़ितों के कल्याण के लिये कई योजनाएँ बनाई गईं हैं। संत श्री असंगनाथ जी ने कहा कि कबीर ने कहा था कि अपने मन को निर्मल बना लो तो भगवान आपको ढूँढेगा। विचार करना आ जाये तो हर दु:ख दूर हो जायेगा। जो लोगों को जोड़ता है वहीं जीतता है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान की गई व्यवस्थाओं की पूरे देश में सराहना हुई है। स्वागत भाषण मध्यप्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम के अध्यक्ष श्री नारायण प्रसाद कबीरपंथी ने दिया। कबीर सम्मान कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कबीर सम्मान से तीन शब्द-शिल्पियों सर्वश्री रेवाप्रसाद द्विवेदी (बनारस), सुश्री प्रतिभा सत्पथी (भुवनेश्वर) और श्री के. शिवा रेड्डी (हैदराबाद) को सम्मानित किया। इन्हें पुरस्कारस्वरूप तीन लाख रूपये और सम्मान-पट्टिका भेंट की गयी। उन्होंने 'मध्यप्रदेश में कबीर' ग्रंथ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द को गोंड चित्रकला की कृति भेंट की। मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह ने देश की प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविन्द को मध्यप्रदेश की मशहूर चंदेरी साड़ी भेंट की। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक श्री प्रहलाद टिपाणिया और साथियों ने भजन प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, सांसद एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग, सांसद सर्वश्री सत्यनारायण जटिया और चिंतामन मालवीय, श्री नारायण केशरी सहित बड़ी संख्या में कबीर पंथ के संत और अनुयायी तथा जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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Dakhal News 11 November 2017


मूणत CD कांड

    खबर रायपुर से । एसआईटी को सेक्स सीडी कांड की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है। दरअसल सीडी कांड को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमाई हुई है। रायपुर पुलिस विपक्षी पार्टी के निशाने पर है। गुढ़ियारी में कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए पथराव की घटना के बाद से मामला और गरमा गया है। कांग्रेस के नेताओं ने पुलिस पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया है कि सरकार बदलने पर जिम्मेदार पुलिस अफसरों को देखा जाएगा, उनसे हिसाब लिया जाएगा। इस बयानबाजी के बाद अफसर भी बचाव की मुद्रा में आ गए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीबीआई जांच की घोषणा होने के बाद से एसआईटी जल्द से जल्द इस मामले से मुक्त होना चाह रही है। सीबीआई ने भी सीडी कांड की केस डायरी का दो दिनों तक अध्ययन करने के बाद इसी हफ्ते जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं। लिहाजा एसआईटी का पूरा ध्यान हैदराबाद फॉरेंसिक लैब भेजे गए अश्लील सीडी, पेन ड्राइव, लैपटॉप आदि की जांच रिपोर्ट पर है। पुलिस के मुताबिक सेक्स सीडी की पूरी जांच रिपोर्ट हैदराबाद लैब से कम से कम महीनेभर में मिलने की उम्मीद है। हालांकि रिपोर्ट जल्द से जल्द मिल जाए, इसके लिए उच्च स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। फिर भी 20-25 नवम्बर से पहले मिलने की संभावना कम ही है। सेक्स सीडी कांड में गिरफ्तार विनोद वर्मा जेल में है, जबकि भिलाई के फरार कारोबारी विजय भाटिया की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। खबर मिली है कि वह पंजाब में फरारी काट रहा है। विजय के घर से पुलिस ने 500 अश्लील सीडी बरामद की है। उसके पकड़े जाने पर यह राज खुलेगा कि किसके कहने पर वह विनोद वर्मा से सीडी लेकर यहां आया था। पुलिस का दावा है कि सीडी कांड में राजधानी रायपुर के दो युवा नेताओं की भूमिका सामने आई है। इन्होंने पर्दे के पीछे रहकर कार्य किया। इन कांग्रेसी युवा नेताओं का नाम दो साल पहले अंतागढ़ टेपकांड में भी सामने आ चुके हैं। लिहाजा दोनों पुलिस के निशाने पर हैं। कभी भी इनकी गिरफ्तारी की जा सकती है। पिछले पखवाड़ेभर से रायपुर पुलिस का पूरा अमला एकमात्र सीडी कांड की जांच में उलझा हुआ है। ऐसे में कई हाईप्रोफाइल हत्या व लूट की केस डायरी दब गई है। इनमें सराफा कारोबारी पंकज बोथरा हत्याकांड, छछानपैरी हत्याकांड, सेरीखेड़ी गोलीकांड समेत करीब 15 बहुचर्चित केस शामिल हैं।    

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Dakhal News 11 November 2017


चित्रकूट में लायसेंसी हथियार जमा

सतना जिले के 61-चित्रकूट विधानसभा उप चुनाव को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए अब तक बिना लायसेंस के 2 हथियार जब्त तथा 1108 लायसेंसी हथियार जमा किये जा चुके है। सीआरपीसी की विभिन्न घाराओं के तहत 891 मामलों में 315 व्यक्तियों को बांउड ओवर किया गया है। गैर-जमानती 127 वारंट की तामीली करवाई जा चुकी है। तामीली के 54 वारंट लंबित है। क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से 11 पुलिस नाके स्थापित किये गये है। क्षेत्र में 50 वल्नरेबल क्षेत्र तथा कर गड़बड़ी फैलाने की आंशका वाले 60 व्यक्तियों को चिन्हित किया गया है। निर्वाचन क्षेत्र में सम्पति विरूपण कानून के तहत अब तक 438 दीवार लेखन को हटाया जा चुका है। इसी तरह 565 पोस्टर और 307 बैनर जब्त किये जा चुके है। क्षेत्र हमें आबकारी विभाग का उड़नदस्ता और पुलिस की टीमें लगातार मश्त कर रही है। सतना जिले में आदर्श आचरण संहिता का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है। आचार संहिता के उल्लधन की अब 4 शिकायतें प्राप्त हुई है।  

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Dakhal News 3 November 2017


अश्लील सीडी

छत्तीसगढ़ की सियासत में बवाल मचाने वाले कथित अश्लील सीडी कांड मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए रायपुर पुलिस की स्पेशल टीम (एसआईटी) दिल्ली पहुंच गई है। खबर है कि टीम वहां सीबीआई के अधिकारियों से मिलकर अब तक हुई जांच का पूरा ब्योरा देगी। घटनाक्रम के अध्ययन के बाद सीबीआई जांच शुरू करेगी। हालांकि प्रदेश सरकार ने सीडी कांड की जांच सीबीआई से कराने का प्रस्ताव भेजा है। सीबीआई कब से जांच शुरू करेगी, फिलहाल स्पष्ट नहीं है और न ही अधिकारी इस बारे में कुछ बताने की स्थिति में हैं। मामले में विपक्ष से जुड़े बड़े-छोटे नेताओं की संलिप्तता होने की वजह से एसआईटी फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रही है। संदेह के घेरे में आए लोगों को शॉर्ट लिस्ट कर उनके खिलाफ तगड़ा सबूत जुटाया जा रहा है। खबर यह भी है कि एसआईटी ने रायपुर समेत भिलाई, राजनांदगांव आदि शहरों के छह से अधिक संदेहियों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। हालांकि हिरासत में कौन-कौन हैं और उनसे क्या जानकारी ली जा रही है, यह बताने को कोई भी असर तैयार नहीं है। उनका कहना है कि मामला हाईप्रोफाइल है, इसलिए मीडिया में शेयर करना संभव नहीं है। प्रदीप गुप्ता, आईजी रायपुर रेंज ने कहा सीडी कांड मामले में फिलहाल किसी को हिरासत में लेने की जानकारी मुझे नहीं है। एसआईटी जांच कर रही है। महत्वपूर्ण सुराग जुटाए जा रहे हैं।   

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Dakhal News 3 November 2017


सेंसेक्स 90 अंक फिसला

  बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई लेकिन दिन के अंत में यह लाल निशान पर बंद हुआ। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 90 अंक की गिरावट के साथ 31883 के स्तर पर और निफ्टी 32 अंक की गिरावट के साथ 9984 के स्तर पर बंद हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। जापान का निक्केई 0.22 फीसद की बढ़त के साथ 20870 के स्तर पर, चीन का शांघाई 0.33 फीसद की बढ़त के साथ 3394 के स्तर पर, हैंगसैंग 0.06 फीसद की कमजोरी के साथ 28473 के स्तर पर और कोरिया का कोस्पी 0.63 फीसद की बढ़त के साथ 2449 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बीते सत्र अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर बंद हुए हैं। प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस 0.31 फीसद की बढ़त के साथ 22830 के स्तर पर, एसएंडपी500 0.23 फीसद की बढ़त के साथ 2330 के स्तर पर और नैस्डैक 0.11 फीसद की बढ़त के साथ 6587 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी रियल्टी (0.55 फीसद) शेयर्स में देखने को मिल रही है। बैंक (0.21 फीसद), ऑटो (0.11 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.20 फीसद), एफएमसीजी (0.11 फीसद), आईटी (0.17 फीसद), मेटल (0.41 फीसद) और फार्मा (0.48 फीसद) की बढ़त देखने को मिल रही है। दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 37 हरे निशान, 12 गिरावट और एक बिना किसी परिवर्तन के कारोबार कर रहा है। सबसे ज्यादा तेजी गेल, एक्सिस बैंक, भारतीएयरटेल, यूपीएल और इंफ्राटेल के शेयर्स में है। वहीं, गिरावट डॉ रेड्डी, बीपीसीएल, टेक महिंद्रा, मारुति और विप्रो के शेयर्स में है।  

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Dakhal News 11 October 2017


बिलासपुर news

बिलासपुर के एक अस्पताल में बीमार पत्नी से विवाद के बाद पति ने उसकी हत्या कर दी और खुद भी अस्पताल में ही फांसी पर झूल गया, जबकि हैरानी की बात ये है कि कि इतनी बढ़ी वारदात होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन और स्टॉफ को इस बारे में पता नहीं चला। मिली जानकारी के मुताबिक बिलासपुर के सीपत थाना क्षेत्र के पोड़ी ग्राम की महिला लता मानिक पुरी को हाल ही में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीढ़ियों से गिरने के कारण उसका पैर चोटिल हो गया था। इस दौरान उसका पति रमेश दास मानिकपुरी भी उसके साथ था। शुक्रवार देर रात अस्पताल में ही पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बात इतनी बढ़ गई कि पति रमेश ने ड्रिप चढ़ाने वाले लोहे स्टेण्ड से पीट-पीटकर पत्नी लता की हत्या कर दी। इस दौरान रमेश की साली ने भी बीच बचाव का प्रयास किया तो रमेश ने उसे भी बुरी तरह से घायल कर दिया और खुद अस्पताल में लगे पंखे में फांसी पर झूल गया। रमेश की साली को फिलहाल गंभीर हालत में सिम्स में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

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Dakhal News 30 September 2017


bhu

बीएचयू में छात्राओं की पिटाई के बाद गर्माए माहौल के कारण वाराणसी के सभी कॉलेज सोमवार को बंद हैं। विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार धरना-प्रदर्शन के कारण बीएचयू के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है और उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टूडेंट्स की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कुछ विभाग में सेमेस्टर परीक्षाएं कैंसिल हो गई हैं। बीएचयू में हो रहे बवाल के कारण सेमेस्टर परीक्षाएं आगे के लिए टाल दी गई है। सोमवार से कुछ सब्जेक्ट की परीक्षाएं होनी थी लेकिन अवकाश कर दिए जाने के कारण परीक्षाएं लंबित कर दी गई। अब छात्र-छात्राओं को नई तारीख का इंतजार करना है। वहीं स्टूडेंट्स को रविवार को हॉस्टल छोड़ने का नोटिस दे दिया गया, जिसके चलते स्टूडेंट्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि बीएचयू में हो रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर विश्वविद्यालय में सोमवार से अवकाश घोषित कर दिया गया और अब नवरात्र की छुट्टी के बाद 6 अक्टूबर 2017 को विश्वविद्यालय खुलेगा। दूसरी तरफ, मामले को लेकर राजनीति भी गर्म हो चुकी है और इसी कड़ी में सोमवार को समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता बीएचयू पहुंचे और वहां जमकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हालांकि कैंपस में भारी मात्रा में फोर्स तैनात है लेकिन माहौल को देखते हुए सभी को एलर्ट कर दिया गया है। कैंपस का सिंहद्वार फिलहाल बंद कर दिया गया है। वहीं इससे पहले बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में अधिकारियों को हटाए जाने के बाद अब प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। बीएचयू के एक हजार छात्रों पर केस दर्ज किया गया है। जबकि स्थिति को संभालने में असफल मानते हुए सरकार ने लंका के स्टेशन ऑफिसर के अलावा भेलपुर के सीओ और शहर के एडिशनल मजिस्ट्रेट को हटा दिया है। शनिवार रात को पुलिस द्वारा धरना दे रही छात्राओं की पिटाई के बाद हालात बिगड़ गए थे। छात्रों ने जगह-जगह धरना प्रदर्शन किया वहीं आगजनी की भी कई घटनाएं सामने आईं। इस सब के चलते छात्राओं और उनके परिवार वालों में दहशत व्याप्त थी वहीं बहन-बेटियों पर हुए हमले पर छात्राओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था। जलते बीएचयू की आंच महसूस करते हुए जिला प्रशासन ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है जबकि बीएचयू को पहले ही दो अक्टूबर तक बंद किया जा चुका है। रविवार को विश्वविद्यालय परिसर में हनक बनाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स गश्त करती रही इसके बावजूद छात्र वीसी हाउस के समीप और परिसर में जगह-जगह धरना-प्रदर्शन करते रहे। शाम को छात्रों के साथ सपा, कांग्रेस समेत अन्य छात्र संगठन भी खड़े हो गए। खास यह कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी लाठीचार्ज के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। लंका में दुर्गा प्रतिमा के आगे छात्रों का एक गुट धरने पर बैठ गया, जब डीएम और एसएसपी उन्हें मनाने पहुंचे तो उनके साथ बदसलूकी की गई। सपा की एक छात्र नेता ने अपने कुछ साथियों के साथ डीएम संग दुर्व्यवहार किया जिसपर सुरक्षाकर्मी भड़क उठे। जवानों ने लाठी भांजकर सड़क जाम कर रहे छात्र-छात्राओं को खदेड़ा। उधर, शनिवार रात को बमबारी, गोलीबारी, आगजनी, तोडफ़ोड़ के मामले में लंका पुलिस ने 1200 से अधिक अज्ञात छात्र-छात्राओं पर मुकदमा दर्ज किया है। वहीं बीएचयू आ रहे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को पुलिस ने गिलट बाजार इलाके में जाम लगाकर गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि 21 सितंबर की रात को दृश्य कला संकाय की छात्रा के साथ भारत कला भवन के पास हुई छेड़खानी की घटना से आक्रोशित छात्राएं उसी रात त्रिवेणी हास्टल से सड़क पर उतर आईं थीं। उसके बाद उनका प्रदर्शन जारी है। छात्राओं की मांग थी कि कुलपति धरना स्थल पर पहुंचकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाएं। इस प्रस्ताव को बीएचयू ही नहीं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी वीसी के समक्ष रखा लेकिन वीसी ने उसे ठुकरा दिया। छात्राओं का कहना था कि वीसी के इसी अडिय़ल रवैये एवं जिद के कारण चंद मिनट में ही समाप्त हो जाने वाला आंदोलन जारी रहा। इसके कारण पीएम को ही अपना रास्ता बदलना पड़ा। उधर, दूसरे दिन शनिवार को भी धरना शांतिपूर्ण चल रहा था। इसी बीच कुलपति आवास से गुजर रही छात्राओं पर बीएचयू के सुरक्षा तंत्र ने लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कई छात्राएं घायल हो गईं। इस घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के छात्र उग्र हो गए। पूरी रात पुलिस और छात्रों में गुरिल्ला युद्ध हुआ। इस दौरान पथराव के साथ ही आगजनी और तोडफ़ोड़ भी हुई। इस घटना में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। वहीं जवाब में पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की। उधर, पुलिस ने महिला महाविद्यालय में घुसकर छात्राओं पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं।बीएचयू प्रशासन की अपने प्रति संवेदना में कमी देख रविवार को भी छात्र-छात्राओं में आक्रोश रहा। पूरे कैंपस सहित शाम को लंका क्षेत्र में भी तनाव का माहौल रहा। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने बताया कि छेड़खानी की घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। एक शिक्षक होने के नाते इसकी मैं नैतिक जिम्मेदारी ले रहा हूं। बीएचयू ही नहीं कही भी ऐसी घटना अनुचित है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए एक प्लान बना रहा हूं जिसमें छात्राओं को भी प्लानर के रूम में शामिल किया जाएगा। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया कि वह बीएचयू प्रकरण पर गंभीर शासन ने रिपोर्ट मांगी है। जांच जारी है। छात्राओं, पत्रकारों पर लाठीचार्ज उचित नहीं। पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा छात्राओं पर लाठीचार्ज किसके आदेश पर किया गया, यह भी जांच हो रही है। इस मामले को सुलझाने की दिशा में उचित कदम उठाने चाहिए थे।  

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Dakhal News 25 September 2017


बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग

  अलग राज्य बनने के 17 साल बाद ही छत्तीसगढ़ में अलग बस्तर की मांग उठने लगी है। स्थानीय मुद्दों को लेकर पिछले कुछ दिनों से आंदोलन कर रहे सर्व आदिवासी समाज ने यह आवाज बुलंद की है। हालांकि अभी सीधे-सीधे अलग राज्य की मांग नहीं की गई है, लेकिन स्वर यही है। शासन-प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि आदिवासियों की उपेक्षा व शोषण जारी रहा। लंबित मांगें 6 महीने में पूरी नहीं हुईं तो पृथक बस्तर राज्य के लिए आंदोलन शुरू किया जाएगा। 6 सितंबर को आदिवासियों के बस्तर संभाग बंद के दौरान प्रशासन ने उन्हें चर्चा के लिए बुलाया था। मंगलवार की बैठक के बाद आदिवासियों ने 20 सितंबर का चक्काजाम प्रदर्शन स्थगित कर दिया। संभागायुक्त कार्यालय में चली मैराथन चर्चा में आदिवासी नेताओं के दो टूक से प्रशासन में हड़कंप है। पालनार कन्या आश्रम में आदिवासी छात्राओं से सुरक्षा बल के जवानों के छेड़छाड़, नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेश, बंग समुदाय के लोगों को बाहर निकालने व आदिवासियों के विरुद्घ अत्याचार की घटनाओं को रोकने जैसी मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी कमिश्नर दिलीप वासनीकर और आईजी विवेकानंद के बुलावे पर बैठक में शामिल हुए। कमिश्नर कार्यालय सभागार में दोपहर 1 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक चर्चा चली। इसमें बस्तर, कांकेर व दंतेवाड़ा जिले के कलेक्टर व एसपी के अलावा आदिवासी समाज के नेता प्रमुख रूप से मौजूद थे। समाज का नेतृत्व कर रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम व पूर्व सांसद सोहन पोटाई ने मीडिया से कहा कि बस्तर में आदिवासियों से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लागू करने में शासन-प्रशासन फेल रहा है। नेताम ने कहा कि पहली बार प्रशासन ने आदिवासी समाज के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास का वे स्वागत करते हैं। अब बारी समाज के उठाए विषयों पर कार्रवाई की है। पोटाई ने कहा कि 6 माह में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर अलग बस्तर राज्य की मांग ही अंतिम विकल्प होगा। नाराज है आदिवासी समाज पालनार घटना : 31 जुलाई को दंतेवाड़ा के पालनार कन्या आश्रम में रक्षाबंधन पर कार्यक्रम में आदिवासी छात्राओं से सुरक्षा बल के जवानों द्वारा छेड़छाड़ का आरोप है। मामले में 2 आरोपी जेल में हैं। परलकोट घटना : 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज की रैली व सभा में पखांजूर में समुदाय विशेष के लोगों ने खलल डाला था। विनिवेश : नगरनार में निर्माणाधीन स्टील प्लांट के विनिवेश के केन्द्र सरकार के फैसले का समाज ने विरोध किया है। समाज का कहना है कि विनिवेश का फैसला बस्तर और आदिवासियों के साथ धोखा है। पांचवी अनुसूची और पेसा कानून का कड़ाई से पालन नहीं करने का आरोप भी मुख्य मुद्दा है। इसके अलावा कई छोटी-बड़ी मांगें समाज ने की है।    

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Dakhal News 20 September 2017


राहुल गांधी

उमेश त्रिवेदी क्या यह बात आश्चर्यजनक नहीं है कि भारतीय सोशल मीडिया में 'पप्पू' नाम के उपहास पूर्ण 'कार्टून-फिगर' के माध्यम से अभिव्यक्त होने वाले राहुल गांधी के भाषणों पर प्रतिक्रियाएं देने के लिए भाजपा जैसे ताकतवर राजनैतिक संगठन और उसके पावरफुल केन्द्रीय मंत्रियों की समूची फौज मैदान संभाल ले...? अमेरिका में बर्कले की कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी में युवा छात्रों के साथ मन की बात करते हुए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐसा क्या कह दिया कि उसका जवाब देने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, सूचना एवं प्रसारण स्मृति ईरानी सहित भारतीय जनता पार्टी के 26 वरिष्ठ नेताओं की फौज को उतरना पड़ा?  भाजपा नेताओं की शाब्दिक गोलाबारी से उठने वाली धूल के पीछे कई सवाल अंगड़ाई लेते नजर आते हैं। राजनीति की दीवार पर सवालों की इस धूल का आकार-प्रकार समय के गर्त में छिपा है, लेकिन इन प्रतिक्रियाओं का राजनीतिक-तर्जुमा भाजपा के चोर-मन के दरवाजों के पीछे चल रही ऊहापोह के राज खोल रहा है कि भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत के राजनीतिक रोड-मैप को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है और ना ही वह राहुल गांधी को 'पप्पू' की तरह हल्का-फुल्का मानती है। राहुल के भाषणों पर भाजपा जैसे सशक्त राजनैतिक-संगठन और पावर-फुल मंत्रियों की अतिरंजित प्रतिक्रियाओं को ध्यान से समझना होगा। क्या भाजपा मानती है कि राहुल गांधी ने युवकों के सवाल-जवाब के दौरान जो बातें कहीं, उनमें मौजूद सच की खराश मोदी-सरकार के चेहरे पर खरोंच का सबब हो सकती है? बर्कले यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी ने कश्मीर से लेकर नोटबंदी जैसे मुद्दों पर छात्रों को जवाब दिए थे। अमेरिका में उन्हें वंशवाद और कांग्रेस की हकीकत को कुरेदने वाले सवालों का सामना करना पड़ा था। वाक-चातुर्य में अपेक्षाकृत कमजोर राहुल गांधी यहां खुद को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करते नजर आए। बेतकल्लुफ और बेलाग शैली के कारण राहुल के संभाषणों को अमेरिका के साथ-साथ भारत में भी बहुतायत लोगों ने पसंद किया है। भाजपा की चिंताओं का सबब शायद यही है कि फ्लोरिडा, बॉस्टन जैसे अमेरिकी शहरों के परफार्मेंस से राहुल गांधी के आत्म-विश्वास में काफी इजाफा हो सकता है। राहुल ने जो बोला, सच के करीब बोला। अमेरिका की भाषण-प्रतियोगिताओं में राहुल बगैर कृपांक (ग्रेस-मार्क्स) पास हुए हैं। राहुल की सफलता का राज शायद सैम पित्रौदा और शशि थरूर जैसे लोगों की टीम है, जो उनके साथ जुटी है।  कांग्रेस और खुद की कमियों की स्वीकारोक्ति के कारण राहुल श्रोताओं के बीच यह स्थापित करने में कामयाब रहे कि वो सच बोलने वाले व्यक्ति हैं। इस रणनीति ने मोदी-सरकार की उनकी आलोचनाओं को मजबूती दी, जो नोटबंदी जैसे कदमों के बाद जमीन पर उभर कर सामने आ रही हैं। राहुल ने यह स्वीकार करने में कोई झिझक महसूस नहीं की कि नरेन्द्र मोदी उनसे कई गुना ज्यादा बेहतर वक्ता हैं, जो हजारों लोगों की भीड़ को अपनी बातों से सम्मोहित कर सकते हैं। इसके अलावा 2014 में कांग्रेस की हार का कारण 'एरोगेंस' था, जो दस साल की लगातार सत्ता के कारण कांग्रेस के विभिन्न हलकों में गहराई तक पैठ गया था। अपनी 'पप्पू-इमेज' पर स्पष्टीकरण देते हुए राहुल ने कहा कि सोशल मीडिया पर भाजपा के एक हजार लोगों की टीम रोजाना मेरी इमेज को अलग-अलग तरीके से पेंट करने का काम करती है।   आज मैं आपके सामने बाते कर रहा हूं, मुझे देखकर और सुनकर मेरे बारे में इमेज बनाना बेहतर और न्यायसंगत होगा।  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कश्मीर पर, स्मृति ईरानी ने वंशवाद जैसे राजनीतिक मुद्दों पर, केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बारस नकवी ने देश की उन्नति के मामले में राहुल के आरोपों का जवाब दिया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल अमेरिका जाकर अपने देश की बुराई कर रहे हैं, यह उनकी निराशा का परिचायक है। राहुल गांधी पर संबित पात्रा का यह आरोप इसलिए नाजायज है कि विदेशी जमीन पर देश की राजनीतिक-आलोचना का सिलसिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रारंभ किया है। अमेरिका, इंग्लैण्ड आदि देशों के प्रवास के दौरान मोदी के लिए अप्रवासी भारतीयों की रैलियों के विशेष आयोजन होते रहे हैं। इन रैलियों में मोदी के भाषणों की विषय-वस्तु ही देश में व्याप्त राजनीतिक-प्रशासनिक अराजकता और असफलताएं होती थीं। मोदी के पहले किसी भी प्रधानमंत्री व्दारा विदेशी जमीन पर देश की आंतरिक राजनीति और शासन-प्रशासन पर प्रतिकूल टिप्पणियों के दूसरे उदाहरण मौजूद नहीं हैं।[लेखक उमेश त्रिवेदी सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 18 September 2017


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह

  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने तमिलनाडु के अम्मा कैंटीन की तर्ज पर मजदूरों के लिए टिफिन की सौगात दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर रविवार को तेलीबांधा में मुख्यमंत्री ने टिफिन सेंटर शुरू कर दिया, जहां केवल 5 रुपए में दाल-भात मिलेगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि एक साल के भीतर प्रदेश के सभी 27 जिलों में ऐसे 60 केन्द्र खोले जाएंगे। हर केन्द्र में एक हजार के मान से 60 हजार श्रमिकों को रोज सुबह 8 से 10 बजे के बीच ताजा और पौष्टिक भोजन दिया जाएगा। प्रदेश में मनाए जा रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी समारोह के अंतर्गत यह योजना शुरू की गई है। विधानसभा चुनाव के एक साल पहले उठाए गए इस कदम के राजनीतिक मायने भी हैं। रमन सरकार ने ही एक रुपए किलो चावल योजना की शुरुआत की थी। कौशल उन्नयन केंद्र के तहत मुख्यमंत्री ने गरीब परिवार के लोगों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई में दक्ष बनाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र का भी लोकार्पण किया। इसमें कचरा बीनने वालों को भी व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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Dakhal News 18 September 2017


आसाराम - मैं गधों की श्रेणी में हूं

  नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में जोधपुर जेल में बंद आसाराम गुरुवार को मीडिया से बातचीत में अपना आपा खो बैठे। जोधपुर के एससी-एसटी कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब आसाराम को कोर्ट में पेश किया गया तो मीडिया ने उनसे पूछा कि आप संत हो या कथावाचक की श्रेणी में आते हो। इस पर आसाराम झल्ला उठे और आपा खोते हुए कहा कि मैं तो गधों की श्रेणी में हूं। जब दोबारा पूछा कि क्या आप अपने को गधा कह रहे तो आसाराम ने कहा कि जो सही है वो कहा, मैं क्या जवाब दूं। लगातार बचाव पक्ष के गवाहों के नहीं आने से और अखाड़ा परिषद द्वारा फर्जी बाबाओं की लिस्ट में आसाराम को बताए जाने पर आसाराम पिछले दिनो चुप्पी साधे हुए थे। लेकिन गुरुवार को अपना सब्र खो बैठे। बुधवार को भी आसाराम को नियत समय पर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया था। इस दौरान जब उनसे अखाडा परिषद की सूची के बारे में पूछा गया तो वे चुप रहे थे और कोई जवाब नही दिया था। हालांकि, कोर्ट से बाहर निकलते समय यह जरूर कहा था कि मैं कोई बहाना नहीं कर रहा हूं, मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसी वजह से कुछ नहीं बोला, आज ठीक हूं तो बोल रहा हूं।

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Dakhal News 14 September 2017


रेयान इंटरनेशनल स्कूल

हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री राम विलाश शर्मा ने साफ कर दिया है कि रेयान इंटरनेशनल स्कूल की मान्‍यता को रद्द नहीं किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि बच्‍चों के भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। उन्‍होंने कहा कि स्‍कूल में 1200 बच्‍चे पढ़ते हैं, इसलिए यह कदम ठीक नहीं होगा। इसके साथ ही उन्‍होंने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि मामले में जुवेनाइल एक्‍ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस बीच प्रद्युम्न की हत्या के आरोपी कंडक्टर अशोक के पिता ने स्कूल पर बेटे को फंसाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा निर्दोष है। उसे फंसाया जा रहा है। वहीं कंडक्टर की बहन ने कहा कि मेरे भाई को पीटा गया है और उस पर गलत बयान देने के लिए दबाव डाला गया। स्कूल के प्रिंसिपल ने पुलिस को घूस दी है। इसके साथ ही खबर अा रही है कि अारोपी कंडक्टर के परिवार का गांव वालों ने बहिष्कार कर दिया है। उधर, रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या की जांच के लिए पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) अशोक बक्शी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में स्कूल में सुरक्षा को लेकर बरती जा रही लापरवाही के बारे में पूरी जानकारी भी हासिल की जाएगी। दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर ओर से पांच सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है, जो अपने स्तर पर जांच करेगी। पुलिस सात दिन के अंदर चार्जशीट अदालत में पेश कर देगी। शनिवार को पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार एवं जिला उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने कहा कि रेयान इंटरनेशनल स्कूल की घटना को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। घटना के कुछ ही घंटे के बाद न केवल आरोपी की पहचान की गई बल्कि उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया। स्कूल प्रबंधन की लापरवाही की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार भी इस घटना को लेकर चिंतित है। वहीं घटना के विरोध में लक्ष्मण विहार में लोगों ने कैंडल मार्च निकाल स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। बताया जाता है कि आरोपी अशोक ने हत्या करने के बाद कुछ मिनट के लिए कहीं छिप गया था। जैसे ही माली ने शोर मचाया तो वह सामने आ गया ताकि कोई उस पर शक न करे। उसने ही प्रद्युम्न को घटनास्थल से उठाकर अस्पताल में ले जाने में मदद की। इससे उसके हाथ एवं कपड़े में काफी खून लग गए थे। इस वजह से किसी को उसके ऊपर शक नहीं हुआ। जब मामला सामने आया तो स्कूल के तीन बच्चों ने पुलिस को बताया कि एक बस का सहायक बाथरूम में चाकू धो रहा था। इसी आधार पर सभी बसों के चालक व सहायक से पूछताछ की गई। सवालों के जाल में अशोक फंस गया। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने अपराध कबूल कर लिया।

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Dakhal News 10 September 2017


साक्षरता राष्ट्रीय पुरस्कार

51वें अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर उपराष्ट्रपति ने किया पुरस्कृत  मध्यप्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 51वें अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने वर्ष 2017 के लिए साक्षर भारत अवार्ड वितरित किये। इस अवसर पर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर भी मौजूद थे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में साक्षर भारत योजना में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले राज्य, जिला और राज्य संसाधन केन्द्र के लिए मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया गया।  राज्यों की श्रेणी में मध्यप्रदेश के साक्षरता मिशन भोपाल को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर साक्षरता मिशन के संचालक श्री लोकेश कुमार जाटव, तत्कालीन अपर संचालक श्रीमती शीला दाहिमा और मिशन के संयोजक डॉ. राकेश दुबे ने पुरस्कार ग्रहण किया।  जिला लोक शिक्षा समिति की श्रेणी में जिला टीकमगढ़ को सम्मानित किया गया। टीकमगढ़ जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री पर्वतलाल अहिरवाल और जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी श्री आर.के. पस्तोर ने पुरस्कार ग्रहण किया। गैर सरकारी संगठनों के क्षेत्र में राज्य संसाधन केन्द्र इंदौर को पुरस्कृत किया गया। श्रीमती अंजलि अग्रवाल ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।  उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016-17 में मध्यप्रदेश में 24 लाख 61 हजार से अधिक प्रौढ़ निरक्षरों को प्रशिक्षण के बाद साक्षरता परीक्षाओं में सफलता प्राप्त हुई है। प्रदेश के 31 सांसद आदर्श ग्रामों में लगभग 24 हजार प्रौढ़ निरक्षर नवसाक्षर बनकर सामने आये।  

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Dakhal News 8 September 2017


सरकारी अस्पताल में 63 दिन में हुई 86 मौतें

  राजस्थान के आदिवासी जिले बांसवाड़ा में बच्चों की मौत का आंकड़ा एकाएक बढ़ गया है। यहां पिछले 63 दिन में 86 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं पिछले तीन घंटे में भी चार बच्चों की मौत हो चुकी है। राजस्थान सरकार यहां बच्चों की मौत की जांच के आदेश दे चुकी है और तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। प्राथमिक जांच में यह मौतें प्रसूताओं और बच्चों के कुपोषण के कारण होना बताया जा रहा है। यह मौतें यहां के सबसे बडे़ सरकारी अस्पताल में हो रहे है। जानकारी के अनुसार जिन नवजातों की मौत हुई है वह अलग-अलग अस्पतालों से रैफर होकर आए थे। चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल का दौरा किया है और पाया है कि यहां प्रसूताओं की देखभाल में कमियां हैं। इस बारे में अस्पताल प्रशासन को सचेत भी किया गया है। यहां के कुपोषणग्रस्त बच्चों के वार्ड के प्रभारी रंजन चरपोटा ने बताया कि बच्चे पहले ही कुपोषण ग्रस्त थे और इन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन स्थिति गम्भीर होने के कारण बचाया नहीं जा सका। गौरतलब है कि बांसवाड़ा आदिवासी बहुल क्षेत्र है। तमाम सरकारी योजनाओं के बाद भी यहां प्रसूताओं को सही पोषक आहार नहीं मिल रहें है। वहीं नवजातों की लगातार हो रही मौत के राज्य बाल संरक्षण आयोग ने अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा है। साथ ही कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने नवजातों की मौत को दुखद बताया है।

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Dakhal News 3 September 2017


 कुसुम महदेले

  मप्र की पीएचई मंत्री कुसुम महदेले ने रेलवे की बदइंतजामी की पोल खोल कर रख दी है। 28 अगस्त को रेवांचल एक्सप्रेस से सफर करने के बाद कुसुम महदेले ने रेल मंत्री को ट्वीट कर ट्रेन की खराब हालत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रेवांचल एक्सप्रेस की फर्स्ट एसी में कंबल बदबूदार बांटा जा रहा है। टॉयलेट पेपर नहीं है। तकिए किसी काम के नहीं हैं। क्या रेलवे विभाग मुसाफिरों की चिंता नहीं करता? सिर्फ रेवांचल ही नहीं, भोपाल से खजुराहो चलने वाली महामना एक्सप्रेस में बैठने की खराब व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने रेल मंत्री और रेल मंत्रालय से शिकायत की। महदेले के इस ट्वीट पर रेल मंत्रालय की तरफ से उनके पीएनआर की जानकारी भी मांगी गई। सड़कें चलने लायक नहीं महदेले ने रेल की खराब व्यवस्थाओं को लेकर ही नहीं, बल्कि सतना के आसपास की खराब सड़कों को लेकर नितिन गडकरी को भी ट्वीट किया। दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट किया था कि केंद्र सरकार वर्ल्ड क्लास स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पर कुसुम महदेले ने जवाब देते हुए कहा कि सतना के आसपास के हाइवे की हालत बहुत खराब है। सड़कें चलने लायक नहीं हैं। उन्होंने हाइवे के नाम भी गिना दिए। महदेले ने कहा कि सतना से पन्ना, पन्ना से छतरपुर, रीवा से सतना हाइवे और खजुराहो से लवकुशनगर की सड़क की हालत बहुत खराब है। महामना एक्सप्रेस के नाम पर भी सवाल? महदेले ने भोपाल-खजुराहो महामना एक्सप्रेस ट्रेन के नाम पर भी आपत्ति जता दी। उन्होंने कहा कि महामना एक्सप्रेस का नाम खजुराहो या चंदेल एक्सप्रेस होना चाहिए। बुंदेलखंड के साथ हमेशा भेदभाव होता है। गडकरी से बोलीं- सड़कें चलने लायक नहीं, जल्दी ठीक कराएं महदेले ने सतना के आसपास की खराब सड़कों को लेकर नितिन गडकरी को भी ट्वीट किया। महदेले ने लिखा कि सतना के आसपास के हाइवे की हालत बहुत खराब है। सड़कें चलने लायक नहीं हैं। कुसुम मेहदेले ने कहा ये मेरा निजी मामला है निजी मामलों में दखल न दें ,मैंने ट्वीट किए तो आपको क्या आपत्ति है? ये मेरा निजी मामला है। 

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Dakhal News 1 September 2017


सामान्य वर्षा

मध्यप्रदेश में इस वर्ष मानसून में एक जून से 23 अगस्त तक 2 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश के 20 जिले ऐसे हैं जहाँ सामान्य वर्षा दर्ज हुई है। कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 29 है। अभी तक सामान्य औसत वर्षा 524.7 मिमी दर्ज की गई है जबकि प्रदेश की सामान्य औसत वर्षा 682.2 मिमी है। सामान्य से अधिक वर्षा कटनी और झाबुआ में दर्ज की गई है। सामान्य वर्षा वाले जिले जबलपुर, पन्ना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, इंदौर, धार, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खण्डवा, बुरहानपुर, उज्जैन, मंदसौर, नीमच, रतलाम, गुना, राजगढ़ और होशंगाबाद हैं। कम वर्षा वाले जिले बालाघाट, छिन्दवाड़ा, सिवनी, मण्डला, डिण्डोरी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, ग्वालियर, शिवपुरी, अशोकनगर, दतिया, भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, हरदा और बैतूल हैं।  

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Dakhal News 24 August 2017


नारायण राणे

  कांग्रेस नेता नारायण राणे के भाजपा में शामिल होने की अटकलें हैं। हालांकि प्रदेश के सियासी गलियारों में यह चर्चा कई दिनों से चल रही है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी वक्त इस बड़े फैसले की खबर आ सकती है। राणे ने अपने करियर की शुरुआत शिवसेना से की थी। तब भाजपा के साथ बनी गठबंधन वाली सरकार में मुख्यमंत्री भी रहे। 2005 में उन्हें शिवसेना से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। राणे के बारे में कहा जा रहा है कि अब उन्हें अपने दोनों बेटों के राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। इसी कारण वे भाजपा का रुख कर रहे हैं। वहीं भाजपा, महाराष्ट्र विधानसभा में अपनी सहयोगी शिवसेना से परेशान है। शिवसेना सहयोगी कम और विपक्षी की भूमिका ज्यादा निभा रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन शिवसेना का मजबूत गढ़ जैसे कोंकण, मुंबई और ठाणे में थोड़ी कमजोर रही। अब भाजपा की नजर कोंकण पर है, जहां कि 3 लोकसभा और 15 विधानसभा सीटों पर शिवसेना का कब्जा है। नारायण राणे के बहाने भाजपा कोंकण में खुद को मजबूत कर सकती है। माना जाता है कि यदि कोंकण, ठाणे और मुंबई में नारायण राणे तथा भाजपा की ताकत एक साथ आ जाए तो वह इस क्षेत्र में शिवसेना को पीछे छोड़ने में कामयाब हो सकती है। पिछले विधानसभा चुनावों में शिवसेना को भाजपा से लगभग आधी सीटें मिली थीं। यदि कोंकण और ठाणे ने भाजपा का साथ दिया होता तो भाजपा पूर्ण बहुमत तक अकेले पहुंचने में कामयाब हो सकती थी। अब शिवसेना के तीखे तेवरों से परेशान भाजपा शिवसेना को उसके ही गढ़ में धूल चटाना चाहती है। नारायण राणे उसकी इस मंसा को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण हथियार साबित हो सकते हैं।

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Dakhal News 19 August 2017


लव जिहाद

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के कथित लव जिहाद मामले में एनआईए को जांच के आदेश जारी किए हैं। साथ ही कहा है कि रिटायर जस्टिस आरवी रविंद्रन इस जांच की निगरानी करेंगे। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि एक बालिग महिला ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन और शादी कर ली है, तो उसे अपने पति से अलग कैसे किया जा सकता है। बता दें कि अदालय यह सुनवाई एक मुस्लिम युवक की याचिका पर कर रही है। एनआईए इस बात की जांच कर रही है कि क्या महिला के तार अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन से जुड़े हैं। इसके अलावा कोर्ट ने लड़की के पिता से भी जवाब मांगा है, क्योंकि वो महिला फिलहाल अपने पिता के साथ किसी अज्ञात जगह पर रह ही है। कोर्ट ने सभी पक्षों से 16 अगस्त तक मामले की अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। रिटायर्ड जज आरवी रवींद्रन की देखरेख में ये जांच होगी, क्योंकि घटना के पीछे चरमपंथी हाथ होने की बात कही जा रही है। इससे पहले कोर्ट ने केरल पुलिस को आदेश दिए थे कि वो इस केस से जुड़ी सभी जानकारी एनआईए को सौंप दे। इससे पहले कोर्ट ने पुलिस को मामले की सख्त जांच के लिए कहा था। बता दें कि ये मामला केरल का है, जिसमें हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर शादी करने का आरोप है। केरल हाईकोर्ट इस शादी को रद्द कर चुका है, जहां इसे 'लव जेहाद' का मामला बताया था। वहीं, शादी रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मुस्लिम पति का कहना है कि उसकी पत्नी(पूर्व) बालिग है और किसी से भी शादी करने के साथ ही किसी भी धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र है। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को जांच करने का आदेश दिया है। और कहा कि वो 10 दिनों के अंदर जरूरी सबूत पेश करे। सुप्रीम कोर्ट ने लड़की के पिता को भी आदेश दिया है कि वो 10 दिनों के भीतर ऐसे कागजात प्रस्तुत करे, जिसमें लड़की को बहला-फुसलाकर शादी कराई गई है। इस मामले को केरल हाईकोर्ट ने लव जिहाद का मामला बताते हुए शादी को रद घोषित कर दिया था और महिला को उसके पिता के पास भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट में युवक ने अपने वकील कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह के जरिए अपील की कि उसकी पत्नी(पूर्व) बालिग है और किसी भी धर्म को मानने के साथ ही किसी भी व्यक्ति से शादी करने को स्वतंत्र है। इसके बाद दोनों वकीलों ने दलील दी कि केरल हाई कोर्ट ने शादी रद्द करने का आदेश दिया और पति को पत्नी से मुलाकात करने तक पर रोक लगा दी है। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट जांच कराए। उन्होंने लड़की के बयान दर्ज कराने की भी मांग की की।  

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Dakhal News 16 August 2017


विश्व आदिवासी दिवस

   विश्व आदिवासी दिवस पर बस्तर से रायपुर तक सत्तारूढ़ भाजपा और विरोधी कांग्रेस वोट बैंक साधते नजर आए। दोनों दलों के बीच बस्तर की 12 विधानसभा सीटों पर जोर-आजमाइश दिखी, जहां आदिवासी आबादी अधिक है। राजधानी में सूबे के मुखिया डॉ.रमन सिंह ने आदिवासियों के कल्याण की सभी योजनाओं का बखान किया। समाज के प्रतिभावान छात्रों, खिलाड़ियों और समाजसेवियों को सम्मानित किया। प्रधानमंत्री के 'मन की बात' सुनने वाले अति संरक्षित जनजाति के बुजुर्गों को कंबल, छतरी और रेडियो बांटे। आदिवासी लेखकों की कृतियों का विमोचन किया। उधर, बस्तर में कांग्रेसियों ने सम्मेलन के बहाने राज्य सरकार की रीति-नीति पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने तो यहां तक कहा कि भाजपा आदिवासियों से छलावा करती है। उसका मकसद केवल वोट लेना है। समाज के आशीर्वाद से 14 साल से मुख्यमंत्री हूं: रमन सिंह राजधानी के इंडोर स्टेडियम में डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश भर से जुटे समाज के प्रतिनिधियों से कहा कि यह समाज के लोगों का आशीर्वाद है कि मैं 14 साल से मुख्यमंत्री हूं। 14 अगस्त को 5 हजार दिन पूरे हो जाएंगे। कोई पूछता है कि आपकी सबसे महत्वपूर्ण योजना क्या है? मैं कहता हूं-पीढ़ियों के निर्माण की। प्रयास विद्यालयों में नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों को 2 साल की ट्रेनिंग देनी शुरू की गई, नतीजा सामने है। इसी साल 9 बच्चों का मेडिकल में चयन हुआ है। इसे 90 तक ले जाना है। प्रयास में अभी 15 सौ सीटें हैं। इन्हें 3 हजार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में शहीद वीरनारायण सिंह और गुंडाधूर जैसे शूरवीरों ने खून बहाया है। इस आजादी को हमें और मजबूत करना है। जगदलपुर में गुंडाधूर और रायपुर में शहीद वीरनारायण सिंह के नाम से संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। आदिवासियों को मिटाने का प्रयास कर रही सरकार : सिंहदेव कांकेर में चारामा ब्लॉक के जैसाकर्रा में बुधवार को आदिवासी सम्मेलन में सिंहदेव ने प्रदेश सरकार पर जमकर शब्दों के तीर छोड़े। कहा कि भाजपा सरकार आदिवासियों का शोषण कर रही है। उन्हें मिटाने का घटिया प्रयास किया जा रहा। आदिवासी संस्कृति हमारे समाज और देश की धरोहर है। समाज ने देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान दिया है। इसे भूलना नहीं चाहिए। प्रदेश सरकार को गरीब और किसानों के हित से कोई सरोकार नहीं है। विधायक मनोज मंडावी ने कहा कि आदिवासियों को नक्सली बताकर फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा है। उन्हें आज भी अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। समाज के लोगों ने बस्तर के आदिवासी की समस्याएं, क्षेत्रों में छठवीं अनुसूची लागू करने, राज्य में पेशा एक्ट लागू करने सहित 18 सूत्रीय ज्ञापन सिंहदेव को सौंपा। सिंहदेव ने उसे सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।  

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Dakhal News 15 August 2017


रायपुर  रैकिंक 12वें नंबर पर

छत्तीसग़ढ  सरकार ने छह माह के परफॉर्मेंस के आधार पर नगरीय निकायों की रैंकिंग तय की है। इसके आधार पर प्रदेश के 13 नगर निगमों में रायपुर की रैकिंक 12वें नंबर पर है। कोरबा, चिरमिरी और भिलाई नगर निगम का भी परफॉर्मेंस बिगड़ा है, जबकि आठ नगर निगमों ने अपनी व्यवस्थाओं को कसकर रैंकिंग में सुधार किया है। निकायों को राज्य सरकार ने उनके काम के आधार पर 100 में से कम-ज्यादा अंक दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्री अमर अग्रवाल के निर्देश पर प्रदेश के सभी 168 नगरीय निकायों के कामकाज की हर छह में रैंकिंग होती है। दिसंबर 2016 के बाद अब नगरीय निकायों की रैंकिंग जारी की गई है। अभी सबसे अच्छा प्रदर्शन कोरबा नगर निगम का रहा है, हालांकि पिछली रैंकिंग से तुलना की जाए तो इसके अंक भी कम हुए हैं। दूसरे नम्बर पर भिलाईचरौदा नगर निगम है, इसने पिछली बार की तुलना में अपने अंक बढ़ाए हैं। तीसरे नम्बर पर बिलासपुर नगर निगम है। अंकों के आधार पर देखा जाए तो बिलासपुर नगर निगम ने पिछली बार की तुलना में अपना परफॉर्मेंस काफी ज्यादा सुधारा है, तभी तो इस बार 17 अंक बढ़कर मिले हैं। अंबिकापुर नगर निगम ऐसा नगरीय निकाय है, जिसने अपने परफॉर्मेंस का स्थित बनाकर रखा है। इसके अंक न बढ़े और न ही कम हुए। रायपुर नगर निगम के पास दूसरे नगर निगमों की तुलना में ज्यादा संसाधन है, उसके बावजूद यहां का प्रदर्शन बहुत ही ज्यादा खराब हुआ है। सीधे 22 अंक कम हो गए। रायपुर नगर निगम के लिए अब रैंकिंग को सुधारना बड़ी चुनौती है, क्योंकि राज्य सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को भी शामिल कर अंक दिए हैं। इस बार स्वच्छता की रैंकिंग में केंद्र सरकार ने प्रदेश के सभी 168 निकायों को शामिल करने की सूचना पहले ही भेज दी है, इसलिए निकायों के लिए प्रतिस्पर्धा और चुनौतीपूर्ण हो गई है। अधोसंरचना मद से कराए जाने वाले विकास कार्यों की पूर्णता-अपूर्णता, राज्य व केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के क्रियान्वयन, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों के निर्माण और खुले में शौच को बंद कराने, निदान 1100 में आने वाली शिकायतों के निराकरण, आईएचडीपी और प्रध्ाानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण व आवंटन, राजस्व वसूली और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा की गई। सीए ने उसके आध्ाार पर अंक दिए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सौ फीसदी रिजल्ट देकर धमतरी जिला पूरे देश में अव्वल आया है। पिछले साल धमतरीजिले में जितने ओडीएफ गांव बने थे, उनकी रैंकिंग के लिए छह घटक निर्धारित किए गए थे, यह जिला सभी घटक में पहले पायदान पर रहा। जियो टैगिंग और फोटो अपलोडिंग में एक भी शौचालय फर्जी नहीं मिला।  

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Dakhal News 15 August 2017


सत्याग्रह करने वाले एडीजे श्रीवास निलंबित

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के पूर्व विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी, अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। मंगलवार 8 अगस्त को प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस) सत्येन्द्र कुमार सिंह के हस्ताक्षर से इस आशय का आदेश जारी हुआ। उक्त आदेश में कहा गया है कि सीरियस मिस कंडक्ट को लेकर एडीजे श्रीवास के खिलाफ विभागीय जांच संस्थित कर दी गई है। निलंबन अवधि में एडीजे श्रीवास का मुख्यालय नीमच रहेगा। उल्लेखनीय है कि 15 महीने में चार तबादलों के विरोध में एडीजे श्रीवास ने हाईकोर्ट के बाहन तीन दिनों तक सत्याग्रह किया था। हालांकि, शनिवार को उन्होंने बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए ट्रांसफर आदेश मानते हुए गृहस्थी का सामान नीमच शिफ्ट कर लिया। उन्होंने मंगलवार को नीमच कोर्ट में ज्वाइन ही किया और प्रिंसिपल रजिस्ट्रार ने उनका निलंबन आदेश जारी कर दिया। निलंबन आदेश काला धब्बा, दिल्ली तक उठाऊंगा आवाज : एडीजे श्रीवास  एडीजे श्रीवास ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अपने निलंबन आदेश को न्यायपालिका के इतिहास में काला धब्बा निरूपित किया। साथ ही हाईकोर्ट के कठोर रवैये की तुलना अंग्रेजों के जमाने में न अपनी दलील और न वकील वाले रोलेट एक्ट से करते हुए अपनी आवाज दिल्ली तक उठाने की चेतावनी दी है। इससे पूर्व जबलपुर आकर हाईकोर्ट स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा। यदि आवश्यक पड़ी तो साइकल रैली भी निकालने की बात कही गई है। एडीजे का कहना है कि मैं अपने साथ हुए अन्याय का प्रतिकार जैसे भी बनेगा करूंगा। मैं अपनी ओर से उठाई गई फोर्थ क्लास भर्ती घोटाले सहित 9 बिन्दुओं पर जांच की मांग पर भी पूर्ववत कायम रहूंगा। जबलपुर से हाल ही में नीमच ट्रांसफर किए गए एडीजे श्रीवास ने महज 15 माह में चार तबादला आदेशों को लेकर आक्रोश प्रदर्शित करते हुए हाईकोर्ट के गेट नंबर-3 के सामने सड़क किनारे दरी बिछाकर तीन दिनी सत्याग्रह किया था। इससे पूर्व अपनी पीड़ा सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक की गई, जिसे मीडिया में स्थान मिला। एडीजे श्रीवास ने बताया कि उन्होंने मंगलवार 8 अगस्त को दोपहर 1 बजे नीमच कोर्ट पहुंचकर विधिवत ज्वाइनिंग दे दी। शाम तक बाकायदे न्यायिक कार्य किया। लेकिन शाम 6 बजे निलंबन आदेश थमा दिया गया। लिहाजा, बुधवार से वे कोर्ट में सुनवाई का न्यायिक कार्य नहीं कर सकेंगे। चूंकि उन्हें फ्री कर दिया गया है, अत: वे एक-दो दिन में अपनी रणनीति बनाकर जबलपुर आएंगे और यहीं से आंदोलन को नए सिरे से गति देंगे।

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Dakhal News 9 August 2017


ब्रॉडबैंड  स्पीड

बिलासपुर में इंटरनेट की स्पीड को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय को निर्देश जारी कर जल्द से जल्द देशभर में ब्राडबैंड की स्पीड बढ़ाने का फरमान जारी किया है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नेट की स्पीड बढ़ने से सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) भी बढ़ेगा। बिलासपुर निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग दिलीप भंडारी ने वकील पलाश तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि देश में इंटरनेट की स्पीड काफी कम है। जबकि अन्य छोटे-छोटे देशों में काफी अधिक है। याचिका के अनुसार इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा अधिक रेट लेने के बाद भी कम स्पीड दी जा रही है। याचिकाकर्ता ने यूएसए का हवाला देते हुए कहा कि इसी रेट पर वहां नेट की स्पीड कम से कम 25 एमबीपीएस मिलती है। भारत में यही स्पीड 512 केबीपीएस हो जाती है। याचिका के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल इंडिया को प्रोत्साहन देने लगातार युवा पीढ़ी से आह्वान किया जा रहा है। इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा इतनी कम स्पीड में नेट सेवा से काम चलने वाला नहीं है। याचिका के अनुसार वर्ष 2012 में नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी लागू करते हुए दूरसंचार विभाग ने 1 जनवरी 2015 को न्यूनतम दो एमबीपीएस स्पीड करने की घोषणा की थी। इंटरनेट प्रदाता कंपनियों के लिए ट्राई ने कड़ी शर्तें लागू करते हुए कहा था कि नियमों का उल्लंघन करने पर नेट प्रोवाइडर कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2008 में ट्राइ ने दूरसंचार मंत्रालय के अलावा अन्य कंपनियों को पत्र लिखा था। निर्देश पर अमल न करने के कारण दूरसंचार नियामक आयोग ने वर्ष 2016 में दोबारा पत्र लिखा। याचिकाकर्ता ने ट्राई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इंटरनेट व ब्राडबैंड की स्पीड बढ़ेगी तो देश में जीडीपी दर में भी इजाफा होगा। याचिका के अनुसार तकरीबन दो फीसदी सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोतरी होगी । याचिकाकर्ता ने कहा है कि इंटरनेट प्रदाता कंपनियों द्वारा स्पीड न बढ़ाए जाने के कारण देशभर में तकरीबन 200 मिलियन लोग प्रभावित हो रहे हैं। खासकर युवाओं को ज्यादा नुकसान हो रहा है। हाईस्पीड नेट सर्विस मिलने पर रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। याचिकाकर्ता ने बताया कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों द्वाा एक हजार रुपए में दो जीबी हाईस्पीड नेट सुविधा देने के बाद शेर यूजर्स पॉलिसी लागू कर देती है व नेट की स्पीड को कम कर देती है। डिवीजन बेंच के समक्ष जवाब देते हुए केंद्रीय दूरसंचार विभाग के अफसरों ने कहा कि स्पीड बढ़ाना एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए कम से कम वर्ष 2025 तक का समय चाहिए। विभागीय अफसरों की जवाब सुनकर चीफ जस्टिस हंसने लगे। उन्होंने दो टूक कहा कि हर हाल में जल्द से जल्द इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने की व्यवस्था करें। दूरसंचार मंत्रालय को निर्देश जारी करने के साथ ही चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन व जस्टिस शरद गुप्ता की डिवीजन बेंच ने याचिका को निराकृत कर दिया है।  

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Dakhal News 5 August 2017


आईजी एसआरपी कल्लूरी

  खबर रायपुर से । रक्षाबंधन पर यूं तो कई उदाहरण है, लेकिन इस पवित्र त्योहार से पहले ही एक बहन अपने भाई को किडनी का अनमोल तोहफा देकर इस रिश्ते की गरिमा को और बढ़ाने की पहल कर रही है। कमेटी ने अनुमति दी तो 14 अगस्त को किडनी ट्रांसप्लांट होगा। आईजी एसआरपी कल्लूरी की दोनों किडनी खराब हो गई है। उन्हें जल्द से जल्द किडनी की जरूरत थी। ऐसे में जब उनकी बड़ी बहन डॉक्टर अनुराधा को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत अपनी एक किडनी भाई को देने का फैसला कर लिया। बहन अनुराधा ने कहा कि वह ऐसा करके ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे में भाई को किडनी की जरूरत पड़ने पर किसी और से इसके लिए कहने की बजाय मैंने अपनी किडनी देने का फैसला किया। डॉक्टरों की माने तो शनिवार को नईदिल्ली के मेदांता अस्पताल में उसके ब्लड आदि की जांच होगी। 9 अगस्त को इस बाबत कमेटी बैठेगी, जो किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में निर्णय लेगी। यदि सबकुछ सही रहा तो 13 अगस्त को किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू होगी। 14 अगस्त को ऑपरेशन होगा। इसके बाद कल्लूरी करीब 3 महीने तक डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे। ज्ञात हो कि बस्तर आईजी रहते हुए कल्लूरी पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगे थे। पिछले साल दिसंबर में उन्हें सीने में दर्द की शिकायत पर बस्तर से विशाखापटनम ले जाया गया था। वहां अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके हार्ट की सर्जरी की थी। तब बताया गया था कि उनके किडनी का भी उपचार किया गया है। हालांकि कहा जा रहा था कि वे अपोलो से पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटे हैं। हाल ही में दोबारा समस्या शुरू होने पर कल्लूरी नईदिल्ली चले गए। वहां चेकअप कराने पर किडनी की समस्या सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया है। ट्रांसप्लांट करने वाले मेदांता अस्पताल के डाक्टरों के अनुसार अलग ब्लड ग्रुप के लिए ट्रांसप्लांट प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इस केस में यदि ब्लड ग्रुप एक ही रहा तो आसानी से ट्रांसप्लांट प्रक्रिया पूरी होगी। यदि ब्लड ग्रुप अलग-अलग हुआ तो ऐसे में इसे संभव करने के लिए हमें फेरेसिस प्लाज़्मा की सहायता लेनी पड़ेगी। इसके तहत प्राप्तकर्ता के ऐंटि बॉडी लेवल को कम करके इसे सफल बनाया जाएगा।  

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Dakhal News 5 August 2017


सुरभी बिल्डर

  आयकर विभाग की टीम ने शुक्रवार अल सुबह भोपाल में रियल एस्टेट कारोबारियों के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की है। इनमें सुरभी बिल्डर सहित 10 स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। इसमें रातीबड़, अवधपुर, त्रिलंगा, एमपी नगर सहित ग्वालियर में भी कार्रवाई की गई है। रिटायर इंजीनियर प्रदीप सरैया और बिल्डर विकास शिंदे के यहां कार्रवाई जारी है। इसमें सुरभी ग्रुप के मालिक विकास रामतानी, संतोष रामतानी के घर और प्रतिष्ठानों पर भी इस कार्रवाई में शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक अवधपुर में तीन जगह सुरभी बिल्डर के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। आयकर द्वारा की गई इस कार्रवाई में कर चोरी का खुलासा हो सकता है।

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Dakhal News 4 August 2017


 रूस्तम सिंह

  एमपी के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रूस्तम सिंह ने लोगों से अपील की है कि यदि निजी अस्पताल की जाँच में डेंगू पाया जाता है तो उसकी पुष्टि शासकीय चिकित्सालय में अलाइजा टेस्ट से अवश्य करवायें। श्री सिंह ने कहा ठंड लगकर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर पर चकत्ते और उल्टी आये तो चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। सलाह अनुसार शासकीय अस्पताल में रक्त की जाँच करवायें। पानी जमा न रहने दें श्री सिंह ने कहा कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है और दिन में काटता है। अत: अपने घर में कूलर, टायर, पुराने मटके आदि में लम्बे समय तक पानी जमा न रहने दें। दिन में पूरी आस्तीन के कपड़े पहने। श्री सिंह ने कहा कि कूलर में एक चम्मच सरसों का तेल डाल दें इससे पानी के ऊपर तेल की परत जमने से लार्वा नहीं उत्पन्न होता है। अधिक तरल पदार्थ पियें बुखार आने पर अधिक से अधिक तरल पदार्थ जैसे पानी, दूध, मट्ठा, जूस आदि का अधिक से अधिक सेवन करे। बुखार के दौरान पूरे शरीर पर पानी की पट्टियाँ रखें। शरीर पर चकत्ते होने पर मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती करवाकर इलाज करवायें। खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने पर भी न घबरायें। पैरासिटामोल को छोड़कर कोई भी अन्य दर्द निवारक दवा का सेवन न करें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज भी प्रदेश में स्वाईन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य, आयुष, गैस राहत त्रासदी और नगरीय प्रशासन विभाग की समन्वित टीमें लार्वा विनिष्टीकरण करने के साथ ही इन बीमारियों पर नजर रख रही हैं। 3 अगस्त को डेंगू के 9, चिकनगुनिया और स्वाईन फ्लू के एक-एक संदिग्ध मरीज का टेस्ट किया गया जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। प्रदेश में जनवरी से अब तक डेंगू के कुल 22 मामले सामने आये हैं जिनमें भोपाल जिले के 10, जबलपुर के 9, पन्ना, डिण्डोरी और दमोह का एक-एक मामला शामिल है। डेंगू से वर्ष 2017 में कोई मृत्यु नहीं हुई है।

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Dakhal News 4 August 2017


GST परिषद अधीक्षक गिरफ्तार

नई दिल्ली में  नवगठित जीएसटी परिषद के एक अधीक्षक को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। वह कथित रूप से अपने एक करीबी के जरिये घूस लेता था। सीबीआइ द्वारा जीएसटी परिषद के किसी अधिकारी की गिरफ्तारी का यह पहला मामला हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि अधीक्षक मोनीश मल्होत्रा और कथित मध्यस्थ मानस पात्रा को सीबीआइ ने बुधवार शाम गिरफ्तार किया। दरअसल, एजेंसी को सूचना मिली थी कि पात्रा पिछले कुछ दिनों में इकट्ठा हुई रिश्वत की रकम को उसका विवरण लिखे कागज के साथ मल्होत्रा को उसके घर पर सौंपने वाला है। इस पर सीबीआइ टीम ने उसके परिसरों की तलाशी ली और मल्होत्रा व पात्रा को रिश्वत की रकम और कुछ दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार कर लिया। बताते हैं कि मोनीश मल्होत्रा इससे पहले केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में तैनात था। प्राइवेट पार्टियों से वह निश्चित अंतराल पर रिश्वत लेकर बदले में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता था। सीबीआइ को यह भी जानकारी मिली कि मल्होत्रा की ओर से पात्रा प्राइवेट पार्टियों से संपर्क करता था और त्रैमासिक या मासिक आधार पर उनसे रिश्वत वसूल करता था। सीबीआइ द्वारा दर्ज एफआइआर के मुताबिक, घूस को छिपाने के लिए पात्रा पहले इस रकम को अपने एकाउंट में जमा कर लेता था। बाद में उस रकम को मल्होत्रा की पत्नी शोभना के एचडीएफसी बैंक एकाउंट और उसकी बेटी आयुषी के आइसीआइसीआइ बैंक एकाउंट में ट्रांसफर कर देता था।  

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Dakhal News 3 August 2017


जज आरके श्रीवास

  जबलपुर हाईकोर्ट के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी और अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास मंगलवार सुबह मप्र हाईकोर्ट की इमारत के गेट नंबर तीन के सामने धरने पर बैठ गए। पहले वे परिसर के अंदर सत्याग्रह पर बैठना चाहते थे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। मप्र हाईकोर्ट के 61 साल के इतिहास में यह पहला मामला जब किसी एडीजे ने सत्याग्रह किया है। जज श्रीवास ने 15 महीने में 4 बार तबादल किए जाने के विरोध में सत्याग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश और रजिस्ट्रार जनरल को अपने साथ हुए अन्याय से अवगत कराने के बावजूद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अब तक कोई भी सकारात्मक रिस्पांस सामने नहीं आया। उनका कहना है कि हर 3 महीने में ट्रांसफर से परिवार परेशान हो गया है। इस बार जैसे-तैसे जबलपुर के क्राइस्ट चर्च स्कूल में बच्चे का एडमिशन करवाया था। एक को पढ़ाई के लिए नीमच में छोड़ना पड़ा, क्योंकि वहां से भी तबादला कर दिया गया था। एडीजे के पक्ष में बार के वकील भी साथ आने लगे हैं। कड़ी धूप में बैठकर धरना दे रहे जज के लिए वकीलों ने छाते मंगवाए। जज का कहना है कि न्याय नहीं मिला तो वे धरने के बाद अनशन करेंगे। महज 15 माह में चौथा तबादला हाईकोर्ट की ट्रांसफर पॉलिसी के सर्वथा विपरीत है। इससे यह साफ होता है कि एकरूपता को पूरी तरह दरकिनार करके मनमाने तरीके से भाई-भतीजावाद के आधार पर तबादले किए जा रहे हैं। इसलिए बजाए झुकने के संघर्ष का रास्ता चुना गया। मुझे अब तक नीमच में ज्वाइन कर लेना था, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। इसके स्थान पर नौकरी को दांव पर लगाकर सत्याग्रह की राह पकड़ ली है। यदि मुझे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए तो जेल जाने तक तैयार हूं। लेकिन अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करूंगा।  

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Dakhal News 1 August 2017


 अरविंद पनगढ़िया

देश के सबसे बड़े सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने इस्तीफा दे दिया है। पनगढ़िया ने अपने इस फैसले से पीएमओ को भी अवगत करा दिया है। हालांकि पीएम मोदी फिलहाल असम के बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे पर हैं, इसलिए पनगढ़िया के इस्तीफे पर आखिरी फैसला नहीं हुआ है। 31 अगस्त पनगढ़िया का आखिरी कार्यकारी दिन होगा, इसके बाद वे एकेडमिक्स का रुख करेंगे। आपको बता दें देश की नीति और विकास प्रक्रिया को नई दिशा देने के लिए मोदी सरकार ने योजना आयोग को खत्म करके नीति आयोग की शुरुआत की थी। अरविंद पनगढ़िया नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष बने थे। पनगढ़िया भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं और कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। अरविंद पनगढ़िया कई पुस्तक भी लिख चुके हैं। उनकी पुस्तक इंडिया द इमरजिंग जाइंट 2008 में इकनॉमिस्ट की ओर से सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक में शामिल हो चुकी है। मार्च 2012 में उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पदम विभूषण से नवाजा जा चुका है। अपनी बात तार्किक अंदाज में कहने वाले अर्थशास्त्री के रूप में पहचान बनाने वाले पनगढ़िया की सलाह पर ही सरकार ने एयर इंडिया को बेचने का निर्णय किया था। इससे पहले तमाम अर्थशास्त्री एयर इंडिया को लेकर इस तरह की इच्छा तो रखते थे लेकिन सरकार के सामने कहने की पहल किसी ने नहीं की। सूत्रों के अनुसार, पनगढ़िया वापस कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू कर सकते हैं। बताया जाता है कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी में कोई भी व्यक्ति रिटायर नहीं होता है। वह जीवनभर अपनी स्वास्थ्य क्षमता के अनुसार अध्यापन कार्य कर सकता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अरविंद पनगढ़िया को दो बार पहले भी वापस लौटने के लिए नोटिस भेजा गया था।  

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Dakhal News 1 August 2017


शिवराज चित्रकूट

  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को सतना से चित्रकूट पहुंचे वहां उन्होंने क्षेत्र की जनता को कई सौगात दी। चित्रकूट में 2887.61 लाख रूपये की मन्दाकिनी नदी संरक्षण योजना के अंतर्गत चित्रकूट सीवरेज परियोजना के द्वितीय चरण का भूमिपूजन किया। शिवराज सिंह ने चित्रकूट में नाराज चल रहे संतो से योजना का भूमिपूजन कराकर उनकी नाराजगी भी दूर कर दी। इस दौरान सीएम शिवराज ने चित्रकूट में नगर निगम कर नहीं लगाने की घोषणा की। इसके साथ 180 करोड़ के काम किए जाने का भी वादा किया। शिवराज ने कहा कि वो मैहर की तर्ज पर चित्रकूट का विकास करना चाहते हैं और चित्रकूट को भी मिनी स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे और राजेंद्र शुक्ला भी मौजूद रहे। चित्रकूट से सीएम बरौंधा के लिए रवाना हुए। जहां मध्यप्रदेश गीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।  

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Dakhal News 31 July 2017


बृजमोहन अग्रवाल

  छत्तीसगढ़ के सिरपुर में कथित सरकारी जमीन पर रिसोर्ट बनाने के मामले में फंसे प्रदेश के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के परिजनों के खिलाफ सरकार सिविल कोर्ट में परिवाद दायर करेगी। महासमुंद जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों को यह निर्देश दिया है। महासमुंद कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता का कहना है कि कलेक्टर को सीधे रजिस्ट्री पर किसी तरह का फैसला करने का अधिकार नहीं है। रजिस्ट्री को बहाल रखने या रद्द करने का आदेश सिविल न्यायालय ही दे सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में मंत्री या उनके परिजनों को नोटिस देने का सवाल ही नहीं है। हम विभागीय स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। कमिश्नर के आदेश पर जल संसाधन, वन और राजस्व विभाग के अफसरों की कमेटी ने इस मामले की जांच कर 2 महीने पहले रिपोर्ट दे दी थी। मामले के दोबारा प्रकाश में आने के बाद फिर से जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। अब संबंधित विभागों को प्रकरण का निराकरण करने कहा है। इसके लिए जल्द ही सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा। कोर्ट के निर्णय के आधार पर संबंधित भूमि का निराकरण हो पाएगा। बृजमोहन पहुंचे दिल्ली उधर जल संसाधन से संबंधित बैठक में शामिल होने बृजमोहन दिल्ली चले गए हैं। माना जा रहा है कि वे इस प्रकरण में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।  

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Dakhal News 29 July 2017


नरोत्तम मिश्रा

  नई दिल्ली से खबर है कि  सुप्रीम कोर्ट ने नरोत्तम मिश्रा को बड़ी राहत देते हुए चुनाव आयोग द्वारा उनके खिलाफ दिए गए फैसले पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले का दो सप्ताह में निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार सुबह हुई सुनवाई में नरोत्तम मिश्रा की ओर से वकील ने कहा था कि चुनाव आयोग ने एक कमेटी बनाकर अचानक यह फैसला दिया है। इसके बाद से नरोत्तम मिश्रा अपना मंत्री पद नहीं संभाल पा रहे हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पेड न्यूज के एक मामले में नरोत्तम मिश्रा द्वारा जीते गए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। इसके साथ ही मिश्रा के तीन साल तक चुनाव लड़ने पर बैन लगाया गया था      

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Dakhal News 28 July 2017


कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के जमीन मामले पर फैसला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह करेंगे। यह संकेत दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दिया है। उन्होंने कहा कि पूरा प्रकरण केन्द्रीय नेतृत्व के संज्ञान में है। उनसे बातचीत और चर्चा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। सीएम ने कहा- 'मंत्री कल अपना स्पष्टीकरण दे चुके हैं, उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि कोई भी जांच होती है तो मैं सामना करने को तैयार हूं।" दो दिन के दिल्ली प्रवास के बाद राजधानी लौटे मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने बताया कि इस मामले पर उनकी पूरी नजर है। इसको लेकर मीडिया में आई खबरों और विपक्ष के बयानों को मैंने देखा और सुना है। उन्होंने बताया कि इस बीच मैंने पूरे मामले में मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। मीडिया से चर्चा में रमन सिंह ने जानकारी दी कि सीएस ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। सीएस की जांच रिपोर्ट के संबंध में पूछे जाने पर सीएम ने कहा कि यह सरकारी रिपोर्ट है, आप लोगों (मीडिया) के सामने तब आएगी जब उसे मैं प्रस्तुत करूंगा। जमीन बेचने वाले किसान के आरोपों के संबंध में पूछे जाने पर सीएम ने कहा कि इस विषय में बहुत सारी बातें आ चुकी हैं, रिपोर्ट भी हमें मिल गई है, इसलिए इस पर ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा। गौरतलब है कि बृजमोहन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम महासमुंद जिले के सिरपुर में कथित वनभूमि की खरीदी की है, जिस पर रिसॉर्ट का निर्माण चल रहा है। जबकि बृजमोहन का दावा है कि खरीदी नियम से की गई है और जब खरीदी तब वह एक किसान के नाम पर दर्ज थी। अब वन विभाग यह पता कर रहा है कि किसकी गलती से इतने सालों तक वन विभाग की भूमि राजस्व दस्तावेजों में वन विभाग के नाम नहीं चढ़ाई गई। वन मंत्री महेश गागड़ा ने 'नईदुनिया" से कहा- जांच के आदेश पीसीसीएफ को दिए गए हैं। हम यह भी पता लगा रहे हैं कि क्यों जमीन का नामांतरण नहीं किया जा सका। जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। ज्ञात हो कि जिस भूमि पर विवाद है वह भूमि वन विभाग को जल संसाधन विभाग से मिली थी। वन विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि 2003 में उक्त भूमि पर प्लांटेशन किया गया, जिसमें 23 लाख रुपए खर्च किए गए। 2015 में जब वन भूमि पर रिसोर्ट की शिकायत हुई तो कलेक्टर ने जांच कराई। वन विभाग से पूछा गया कि नामांतरण क्यों नहीं हुआ? वन विभाग ने जवाब दिया कि उन्हें जमीन जल संसाधन विभाग से मिली है। नामांतरण कराने की जवाबदारी जल संसाधन विभाग की है। इस संबंध में वन विभाग ने जल संसाधन विभाग को पत्र लिखा तो जवाब मिला कि वह जमीन बिक चुकी है, इसलिए हम आपको लौटा नहीं सकते।  

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Dakhal News 28 July 2017


bhopal metro

एमपी विधानसभा में मंत्री माया सिंह के मेट्रो को लेकर दिए गए बयान के कई मायने निकाले गए। क्योंकि सब जानते हैं कि अगले साल मेट्रो नहीं चल सकती। जब पड़ताल हुई तो पता चला कि दो वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जवाब बनवाया था। दरसअल, सरकार की इच्छा है कि इलेक्शन 2018 से पहले भोपाल और इंदौर में मेट्रो का भूमि पूजन कर दिया जाए और इसे बीजेपी गवनर्मेंट की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाए। मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से लोन पर सहमति मिलने के बाद अब भोपाल मेट्रो के लिए भी उम्मीद जगी है। मेट्रों के लिए भोपाल में पहले फेज में दो रूटों को शामिल किया गया है। एक करोंद से एम्स और दूसरा जवाहर चौक से रत्नागिरी तिराहा तक। इन दो रूटों के लिए राजधानी में मेट्रो लाइन बिछाया जाना प्रस्तावित है। इसमें 6962.92 करोड़ खर्च हो रहे है। इसके लिए 3885 करोड़ के कर्ज के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। 2018 तक भोपाल में मेट्रो का काम शुरू हो जाएगा।  भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने भारी भरकम बजट की जरुरत होती है। ल्ल माया सिंह, विधानसभा में नगरीय विकास मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गैर ने कहा जब छोटे-छोटे शहरों में मेट्रो ट्रेन शुरू हो चुकी है तो फिर हमारे बड़े शहरों में क्यों मेट्रो नहीं आ पाई। मेट्रो को लेकर सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही उलझी है। सरकार गंभीर होती तो मेट्रो का काम 2013 में शुरू हो सकता था। मेट्रो के लिए जायका के लोन देने से इंकार के बाद यूआईबी से ऋण के लिए प्रस्ताव भेजा था। लोन पर फैसला गत मई में होना था, लेकिन जवाब नहीं आया। अब जुलाई महीने तक इस मामले में जवाब मिलने की उम्मीद है। ज्ञात हो कि बैंक की टीम ने अप्रैल में मेट्रो रूट का निरीक्षण करके वापस जा चुकी है। माना जा रहा है कि यूआईबी भोपाल के मेट्रो में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। जिससे जवाब मिलने में देरी हो रही है।

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Dakhal News 27 July 2017


व्यापमं घोटाले के आरोपी ने की खुदकुशी

मुरैना के महाराजपुर गांव में व्यापमं घोटाले के एक आरोपी प्रवीण यादव ने बुधवार सुबह अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। 2008 में उसका चिकित्सा शिक्षा के लिए चयन हुआ था और 2012 में उसे व्यापमं मामले में आरोपी बनाया गया था। परिजनों का कहना है कि आरोपी बनाए जाने के बाद से वह परेशान रहता था। एसआईटी द्वारा आरोपी बनाए जाने के बाद से वो जबलपुर हाईकोर्ट में पेशी पर जाता था। बार-बार बयान लेने के लिए बुलाए जाने पर वह तंग आ चुका था। उसके पास कोई रोजगार और धंधा भी नहीं था। परिजनों का कहना है कि प्रवीण शुरू से ही पढ़ने में तेज था, खुद की पढ़ाई के दम पर ही उसका व्यापमं में सिलेक्शन हुआ था, लेकिन बाद में उसे झूठा फंसाया गया। व्यापमं घोटाले से जुड़े एक और छात्र द्वारा खुदकुशी करने के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा‍ कि व्यापमं का भूत बार-बार बाहर आ जाता है। निर्दोष आत्महत्या कर रहे हैं और गुनाहगार बाहर घूम रहे हैं।  

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Dakhal News 26 July 2017


barish

  मध्यप्रदेश में इस वर्ष मानसून में एक जून से 25 जुलाई तक 10 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश के 34 जिले ऐसे हैं जहाँ सामान्य वर्षा दर्ज हुई है। कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 7 है। अभी तक सामान्य औसत वर्षा 378.6 मिमी दर्ज की गई है जबकि प्रदेश की सामान्य औसत वर्षा 366.0 मिमी है। सामान्य से अधिक वर्षा कटनी, रीवा, सतना, झाबुआ, खण्ड़वा, नीमच, रतलाम, दतिया, राजगढ़ और जबलपुर में दर्ज की गई है। सामान्य वर्षा वाले जिले छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, डिंडोरी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ छतरपुर, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, इंदौर, धार, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, उज्जैन, मंदसौर, देवास, शाजापुर, मुरैना, भिण्ड, गुना, अशोकनगर, भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, होशंगाबाद, हरदा और बैतूल हैं। कम वर्षा वाले जिले बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, आगर-मालवा, श्योपुर, ग्वालियर और शिवपुरी हैं।  

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Dakhal News 26 July 2017


मोदी ने सांसदों को जमकर फटकारा

  दिल्ली में  मंगलवार को भाजपा की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने अपने सांसदों को जमकर फटकार लगाई। पीएम ने राज्यसभा सांसदों को कहा कि सदन में सांसदों की अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने मीटिंग में कहा कि राज्यसभा के सांसद सदन में रहा करे कई बार कोरम पूरा नहीं होने के कारण लंच के बाद सदन को शुरू करने में देरी होती है। शुक्रवार को सांसद लंच के बाद सदन में आते नहीं है ये ठीक नहीं हैं। सदन में सांसदो की उपस्थिति कम होने के कारण बिल नहीं पास हो पाते हैं। बिल पास करना सत्ता पक्ष का काम है। सदन अनुपस्थिति को मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चाहतें है कि इसका जश्न 9 अगस्त से मनाना शुरू कर दिया जाए। अनंत कुमार ने बताया कि बैठक में पीएम ने कहा कि साल 1947 में आजादी मिलने के बाद देश नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है लेकिन साल 2022 तक भारत विश्व की महाशक्तियों के साथ खड़ा होगा। लोकसभा में हंगामा करने और लोकसभा स्पीकर के ऊपर कागज उछालने को लेकर कांग्रेस के 6 सांसदों को पांच दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया जिसको लेकर कांग्रेस ने संसद भवन के बाहर गांधी जी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया।  

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Dakhal News 25 July 2017


बीजेपी विधानसभा में  हंगामा

  विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सदन में भाजपा ने दलित के अपमान पर लेकर हंगामा किया। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बातों के लिए माफी मांगने की मांग की। विधायक रामेश्वर शर्मा ने मांग रखी कि दलितों के अपमान के मामले में सिंधिया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाए। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोक हुई। सदन की प्रश्नोत्तरी में नरोत्तम मिश्रा का नाम आने पर भी हंगामा हुआ। विधायक सुंदरलाल तिवारी ने कहा कि पहले यह तक हो जाना चाहिए कि नरोत्तम मिश्रा विधायक हैं, या नहीं। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि उनका मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सिंधिया ने नंदकुमार को भेजा मानहानी का नोटिस कांग्रेस नेता और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान को मानहानी का कानूनी नोटिस भेजा है। नंदकुमार ने अशोकनगर ट्रामा सेंटर के उद्धाटन को लेकर उन पर दलित के अपमान का आरोप लगाया था।  

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Dakhal News 24 July 2017


निठारी के नर पिशाच

 खबर गाजियाबाद से । निठारी कांड के एक और मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिदर सिह पंधेर को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने युवती का अपहरण करने के बाद दुष्कर्म व हत्या के मामले में दस साल चली सुनवाई के बाद सजा का ऐलान किया है। इससे पहले कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए सजा के 24 जुलाई का दिन तय किया था। सुरेंद्र कोली को निठारी कांड के आठवें मामले में दोषी करार दिया गया है, जबकि कोठी के मालिक मोनिदर सिह पंधेर पर दूसरे मामले में दोष सिद्ध हुआ है। एक मामले में 2009 में पंधेर व कोली को फांसी की सजा हुई थी, जिसमें पंधेर को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था। प्रदेश सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है। खुली अदालत में फैसला सुनाने के दौरान एक तरफ जहां सुरेंद्र कोली कटघरे में खड़ा होकर ध्यान से आदेश सुनता रहा, वहीं दूसरी तरफ दोषी करार दिए जाते ही मोनिदर सिह पंधेर फफक पड़ा। कोली ने अदालत से बाहर निकलते ही निर्णय को एकतरफा बताया। कहा कि उसे सुना नहीं गया। फैसले के दौरान पीड़ित या आरोपी किसी भी ओर से कोई करीबी मौजूद नहीं रहा। सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि नोएडा के निठारी गांव में रह रही पश्चिम बंगाल के बहरामपुर निवासी 20 वर्षीय युवती सेक्टर 37 में एक कोठी में घरेलू सहायिका थी। वह रोजाना निठारी के डी-5 कोठी के सामने से गुजरती थी। पांच अक्टूबर 2006 को वह कोठी में काम करने गई थी। काम खत्म करने के बाद उसने दोपहर 1ः30 बजे वहीं सीरियल कुमकुम देखा और फिर घर के लिए रवाना हुई, लेकिन घर नहीं पहुंची। पिता ने नोएडा के थाना सेक्टर-20 में गुमशुदगी की तहरीर दी थी। पुलिस ने 30 दिसंबर 2006 को नोएडा के सेक्टर 20 थाने में हत्या का मामला दर्ज किया। दस जनवरी 2007 को केस सीबीआइ को ट्रांसफर किया गया। इस मामले में सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को पंधेर व कोली के खिलाफ युवती के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद 11 अप्रैल 2007 को चार्जशीट पेश की। सवा दस साल के मुकदमे की कार्रवाई में विशेष लोक अभियोजक ने 46 गवाहों को पेश कर बयान दर्ज कराए। वहीं, बचाव पक्ष की तरफ से तीन गवाह पेश किए गए। खास बात यह है कि सुनवाई के दौरान सुरेंद्र कोली ने 56 दिन स्वयं बहस की। उसने अपनी पैरवी करने वाले कई अधिवक्ताओं को हटा दिया था। हवस शांत करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने वाला मोनिदर सिह पंधेर दूसरी बार अपनी करनी पर कोर्ट में रोता रहा, लेकिन जब पुलिस जेल ले जाने लगी तो शांत हो गया। वहीं सुरेंद्र कोली पहले की तरह ही मीडिया से बात करते हुए कोर्ट पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाता रहा। पंजाब के व्यवसायी मोनिदर सिह पंधेर ने एय्याशी के लिए नोएडा के निठारी में डी-5 कोठी में ठिकाना बना रखा था। आरोप है कि इस कोठी में 16 लोगों की हत्या की गई। इनमें आठ खून साबित हो चुके हैं। अदालत ने माना कि हत्याएं इसलिए की गई थीं कि कहीं दुष्कर्म के बाद पीड़िताएं मामले की जानकारी परिजनों को न दे दें। निठारी का नर पिशाच सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्‍मोड़ा के एक गांव का रहने वाला है।सन् 2000 में वह दिल्‍ली आया था।दिल्ली में कोली एक ब्रिगेडियर के घर पर खाना बनाने का काम करता था। बताते हैं कि वह काफी स्‍वादिष्‍ट खाना बनाता है। 2003 में मोनिंदर सिंह पंढेर के संपर्क में सुरेंद्र कोली आया। उसके कहने पर नोएडा सेक्टर-31 के डी-5 कोठी में काम करने लगा। 2004 में पंढेर का परिवार पंजाब चला गया। इसके बाद वह और कोली साथ में कोठी में रहने लगे थे। पंढेर की कोठी में अक्सर कॉलगर्ल आया करती थीं. इस दौरान वह कोठी के गेट पर नजर रखता था।इस दौरान कोली धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया। बच्चों के प्रति आकर्षित होने लगा।आरोप है कि वह कोठी से गुजरने वाले बच्चों को पकड़ कर उनके साथ कुकर्म करता और फिर उनकी हत्या कर देता।

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Dakhal News 24 July 2017


दूषित पानी दुर्ग

छत्तीसगढ़ के 13 शहरों में से सबसे ज्यादा दूषित पानी दुर्ग निगम क्षेत्र का है। यहां 17 स्थानों पर पेयजल स्रोतों में बैक्टिरिया का प्रतिशत औसतन 31 प्रतिशत है। भिलाई निगम में भी 17 स्थानों का एवं भिलाई चरोदा निगम क्षेत्र में तीन जल स्रोतों का पानी दूषित मिला। इसका खुलासा राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र द्वारा मितानिनों के माध्यम से चार माह पहले कराई गई जांच की रिपोर्ट में हुआ है। प्रदेश में कुल 890 पेयजल स्रोतोें की जांच एचटूएस किट से की गई। इसमें 159 सैम्पल दूषित मिले। इन स्रोतों के दूषित पानी का ट्रीटमेंट एवं दुष्प्रभाव को रोकने के लिए ठोस पहल करने निकायों को संचालनालय नगरीय प्रशासन विभाग ने चिठ्ठी भेजी है। जानकारी के अुनसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा मार्च 2017 में प्रदेश के 13 प्रमुख शहरों में जल स्रोत से आने वाले पानी की जांच संबंधित क्षेत्र के मितानीन के माध्यम से कराई थी। मितानीन ने यह जांच एचटूएस पेपर स्ट्रीप से की थी। इस जांच की पूरी रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग ने एकत्र कराया। इस जांच में दुर्ग जिले के तीन प्रमुख शहर दुर्ग निगम क्षेत्र के सभी 60 वार्ड, भिलाई निगम क्षेत्र के सभी 70 वार्ड एवं भिलाई चरोदा निगम क्षेत्र के सभी 40 वार्ड को भी शामिल किया गया। इन तीनों ही निकाय क्षेत्रों से कुल 178 जल स्रोतों का सैम्पल लिया गया था। इसमें से कुल 37 सैंपल दूषित पानी के निकले हैं। इन स्रोतों का पानी फिलहाल आम लोग प्रतिदिन उपयोग कर रहे हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को भ्ोजी चिठ्ठी में रिपोर्ट का हवाला देते हुए दूषित जल स्रोतों जैसे बोर व हैंडपंप में ब्लीचिंग पावडर का घोल या लीक्विड सोडियम हाईपोक्लोराईट डालकर बैक्टिरिया रहित करने कहा है। बारिश के मौसम को देखते हुए हिदायत दी है कि नमूना लेकर इसे प्रयोगशाला भी भेजें। निगम के सभी ओवरहेड टैंक में भी ब्लीचिंग पावडर डालने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निगमों को उनके यहां के दूषित जल स्रोत की फिर से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वतर्मान स्थिति स्पष्ट हो। नल से पेयजल सप्लाई वाली स्थिति में अंतिम छोर के नल के पानी का सैंपल लेने कहा है। इसके अलावा 15 दिनों के भीतर इस संबंध में उठाए गए कदम की जानकारी भी नगरीय प्रशासन विभाग ने मांगी है। यही नहीं जांच की संबंधित रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अध्ािकारी, सिविल सर्जन को भी देने के निर्देश दिए गए हैं |  रिपोर्ट के मुताबिक दुर्ग एवं चरोदा में निगम के वाटर सप्लाई का ही पानी सबसे अध्ािक दूषित मिला है। दुर्ग में 13 स्थानों पर लगे निगम के नल का पानी दूषित है। दो बोर एवं 1 हैंडपंप का पानी दूषित है। चरोदा में दो स्थानों पर सार्वजनिक नल एवं एक स्थान पर हैंडपंप का पानी दूषित है। इसके अलावा भिलाई में पांच स्थानों पर नल, आठ स्थानों पर बोर एवं चार स्थानों पर हैंडपंप का पानी दूषित बताया गया। प्रदेशभर में जितने शहरों के पानी की जांच की गई है, उसमें सबसे अधिक दूषित पानी दुर्ग में मिला है। यहां 17 स्थानों पर पानी दूषित है। इसमें बैक्टिरिया का प्रतिशत सबसे अधिक 31 प्रतिशत है। वहीं इसके बाद 27 प्रतिशत बैक्टिरिया रायपुर एवं अम्बिकापुर के दूषित पानी में मिला है। भिलाई निगम क्षेत्र में बैक्टिरिया का प्रतिशत 17 एवं चरोदा में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत है। जिन शहरों में पानी की जांच की गई, उसमें रायपुर, दुर्ग, भिलाई, भिलाई चरोदा, अम्बिकापुर, बिलासपुर, बीरगांव, चिरमिरी, धमतरी,जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव, रायगढ़ शामिल है।

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Dakhal News 23 July 2017


बिलासपुर सिम्स

    बिलासपुर सिम्स में 2013-14 की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत को पीएमओ ने गंभीरता से लेकर मुख्य सचिव से 15 दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी है। साल 2013-14 में सिम्स में कर्मचारियों की नियमित भर्ती की गई थी। 14-15 सालों से कार्यरत 56 संविदा व ठेका कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया। इन कर्मियों ने कलेक्टर से शिकायत की, तो जांच के लिए तत्कालिक अपर कलेक्टर नीलकंठ टेकाम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनी। तीन साल बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई, तो पीड़ित कर्मी किशनलाल निर्मलकर ने सीएम समेत विभागीय अफसरों को ज्ञापन सौंप। यहां भी निराशा हाथ लगी।  

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Dakhal News 22 July 2017


मूंग, उड़द, अरहर और मसूर

मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर 2 लाख 97 हजार 132 मीट्रिक टन मूंग, उड़द, अरहर और मसूर की खरीदी की गई है। कुल 1528 करोड़ 65 लाख मूल्य की इन दलहनी फसलों की खरीदी के विरूद्ध 620 करोड़ 58 लाख रूपये का भुगतान भी उत्पादकों को किया जा चुका है। इस मात्रा में से 918 करोड़ रूपये मूल्य की 1 लाख 72 हजार 21 मीट्रिक टन मूंग की खरीदी की गई है। खरीदी के विरूद्ध उत्पादकों को 349 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। कुल 89 करोड़ रूपये मूल्य की 17 हजार 521 मीट्रिक टन उड़द की खरीदी के विरूद्ध उत्पादकों को 20 करोड़ 15 लाख रूपये का भुगतान अब तक किया जा चुका है। कुल 443 करोड़ 44 लाख रूपये मूल्य की 87 हजार 810 मीट्रिक टन अरहर की खरीदी के विरूद्ध अब तक 191 करोड़ का भुगतान उत्पादकों को किया गया है। इसी तरह 78 करोड़ 21 लाख रूपये मूल्य की 19 हजार 780 मीट्रिक टन मसूर की खरीदी के विरूद्ध उत्पादकों को 60 करोड़ 43 लाख रूपये का भुगतान किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में मूंग की रूपये 5,225, उड़द की रूपये 5000, अरहर की रूपये 5050 और मसूर की रूपये 3950 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीदी की गई है। खरीफ फसलों की बोवाई प्रदेश में आज तक की स्थिति में खरीफ फसलों की बोवाई संतोषजनक है और फसल बोवाई का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा। आज की स्थिति में 93 लाख 86 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष आज की स्थिति में यह क्षेत्रफल 96 लाख 28 हजार हेक्टेयर था। प्रदेश में खरीफ की बोवनी के लिये 130 लाख 48 हजार हेक्टेयर का अनुमानित लक्ष्य निर्धारित है। आज की स्थिति में सोयाबीन की बोवाई पिछले वर्ष के 49 लाख 70 हजार हेक्टेयर की तुलना में 40 लाख 12 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। उड़द की बोवाई पिछले वर्ष के 7 लाख 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में 13 लाख 67 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में की जा चुकी है। इस वर्ष धान पिछले वर्ष के 9 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में 9 लाख 58 हजार हेक्टेयर में क्षेत्र में बोई जा चुकी है। मक्का की बोवाई पिछले वर्ष के 11 लाख 92 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की तुलना में 11 लाख 61 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है। इसके अलावा कपास की बोवाई पिछले वर्ष के 5 लाख 24 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में 5 लाख 57 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है।  

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Dakhal News 21 July 2017


वोडाफोन सिद्धार्थ त्रिवेदी

न्यू मार्केट के सेंटर प्वाइंट में स्थित वोडाफोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड के एक अफसर द्वारा कंपनी की महिला रिलेशन मैनेजर के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया है। आरोपी के खिलाफ टीटी नगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी रिटेंशन हेड ने बिलासपुर में कार्यरत महिला मैनेजर को मीटिंग के बहाने भोपाल बुलाकर पहले इस्तीफा मांगा। इस्तीफा नहीं देने पर संबंध बनाने की बात कही और जान से मारने की धमकी दी। टीटी नगर थाने के एसआई महेश कुमार ने बताया कि ग्वालियर हजीरा की रहने वाली 25 वर्षीय युवती इसी कंपनी के छत्तीसगढ़ में रिलेशन मैनेजर के पद पर तैनात थी। उसे भोपाल के न्यू मार्केट के सेंटर प्वाइंट स्थित कंपनी के रिटेंशन हेड सिद्धार्थ त्रिवेदी ने 25 मार्च 2017 को फोन पर भोपाल ऑफिस में होने वाली मीटिंग में आने लिए कहा। 27 मार्च को वह भोपाल आई और सिद्धार्थ त्रिवेदी के केबिन में पहुंची, जहां उन्होंने उससे कहा कि तुम नौकरी से इस्तीफा दे दो। पीड़िता ने जब इस्तीफा देने से इंकार किया तो हेड त्रिवेदी उसके साथ अश्लील हरकत करने लगा। पीड़िता ने जब विरोध किया तो आरोपी ने उससे संबंध बनाने के लिए कहा। इस पर उसने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इस पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। टीटी नगर थाना टीआई महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि घटना के बाद से पीड़िता ने रिलेशन मैनेजर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था और वह ग्वालियर अपने घर रहने लगी। काफी दिन तक मानसिक रूप से परेशान रहने के बाद जब उसकी हालत में सुधार हुआ तो उसने डाक से थाने में शिकायती आवेदन भेजा। मामले को जांच में लेकर आरोपी के खिलाफ छेड़खानी और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी दिल्ली का रहने वाला है और वह कोलार के राजहर्ष कॉलोनी में किराए से रहता है। टीटी नगर थाने में मौजूद पीड़िता ने  बताया कि कंपनी के सीनियर अफसरों को भी छेड़खानी की शिकायत की थी, लेकिन कंपनी के अफसरों ने अपनी महिला कर्मचारी की शिकायत पर न तो कोई जांच कराई न ही विभागीय कमेटी बनाई। पुलिस ने इस बिंदु को भी अपनी जांच में शामिल कर लिया है। सीएसपी टीटी नगर गोपाल सिंह चौहान ने कहा कंपनी की कर्मचारी की शिकायत पर कंपनी के रिटेंशन हेड पर छेड़खानी की एफआईआर दर्ज की है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने कंपनी के अफसरों से शिकायत की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच में इस बिन्दु को शामिल कर लिया है।  

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Dakhal News 19 July 2017


agarbatti

आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिला सदस्यों द्वारा अगरबत्ती का उत्पादन किया जा रहा है। घर बैठे किये जाने वाला यह काम उनकी अतिरिक्त आय का जरिया बन गया है। आजीविका गतिविधियों से जुड़कर महिलायें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा स्व-सहायता समूह सदस्यों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अन्य कार्यों के साथ-साथ अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रदेश में 1896 महिलाओं द्वारा अगरबत्ती बनाने का कार्य किया जा रहा है। पैडल एवं ऑटोमेटिक मशीनों से प्रदेश में लगभग 90 क्विंटल प्रतिदिन अगरबत्ती का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश के 24 जिलों के 154 ब्लॉक में 255 अगरबत्ती यूनिट संचालित है। प्रतिमाह लगभग 3880 क्विंटल अगरबत्ती का निर्माण हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के निर्धन परिवारों की महिलाओं द्वारा बनाई जा रही यह अगरबत्ती, पैकिंग, खुशबू के मामले में बहुर्राष्ट्रीय कंपनियों से पीछे नहीं है। आजीविका अगरबत्ती की बाजार में मांग बनी हुई है। बड़ी संख्या में महिलायें व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से इस कार्य से जुड़ी हुई है। प्रमुख रूप से शिवपुरी, रीवा, सागर, धार आदि जिलों की अगरबत्ती प्रदेश के साथ अन्य प्रदेशों के बाजारों में भी अपनी पहचान बनाती जा रही है। ''व्ही टू सी बाजार डॉट कॉम'' के माध्यम से आजीविका उत्पादों को डिजीटल प्लेटफॉर्म से वैश्विक बाजार से सीधा जोड़ा गया है।

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Dakhal News 19 July 2017


 फ्लोराइड वाले पानी ने लीं 36 जान

  छत्तीसगढ़ में गरियाबंद के सुपेबेड़ा गांव में लगातार हो रही मौतों की वजह से रहस्य उठ गया है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) जबलपुर ने राज्य स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें फ्लोराइड को सबसे बड़ा कारण बताया है। आईसीएमआर के डायरेक्टर तापश चकमा पिछले महीने अपनी दो सदस्यीय टीम के साथ सुपेबेड़ा पहुंचे थे, जहां से टीम ने पानी के सैंपल लिए थे। आईसीएमआर ने यह भी कहा है कि सुपेबेड़ा से 40 किमी के दायरे में आने वाले सभी गांव का जल्द से जल्द सर्वे करवाएं, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। वहीं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने मिट्टी जांच (स्वाइल टेस्ट) रिपोर्ट भी भेज दी है, जिसमें केडमियम, क्रोमियम, आर्सेनिक जैसे हेवी मेटल पाए गए हैं। फ्लोराइड, केडमियम, आर्सेनिक और क्रोमियम सीधे किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सुपेबेड़ा में बीते 7 साल में 32 मौतों की पुष्टि की है, जबकि अभी भी 30 से अधिक व्यक्तियों की जांच में क्रेटिनम बढ़ा हुआ पाया गया है। डॉ. अंबेडकर अस्पताल की नेफ्रोलॉजी टीम मरीजों का इलाज कर रही है, अस्पताल के 2 पीजी डॉक्टर और तकनीशियन गरियाबंद में तैनात किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक लगातार रिपोर्ट भेजी गई है। आईसीएमआर के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में फ्लोराइड को नियंत्रित करने के सुझाव दिए हैं। गांव के लोगों को विटामिन सी, विटामिन डी 3, कैल्शियम का दवा देने कहा है। आईसीएमआर ने शॉर्ट टर्म और लांग टर्म प्रोग्राम भेजे हैं। शॉर्ट टर्म में दवाएं और लांग टर्म के लिए सुरक्षित पेयजल सप्लाई प्लांट का जिक्र किया है। लोगों को नियमित जागरूक करने कहा है। स्वास्थ्य विभाग का जहाना है स्टेंडर्ड ऑपरेटिव सिस्टम लागू किया जाए, मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में भी भर्ती करवाना पड़े तो करवाया जाए, इलाज नि:शुल्क हो। मरीजों को अस्पताल आने-जाने के लिए वाहन मुहैया करवाया जाए। गांव में नियमित डॉक्टर, मेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति हो। खून, पेशाब की नियमित जांच, मरीजों का फॉलोअप। - कुपोषित परिवारों के लिए संतुलित आहार की व्यवस्था हो। स्वास्थ्य संचालनालय में एनसीडी नोड्ल अधिकारी डॉ. केसी उराव, फ्लोराइड नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन, आईडीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. केआर सोनवानी से आयुक्त रोजाना रिपोर्ट ले रहे हैं। इन्हें ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुधार के लिए हर आवश्यक साधन-संसाधन मुहैया करवाने के निर्देश हैं। पंचायत विभाग- बोर बेल खोदने की घोषणा के पहले पीएचई से रिपोर्ट लेनी चाहिए।पीएचई- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को बोर बेल खोदने से पहले मिट्टी की जांच करनी चाहिए। खुदाई के बाद भी हो पानी की जांच। स्वास्थ्य विभाग- अचानक से होने वाली मौत या मौतों पर विस्तृत जांच करवाए। आदिम जाति विकास विभाग- गांव स्तर पर इनके कर्मी सक्रिय हैं। वे सक्रियता से होने वाले घटनाक्रम की रिपोर्ट दें। आयुक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग आर. प्रसन्ना का कहना है आईसीएमआर ने प्राथमिक रिपोर्ट भेजी है, कृषि विश्वविद्यालय की रिपोर्ट भी मिल चुकी है। इनके आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पूरी स्थिति से अवगत करवा दिया है |

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Dakhal News 17 July 2017


नरोत्‍तम मिश्रा

मध्‍यप्रदेश के मंत्री नरोत्‍तम मिश्रा की अयोग्‍यता के केस की सुनवाई कर रही दिल्‍ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने साफ कर दिया है कि वह राष्‍ट्रपति चुनाव में वोट नहीं कर पाएंगे। दिल्‍ली हाईकोर्ट की डबल वैंच ने चुनाव आयोग के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें उन्‍हें राष्‍ट्रपति चुनाव में वोटिंग के लिए अयोग्‍य करार दिया गया था। इसके साथ ही अब उनकी अपील पर सुनवाई रेगुलर बेंच द्वारा की जाएगी। कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है और वह शाम चार बजे के आस-पास इस फैसले को सुनाएगी। गौरतलब है कि मिश्रा ने खुद को अयोग्‍य ठहराने के फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी थी। इससे पहले शुक्रवार को नरोत्तम मिश्रा को बड़ा झटका देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। अयोग्यता के फैसले पर रोक लगाने की याचिका खारिज होने के साथ ही निश्‍चित हो गया था कि वो 17 जुलाई को होने वाली राष्ट्रपति चुनाव में अपने मत का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। इसी बीच यह भी जानकारी मिल रही है कि राष्‍ट्रपति चुनाव में वोट डालने वाले मतदाताओं की सूची तैयार हो चुकी है और इस सूची में नरोत्‍तम मिश्रा का नाम नहीं है। इससे पहले हाई कोर्ट को तय करना था कि 17 जुलाई को होने वाली राष्ट्रपति चुनाव के लिए वो वोटिंग में हिस्‍सा ले सकते है कि नहीं। नरोत्तम मिश्रा की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था, कोर्ट ने मामले को मध्य प्रदेश से दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया था। इसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग से पहले सुनवाई पूरी कर निपटारा करे। दरअसल मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। उन पर 2008 के चुनाव के दौरान पेड न्यूज के आरोप लगाए गए थे। चुनाव आयोग ने उनके तीन साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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Dakhal News 16 July 2017


गोरक्षा -अराजकता

गोमांस ले जाने के शक में पिटाई की ताजा घटना महाराष्ट्र के नागपुर में हुई, लेकिन इसमें उल्लेखनीय पहलू कार्रवाई करने में पुलिस की फुर्ती है। पुलिस ने तुरंत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है। बीते दिनों झारखंड में भी गोमांस के शक में हुई एक व्यक्ति की हत्या के बाद पुलिस ने ताबड़तोड कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया था। स्पष्टत: यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुस्पष्ट घोषणा का परिणाम है। पिछले 29 जून को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में एक समारोह में बोलते हुए मोदी ने गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने दो-टूक कहा कि ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उसके बाद कानून लागू करने वाली एजेंसियों के रुख में बदलाव झलका।  यह स्वागतयोग्य घटनाक्रम है। इसलिए कि पिछले दिनों गोरक्षा के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने की घटी घटनाएं कानून-व्यवस्था लिए एक बड़ी चुनौती बनने लगी थीं। किसी सभ्य एवं संवैधानिक व्यवस्था में ऐसी वारदात की इजाजत नहीं हो सकती। देश के ज्यादातर राज्यों में गोहत्या पर कानूनन प्रतिबंध है। इसका उल्लंघन करने वालों के लिए दंड निर्धारित है। ऐसे में अगर कहीं ऐसी घटना हो, तो सही रास्ता पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराना है। जांच करना पुलिस और निर्णय देना न्यायपालिका का काम है। इसके उलट लोगों का कोई समूह खुद इंसाफ करने लगे तो उससे समाज में अराजकता ही फैलेगी। इसीलिए देश के विभिन्न् हिस्सों में हुई ऐसी घटनाओं से सभ्य समाज चिंतित हुआ। ज्यादा फिक्र की बात ये धारणा बनना थी कि ऐसी वारदात करने वालों को सरकार का संरक्षण हासिल है। ऐसी राय बनाने की कोशिश इसके बावजूद हुई कि प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष भी गोरक्षा के नाम पर हिंसा कर रहे तत्वों की निंदा की थी। इस बार उनका लहजा ज्यादा सख्त रहा। कहा जा सकता है कि उससे सही पैगाम गया है। इस सिलसिले में यह भी उल्लेखनीय है कि बूचड़खानों के लिए मवेशियों की बिक्री पर रोक से संबंधित अधिसूचना पर केंद्र हठ नहीं दिखा रहा है। इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एटॉर्नी जनरल ने कहा कि विभिन्न् क्षेत्रों से आई प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए केंद्र उस अधिसूचना पर पुनर्विचार कर रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायालय यदि अधिसूचना के अमल पर सारे देश में रोक लगाना चाहे, तो सरकार को उस पर एतराज नहीं होगा। हालांकि ये मुद्दा गोरक्षा से नहीं जुड़ा है, लेकिन सरकार के इस कदम को गोहत्या रोकने के प्रयासों से ही जोड़कर देखा गया। अच्छी बात है कि केंद्र अब इस पर दोबारा सोच रहा है। इसका संदेश भी यही है कि कुछ तत्वों ने सरकार के इरादे की गलत व्याख्या करके हिंसा की जो राह अपनाई है, उससे एनडीए सरकार सहमत नहीं है। इसलिए वह उचित सुधार करने को तैयार है। अब चूंकि सरकार स्थिति की गंभीरता के प्रति अधिक सतर्क हो गई है तो उसका असर भी दिखने लगा है। नागपुर की घटना इसकी ही मिसाल है।

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Dakhal News 16 July 2017


स्वामीनारायण मंदिर रायपुर

  नया रायपुर में विश्व प्रसिद्ध स्वामीनारायण संप्रदाय का मंदिर बनेगा। स्वामीनारायण संप्रदाय का एक प्रतिनिधिमंडल कुछ दिनों पहले नया रायपुर आया था। संस्था ने नया रायपुर स्थित जंगल सफारी के निकट रियायती दर पर सरकार से जमीन की मांग की है। स्वामीनारायण संप्रदाय के अलावा और भी कई धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन नया रायपुर में जमीन की मांग कर रहे हैं। नया रायपुर विकास प्राधिकरण अब ऐसे संगठनों को जमीन देने के लिए एक नीति तैयार करने में लगा है। फिलहाल जमीन देने पर कोई निर्णय नहीं किया गया है। नया रायपुर में पहले प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय को जमीन दी गई है। हालांकि उन्होंने जमीन बाजार मूल्य पर खरीदी है। इस्कॉन, बालाजी मंदिर ट्रस्ट जैसे धार्मिक संप्रदाय के अलावा अक्षयपात्र जैसे सामाजिक सांस्कृतिक संगठन भी नया रायपुर में जमीन चाहते हैं। एनआरडीए की दिक्कत यह है कि अगर किसी एक को रियायती दर पर भूमि दी तो सैकड़ों ऐसे संगठन हैं, जो जमीन की मांग करने लगेंगे। एनआरडीए के अफसरों का कहना है कि अगर यहां ऐसे संप्रदाय आएंगे तो इससे नया रायपुर को फायदा ही होगा। कई शहरों में अर्थव्यवस्था का आधार ही तीर्थ है। अगर नया रायपुर में ऐसे मंदिर बनें तो उससे शहर का विकास होगा। स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना स्वामी रामानंद के शिष्य स्वामी सहजानंद ने 18 वीं सदी में की थी। अहमदाबाद सहित गुजरात के कई शहरों में इस संप्रदाय के मंदिर हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, आस्टे्रलिया, अफ्रीका सहित दुनिया के अनेक देशों में इस संप्रदाय के मंदिर हैं। राधा कृष्ण के ये मंदिर शिलाओं से बने हैं और स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना माने जाते हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय वैदिक परंपरा पर आधारित संप्रदाय है। इसमें सभी जाति के लोग शामिल हैं। एनआरडीए पीआरओ विकास शर्मा ने बताया स्वामीनारायण संप्रदाय ने नया रायपुर में जमीन मांगी है। हम उनके प्रस्ताव को बोर्ड मीटिंग में लाएंगे फिर सरकार को भेजेंगे। अभी जमीन देने का निर्णय नहीं हुआ है। इस बारे में नीति बनाने की तैयारी है। इस्कॉन, बालाजी मंदिर ट्रस्ट सहित कई दूसरे संगठनों ने भी जमीन की मांग की है।  

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Dakhal News 15 July 2017


छत्तीसगढ़ की खेल नीति

     16 साल बाद छत्तीसगढ़ की खेल नीति बदलने जा रही है। नई खेल नीति में प्रदेश के खिलाड़ियों को विदेश में कोचिंग मिलेगी। कोचिंग का पूरा खर्च खेल विभाग उठाएगा। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर गोल्ड मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को खेल निखारने पॉलिसी लागू की जाएगी। वहीं खिलाड़ियों के लिए नौकरी में 2 प्रतिशत आरक्षण का नियम लागू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि खेल नीति बनकर तैयार है। 29 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस पर लागू की जाएगी। बता दें कि प्रदेश के अलग-अलग खेल संघों से आए सुझाव के बाद खेल नीति संशोधन कर बनाई गई है। इसमें सबसे अहम उन बिन्दुओं को ध्यान में रखा गया है, जिससे खेल और खिलड़ियों का विकास हो सके।  रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और राजनांदगांव में खेल विभाग नई खेल नीति की तहत नेशनल स्तर की कोचिंग देने की तैयारी कर रहा है। जहां उच्च स्तर के कोच, स्पोर्ट्स किट खिलाड़ियों को उपलब्ध करवाई जाएगी। स्पेशल कोचिंग की सुविधा उन खिलाड़ियों को मिलेगी, जो लगातार नेशनल और इंटरनेशन में बेहतर परफॉर्मेंस कर रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जो खेल नीति लागू होने जा रही है, उसका पूरा फोकस ओलिंपिक गेम्स पर है। खिलाड़ियों को उसी लेवल पर तैयार किया जाएगा। इसमें सबसे खास बात है कि खेल विभाग ओलिंपिक गेम्स पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जिन खेलों में खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया उन्हें स्पेशल सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। वहीं आगामी नेशनल गेम्स पर भी फोकस होगा। जिन खेलों में पिछले वर्ष सिल्वर तक सीमित रह गए थे उन्हें गोल्ड की तैयारी करवाई जाएगी। सहायक संचालक, खेल विभाग राजेंद्र डेकाटे नई खेल नीति बनकर तैयार है। खेल विभाग ने ओलिंपिक खेलों को ध्यान में रख पॉलिसी को लागू करेगा। विदेशों में कोचिंग भी खिलाड़ियों को दी जाएगी।     

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Dakhal News 14 July 2017


लोकायु्क्त पुलिस

  एमपी के श्योपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग के लेखाधिकारी अरविंद जैन के घर गुरुवार अल सुबह साढ़े पांच बजे लोकायु्क्त पुलिस ने छापामार कार्रवाई की। अरविंद जैन वर्तमान में नरसिंगढ़ परियोजना में पदस्थ हैं और करीब 6 महीने पहले ही उसका ट्रांसफर हुआ। इसके पहले वे 15 साल से श्योपुर जिले में ही पदस्थ थे। इस दौरान उनके खिलाफ कई शिकायतें आईं, जिसमें रिश्वत लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की भी शिकायत थी। 2013 में उनके खिलाफ इसी तरह की एक शिकायत आई थी, जिस पर लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ इन्वेट्री जांच शुरू की। जांच में उनके पास सरकारी आय से करीब 60 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति मिली है। कार्रवाई में जैन के घर से एक कार, दो टू व्हीलर, 10 लाख रुपए की बीमा पॉलिसी, 19 तोला सोना, 500 ग्राम चांदी के गहने। बेटी को एमबीबीएस की पढ़ाई करवाने के लिए खर्च हुए 22 लाख रुपए के दस्तावेज भी मिले। लोकायुक्त टीम की कार्रवाई जारी है। अरविंद जैन के घर कार्रवाई करने वाली टीम में लोकायुक्त निरीक्षक अतुल सिंह, मनीष शर्मा, राजीव गुप्ता, रविंद्र सिंह के अलावा 10 कर्मचारी भी शामिल हैं। टीम अपने साथ एक डॉक्टर को भी लाई थी। इस जांच में सरकार से अधिकारी या कर्मचारी को मिले अब तक के वेतन और उसकी संपत्ति का अनुपात किया जाता है। अगर संपत्ति सैलरी से ज्यादा पाई जाती है तो उसके लिए आय के स्त्रोत की जानकारी देनी पड़ती है।  

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Dakhal News 13 July 2017


फायनेंस मैनेजमेंट में छत्तीसगढ़

  वित्तीय प्रबंधन में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहले स्थान पर आ गया है। नीति आयोग ने देश के 29 राज्यों का आंकड़ा जारी किया है। 2015 की तुलना में छत्तीसगढ़ दो पायदान चढ़ा है। 2 साल पहले छत्तीसगढ़ तीसरे स्थान पर था। नई दिल्ली में नीति आयोग के प्रवासी भारतीय केन्द्र में राज्यों के मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में ये आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इस सूची में उत्तर प्रदेश दूसरे, तेलंगाना तीसरे और आंध्रप्रदेश चौथे स्थान पर है।  

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Dakhal News 12 July 2017


रमन  युवानीति

छत्तीसगढ़ की पहली युवा नीति के मसौदे को बुधवार को रमन सरकार ने हरी झंडी दे दी। इसमें सबसे अहम है, छत्तीसगढ़ के सारे ग्राम पंचायतों में विवेकानंद युवा केंद्र की स्थापना और पढ़े-लिखे युवाओं के लिए सरकारी विभागों में इंटर्नशिप देने की योजना है। इससे सरकार और युवाओं दोनों को लाभ होगा। युवाओं को सरकारी सिस्टम को समझने का अवसर मिलेगा।मुख्यमंत्री निवास में दो घंटे से अधिक समय तक चली इस मीटिंग में मुख्यमंत्री रमन सिंह समेत उनके कैबिनेट के कई मंत्री और शीर्ष नौकरशाह मौजूद थे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार के इस कदम को रोजगार की दिशा बदलावकारी माना जा रहा है।

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Dakhal News 12 July 2017


रमन सिंह

  राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार बुधवार को रायपुर आ रही हैं। उनके पक्ष में वोट डलवाने के लिए कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव ने पार्टी के 39 विधायकों के अलावा एकमात्र निर्दलीय विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, बसपा विधायक केशव चंद्रा और जोगी समर्थक सियाराम कौशिक से बात कर उन्हें बुलाया है। निर्दलीय विधायक को साधने की कोशिश पर सीएम डॉ. रमन सिंह पानी फेर दिया है। उन्होंने न केवल खुद चोपड़ा से बात की, बल्कि भाजपा के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद से भी बात करा दी। इस कारण अब डॉ. चोपड़ा ने भाजपा उम्मीदवार को ही वोट देने का फैसला कर लिया है। चंद्रा ने यूपीए उम्मीदवार को वोट करने का संकेत दिया है। ऐसे ही जोगी समर्थक कौशिक ने भी साफ कर दिया है कि वे कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट देंगे। प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों में से 49 में भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस के 38 विधायक हैं, लेकिन इसमें से एक अमित जोगी पार्टी से निष्कासन के बाद कांग्रेस से असम्बद्ध विधायक हैं। मतलब अब अधिकारिक तौर पर कांग्रेस में 37 विधायक रह गए हैं। एक सीट पर बसपा और एक सीट पर निर्दलीय विधायक हैं। जिस तरह से अभी समीकरण बना है, उससे तो यही तय माना जा रहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार कोविंद को पार्टी के 49 विधायकों के अलावा एक निर्दलीय विधायक डॉ. चोपड़ा का वोट मिलेगा। इनका छत्तीसगढ़ से 50 वोट तय माना जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार को पार्टी के 37 और बसपा विधायक को मिलाकर 38 वोट मिलने की पूरी संभावना है। कांग्रेस से निष्कासित अमित जोगी और निलंबित आरके राय से कांग्रेस ने बात ही नहीं की है, इसलिए ये दो वोट किस पाले में गिरेंगे, इसे लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो अजीत जोगी ने 16 बिंदुओं का छत्तीसगढ़ एजेंडा तैयार किया है, जिसे वे दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को भेजेंगे। जोगी का कहना है कि उनके एजेंडा को पूरा करने वाले प्रत्याशी को ही उनके समर्थक विधायक वोट देंगे।  

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Dakhal News 11 July 2017


नरोत्तम पेड न्यूज मामला

जबलपुर में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश के जनसंपर्क और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह आगे बढ़ा दी है। इसके चलते मिश्रा अब राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।  मिश्रा के खिलाफ आयोग में शिकायत करने वाले राजेंद्र भारती की ओर से मंगलवार की सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली युगलपीठ को बताया कि याचिका को ग्वालियर खंडपीठ से जबलपुर स्थानांतरित करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय की शरण ली गई है। उन्होंने युगलपीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय में दायर उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई अभी लंबित है, जिसके बाद युगलपीठ ने मिश्रा की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित कर दी। यह मामला चुनाव आयोग द्वारा 23 जून को दिए उस आदेश से संबंधित है, जिसमें मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पेड न्यूज से संबंधित मामले में दोषी पाते हुए 3 साल के लिए अयोग्य ठहराया गया था। भारत निर्वाचन आयोग ने मिश्रा का विधानसभा निर्वाचन तीन वर्षों के लिए अयोग्य ठहरा दिया था। इसके खिलाफ मिश्रा ने ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की थी। मिश्रा ने इसे मुख्यपीठ में स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के निर्देश पर 7 जुलाई को ग्वालियर पीठ के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल ने मंत्री मिश्रा की याचिका को सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित कर दिया था। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता राजेन्द्र भारती ने हाईकोर्ट की मुख्यपीठ को एक पत्र लिखते हुए इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि मुख्यपीठ में दायर याचिका प्रायोजित है। दूसरी ओर उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ में एक जनहित याचिका दायर कर एक पत्रकार ने मिश्रा की विधानसभा सीट रिक्त घोषित किए जाने की मांग की थी। मंगलवार को इन दोनों याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली युगलपीठ द्वारा की गई। मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है था - जिस अखबार की खबर को आधार बनाकर शिकायत की गई है उसने न्यूज पेड होने से इनकार किया है। एक भी ओरिजनल डॉक्यूमेंट पेश नहीं किया गया। ऐसे तो कोई भी किसी के खिलाफ झूठी फोटोकॉपी पेश कर केस कर देगा। 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग होनी है। मैं वोटर हूं। चुनाव आयोग के इस फैसले से वोट नहीं दे पाऊंगा। इसलिए राहत (स्टे) दें। राजेंद्र भारती का कहना था -चुनाव आयोग ने इन्हें (नरोत्तम की तरफ इशारा करते हुए) अयोग्य घोषित किया है। नरोत्तम ने स्टे मांगा है और हमने भी केविएट दायर की है। दिल्ली से मेरे वकील नहीं आ सके हैं। बहस पूरी हुए बगैर स्टे नहीं दें। लॉ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर विजय पांडे (चुनाव आयोग):आयोग ने नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती को सुनवाई का पूरा मौका दिया था। दोनों पक्षों की बात सुनने और तथ्यों के आधार पर ही मिश्रा को अयोग्य घोषित किया गया है।  

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Dakhal News 11 July 2017


पूर्व सांसद महाबल मिश्रा

बिलासपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ अभद्रता करने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा का इंटक यूथ ने विरोध किया। जोनल स्टेशन में उन्हें व उनके सहयोगी केके तिवारी को उत्कल एक्सप्रेस से उतारकर उनके ऊपर काली स्याही उंड़ेल दी गई। इसके अलावा जमकर नारेबाजी भी की गई। पश्चिम दिल्ली के पूर्व सांसद श्री मिश्रा व श्री तिवारी दिल्ली से हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस से चांपा के लिए सफर कर रहे थे। उनका रिजर्वेशन ए-1 कोच में था। उनके बिलासपुर से गुजरने की सूचना पर इंटर यूथ सक्रिय हो गया और ट्रेन के पहुंचने से पहले प्रदेश अध्यक्ष सुशील अग्रवाल साथियों के साथ स्टेशन पहुंच गए। ट्रेन 11 बजे प्लेटफार्म एक पर आई। इसके बाद श्री अग्रवाल व साथी कोच में चढ़े और स्वागत की बात कहते हुए दोनों को नीचे उतारवाया। उन्हें समर्थक मानकर दोनों उत्साह के साथ नीचे उतरे। इसके बाद उन पर काली स्याही उंड़ेल दी गई। इससे दोनों के चेहरे काली स्याही से रंग गए। प्रदेश अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने बताया कि महाबल मिश्रा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद इंटक यूथ में उनके खिलाफ बेहद आक्रोश है। इतना ही नहीं वे खुद को इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केके तिवारी महामंत्री बताते हैं। जबकि वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. जी संजीवन रेड्डी के पास है। इसके बावजूद दोनों गलत ढंग से पद पर काबिज होने की बात कहते हैं। इसके अलावा सभा व कार्यक्रम आयोजित कर माहौल का बिगाड़ने की साजिश करते हैं। कोरबा भी इसी सिलसिले में जा रहे थे। जोनल स्टेशन में हुई इस घटना की भनक आरपीएफ और जीआरपी नहीं लगी। इस संबंध में उनका कहना था कि हमारे पास किसी ने इस तरह की शिकायत नहीं आई है।

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Dakhal News 10 July 2017


रायपुर - अरुण जेटली

    एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली रविवार को रायपुर पहुंच यहां उन्‍होंने मुख्यमंत्री निवास में वे भाजपा के सभी सांसदों, विधायकों तथा राष्ट्रीय पदाधिकारी की उपस्थिति में आयोजित बैठक में हिस्‍सा लिया। इसके बाद जीएसटी के ऊपर बेबीलोन होटल में आयोजित वर्कशॉप में उन्‍हेांने हिस्‍सा लिया। जेटली की इस क्‍लास में चेंबर ऑफ कॉमर्स और सीए एसोसिएशन के लोग उपस्थित रहे। इस दौरान पहले छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री रमन सिंह ने अरुण जेटली का स्‍वागत करते हुए लोगों को संबोधित किया। उनका कहना था कि जीएसटी हमारे देश के विकास के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही इसका पूरा श्रेय अरुण जेटली को जाता है क्‍योंकि इसे लागू कराना आसान नहीं था। इसी के साथ उन्‍होंने व्‍यापारियों और कंपनियों से छत्‍तीसगढ़ में निवेश करने के लिए निमंत्रित किया। मुख्‍यमंत्री के भाषण के बाद वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों को संबांधित किया और जीएसटी से जुड़ी कई भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की। इसके साथ ही उनका कहना था कि छत्‍तीसगढ़ निवेश के लिए एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण जगह है क्‍योंकि यह देश के बीचों बीच है और यहां से यातायात के माध्‍यम से देश के किसी भी हिस्‍से तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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Dakhal News 9 July 2017


भोपाल रायपुर का विकास

स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में राजधानी रायपुर ने लंबी छलांग लगाई है. मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह ने एक्सप्रेस वे, ओवरब्रिज, ओवरपास, स्काई वाक, अंडर ब्रिज बनाने 680 करोड़ रूपए की विकास योजनाओं का शिलान्यास किया.  इस दौरान डा.रमन सिंह ने कहा कि – 13 सालों के मेरे कार्यकाल में ये पहला मौका है, जब 680 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास एक साथ रखा है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में 17 सालों की यात्रा को देखा जाए तो किसी भी राज्य की राजधानी में अधोसंरचना का इतना काम नहीं हुआ। डा.रमन सिंह ने कहा कि- आज भी मैं जब भोपाल जाता हूँ, तो देखता हूँ, भोपाल वैसा का वैसा है, लेकिन कोई यदि रायपुर आता है, तो यहां का विकास देखकर हतप्रभ हो जाता है.

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Dakhal News 8 July 2017


छत्तीसगढ़ का नवाचार

इंदौर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नवाचार सम्मेलन का दूसरा दिन इंदौर में चल रहे तीन-दिवसीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों ने अपने-अपने नवाचार साझा किये। प्रतिनिधियों ने मातृ-शिशु स्वास्थ्य, संचारी-असंचारी रोग नियंत्रण, अस्पताल प्रबंधन, शहरी स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य तकनीकी, सामुदायिक स्वास्थ्य प्रक्रियाओं, अधोसंरचना विकास तथा स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता पर आधारित नवाचारों पर प्रस्तुतिकरण दिया। पहुँचविहीन क्षेत्रों में पद-स्थापना आकर्षक बनी छत्तीसगढ़ शासन ने दुर्गम तथा पहुँचविहीन क्षेत्रों में चिकित्सकों और विशेषज्ञों की पद-स्थापना आकर्षक बनाने के नवाचार साझा किये। वहाँ स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकों के लिये सुविधायुक्त आवास उपलब्ध करवाने के साथ उनके परिवारों को भी आवश्यक सुविधाएँ दी जा रही हैं। चिकित्सकों के वेतन प्रावधानों को लचीला एवं आकर्षक बनाया गया है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की संख्या बढ़ी है। विशेषज्ञ चिकित्सक कमी पूर्ति के लिये डिप्लोमा कोर्स तमिलनाडु में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिये एक नया प्रयोग किया गया है। इसमें राज्य शासन जिला चिकित्सालयों में विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार कर एमबीबीएस चिकित्सकों को जिला अस्पताल में प्रशिक्षित कर डीएनबी कोर्स करवा रहा है। यह डिप्लोमा स्नातकोत्तर डिग्री के समकक्ष है। इससे मेडिकल कॉलेजों में पी.जी. सीट बढ़ाये बिना ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की पूर्ति हो सकेगी। तमिलनाडु में इस डिप्लोमा के लिये 100 सीट निर्धारित की गयी हैं। प्रसूति बाद मृत्यु से बचाने तकनीकी महाराष्ट्र के विशेषज्ञों ने प्रसव के बाद महिलाओं में होने वाले अत्यधिक रक्त-स्त्राव से होने वाली मृत्यु रोकने के लिये किये गये प्रयासों पर प्रस्तुतिकरण दिया। महाराष्ट्र के वर्धा मेडिकल कॉलेज की टीम ने यूटीराइन बैलून टेम्पोनेड तकनीक विकसित की है, जिससे कम कीमत पर अधिक रक्त-स्त्राव से होने वाली मौतों से महिलाओं को बचाया जा सकेगा। विशेष सचिव दर्जा ओडीसा की टीम ने बेहतर नीतिगत निर्णय लेने के लिये पब्लिक हेल्थ केडर के अधिकारियों को राज्य शासन में विशेष सचिव का दर्जा दिये जाने संबंधित नवाचार पर प्रस्तुतिकरण दिया। मध्यप्रदेश के नवाचारों को मिली सराहना सम्मेलन में मध्यप्रदेश के नवाचारों के प्रस्तुतिकरण को भी सराहना मिली। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में प्रत्येक जिला अस्पताल में स्थापित किये गये विशेष स्क्रीनिंग, परामर्श तथा चिकित्सा इकाई (मन कक्ष) की सराहना की गयी। गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज की जाँच के लिये होशंगाबाद जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किये गये नवाचार का भी प्रस्तुतिकरण किया गया। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं के भवनों के व्यवस्थित तथा दूरगामी आवश्यकताओं के अनुरूप निर्माण कार्य को व्यवस्थित बनाने के लिये शासन द्वारा अस्पताल प्लानर नियुक्त कर निर्माण कार्य की योजना तथा गुणवत्ता सुधार के नामांतरण को भी विशेष सराहना प्राप्त हुई। अंग प्रत्यारोपण के लिये विशेष प्राधिकरण तमिलनाडु शासन द्वारा अंग प्रत्यारोपण के लिये एक विशेष प्राधिकरण स्थापित किया गया है। यह नवाचार अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सरल, सुगम और सुचारु बनाने में सहायक होगा। इंदौर संभागायुक्त ने इंदौर में प्रत्यारोपण के लिये मानव अंगों के परिवहन के लिये तैयार किये गये ग्रीन कॉरिडोर के अनुभव को साझा किया। केन्द्रीय संयुक्त सचिव श्री मनोज झालानी की अध्यक्षता में आरंभ इस सत्र में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्रीमती गौरी सिंह, आयुक्त श्रीमती पल्लवी जैन गोविल, मिशन संचालक डॉ. संजय गोयल, श्री व्ही. किरण गोपाल और इंदौर संभागायुक्त श्री संजय दुबे भी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 7 July 2017


राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी राज्यों को शहरी बाढ़ की तीव्रता कम करने पर तत्काल ध्यान देने की सलाह दी है। प्राधिकरण ने अधिकतम बाढ़ स्तर को चिन्हांकित करने और हर शहर में शहरी बाढ़ की प्रबंधन सेल स्थापित करने की सलाह दी है। इस संबंध में प्राधिकरण ने एक एडवाइजरी जारी की है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा शहरी बाढ़ को नियंत्रित करने के लिये शहर के परिदृश्य के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया को स्थापित करने को कहा है। हितधारकों को वर्षाकाल के पूर्व कार्यशाला आयोजित कर समन्वय स्थापित करने, नालों की साफ-सफाई, मैपिंग, स्वामित्व की सूची तथा जल निकायों की स्थिति की जानकारी तैयार करने की सलाह दी है। प्रबंधन ने शहर के उपयुक्त बाढ़ के स्थान पर पोर्टेबल वाटर पम्पस स्थापित करने के साथ ही नोडल अधिकारी द्वारा नगर निगम आयुक्त को आँधी-तूफान तथा भारी बारिश की चेतावनी से पूर्व में तथा समय-समय पर अवगत करवाने को कहा है। प्राधिकरण के अनुसार इससे समय पर अलर्ट जारी किया जाकर रोकथाम संबंधी उपाय किए जा सकेंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जलाशयों से पानी छोड़ने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की समिति गठित करने की भी सलाह दी है।  

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Dakhal News 7 July 2017


मध्यप्रदेश  अन्नदाता आत्महत्या

राघवेंद्र सिंह  मुझे लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। कुछ अच्छा घटित नहीं हो रहा है। कृषि बेहतर उत्पादन के बाद भी बेहाल, अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है। नौकरशाही की नाफरमानियां और भ्रष्टाचार तो यहां पहले से ही खूंटा गाड़ के बैठे हुए हैैं। बदनामी के व्यापमं और गड़बडियों के सिहंस्थ की स्याही सूख नहीं पा रही है। ऐसे में नर्मदा माई समेत नदियों में रेत के डाकों ने प्रायश्चित स्वरूप मुख्यमंत्री से नर्मदा परिक्रमा करा डाली। मगर बदनामी है कि पीछा ही नहीं छोड़ रही है। प्रदेश के पराक्रमी किसानों ने प्याज की बंपर पैदावार की तो उसकी खरीदी में शिवराज सरकार के भी आंसू निकल पड़े। खुश हैं तो अफसर और व्यापारी। प्याज खरीदी में घाटालों की आशंकाओं का घटाटोप है। भ्रष्टाचार के बादल छाये हुए हैैं। मैदान में कप्तान के स्वरूप में शिवराज सिंह चौहान तो हैैं मगर मंत्रियों की गैरहाजिरी सियासी हालात को संजीदा बना रही है। ब्यूरोकेसी पर निर्भर सरकार उसी के सेबोटेज की शिकार है और अपनी बिगड़ती छवि से सदमें  में है। एक जून से शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद एक महीना बीत चुका है, लेकिन खेती-किसानी को लेकर हर दिन कोई नई समस्या लेकर आ रही है। औसतन हर दो दिन में एक किसान कर्ज और उससे पैदा परेशानी के कारण आत्महत्या कर रहा है। कृषि मंत्री, कृषि अधिकारी इन मुसीबतों भरे दिन दिनों में गायब है। सीएम अकेले पड़ गए लगते हैं । उनकी कृषि हिमायती छवि पर बट्टा लग गया है। घबराहट में उन्होंने टॉप करने वाले विद्यार्थियों से कह दिया कि वे खेती ना करें क्योंकि वह किसानों को मरते और खेती को बर्बाद होते नहीं देख सकते। ग्यारह बरस से कृषि को लाभ का धंधा बनाने का वादा करने वाले शिवराज सिंह की खेती ना करें कि सलाह अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। वे शायद जीवन में पहली बार इस कदर असहाय महसूस कर रहे हैं। जनता से संवाद कर समर्थन पाने में जितने वे कुशल हैं शायद प्रशासनिक पकड़ में उतने ही लचर, कमजोर। उनके खाटी शुभचिंतक भी थोड़ी अगर-मगर के साथ इसे स्वीकार करते हैं। भाजपा नेतृत्व इससे परेशान हैं। मगर इसका हल खुद मुख्यमंत्री को ही लगातार ईमानदार, तर्कसंगत, उच्च कोटि के कठोर निर्णय से खोजना होगा। अभी तो पूरा प्रदेश इससे जूझ रहा है। विरोधियों के लिए यह बड़ा हथियार है। राज्य की हालत यह है कि मुख्यमंत्री जब प्याज 8 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी का एलान करते हैं तो उसी क्षण कृषि, सहकारिता और नागरिक आपूर्ति विभाग को एक साथ सक्रिय हो जाना चाहिए था। खरीदी के साथ-साथ प्याज के बारिश से सुरक्षित भंडारण के लिए। उदाहरण के लिये जब आंख में धूल कंकड़ जाता है तो पलक झपकने और हाथ बचाव के लिए किसी के आदेश की प्रतीक्षा नहीं करते। उसी तरह प्याज के लिए गोदाम, वेयरहाउस और मंडी में शेड के नीचे- ऊपर तिरपाल, पालिथिन का प्रबंध युद्धस्तर पर करना चाहिए था। यदि अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया है तो यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ सेबाटेज भी है। नौकरशाही की नाफरमानियों के बाद यह भीतरघात गंभीर है। यह सब वह अफसरशाही कर रही है जो कृषि उत्पाद का अनुमान लगाने में बुरी तरह फ्लॉप रही। इस वजह से सरकार को पता ही नहीं है कि कितनी प्याज खरीदनी है। स्थिति यह है कि गत वर्ष की तुलना में खरीदी के लिए दोगुनी राशि याने 200 करोड़ रुपए तय हुए थे। अब कहा जा रहा है कि 800 करोड़ रुपए की खरीदी होगी। यह हैरतअंगेज है। यहीं से बड़े घोटाले के साफ  संकेत मिलते हैं। कागज़ पर खरीदी और भुगतान हो जाएगा, जितनी खरीदी हुई है उससे अधिक प्याज सडऩा बता दिया जाएगा। यह सडऩा ही घोटाले के सबूतों को नष्ट करने के प्रबंध के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री-अधिकारी कोई मैदान में नहीं है। किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होना सरकार की प्रशासनिक कमजोरी का भयावह पक्ष माना जा रहा है। इसी तरह प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं। अफसरों की रुचि नहीं है। मंत्री अस्पतालों में सुधार के लिए सक्रिय नहीं हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल में 24 घंटे में 17 लोगों की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो जाती है। हिला देने वाली इस घटना पर मंत्री जी का पता नहीं है। स्कूल खुल गए हैं, 60 हजार मास्टरों की कमी है। पच्चीस हजार प्रतिनियक्ति पर होने से और 35 हजार पहले से ही कम है। नई भर्ती के लिए वित्त विभाग ने धन की तंगी के कारण रोक लगा दी है, लेकिन जून में शिक्षा मंत्री गप्प हांकते हुए करीब 35 हजार  से अधिक शिक्षकों की भर्ती कराने की बात करते हैं, जबकि जून में घोषणा नहीं नियुक्ति हो जानी चाहिए थी। विभाग में अफसर लापरवाह हैं और ऐसे में मंत्री की नींद जून में शिक्षण सत्र के दौरान खुल रही है।  पढ़ाई के बाद नगरीय प्रशासन को ही देखें। बारिश के समय शहर के नाले-नालियां साफ नहीं हुए। मगर मंत्री स्तर पर न तो कठोरता से वर्षा पूर्व तैयारियां कराईं और ना अब सजगता दिख रही है। हालात चिंताजनक हैं। चल रहे हैं गप्पों के तीर... राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता और प्रतिपक्ष गप्पों के तीर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के ऐलान पर सरकार व भाजपा जनता के साथ मिलकर दो दौर में प्रदेश में 12 करोड़ से अधिक पेड़ पौधे लगाने जा रही है। करीब 7 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में पहले दौर में दो जुलाई को छह करोड़ पौधे 24 जिलों में लगाने का दावा किया गया। एक अनुमान के अनुसार नर्मदा घाटी के दो दर्जन जिलों में साढ़े तीन करोड़ की आबादी है। इनमें बच्चे,बुजुर्ग और महिलाएं भी हैं। सभी आ जाएं तो भी एक-एक, दो-दो पेड़ लगाने पड़ेंगे,  जो कि संभव नहीं है। फिर पौधे, स्थान और लगाने के लिए गड्ढा खोदना जरूरी है, लेकिन व्यवहारिक पक्ष पर किसी का ध्यान नहीं है। पूरी सरकार इवेंट के रूप में चल रही है। मसलन कृषि कर्मण अवार्ड ले लो भले ही, जमीनी हकीकत में किसान आत्महत्या कर रहा है। वैसे ही दावा होगा पेड़ लगाने का रिकॉर्ड पूरा करने का। भले ही पेड़ नजर नहीं आए। अगला वर्ष चुनावी है 2018 में पेड़ लगाने की राशि पौधारोपण के हिसाब से ग्रामीणों को अदा की जाएगी। इसके बदले में पेड़ भले ना दिखें, मगर वोटों की फसल तो काटी ही जा सकती है। गप्पों और योजनाओं के ख्याली पुलाव के बीच इस तरह के इवेंट आगे भी देखने को मिलेंगे। जवाब में आलस-प्रमाद और गुटबाजी में डूबी कांग्रेस आरोपों की झड़ी लगा सकती है। मगर अभी तो उसके हाथ से भी समय की रेत की तरह से फिसल रहा है। नेतृत्व परिवर्तन की बातें कांग्रेस कैंप में गप्पों की तरह तारीख और महीने के साथ आती हैं। मगर होता कुछ नहीं है। हालात यह है कि कांग्रेस कुछ नहीं करने के लिए बदनाम है और भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन होने के बाबजूद इवेंट आधारित कामों के लिए मशहूर हो गई है। ऐसे में पार्टियों के कार्यकर्ताओं और जनता का भगवान भला करे... सब उल्टा-पुल्टा कहां तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पांव -पांव वाले भैया थे, किसान पुत्र और नर्मदा पुत्र थे, लेकिन अब किसान भी परेशान है और मां नर्मदा समेत प्रदेश की नदियां रेत चोरों की वजह से संकट में है। नैतिकवादी पार्टी भाजपा में अनुशासन और नैतिक मूल्यों की गिरावट आ रही है। कर्ज में डूबे किसान ज्यादा उत्पादन करने के बाद भी मौत को गले लगा रहे हैैं। शांति का टापू मध्यप्रदेश अशांत हो रहा है। आजादी के लिये संघर्ष करने वाली कांग्रेस मध्यप्रदेश में शिथिल पड़ी हुई है। जनसेवक कहे जाने वाले सरकारी कर्मचारी मनमानी कर रहे हैैं। ऐसा लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। जितनी ठीक करने कोशिश हो रही है उतनी ही उल्टा-पुल्टा हो रहा है...

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Dakhal News 7 July 2017


शहला मसूद हत्याकांड

आरटीआई एक्टविस्ट शहला मसूद हत्याकांड की दोषी जाहिदा परवेज और सबा फारूकी को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सशर्त जमानत दी है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जनवरी में इन दोनों सहित चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के बाद दोनों को एक ही जेल में रखा गया था, जहां दोनों का बाकी कैदियों के साथ झगड़ा होता था। इसके बाद ही दोनों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता शहला मसूद की हत्या के मामले में पांच साल, पांच महीने 13 दिन तक जाँच चली थी, पेशी, गवाही के बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। यह उन चंद मामलों में शामिल है, जो घटना के महज 17 दिन बाद ही सीबीआई को सौंप दिया गया था। फिर भी अफसरों के हाथ इसका एक भी ऐसा सिरा हाथ नहीं लगा था, जिससे वे हत्यारे और साजिश रचने वालों तक पहुंच जाएं। बाद में एक-एक सबूत और गवाह जोड़े गए तो इश्क, ईर्ष्या, इंतकाम, जुनून और जज्बातों से भरे रिश्तों के रहस्यों भरी कत्ल की यह कहानी कदम-कदम पर अंत तक उलझती रही। इसी कसमकश के बीच चार्जशीट के अध्ययन, पांच साल तक कोर्ट में बहस चली।  

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Dakhal News 6 July 2017


पश्चिम बंगाल - हिंसा

    पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हिंसा के बाद इलाके में धारा 144 लागू है, साथ ही इंटरनेट सेवाएं भी बंद हैं। इसके अलावा बसीरहट और बदुरिया में भी धारा 144 लागू है। इस बीच राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ममता बनर्जी से फोन पर हुई बातचीत की जानकारी दी है। राजभवन के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने मंगलवार दोपहर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन किया था। साथ ही उन्होंने इस दौरान हुई बातचीत का पूरा ब्योरा भी पत्र में दिया है। इससे पहले टीएमसी ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि राज्यपाल ने ममता बनर्जी का अपमान करते हुए उन्हें धमकी दी थी। इस सब के बीच ममता बनर्जी ने भाजपा पर हिंसा भड़काने का आरोप मढ़ दिया है साथ ही शांति सेना बनाने का ऐलान भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वो सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं और यही भाजपा का ट्रेंड है। पार्टी का यह मॉडर्न डिजाइन है, यही कारण है कि हम आम लोगों को बचाने में लगे हैं।  

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Dakhal News 6 July 2017


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

उमेश त्रिवेदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश में विपक्ष की राजनीति के मुद्दे, स्पेस और प्रासंगिकता को लेकर जो बुनियादी सवाल उठाए हैं, उस पर विरोधी दलों को गंभीरता से मनन करना चाहिए।  नीतीश ने विपक्षी एकता के कांग्रेस के नारे के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि केवल दलीय एकता का कोई अर्थ नहीं है, जब तक कि विरोधी दलों के पास कोई वैकल्पिक एजेंडा न हो। हमें जनता को बताना होगा कि देश को टूटने से हम ही बचा सकते हैं और उसका तरीका और तेवर इस ढंग से होगा। अर्थात हम अगर हिंदुत्व के विरोध में हैं तो हमारे पास प्रति हिंदुत्व का एजेंडा क्या है? मात्र  गठबंधन बना लेने से न कोई बात बननी है, न ही वैकल्पिक चेहरा सामने रखने से जनमानस बदलना है। नीतीश कुमार ने मार्के की यह बात दिल्ली में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदम्बरम की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कही। नीतीश ने कहा कि जब तक जनता के सामने विपक्ष अपना कार्यक्रम और नीतियां स्पष्टता से नहीं रखेगा, तब तक देश के राजनीतिक कैनवास में उसकी स्थिति हाशिए पर ही रहेगी।   नीतीश देश के उन चंद नेताओं में हैं, जिनकी बात को राजनीतिक क्षेत्र में गंभीरता से लिया जाता है। वे अपनी बात बेबाकी से और पूरी परिपक्वता से कहते हैं। राजनीतिक घटनाओं को पढ़ने में उनका कोई सानी नहीं है। जब विपक्ष प्याले में तूफान उठाने की कोशिश करता है, तब नीतीश सागर किनारे शांत खड़े दिखते हैं।  उनकी यही संजीदगी नोटबंदी  और राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के मुद्दे पर दिखी। नीतीश ने कहा कि हम बिहार में  भाजपा को हराने में कामयाब रहे तो इसका कारण हमारा एजेंडा स्पष्ट था। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वैकल्पिक एजेंडे की कमान कांग्रेस को थामनी होगी, क्योंकि वही सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। नीतीश की राजनीति और उसकी दिशा को लेकर अक्सर सवाल  उठते रहे हैं। यह आरोप भी है कि वे स्मार्ट पॉलिटिक्स करते हैं। उनकी कोई वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं है। लेकिन वे सत्ता के हाइ-वे पर चलना जानते हैं। लेकिन नीतीश ने अभी जो कहा उसका सीधा निशाना कांग्रेस पर है, जो दिल्ली में सत्ता खोने के तीन साल बाद भी राजनीति में अपनी प्रासंगिकता तलाश रही है। उसका अपना कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है। पंजाब और एकाध छोटे राज्य में चुनावी सफलता का कांग्रेस की वैचारिक किंकर्तव्यमूढ़ता से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि वह स्थानीय राजनीतिक परिस्थिति और क्षत्रपों के राजनीतिक आभामंडल का परिणाम थी। इसके विपरीत भाजपा का एजेंडा और मैदानी मोर्चाबंदी बिल्कुल साफ है। वह देश को हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अमित शाह की जोड़ी विपक्षी हो हल्ले और आलोचना से घबराए बगैर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है और एक के बाद एक किले काबिज करती जा रही है। यही नहीं, आज मोदी और शाह विपक्ष का एजेंडा भी सेट कर रहे हैं। चाहे गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी, असहिष्णुता, दलित उत्पीड़न, उग्र हिंदुत्व, नोटबंदी या जीएसटी हो, वो मुद्दे को इस चतुराई से जनमानस में फ्लोट करते हैं कि उनका तीखा विरोध भी रिबाउंड होकर अतंत: भाजपा के नंबर ही बढ़वाता है। कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के पास  भाजपा के नकारात्मक मुद्दों की कोई काट  न तो है और न ही उसे ढूंढने की कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति है। इस राजनीतिक अकर्मण्यता को इसी बात से समझा जा सकता है कि जहां एक ओर अमित शाह राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए लगातार  देश भर का दौरा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के ‘युवराज’ राहुल गांधी किसान आंदोलन को अधर में छोड़कर एक माह के लिए नानी के घर विदेश चले जाते हैं। जीएसटी जैसे दूरगामी मुद्दे पर महज ट्वीट करते रहते हैं। इस ‘केजुअल पॉलिटिक्स’ से विपक्ष तो छोड़िए खुद कांग्रेस को भी वो क्या दिशा और ऊर्जा देंगे?  नीतीश के सवाल में इसी विपर्यास की मार्मिक गूंज है। कांग्रेस अगर सेक्युलरवाद, सहिष्णुता और सर्व समावेशी राजनीति की बात करती है तो उसके पास वो दम, दिशा, जुनून और प्रतिबद्धता कहां है, जिसके बूते पर जनता में यह संदेश जा सके कि हां, कांग्रेस ही देश को बचा सकती है, उसे सही दिशा में आगे ले जा सकती है। अगर देश हिंदुत्व से नहीं चलेगा तो फिर कौन से एजेंडे पर चलेगा? वो समय गया जब अल्पसंख्यक तुष्टिकरण, गरीब हितैषी छवि और तुम्हारी भी जय-जय और हमारी भी जय-जय किस्म की राजनीति के दम पर कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी बनी हुई थी। आज  बीजेपी और आरएसएस  ने पूरी राजनीति को ‘हिंदू फर्स्ट’ में तब्दील कर दिया है और उसका लक्ष्य पूरी पीढ़ी है, जो मोटे तौर हिंदुत्व के रंग में रंग चुकी है। इस मानसिकता को बदलने के लिए कांग्रेस के पास कोई ठोस प्रति विचार या कार्यक्रम नहीं है कि हिंदुत्व नहीं तो क्या। सेक्युलर शब्द अब इतना बोदा और निराकार हो चुका है कि उसमें कोई मास अपील नहीं बची है। यही हाल उन क्षेत्रीय पार्टियों के हैं, जो किसी बड़ी पार्टी की पूंछ पकड़कर सत्ता की मलाई चाट रही हैं। विचारणीय यह है कि क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां नीतीश के इस सुझावात्मक सवाल का सार्थक उत्तर खोजेंगी या केवल दूसरे की विचारधारा पर संदेह ही जताती रहेंगी।[लेखक उमेश त्रिवेदी सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]    

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Dakhal News 5 July 2017


200 rupaye

सौ और पांच सौ रुपए के बीच छोटे नोट का इंतजार कर रही जनता को दो सौ रुपए का नया नोट जुलाई अंत या फिर स्वतंत्रता दिवस तक मिल सकता है। केंद्र सरकार की होशंगाबाद स्थित प्रेस यूनिट में सैंपल नोट की क्वालिटी और सिक्योरिटी फीचर चेक होने के बाद इन नोटों को कर्नाटक स्थित मैसूर और पश्चिम बंगाल स्थित सालबनी में आरबीआइ की प्रिंटिंग प्रेस में मुद्रण के लिए भेज दिया गया है। नोटबंदी के पहले भारतीय रिजर्व बैंक छोटे नोटों को प्रचलन में लाने के लिए प्रयास कर रहा था। यहां तक कि बैंकों को अपने दस फीसद एटीएम '100 एक्सक्लूसिव' एटीएम में तब्दील करने के निर्देश दिए गए थे। इस आदेश के चंद दिनों बाद ही हजार और पांच सौ रुपए के पुराने नोट बंद कर दिए गए और दो हजार रुपए का नोट बाजार में आ गया। हालांकि बड़े नोट फिर डंप होने लगे और बैंकिंग सूत्रों के अनुसार इस समय आरबीआई के पास जा रहे करेंसी इंडेंट (नोटों की मांग) में करीब दस फीसद का इजाफा है। बैंकिंग सूत्र बता रहे कि आरबीआई इस समय बैंकों को पांच सौ रुपए के नोट अधिक और दो हजार रुपए के नोट कम दे रहा है। सूत्रों के अनुसार आरबीआइ ने 200 रुपये के नोट की उपयोगिता की जांच करा ली है और स्वतंत्रता दिवस तक इसे जारी करने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि होशंगाबाद प्रेस यूनिट की जांच रिपोर्ट ओके होने के बाद नोट को मैसूर और सालबनी के छापाखाना में भेजा गया है और छपाई भी शुरू हो गई है। दो सौ रुपये के ये नोट मिश्रित रंग के होंगे और पहली नजर में सौ रुपये के उन पुराने नोटों की तरह दिखेंगे, जिसमें सफेद पट्टी के साथ पूरा नोट नीले रंग के शेड में दिखता था।

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Dakhal News 4 July 2017


ग्लोबल स्किल्स पार्क

स्किल इंडिया के प्रयासों में मध्यप्रदेश अग्रणी :रूड़ी ग्लोबल स्किल्स पार्क शिलान्यास कार्यक्रम सम्पन्न  एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जहाँ एक ओर हमारे यहाँ बेरोजगारी की समस्या है वहीं दुनिया में हुनरमंद व्यक्तियों की कमी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दूरदृष्टि के साथ स्किल इंडिया द्वारा इस दिशा में सार्थक कोशिश की है। प्रधानमंत्री के प्रयासों में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिये प्रदेश संकल्पित है। ग्लोबल स्किल्स पार्क इस दिशा में प्रभावी पहल है। श्री चौहान आज आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में ग्लोबल स्किल्स पार्क के शिलान्यास और ग्लोबल कंसलटेशन ऑन स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में तकनीकी प्रशिक्षण का नया दौर शुरू हो गया है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं का कायाकल्प हो रहा है। उनमें आगामी 5 वर्षों में आधुनिकतम व्यवसायों की प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हो जायेगी। उन्होंने युवाओं का आव्हान किया कि वे न्यू इंडिया निर्माण के लिये हुनरमंद बनें। विकास की अनंत संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी युवा शक्ति हमारे पास है। यदि इसे हुनरमंद कर दिया जाये तो वर्तमान समय की कमजोरी बड़ी आबादी, भविष्य में हमारी ताकत बन जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के लिये प्रभावी कार्य किए गए हैं। व्यवसायिक शिक्षा के प्रसार के साथ ही, उसकी गुणवत्ता को भी सुनिश्चित किया गया है। स्तरहीन प्रशिक्षण संस्थाओं को चिन्हित कर बंद करवाने के कार्य किये गये हैं। करीब 37 संस्थाओं को बंद कर दिया गया है और लगभग 70 संस्थाओं पर कार्रवाई की जा रही है। यह निर्णय इसलिये लिया गया ताकि छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सके। श्री चौहान ने कहा कि शिक्षा के प्रमुख तीन उद्देश्य होते हैं। ज्ञान, कौशल और संस्कार। शिक्षा प्रणाली में यह उद्देश्य संतुलित तरीके से प्राप्त नहीं हो सकने के कारण बेरोजगारों की ऐसी फौज खड़ी हो गई है, जो केवल किताबी ज्ञान संपन्न है। प्रदेश में प्रयास किया गया है कि जो शैक्षणिक शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें उसका पूरा अवसर मिले। वही व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने वालों को भी सरकार का भरपूर सहयोग मिले। राज्य में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना लागू की गई है। योजना में मेधावी छात्रों को चाहे वे मेडिकल-इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थाओं में अथवा व्यवसायिक शिक्षा के शिक्षण केन्द्रों में प्रवेश लेते हैं उनकी फीस राज्य सरकार द्वारा भरवाने की व्यवस्था की गई है। प्रयास है कि प्रतिभा की उन्नति में धन की कमी बाधा नहीं बने। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में गत दिवस करीब साढ़े छह करोड़ पौधों का रोपण करने के लिये प्रदेश की जनता के प्रति आभार ज्ञापित किया। पर्यावरण को बचाने और पृथ्वी के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के प्रयासों के प्रति जनता के कर्त्तव्य-पालन के लिये बधाई प्रेषित की। केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि मेक इन इंडिया को सफल बनाने के लिये मेकर्स ऑफ इंडिया की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्किल इंडिया द्वारा इस दिशा में विजनरी पहल की है। उनके प्रयासों को पूरा करने में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश में जिस तेजी और दूरदर्शिता के साथ विकास की कोशिशें हो रही हैं, उनसे यह आभास हो रहा है कि विकास के सफल प्रयासों को देखने के लिये दुनिया के दूसरे देश यहाँ आयेंगे। उन्होंने प्रदेश में स्किल इंडिया की दिशा में किये जा रहे कार्यों की व्यापक सराहना करते हुए कहा कि कौशल उन्नयन के प्रयासों में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। केन्द्र सरकार के कौशल उन्नयन के सभी कार्यक्रमों तथा योजनाओं को एक साथ करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश ने आईटीआई की ऑनलाइन परीक्षा संचालित कर अन्य राज्यों को इस दिशा में पहल के लिये प्रेरित किया है। विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षणों की आधुनिक सुविधाओं का उल्लेख करते हुए श्री रूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल उन्नयन के विभिन्न कार्यक्रमों को एक मंत्रालय में समाहित कर विजनरी पहल की है। आई.टी.आई को कौशल उन्नयन विभाग में शामिल किया है। देश तेजी से गुणवत्तापूर्ण व्यवसायिक शिक्षा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रचलित व्यवसायिक शिक्षा की प्रचलित प्रणाली में गुणवत्ता का पूर्णत: अभाव था। आई.टी.आई. के 13 हजार संस्थानों में 127 पाठ्यक्रम संचालित होते हैं, जिनमें से मात्र इलेक्ट्रिकल और फिटर ट्रेडों में 18 लाख, अन्य 9 ट्रेडों में मात्र एक लाख और शेष में एक लाख विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। जबकि वर्तमान समय में उद्योगों की आवश्यकता एक ही ट्रेड में अलग-अलग तरह के विशेषज्ञ प्रशिक्षण की है। उन्होंने कहा कि डिग्री आधारित बेरोजगारों की फौज खड़ी करने वाली शिक्षा प्रणाली पर विचार किया जाना चाहिये। केन्द्रीय मंत्री ने प्रदेश में पौध-रोपण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क एक ऐतहासिक कदम है। व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिये 650 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि का निवेश सरकार की दूरदृष्टि का प्रमाण है। प्रदेश के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री की पहल मेक इन इंडिया, डिजिटल इण्डिया और स्किल इंडिया को सफल बनाने के लिये प्रतिबद्ध प्रयास कर रही है। आई.टी.आई. को अग्रणी संस्थान बनाने के प्रयास हुए हैं। आई.टी.आई. चलें अभियान द्वारा प्रदेश में 5 लाख युवाओं को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इउनमें से 70 प्रतिशत का रोजगार स्थापित कराने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क युवाओं के जीवन में परिवर्तन का मील का पत्थर साबित होगा। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर श्री के.श्रीकांत ने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क की पहल देश में कौशल उन्नयन के प्रयासों का मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना का प्रारूप उसकी सुपर सक्सेस को बता रहा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की सुश्री सॉगवान ली ने कहा कि भारत की स्किल इंडिया पहल में बैंक द्वारा तकनीकी सहयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की परियोजना बैंक की देश में 5वीं परियोजना है। इससे देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की संस्थानात्मक व्यवस्था में मजबूती आयेगी। उन्होंने परियोजना में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। आईटीईईएस सिंगापुर के श्री ब्रूस पो ने कहा कि स्किल्स पार्क प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक विकास प्रक्रिया को नई गति देगा। प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने परियोजना की जानकारी दी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ग्लोबल स्किल्स पार्क श्री संजीव सिंह ने आभार माना। कार्यक्रम में पार्क के आकल्पन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अतिथियों का बुक और पेन भेंट कर अभिनंदन किया गया। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री रूड़ी के साथ अकादमी के प्रांगण में नीम वृक्ष के पौधों का रोपण किया।  

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Dakhal News 4 July 2017


लश्कर कमांडर बशीर लश्करी

 दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में सेना और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में सेना को बड़ी सफलता मिली है। खबरों के अनुसार यहां एक इमरत में छिपे चार आतंकियों में से सेना ने दो को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों में लश्कर का कमांडर बशीर लश्करी भी बताया जा रहा है। फिलहाल दो आतंकी अब भी इमारत में छिपे हैं। सेना ने आतंकियों को घेर रखा है और दोनों तरफ से फायरिंग जारी है। खुद को बचाने के लिए आतंकियों ने कुछ लोगों को बंधक बना लिया है और अपनी ढाल के रूप में उपयोग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिन आतंकियों से मुठभेड़ जारी है । मुठभेड़ के दौरान आतंकियों के समर्थन में गांव वाले उतर आए हैं और सेना पर पथराव कर दिया है। इसमें एक महिला के घायल होने की खबर है। जानकारी के अनुसार यह मुठभेड़ दक्षिण कश्मीर में ब्रेंठी दियालगाम(अनंतनाग) में जारी है। बताया जा रहा है कि सुबह चार बजे सुरक्षाबलों ने ब्रेंठी दियालगाम में तीन आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर घेराबंदी करते ही तलाशी अभियान चलाया। तलाशी लेते हुए जवान जैसे ही आतंकी ठिकाना बने मकान के पास पहुंचे, अंदर छिपे आतंकियों ने उन पर गोली चला दी। जवानों ने भी जवाबी फायर किया और मुठभेड़ शुरू हो गई। इस बीच, स्थानीय मस्जिदों से सुरक्षाबलों के खिलाफ एलान हुआ और बड़ी संख्या में लोग जिहादी नारे लगाते हुए मुठभेड़ स्थल पर जमा होने लगे। उन्होंने घेराबंदी तोड़ने के लिए सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। सुरक्षाबलों ने पथराव के बावजूद संयम बनाए रखा और आतंकियों की गोलियों का जवाब देना भी जारी रखा। उन्होंने ग्रामीणों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान क्रासफायरिंग की चपेट में आकर दो लोगों की मौत हो गई। इमें एक महिला ताहिरा थी जो गोली लगने से गंभीर रुप से घायल हो गई। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत लाया घोषित कर दिया। डाक्टरों ने बताया कि 40 वर्षीय ताहिरा की पीठ पर गोली लगी थी जो उसके सीने से बाहर निकली थी। ताहिरा की मौत की खबर फैलते ही ब्रेंठी, बटपोरा, दियालगाम और उसके साथ सटे इलाकों में भी तनाव पैदा हो गया। लोग हिंसा पर उतर आए और पूरे इलाके में पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झढ़पों का दौर शुरु हो गया। इस खबर के लिखे जाने तक सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ के साथ ही हिंसक प्रदर्शनों का दौर भी जारी था। यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि बशीर लश्करी ने ही गत माह अच्छाबल में पुलिस दल पर घात लगाकर हमला किया था। इसमें अच्छाबल के थाना प्रभारी फिरोज अहमद डार समेत छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। लश्करी को इस हमले के बाद पुलिस ने डबल ए श्रेणी का आंतकी घोषित कर उस पर पहले से घोषित 10 लाख के ईनाम को बढ़ाकर 12 लाख कर दिया था। लश्करी गत सप्ताह भी सोफ गांव में सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़ भागने में कामयाब रहा था।

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Dakhal News 1 July 2017


narendr modi

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को मोडासा में दो जल परियोजनाओं का उद्घाटन किया. मोदी ने यहां अरावली में एक वाटर सप्लाई स्कीम की शुरुआत भी की है. इसके अलावा पीएम मोदी आदिवासी और युवाओं को भी संबोधित किया. इसके अलावा मोदी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में इंटरनेशनल टैक्सटाइल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेंगे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मोडासा सेमेरा पुराना नाता है. मालपुर मोधरज पुरा रूट घूमते-घूमते यहां के लोगों के साथ जूड़ने और जीने का मौका मिला है. आज जब पानी कि इतनी बड़ी योजना अपने घर आंगन आयी है तब अब तक जिंदगी में जितनी दिवाली मानायी हैं इतनी सभी दिवाली को इकट्ठा मनाने का मौका है. पीएम मोदी ने कहा कि जब भी बीजेपी को गुजरात की जनता की सेवा करने का मौका मिला है, चाहे वो केशुभाई हो या आंनदी बेन हो, विजय भाई हो या में खुद हुं, आप एक बात देखना बीजेपी ने जितनी सरकार बनायी ओर आपने जितना समय बीजेपी को सेवा करने का मौका दिया हमने कभी ऐसा-वेसा काम नहीं किया, कभी काम में लापरवाही नहीं की. गुजरात के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि पूरे देश में गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा इसलिये होती है क्योंकि हमारी सरकार ने कभी थोड़े वक्त के राजनीतिक स्वार्थ वाले लोगों की तरह काम नहीं किया, हमने हमेशा लीपापोती वाले काम को छोड़ मजबूती के साथ काम किया है. मोदी ने कहा कि गुजरात का सर्वांगीण विकास करना है तो गुजरात के कोने-कोने में पानी बहाकर ही गुजरात का विकास होगा. वो सपना हमने देखा है. उन्होंने कहा कि इस राज्य की युवा पीढ़ी को शिक्षित करने का जिम्मा उठाया है. पीएम मोदी ने कहा कि पानी और बिजली की किल्लत से यहां की जनता ने काफी दिक्कतें झेली हैं और अब उसे दूर करना चाहते हैं. केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब किसान को वो मजबूरी की जिंदगी जीने की जरूरत नहीं है, सरकार की ईनाम योजना के तहत के व्यवस्था की गई है कि किसान अपने मोबाइल से ही देश की 400 मंडियों से जुड़ सकता है. किसान जिस भी राज्यों में फसल के दाम ज्यादा हों, वहां जाकर अपनी फसल बेच सकता है. अब किसान खुद अपनी फसल के दाम तय कर रहा है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की उपलब्धि बताते हुए मोदी ने कहा कि यह ऐसी योजना है जिसे मेरे देश का किसान सुरक्षित महसूस कर पायेगा. अब तक जो भी फसल बीमा योजना आयीं वो बेंकों के लोन के इर्दगिर्द रहती थी, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऐसी है जिसमें किसान ने 100 रुपये का प्रीमियम हो तो सिर्फ 5 रुपये किसान को देने होंगे और 95 रुपये राज्य सरकार देगी. इससे पहले गुरुवार को पीएम मोदी ने राजकोट में रोडशो भी किया, यहां एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि 40 साल बाद कोई पीएम राजकोट आया है. राजकोट की मेरे दिल में खास जगह है. मेरे राजनीति की शुरुआत गुजरात से हुई है. उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की जिम्मेदारी सिर्फ उनके परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की है. आजादी के 70 साल के बाद भी साइन लैंग्वेज हिंदुस्तान के हर राज्य में अलग-अलग है. दिव्यांग जनों के इस भाषा में भी भेद था. इसलिए पूरे देश में दिव्यांग कहीं जाता था और कुछ समझता था तो उसे समझने के लिए कोई इंटरप्रेटर नहीं था. गुरुवार को साबरमती आश्रम में संबोधन भी किया. मोदी ने यहां गौरक्षा पर लगातार देशभर में हो रही हिंसा पर कड़ा संदेश दिया, तो वहीं लगातार देशभर भीड़ के द्वारा हो रही हिंसा पर भी दुख जताया. पीएम मोदी ने इस दौरान एक वाकया भी सुनाया, जिसे सुनाते वक्त वह काफी भावुक हो गए थे. मोदी ने अपने बचपन का एक किस्सा सुनाया. मोदी ने कहा कि कहीं एक्सिडेंट होने पर भी लोग एक दूसरे को मारने पर उतारू हो जाते हैं. गाय की रक्षा, गौ की भक्ति महात्मा गांधी, विनोबा जी से बढ़कर कोई नहीं कर सकता है. देश को उसी रास्ते पर चलना होगा. मोदी ने कहा कि विनोबा जी ने जीवन भर गौ रक्षा के लिए काम करते रहे, मैं उनसे भी मिला भी था. पीएम मोदी बोले कि देश को अहिंसा के रास्ते पर चलना ही होगा.    

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Dakhal News 30 June 2017


naxli jam

  सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई में मारे गए नक्सलियों से छत्तीसगढ़ में नक्सली बौखला गए हैं। शुक्रवार को नक्सलियों ने राजनांदगांव-पेंदोडी मार्ग पर पेड़ों को काटकर रख दिया और पोस्टर बैनर लगाए। मिली जानकारी के मुताबिक नक्सलियों ने मानपुर-कोहका मार्ग पर कोरकोटी के पास पेड़ों को काटकर मार्ग अवरूद्ध कर दिया और पोस्टर बैनर लगाकर मारे गए नक्सलियों के प्रति संवेदना जताई और बंद का आह्वान किया। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण यहां सड़क के दोनों ओर जाम की स्थिति निर्मित हो गई। जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन के अधिकारी व पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंचे और कटे पेड़ों को हटाकर यातायात व्यवस्था दुरुस्त की और पोस्टर बैनर हटाए।  

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Dakhal News 30 June 2017


छत्तीसगढ़ सरकार

छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार से वित्त पोषित कई ऐसी योजनाएं हैं, जिनमें समय पर पैसा न मिलने से काम अटका है। मनरेगा जैसी योजनाओं में अब पैसा आ रहा है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई आदि विभागों में कई योजनाओं में पैसा मिलने में लेटलतीफी की शिकायतें आ रही हैं। अब मुख्यमंत्री सचिवालय ने सभी विभागों से ऐसी लंबित परियोजनाओं की जानकारी मांगी है, जिनका प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है, लेकिन पैसा नहीं मिला है। मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध कुमार सिंह ने लिखा है कि यह जानकारी इसलिए चाहिए, ताकि सांसदों को मानसून सत्र के पहले प्रदेश की योजनाओं की पूरी जानकारी दी जा सके। सांसद जानकारी के आधार पर संसद में प्रश्न पूछ सकें और चर्चा में भाग ले पाएं। सीएम सचिवालय ने कहा है कि सरकार ऐसी कई योजनाएं चलाती हैं, जिनकी स्वीकृति केंद्र से मिलती है। ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन की राशि पूर्णतः या अंशतः केंद्र से मिलती है। विभागों से कहा गया है कि ऐसी योजनाओं की जानकारी दें, जिनके प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं, लेकिन राशि नहीं मिली है। पहले से चल रही ऐसी योजनाएं, जिनका काम पैसा न मिलने से अटका हो, उसकी भी जानकारी मांगी गई है। सांसदों को राज्यहित के मुद्दे बताने के लिए यह भी पूछा गया है कि विभागों ने स्वीकृत परियोजनाओं में आवंटन पाने के लिए केंद्र के संबंधित मंत्री या सचिव को कब-कब पत्र लिखा। जो पत्र व्यवहार किया गया है, उसकी फोटोकॉपी भी देने को कहा गया है। समेकित बाल विकास परियोजना, हार्टीकल्चर, वन विकास परियोजना, मिड डे मील, स्मार्ट सिटी परियोजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय आयुष मिशन, कृषि, राष्ट्रीय ग्रामीण लाइवलीहुड मिशन आदि परियोजनाओं में जून के महीने में कोई पैसा नहीं मिला है। पीएम आवास योजना, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप आदि योजनाओं में भी पैसा नहीं मिला है। हालांकि मनरेगा में इस महीने अब तक का पूरा बकाया मिला है। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव पीसी मिश्रा ने बताया कि पीएम आवास के लिए पैसा मांगा गया है। केंद्र से आश्वासन मिला है कि इसी हफ्ते राशि जारी कर दी जाएगी। केंद्र सरकार ने शिक्षा विभाग का करीब एक हजार करोड़ रूपया रोक रखा है। सर्व शिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा मिशन, साक्षरता मिशन आदि सभी मदों में पैसे का इंतजार किया जा रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के पैसे से शिक्षाकर्मियों का मानदेय दिया जाता है। इस मद में राज्य सरकार अपने खाते से एडवांस जारी करके काम चला रही है।  

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Dakhal News 29 June 2017


योगी सरकार

उमेश त्रिवेदी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अपने पहले सौ दिनों के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश करना पिछले कुछ सालों से चलन में आए उसी कर्मकांड की अगली कड़ी है, जिसमें सरकारें कैलेंडर के हिसाब से अपनी पीठ थपथपाकर खुश होती हैं। पांच साल के लिए चुनी जाने वाली सरकारों के कामकाज के दिनों के हिसाब से आकलन के लिए काफी हद तक मीडिया भी जिम्मेदार है, जिसने इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। वास्तव में यह प्रवृत्ति किसी भी निर्वाचित सरकार की उपलब्धियों को सेमिस्टर सिस्टम की तर्ज पर आकलन करने की प्रथा के औचित्य पर ही सवाल खड़े करती है। क्योंकि इसके मूल में कामकाज के आकलन से ज्यादा राजनीतिक शो बाजी का भाव ज्यादा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूरे तामझाम के साथ अपनी सरकार के सौ दिनों की कामयाबियों का चिट्ठा एक बुकलेट के जरिए पेश किया। इसमें यूपी को भ्रष्टाचार मुक्त शासन का देने, कानून व्यवस्था सुधरने के दावे  तथा  राज्य को परिवारवाद से मुक्त कराने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है। योगी ने अपनी सरकार की वाहवाही के साथ यह दावा भी किया कि इस सरकार ने पिछली सरकारों की तुलना में बेहतर काम किया है। खासतौर से कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मामले में योगी के मुताबिक उनकी सरकार का काम उल्लेखनीय रहा है। खासकर एंटी रोमियो स्क्वाड तथा किसानों की कर्जमाफी योगी सरकार के प्लस प्वाइंट्स हैं। इनके अलावा राज्य को बिजली संकट और  सड़कों के काफी हद तक गड्ढा मुक्त होने के दावे भी किए गए हैं। आत्ममुग्धता के इन दावों को जमीनी हकीकत के आईने में देखें तो योगी राज में मात्र सौ दिनों में ही हिंसा और कानून व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ती नजर आती है। योगी इनसे जुड़े सवालों पर चुप्पी साध गए। दलित और गैर दलित में बढ़ते टकराव को भी उन्होंने खास अहमियत नहीं दी। जिसको लेकर खुद उनकी पार्टी भीतर से हिली हुई है। अलबत्ता इस मौके पर उन्होंने हर साल 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाने की घोषणा जरूर की।   सरसरी तौर पर योगी का यह रिपोर्ट कार्ड उन अन्य दूसरी सरकारों से अलग नहीं है, जो अपनी ही उपलब्धियों पर गदगद होती हैं। क्योंकि सत्ता मिलते ही राजनीतिक पार्टियां अपनी आंखों पर हरा चश्मा चढ़ा लेती हैं, जो पांच साल तक नहीं उतरता। जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, यह रंग और गाढ़ा होता जाता है, बिना यह देखे और समझे कि जमीनी वास्तविकता क्या है? व्यवस्था में कहां पोल है? भाजपा उत्तर प्रदेश में बदतर कानून व्यवस्था को सुधारने के मुद्दे पर चुनाव जीत कर आई थी। क्योंकि लोग समाजवादी पार्टी की गुंडागर्दी और आए दिन होने वाले दंगा फसादों से त्रस्त थे। तटस्थ भाव से देखें तो यूपी में कुछ खास नहीं बदला है, सिवाय चेहरों के। उल्टे दलित गैर दलित संघर्ष, अपराध और साम्प्रदायिक तनाव ने नए आयाम अख्तियार कर लिए हैं। यहां विचार का मुख्य मुद्दा सरकारों का दिनों पर आधारित कामकाज के आकलन के औचित्य  है। सरकार कोई फैक्टरी नहीं है कि इसमें प्रोसेस्ड माल के टाइम और फाइनल प्रॉडक्ट की मात्रा को डाटा के रूप में जनता को परोसा जाए।  हर नई सरकार सत्ता में आते ही सौ दिनों में कायाकल्प के दावे इस अंदाज में करती है कि उसे ईश्वर  ने फरिश्ते की तरह भेजा है। जब जवाब तलबी की बात आती है तो कहा जाता है कि सरकार तो 1800 दिनों के लिए चुनी गई है। चुनाव में जो कहा, वो पूरा करने के लिए पूरे पांच साल हैं। यानी एक  तरफ उपलब्धियों के अवास्तविक दावे तो दूसरी तरफ जिम्मेदारी लेने से बचने की पतली गलियां। जब जनता आपको पांच साल के लिए चुनती है तो फिर अपने कामकाज को दिन और महीनों में बांटकर सरकारें क्या जताना चाहती हैं और किसको बताना चाहती हैं? क्या उन्हें पता नहीं होता कि जनता की हजार आंखें हैं जो किसी भी सरकार के दावे, वादे और उन पर अमल, जनकल्याण की कोशिशों की ईमानदारी, मंत्रियों का आचरण, प्रशासन की संवेदनशीलता, ईमानदारी और फर्जीवाड़े को हर पल देखती और उनकी रेटिंग रहती है। जबकि उपलब्धियों का सरकारी  रिपोर्ट कार्ड वास्तव में निर्जीव आंकड़ों की लघु कथा भर होता है। जिनके  भारी भरकम विज्ञापनों  का आम जनता की निगाह में कोई मूल्य नहीं होता। पब्लिक के सरकार को कसौटी पर कसने के अपने मानदंड होते हैं, जो निर्वाचित सरकार के कामकाज को समग्रता और व्यापक संदर्भों की पृष्ठभूमि में मूल्यमापित करती है। योगी सरकार का सौ दिनी रिपोर्ट कार्ड भी यूपी  की जनता को ऐसा चश्मा देने की कोशिश है, जिसमें से लोग वही देखें और बूझें, जो सरकार देखना और दिखाना चाहती है। हकीकत में यह खुद को भ्रम में रखना है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।[लेखक भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 28 June 2017


नक्सली कमांडर हिडमा

  छत्तीसगढ़ के सुकमा के तोंडामरका के जंगल में नक्सली कमांडर हिडमा की मौजूदगी के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने 'ऑपरेशन प्रहार' प्लान किया है। डीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने बताया कि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर ऑपरेशन किया गया, जिसका बेहतर रिस्पॉन्स मिला है। पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों ने बताया कि नक्सली कमांडर हिडमा को तलाशने की जिम्मेदारी आईबी को सौंपी गई है। केंद्र और राज्य की इंटेलिजेंस की टीम मिलकर हिडमा को निशाना बनाने के लिए काम कर रही हैं। बताया जा रहा है कि तोंडामरका के जंगल में रमन्ना, हिडमा, सोनू समेत करीब आधा दर्जन नक्सली कमांडर के साथ 200 से ज्यादा नक्सली जुटे थे। इसी सूचना के आधार पर नक्सलियों के सबसे बड़े गढ़ में ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों ने दावा किया कि नक्सलियों से मुठभेड़ में हिडमा को भी गोली लगी है। मोर्चे पर तैनात जवानों ने भी हिडमा की मौजूदगी की सूचना आला अधिकारियों को दी। घायल जवानों से पुलिस टीम ने मुलाकात की और घटना के बारे में ब्योरा लिया। घायल जवानों ने पुलिस के आला अधिकारियों को बताया कि 200 से ज्यादा नक्सलियों ने चारों तरफ से पुलिस पार्टी को घेर लिया था। जवानों की गोली भी खत्म हो रही थी, इसलिए जंगल से वापस लौटना पड़ा। एयर कामाडोर अजय शुक्ला ने हेलिकाप्टर में गोली लगने की पुष्टि की है। शुक्ला ने बताया कि जवानों को लेने जब हेलिकॉप्टर जा रहा था तो नक्सलियों ने गोलीबारी की। इस दौरान कुछ गोली हेलिकॉप्टर पर लगी है। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ है। वहीं फोरेंसिक की टीम जांच के लिए जा रही थी, लेकिन बारिश के कारण टीम नहीं पहुंच पाई। हेलिकाप्टर सुकमा में खड़ा है।

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Dakhal News 27 June 2017


MONSOON GOLD

    जशपुरनगर से एक शानदार खबर। मानसून की पहली दस्तक और नदियों में पानी के बहाव बढ़ते ही पारसाबहार विकासखंड के ग्रामीण मिट्टी से सोना निकालने में जुट गए हैं। क्षेत्र के दर्जनों गांवों में निवासरत ग्रामीणों का यह पारंपरिक व्यवसाय बन गया है। इन दिनों ग्रामीण नदियों के किनारे मिट्टी छानकर सोना निकालने में व्यस्त हैं। परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्य इस कार्य में जुट गए हैं। कृषि कार्य के लिए मानसून का इंतजार सभी को होता है। लेकिन पारसाबहार विकासखंड सहित कुनकुरी विकासखंड से जुड़े ग्रामीण मानसून का इंतजार सोना धातु की आस लिए करते हैं। यह सोना उन्हें कोई देने नहीं आता है बल्कि विशेष तकनीक का उपयोग कर यहां के नदी में ही सोना के कण ग्रामीणों को मिलते हैं, जिससे आसपास के ज्वेलर्स को ग्रामीण बेचते हैं। पारसाबहार विकासखंड से होकर गुजरने वाली नदी ईब, बघीयाकानी, पमशाला,उतियाल, लुलकीडीह और सोना जोरी नाला सहित छोटे जल स्त्रोत भी सोना के केंद्र हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि यहां ये नदियां सोना बहाकर लाती हैं। इनके पानी से सोना छानकर गांवों के लोग साल भर की रोजी-रोटी का जुगाड़ कर लेते हैं। लेकिन यह काम इतना आसान नहीं होता है। जशपुर जिले में मानसून के समय बाढ़ हमेशा बड़ी समस्या रही है। ये नदियां भी इस मौसम में खूब उफनती हैं। गांव के लोग बाढ़ कम होने का इंतजार करते हैं। जब पानी कम हो जाता है तो कुछ खास उपकरणों के साथ नदी में उतर जाते हैं। ग्रामीण नदियों द्वारा बहाकर लाई गई बालू और मिट्टी को एकत्रित कर विशेष तकनीक से छानते हैं। ग्रामीणों को इस प्रक्रिया में सोने के छोटे कण मिलते हैं, जिसे आसपास के बाजार में बेचा जाता है। यह एक जटिल प्रक्रिया होती है लेकिन क्षेत्र के रहवासियों के लिए यह आदत बन गई है। यह काम क्षेत्र के ग्रामीण वर्षों से करते आ रहे हैं। इस कार्य के लिए अब खास उपकरण का प्रयोग होने लगा है, जिसे प्रायः हर घर में पाया जाता है। पारसाबहार विकासखंड में नदी से सोना के कण ग्रामीण निकालकर धान के माप से बेचते हैं। तराजू के एक ओर जहां धान को मापक के रूप में रखा जाता है वहीं दूसरी ओर सोना होता है। वर्तमान में दो सो से तीन सौ रुपए में सोना ग्रामीण बेच रहे हैं। ज्वेलरी व्यवसाय से जुड़े लोग अब गांव-गांव आकर सोना खरीदने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे जितना मेहनत छोटे स्तर पर सोना निकालने में करते हैं, उससे उनकी मजदूरी भी ढंग से नहीं निकल पाता है।

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Dakhal News 26 June 2017


नक्सली मुठभेड़

  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शनिवार को नक्सलियों और पुलिस फोर्स के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों की संख्‍या अब तीन हो गई है। शहीद जवानों में कांस्टेबल कट्टम राजकुमार, सहायक आरक्षक सुनम मनीष और राजेश कोरमा शामिल हैं। कट्टम राजकुमार सुकमा जिले के एर्राबोर के कोगड़ा गांव के रहने वाले हैं। जबकि सुनम मनीष सुकमा के ही दोरनापाल स्थित बोदिगुड़ा के रहने वाले हैं। वहीं राजेश कोरमा कांकेर जिले के रहने वाले है। घायल जवान का नाम मडकम चंद्रा है जो सुकमा के एर्राबोर स्थित तेतरी गांव के रहने वाले हैं। सुकमा एसपी अभिषेक मीणा ने बताया कि शनिवार सुबह पौने नौ बजे से शुरू हुई मुठभेड़ चार घंटे तक चली। जवानों ने कई नक्सलियों को मार गिराया, लेकिन उनके शव लेकर नक्सली भागने में सफल हो गए। तोंडामरका मुठभेड़ में पांच एसटीएफ जवानों के घायल होने की सूचना के बाद जगदलपुर से वायुसेना का हेलिकॉप्टर रवाना किया गया था। बारिश के बीच हेलिकॉप्टर घायल जवानों को लाने के लिए तोंडामरका के जंगलों में उतरा और घायलों को लेकर सुरक्षित रायपुर के लिए रवाना हुआ।

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Dakhal News 25 June 2017


जीएसटी  तिरुपति के लड्डू

कौन-कौन सी चीजे जीएसटी इसके दायरे में और कौन-सी चीजों को इससे राहत मिली है, इसे लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। इस स्थिति से मंदिर के ट्रस्ट भी गुज़र रहे हैं, जो इस संशय में हैं कि क्या उन्हें जीएसटी से राहत मिलेगी। माना जा रहा था कि जीएसटी के दायरे में तिरुपति मंदिर के लड्डुओं, किराये पर दिए जाने वाले कमरों सहित कई चीजों को रखा गया है। इस संबंध में आंध्र प्रदेश के फाइनेंस मिनिस्टर वाय. रामाकृष्णाडु ने 17वीं GST कॉउन्सिल मीटिंग में निर्णय लिया कि लड्डुओं को टैक्स के दायरे से बाहर रखा जायेगा।यानी तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को 50-100 करोड़ रुपये जीएसटी टैक्स से मुक्त किया गया है।

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Dakhal News 22 June 2017


उमेश त्रिवेदी

उमेश त्रिवेदी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित करके विपक्ष के उन परिन्दों को हतप्रभ कर दिया है, जो विपक्षी एकता के नाम पर उनकी सत्ता के सुनहरे राजनीतिक जाल को लेकर उड़ जाना चाहते थे। विपक्षी-एकता के नाम पर चुनाव के राजनीतिक फलक पर उड़ने को आतुर 17 विपक्षी दलों के इस समूह की ताकत को पहला झटका बसपा की मायावती की ओर लगा है, जो दलित राष्ट्रपति के रूप में उनका समर्थन करने को मजबूर हैं। राजनीतिक-जमीन पर उनके भारी शब्दों की छटपटाहट स्पष्ट महसूस होती है कि यदि वो संघी नहीं होते तो ज्यादा अच्छा होता, लेकिन हमारे समर्थन के लिए उनका दलित होना पर्याप्त है। हार्ड-कोर संघी चेहरे को दलितों के कैनवास में पेश करके नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष के सामने सैद्धांतिक-संकट खड़ा कर दिया है कि वो दलित-विरोध के राजनीतिक गुनाहगार बनें या रामनाथ कोविंद की राहों से हट जाएं। वैसे भी विपक्ष राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद के राज-पथ पर ट्राफिक-जाम करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन मोदी चाहते हैं कि दलित राजनीति की इस तुरूप-चाल के आगे विपक्ष विधिवत आत्म-समर्पण करें।  राष्ट्रपति प्रत्याशी के रूप में कोविंद की यह पेशकश प्रधानमंत्री मोदी का मास्टर-स्ट्रोक है, जिसमें विपक्ष की उस हर राजनीति का जवाब है, जिसकों लेकर मोदी-सरकार हमेशा कठघरे में खड़ी होती रही है। गरीबों और दलितों के सवाल हमेशा भाजपा को सालते रहे हैं। सवर्ण हिन्दू पार्टी की पहचान अलावा गरीब-विरोधी छवि का राजनीतिक-बोझ सत्ता की राहों में भाजपा के सफर को हमेशा बोझिल बनाता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इस राजनीतिक बोझ से निजात पाने के कुछ स्थायी उपाय किए हैं। सबसे पहले नोटों के विमुद्रीकरण को अमीर काला-बाजारियों के खिलाफ मुद्दा बनाकर उन्होंने गरीबों में सफलतापूर्वक यह विश्वास पैदा किया कि वो गरीबों के पक्षधर प्रधानमंत्री हैं। अब राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद का नाम देश की दलित-राजनीति में खलबली पैदा कर रहा है।  कोविंद का चयन भाजपा के राजनीतिक-डीएनए को बदलने वाला ऐतिहासिक उपक्रम है, जो उसकी पहचान को नई राजनीतिक-चमक देने वाला है। विमुद्रीकरण के बहाने गरीबों में भाजपा की धमक जमाने के बाद मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष का वह दलित-एजेण्डा था, जो उनकी सरकार के लिए परेशानियों का सबब रहा है। दलित-आंदोलन के सवालों के आगे असहाय मोदी-सरकार ने बाबा साहब अंबेडकर के बहाने समाधान ढूंढने के जो प्रयास किए थे, वो किताबी ज्यादा,जमीनी कम थे। इधर, मोदी अंबेडकर का जाप करते थे, उधर हैदराबाद सेण्ट्रल यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की फांसी राजनीतिक आरोंपो का फंदा बनकर सामने खड़ी हो जाती थी।  अपने तीन साल का कार्यकाल में मोदी-सरकार ने सबसे ज्यादा दलित सवालों से जुड़े आंदोलनों का सामना किया है। जनवरी 2016 में रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद गुजरात में जिग्नेश मेवानी दलित आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे थे। गुजरात में गौ-रक्षकों व्दारा दलितों की कोड़ों से पिटाई के बाद भड़के दलित आंदोलन ने पूरे देश के माहौल में गरमाहट पैदा कर दी थी। हार्दिक पटेल के नेतृत्व में पिछड़ा-वर्ग के आंदोलन ने इसमें घी का काम किय़ा था। उत्तर प्रदेश में योगी-सरकार के गठन के बाद हाल ही में सहारनपुर में भभकी दलित आंदोलन की आग ने सारे देश को तपा सा दिया है। इस आंदोलन से उपजी भीम-आर्मी की सवर्ण ठाकुरों के अत्याचारों के विरूद्ध सामाजिक विद्रोह के राजनीतिक मायने गहरा अर्थ रखते हैं। इस दलित-सवर्ण संघर्ष में दलित नेता के रूप में चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का अभ्युदय नई राजनीति का ऩया अध्याय प्रतीत होता है।  प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी इस तथ्य को बखूबी आंक रहे है कि पिछले सभी दलित आंदोलन की कोख से राजनीति का नया चेहरा सामने आ रहा है। जिसका राजनीतिक-समाधान जरूरी है। नए दलित नेताओं की उपज देश में परम्परागत दलित राजनीति को खारिज कर रही है। भाजपा राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविंद के दलित चेहरे को सामने रख कर इसका जवाब तैयार करना चाहती है। गरीब और दलितों के मसीहा के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहचान को पुख्ता करने के लिए भाजपा ने यह कदम बढ़ाया है। 72 साल के  रामनाथ कोविंद की प्रस्तुति को परम्परागत राजनीति की बासी कढ़ी में नया उबाल इसलिए नहीं कहा जाएगा कि भाजपा में पुराने होने के बावजूद नए जैसे हैं। मोदी-मेजिक के पिटारे से कलंदरी अंदाज में कोविंद लोगों के सामने निकले हैं। सक्रिय राजनीति के राडार पर उनकी हस्ती हमेशा गुमशुदा रही है। अभी लोग उनके बारे में उतना ही जानते है, जितना विकीपीडिया में लिखा है। मोदी की थीसिस के अनुसार यह नामजदगी भाजपा के 'टोटल-ट्रांसफार्मेशन' के 'केमिकल प्रोसेस' का अंतिम पर्याय हैं, जिसके जरिए नरेन्द्र मोदी 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीतिक-संरचना करेंगे। देश में दलित-मतदाताओं की संख्य़ा 16 प्रतिशत है। जाहिर है मोदी के दिलो-दिमाग पर इस वक्त 2019 हावी है। भाजपा के राजनीतिक-रूपांतरण की इस पहल के जवाब में विपक्ष लगभग लाजवाब है। [लेखक उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 21 June 2017


tata f 16

टाटा व लॉकहीड के बीच करार लड़ाकू विमान एफ-16 अब भारत में भी बनेगा। लॉकहीड मार्टिन और टाटा की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम ने इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय वायुसेना को सोवियत के समय की फ्लीट को बदलने के लिए सैकड़ों विमानों की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि इन विमानों को स्थानीय साझेदार के साथ मिलकर भारत में बनाना होगा। पेरिस एयरशो में सोमवार को करार का एलान करते हुए दोनों कंपनियों ने कहा कि भारत में उत्पादन शुरू करने के बावजूद अमेरिका में नौकरियां बनी रहेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में रोजगार सृजन अभियान के चलते इस पहल को लेकर आशंका थी। स्वीडन की कंपनी साब भी भारतीय वायुसेना को विमान आपूर्ति करने की दौड़ में है। कंपनी ने भारत में ग्रिपेन फाइटर बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। कंपनी ने अभी भारत में किसी साझेदार का एलान नहीं किया है। टाटा और लॉकहीड का समझौता मोदी की अमेरिका की यात्रा से ठीक पहले हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करेंगे। हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका ने करीबी रक्षा संबंध बनाए है। भारत को हथियारों की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देशों में अमेरिका शामिल है। अन्य देश रूस और इजरायल हैं। भारत में बनने वाले एफ-16 विमान के निर्यात होने की भी उम्मीद है। 26 देशों में 3200 एफ-16 विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत में एफ-16 का अब तक का सबसे आधुनिक मॉडल ब्लॉक 70 बनेगा। टाटा ग्रुप पहले से ही सैन्य मालवाहक विमान सी-130 के लिए एयर फ्रेम कंपोनेंट बना रहा है। भारत ने अभी तक जेट के ऑर्डर की औपचारिक बोलियां नहीं मंगाई है। भारत कम से कम 100 से 250 विमान खरीद सकता है।  

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Dakhal News 21 June 2017


शिवसेना कोविंद

  शिवसेना को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में रामनाथ कोविंद का नाम रास नहीं आया। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुंबई में साफ कर दिया है कि दलित समाज का मत पाने के लिए यदि दलित नाम दिया जा रहा है, तो उसमें उनकी कोई रुचि नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद पर दलित समाज के किसी व्यक्ति को सिर्फ दलित समाज का ध्यान रखकर नहीं बैठाना चाहिए। राष्ट्रपति पूरे देश का भला करनेवाला होना चाहिए। यदि इस दृष्टि से कोई उम्मीदवार चुना गया होता, तो हम साथ रहते। लेकिन वोटों की राजनीति करने के लिए किसी दलित को उम्मीदवार बनाया जाना शिवसेना को मंजूर नहीं है। उद्धव ने बालासाहब ठाकरे को याद करते हुए कहा कि वह कहते थे कि भारत हिंदू राष्ट्र है। इसी दृष्टि से हमने हिंदुत्व और देशहित में मोहन भागवत का नाम सुझाया था। यदि उसमें कोई अड़चन थी, तो देश में हरित क्रांति लानेवाले कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को उम्मीदवार बनाया जा सकता था।उद्धव सोमवार शाम शिवसेना के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत के अनुसार राष्ट्रपति पद के राजग उम्मीदवार के नाम की घोषणा के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उद्धव ठाकरे से फोन पर संपर्क कर उनसे कोविंद के नाम पर समर्थन का आग्रह किया। इसके जवाब में उद्धव ने कहा था कि वह अपनी पार्टी की बैठक के बाद ही इस संबंध में कोई निर्णय कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने इस संबंध में अपना रुख सोमवार को ही स्पष्ट कर दिया।  

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Dakhal News 20 June 2017


नक्सलियों के नए जोन

  मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बीच बन रहे नक्सलियों के नए जोन (राज्य) में सेंट्रल कमेटी के बड़े नक्सली नेताओं की आमद के भी संकेत मिले हैं। दिसंबर, 2016 में राजनांदगांव जिले में हुई एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने जो दस्तावेज बरामद किया है, उसमें पॉलिटिकल और इकॉनामिक वीकली पत्रिकाएं भी मिली हैं। नक्सलियों ने नए जोन का कमांडर सुरेंद्र को बनाया है, जो बस्तर के गोलापल्ली का रहने वाला बताया जा रहा है। नया जोन बनाने के लिए बस्तर से जो 58 नक्सली भेजे गए हैं, वे सभी वहां के स्थानीय हैं। ऐसे में अंगे्रजी की पत्रिकाएं मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि इस इलाके में नक्सलियों के बड़े लीडर भी डेरा जमा रहे हैं। दुर्ग आईजी दीपांशु काबरा का कहना है कि उस इलाके में नक्सलियों की रणनीति पर पुलिस का पूरा फोकस है। चुनौती से निपटने की तैयारी पहले से चल रही है। ज्ञात हो कि अप्रैल 2017 में एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने नक्सलियों का 25 पेज का एक दस्तावेज बरामद किया है। इससे पता चला है कि नक्सली छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, कवर्धा, मुंगेली, मध्यप्रदेश के बालाघाट और महाराष्ट्र के गोंदिया जिलों को जोड़कर एक नया जोन खड़ा कर रहे हैं। इस जोन को एमएमसी जोन कहा गया है। दस्तावेज में नक्सलियों ने कहा है कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। हर छह महीने के लिए कम से कम 50 किलो गन पाउडर, 3 हजार पीस लोहे के टुकड़े, 25 पाइप, 20 बंडल वायर, 10 फ्लैश तैयार रखना होगा। फोर्स का पीछा करने के बजाय एंबुश लगाने की बात इस दस्तावेज में कही गई है। नक्सलियों ने लिखा है कि हम यहां के लोगों की समस्या समझने में सफल नहीं हुए हैं। जमीन की ज्यादा दिक्कत नहीं है। बांस और तेंदूपत्ता के दामों पर एरिया कमेटी और डिवीजन कमेटी ने ज्यादा काम नहीं किया है। हमारे नए जोन में तीन राज्य हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र में बांस का अलग-अलग रेट है। स्थानीय कैडर से कहा है कि इस साल सितंबर तक बांस के मामले में एक्शन प्लान तैयार करो। तीनों राज्यों में क्या दाम है, कितना बोनस है यह पता करो। बांस कौन काट रहा है, वन सुरक्षा समिति, पेपर मिल, ठेकेदार या वन विभाग यह पता लगाएं। मध्यप्रदेश के मलाजखंड में तांबा खदानों में 70 फीसदी स्थानीय को रोजगार देने का मुद्दा भी उठाने की बात कही गई है। नक्सल दस्तावेज में कहा गया है कि गोपनीयता नहीं रखी जा रही है। कैडर जल्दबाजी कर रहे हैं। कैडर से राजनीति और प्लानिंग पर और बात करने की जरूरत है। कहा है-वाकी-टाकी या फोन पर बात करते हुए हमेशा कोडवर्ड इस्तेमाल करें। इसमें कहा गया है कि हमारे कैडर के लोग छत्तीसगढ़ी और हिंदी सीखने में रूचि नहीं दिखा रहे। ऐसे में जनता से कैसे जुड़ेंगे। भाषा सीखने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमेशा सतर्क रहने को कहा है। लिखा है-कैडर किसी पेड़ के पास होते हैं तो बंदूक पेड़ से टिका देते हैं जबकि उसे हमेशा कंधे पर रखना चाहिए। संतरी को हमेशा बंदूक लोड रखनी चाहिए।  

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Dakhal News 19 June 2017


ट्रंप की गाज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लाखों अवैध अप्रवासियों को देश से निकाले जाने की योजना में छूट के प्रस्ताव को गुरुवार को रद्द कर दिया। इससे तीन लाख भारतीयों समेत करीब 40 लाख अवैध अप्रवासियों को अमेरिका से निकाले जाने का खतरा है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2014 में "डेफर्ड एक्शन फॉर पेरेंट्स ऑफ अमेरिकंस एंड लॉफुल पर्मनेंट रेसिडेंट्स" यानी "डापा" नीति के तहत अवैध अप्रवासियों को राहत दी थी। इस नीति से उन 40 लाख लोगों को राहत मिलना थी, जो 2010 के पहले से अमेरिका में रह रहे हैं, जिनकी संतानों ने अमेरिका में जन्म लिया और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अब ऐसे परिवारों पर अमेरिका से निकाले जाने का खतरा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन 2012 की "डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स" यानी "डैका" नीति को बने रहने देगा। इसके तहत, अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करने वाले नाबालिग बच्चों को अस्थाई राहत देगा। उन्हें अमरीकी स्कूलों में पढ़ाई पूरी करने तक ठहरने की अनुमति मिलेगीमानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नए आदेश से मानवीय संकट पैदा होगा क्योंकि अवैध अप्रवासियों के बच्चे अमेरिका में जन्मे हैं और वे वैध नागरिक हैं। ऐसे में उनके माता-पिता को निकाला गया तो बड़ा मानवीय संकट खड़ा होगा। ट्रंप ने क्यूबा समझौता रद्द किया, ओबामा के समझौते को बताया "एकतरफा" ट्रंप ने पूर्ववर्ती बराक ओबामा द्वारा किए गए ऐतिहासिक क्यूबा समझौते को "भयावह और भ्रमित" करने वाला बताते हुए इसे रद्द करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही ट्रंप ने क्यूबा पर नए यात्रा और व्यापार प्रतिबंध लगा दिए। क्यूबा सरकार ने अमेरिका की नई नीति को तत्काल खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने क्यूबा पर लगे यात्रा एवं व्यापार प्रतिबंधों में जो ढील दी थी, उससे क्यूबा के लोगों को कोई मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने समझौते को एकतरफा तक करार दे दिया। हालांकि ट्रंप ने क्यूबा में अमेरिका दूतावास को बंद करने का फैसला नहीं लिया। मालूम हो कि दिसंबर 2014 में अमेरिका और क्यूबा के संबंधों में सुधार देखने को मिला था। ओबामा ने क्यूबा के साथ संबंध सामान्य करने का ऐलान किया था। ओबामा मार्च 2016 में क्यूबा की अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर भी गए थे, जो 1959 के बाद अमेरिका के किसी राष्ट्रपति की पहली क्यूबा यात्रा थी।  

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Dakhal News 18 June 2017


 किसान महापड़ाव

  महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान में किसान आंदोलन शुरू हो रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ की ओर से गुरुवार से राजस्थान के 8 बड़े शहरों में महापड़ाव किया जाएगा। किसान संघ के अध्यक्ष मणिलाल लबाना के अनुसार यह महापड़ा व तब तक जारी रहेगा जब तक कि सरकार किसानों की मांगों पर कोई लिखित ठोस आश्वासन नहीं देती। उधर किसान आंदोलन को देखते हुए राजस्थ्ज्ञान सकार ने सभी कलक्टरों व छुट्टियां निरस्त कर दी है और पुलिस को अलर्ट कर दिया हैं। राजस्थान के आठ शहरों जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, अजमेर और सीकार में किसानों ने जुटना शुरू कर दिया है। संघ हालांकि यह स्पष्ट कर चुका है कि आंदोलन शांतिपूर्ण होगा लेकिन असमाजिक तत्वों के कारण कोई विवाद हुआ तो संघ के अनुसार उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। दूसरी और राज्य सरकार किसान आंदोलन को देखते हुए अलर्ट पर है। प्रदेश के सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अवकाश रद्द कर दिए गए है।  

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Dakhal News 16 June 2017


हेलीकॉप्टर सौदा

  प्रधानमंत्री नरेंद मोदी इस महीने अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं और इससे पहले बड़ा झटका देते हुए भारत ने 6500 करोड़ का हेलीकॉप्टर सौदा रद्द कर दिया है। इस सौदे के तहत नौसेना के लिए 16 हेलीकॉप्टर खरीदे जाने वाले थे। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार बजट में सैन्य साजो सामान के लिए कम राशि के चलते सेना को खरीदी में काफी मोल भाव करना पड़ता है और इसके चलते उसने अब मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने का फैसला किया है। दरअसल भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाले देशों में है और अब सेना इन हथियारों का निर्यात कम करना चाहती है। पीएम मोदी 25 जून को अमेरिका जा रहे हैं और वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। उनके दौरे से पहले यह सौदा रद्द करने का यह कदम काफी बड़ा माना जा रहा है।

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Dakhal News 15 June 2017


shivraj or kisan

  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का भाषण हो या अफसरों की फाइलें किसानों से संबंधित योजनाओं की फेहरिस्त खासी लंबी होती है। लेकिन ये योजनाएं किसान के खेत-खलियान तक क्यों नहीं पहुंच पाती ये शायद वही सवाल है जिसका जवाब जानने मध्यप्रदेश का किसान सड़कों उतर आया है। मध्यप्रदेश में किसानों के नाम पर करीब 30 से ज्यादा योजनाएं चल रही हैं। इसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों की योजनाएं शामिल है लेकिन जमीन पर इनका लाभ बहुत कम किसानों को मिल पाता है। यदि ढूंढा जाए तो पूरी तहसील में सिर्फ 5 या 10 ही प्रगतिशील किसान मिलते हैं। मध्यप्रदेश सरकार का इस साल का कृषि बजट 33 हजार 564 करोड़ रुपए है। सरकार अगर कृषि पर करोड़ों रुपए फूंक रही है तो भी किसान आगे क्यों नहीं बढ़ रहा है। किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी ग्राम सेवकों की है लेकिन कई जगह ग्राम सेवक गांव में जाते ही नहीं हैं। इनके बहुत कम किसानों से संपर्क होते है। इनके जरिए ही बीज, खाद या दवा किसानों तक पहुंचती है जिसकी कीमत बाजार से आधी होती है। कई किसान शिकायत भी करते हैं कि ग्राम सेवकों से मिलने वाली कीटनाशक या दूसरी तरह की दवाईयां बहुत कम प्रभावी होती हैं। इस कारण किसान मजबूरी में बाजार से ही कीटनाशक दवा लेता है जिससे उसकी लागत बढ़ जाती है। योजनाएं  राज्य सरकार कृषि उपकरण,खेत में पाइपलाइन,पंपसेट स्प्रिंकलर, ट्रेक्टर के लिए कीमत में 25 से 50 फीसदी तक की सबसिडी देती है। उद्यानिकी विभाग भी पॉलीहाउस,फल-फूल की खेती, मधुमक्खी पालन, सरंक्षित खेती और सूक्ष्म सिंचाई के लिए सबसिडी देता है।सबसिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन अपने बैंक खाते की जानकारी के साथ एमपीएफटीएस (मध्यप्रदेश फार्मर सबसिडी ट्रेकिंग सिस्टम) पर रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। ज्यादातर योजनाओं में सबसिडी का पैसा सालभर तक नहीं मिलता है। लिहाजा किसान इसका फायदा नहीं उठा पाता।यदि किसान कुआं खुदवाता है बोरिंग करवाता है तो उसे पंप पर 50 फीसदी की सबसिडी मिलती है। लेकिन यह सबसिडी आवेदन के एक साल बाद मिलती है। सरकार पॉलीहाऊस लगाने के लिए भी 50 फीसदी सबसिडी देती है। लेकिन यहां भी सबसिडी काफी देर से मिलती है और किसान साहूकार से कर्ज लेकर उसके चंगुल में फंस जाता है  

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Dakhal News 14 June 2017


संत हिरदाराम

मुख्यमंत्री शिवराज ने समाज-सेवियों का किया सम्मान  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संत हिरदाराम सेवा का अवतार थे। वे दुनिया में सेवा के लिये आये थे। उनका पूरा जीवन सेवा साधक का था। श्री चौहान आज संत हिरदाराम ऑडिटोरियम में समाजसेवी और वरिष्ठजन सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम संस्कार प्रबुद्ध नागरिक मंच द्वारा किया गया था। श्री चौहान ने कहा कि कार्यक्रम का नियमित आयोजन किया जाना चाहिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि देश, समाज और दूसरों के लिये जीना ही सही अर्थों में जीवन जीना है। ऐसे व्यक्तियों का सम्मान होना चाहिये, जिनका जीवन समाज की सेवा में समर्पित है। उन्होंने कहा कि भारत का वैभवशाली इतिहास है। जब दुनिया के देशों में सभ्यता और संस्कृति के चिन्ह भी नहीं थे, तब भारत में ऋचाओं की रचना हुई, विश्वविद्यालय संचालित थे। उन्होंने कहा कि सिंधु के किनारे जो सभ्यता विकसित हुई, उसी ने ऐसे महान भारत का निर्माण किया है, जो विश्व के कल्याण की कामना और उसे परिवार मानने की चेतना का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि बुराई और अच्छाई का संघर्ष शाश्वत है। अच्छी सोच और अच्छे कार्य करने वाले निरंतर प्रयास करते रहे हैं और कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रवृत्तियों ने शांत मध्यप्रदेश को हिंसा की आग में झोंकने का असफल प्रयास किया। ऐसे तत्वों का कठोरता से दमन किया जायेगा। साथ ही इंसानियत और मानवता को जगाने के प्रयास भी जारी रहेंगे। उनका उपवास ऐसा ही प्रयास था। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की कार्य-योजना तैयार है। इस कार्य-योजना में सभी की आवश्यकताएँ और विचार शामिल हो जाये, इसके लिये आगामी 15 से 25 जून के मध्य संभागायुक्त और कलेक्टर के समक्ष सुझाव दिये जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पट्टे देने का फार्मूला भी पूरे प्रदेश के लिये तैयार है। उस पर भी समाज विचार-विमर्श कर ले। उन्होंने रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण केन्द्र सरकार के सहयोग से करवाने की जरूरत बताई। श्री सिद्ध भाऊ जी ने सरकार द्वारा जन-कल्याण के लिये प्रखर सृजनात्मकता के साथ किये गये कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बालिकाओं से संबंधित प्रदेश की अनेक नवाचारी योजना का अन्य राज्यों ने भी अनुकरण किया है। उन्होंने कहा कि दया, धर्म का मूल है। जिसमें दया नहीं, वह कभी भी सुखी नहीं रह सकता। उन्होंने गाय के महत्व को बताते हुए, पंचगव्य चिकित्सा की सार्थकता बताई। उन्होंने सम्मान समारोह की सराहना की और कहा कि इस से भावी पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। सांसद श्री आलोक संजर ने कहा कि प्रदेश में समस्याओं के समाधान के लिये जो प्रयास हुए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। सरकार के प्रयासों की सर्वत्र सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि हिंसा की आग को उपवास के ठंडे जल से शांत करने के सफल प्रयास ने अन्य राज्यों के जन-प्रतिनिधियों को भी प्रभावित किया है। उनका दिग्दर्शन किया है। विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि बैरागढ़ रेलवे स्टेशन को संत हिरदाराम के नाम पर किये जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगरवासी उच्च विचारों को जीवित रखने के लिये समर्पित हैं। समारोह के प्रारंभ में अतिथियों ने भारत माता और संत हिरदाराम के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्जवलन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समाज की पत्रिका का विमोचन किया और समाजसेवियों-वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया। प्रारंभ में बालिकाओं द्वारा स्वागत गीत और अंत में वंदे-मातरम का गायन हुआ। अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भी दिये गये।  

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Dakhal News 13 June 2017


संत हिरदाराम

मुख्यमंत्री शिवराज ने समाज-सेवियों का किया सम्मान  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संत हिरदाराम सेवा का अवतार थे। वे दुनिया में सेवा के लिये आये थे। उनका पूरा जीवन सेवा साधक का था। श्री चौहान आज संत हिरदाराम ऑडिटोरियम में समाजसेवी और वरिष्ठजन सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम संस्कार प्रबुद्ध नागरिक मंच द्वारा किया गया था। श्री चौहान ने कहा कि कार्यक्रम का नियमित आयोजन किया जाना चाहिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि देश, समाज और दूसरों के लिये जीना ही सही अर्थों में जीवन जीना है। ऐसे व्यक्तियों का सम्मान होना चाहिये, जिनका जीवन समाज की सेवा में समर्पित है। उन्होंने कहा कि भारत का वैभवशाली इतिहास है। जब दुनिया के देशों में सभ्यता और संस्कृति के चिन्ह भी नहीं थे, तब भारत में ऋचाओं की रचना हुई, विश्वविद्यालय संचालित थे। उन्होंने कहा कि सिंधु के किनारे जो सभ्यता विकसित हुई, उसी ने ऐसे महान भारत का निर्माण किया है, जो विश्व के कल्याण की कामना और उसे परिवार मानने की चेतना का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि बुराई और अच्छाई का संघर्ष शाश्वत है। अच्छी सोच और अच्छे कार्य करने वाले निरंतर प्रयास करते रहे हैं और कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रवृत्तियों ने शांत मध्यप्रदेश को हिंसा की आग में झोंकने का असफल प्रयास किया। ऐसे तत्वों का कठोरता से दमन किया जायेगा। साथ ही इंसानियत और मानवता को जगाने के प्रयास भी जारी रहेंगे। उनका उपवास ऐसा ही प्रयास था। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की कार्य-योजना तैयार है। इस कार्य-योजना में सभी की आवश्यकताएँ और विचार शामिल हो जाये, इसके लिये आगामी 15 से 25 जून के मध्य संभागायुक्त और कलेक्टर के समक्ष सुझाव दिये जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पट्टे देने का फार्मूला भी पूरे प्रदेश के लिये तैयार है। उस पर भी समाज विचार-विमर्श कर ले। उन्होंने रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण केन्द्र सरकार के सहयोग से करवाने की जरूरत बताई। श्री सिद्ध भाऊ जी ने सरकार द्वारा जन-कल्याण के लिये प्रखर सृजनात्मकता के साथ किये गये कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बालिकाओं से संबंधित प्रदेश की अनेक नवाचारी योजना का अन्य राज्यों ने भी अनुकरण किया है। उन्होंने कहा कि दया, धर्म का मूल है। जिसमें दया नहीं, वह कभी भी सुखी नहीं रह सकता। उन्होंने गाय के महत्व को बताते हुए, पंचगव्य चिकित्सा की सार्थकता बताई। उन्होंने सम्मान समारोह की सराहना की और कहा कि इस से भावी पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। सांसद श्री आलोक संजर ने कहा कि प्रदेश में समस्याओं के समाधान के लिये जो प्रयास हुए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। सरकार के प्रयासों की सर्वत्र सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि हिंसा की आग को उपवास के ठंडे जल से शांत करने के सफल प्रयास ने अन्य राज्यों के जन-प्रतिनिधियों को भी प्रभावित किया है। उनका दिग्दर्शन किया है। विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि बैरागढ़ रेलवे स्टेशन को संत हिरदाराम के नाम पर किये जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगरवासी उच्च विचारों को जीवित रखने के लिये समर्पित हैं। समारोह के प्रारंभ में अतिथियों ने भारत माता और संत हिरदाराम के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्जवलन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समाज की पत्रिका का विमोचन किया और समाजसेवियों-वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया। प्रारंभ में बालिकाओं द्वारा स्वागत गीत और अंत में वंदे-मातरम का गायन हुआ। अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भी दिये गये।  

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Dakhal News 13 June 2017


rajesh bhatia patrkar

राजेश भाटिया भरम ही था के सारा बाग़ अपना है तूफान के बाद पता चला सूखे पत्तों पे भी हक गर्म हवाओं का था ।  मध्य प्रदेश में 5 माह की नर्मदा सेवा यात्रा की सफलता उसमें शामिल दिग्गजों की भरमार ने मध्यप्रदेश में राम राज्य की कल्पना को लगभग मूर्त रूप दे दिया था किंतु फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि  नर्मदा जन आंदोलन को साकार करने वाला वही किसान तूफान बनकर रोड पर आ बैठा । जान देता किसान जान लेने पर उतारु हो गया ।। इसे प्रशासन और सरकार की विफलता ही कहें कि 5 माह तक रोड पर रहने वाली सरकार इस आंदोलन की आहट और किसान की परेशानियों को भाँप न सकी। किसान पुत्र मुख्यमंत्री की सरकार की पुलिस 7 किसानों को गोली देकर जान लेती है फिर उनकी रहनुमा बन जाती है । कार्रवाई के नाम पर मात्र कलेक्टर एसपी का तबादला। एक करोड़ रुपए की संवेदना राशि की घोषणा और आनन फानन में  प्रदेश में शांति हेतु मुख्यमंत्री का उपवास और उसका खत्म होना, फिर किसानों के हक़ में घोषणाओं की झड़ी ...इस सियासी ड्रामे के बीच प्रदेशऔर हम सबके अपने घोषणावीर मुख्यमंत्री शायद किसान और आम आदमी के उस दर्द को समझने में नाकाम रहे कि घोषणाओं के अमलीजामा की वास्तविक हकीकत कुछ और है। प्रदेश में हावी अफसरशाही से नेता मंत्री और आमजन सभी दुखी हैं किंतु इस नब्ज को शिवराज सरकार समझ कर भी समझ नहीं पाई । भारतीय जनता पार्टी के अपने कद्दावर नेताओं के बयान प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी तंत्र के हावी होने की खबर बयां करते है। मोदी सरकार की 3 वर्ष की ऐतिहासिक उपलब्धियां और उसके  जश्न की मिठास में शिवराज के प्रदेश से शुरू हुए किसान आंदोलन ने कड़वाहट की कुछ बूंदें अवश्य डाली है। प्रदेश से शुरू हुआ किसान आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है 16 जून को देशभर में बंद का ऐलान ,  देश के अन्य राज्यों में फ़ैलते किसान आंदोलन  और उसके परिणाम आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए कड़वाहट भरे होंगे । मृत पड़ी कांग्रेस के लिए यह किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है । आनन-फानन में राहुल का मंदसौर दौरा और शिवराज का मंदसौर न जाना , दोनों ऐसे सवाल है जिसका अर्थ सभी जानते हैं किंतु कतिथ सलाहकारों के आगे नतमस्तक शिवराज सरकार को शायद यही पसंद है। विकास, उपवास और ईवेंट के बीच सरकार की घोषणाओं ने मरहम का तड़का अवश्य लगाया है किंतु किसान नेता शिव शर्मा "कक्काजी" को नकारना आने वाले समय में शिवराज सरकार के लिए भारी होगा, बहरहाल मोदी के सफल तीन वर्ष की उपलब्धियों पर किसान आंदोलन ने देश ही नहीं विदेशी मीडिया में भी पलीता लगा दिया है। बीजेपी शासित राज्यों में आने वाले समय में किसान आंदोलन की गूँज सुनाई देगी। मध्यप्रदेश की शिव राज सरकार के लिए यह पंक्तियाँ उचित प्रतीत होतीं हैं  शब्दों का शोर तो कोई भी सुन सकता है ....खामोशियों की आहट सुनो तो कोई बात है.....! [लेखक राजेश भाटिया इनसाईट टीवी न्यूज़ के संपादक हैं ]

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Dakhal News 12 June 2017


kisan andolan mp

राघवेंद्र सिंह  मध्यप्रदेश में जिसका डर था वही होने लगा। जान देता किसान जान लेने पर उतारू हो गया। किसान पुत्र मुख्यमंत्री होने के बावजूद सीआरपीएफ या पुलिस की गोली से सात किसानों की मौत चौतरफा सवाल करती है। सरकार उत्तर देने के बजाए अनशन कर पॉलिटिकल इवेंट का हथकंडा अपनाती है। फौरी तौर पर असंतोष और आंदोलन की आग पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के अनशन से ठंडक के छींटे पड़े हैं। अगर सरकार संभली नहीं तो ये आंदोलनों का आरम्भ  है अंत कैसा होगा पता नहीं। लेकिन अच्छा तो नहीं ही होगा। असल में यह असंतोष की आग बरास्ते मंत्री, विधायक, संगठन से होती हुई किसानों से आगे कर्मचारियों और जनता के बीच दावानल बनने के संकेत दे रही है। प्रदेशों में किसान आंदोलन की वजह राज्यों की सरकारें कम केंद्र की किसान हितैषी नीति नहीं होना भी है। उद्याेगों की प्रति समपर्ण और किसानों की उपेक्षा ने भी शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, देवेन्द्र फडनवीस, वसुंधरा राजे और विजय रूपाणी जैसे मुख्यमंत्रियों के लिए मुसीबत पैदा कर दी है। किसानों की खुशहाली के बिना देश कैसे मुस्कुरा सकता है। किसानों की अंसतोष्ा की बड़ी वजह कृषि उत्पादों के लागत मूल्य तय नहीं होना और वादे के मुताबिक लागत मूल्य में 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर बाजार मूल्य घोषित नहीं होना भी खास है। अन्नदाता का गुस्सा प्रदेश भाजपा के गढ़ मालवा के मंदसौर-नीमच से शुरू होकर भेापाल तक पहुंच गया। राजस्थान की सीमा से लगा यह इलाका मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए भी आने वाले समय में दिक्कतें पैदाकर सकता है। मंदसौर किसानों की छाती में गोली मार पहले ही दिन छह को मार दिया। उस पर प्रशासन ने सरकार को गुमराह कर कह दिया कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई। पूरे एक दिन सरकार की फजीहत हुई और बाद में गृह मंत्री ने स्वीकार किया कि किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई। यहं खास बात यह है कि गृहमंत्री को पुलिस अधीक्षक ने गलत जानकारी दी। जिससे सरकार की किरकिरी हुई। और हैरत की बात यह है कि गृहमंत्री गुमराह करने वाले अधिकारी का कुछ नहीं बिगड़ा। जबकि गलत जानकारी ने सरकार की किसान हितैषी छबि का पूरा गणित ही गड़बड़ा दिया। पूरी सरकार उसकी संवेदना दांव पर लग गई। मीडिया मेनेजर चाहे जितनी सांत्वना दे मगर हालात को काबू पाने के सीएम को मंत्रालय छोड़कर दशहरा मैदान में दो दिन का अनशन करना पड़ा। ऐसा पहली बार हुआ। सियासत में इमेज का बड़ा महत्व होता है इस घटना ने शिवराज सिंह की किसान पुत्र की छबि को दागदार कर दिया है। प्रशासन ने इतना नुकसान किया जो कि उनके विरोधी भी नहीं कर पाये। असल में यह अफसरों के उपर निर्भर रहने के नतीजे है। अफसर चाहते है कि वे प्रशासन के साथ-साथ सियासी सलाह भी दे। और अपने मुताबिक फैसले भी कराये। इससे में उनकी पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में होता है। सरकार नहीं समझी तो यह दौर आगे भी जारी रहने वाला है। अफसरों के चश्मे से देखने और उनके कानों से सुनने की वजह से अकसर मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता बेईमान और आम जनता गलत काम कराने वाली दिखने लगती है। ऐसे में जो काम सरकारी स्तर पर होते है वे जन हित में कम अहसान के तौर पर ज्यादा किये जाते हैं।  नौकरशाही का हावी होना इस बात का प्रमाण है कि सात किसानों की मौत्ा के बाद भी एक भी अधिकारी न तो निलंबित हुआ और न किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इतनी बड़ी घटना के बाद भी कठोर निर्णय तो दूर की बात एस.पी. कलेक्टर को हटाने जैसे शब्दों से भी परहेज कर उन्हंे विड्रा करने जैसे शब्दों का इस्तेमान किया गया। ऐसा इसलिए कि हटाये गये अफसर आहत न हो जाये। ये एक और सबूत है कि नौकरशाही सरकार पर किस कदर हाव्ाी है। सरकार और प्रशासन कि स्थिति पर पत्रकार अमिताम बुधौलिया के फेसबुक वाल से ली गई चंद लाईने पेश है .... “ घोड़े हैं स्वतंत्र और सवारों पे लगाम है। आपके राज्य का बढि़या इंतजाम है, मरती है तो मरे पब्लिक, इनकी बला से  जश्न से फुरसत नहीं, घूमना ही बस काम है। इससे अच्छे दिन और क्यों आएंगे दोस्ताें  स्वच्छ भारत में नेताओं पे थूकना भी अब हराम है।।” असल में अफसरों के जरिये मंत्रियों पर नकेल कसने का यह खालिस नुस्खा है जिसे कुछ सालों के बाद हर मुख्यमंत्री अपना ही लेता है। अफसर मुखिया को हर पाकञसाफ और भाग्य विधाता बना देते है। छोटे बड़े अफसर सीधे सीएम के मुह लग जाते हैं। गिरोह बना कर बाकायदा खुसामत करते हैं। हर असफलता का ठीकरा दूसरों के सर फोड़ते हैं। मंदसौर गोली कांड भी इसी का प्रमाण है। ऐसे में मुख्यमंत्री को बिन मांगी सलाह कि वे आत्म चिंतन करें। और जिन तरीकों और संगठन की मदद् से सरकार में आये हैं उसे फिर से जीवंत करें। चंपू नेता, पालतू मीडिया और चापलुस नौकरशाहों से बचें। दोषियों पर कठोर कार्रवाई जैसा कि वे कहते हैं उसे कर डाले। नही तो जनता उन्हें कमजोर मुख्यमंत्री के तौर पर देखेगी। अनशन के जरिये एक बार फिर इवेंट मैनेजरी जन नेता शिवराज सिंह चौहान को लगता है डेमेज कंट्रोल करने के लिए अवेंट कराने का चस्का लग गया है। नर्मदा माई से लेकर नदियों से रेत लूटने का मामला हो तो डेमेज कंट्रोल के नर्मदा सेवा यात्रा निकालों अलग बात है इसका नतीजा उल्टा पड़ा। इस विश्वव्यापी अभियान में देशव्यापी थू-थू हुई। अभी इससे उन्हें निजात भी नहीं मिली थी कि मंदसौर कांड ने उनसे मंत्रालय छुड़वा कर दशहरा मैदान में अनशन करवा दिया। इवेंट के लिए जम्बूरी मैदान के बाद दशहरा मैदान एक नई खोज है। वास्कोडीगामा बने मैनेजरों को इसके लिए बधाई। कुछ करोड़ ही खर्च आएगा 2018 के चुनाव तक जिसमें कुछ मैनेजर करोड़पति और कुछ दर्जन सहायक लखपति तो हो ही जायेंगे। अभी से उनके लिए बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं। क्योंकि नर्मदा यात्रा से लेकर मुख्यमंत्री के अनशन तक हुए खर्च का लोग अनुमान भ्ाी लगा रहे हैं और हिसाब भी मांग रहे हैं। जानकारों के मुताबिक यह आंकड़ा अरबों में है। दो दिन के अनशन के प्रबंधन का खर्च ही करोड़ों का बताया जा रहा हैं।  बहरहाल, इससे अलग भाजपा में सत्ता संगठन को लेकर हो रही गुटबाजी मुख्यमंत्री के अनशन से एकता का मेगा-शो करती दिखाई दी। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, प्रभात झा, कैलाश विजयवर्गीय से लेकर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सब एक मंच पर दिखाई दिये। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने श्री चौहान को नारियल पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया। इसी तरह कांग्रेस एकता टाॅनिक मंदसौर कांड दे गया। उसके युवराज राहुल बाबा से लेकर महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पीसीसी चीफ अरूण यादव और  सबके बड़े भाई कमनलाथ सब एकजुट नजर आये।  अगले साल चुनाव के पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस को संजीवनी से कम नहीं हैं।  प्रदेश के सियासी-नौकारशाही के हालात पर सच के आस-पास लिखने और बोलने वालों के लिए दो लाईनें खास है... मैं दीया हूँ... मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अंधेरे से है  हवा ताे बेवजह ही मेरे खिलाफ है।(लेखक आईएनडी 24 के समूह प्रबंध संपादक हैं)

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Dakhal News 12 June 2017


कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन

  मध्य प्रदेश में एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहा किसानाें के आंदोलन को शांत करने के लिए आज से भोपाल के दशहरा मैदान में उपवास पर बैठ गए हैं। ताे दूसरी तरफ उनके कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने इस अांदाेलन पर बड़ा बयान दिया है। अपने बयान में उन्हाेंने कहा कि चाहे किसान कितने भी उग्र हो जाएं, उनके कर्ज माफ करने का मतलब ही नहीं बनता, जब हमने किसाने से ब्याज नहीं लिया तो किस बात का कर्ज माफ होगा। बता दें कि मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 10 दिनों से किसान आंदोलन की आग फैली हुई है। ये मामला मंदसौर से शुरू हुआ, जहां पुलिस फायरिंग में करीब 7  किसानों की मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए किसानों ने आंदोलन को और बढ़ा दिया। मंदसौर के अलावा मध्य प्रदेश के सीहोर, फंदा और कई जगहों पर किसान लगातार विरोध कर रहे हैं। ऐसे में राज्य के कृषि मंत्री का ये बयान किसानों के गुस्से और भड़का सकता है, जो पहले से ही कर्ज माफी की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। वहीं, किसानों ने भी साफ कर दिया है कि उनकी मांगे न माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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Dakhal News 10 June 2017


 चौपाल पर राहुल गांधी

उमेश त्रिवेदी भारतीय जनता पार्टी के इन आरोपों के कोई मायने नहीं हैं कि अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उनके कार्यकर्ता मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक-रोटियां सेंक रहे हैं। एक विपक्षी दल के नाते कांग्रेस वही कर रही है, जो विपक्ष में रहते हुए भाजपा कांग्रेस के खिलाफ करती थी। स्मरण नहीं आ रहा है कि पिछले बीस-पच्चीस सालों में घटित ऐसे हादसों की आग में कभी भी पक्ष-विपक्ष के नेताओं  ने राजनीतिक-रोटियां सेंकने का काम नहीं किया हो?   गोलीबारी में मारे गए 6 किसानों की मौत व्यवस्था की हिम शिलाओं पर जमा खून के वो कतरे हैं, जिन्हें कुरेद कर बने बरफ के लड्डुओं का रस-पान राजनीति में लंबे समय तक होता रहेगा। किसानों की मौत पर मर्सिया गाने के लिए भाजपा की अपनी भजन-मंडली है और कांग्रेस के अपने झांझ-मंजीरे हैं, अपनी कविताएं, अपने संवाद और अपने प्रतिवाद हैं। दिल्ली में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू और मंदसौर में राहुल गांधी के डायलॉग उसी पिटी-पिटाई राजनीतिक-स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं, जिसके मीडिया-मंचन में नेताओं के चेहरे पर नकली आक्रोश झलकता है और दिल में असली हिंसक-गुदगुदी दहकती महसूस होती है।  नायडू ने राहुल गांधी के मंदसौर दौरे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मुद्दे का राजनीतिकरण करके कांग्रेस गैरजिम्मेदाराना काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 12 जुलाई 1998 को दिग्विजय-सरकार के वक्त भी 24 किसान गोलीबारी में मारे गए थे, लेकिन नायडू ने यह नहीं बताया कि उस समय भाजपा की भूमिका क्या थी और दिग्विजय सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया था। मंदसौर में राहुल गांधी की राजनीतिक-प्रस्तुति की स्क्रिप्ट में भी कुछ चौंकाने वाला नहीं था। लेकिन किसानों के बीच, किसानों के मुद्दे पर किसानों से बातचीत की अपनी जमीन, अपने जज्बात और अपनी जहनियत होती है। देशज जमीन पर उगे मुहावरे अभिव्यक्ति में उनका साथ नहीं देते हैं, इसलिए उनके  भाषणों के ’टेक्स्ट’ में उनींदापन टपकने लगता है।  मंदसौर में भी ’राहुल गांधी’ ठेठ ’राहुल गांधी’ के अंदाज में ही बोले कि ’मोदी-सरकार संघ की विचारधारा का पालन-पोषण करनेवाली सरकार है, जो कर्ज-माफी के नाम पर किसानों के सीने पर गोलियां चलाती है और अडानी-अंबानी के बैंक-कर्जों को माफ करती है।’  राहुल  की ’डायलॉग-डिलिवरी’ में थोड़ा आत्म-विश्‍वास इसलिए नजर आ रहा था कि इस मामले में भाजपा सरकार बैक-फुटिंग पर रक्षात्मक है। पारसी-थिएटर की तर्ज पर कांग्रेस की अति-नाटकीय राजनीतिक स्क्रिप्ट के सभी पात्र अपनी भूमिकाओं में चूक कर रहे थे। मंदसौर आने से पहले दिल्ली जाने के लिए बेचैन उनकी भाव-भंगिमाओं के खुलासे किसानी-प्रतिबद्धताओं को स्वत: ही खारिज  कर देते हैं। किसानों की मौत से गमजदा माहौल की कराह, उसका भीगापन हुड़दंग की गरम हवाओं में खो सा गया था। फिर मोटर-साइकल पर सवार होकर सरकार को चकमा देने के उनके प्रयास अनचाहे ही एक ऐसे राजनीतिक-स्टंट में परिवर्तित हो गए, जहां लोगों की सराहना और सहानुभूति गुम होने लगती है।  किसानों की मौत बड़ा राजनीतिक मुद्दा है, जिसको भुनाने के लिए राहुल का घटना-स्थल पर आना बनता है। राहुल का मंदसौर प्रवास मप्र में कांग्रेस की जमीन को पुख्ता करने की कोशिशों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बारह साल के कार्यकाल में राजनीतिक चहलकदमी के लिए राहुल गांधी या कांग्रेस को इतना खुला मैदान कभी नहीं मिला है। पक्ष-विपक्ष में जो कुछ हो रहा है, वही राजनीतिक दलों की प्रवृत्ति है। किसान-आंदोलन के आकाश पर भाजपा और कांग्रेस की हरी-पीली राजनीतिक पतंगबाजी ने नए आयाम अख्तियार कर लिए हैं। भाजपा के मासूम से इस राजनीतिक आरोप की मासूमियत पर प्रदेश का हर बंदा कुरबान (?) हुआ जा रहा है कि किसान-आंदोलन में होने वाली तोड़-फोड़ और हिंसा के पीछे खड़ी कांग्रेस के जरिए भाजपा सरकार को बदनाम करने की साजिश है? किसानों का सारा बखेड़ा कांग्रेस ने खड़ा किया है। भाजपा के इस रुख में सत्ता का मद छलक रहा है कि हिंसा के मामले में उससे कोई चूक नहीं हुई है। शिवराज-सरकार इन मामलों में यूं ही आत्म समर्पण करने वाली नहीं है। भाजपा को यह सोचना और सावधानी रखना चाहिए कि खुद को सही साबित करने की जिद हमेशा सही नहीं होती है। राहुल  भले ही इस एपीसोड में कुछ राजनीतिक-थ्रिल महसूस करें, लेकिन कांग्रेस कुछ हांसिल करने में समर्थ नहीं है, क्योंकि प्रदेश के जितने बड़े नेता उनके साथ आए थे, उनके साथ ही लौट गए हैं...यह पब्लिक है, सब जानती है...। [लेखक उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 9 June 2017


मंदसौर कलेक्टर

जबलपुर  में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायक तरुण भनोट पुलिस की जीप पर बैठकर पुलिस थाने गए। कांग्रेस विधायक भनोट और अन्य कांग्रेसी गिरफ़्तारी को लेकर टीआई पर भड़के।इसके बाद वे जीप पर बैठ कर थाने गए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पुलिस ने बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया। कार्यकर्ता सीएम और बीजेपी सरकार का किसान आंदोलन मामले में विरोध कर रहे हैं। गोलीकांड में मंदसौर कलेक्टर और एसपी को हटाया गया किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 6 किसानों की मौत के बाद जिले में हालात बेकाबू हो गए है। गोलीकांड के चलते मंदसौर कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह और एसपी ओपी त्रिपाठी को हटा दिया गया है। फायरिंग में किसानों की मौत के बाद मंदसौर सहित आस-पास के जिलों में भी किसान उग्र आंदोलन पर उतर गए। बुधवार के दिन गोलीकांड में मारे गए किसानों के शव सड़क पर रखकर परिजनों ने चक्काजाम कर दिया था। इस दौरान कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह जब उन्हें समझाने गए तो उनके साथ मारपीट हुई। शिवपुरी कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव को मंदसौर का कलेक्टर बनाए जाने के आदेश आने के बाद रात को ही वे मंदसौर रवाना हो गए थे। भोपाल से उन्हें सुबह ही मंदसौर में ज्वाइनिंग देने के आदेश दिए गए थे। गुरुवार सुबह मंदसौर पहुंचकर उन्होंने ज्वाइनिंग दी। वहीं दूसरी ओर शिवपुरी के नए कलेक्टर बनाए गए तरूण राठी को भी शिवपुरी में गुरुवार को ही ज्वाइनिंग के निर्देश दिए गए हैं। स्वतंत्र कुमार सिंह को मंदसौर कलेक्टर से उप सचिव मध्यप्रदेश शासन बनाया गया।ओम प्रकाश श्रीवास्तव को शिवपुरी कलेक्टर से मंदसौर कलेक्टर बनाया गया। तन्वी सुन्द्रियाल को रतलाम कलेक्टर बनाया गया ,तरूण राठी को शिवपुरी कलेक्टर बनाया गया।कौशलेंद्र विक्रम सिंह को आयुक्त, नगर पालिक निगम, सागर से कलेक्टर नीमच बनाया गया। एसपी के तबादले ओपी त्रिपाठी एसपी मंदसौर से सहायक पुलिस महानिरीक्षक भोपाल ,मनोज कुमार एसपी नीमच से एसपी मंदसौर ,तुषारकान्त विद्यार्थी एसपी रेल भोपाल से एसपी नीमच।   

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Dakhal News 8 June 2017


भड़का किसान आंदोलन

  देवास जिले में 1 जून से जारी किसानों का आंदोलन सातवे दिन बुधवार को उग्र हो गया। चापड़ा में आंदोलनकारी किसानों ने एसडीएम, एसडीओपी एवं डायल 100 में तोड़फोड़ कर उसमें आग लगा दी। बंद दुकानों के सामने खड़े ठेलों को रोड पर लाकर आग लगा दी गई। इसके बाद किसान बाइक रैली के रूप में हाटपीपल्या पहुंचे, जहां थाने में तोड़फोड़ की। नेवरी फाटे के पास प्रदर्शनकारियों ने 2 चार्टर्ड सहित 8 बसों को आग लगा दी, इसमें बैठे सभी यात्री जान बचाकर खेतों में भाग गए। थाना परिसर में खड़े बाइक, ट्रक सहित अन्य करीब 50 वाहनों में आग लगा दी। पुलिस ने हवाई फायर भी किए। इसके बाद किसान नेवरी पहुंचे, जहां नेवरी पुलिस चौकी में भी तोड़फोड़ कर आग लगा दी। इधर सोनकच्छ में भी स्थिति विकट रही। आंदोलनकारी किसानों ने इंदौर-भोपाल राजमार्ग पर पत्थर जमा दिए। कई पेड़ों को भी हाईवे के बीचोबीच पटक दिए। नेवरीफाटा पर दुकानों पर पत्थर फेंके और हाईवे को जाम कर दिया। किसानों द्वारा कलेक्टर से झूमाझटकी करने की सूचना भी मिली है। हाईवे पर जाम की वजह से हाइवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी रही। मंदसौर में पुलिस फायरिंग में 6 किसानों की मौत के बाद आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया है। किसान संगठनों ने बुधवार को आधे दिन का प्रदेश बंद का आव्हान किया, कांग्रेस भी इसका समर्थन कर रही है। देवास में प्रदर्शनकारियों ने मक्सी-इंदौर ट्रेन को रोककर उसके कांच फोड़ दिए। इसमें साथ ही मालवा-निमाड़ अंचल में बंद का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। नीमच के हड़कियाकला में पुलिस चौकी में किसानों ने आग लगा दी। वहीं उज्जैन पुलिस और किसानों के बीच झड़प में 5 पुलिसकर्मी और तीन किसान घायल हो गए। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मंदसौर आने वाले थे, लेकिन उनका दौरा रद्द हो गया। अब वे गुरुवार को वहां जा सकते हैं। नीमच की हवाई पट्टी पर उनका विमान उतरना था, लेकिन एसपी मनोज कुमार का कहना है कि उनका दौरा स्थगित हो गया है, अब वे कल आएंगे।सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने किसी भी वीआईपी के मंदसौर जिले में प्रवेश पर रोक लगा दी है। कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन किसानों के अंतिम संस्कार में शामिल होने मंदसौर जा रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। नीमच से मंदसौर को जोड़ने वाली सड़कों को बैरिकेट लगा दिए गए हैं। जबलपुर में किसान आंदोलन के बंद का असर नहीं दिखा। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उधर युवा कांग्रेस नेता शशांक दुबे के घर बड़ी संख्या में सुबह से ही पुलिस बल तैनात कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया। सभी एसडीएम, सीएसपी अपने इलाकों में तैनात रहे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव मंदसौर के लिए रवाना हो गए। अजय सिंह ने सीएम द्वारा मृत किसानों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की बात पर कहा कि सरकार इस पर राजनीति कर रही है। उन्होंने घटना की जांच के लिए 8 विधायकों की कमेटी बनाई है। मंदसौर जाने से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि हम किसानों के साथ हैं। शिवराज सरकार किसानों के साथ हमेशा धोखा करती है। उन्होंने कहा हम लोग मंदसौर जाएंगे, प्रशासन रोकने की कोशिश करेगा तो भी हम जाएंगे। बंद के दौरान किसानों ने नीमच-कोटा रोड पर डिकेन में चक्काजाम कर दिया। जिसके बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यहां एक ट्रक से सब्जियां निकालकर रास्ते में फेंक दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस किसानों को हटाने के लिए मौके पर पहुंची। मोरवन-मनासा रोड पर किसानों ने चक्काजाम कर गाड़ि‍यों में रखा दूध सड़क पर फेंक दिया गया। नीचम के पास से निकलने वाले एनएच 71 पर भी किसानों ने जाम लगा दिया है। हड़कियाकला फंटे पर किसानों को समझाने पहुंचे एसडीएम को उन्होंने वापस लौटा दिया। किसानों का कहना है कि हम उस एसडीएम से बात नहीं करेंगे जिसने हमारी गाड़ि‍यों को जेसीबी से क्षतिग्रस्त करवाया है। इसके बाद एसडीएम वहां से रवाना हो गए। इस दौरान किसानों ने वहां से गुजर रही जर्दे से भरी वैन को रोककर उसके कांच फोड़ दिए और जर्दे को लूट लिया। मालखेड़ा फंटे पर भी किसानों ने जाम लगा दिया।खरगोन में बंद के आव्हान पर सुबह से ही दुकानें बंद रही। उधर कांग्रेस नेता और जनप्रतिनिधि भी शहर में घूमकर लोगों से बंद में समर्थन देने का आव्हान किया। बड़वानी में शराब दुकान बंद कराने को लेकर तोड़फोड़ हो गई। यहां पूरा बाजार सुबह से ही बंद रहा, सिर्फ मेडिकल और फल-सब्जी की दुकानें खुली रहीं। यहां होटलों से नाश्ता उठाकर लोगों में बांट दिया गया। सतना जिले में भी बंद का असर दिखा, कई कस्बों में दुकानें नहीं खुली। कांग्रेस और किसान संगठनों ने बाजार बंद का समर्थन किया।शाजापुर और आगर के बाजार भी किसानों आंदोलन के समर्थन में बंद रहे। महू में बंद का व्यापक असर दिखा, बंद को लेकर यहां कुछ जगह विवाद भी हुआ। कांग्रेसियों ने रैली निकालकर लोगों से बंद का समर्थन करने की अपील की। किसानों ने मानपुर-लेबड़ फोरलेन बंद कर दिया। इसके साथ ही एबी रोड और मानपुर, सिमरोल से गुजरने वाले हाईवे को बंद करने की कोशिश की।देवास में बाजार बंद कराने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। बागली भी पूरी तरह बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने मक्सी-इंदौर ट्रेन रोक ली और स्टेशन पर कांच भी फोड़ दिए।  

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Dakhal News 7 June 2017


आतंकी मूसा

हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर और अब अलकायदा के आतंकी जाकिर मूसा ने भारतीय मुस्लिमों पर तंज कसते हुए कहा है कि वे दुनिया में सबसे बेशर्म मुस्लिम हैं। जिहाद में भारतीय मुस्लिमों के शामिल नहीं होने पर मूसा ने यह बात  एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी कर कही है। ऑडियो में मूसा ने 'गजवा-ए-हिंद' के लिए जिहाद में शामिल नहीं होने पर भारतीय मुसलमानों की आलोचना की है, जिसे उसने टेलिग्राम और वॉट्सऐप ग्रुप पर पर शेयर किया है। अपने संदेश में उसने कहा कि उसकी कश्मीर लड़ाई तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह इस्लाम और काफिरों के बीच लड़ाई है। जम्मू-कश्मीर के दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह मूसा की आवाज है। भारतीय मुसलमानों को भड़काने के लिए उसने देश में मुस्लिमों के साथ घटित हुई कुछ घटनाओं का सहारा लिया है। उसने बिजनौर जाने वाली चलती ट्रेन में मुस्लिम महिला के साथ पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा रेप करने की घटना का हवाला देते हुए कहा, बहन, मैं शर्मिंदा हूं और बहुत दुखी हूं कि हम तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सके। वहीं, कथित गोरक्षकों द्वारा मुस्लिमों को पीट-पीट कर मारे जाने वाली घटना का भी जिक्र किया और भारतीय मुस्लिमों को पीड़ितों के पक्ष में खड़े न होने के लिए कोसा। उसने कहा कि गोरक्षकों को इस्लाम और मुस्लिम समुदाय की ताकत दिखाओ। भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलते हुए मूसा ने कहा कि वे दुनिया के सबसे बेशर्म मुस्लिम हैं। उनको खुद को मुस्लिम कहने में शर्म आनी चाहिए। हमारी बहनों को बेइज्जत किया जा रहा है और भारतीय मुस्लिम चीख-चीखकर कह रहे हैं कि इस्लाम शांतिप्रिय धर्म है। मूसा ने कहा कि वे लोग सब से बेगैरत कौम हैं, जो अत्याचार और नाइंसाफी के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं। क्या हमारे पैगंबर और उनके असलाफ (अनुयायियों) ने हमें यही सिखाया है। उन लोगों ने युद्ध के दौरान अपने खून बहाए और हमारी बहनों के सम्मान के लिए शहादत दी। मूसा ने ऐतिहासिक इस्लामी युद्ध 'जंग-ए-बदर' का भी हवाला दिया है। उसने कहा कि वे लोग 313 थे और दुनिया पर राज किया। अब हम करोड़ों हैं, लेकिन गुलाम हैं। भारतीय मुस्लिमों को चेताते हुए मूसा ने कहा, 'आपलोगों के पास अब भी खड़े होने और हमारे साथ आने का समय है। आगे बढ़ो या फिर बहुत देर हो चुकेगी।  

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Dakhal News 6 June 2017


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम

  सिडनी के शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक ईजाद की है जो यह अनुमान लगा सकती है कि रोगी की कितनी जिंदगी बची है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम महज अंगों की छवि के विश्लेषण के आधार पर 69 फीसदी सटीक अनुमान लगा सकता है कि रोगी की कब मौत होगी। ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के रेडियोलाजिस्ट ल्यूक ओकडेन-रेनर ने कहा कि रोगी के भविष्य के बारे में पूर्वानुमान डॉक्टरों के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे वे रोगी के उपचार को प्रभावी बनाने में सक्षम हो सकते हैं। जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं की टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 48 रोगियों के सीने की चिकित्सकीय छवियों का विश्लेषण किया। कंप्यूटर आधारित इस विश्लेषण में 69 फीसदी सटीकता के साथ यह अनुमान लगाया गया कि किस रोगी की पांच साल के अंदर मौत हो जाएगी। हालांकि शोधकर्ता यह सटीक पहचान नहीं कर सके कि कंप्यूटर सिस्टम ने अनुमान के लिए छवियों में किन चीजों पर गौर किया। इसने एम्फिसीम और हार्ट फेल होने जैसे गंभीर मामलों में काफी हद तक सही अनुमान लगाया। शोधकर्ता अब इस तकनीक को दूसरी स्थितियों जैसे हार्ट अटैक में आजमाने की तैयारी कर रहे हैं। ओकडेन-रेनर ने कहा, "हमारे शोध से गंभीर रोगों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और उसके उपचार की राह आसान हो सकती है।"  

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Dakhal News 5 June 2017


पशु-वध

उमेश त्रिवेदी पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में घटित कतिपय वीभत्स घटनाओं के बाद क्या यह मुनासिब नहीं है कि देश के सभी राजनीतिक दल मिलकर अपने लिए एक ऐसी राजनीतिक आचार-संहिता तैयार करें, जो राजनीति में बदगुमानी और वहशीपन पैदा करने वाली राजनीतिक घटनाओं और गतिविधियों पर लगाम लगा सके। विडम्बना यह है कि इऩके सामने जनता विचलित और असहाय है, लेकिन राजनीतिक दल और राजनेता सारे संदर्भों का खून निचोड़ कर उत्पाती, उन्मादी और उच्छृंिखल धारणाओं की ऐसी हिंसक फसल बो रहे हैं, जो अनहोनी और आपदाओं को आमंत्रित करती है। केरल की सड़कों पर बीफ-फेस्ट और उत्तर भारत की राहों पर गौ-संरक्षण के नाम पर हत्याओं के दृश्य इसका जीवंत उदाहरण है।   सरकार और राजनीतिक दलों को यह हक तो हासिल हो सकता है कि वो लोगों की आर्थिक, सामाजिक, सामुदायिक और सामूहिक जिंदगी को नियोजित करने के लिए वैधानिक उपाय करें, उनके प्रबंधन के लिए नियम बनाएं, अनुशासन कायम करें, लेकिन इन संस्थाओं को यह हक कतई हासिल नहीं है कि वो लोगों के सामने मानसिक-प्रताड़नाओं का ऐसा अमूर्त पहाड़ खड़ा कर दें कि वो बेचैन होने लगें, ऐसे सवालों का अंबार पैदा कर दें, जिनके उत्तरों को लेकर खुद उनमें मतैक्यता नहीं हो। कश्मीर में पत्थरबाजों से बचने के लिए कश्मीरी युवक को जीप के सामने बांध कर अपने साथियों को जीवन-दान देने वाले सेना के मेजर नितिन गोगोई राष्ट्र की सलामी के हकदार क्यों नहीं होना चाहिए? क्या सोशल मीडिया के कल्पना-लोक में तलवार भांजने वाले इस तथ्य से वाकिफ नहीं हैं कि सेना के सिपाहियों को भी उतने ही मानव-अधिकार हासिल हैं, जितने कि उन पर पत्थर फेंकने वालों को हैं? कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान से मदद लेने वाले हुर्रियत नेताओं का सफाया करने के मामले में सभी राजनीतिक दलों की आवाज एक क्यों नहीं होना चाहिए?   तीन तलाक जैसे मानवीय सवाल पर भाजपा और कांग्रेस का रुख एक जैसा क्यों नहीं होना चाहिए?  क्या देश की मोदी-सरकार और अन्य राजनीतिक दल इतने नासमझ हैं कि वो यह नहीं समझ सके कि हैं कि देश में गाय के नाम पर चलने वाली राजनीति निरापद और निस्पृह नहीं है?  भारतीय समाज में गाय को सबसे ज्यादा निरापद पशु माना जाता है। वह समाज में सीधेपन का प्रतीक है, लेकिन गाय पर होने वाली राजनीति उतनी ही ज्यादा क्रूर, कठोर और अमानवीय है। गौ-संरक्षण के नाम पर उत्तर भारत में होने वाली क्रूर राजनीति का चेहरा जितना शर्मनाक है, उतना ही वीभत्स कन्नूर (केरल) में राजनीतिक रूप से प्रायोजित कांग्रेस का वह बीफ-फेस्ट है, जो मवेशी बाजार में पशुओं की खरीद-फरोख्त को नियमित कर, क्रूरता रोकने वाले केन्द्रीय कानून के खिलाफ था। गाय के नाम पर सक्रिय इस राजनीतिक-बिरादरी में कन्नूर का यह बीफ-फेस्ट राजनीति में मौजूद पशुता का वह चेहरा है, जो समाज में रक्तपात का संवाहक है। इसकी आड़ में राजनीति कभी पशुओं को मारती हैं, तो इंसानों की जान लेती है। क्या कांग्रेस, भाजपा या अन्य दल अपनी राजनीति को उन सवालों से दूर नहीं रख सकते, जिसके समाधानों का भूगोल एक नही हैं और इतिहास अलग-अलग है। उत्तर भारत में मोदी-सरकार गौ-संरक्षण के नाम पर वोटों की फसल उगाती है, वहीं मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण में बीफ भाजपा के गले में हड्डी जैसा अटका है। वहां उसके नेताओं के कथोपकथन और रणनीति उत्तर भारत से विरोधाभासी है। नफरत को प्रायोजित करके वोट कमाने के ये तरीके नाजायज हैं।  देश इस वक्त राजनीतिक- संतुलन के ऐसे मानसिक-दौर से गुजर रहा है, जहां सही-गलत, अच्छे-बुरे, राष्ट्रीय-अराष्ट्रीय, सामाजिक-असामाजिक सवालों के फेब्रिक या ताने-बाने में काले-भूरे का फर्क करना भी मुश्किल होता जा रहा है। राष्ट्रहित से जुड़े मसलों को देखने के लिए पूरे देश के चश्मे का रंग एक होना चाहिए। रक्षा मंत्री अरुण जेटली के इस मत पर कोई असहमत नहीं है कि आतंकवाद और बार्डर के मसलों में सेना की कार्रवाई सवालों से परे होना चाहिए। लेकिन इन संदर्भों में सर्जिकल-स्ट्राइक जैसी कार्रवाई को राजनीति का हिस्सा बनाने से रोकना भी उतना ही जरूरी है। भाजपा राजनीतिक-श्रेय बटोरने की अफरा-तफरी में ऐसा करने में असमर्थ रही है। बंगला देश और पाकिस्तान जैसे युध्दों में विजयी सेना के इतिहास को राजनीतिक-प्रदूषण से बचाने का दायित्व भी सरकार के कंधों पर है। सेना के साथ ही उसे देश के पूरे राजनीतिक पर्यावरण को दुरुस्त रखने की महती जिम्मेदारी का निर्वहन भी करना होगा। लेकिन इन मामलों में सिर्फ भाजपा के ही नहीं, कांग्रेस सहित सभी राजनेताओं के पांव राजनीतिक-अतिरेक के कीचड़ में सने हैं। [लेखक उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक हैं ]

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Dakhal News 3 June 2017


नोटबंदी  जीडीपी

नोटबंदी के बाद देश की जीडीपी में आई गिरावट को लेकर केंद्र सरकार भले की कुछ कह रहीं हो लेकिन कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि मैंने पहले ही कह दिया था कि नोटबंदी की वजह से जीडीपी में गिरावट आएगी और मेरी बात सही निकली। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी नोटबंदी की वजह से आर्थिक विकास दर में आई गिरावट को लेकर सरकार पर प्रहार करते हुए आंकड़ों में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में जीडीपी दर गिरकर 6.1 फीसद आने से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आशंका सच साबित हुई है। मनमोहन ने नोटबंदी की वजह से आर्थिक विकास दर में दो फीसद गिरावट का अनुमान जताया था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विकास दर घटने पर सरकार को आडे़ हाथ लेते हुए कहा है कि जीडीपी में गिरावट और नौकरियों में आ रही भारी कमी हकीकत है। इस हकीकत से लोगों का ध्यान बंटाने के लिए ही बाकी सारे विवादित मुद्दों को उछाला जा रहा है। कांग्रेस नेता पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने जीडीपी के ताजा आंकड़ों पर ट्वीट करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था में गिरावट की शुरुआत तो जुलाई 2016 में ही हो गई थी। नोटबंदी ने इस स्थिति को और खराब कर दिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के समय जीडीपी में गिरावट डेढ़ फीसद तक की उनकी आशंका बिल्कुल सही साबित हुई है। चिदंबरम ने कहा कि वित्त वर्ष 2015-16 और 2016-17 की आखिरी तिमाही का आंकड़ा देखें तो जीडीपी में गिरावट 3.1 फीसद है। राहुल और चिदंबरम के ट्वीट के बाद कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अजय कुमार ने जीडीपी दर में गिरावट को देश के लिए बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार ने गिरावट को कम से कम दिखाने के लिए आंकड़ों में हेरा-फेरी की पूरी कोशिश की है। इसके लिए थोक मूल्य सूचकांक के मानक वर्ष को बदला गया। कुमार ने कहा कि सरकार की इन कोशिशों के बावजूद जीडीपी में आखिरी तिमाही में गिरावट से साफ हो गया है कि अर्थव्यवस्था पनर नोटबंदी के प्रतिकूल असर होने की मनमोहन सिंह की आशंका सही साबित हुई है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जीडीपी में गिरावट से स्पष्ट है कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार के कुप्रबंधन का खामियाजा देश को उठाना पड़ रहा। विकास दर में गिरावट का दौर है, आईटी सेक्टर में मंदी है, नई नौकरियों का सृजन होना तो दूर हजारों की संख्या में लोगों की नौकरियां छीन रही है। मैन्यूफैक्चरिंग, सेवा क्षेत्र से लेकर औद्योगिक उत्पादन सभी में गिरावट है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यूपीए ने मई 2014 में जिस आर्थिक विकास की गति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता सौंपी थी आज जीडीपी की दर उससे भी नीचे आ चुकी है। उनका कहना था कि जीडीपी की मौजूदा विकास दर भी कृषि क्षेत्र के बेहतर नतीजे की वजह से है जिस पर सरकार या प्रधानमंत्री का बिल्कुल ध्यान नहीं है। प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि पीएम जिस क्षेत्र में भी हाथ लगाते हैं वहां गिरावट तेजी से होती है। पार्टी ने कहा कि सरकार और पीएम के लिए बेहतर होगा कि वह प्रचार के आडंबर को छोड़ देश की आर्थिक सेहत को पटरी पर लाने के लिए अगले दो साल तक काम करें।  

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Dakhal News 2 June 2017


अरुण जेटली

  केंद्र सराकर के तीन साल पूरे हो चुके हैं और इसके बाद केंद्र सरकार के मंत्री अपने काम का लेखाजोखा देने में लगे हैं। इसी कड़ी में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सराकर के कमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इससे पहले काम ना करने वाली सरकार थी। जब हमारी सरकार बनी तो काम शुरू हुआ। हमें विरासत में खराब अर्थव्यवस्था मिली थी जिसे सुधारा। जेटली बोले कि तीन साल में दो साल मानसून खराब रहा और आर्थिक मोर्चों पर देश के सामने बड़ी चुनौतियां थीं। हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार वाली व्यवस्था शुरू की और अब सरकार कई कड़े फैसले भी ले रही है। जीएसटी लागू होने पर देश में बड़ा बदलाव होगा। जेटली ने कहा कि बीते तीन साल अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहें। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षणवादी नीतियों को बढावा दिया गया, वहीं घरेलू मोर्चे पर भी मानसून बीते साल बेहतर नहीं रहा। लेकिन इन चुनौतियां के बाद भी पारदर्शिता बढ़ने से अर्थव्यवस्था में भरोसा लौटा है। जेटली ने नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि नोटबंदी से इकोनॉमी मजबूत हुई है। साथ ही जीएसटी लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। साथ ही नोटबंदी के बाद टैक्स से होने वाली आय में 18 फीसद का इजाफा हुआ है। जेटली ने कहा कि नोटबंदी से तीन बड़े फायदे हुए। पहला, डिजिटाइजेशन को बढ़ावा मिला है। दूसरा, टैक्स देने वालों की संख्या में इजाफा हुआ और तीसरा अर्थव्यवस्था में नकदी का इस्तेमाल कम हुआ है। गौरतलब है कि सरकार न 8 नबंवर को नोटबंदी का फैसला लिया था जिसके बाद 1000 और 500 रुपए के नोट लीगल टेंडर नहीं रहे थे। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऑपरेशन क्लीन मनी के लिए सरकार की ओर से कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। आपको बता दें कि सरकार की ओर से दो बार आईडीएस (आय घोषणा योजना) स्कीम लाई गई, जिनमें लोगों से अपनी अघोषित आय की घोषणा करने को कहा गया था। जीएसटी पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद बड़ा बदलाव आएगा। साथ ही यह भरोसा दिलाया कि सभी राज्य 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार हैं। श्रीनगर में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक काफी सकारात्मक रही। जेटली ने कहा कि जीएसटी का कोई भी बुरा असर नहीं होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह भी कहा कि बैंकों में एनपीए कम करने पर काम जारी है। साथ ही एफडीआई के मोर्चे पर सरकार का काम शानदार रहा है, सरकार की ओर से एफडीआई नियमों में किया गया बदलाव सकारात्मक रहा। सरकार डिफेंस मैन्युफैक्चरिंगं को बढ़ावा दे रही है।  

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Dakhal News 1 June 2017


chandraswami

  उमेश त्रिवेदी देश के मौजूदा राजनीतिक दौर में राजनेताओं के इर्द-गिर्द जमा होने वाले साधु-संतों और तांत्रिकों की उपयोगिता के बारे में उन्मादी चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन साठ, सत्तर, अस्सी और नब्बे के दशक की राजनीति में इन बाबाओं के भस्मावतार को लेकर माहौल में भाव-विव्हलता देखने को नहीं मिलती थी। आज, जबकि संत-समागम की सांस्कृतिक थाप पर सत्ता की राजनीति थिरकती है, राजनीति के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चित रहे तांत्रिक चंद्रास्वामी के निधन के बहाने सत्तालीन साधु-संतों के भस्मावतारों की कहानियां खुद-ब-खुद सुर्ख होने लगी हैं।  सत्ता, सिंहासन और राजनीति के मायालोक में साधु-संतों के चमत्कारों का दबदबा हमेशा रहा है। भारतीय लोकतंत्र में भी कतिपय अपवादों को छोड़कर ज्यादातर नेता तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक की कुत्सित चालों से जन-भावनाओं के साथ हेराफेरी करते रहे हैं। पहला अपवाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हैं। गांधी इन हथकण्डों से कोसों दूर थे। उनके आत्म-बल और कर्म-साधना के आगे नतमस्तक दुनिया उन्हें महात्मा संबोधित करती थी। बगैर किसी गंडा-ताबीज के गांधी का महात्मा होना अपने आप में अद्भुत घटना है। प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की स्वस्फूर्त वैज्ञानिक तात्विकता ने कभी भी इस 'कम्युनिटी' को पास फटकने नहीं दिया था। नेहरू के अलावा लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई और चौधरी चरणसिंह जैसे प्रधानमंत्री भी इन काली विद्या के काले कारनामों से कोसों दूर थे। अल्पावधि स्थानापन्न प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा का नाम भी इसी श्रेणी रख सकते हैं। कांग्रेस के प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव के सौर-मंडल में चंद्र-धुरी पर राजनीति को नचाने वाले चंद्रास्वामी का नाम सबसे ज्यादा उभरा था। इससे पहले श्रीमती इंदिरा गांधी के दौर में धीरेन्द्र ब्रह्मचारी सुर्खियों में आए थे। 'पावर-कॉरीडोर' में धीरेन्द्र ब्रह्मचारी की कहानी में भी चंद्रास्वामी जितने ही चटखारे हैं। ब्रह्मचारी इंदिराजी को योग सिखाते थे। भारत के क्षितिज पर योग-गुरू के रूप में धीरेन्द्र ब्रह्मचारी का अभ्युदय उस वक्त हुआ था, जबकि जगप्रसिध्द योगी बाबा रामदेव का नामोनिशान नहीं था। इंदिराजी से  उनकी नजदीकियां महज योग के कारण नहीं थीं। ब्रह्मचारी ने 1975-76 में इंदिराजी की कुंडली में अनचाही कुलांचें भरते शनि और राहु-केतु के प्रकोपों को नियंत्रित और संयमित करने के विधान सम्पन्न कराए थे। इंदिराजी के प्रभा-मंडल से आच्छादित धीरेन्द्र ब्रह्मचारी सत्ता के गलियारों में स्वत: ताकतवर शख्सियत बनते गए। देश के सभी सीबीएससी स्कूलों में योग की शिक्षा का शुभारंभ स्वामी रामदेव से काफी पहले धीरेन्द्र ब्रह्मचारी की बदौलत हुआ था। अपने रसूख की बदौलत ब्रह्मचारी ने योग-साधना के दौरान जम्मू-कश्मीर में अरबों की सम्पत्ति का निर्माण किया था। वो खुद अपने हेलीकॉप्टर में चलते थे और हथियार बनाने की फैक्टरी के मालिक थे। कालान्तर में हथियारों की तस्करी और गैर-कानूनी गतिविधियों में उनकी लिप्तता के किस्से भी सामने आए।  नब्बे के दशक में तांत्रिक चंद्रास्वामी ने भी प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव की बदौलत धीरेन्द्र ब्रह्मचारी जैसा रुतबा हासिल कर लिय़ा था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी नरसिंहराव जितने ही चंद्रास्वामी के मुरीद थे। चंद्रास्वामी के बारे में अच्छा लिखने और कहने लायक घटनाएं लगभग नगण्य हैं। ब्रह्मचारी ने तो योग-शिक्षा के महाव्दार से सत्ता के गलियारों में दाखिल होकर करोड़ो रुपयों का चमत्कारी साम्राज्य खड़ा किया था, लेकिन सिर से पैर तक 'फ्रॉड' चंद्रास्वामी की प्रभावशीलता कौतुक पैदा करती है। सत्ता के नजदीक चंद्रास्वामी दंत-कथाओं जैसे कहे और सुनाए जाते हैं। अरब के हथियार कारोबारी और तस्कर अदनान खशोगी की काली गुफाओं का अवैध अंधियारा उनकी स्याह-रोशनी का सबब था। इस स्याह-रोशनी के किनारे सेक्स, हथियार, हवाला और दलाली के अंधेरे कोनों पर खुलते थे। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह अपनी किताब 'वॉकिंग विद लायंस' में हैरानी जताते हैं कि 1979-80 में पेरिस में उनकी बीमारी के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति के निजी फिजिशयन के साथ चंद्रास्वामी को अपने सामने खड़ा देख कर वो चौंक गए थे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने उन्हें लेने के लिए अपना निजी विमान भेजा था। किस्से कई हैं, जो बोफोर्स, सेंट किट्स या हथियारों से जुड़े मुकदमों में बयां हो रहे हैं। प्रसिध्द फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने अमिताभ बच्चन व्दारा अभिनीत अपनी फिल्म 'सरकार' में चंद्रास्वामी की वेश-भूषा और चरित्र को खलनायक के रूप मे पेश किया है। सत्ता के लाल-कालीनों पर अच्छे-बुरे संत-समागमों की राम-कहानियां इन दिनों भी जोरों पर हैं। मठाधीशों के आंगन में करोड़ों रुपए उलीचे जा रहे हैं और अरबों रुपयों के व्यापारिक-साम्राज्य पर फूलों की वर्षा हो रही है। सिर्फ अनुष्ठान के तरीके बदल गए हैं। चित्रलेखा में साहिर लुधियानवी का गीत मामूली संशोधन के साथ मौजूं है - 'ये पाप है क्या, ये पुण्य है क्या, 'राजनीति' पर धर्म की मुहरें हैं... हर युग में बदलती 'राजनीति' को कैसे आदर्श बनाओगे...?' [ लेखक उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है। ]

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Dakhal News 31 May 2017


bjp mp

राघवेंद्र सिंह कोई भी शरीर या संस्था एकदम से नहीं मरती। सब धीरे धीरे होता है। वक्त रहते इलाज हो गया तो ठीक,वरना इस दुनिया में आए हैं जाने के लिए। संगठन,सरकार या सिस्टम ये रफ्ता रफ्ता ही लकवाग्रस्त होते हैं। सियासत के हिसाब से पहले कभी कांग्रेस इस दौर से गुजरी है और अपनी दशा भोग रही है। इस दौर से अब भाजपा मुकाबिल है। चन्द हफ्तों में हुई घटनाओं को देखें तो काफी कुछ साफ हो जाता है। सरकार के बारे में काफी कुछ लिखा और कहा जाता है। हम रुख कर रहे हैं देव दुर्लभ कार्यकर्ताओं वाले मध्यप्रदेश भाजपा का। रुखसत किए गए ग्वालियर के वफादार नेता राज चड्डा के बाद अब जिक्र कर रहे हैं रुखसती के दरवाजे पर खड़े किए गए पूर्व मंत्री कमल पटेल का।   इस किस्सागोई में कमल पटेल का किरदार बतौर नायक बनकर उभरता दिख रहा है। वजह मुख्यमंत्री के 'नमामिदेवी नर्मदे यात्रा' में दिलाए गए माई को बचाने के संकल्प की और इसके समापन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान की। दरअसल कमल पटैल प्रदेश भाजयुमो के अध्यक्ष रहने के बाद शिवराज सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। मोर्चा नेताओं में इस जाट की धमक खूब रही है। यही कारण है कि नर्मदा से रेत लूट को रोकने के लिए उन्होंने अपने गृह जिले हरदा से जो अभियान छेड़ा वो माफिया को खटकने लगा। पहले उन्होंने मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुदनी(सीहोर) से लेकर होशंगाबाद,देवास में भी रेत चोरी रोकने को मुद्दा बनाया। हफ्तेभर तक वे रेत माफिया और प्रशासन की सांठगांठ को एनजीटी की शिकायतों से लेकर मीडिया तक में उजागर करते रहे। इस पर भाजपा के संगठन ने कोई नोटिस नहीं लिया। लेकिन जब पटैल ने अपने क्षेत्र के नर्मदा घाटों पर बीच धार तक बनाई गई सड़क और माई की छाती से पोकलेन व जेसीबी से रेत उलीचनें के वीडियो जारी किए तब नींद से जागी सरकार और भाजपा संगठन। किसी ज्ञानी ने सलाह दी कि यह सब तो सरकार विरोधी है और भाजपा की छवि खराब करने वाला है। लेकिन छवि तो दस साल से रेत की लूट होने से हो रही थी। इस आग को हवा तब लगी जब मीडिया ने भी इसे सुर्खियों में लाना शुरू किया। धोखे से ही सही एक महिला अफसर समेत कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के परिजनों समेत अवैध रेत ला रहे डंपरों को पकड़ा। हालांकि यह सब रेत चोरी की अति होने पर हुआ। ऐसे में मुख्यमंत्री के नर्मदा सेवा यात्रा अभियान में नर्मदा बचाने के जगह जगह दिलाए गए संकल्प में कमल पटैल जैसे नेताओं को भी जगाया। जब कमल जागा तो कमल वाली पार्टी नाराज हो गई। उन्हें तीन दिन पहले नोटिस थमा दिया गया कि क्यों न आपको पार्टी से निलंबित कर दिया जाए। नोटिस की भाषा निलंबित करने से ज्यादा पटैल को पीड़ा पहुंचाने वाली है। पहली ही पंक्ति में लिखा है कि अत्यंत खेद का विषय है कि आप जैसे जिम्मेदार एवं अनुभवी व्यक्ति द्वारा सुनियोजित तरीके से अनावश्यक रूप से बदनियति से भाजपा की सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ लगातार सार्वजनिक तौर पर तथ्यहीन बयानबाजी की जा रही है जिससे भाजपा व भाजपा सरकार की छवि को आघात पहुंचा है। आपका यह कृत्य घोर अनुशासनहीनता की परिधि में आता है। आपके इस कृत्य के लिए क्यों न आपको पार्टी से निलंबित किया जाए ? सात दिन में प्रत्यक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें अन्यथा आपके विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही की जाएगी। इस नोटिस की भाषा ने ही इसे आलेख में जगह देने के लिए मजबूर किया है। एक वरिष्ठ नेता के लिए इस शैली में नोटिस देना ही उसकी बर्खास्तगी जैसा ही माना जाए। एक गांव में पेड़ काटने की परंपरा नहीं थी ग्रामवासी जरूरत पड़ने पर जिस पेड़ को काटना होता था उसके पास जाकर उसे खूब अपशब्द बोल आते थे इसके कुछ दिनों बाद अपमानित हुआ पेड़ खुद ही सूख जाता था और बाद में उसे काट दिया जाता था। कमोवेश यही स्थिति कमल पटेल जैसे नोटिस प्राप्त कार्यकर्तांओं की हो रही होगी। वे भले ही पार्टी में रहें लेकिन सूख तो जाते ही हैं। कमल पटेल का गुनाह यह है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की मंशा और प्रधानमंत्री की इच्छा के मुताबिक नर्मदा बचाने का बहुत ही देशी और ठेठ अंदाज में अभियान शुरू किया। हो सकता है सरकार और संगठन में बैठे रेत प्रिय और माफिया के मुन्सिफों का रास नहीं आया हो। नतीजा सामने है अगर आलाकमान ने दखल नहीं दिया तो पार्टी से निकाले जाने की औपचारिकता भर बाकी है। इसके पहले ग्वालियर के राज चड्डा भी भ्रष्टाचार हटाने या ऐसा न होने पर खुद को हटाने की मांग पार्टी से कर चुके थे। भाजपा ने उन्हें हटाना मुनासिब समझा। असल में संगठन और सरकार को ये सब बातें सबके सामने करना पसंद नहीं आता। और खासबात ये है कि पार्टी फोरम पर सरकार और संगठन की खामियों को कहने की इजाजत नहीं है। अब तो पार्टी के खैरख्वाहों ने ये लाईन तय कर दी है कि सरकार और प्रशासन की कोई निगेटिव बात प्रदेश कार्यसमिति की बैठकों में नहीं होगी। मगर कोई यह नहीं बताता कि आखिर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था,रेत चोरी और नौकरशाही की मनमानी को रोकने की बात कहां और कैसे की जाए। लेकिन कोई कहता है तो उसका टेंटुआ दबाने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं। संवादहीनता के हालात... सागर के सांसद समाजवादी पृष्ठभूमि के नेता लक्ष्मीनारायण यादव ने पिछले दिनों कहा कि प्रशासन में मनमानी है और काम कराना मुश्किल हो गया है। परेशान यादव ने अगला चुनाव नहीं लड़ने का भी ऐलान किया है। ऐसे ही संगठन और सरकार में अराजकता का दूसरा उदाहरण बालाघाट के सांसद बोध सिंह भगत और कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की एक मंच पर हुई तकरार से भी सामने आया है। भगत को कार्यक्रम में बोलने का अवसर नहीं मिला तो वे वहीं पर कहते हैं कि पार्टी किसी की बपौती नहीं है। बाद में दोनों के बीच तकरार भी हुई। इसी तरह भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष ने लंबे इंतजार के बाद संगठन को बताए बिना पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी। भाजपा में इस तरह के मामले अजूबे के तौर पर हैं। पहले कभी ऐसा कांग्रेस में अलबत्ता होता था। मिसालें तो बहुत हैं हम इन चुनिंदा घटनाओं का जिक्र कर यह बताना चाहते हैं कि भाजपा संगठन लकवाग्रस्त हो रहा है। सरकार में मुख्यमंत्री कहते हैं कलेक्टर से मिलना भगवान से भेंट करने के बराबर है। कार्यकर्ता कहते हैं पार्टी कार्यालय में आने के बाद भी जिम्मेदारों से मिलना देवताओं से मिलने सरीखा दुर्लभ है। मंत्री गोपाल भार्गव केबिनेट की बैठक में सीएम से पूछ चुके हैं कि वे अपनी बात किस अफसर से कहां और कब कहें कि आप तक पहुंच जाए। कमल पटेल औऱ राज चड्डा के मामले में मशहूर शायर दुष्यंत कुमार का शेर,गुस्ताखी माफी के साथ..."हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग। रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही"।  काफी सटीक बैठता है।

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Dakhal News 31 May 2017


उज्मा अहमद

उज्मा अहमद ने जब अपनी मां को गले लगाया तो उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे और फिर उसने झुककर अपनी तीन वर्षीय बेटी को गोद में उठा लिया. दिल्ली निवासी उज्मा पाकिस्तान में खराब समय बिताने के बाद गुरुवार (25 मई) को अपने घर लौटी और यहां मीडिया के साथ बातचीत के दौरान रह रह कर उसकी आंखों में आंसू आ जाते थे. इस्लामाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लौटने की अनुमति मिलने के बाद वह भारत लौट पाई. पाकिस्तान में उसका ताहिर अली नाम के व्यक्ति से जबरन निकाह करा दिया गया जिसने उसके सभी कागजात ले लिए थे. उसने अपने आतंक की दास्तां साझा की कि पाकिस्तान में उसे ‘तालिबान की तरह के इलाके’ में रहने के लिए बाध्य किया जाता था जिसे उसने ‘मौत का कुआं’ बताया. विदेश मंत्रालय की तरफ से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रश्न नहीं पूछे गए. उसने बताया कि उसकी मुलाकात मलेशिया में अली से हुई थी और दोनों के बीच प्यार हो गया. वह मई की शुरुआत में उसके साथ पाकिस्तान चली गई. उसने कहा, ‘मैं छुट्टियां बिताने पाकिस्तान गई. मेरी योजना दस या 12 मई को लौट आने की थी. लेकिन जब मैं वहां पहुंची तो ऐसा नहीं था. आप इसे अपहरण की स्थिति कह सकते हैं.’ उसने कहा, ‘जब हमने वाघा सीमा पार की तो कुछ भी अच्छा महसूस नहीं हो रहा था.’ उज्मा ने कहा कि अली ने उसे नींद की गोलियां दीं और ‘एक असामान्य गांव’ में ले गया जिसे बुनेर बताया जाता था. उज्मा ने कहा कि लगता था कि यह खबर पख्तूनख्वा प्रांत के बुनेर जिले का सुदूर गांव था जहां तीन मई को अली ने बंदूक की नोक पर उससे शादी की. उसने कहा, ‘भाषा पूरी तरह अलग थी और लोग भी असामान्य थे. मुझे वहां बंधक बनाकर रखा गया और पीटा गया.’ उज्मा ने कहा कि जिस घर में उसे रखा गया था वहां ‘बड़ी बंदूकें’ थीं और अली अपने साथ पिस्तौल रखता था. उसे प्रतिदिन गोलियों की आवाज सुनाई पड़ती थी. उसने कहा, ‘मुझे लगता था कि मैं वहां अकेली नहीं थी. वहां दूसरी लड़कियां भी थीं शायद भारतीय नागरिक नहीं थीं और संभवत: फिलिपीन की थीं. कई लड़कियां उस स्थान को छोड़ने में सक्षम नहीं थीं.’ संवाददाता सम्मेलन में अपनी कहानी सुनाते.. सुनाते वह भावुक हो रही थी जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद थीं. उसने कहा कि वह ‘गोद ली हुई बच्ची’ थी, लेकिन सरकार ने महसूस कराया कि वह ‘भारत की बेटी’ है. सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए उसने सुषमा, उनके मंत्रालय और इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग का धन्यवाद दिया. उसने कहा, ‘मैं आज यहां केवल सुषमा मैडम के कारण हूं जिन्होंने पूरे प्रकरण के दौरान नजर बनाए रखा. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं ‘हिंदुस्तान की बेटी’ हूं, उनकी बेटी हूं और मुझे चिंता करने की जरूरत नहीं है. इन शब्दों से मुझे ताकत मिली जब मैं पूरी तरह अंदर से टूट चुकी थी.’ यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वह बुनेर से इस्लामाबाद कैसे पहुंची. लेकिन वहां पहुंचते ही उसने भारतीय उच्चायोग में शरण ले ली जिसने उसके मामले को आगे बढ़ाया, उसे कानूनी सहायता मुहैया कराई. उज्मा ने कहा, ‘उन्होंने (सुषमा) मुझसे कहा कि मैं दो-तीन वर्षों तक उच्चायोग में ठहर सकती हूं, लेकिन वह उसे उस व्यक्ति (ताहिर) के पास नहीं लौटने देंगी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि सरकार इतना कुछ मेरे लिए कर सकती है.’ सुषमा ने बताया कि उज्मा इतना निराश हो गई थी कि उसने उच्चायोग के अधिकारियों से कहा कि अगर उसे नहीं बचाया गया तो वह आत्महत्या कर लेगी. पाकिस्तान में भारत के उप उच्चायुक्त जे पी सिंह ने कहा, ‘वह उच्चायोग के काउंटर पर जब पहुंची तो काफी घबरा हुई थी. हम तुरंत उसे अंदर ले गए और हर तरह से उसका सहयोग किया.’ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (24 मई) को उसे भारत लौटने की इजाजत दी जब उसने अदालत का दरवाजा खटखटाकर अली को दस्तावेज लौटाने का निर्देश देने की मांग की.  

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Dakhal News 26 May 2017


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उमेश त्रिवेदी  सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मसले पर बजरिए हलफनामा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जो आत्म-समपर्ण किया है, उसके निहितार्थ सिर्फ तीन तलाक के मुकदमे तक सीमित नहीं रहेंगे। यह एक सामाजिक क्रान्ति की शुरुआत है, जो मुस्लिम समाज में तब्दीली के साथ देश की राजनीतिक-आबोहवा में एक नई महक पैदा करेगी। इसके राजनीतिक आयामों की मीमांसा भी नई रोशनी की ओर इशारा करती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है, लेकिन अदालत में सवाल-जवाबों के मंथन में निकले विषमताओं के विष से दूषित होते  महिला-अधिकारों के अमृत की हिफाजत सबकी चिंता का सबब थी। अमृत और विष का खेल पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए अलर्ट था कि विष को छांटने का उपक्रम सुप्रीम कोर्ट के संभावित प्रकोप को कम कर सकता है। कोर्ट का रुख भांपने के बाद पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह रणनीतिक-पहल की है। लेकिन यह महज कोर्ट के रुख से जुड़ा सवाल नहीं है। मोदी-सरकार की कट्टरपंथी मूरत के राजनीतिक पूजा-विधान में तुष्टिकरण के मंत्रोच्चार के सूत्र और श्लोक हटा दिए गए हैं। तुष्टिकरण के भाजपाई पूजा-विधान पर जनता की मुहर भी लग चुकी है। कोर्ट के सामने यह सरेण्डर बोर्ड की इस समझ का सबब है कि इस्लाम के नाम पर वोटों की राजनीति का दौर अब समाप्ति की ओर है।  मुस्लिम तुष्टिकरण के खिलाफ भाजपा का बोल्ड चुनाव-विधान देश में ऩई राजनीति का आव्हान करता प्रतीत होता है। उप्र चुनाव के बाद मुस्लिम राजनीति को लेकर विपक्षी दल सांप-छछूंदर जैसे असमंजसों से घिरे हैं। मुस्लिम मसलों में उनकी उग्रता कम होती जा रही है। इसका एक जायज संदेश यह भी है कि वोटों की परवाह किए बिना समाज-हित से जुड़े मामलों में सरकारें यदि सकारात्मक स्टैण्ड लेंगी, तो जनमत पूरा समर्थन करेगा। देश वोटों की राजनीति के नाम पर होने वाले धत्कर्मों से ऊब चुका है। मसले सिर्फ तीन तलाक तक ही सीमित नहीं हैं। पिछड़ों के आरक्षण में क्रीमी लेयर के सवाल भी भभक रहे हैं, जिनके कारण हरियाणा या गुजरात में आंदोलनकारियों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। नदियों के पानी का बंटवारा, किसानों की मौत, गौ-रक्षा के नाम पर होने वाले फसाद, सांप्रदायिक झगड़े, जातीय-विवाद जैसे मुद्दों की लंबी श्रृंखला है, जिन्हें राजनीति से अलग ट्रीट करने की जरूरत है। भाजपा को इन मुद्दों को भी एड्रेस करना होगा।  एक तबका मानता है कि तीन तलाक के मामले में मोदी सरकार इसलिए सख्त है कि हिन्दू-ध्रुवीकरण की रासायनिक क्रिया में यह केटेलिसिस का काम कर रहा है। इस मामले में भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू हैं। लेकिन ऐसे लड्डुओं का मोह भाजपा को छोड़ना होगा।           मुस्लिम समाज में महिलाओं के हकों पर कुठाराघात करने वाले तीन तलाक की परम्परा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर होने वाली बहस को सुप्रीम कोर्ट ने लगातार छह दिनों तक सुना है। पांच जजों की संविधान-पीठ के सामने केन्द्र-सरकार, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन से जुड़ी महिलाओं की दलीलों से बौध्दिक-समाज उव्देलित है। बोर्ड को समझ में आ गया है कि मुस्लिम महिलाओं के मानवीय सवालों को इस्लाम के नाम पर अब टालना संभव नहीं है। उनके जवाब देना ही होंगे। इसीलिए बोर्ड फैसला सुनाए जाने से पहले एक सुधारवादी हलफनामे के साथ सामने आया है। बोर्ड का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के वर्डिक्ट को प्रभावित करने वाली रणनीतिक पहल से ज्यादा कुछ नहीं है।  बोर्ड का हलफनामा कहता है कि निकाहनामे में  जिक्र होगा कि तीन तलाक ना दिया जाए। सभी काजियों को जरूरी निर्देश दिए जाएंगे। बहरहाल, अखिल भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने बोर्ड की पहल को नकार दिया है। मुस्लिम महिलाएं कोर्ट और देश की संसद से अपना हक मांग रही हैं। बोर्ड को यह जताने की जरूरत नहीं है कि भारत के मुसलमानों के एक मात्र रहनुमा यही लोग हैं।  व्यावहारिक धरातल पर यह लड़ाई आसान नहीं है। 1986 में मुस्लिम महिलाओं के हक में लड़ते हुए 62 साल की शाहबानो सुप्रीम कोर्ट में जीतने के बावजूद इसलिए हार गई थी कि केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी, जिसने वोटों की राजनीति में तुष्टिकरण को तवज्जो देते हुए संविधान-संशोधन करके फैसले को पलट दिया था। तीस साल बाद, 2016 में उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले ही आधी लड़ाई जीत चुकी हैं। और, यह भी तय है कि चाहे जो फैसला हो, इस बार संविधान संशोधन करके शाहबानो की तरह शायरा बानो को नहीं हराया जाएगा। मोदी-सरकार पर यह भरोसा तो किया जा सकता है। [ लेखक उमेश त्रिवेदी सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 24 May 2017


अमित शाह

उमेश त्रिवेदी  दक्षिण भारत के सुपर स्टार रजनीकांत के राजनीति में आने की अटकलों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस सुपर-स्टार को भाजपा से जोड़ने की राजनीतिक संभावनाओं को खंगालना शुरू कर दिया है। भाजपा का अध्यक्ष पद संभालने के बाद अमित शाह देश में राजनीतिक आखेट के एक ऐसे चतुर धनुर्धर के रूप में उभरे है, जिसका सब लोग लोहा मानते हैं।  चुनावी महासमर में राजनीतिक आखेट उनकी व्यूह-रचनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्तमान में अमित शाह राष्ट्रपति-चुनाव के अलावा गुजरात के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख कर स्वर्ण-मृगों की तलाश में राजनीतिक-आखेट पर निकल पड़े हैं।      राजनीतिक शतरंज पर अमित शाह की चालों को समझना विपक्षियों के लिए मुश्किल है। वो एक साथ कई मोर्चों को ध्यान में ऱख कर आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रपति-चुनाव और गुजरात चुनाव के अलावा ममता बनर्जी का बंगाल उनके टारगेट पर है और तमिलनाडू में भाजपा की जमीन को पुख्ता करना उनकी प्राथमिकताओं में शुमार है। उत्तर प्रदेश की जंगी जीत के बाद अमित शाह के रवैये में रणनीतिक-नरमी और लचीलापन नजर आ रहा है। वो  कांग्रेस को भी एकदम खारिज नहीं करते हैं। गुजरात में, भले ही टूटी-फूटी हो या निर्बल, भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से ही होना है। राष्ट्रपति चुनाव में भी सबसे बड़ी बाधा महागठबंधन के लिए प्रयासरत कांग्रेस ही है। राजनीतिक -सफलताओं के आकलन के बाद अमित शाह आश्वयस्त हैं कि भाजपा जितना मजबूत होगी, कांग्रेस उतनी ही बिखरेगी। इस थीसिस के बाद शाह के रुख में 360 डिग्री बदलाव आया है। वो समझते हैं कि क्षेत्रीय पार्टी के क्षत्रपों से राजनीतिक दादागिरी मुनासिब नहीं है। इसीलिए क्षेत्रीय दलों से उनके तालमेल की कसौटियां भिन्न हैं।  शायद इसीलिए जब रजनीकांत के राजनीति में आने की बात चली तो उन्होने नपी-तुली स्वागत की रस्म-अदायगी के बाद रस्सी को लंबा छोड़ दिया है। पिछले सप्ताह इंडियन-एक्सप्रेस में यह खबर छपी थी कि रजनीकांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने वाले हैं। भाजपा ने उन्हें मोदी से मुलाकात करने का निमंत्रण दिया है। एक करीबी के हवाले रजनीकांत ने पिछले शुक्रवार को राजनीति मे आने के संकेत दिए थे। अमित शाह ने सधे शब्दों मे कहा था कि राजनीति में आने के बाद भाजपा में आने का फैसला खुद रजनीकांत को करना है। पिछले सप्ताह रजनीकांत ने अपने प्रशंसको से कहा था कि वो जंग के लिए तैयार रहें। उनके मुरीदो ने इस राजनीति मे जाने के संकेत के रूप में देखा था। तमिलनाडू में कई फिल्मी कलाकार राजनीति में अपने हाथ आजमा चुके हैं और उन्होने बुलन्दियां हांसिल की है। उल्लेखनीय है कि जयललिता के निधन के वक्त भी यह खबर सुर्खियों में आई थी कि रजनीकांत राजनीति में आ सकते हैं।         भाजपा के सशक्तीकरण के अमित शाह के प्रयासों का सिलसिला तमिलनाडू तक सीमित नहीं हैं। राष्ट्पति चुनाव के मद्देनजर वो बिहार के राजनीतिक-सरोवर में भी लगातार पत्थर फेंक कर लहरें पैदा करते रहे हैं और गुजरात में कांग्रेस के गलियारों को भी खाली नही छोड़ा है। विपक्ष की नब्ज को अमित शाह भलीभांति समझते हैं। वो जानते हैं कि नीतीश कुमार बिहार में लालू यादव की कमजोर नस हैं और गुजरात में शंकरसिंह वाघेला कांग्रेस की कमजोर रग है। इसीलिए जंहा लालू यादव, पी चिदम्बरम् अरविंद केजरीवाल, मायावती और  ममता बनर्जी  भाजपा की अग्नि-वर्षा में झुलस रहे हैं, वहीं नीतीश कुमार और शंकरसिंह वाघेला इस हमले से मुक्त हैं। अमित शाह के   ताजा टीवी साक्षात्कार से पता चलता है कि वाघेला और नीतीश कुमार उनके लक्षित राजनीतिक-शत्रुओं की सूची में शुमार नही हैं। वाघेला के बारे में अमित शाह का यह कथन गौरतलब है कि - ’सुना है कि वाघेलाजी कांग्रेस में खुश नहीं है’ और ’नीतीश कुमार ने अभी तक भाजपा से कोई संपर्क नही किया है ।’ टीवी कार्यक्रम में उन्होने स्पष्ट संकेत दिए है कि दोनो नेताओं के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं। यानी अमित शाह राजनीतिक- आखेट जारी है...।[ लेखक उमेश त्रिवेदी सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]

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Dakhal News 23 May 2017


anil dave

श्मशान वैराग्य...शायद सेलफोन, फेसबुक और वॉट्सएप के चलते आपाधापी की इस दुनिया में अब यह भी संभव नहीं। मसला सियासत का हो तो वैराग्य भाव भी व्यर्थ। वैसे भी ‘मूल्य’ आधारित राजनीति के बाद तो संभवतः नैतिकता की बातें सिर्फ बातें ही हैं। लेकिन दिल्ली दरबार में मध्यप्रदेश ब्रांड एम्बेसडर बन रहे केंद्रीय राज्यमंत्री अनिल माधव दवे के अचानक दबे पांव चले जाना सबको सकते में डाल गया। पहले तो उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि। देश और खासतौर से मध्यप्रदेश के लिए बड़ा नुकसान है। इस पर मेरे पारिवारिक मित्र ने चार लाइन भेजी थी जिसे आपके साथ साझा कर रहा हूं... भ्रम था कि सारा बाग अपना है...तूफां के बाद पता चला कि सूखे पत्तों पर भी हक बेरहम हवाओं का था... संघ के स्वयंसेवक से देखते ही देखते श्री दवे कब इलेक्शन मैनेजर, मीडिया मैनेजर और डैमेज कंट्रोलर से लेकर आज की कॉर्पोरेट पॉलिटिक्स में कब सीईओ बन गए पता ही नहीं चला। तकरीबन डेढ़ दशक के राजनीतिक जीवन में उनकी जैट स्पीड से अपने पराए सब अचंभित थे। शत्रु और मित्र दोनों के लिए वे आउट ऑफ वे जाकर काम करने का जज्बा रखते थे। इसलिए उनके पास छोटे-बड़े इंतजामअलियों की ऐसी टीम थी जो सत्ता और संगठन और करीब-करीब हर मीडिया हाउस में असरदार रसूख रखती थी। बड़े-बड़े मीडिया घरानों के संचालक उनके मुरीद होने के कारण श्रीचरणों में रहते थे। एकाध का तो मैं साक्षी भी रहा हूं। चुनाव के दौरान विज्ञापन और पैसे बांटना एक बड़ा काम हुआ करता है जिसे वह बखूबी अंजाम देते थे। जहां गुड़ की भेली होगी वहां चींिटयों तो आएंगी और ततैया (बरैया) मंडराएंगी भी। दोनों को वह ढंग से साध लेते थे। दवेजी कुशल संगठन के साथ चाणक्य भी थे। इसलिए उनकी रुतबा, रसूख, गुरुर और सत्ता साकेतों में धमक भी थी। यही कारण है कि भारतीय राजनीति के समंदर दिल्ली में अल्पकाल में ही प्रधानमंत्री की निजी पसंद बन गए थे। गाहेबगाहे उनके प्रदेश की राजनीति में धमाकेदार वापसी की संभावनाएं कभी कानोकान तो कभी मीडिया जगत की सुर्खियों में रहती थी जिसके चलते उन्हें लेकर भयमिश्रित माहौल बना रहता था। यह उनके अवसान के बाद भी सत्ता और संगठन में दिखा और महसूस भी हुआ। उनके अंतिम यात्रा से लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय में करीब तीन घंटे चली श्रद्धांजलि सभा में भी इसका अहसास हुआ। इससे पता चलता है उनका कद। दरअसल इतनी लंबी शोक सभा पितृपुरुष कुशाभाऊ ठाकरे, राजमाता विजयराजे सिंधिया, प्यारेलाल खंडेलवाल, नारायण प्रसाद गुप्ता से लेकर हाल ही में दिवंगत हुए पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की भी नहीं रही। एक बार फिर पता चला कि श्री दवे की टीम में उनसे प्रशिक्षित जो छोटे-बड़े प्रबंधक हैं यह उनकी ही योग्यता का कमान है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने श्रद्धांजलि सभा में उन्हें इवेंट मैनेजर और एक वयोवृद्ध साहित्यकार ने डैमेज कंट्रोलर बताया है। पुष्टि के लिए उन्होंने एक किस्सा भी सुनाया कि किस तरह मुख्यमंत्री के हाथों विमोचित होने जा रही एक पुस्तक का मेटर उड़ जाने पर श्री दवे की युक्ति काम आई थी। पुस्तक पर कवर पेज लगाकर कार्यक्रम संपन्न कराया गया। इस दौरान दवे की कुशलता, चतुराई और अद्वितीय संगठन क्षमता के कई उदाहरण लोगों ने जैसा उन्हेें जाना वैसे बताया। वो टीम को साथ लेकर चलने वाले समय के पाबंद और कठोर निर्णय लेने वाले प्रशासक थे। उनके पास कई दायित्व रहे लेकिन केंद्रीय मंत्री बनने के पहले नर्मदा समग्र और नदी का घर जैसे संस्थान एक राजनेता के प्रकृति प्रेमी होने का प्रमाण देते हैं। उनकी नर्मदा यात्रा भी खासी चर्चित और प्रभावी रही जिसमें उन्होंने हेलिकॉप्टर, स्टीमर और नाव के साथ नर्मदा माई की पैदल परिक्रमा भी की। कुल मिलाकर उनके खाली स्थान की पूर्ति असंभव भले ही न हो, मुश्किल जरूर है। श्री दवे सियासत के आसमान में एक बड़ी संभावना थे। उनके अवसान से लगा जैसे दुपहरी में शाम हो गई हो। उनका जाना सत्ता में सक्रिय लोगों के लिए सदमा भी है सबक भी। पलभर का ठिकाना नहीं है इसलिए सियासत में सूफियाना अंदाज ही मरने के बाद लोगों के दिलों में जिंदा रख सकेगा वरना लोग यही कहेंगे... ‘बहुत गजब नजारा है इस अजीब सी दुनिया का, लोग सबकुछ बटोरने में लगे हैं खाली हाथ जाने के लिए।’ ये क्या हो रहा है मध्यप्रदेश की राजनीति में जो कुछ हो रहा है उससे नैतिकता और मूल्य आधारित दावों की धज्जियां उड़ती लगती हैं। सत्ताधारी भाजपा में एक के बाद एक पदाधिकारी और अब मंत्री तक पर आपराधिक मामले दर्ज हो रहे हैं। संगठन-सरकार कार्रवाई करने की बजाए उनके समर्थन में खड़े होकर क्या संदेश देना चाहते हैं? मसलन मंत्री लाल सिंह आर्य को कांग्रेस विधायक माखनलाल जाटव की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी बनाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन संगठन उन्हें क्लीनचिट दे रहा है। जबकि एक समय हत्या से जुड़े मामले में सांसद अनूप मिश्रा जब मंत्री थे तब उन्होंने नैतिकता के नाते पद छोड़ िदया था जबकि केस में उनके परिजन आरोपी थे और उनका तो नाम तक नहीं था। अब इसे नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुद्दा बना लिया है। वह आर्य के इस्तीफे को लेकर सीएम हाउस के सामने धरना देने की बात कर रहे हैं। जाहिर है भाजपा की नैतिकता के मुद्दे पर बैकफुट पर आएगी। इसके अलावा भाजपा नेताओं पर देशद्रोह के मुकदमे और अब एक प्रकोष्ठ के मीडिया प्रभारी नीरज शाक्य को सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह सब चौकाने वाले मामले हैं। दूसरी तरफ मां नर्मदा से रेत नोचने का खेल जारी है। हरदा से पूर्व मंत्री कमल पटेल ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्य सचिव समेत कई अधिकारियों के खिलाफ उन्होंने एनजीटी में शिकायत की है। इन सब मुद्दों पर अगले दौर में चर्चा की जाएगी। तब तक तो नैतिकता और भाजपा दोनों की जय-जय...(लेखक IND24 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ समूह के प्रबंध संपादक हैं)

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Dakhal News 22 May 2017


अनिल दवे

 उमेश त्रिवेदी अनिल माधव दवे का यूं ही लंबे चिर आकस्मिक-अवकाश पर चले जाना किसी की समझ में नही आ रहा है... हमउम्र राजनीतिक संगी-साथी, लहरों पर सवार हमराह नर्मदा-यात्री, पर्यावरणविद, स्वयंसेवी संगठनों के एक्टिविस्ट और परिचितों के लिए उनका चिर-अवकाश पर चले जाना खामोश सदमा है। अनिल माधव दवे की उम्र इतनी नहीं थी कि वो मृत्यु के आगे यूं आत्मसमपर्ण करते, लेकिन उनके कृतित्व और व्यक्तित्व के अनछुए पहलू कहते हैं कि वो जिंदगी और मौत के दार्शनिक और शास्त्रीय व्दंद को अपनी आध्यात्मिकता के सहारे काफी पहले जीत चुके थे।        जिंदगी की फलसफाना नसीहतें खुद अपनी नब्ज टटोलती महसूस होती हैं कि जिंदगी के सबसे सक्रिय और उच्चतम काल-खंड में अनिल माधव दवे की तरह मौत की क्षणिकाओं के स्वागत-गीत को कैसे लिपिबध्द किया जाए? अनिल दवे की अंतिम इच्छाएं और वसीयत चौंकाती है... चौंकाती इसलिए नहीं है कि वो मात्र 61 वर्ष की उम्र में हमारे बीच से चले गए... चौंकाती इसलिए हैं कि षष्ठि-पूर्ति के पांच साल पहले ही उन्होंने आसमान से टूटते उन सितारों के भाग्य को पढ़ लिया था, जो गतिशीलता के सर्वोच्च शिखर पर दौड़ते हुए अंधेरे में गुम हो जाते हैं।       भारतीय समाज में वसीयतनामा लिखना सामान्य घटना है, लेकिन मात्र पचपन-छप्पन साल की उम्र में पेथोलॉजी-जांचों के हर इंडेक्स पर खरा व्यक्ति अपनी वसीयत नहीं लिखता है। स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के राजनीतिक दौर में अनिल दवे इसके अपवाद सिध्द होते हैं। उनके निधन के बाद उनके भाई ने उनकी वसीयत को जारी किया है, जो उन्होंने पांच साल पहले 23 जुलाई 2012 को लिखी थी। उम्र का यह मुकाम अर्जित करने वाला दौर माना जाता है। अनिल दवे एक ऐसी बड़ी राजनीतिक हस्ती थे, जिन्होंने आसमान की उड़ान भरने के लिए अपने पंख पसारे ही थे। सक्रियता के अद्भुत क्षणों में अपने अंतिम संस्कार की वसीयत और इच्छा को लिपिबध्द करने की घटना से पता चलता है कि वो किस मिट्टी से बने हैं?  जितना उनकी मौत ने चौंकाया है, लगभग उतना ही उनकी वसीयत ने चौंकाया है।      उनकी वसीयत जहां पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबध्दता को रेखांकित करती है, वहीं नर्मदा के प्रति अनुराग को प्रकट करती है। अनिल दवे ने वसीयत में लिखा है कि मेरा दाह-संस्कार बांद्राभान में वहीं किया जाए, जहां हर साल नदी-महोत्सव होता है। दवे ने उनकी स्मृति में उनके नाम पर स्मारक, प्रतियोगिताएं और पुरस्कार जैसी गतिविधियों से बचने की इच्छा व्यक्त की है। यह आडम्बरपूर्ण राजनीति से उनके विरोध का परिचायक है। यदि स्मृति में कुछ करना ही चाहते हैं तो पेड़ लगाएं और पेड़ों को पालें भी। नदी-जलाशयों के संरक्षण की बात भी इसीमें जुड़ी है।     एक सार्वजनिक जीवन की सार्वजनिक वसीयत निश्चित ही उन राजनेताओं के लिए सबक है, जिनकी पूरी जिंदगी कुछ हासिल करने में गुजर रही है। वसीयत में समाज के सीखने के लिए एक तत्व यह भी है कि उन्होंने यह सख्त हिदायत दी है कि दाह-संस्कार के बाद उत्तर क्रिया के रूप में भी सिर्फ वैदिक कर्म ही हों।        अनिल दवे की मौत से उपजी अनिश्चितता की इस धमक ने लगभग हर उस व्यक्ति को व्यग्र कर दिया है, जिसने उनकी सक्रियता को अंतिम क्षणों तक देखा है। दवे पिछले साल जुलाई में केन्द्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बने थे। यह विभाग उनकी चाहतों को फलीभूत करने वाला विभाग था, लेकिन दुर्भाग्य है कि वो साल भर भी इस पद पर काम नहीं कर पाए। अब वो भोपाल में अपने प्रिय 'नदी के घर' में कभी नहीं लौटेंगे। अनिल दवे ने नर्मदा के किनारे स्थित बांद्राभान की उस माटी में रचने-बसने का फैसला कर लिया है, जहां वो हर साल नदी-महोत्सव का आयोजन करते थे।       अनिल दवे सादगीपूर्ण भव्यता के साथ जिंदगी के हर काम को अंजाम देते थे। सिंहस्थ का वैचारिक-अनुष्ठान और विश्व हिन्दीे सम्मेलन इसके साक्षी हैं। लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि वो अपनी मौत के आयोजन को भी नैतिकता के उच्च प्रतिमानों से यूं गढ़ेंगे कि लोगों के सिर खुद ब खुद झुकने लगें...। शायद इसीलिए उनकी वसीयत को सुनने के बाद राजनीति का मर्सिया-राग ठिठक सा गया है। मातम का अंदाजे-बयां फलसफाना हो चला है। [ लेखक उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है। ]

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Dakhal News 19 May 2017


तीन तलाक

तीन तलाक: अपने ही नेताओं की बदौलत धूल चाटती कांग्रेस उमेश त्रिवेदी जहां यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक-कुशाग्रता और चालाकी है कि उन्होंने तीन तलाक के मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की दलीलें देकर घोर राजनीतिक बना दिया है, वहीं यह कांग्रेस की राजनीतिक-मूढ़ता का परिचायक है कि वो खुद को तीन तलाक के राजनीतिक दुष्परिणामों से दूर ऱखने में पूरी तरह असफल सिध्द हो रही है। तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख भाजपा की तरह साफ और सीधा नहीं है। गोल-मोल दलीलों के सहारे राजनीतिक लिजलिजेपन के साथ वो इस मुद्दे की ओर पीठ फेरकर खड़ी है। इससे आगे, सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की विरोधाभासी भूमिकाओं के कारण तीन तलाक के मुद्दे पर राजनीतिक नफे-नुकसान का उसका गणित गड़बड़ा रहा है। कपिल सिब्बल की पहचान पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील के बनिस्बत कांग्रेस नेता के रूप में बड़ी है। उनका पर्सनल लॉ बोर्ड की पैरवी करना कांग्रेस को भारी पड़ रहा है।      सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, बहैसियत आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बपल तीन तलाक को बरकरार ऱखने के लिए जी-जान से जिरह कर रहे हैं, वहीं बहैसियत एमिकस क्यूरी यानी न्याय-मित्र के नाते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद तीन तलाक के मामले में इस्लाम की मान्यताओं पर जमा धुंध साफ करने में सुप्रीम कोर्ट की मदद कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सलमान खुर्शीद को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। दलीलों के बाजार में दोनों वकीलों की जिरह की दिशाएं भिन्न हैं।    सुप्रीम कोर्ट में चौथे दिन मामला इसलिए सुलग उठा कि दलीलों को पुख्ता बनाने के चक्कर में सिब्बल कह बैठे की तीन तलाक का मामला भी भगवान राम की जन्म-स्थली अयोध्या जैसा लोगों की आस्था से जुड़ा है। यदि हिन्दू की आस्था के मद्देनजर राम जन्म-भूमि पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए, तो वैसे ही तीन तलाक पर सवाल उठाना सही नहीं हैं। सिब्बल ने दलीलों की हद को बढ़ाते हुए कोर्ट से यह पूछ लिया कि क्या कल इस बात पर कानून बनाया जा सकता है कि दिगम्बर जैन साधु नग्न नहीं घूमें? आखिर हम कहां-कहां और किस सीमा तक जाकर कानून बनाते रहेंगे?  राम-अयोध्या का जिक्र होने के कारण सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानबाजी सुर्ख हो उठी है। बीजेपी के अलावा सोशल मीडिया पर उठे विरोध के स्वरों ने कांग्रेस को कोने में ढकेल दिया है। दिलचस्प है कि राजनीतिक मंचों पर सिब्बल की दलीलों को जितनी तवज्जो मिल रही है, उतना वजन सलमान खुर्शीद के उन तर्कों को नहीं मिल रहा है, जिसमें वो इस कृत्य को पाप बता रहे हैं। भाजपा को सिब्बल की दलीलों में ज्यादा राजनीतिक-माईलेज मिल रहा है।                    सलमान खुर्शीद ने प्रोग्रेसिव-मुस्लिम के नाते सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तीन तलाक नैतिक रूप से गलत है। जजों ने सलमान खुर्शीद से सवाल किया था कि जो ईश्वर की नजर में गलत हो, वह मानवीय कानूनों में कैसे सही ठहराया जा सकता है। खुर्शीद का कहना था कि पाप को कानून के जरिए जायज नहीं बनाया जा सकता। इसीलिए भारत के अलावा किसी भी देश में तीन तलाक की परम्परा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस्लाम को सुधारने के बजाय उसका सही मतलब लोगों को समझाए। तीन तलाक के खिलाफ सलमान खुर्शीद के ये तर्क जनमत की मनोभावनाओं को व्यक्त करते हैं, लेकिन ये मीडिया की बहस का विषय नहीं हैं।      कांग्रेस के दो धुरन्धर वकीलों की अलग-अलग भूमिकाएं कांग्रेस के राजनीतिक प्रबंधन पर सवाल उठाती हैं। सिब्बल भले ही वकील की हैसियत से कोर्ट में पेश हुए हों, लेकिन उन्हें या कांग्रेस को पता होना चाहिए कि उनकी राजनीतिक-पहचान और कांग्रेस का बैनर उनकी वकालत से बड़ा है। खुद सिब्बल को सोचना था कि जब तीन तलाक के समर्थन में जिरह उनके नाम से गूंजेगी, तो कांग्रेस का कितना नुकसान होगा? सिब्बल ने कांग्रेस के लिए कितनी गहरी राजनीतिक खाई खोद डाली है, इसका अहसास उन्हें होना चाहिए? घटनाक्रम दर्शाता है कि कांग्रेस के नेतृत्व की दूरन्दाजी क्या है? राजनीतिक नफे-नुकसान को जांचने की उनकी मशीनरी कैसी है? कोई समझदार राजनीतिक दल अपने नेताओं को इतने संवेदनशील और ज्वलनशील राजनीतिक मुद्दे के पक्ष-विपक्ष में पैरवी करने की इजाजत कभी नहीं देगा...। अतएव, जो हुआ, वह कांग्रेस का अठारहवां, बीसवां या सौंवा...राजनीतिक आश्चर्य है। गिनती का यह क्रम लिखना मुश्किल है, क्योंकि कांग्रेस हर दिन ऐसे आश्चर्य और कौतुक रचती रहती है...।[ लेखक उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित  सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है। ]

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Dakhal News 18 May 2017


उमेश त्रिवेदी

उमेश त्रिवेदी नर्मदा सेवा यात्रा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह की 'राजनीतिक-रूमानियत' का एक ऐसा नमूना है, जो सार्वजनिक जीवन में सामान्य तौर पर नजर नहीं आता है। यह 'राजनीतिक-रूमानियत' नर्मदा किनारे एक ऐसे कृष्ण-युगीन गोकुल को रचने की परिकल्पना है, जिसे हम कविता-कहानियों में पढ़ते-बूझते आए हैं। नर्मदा के सैकड़ो मील लंबे घाटों के किनारे शिवराज सिंह की कल्पनाओं के मधु-मास में लरजते फल-बागों की महक और पेड़ों के झुरमुटों का बीच सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता जहन में खनकने लगती है कि- 'यह कदंब का पेड़ अगर मां होता यमुना तीरे, मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे...।' कहना मुश्किल है कि नर्मदा के घाटों पर सुभद्रा कुमारी चौहान के गोकुल की यह बाल-सुलभ आकांक्षा पूरी होगी या नहीं, लेकिन यह निर्विवादित है कि सतपुड़ा के वक्ष पर नर्मदा की जल-तरंगों में पर्यावरण-राग के नए सुरों की नई तलाश की रूहानी कहानी में 'फैंटेसी' का पुट होने के बावजूद सच्चाई का जज्बा है।       शिवराज का बचपन नर्मदा की विहंसती लहरों की बांहों में बीता है और जवानी फेनिल लहरों की रवानी के साथ अठखेलियां करते हुए खिली है। इसलिए नर्मदा के प्रति उनका रुझान और समर्पण निरापद और नेकनीयत मानने में किसी को भी कोई उज्र नहीं है...। मान सकते हैं कि दर्शन-शास्त्र के इस विद्यार्थी के मानस के किसी कोने में सुभद्रा कुमारी चौहान के 'कदंब का पेड़' में जीवंत यमुना नदी के किनारे, अंगड़ाई लेते रहे होगें...शायद इसीलिए शिवराज के मन में नर्मदा के दोनों किनारे एक किलोमीटर तक संतरा, मौसंबी, आम   और जामुन जैसे फलोद्यान से पाट देने की कल्पना जागी होगी...। पत्रकारिता का ऐसा सोचना मुनासिब नहीं है कि उन्होंने ऐसा सोचा होगा, लेकिन जब कुछ अच्छा घटता है, तो लगता है कि उसका रूपांकन भी अच्छा ही होना चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डेढ़ सौ दिन पहले नर्मदा सेवा यात्रा का सूत्रपात किया था। इन डेढ़ सौ दिनों में लहरों के उतार-चढ़ाव के साथ नर्मदा-यात्रा की अवधारणाएं और आकांक्षाएं बदलती रही हैं।     इस समूचे उपक्रम का सबसे आकर्षक पहलू नर्मदा किनारों की तासीर और तस्वीर बदलने की कल्पना है, जिसे आकार देने के लिए शिवराज-सरकार ने 534.20 करोड़ रुपयों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। मध्यप्रदेश में नर्मदा के उद्गम-स्थल अमरकंटक से आलीराजपुर तक नर्मदा नदी के दोनो तटों के किनारे फलों से आच्छादित वन-मंडल कायम करने की अद्भुत योजना पर काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में नर्मदा के घाट को सोलह जिलों की सीमाएं स्पर्श करती हैं। सोलह जिलों में 1077 किलोमीटर लंबे नर्मदा के दोनों किनारों पर एक किलोमीटर के दायरे में आम, संतरा, मौसंबी, सीताफल, बेर और चीकू के फलोद्ययान की परिकल्पना अपने आप में रोमांचित करने वाली है। यह परिकल्पना पर्यावरण के साथ-साथ नर्मदा-घाटों की तकदीर और तस्वीर बदल देगी। नर्मदा अमरकंटक से आलीराजपुर तक मध्यप्रदेश के सोलह जिलों के 1077 किलोमीटर लंबे किनारों को आप्लावित करती हुई 1310 किलोमीटर का फासला तय करके खंभात की खाड़ी में गिरती है।        शिवराज की नर्मदा-सेवा-यात्रा के दरम्यान लगातार विवादों के बुलबुले फूटते रहे हैं। नर्मदा नदी कभी भी राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों से परे नहीं रही है। पक्ष-विपक्ष में राजनीतिक-शास्त्रार्थ नर्मदा–विवाद का स्थायी-भाव है। इसके बावजूद पहली बार किसी नेता ने नर्मदा को केन्द्र में रख कर उसकी रक्षा के मिशन को आगे बढ़ाया है। यह पहल अच्छी है। शिवराज अपनी राजनीतिक रूमानियत से मध्यप्रदेश में नर्मदा किनारों पर एक ऐसी दुनिया रचना चाहते हैं, जो कुछ अलग है। पानी-पहाड़ और पवन-परिन्दे जीवन के हर क्षेत्र में रूमानियत के मुहावरे रचते हैं। राजनीतिज्ञ भी इसमें शरीक हैं। अपनी बाजू में खेलने वाले लोगों को पानी, पहाड़ और परिन्दे ज्यादा स्पर्श करते हैं। शिवराज का नर्मदा-रुझान इसी का सबब है। रूमानियत की भाव-भूमि में कल्पनाओं की श्लाघा होती है और सच के धरातल पर आत्म-प्रवंचना का पुट भी होता है। रूमानियत के इर्द-गिर्द जिंदगी का 'इनर्जी-लेवल' हमेशा ऊंचा होता है। यही ऊर्जा-तत्व शिवराज की राजनीतिक रूमानियत में नजर आता है। इसीलिए उनकी राजनीतिक-रूमानियत में परिंदों की वही उड़ान चहक रही है, लहरों का कल-कल नाद गूंज रहा है, पहाड़ों का निनाद सुनाई पड़ रहा है, हवाओं के निर्झर बह रहे हैं।  शिवराज की यह रूमानियत प्राण-वायु बनकर नर्मदा की पर्यावरण की समस्याओं का निदान करे, इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता, लेकिन रूमानियत के अपने खतरे हैं। रूमानी-दुनिया जितनी रंगीन दिखती है, हकीकत में उतनी होती नहीं है। लेकिन हमें भरोसा करना चाहिए कि नर्मदा की इस रूमानी परिक्रमा के बाद लोगों को कहने का अवसर नहीं मिलेगा कि – ' शिवराज, तेरी नर्मदा मैली...?' [लेखक उमेश त्रिवेदी सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है]

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Dakhal News 16 May 2017


एक अबूझ पहेली पचमढ़ी

  आर.बी.त्रिपाठी कुदरत ने जैसे पचमढ़ी को दिल-खोलकर प्राकृतिक सौन्‍दर्य बख्‍शा है। चारों ओर पहाड़ों के उन्‍नत शिखर, हरियाली और वन, गहरी खाइयाँ, स्‍वच्‍छन्‍द विचरण करते वन्‍य-प्राणी, रंग-बिरंगे दुर्लभ पक्षियों के झुण्‍ड शांत वातावरण में फैली अलग तरह की सोंधी खुशबू और स्‍वच्‍छ हवा स्‍वास्‍थ्‍य के लिये बहुत फायदेमंद है। देश के हृदय प्रदेश कहे जाने वाले मध्‍यप्रदेश में बहुत नजदीक गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने या घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिये कोई अच्‍छी जगह है तो वह पचमढ़ी है। सतपुड़ा की रानी कही जाने वाली पचमढ़ी की सुरम्‍य वादियाँ और नयनाभिराम दृश्‍य किसी को भी पु‍लकित और मंत्रमुग्‍ध करने के लिये पर्याप्‍त है। लेकिन पचमढ़ी आज भी एक अबूझ पहेली की तरह है। यहाँ का इतिहास, जनश्रुतियाँ और किंवदंतियाँ सदैव ही आपको कुछ और नया जानने की जिज्ञासा उत्‍पन्‍न करती है। राजधानी भोपाल से तकरीबन 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पचमढ़ी। भोपाल से पिपरिया तक सड़क सीधी-सपाट है। बाद में मटकुली से पगारा होकर पचमढ़ी तक जाने वाली टेड़ी-मेड़ी सड़क, रास्‍ते के दोनों ओर पहाड़ एवं घने जंगल संभलकर चलने के संकेत लगे होने के बावजूद किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करते दिखते हैं। सतपुड़ा नेशनल पार्क से होकर गुजरता रास्‍ता और वन एवं वन्‍य-प्राणियों को किसी तरह का नुकसान न पहुँचाने की हिदायतें पढ़ते हुए आप आगे और आगे बढ़ते जाइये। एकाधिक स्‍थान पर अंकित चेतावनी कि यह इलाका मधुमक्खियों का है यहाँ रुकना ठीक नहीं है, भी एहतियात बरतने को प्रेरित करती है। सड़क के दोनों ओर उछल-कूद करते लाल मुँह वाले बंदर बरबस ही आपका ध्‍यान अपनी ओर खींचते हैं। लेकिन यहाँ भी लिखा मिलेगा कि ‘जंगली जानवरों को खाने के लिये कोई चीज न दें’। अलसुबह या शाम के धुंधलके में आपकी मुलाकात किसी अ ्‍य जंगली जानवर से भी हो सकती है। भरी गर्मियों में किसी गुफा के नीचे से गुजरते हुए आपके सर पर शीतल जल की बूँदें चट्टानों से रिसकर गिरें तो आपको कैसा अनुभव होगा? पचमढ़ी में बड़ा महादेव और जटाशंकर मंदिर जाने वाले श्रृद्धालु और पर्यटकों को खोहनुमा पहाडि़यों और गुफाओं के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है और ठंडे पानी की बूँदें जैसे उनका अभिनंदन करते नजर आती हैं। जटाशंकर बहुत ठंडा स्‍थान है, जो पहाड़ों के बीच बनी खोह के मध्‍य स्थित है। यहाँ आस-पास बहुतायत में आम के पेड़ लगे हैं। पहाड़ी चट्टानों के बीच आम और अन्‍य प्रजाति के विशाल पेड़ों की उपस्थिति स्‍वयं में आश्‍चर्य के साथ सुकून भी देती है। बड़ा महादेव मंदिर परिसर में एक ब्रिटिश दंपति से मिलकर ज्ञात हुआ कि 75 वर्षीय श्री मॉन रॉड पैर से लाचार होने से बैसाखी के सहारे चलते हुए यहाँ महादेव के दर्शन करने पहुँचे हैं। उन्‍होंने बताया कि दुर्गम तीर्थ स्‍थल केदारनाथ के अतिरिक्‍त भारत में स्थित सभी ज्‍योतिर्लिंग के वे दर्शन कर चुके हैं। उन्‍हें भारत भ्रमण पर आना बहुत अच्‍छा लगता है और वे प्राय: हरेक साल अपनी पत्‍नी नोरीन के साथ यहाँ आते हैं। इस दम्‍पति की आँखों की चमक और इस उम्र में उनकी श्रद्धा तथा हौसला देखते ही बनता है। जटाशंकर मंदिर के नजदीक हमारी भेंट अहमदाबाद के सी.एन. स्‍कूल से आए नन्‍हे-मुन्‍ने विद्यार्थियों से होती है। अहमदाबाद से यहाँ तकरीबन 72 बच्‍चों का ग्रुप भ्रमण पर आया हुआ था। सी.एन. स्‍कूल के हर्ष वोरा, जश, हेली, विश्‍वा और दर्शिनी ने बड़े प्रफुल्लित होकर बताया कि उन्‍हें पचमढ़ी आकर यहाँ की हरियाली तथा सुंदरता देखकर बहुत खुशी हुई है। उनके पूरे ग्रुप को पचमढ़ी बहुत भाया है। वे फिर से अधिक वक्‍त निकालकर परिवार के साथ पचमढ़ी आना चाहेंगे।   वस्‍तुत: पचमढ़ी स्थित मंदिर और कुछ अन्‍य स्‍थान ‘नेचुरल एयर कंडीशनर’ की तरह हैं। यहाँ स्‍वाभाविक रूप से वातावरण में ठंडक बनी रहती है। यहाँ की आबोहवा और वातावरण को स्‍वास्‍थ्‍य के अत्‍यंत अनुकूल और लाभप्रद माना गया है। औषधियों में प्रयुक्‍त प्राचीन जड़ी-बूटियों का भंडार और दुर्लभ आयुर्वेदिक प्‍लांट यहाँ हैं। इस तरह पचमढ़ी को बॉटनी का भंडार भी कहा जाता है। पूर्व में यहाँ ‘सेनेटोरियम’ भी बनाया गया था जिसमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिये दूर-दूर के स्‍थानों से लोग यहाँ आते थे। आज भी दमा, श्‍वांस, मनोरोग और क्षय रोग से पीडि़त मरीजों के लिये पचमढ़ी स्‍वास्‍थ्‍यप्रद जगह है।   पर्यटन विकास निगम के चंपक बंगलो में बहुतायत से दुर्लभ पेड़ों की प्रजातियाँ आज भी मौजूद हैं। समुचित देख-भाल की वजह से यहाँ आम की विभिन्‍न प्रजातियाँ, गुलाब-जामुन के पेड़, स्‍वर्ण चंपा, विशाल तने वाला चंपा, तून, महुआ, पाखड़, कटहल, सिलवर ओक (सरू), क्रिस्‍मस ट्री, जामुन बड़ी एवं देशी जामुन सहित फूलों की अनेक प्रजातियाँ हैं। इसी का सुफल है कि चंपक बंगलो के संपूर्ण परिसर में एक सौंधी सी महक और वातावरण में सुगंधित खुशबू हमेशा फैली रहती है। सैलानियों की सुविधा के लिये इन दुर्लभ पेड़ों के नाम तख्‍ती के रूप में प्रदर्शित किये गये हैं। उद्यानिकी विभाग के श्री लोखण्‍डे ने यहाँ स्थित उद्यानिकी नर्सरी में फूलों और फलदार पौधों के रोपण में अनेक नये-नये प्रयोग किये थे। लेकिन प्रकृति की इस अनुपम भेंट का आनंद लेने के लिये आपको चंपक बंगलो में रुकना होगा। चंपक बंगलो पूर्व में अविभाजित मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री का पचमढ़ी स्थित निवास था। इसी परिसर में तत्‍कालीन केबिनेट की बैठक हुआ करती थी। केबिनेट की बैठक के हॉल में पर्यटन विकास निगम द्वारा मध्‍यप्रदेश जनसंपर्क के सहयोग से तत्‍कालीन केबिनेट बैठकों, राज्‍यपाल एवं मुख्‍यमंत्री सहित मंत्री-मंडल के और विभिन्‍न ईवेंट्स के दुर्लभ श्‍वेत-श्‍याम छायाचित्र करीने से मढ़वाकर प्रदर्शित किये गये हैं। इसे केबिनेट हाल का नाम दिया गया है। इनके जरिये आप अविभाजित मध्‍यप्रदेश की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी पचमढ़ी के विभिन्‍न दुर्लभ क्षण से रू-ब-रू होते हैं। यह एक सुखद संयोग कहा जा सकता है कि पिछले दिनों मध्‍यप्रदेश मंत्रि-परिषद की महत्‍वपूर्ण बैठक और पर्यटन केबिनेट इसी स्‍थान पर संपन्‍न हुई जिसमें महत्‍वपूर्ण फैसले लिये गये। पचमढ़ी में तकरीबन आधा सैकड़ा स्‍थल पर्यटकों को लुभाने के लिये मौजूद हैं। लेकिन खास तौर पर लगभग साढ़े चार हजार फीट ऊँचाई पर स्थित धूपगढ़ पर सूर्यास्‍त का नजारा देखना किसी रोमांच से कम नहीं। यह स्‍थान प्रदेश की सर्वाधिक ऊँचाई वाले पहाड़ की चोटी है। सूर्यास्त के समय छायी रहने वाली धुंध एक अलग ही नजारा उपस्थित करती है। यहाँ आस-पास की पहा़ड़ियों की नेचुरल कटिंग अलग-अलग प्रकार की आकृतियों का एहसास करवाती है। वाकई ‘प्रकृति की भव्‍य छटाओं का अलौकिक दर्शन’ यहाँ होता है। पचमढ़ी स्थित प्राचीन मंदिर प्राकृतिक रूप से निर्मित हैं। पांडव गुफाएँ भी एक अबूझ पहेली की तरह है। इनके अतिरिक्‍त चौरागढ़, गुप्‍त महादेव, नागद्वारी के आस-पास सर्कल में चिंतामणि, गुप्‍त गंगा के अतिरिक्‍त प्राचीन चर्च भी यहाँ स्थित हैं। नागपंचमी पर यहाँ विशेष उत्‍सव होता है, जो प्राय: जुलाई माह में आती है। पचमढ़ी की खोज करने वाले केप्‍टन जेम्‍स फोरसिथ द्वारा निर्मित बाइसन भवन जिसे बाद में वन विभाग द्वारा ‘बाइसन लॉज’ व्‍याख्‍या केन्‍द्र का नाम दिया गया, एक नए स्‍वरूप में यहाँ स्थित है। बाइसन लॉज स्थित वानिकी संग्रहालय में पचमढ़ी के इतिहास, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, बाघ के संबंध में महत्‍वपूर्ण जानकारी, बाघ संरक्षण के तरीके, विभिन्‍न प्रजातियों के जंगली जानवर, दुर्लभ पक्षियों और वनस्‍पति आदि की रुचिकर जानकारी प्रदर्शित की गई है। संग्रहालय में फोरसिथ की खोज, बाइसन लॉज, पांडवों का निवास, साल और सागौन के पेड़ों का संगम, वन्‍य-जीव गलियारे, प्राणवान वन के साथ ही दुर्लभ पक्षी दूधराज, किलकिला सहित अन्‍य दुर्लभ पक्षियों की रोचक जानकारी प्रदर्शित की गई है। पचमढ़ी के प्रसिद्ध बी फॉल, कैथलिक चर्च, प्रियदर्शिनी पॉइंट (पोरसिथ पॉइंट), जटाशंकर गुफा, हांडी खोह सहित अन्‍य पर्यटन स्‍थलों की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है।  पचमढ़ी में बारहों महीने पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रीष्‍मकालीन अवकाश में भी यहाँ मध्‍यप्रदेश सहित मुख्‍यत: मुम्‍बई, नई दिल्‍ली, कोलकाता, महाराष्‍ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल से पर्यटक भ्रमण पर आते हैं। पचमढ़ी को पर्यटन के नक्‍शे पर लाकर ज्‍यादा से ज्‍यादा पर्यटकों को पचमढ़ी के प्रति आकर्षित करने में मध्‍यप्रदेश पर्यटन का विशेष योगदान रहा है। विदेशी पर्यटक यहाँ प्राय: जंगल, ट्रेकिंग, हाइकिंग, कैम्पिंग और बर्ड वॉचिंग के उद्देश्‍य से आते हैं। लेकिन देश भर के पर्यटकों को पचमढ़ी अपनी प्राकृतिक सुन्‍दरता, हरियाली, वर्षाकाल में अनगिनत वॉटर फॉल, सघन वन और वन्‍य-प्राणियों के जरिये आकर्षित करती रही है। सैलानियों की सुविधा के लिये पचमढ़ी में राज्‍य शासन एवं प्रदेश के पर्यटन निगम ने सभी जरूरी सहूलियतें जुटाई हैं। पचमढ़ी में राज्‍य पर्यटन निगम की लगभग दर्जन भर इकाईयाँ स्थित हैं। इनमें चंपक बंगलो, अमलतास, नीलांबर, पंचवटी, देवदारू, कर्निकर, रॉक एण्‍ड मेनर, हिलटॉप बंगलो, ग्‍लेन व्‍यू होटल, होटल आर्क आदि प्रमुख हैं। मटकुली से पचमढ़ी के बीच पड़ने वाली देनवा नदी पर उन्‍नत पुल बन जाने से पचमढ़ी की यात्रा अब बारहों महीने और भी सुगम हो गई है। पचमढ़ी में पर्यटन और वन विभाग से वर्षों से जुड़े श्री किशन लाल गाइड बताते हैं कि ‘ग्रीष्‍म में आम, जामुन, चारोली (अचार) और महुआ की महक सैलानियों को लुभाती है’। आम की विशेष प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं जो बड़ी स्‍वादिष्‍ट हैं। गुफाएँ, रॉक पेंटिंग और केव्‍स पेंटिंग भी यहाँ देखने को मिलती हैं। महाशिवरात्रि पर्व यहाँ का विशेष त्‍यौहार है जब दूर-दूर से आकर श्रद्धालुजन चौरागढ़ में त्रिशूल चढ़ा कर मन्‍नत मांगते हैं। राजेन्‍द्र गिरि उद्यान एक अन्‍य दर्शनीय स्‍थल है जो पूर्व राष्‍ट्रपति स्‍वर्गीय डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद की प्रिय जगह रही है। डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद अनेक बार पचमढ़ी आए और उन्‍होंने यहाँ काफी वक्‍त बिताया। जटाशंकर के रास्‍ते में निम्‍बूभोज गुफाएँ भी पर्यटकों का ध्‍यान आकर्षित करती हैं। दिसम्‍बर-जनवरी के माह में शून्‍य डिग्री तापमान में यहाँ पानी में बर्फ तक जम जाती है वहीं बारिश के समय बादलों के झुण्‍ड का जमीन की ओर आना और मकानों, भवनों की खिड़कियों से टकराना, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पचमढ़ी बायोस्फियर रिजर्व एक अलग तरह के आनंद का अनुभव कहा जा सकता है। हालांकि पचमढ़ी से जुड़ी कोई महल या राजा-रानी की कहानी आम तौर पर प्रचलित नहीं है तथापि मान्‍यता है कि यह एक गोंडवाना आदिवासी बहुल स्‍थल था। यहाँ गोंड, कोरकू, भारिया, पिगमी (मवासी) आदिवासी रहते थे। उनके वंशज आज भी यहाँ निवास करते हैं। उनके आराध्‍य लोहारी बाबा का पूजा स्‍थल आज भी विद्यमान है। राजा भभूति का किला और किले में वॉटर मेनेजमेंट के अनुपम उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। पचमढ़ी एक ऐसी जगह है जो इंसान को खूबसूरती के नायाब तोहफे देती हैं। बदले में वह आपसे यही अपेक्षा करती है कि पचमढ़ी को बस पचमढ़ी ही रहने दें।

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Dakhal News 16 May 2017


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    छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सीआरपीएफ के जवानों ने अब आखिरी लड़ाई का मोर्चा खोल दिया है। सीआरपीएफ के सेंट्रल जोन कमांड का मुख्यालय रायपुर में बनने के बाद ही सीआरपीएफ स्पेशल डीजी कुलदीप सिंह ने रायपुर में डेरा डाल दिया है। सीआरपीएफ अब बारिश से पहले तक नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाएगी। सीआरपीएफ के आला अधिकारियों की मानें तो सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा में 20 हजार जवानों को जंगलों में रणनीति के साथ आपरेशन के लिए उतार दिया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बार्डर पर भी नक्सलियों के खिलाफ स्पेशल आपरेशन शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि नक्सलियों ने बालाघाट, गढ़चिरौली और राजनांदगांव में गोपनीय आपरेशन शुरू किया है। इसको देखते हुए प्रदेशों के ज्वाइंट पर विशेष फोकस किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कोबरा कमांडोज सुकमा को घेरकर रुटीन ऑपरेशन के अलावा अलग से अभियान चलाएंगे। कोबरा कमांडो के साथ आईईडी एक्सपर्ट भी तैनात किए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सीआरपीएफ अब माओवादियों के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाएगा। नक्सलियों को जंगल में घुसकर मारने के लिए सुरक्षाबलों को फ्री हैंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पांच राज्यों की मानिटरिंग के लिए स्पेशल डीजी को रायपुर में तैनात किया गया है। यहां से अगले दस दिन में ज्वाइंट आपरेशन प्लान किया जा रहा है, जो ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, उत्तर प्रदेश में एक साथ शुरू होगा। इस ज्वाइंट आपरेशन का बेस कैंप रायपुर में रहेगा। सूत्रों की मानें तो नक्सलियों के बड़े नेताओं की लोकेशन भी सुकमा और आसपास के इलाकों में मिली है। इसी को देखते हुए सुकमा में विशेष फोकस किया जा रहा है। सीआरपीएफ के आईजी डीएस चौहान ने बताया कि सीआरपीएफ के जवान बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। सुकमा में हमले के बाद अभियान को और भी मुस्तैदी के साथ शुरू किया गया है। जवान जंगलों में उतरकर नक्सलियों से मोर्चा लेने को तैयार हैं।   

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Dakhal News 16 May 2017


lalu yadav

  चारा घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू यादव को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की अपील को मंजूरी दे दी है जिससे लालू यादव की मुसीबतें बढ़ गई है. सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया.   चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की इजाजत दे दी है. सीबीआई ने लालू यादव पर केस चलाने की मांग की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है और अब लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले में मुकदमा चलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की दलील मानते हुए केस चलाने की इजाजत दे दी है.    वर्ष 1996 में सामने आए इस मामले में लालू यादव के अलावा कुल 47 आरोपी थे लेकिन लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही के दौरान 15 आरोपियों की मौत हो गई जबकि सीबीआई ने दो आरोपियों को सरकारी गवाह बना लिया है. इसी मामले में एक अन्य आरोपी के खिलाफ मामले को झारखंड हाईकोर्ट खारिज कर चुका है. कुल मिलाकर अब दुमका कोषागार से जुड़े इस मामले में केवल 29 आरोपी बचे हैं जिनमें कुछ पूर्व आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं.   नब्बे के दशक में बिहार में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री काल में हुए लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये के चारा घोटाले में दुमका कोषागार से तीन करोड़, 31 लाख रुपये फर्जी ढंग से निकालने से जुड़े आरसी 38ए-96 के एक मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सोमवार (13 जून) को रांची के सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में पेश होना पड़ा था. लालू यादव को पहले ही चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराया जा चुका है. उन्हें अक्टूबर 2013 में पांच साल कैद की सजा सुनाई गई थी. वह फिलहाल, जमानत पर बाहर हैं. कांग्रेस के पूर्व नेता जगन्नाथ मिश्रा इस समय जद(एकी) के साथ हैं. उनके खिलाफ दर्ज चारा घोटाले से जुड़े पांच मामलों में से एक मामले में 2013 में उन्हें निचली अदालत ने दोषी करार दिया था. सीबीआइ का दावा है कि हालांकि ये मामले चारा घोटाले से ही निकले हैं लेकिन इनकी प्रकृति भिन्न-भिन्न है क्योंकि इसमें अलग-अलग कोषों की अलग-अलग राशियां शामिल थीं. इस मामले का खुलासा वर्ष 1996 में हुआ। इसमें लालू यादव के अलावा कुल 47 आरोपी थे, लेकिन लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही के दौरान 15 आरोपियों की मौत हो चुकी है। सीबीआई ने दो आरोपियों को सरकारी गवाह बना लिया है, जबकि इसी मामले में एक अन्य आरोपी को झारखंड उच्च न्यायालय से राहत मिल चुकी है। कुल मिलाकर अब दुमका कोषागार से जुड़े इस मामले में केवल 29 आरोपी बचे हैं, जिनमें कुछ पूर्व आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। लालू यादव के खिलाफ इस समय रांची की विशेष अदालतों में चारा घोटाले से जुड़े चार मामले चल रहे हैं, जबकि इससे पहले चारा घोटाले से ही जुड़े आरसी 20ए-96 मामले में लालू यादव को वर्ष 2013 में 30 सितंबर को सीबीआई की प्रवास कुमार सिंह की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था और न्यायिक हिरासत में यहां बिरसामुंडा जेल भेज दिया था। इसके बाद उसी साल 13 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। जमानत मिलने के लगभग ढाई माह बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। चारा घोटाले के इसी मामले में दोषी करार दिये जाने और चार वर्ष के कैद की सजा सुनाये जाने के बाद लालू के राजनीतिक जीवन पर ग्रहण लग गया था और उनकी सांसदी छिन गयी थी।

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Dakhal News 8 May 2017


स्वराज पाल

  लन्दन में अप्रवासी भारतीय उद्योगपति स्वराज पाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम और कामकाज के तरीके की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट लोगों के दिमाग में कानून का भय बैठाने में मोदी सफल रहे हैं। कैपारो समूह के चेयरमैन हैं पाल और उनके 20 से ज्यादा कारखाने भारत में हैं। स्वराज पाल ने कहा, मोदी के दिमाग में बहुत साफ है कि उन्हें देश के लिए क्या करना है। वह उस कार्य के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। लोगों को भरोसा था कि नोटबंदी से बड़ी मात्रा में काला धन सामने आएगा। इसे भारतीय जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम माना। लोगों को लगने लगा कि अगर उन्होंने काला धन एकत्रित किया तो उसके दुष्परिणाम होंगे। स्वराज पाल चंद रोज पहले ही भारत से लौटे हैं। नई दिल्ली में उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई मंत्रियों से मुलाकात की है। उनके अनुसार भारत में आशा और प्रगति का नया वातावरण बना है।  

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Dakhal News 7 May 2017


अल्फ्रेड हाई स्कूल

    राजकोट के स्थानीय प्रशासन ने म्यूजियम बनाने के लिए यहां 164 साल पुराने अल्फ्रेड हाई स्कूल को बंद कर दिया है। यह वही स्कूल है जहां से 1887 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 18 साल की उम्र में पढ़कर निकले थे। इस स्कूल को मोहनदास गांधी स्कूल के नाम से भी जाना जाता है। गुजराती माध्यम वाले इस सरकारी स्कूल को म्यूजियम में बदलने के राजकोट नगर निगम (आरएमसी) के प्रस्ताव को गुजरात सरकार ने पिछले साल ही मंजूरी दे दी थी। इस फैसले को कार्यान्वित करते हुए स्कूल प्रशासन ने सभी 125 छात्रों को स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र जारी करना शुरू कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी रीवा पटेल ने बताया कि अब ये छात्र अगले शैक्षणिक सत्र के लिए किसी भी स्कूल में प्रवेश ले सकते हैं। राजकोट नगर आयुक्त बीएन पानी ने बताया कि इस इमारत को 10 करोड़ रुपये की लागत से म्यूजियम में बदलने के लिए एक कंसल्टेंट की सेवाएं ली गई हैं। इस स्कूल की स्थापना 17 अक्टूबर 1853 को हुई थी। पहले इसका नाम राजकोट हाई स्कूल था। यह उस दौर में सौराष्ट्र का पहला अंग्रेजी माध्यम का स्कूल था। इसकी वर्तमान इमारत 1875 में जूनागढ़ के नवाब ने बनवाई थी। इसका नामकरण ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग प्रिंस अल्फ्रेड के नाम पर किया था। शिक्षा के मामले में इस स्कूल का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। कुछ साल पहले इस स्कूल के 60 में से एक भी छात्र दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पास नहीं हुआ था।  

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Dakhal News 6 May 2017


rahul gandhi

उमेश त्रिवेदी  महागठबंधन के बहाने देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकल्प की तलाश में बेचैन विपक्षी नेताओं की तलाश समुन्दर में भंवर की तरह घूम-घूम कर अपनी ही लहरों में गुम हो जाती प्रतीत हो रही हैं। महागठबंधन की नजरें कई नेताओं पर हैं, लेकिन जब चर्चा के केन्द्र राहुल गांधी के इर्द-गिर्द सिमटने लगते हैं, तो लगता है कि भाजपा के मुकाबले में खड़ा होने के लिए विपक्ष को ज्यादा व्यावहारिकता के साथ अपनी रणनीति पर गौर करना होगा।  उम्र राहुल गांधी के साथ है, लेकिन वक्त साथ नहीं है। राहुल के साथ वक्त की बेवफाई यूं ही नहीं है। वक्त इसलिए साथ नहीं है कि राजनीति में वक्त की लय को समझने के लिए एक भिन्न किस्म की रियाज की जरूरत होती है। वक्त के साथ जुगलबंदी करने की महारथ राहुल को हासिल नहीं हो पाई है। वक्त के साथ रोमांस का सबसे बड़ा तकाजा यह है कि आप वक्त की रवानी को अपनी बाहों में बांध कर रखें। लेकिन राजनीति के बेहद रोमान्टिक क्षणों में राहुल मंच से गायब हो जाते हैं। यदि राजनीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अठखेलियां कर रही है, तो उसका एक मात्र कारण यह है कि वक्त की नब्ज पर उनका हाथ है। वो किसी भी क्षण राजनीति को नहीं छोड़ते हैं, इसीलिए राजनीति भी पूरी वफाओं से उनके साथ खड़ी है।   वैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राहुल अनुभवों से सीखते नजर नहीं आते और नसीहतें उन्हें पसंद नहीं हैं। दूसरों के अनुभवों को साझा करने की उनकी फितरत नहीं है। फिर भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पंवार ने राहुल को नसीहत दी है कि यदि कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक नजर में आने वाले राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें अपने तौर-तरीके ठीक करना होंगे। उन्हें राजनीति में अधिक निरंतरता दिखानी होगी। शरद पंवार की इस सच-बयानी पर कांग्रेस के हलकों में सन्नाटा पसरा है। कोई कुछ बोलेगा भी नहीं, क्योंकि अपने गले में घंटी कोई भी बांधना पसंद नहीं करेगा।   राहुल गांधी से निरन्तरता की अपेक्षा के पीछे शरद पंवार के मंतव्य साफ हैं कि राजनीति एक सतत प्रक्रिया है। गौरतलब है कि जब भी राहुल गांधी ब्रेक के नाम पर लंबे समय के लिए तथाकथित अज्ञातवास पर विदेश-यात्राओं पर निकलते हैं, प्रधानमंत्री मोदी के मीडिया प्रबंधक उसी दरम्यान भिन्न-भिन्न तरीकों से यह खबर प्रसारित कर देते हैं कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद तीन सालों में एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया है। उनकी थका देने वाली दिनचर्या के महिमा-मंडन के जरिए बहुत ही आसानी से राहुल गांधी की 'प्रिसेंस-इमेज' राजनीतिक-फलक पर स्थापित कर दी जाती है। यह तथ्य भी किसी से छिपा नहीं है कि राजीव गांधी के पहली  बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके 'न्यू-इअर' सैर-सपाटों को भी कभी सहजता से नहीं लिया जाता था।   वैसे भी पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की पराजय के बाद राजनीतिक फलक पर राहुल गांधी की गुमशुदगी ने उन्हें सवालिया निशानों से घेर लिया है।  कांग्रेस के पास मीडिया के इन सवालों का कोई जवाब नहीं है कि वह हार के कारणों से बचने के लिए शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार क्यों कर रही है? उप्र में जीतने के तत्काल बाद नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के गुजरात-कूच की रणनीति से जाहिर है कि अपने लक्ष्यों को हासिल करने के मामले में भाजपा कितनी आगे चल रही है? वैसे शरद पंवार की राजनीतिक-सीख के सामने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा राहुल गांधी का कवच बन कर आए हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी के बारे में शरद पंवार को अपना दृष्टिकोण रखने का अधिकार है। उनके दृष्टिकोण पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन राहुल के मोदी के मुकाबले खड़े होने के सवाल पर आनंद शर्मा कहना था कि राजनीतिक नेता एक दूसरे के क्लोन नहीं हो सकते...। आनंद शर्मा अपनी जगह सही हैं कि राहुल गांधी मोदी का राजनीतिक-क्लोन नहीं हो सकते...लेकिन कांग्रेसजनों की यह अपेक्षा भी है कि राहुल राजनीति की आंधियों में शुतुरमुर्ग भी नहीं बनें... कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ और सामने बने रहें। पिछले दिनों कांग्रेस की वयोवृध्द नेता शीला दीक्षित की यह नसीहत भी सुर्खी बनी थी कि राहुल को सोनिया गांधी की तरह रोजाना दो-तीन घंटे कांग्रेस के दफ्तर में बिताना चाहिए...।[लेखक भोपाल से प्रकाशित दैनिक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]

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Dakhal News 4 May 2017


raj chadhha

राघवेंद्र सिंह सियासत में कई बार सच बोलने वालों के सिर कलम हो जाया करते हैं। खासतौर से जब ये सच हुकूमत के खिलाफ हो और बोलने वाला दीनदयाल हो। लोग व्यंग्य में कहते हैं कि बड़ा करे तो लीला और छोटा करे तो अपराध। भाजपा में ऐसा ही कुछ हो रहा है। किस्सा है ग्वालियर के वरिष्ठ नेता राज चड्डा का। उन्होंने पिछले दिनों प्रदेश के दीनदयाल यानि कमजोर लोगों के इलाज और भ्रष्ट व्यवस्था में परेशान हो रहे समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता सोशल मीडिया पर जताई थी। जिसमें उन्होंने जो कुछ लिखा था उसका लब्बोलुआब ये है कि भ्रष्ट व्यवस्था को बदलो या हम जैसे कार्यकर्ताओं को बाहर कर दो। इस पर राज चड्डा का कहना है कि पार्टी ने दूसरा विकल्प चुना है। मुझे सात दिन में जवाब देने का नोटिस जारी हुआ है। जिसकी मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं और उसका उत्तर देने में सात मिनट भी नहीं लगाऊंगा। ये सीन है सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी हो रही भाजपा का। जिसमें ताकतवर नेताओं का कोई बाल बांका नहीं कर पाता और दीनदयाल कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखाने में जरा भी संकोच नहीं होता। राजनीति में जो घटित हो रहा है उसके लिए संस्कृत और फारसी का मिला जुला शेर बड़ा मौजूं है... ‘टुक टुक दीदम, दम न कसीदम दम जो कसीदम, जहन्नुम रसीदम’ (शायर का नाम नही मालूम के कारण माफ़ी के साथ ) अर्थात जो हो रहा है उसे चुपचाप देखो। उसपर कोई प्रतिक्रिया न दो। यानि सांस भी न लो। अगर कुछ खिलाफ बोला और आंखों की किरकिरी बने तो जहन्नुम भेज दिए जाओगे। तो राज चड्डा के मामले में कहा जा सकता है कि पार्टी ने उन्हें नोटिस देकर बाहर अर्थात जहन्नुम का रास्ता दिखाने की तैयारी कर ली है। श्री चड्डा उन नेताओं में हैं जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय से प्रभावित होकर जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी में आए। तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुन्दरलाल पटवा के कार्यकाल में प्रदेश मंत्री रह चुके हैं। दो दफा ग्वालियर भाजपा के अध्यक्ष दो बार पार्षद रहने के साथ ग्वालियर संभाग के प्रवक्ता भी रहे हैं। उन्होंने पार्टी से मिले नोटिस पर अपनी प्रतिक्रिया मशहूर शायर दुष्यंत कुमार के एक शेर के साथ दी है। उन्होंने अपनी फेसबुक पर लिखा है शेर... ‘ तेरा निजाम है कि सिल दे जुबान शायर की, ये ऐहतियात जरूरी है इस बहर के लिए ’ हो सकता है कि चड्डा जी को नोटिस और उनका जवाब किसी को भी असहज नहीं करे मगर भाजपा में जो हो रहा है उसकी भयावहता को वो जरूर नंगा करता है। चड्डा से जुड़ी घटना को हम हांडी का चावल और पार्टी में बढ़ रही सडांध से जोड़कर देख रहे हैं। इसके पहले भी पूर्व मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने संघ नेताओं के बीच शारदा विहार की एक बैठक में भ्रष्ट अफसरशाही पर खुलेआम 25 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया था। इसके बाद "नमामिदेवी नर्मदे"  यात्रा को लेकर भी पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद प्रहलाद पटेल ने तीखा कटाक्ष किया था। वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री के गृह ग्राम जैत के नर्मदा घाट पर जैसे संगमरमर लगा है वैसा सब घाटों पर लग जाए तो कितना अच्छा हो। इसके पूर्व भी श्री पटेल ने डंपर कांड को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।  खास बात ये है कि उन्होंने आरोपों को वापस नहीं लिया है। इसी तरह वरिष्ठ भाजपा नेता रघुनन्दन शर्मा भी मुख्यमंत्री को घोषणा वीर जैसी उपाधियों से नवाज चुके हैं। कुल जमा कहना ये है कि जो चड्डा जैसे 'दीनदयाल' कार्यकर्ता हैं उनपर नोटिस की तलवार चल जाती है। जबकि पिछले दिनों पार्टी की मोहनखेड़ा प्रदेश कार्यसमिति में गैरहाजिर मंत्री और पदाधिकारियों को पद से हटाने की बात खुद मुख्यमंत्री ने की थी। लेकिन उन को नोटिस दिया जाए उससे पहले चड्डाजी को बाहर करने की तैयारी कर ली गई है। चड्डा कहते हैं वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे। यह श्री चड्डा से जुड़ी घटना है जो सत्ता और संगठन के प्रति आम कार्यकर्ता के भाव को दिखाती है। हम स्थान का अभाव होने के बावजूद श्री चड्डा की सोशल मीडिया पर लिखी गई टिप्पणी को जस का तस दे रहे हैं। राजनीति में हो रही घटनाओं की चिट्ठी को पाठकगण तार समझ सकते हैं। दूसरा सीन कांग्रेस का है। यहां दस साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह से दो राज्यों का प्रभार छीन लिया गया है। जनाधार में सीमित हो रही कांग्रेस में यह एक बड़ी घटना है। मध्यप्रदेश के संदर्भ में एकता की बातें सत्यव्रत चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह के बारे में इस टिप्पणी के साथ की है कि उन्हें प्रदेश से बाहर कर देना चाहिए। अगर ऐसे ही एकता आ सकती है तो कांग्रेस के युवराज राहुल बाबा को चतुर्वेदियों की मुबारकबाद। लेकिन दिल्ली नगर निगम से लेकर यूपी चुनाव तक जो कांग्रेस का बैंडबाजे के साथ जुलूस निकला है उसके लिए कितने दिग्विजयों की तलाश है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पानी पी पीकर भाजपा को कोस रही है। लेकिन चैंबरों से बाहर निकल उनके नेता सड़क पर नहीं आ पा रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार में बैठी भाजपा सड़क की सियासत में इस कदर मशरूफ है कि वह मंत्रालय में बैठकर सरकार चलाने को राजी नहीं है। मुख्यमंत्री नमामि देवी नर्मदे की यात्रा पर हैं तो कांग्रेस के कर्णधार ए.सी. चैम्बरों में ख्याली ख्वाब में हैं। इसलिए तो कहते हैं मध्यप्रदेश में कांग्रेस अजब है और भाजपा गजब है। वैसे ये नारा एमपी टूरिज्म का है। "एमपी अजब है सबसे गज़ब है"। (लेखक ind24 मप्र/छग समूह के प्रबंध संपादक हैं)

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Dakhal News 2 May 2017


नीति आयोग

नीति आयोग ने 2024 से लोकसभा अैर विधानसभा चुनावों को एकसाथ करवाने का सुझाव दिया है ताकि चुनाव प्रचार के कारण शासन व्यवस्था में पड़ने वाले व्यवधान को कम से कम किया जा सके। इस संबंध में विस्तृत जानकारी का उल्लेख करते हुए नीति आधारित इस थिंक टैंक ने कहा कि इस प्रस्ताव को लागू करने से अधिकतम एक बार कुछ विधानसभाओं के कार्यकाल में कुछ कटौती या विस्तार करना पड़ सकता है। आयोग ने चुनाव आयोग को इस पर गौर करने को कहा और एकमुश्त चुनावों का रोडमैप तैयार करने के लिए संबंधित पक्षकारों का एक कार्यसमूह गठित करने का सुझाव दिया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ करवाने की वकालत कर चुके हैं। इस संबंध में 6 महीने के अंदर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाना है और इसका अंतिम खाका अगले मार्च तक तैयार होगा। इस मसौदा रिपोर्ट को 23 अप्रैल को नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल के सदस्यों के बीच प्रसारित किया गय था। इन सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य लोग शामिल हैं। यह सिफारिश इस लिहाज से अहम है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ करवाने की वकालत कर चुके हैं। नीति आयोग की मसौदा रिपोर्ट कहती है कि भारत में सभी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और समकालिक तरीके से होने चाहिए ताकि शासन व्यवस्था में ‘प्रचार मोड’ के कारण होने वाला व्यवधान कम से कम किया जा सके। हम वर्ष 2024 के चुनाव से इस दिशा में काम शुरू कर सकते हैं। इस साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मुखर्जी ने अपने भाषण में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव को एकसाथ करवाने की वकालत की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी में एकमुश्त चुनाव करवाने की वकालत करते हुए कहा था कि एकसाथ चुनाव से सभी को कुछ नुकसान होगा। हमें भी नुकसान होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की थी कि वे इस विचार को राजनीति के संकीर्ण चश्मे से न देखें। उन्होंने कहा था कि एक पार्टी या सरकार इसे नहीं कर सकती। हमें मिलकर एक रास्ता तलाशना होगा।

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Dakhal News 30 April 2017


modi-mahbuba

उमेश त्रिवेदी  'आग लगी है हिम-शिखरों पर, धधक रहा उत्‍तुग हिमालय...कश्मीर की घाटी में अब केशर नही, आग उगती है...।'  वीर-रस की भावनाओं से ओतप्रोत कविता की ये पंक्तियां 1965 के भारत-पाकिस्तान युध्द के दरम्यान मालवा के विभिन्न हिस्सों में होने वाले कवि सम्मेलनों में सेना के जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए जोश-खरोश के साथ गूंजती रहती थी। उस वक्त कश्मीर की क्यारियों में केशर की चिंगारियां पाकिस्तान की तबाही का प्रतीक थीं। भारत-पाकिस्तान युध्द के पचास साल बाद, आज भी कश्मीर में केशर की क्यारियों से चिंगारियां चटक रही हैं, लेकिन फिलवक्त इनकी तपन से खुद कश्मीर का चेहरा झुलस रहा है..। और, भारतीय सेना कश्मीर में आतंकियों की तमाम साजिशों को नेस्तनाबूद करने के बावजूद व्याकुल और बेचैन है।  यह बेचैनी कश्मीर में सेना के सर्वोच्च कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस संधु के संडे-एक्सप्रेस के साथ इंटरव्यू में भी झलक रही है। संधु का कहना है कि कश्मीर में सुरक्षा बलों को गोलियों के माध्यम से युध्द जीतने के बजाय दिमाग की लड़ाई को जीतना होगा...।  कश्मीर में आतंकवादियों को मिलने वाला समर्थन और संरक्षण चिंता का विषय है। कट्टरता का विस्तार खतरे के निशान तक पहुंच चुका है। युवाओं को तंजीमों (आतंकी-संगठनों) से जुड़ने से रोकने के लिए मनोवैज्ञानिक-युध्द की रणनीति बनाना होगी। जुलाई 2016 में आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद स्थानीय युवाओं का रुझान आतंकवाद की ओर बढ़ा है। पिछले साल 100 से ज्यादा लोगों ने आतंकवाद का रास्ता अपनाया। 2017 में 13 स्थानीय लोग आतंकवाद से जुड़े हैं। कश्मीरी युवाओं की आंखों में सुनहरे सपने संजोने की जरूरत है। कश्मीर के सरोकारों और संवेदनाओं को सहलाते हुए हर तबके से संवादों को मुकम्मल करना होगा। संवेदनाओं के मर्म की ढाल युद्ध के धर्म को नैतिकता प्रदान करेगी।   घाटी के बिगड़ते हालात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी चिंता यह है कि भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनाने के निर्णय भाजपा की अपनी ही 'कथनी और करनी' के खिलाफ खतरों से भरपूर 'राजनीतिक-प्रयोग' था। कश्मीर-घाटी में भाजपा-पीडीपी का यह 'राजनीतिक-प्रयोग' लगभग असफल होता दिख रहा है। दो साल पुरानी गठबंधन-सरकार के कार्यकाल में हालात बदतर हुए है। सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी और कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बैठक में इस 'राजनीतिक प्रयोग' को मियाद और मोहलत मिल गई है। अभी कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का संकट टल गया है। भाजपा और पीडीपी राजनीतिक-निदान की कोशिशें आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए है। कश्मीर मामलों में भाजपा के प्रभारी संगठन महामंत्री राम माधव मानते हैं कि तीन-चार महीनों में परिस्थितियां नियंत्रण में आ जाएंगी। सोमवार को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने के बाद फिर दोहराया कि जहां से भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सिलसिला छोड़ा था, कश्मीर-मसले में वहीं से बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाना होगा, अन्यथा कश्मीर के हालात सुधारे नहीं जा सकेंगे। इसमें हुर्रियत नेताओं से बातचीत भी शरीक है। अटलजी ने 18 अप्रेल 2003 का 'गुड-फ्रायडे' के दिन श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में इसकी रूपरेखा रखी थी। अटलजी के भाषण को लोग 'गुड-फ्रायडे' स्पीच की संज्ञा भी देते हैं। कुछ महीने पहले संघ-प्रमुख मोहन भागवत ने भी एक कार्यक्रम कहा था कि अटलजी कुछ साल और प्रधानमंत्री रह जाते तो शायद कश्मीर का मामला सुलझ जाता। अटलजी तीन बिंदुओं को केन्द्र में रखकर संवाद करना चाहते थे। उन्‍होंने जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत के आधार पर विवाद को सुलझाने का क्रम आगे बढ़ाया था। लालकृष्ण आडवाणी को अलगाववादियों से बात करने के लिए अधिकृत किया था। कश्मीर को देश की मुख्य धारा में लाने के साथ ही पाकिस्तान से शांति-बहाली की कोशिशे भी इस फार्मूले में शरीक थीं। फारूक अब्दुल्ला भी कह चुके हैं कि कश्मीर के मामले में अटलजी की राहों पर चलने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अटलजी की कश्मीर नीति से इत्तेफाक जताते रहे हैं।  भले ही मोदी अटलजी की नीतियों से सहमत हों, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं हैं। देश में अटलजी के प्रति स्वस्फूर्त विश्वास का माहौल था, जो कठोर हिन्दुत्व के चलते मोदी के लिए संभव नहीं है। मोदी अपनी ही लक्ष्मण-रेखाओं से घिरे राजनेता हैं। देखना दिलचस्प होगा कि अटलजी की सरकार में टूटे संवादों के सिरों को ढूंढकर नए संवादों की गांठो से जोड़ने की महबूबा मुफ्ती की मुराद कैसे पूरी हो सकेगी...?[वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक हैं।]

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Dakhal News 26 April 2017


 नर्मदा यात्रा 178 देशों तक

 'नमामि देवि नर्मदे''-सेवा यात्रा की अनुगूँज देश के कोन-कोने के साथ ही 178 देशों में भी पहुँच रही है। विश्व के पर्यावरण, जीव-जन्तु, गौ-वंश, मृदा, कृषि, जल वैज्ञानिक नर्मदा यात्रा को सतत समर्थन दे रहे हैं। साधु-संत, समाज, शासन की त्रिवेणी का अनुपम संगम यात्रा, नर्मदा तट पर पौध-रोपण, शुचिता, स्वच्छता, नशा मुक्ति, बेटी-बचाओ, नदी-गौ संरक्षण, कन्या भ्रूण हत्या, जैविक खेती आदि उद्देश्यों के साथ प्रभावी छाप छोड़ती चल रही है। यह बात राज्य गौ-पालन एवं पशु-संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष और राज्य नर्मदा सेवा समिति के सदस्य महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने मण्डला जिले के ग्राम तिंदनी में सेवा यात्रा पहुँचने पर हुए जन-संवाद में कही। ग्वारी गाँव से तिंदनी पहुँचने पर श्रीमती ग्यारसी देवी ने कलश और जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शैलेष मिश्रा ने ध्वज ग्रहण कर बहुसंख्य कलश-धारक महिलाओं और कन्याओं के साथ स्वागत किया। विगत 11 दिसम्बर,2016 से शुरू यात्रा का आज 127वाँ दिन है। मनुष्य ही नहीं नदियों की भी जीवनदायिनी है माँ नर्मदा स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा कि बिजली, अन्न-जल देने के साथ माँ नर्मदा आज नदियों को पुनर्जीवित भी कर रही हैं। गुजरात एवं मध्यप्रदेश में करोड़ों लोगों को पेयजल, किसानों को सिंचाई और उद्योगों को बिजली देने वाली नर्मदा आज क्षिप्रा, गंभीर, पार्वती, खान, साबरमती आदि नदियों को पुनर्जीवित कर रही हैं। नर्मदा पुराण में महर्षि वेद व्यास ने लिखा है कि कलयुग में कई नदियाँ अपना अस्तित्व खो देंगी जिन्हें नर्मदा जीवन दान देगी। गंगा से प्राचीन है नर्मदा स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा कि गंगा का अवतरण त्रेता युग ओर नर्मदा का अविर्भाव सतयुग में हुआ। नारायण के वरदान के अनुसार गंगा सहित सभी तीर्थ पापियों के स्नान से हुए कलुष को धोने नर्मदा में आते हैं। इसलिए नर्मदा परिक्रमा में सभी तीर्थों का फल प्राप्त होता है। साल में एक बार गंगा स्वयं नर्मदा में स्नान करने आती है और धवल होकर लौटती है। गंगा की भाँति नर्मदा का जल भी औषधीय गुणों से भरपूर है। ग्राम तिंदनी में पहुँचने पर स्कूली बच्चों के आकर्षक लोक-नृत्य ने लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामवासी, महिलाओं, बच्चों और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 'नर्मदे हर'' जयघोष के साथ नर्मदा नदी और तट को संरक्षित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, रोजगार निर्माण मण्डल के अध्यक्ष श्री हेमंत देशमुख, पाठ्य-पुस्तक निगम के उपाध्यक्ष श्री अवधेश नायक, साध्वी योगमाया, साध्वी प्रज्ञा भारती भी मौजूद थे।  

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Dakhal News 24 April 2017


मंत्री गिरिराज सिंह

नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर आबादी के नियंत्रण का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की सख्त जरूरत है। मंत्री का कहना था कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत बचाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी धर्मों के लोगों पर दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने की पाबंदी लगे। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या जितनी आबादी जुड़ती है और भारतीय दुनिया की कुल आबादी का 17 फीसदी है। उनके मुताबिक इस समस्या के चलते प्राकृतिक संसाधन तेजी से घट रहे हैं। नोटबंदी लागू होने के बाद गिरिराज सिंह ने कहा था कि देश में नसबंदी अभियान चलाया जाना चाहिए। इससे पहले उन्होंने हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने की नसीहत दी थी। गिरिराज सिंह ने राम मंदिर पर भी अपनी राय रखी। उनका दावा था कि मंदिर 200 फीसदी अयोध्या में ही बनेगा। सिंह के मुताबिक तुष्टिकरण की राजनीति ऐसा होने से नहीं रोक पाएगी। उन्होंने कहा कि अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनता है तो बहुसंख्यक आबादी के मन में असंतोष पनपेगा। ओवैसी पर हमला बोलते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि संविधान बहुसंख्यक आबादी के लोगों ने ही बनाया है। उनके मुताबिक गोरक्षा के नाम पर मारपीट करना गलत है लेकिन ये भी सच है कि देश में गाय माता के समान पूजा जाती है।

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Dakhal News 23 April 2017


खुर्शीद-ओवैसी

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा मुस्लिम वोटर्स को लेकर दिए गए बयान पर विवाद शुरू हो गया है। उनके बयान से नाराज कांग्रेस नेता सलमान खुर्शिद और एआईएमएआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने रविशंकर प्रसाद पर निशाना साधा है। सलमान खुर्शीद ने कहा, 'हमें यह देखना चाहिए कि हमारी पार्टी को किसने वोट नहीं किया और क्यों नहीं किया? हमें उस कारण की तलाश करनी चाहिए। हालांकि मुझे इसका कोई कारण नजर नहीं आता कि क्‍यों कोई यह महसूस करता है उसे समाज का एक खास वर्ग वोट नहीं करता है?' वहीं रविशंकर प्रसाद के बयान पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमें संविधान ने अधिकार दिए हैं और वही हमारे अधिकारों को सुरक्षा देता है। सभी को अपनी मर्जी से किसी भी पार्टी को वोट करने का अधिकार है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसलमान वोट नहीं करते हैं। लेकिन सरकार ने उन्हें पर्याप्त इज्जत दी है। रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को माइंडमाइन सम्मेलन में कहा, 'हमें कभी मुस्लिम वोट नहीं मिलते। हम इस बात को पूरी स्पष्टता से स्वीकार करते हैं, लेकिन हमने उन्हें पूरी पवित्रता से स्वीकर किया है या नहीं?' उन्होंने कहा कि भाजपा के 13 मुख्यमंत्री हैं। हम देश पर शासन कर रहे हैं। क्या हमने किसी नौकरीपेशा या व्यापार करने वाले सज्जन मुसलमान को प्रताडि़त किया है? क्या हमने उन्हें काम से हटाया है। रविशंकर प्रसाद विकास का संस्कृति और विभिन्नता पर प्रभाव के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।  

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Dakhal News 22 April 2017


मंत्री रविशंकर प्रसाद

    केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली में  एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि हमें पता कि मुसलमान हमें वोट नहीं देते है लेकिन फिर भी बीजेपी किसी तरह भी उनको सताती नहीं है.  रविशंकर प्रसाद ने कहा - ‘भारत की विविधता का हम लोग सम्मान करते हैं. पिछले कुछ दिनों से बीजेपी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है बावजूद इसके हमें जनता का आशीर्वाद मिला और जनता ने हमारा साथ दिया है.देश के 15 राज्यों में हमारी सरकार है, 13 राज्यों में हमारी पार्टी के मुख्यमंत्री हैं और हम लोग देश की सत्ता भी संभाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि क्या हमारी सरकार ने अब तक किसी भी मुस्लिम को परेशान किया? क्या हमने किसी मुसलमान से उसकी नौकरी छीनी है? उन्होंने कहा 'मुझे पता है कि हमें मुसलमानों का वोट नहीं मिलता, लेकिन क्या हमारी सरकार उन्हें उचित सुविधा नहीं दे रही? अपनी बात को सही साबित करने के लिए प्रसाद ने पद्म श्री सम्मान पाए हुए अनवर उल हक का जिक्र भी किया. प्रसाद ने कहा,‘एक उदाहरण देकर मैं बताना चाहूंगा कि हम लोग कैसे काम करते हैं. पहले बेहद गलत तरीके से ये पुरस्कार दिए जाते थे. लुटियन दिल्ली के दोस्तों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होता था. लेकिन पीएम ने इसको बदलने का विचार किया. एक अनवर उल हक नाम का शख्स है. वह चाय के बागान में मजदूरी करता है. सही इलाज ना मिलने की वजह से उनकी मां चल बसी, तब से उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को एंबुलेंस बना लिया, वह अबतक 2000 से ज्यादा की जिंदगी बचा चुके हैं.’ प्रसाद ने आगे बताया कि पीएमओ की तरफ से एक दिन अनवर को फोन गया. फिर पीएम ने अनवर से कहा कि वह उनको पद्म श्री पुरस्कार देना चाहते हैं. प्रसाद ने बताया कि पीएम मोदी ने अनवर के अच्छे काम की प्रशंसा भी की थी. इसके बाद प्रसाद ने कहा, ‘हम लोगों ने अनवर का धर्म नहीं देखा और ना ही पूछा कि उन्होंने हमें वोट किया था या फिर नहीं.’  

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Dakhal News 22 April 2017


राष्ट्रीय मुस्लिम मंच

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के करीब 50 समर्थक गुरुवार शाम आजम खान राष्ट्रवादी की अगुवाई में सायं अचानक अयोध्या पहुंचे। शाम करीब सात बजे अयोध्या पहुंचने पर खुफिया संगठन हरकत में आया। जानकारी लेने पर मुस्लिम मंच नेता ने बताया कि वह राम मंदिर दर्शन को आए हैं। साथ में एक ट्रक ईंट भी मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए लाए हैं। उन्हें बताया गया कि राम मंदिर दर्शन अवधि समाप्त हो गई है। रामलला का दर्शन अब पहली पाली में शुक्रवार को संभव हो सकेगा। रामजन्म भूमि थानाध्यक्ष सुनील मिश्र ने बताया कि सभी को वापस लखनऊ भेज दिया गया है। इसके पहले लखनऊ में कई मुस्लिम नेता खुलकर राममंदिर बनाने के पक्ष में आ गए हैं। कई मुस्लिम नेताओं ने राम मंदिर निर्माण को लेकर जगह-जगह पर कई पोस्टर लगाए थे जिसमें अयोध्या में ही राम मंदिर बनाने की बात कही गई है। पोस्टर में लिखा है- देश के मुसलमानों का यही है मान...राम मंदिर का हो वहीं निर्माण...एक और पोस्टर में लिखा है- हो जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण...मुस्लिमों का यही अरमान. खास बात ये है कि ये होर्डिंग उस वक्त लगाया गया जब लोक भवन में बीजेपी विधायकों की मीटिंग चल रही थी। श्रीराम मंदिर निर्माण मुस्लिम कार सेवक मंच' संगठन के अध्यक्ष आजम खान ने करीब 10 होर्डिंग्स इलाके में लगवाए थे। इस पर आजम ने कहा कि राम ही हिंदूस्तान की पहचान हैं। अयोध्या में राम मंदिर का भव्य निर्माण जरुर हो. उन्होंने बताया कि ऐसा करने पर मुझे फोन पर जान से मारने की धमकियां मिलने लगी हैं।  

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Dakhal News 21 April 2017


PF पर 8.65 प्रतिशत ब्याज

नई दिल्ली में  वित्त मंत्रालय ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के ईपीएफ पर 8.65 फीसद की दर से ब्याज दिए जाने के प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इसके बाद इसे लेकर एक नोटिफिकेशन जारी होगा। ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी का फायदा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करीब साढ़े चार करोड़ सदस्यों को मिलेगा। केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने इसकी पुष्टि करतेहुए कहा कि, “वित्त मंत्रालय ने 8.65 फीसद की मंजूरी दे दी है। अब बातचीत का चरण आएगा। औपचारिक बातचीत खत्म हो चुकी है। इसके संबंध में तुरंत एक अधिसूचना जारी की जाएगी और करीब 4 करोड़ सब्सक्राइबर्स को यह ब्याज दर क्रेडिट कर दी जाएगी।” कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ट्रस्टीज ने बीते वर्ष दिसंबर महीने में ईपीएफ पर 8.65 फीसद के ब्याज दर को मंजूरी दे दी थी। वित्त मंत्रायल काफी समय से श्रम मंत्रालय के साथ ईपीएफ की दरों में कटौती के लिए बातचीत कर रहा है ताकि इसकी ब्याज दर को पीपीएफ जैसी छोटी बचत योजनाओं के बराबर लाया जा सके। अब श्रम मंत्रालय कर्मचारियों को इसी दर से बीते वित्त वर्ष के लिए ब्याज अदा कर सकता है। ईपीएफओ के अनुमान के अनुसार बीते वित्त वर्ष के लिए यह ब्याज देने के बाद उसके पास 158 करोड़ रुपये का सरप्लस बचेगा।अन्य सभी तरह की जमाओं पर ब्याज दर में कमी के बीच वित्त मंत्रालय पहले श्रम मंत्रालय को सीबीटी से अनुमोदित दर से कम ब्याज देने के लिए कह रहा था। ब्याज दर को घटाकर 8.7 फीसद करने का फैसला किया था। इसकी काफी आलोचना हुई थी। इसके बाद सरकार ने इसे फिर 8.8 प्रतिशत कर दिया था। वित्त मंत्रालय लगातार श्रम मंत्रालय से ईपीएफ ब्याज दरों को कम करने को कह रहा है। उसका कहना है कि ईपीएफ पर ब्याज दरों को अन्य बचत योजनाओं मसलन पीपीएफ के अनुरूप लाया जाए।  

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Dakhal News 20 April 2017


लाल बत्ती को बाय बाय

  वीवीआईपी कल्चर पर लगाम लगाने के लिए मोदी कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला किया है। अब केंद्र के अधिकारी और केंद्रीय मंत्री अपनी गाड़ियों पर लाल बत्ती नहीं लगा सकेंगे। यह फैसला 1 मई से लागू किया जाएगा हालांकि, राज्य में यह फैसला लागू करना वहां की सरकारों पर छोड़ दिया गया है। इसका एक सांकेतिक महत्व भी है। 1 मई को मजदूर दिवस है इसलिए इस दिन मोदी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसके मंत्री वीवीआईपी कल्चर से दूर रहेंगे। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, उपराष्ट्रपति, स्पीकर को इससे छूट होगी। कैबिनेट के निर्णय के बाद केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने अपनी कार से तुरंत ही लाल बत्ती हटा ली है। इस बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि लाल बत्ती देने के नियम को खत्म किया गया है, अब देश में कोई लालबत्ती का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि कुछ आपात सेवाओं के लिए नीली बत्ती का इस्तेमाल होगा। पुलिस, एंबुलेस और फायर ब्रिगेड को नियम से छूट दी गई है। इससे पहले कैबिनेट मीटिंग के बाद पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि 1 मई से पीएम और सभी मिनिस्टर्स की गाड़ियों से हटा दी जाएगी। इसका इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी सर्विस व्हीकल्स पर ही किया जाएगा। सू्त्रों के अनुसार, लाल बत्ती का इस्तेमाल खत्म करने के लिए सड़क व परिवहन मंत्रालय काफी समय से काम कर रहा था। पीएमओ में यह मामला करीब डेढ़ साल से पेंडिंग था। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पीएमओ ने एक मीटिंग भी की थी, जिसमें कई बड़े अधिकारियों से बात की थी। फैसला कैसे लागू किया जाए इस पर परिवहन मंत्रालय ने पांच ऑप्शन दिए थे। हालांकि राज्य सरकारें इस पर फैसला खुद लेंगी, लेकिन माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद राज्यों पर, खासकर भाजपा शासित राज्यों पर इसे लागू करने का दबाव रहेगा। वैसे बहुत सारे मंत्री लालबत्ती के पक्ष में बयान देते रहे हैं, सो उनके दिल में इसे छोड़ते वक्त कसक तो रहेगी। इससे पूर्व पंजाब की अमरिंदर सरकार ने लाल बत्ती पर रोक लगा दी थी। पंजाब के मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा किसी को लालबत्ती के इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी। इसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लालबत्ती से हूटर निकालने की बात कही थी।  

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Dakhal News 19 April 2017


jio

jioरिलायंस जियो ने हाल ही में उन यूजर्स के लिए एक नई पेशकश की घोषणा की थी, जो समर सरप्राइज ऑफर से नहीं जुड़ पाए थे। इसे जियो धन धना धन ऑफर नाम दिया गया था। यह योजना मूल रूप से पिछले समर सरप्राइज ऑफर की तरह ही थी, जिसके तहत प्रति दिन एक जीबी डाटा यूज मिलता है। इसके लिए यूजर को 309 रुपए के साथ ही 99 रुपए का जियो प्राइम का सब्सक्रिप्शन लेना होता है। रिलायंस जियो ने घोषणा करते हुए कहा था कि यूजर को जियो प्राइम मेंबरशिप से जुड़ना होगा और उन्हें 309 या 509 रुपए का रीचार्ज 15 अप्रैल तक कराना होगा, ताकि वे सुविधाओं का लाभ ले सकें या सर्विस बंद होने से बच सकें। मगर, इस बीच कई ऐसे यूजर्स हैं, जिन्होंने अभी तक सदस्यता नहीं ली है, लेकिन उनकी सेवाएं अभी भी सक्रिय हैं। हालांकि, ऐसे अकाउंट को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अब प्राइम मेंबरशिप नहीं लेने वाले यूजर प्रभावित होने लगेंगे। ऐसे में अब रिलायंस जियो यूजर्स, जिन्होंने अभी तक रिचार्ज नहीं किया है, वे अभी भी जियो प्राइम के साथ धन धना धन ऑफर को ले सकते हैं। यानी यदि आपका जियो अकाउंट बंद हो गया है, तो आप जियो स्टोर पर जाएं या जियो वेबसाइट या माय जियो ऐप में जाएं। 84 दिन में डाटा यूज के लिए आपको 408 रुपए (प्राइम मेंबरशिप के लिए 99 रुपए और ऑफर के लिए 309 रुपए) का भुगतान करें। इससे पहले रिलायंस जियो ने कहा था कि प्राइम मेंबरशिप को लेने की लास्ट डेट 31 मार्च थी। मगर, बाद में समर सरप्राइज ऑफर के साथ इसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया था। मगर, अब लग रहा है कि रिलायंस जियो निकट भविष्य में जियो प्राइम और धन धना धन ऑफर को जारी रखने जा रहा है।  

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Dakhal News 18 April 2017


sbi

भारतीय स्‍टेट बैंक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने अपने ग्राहकों को ट्वीट के जरिए स्पष्ट कर किया है कि छोटे बचत बैंक खाता, सामान्य बचत बैंक खाता, जन धन खाता और और व्यावसायिक वेतन खाता धारकों को न्यूनतम राशि बनाए रखना जरूरी नहीं है. ग़ौरतलब है कि भारतीय स्‍टेट बैंक ने 1 अप्रैल से बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि रखने की सीमा बढ़ा दी थी. एसबीआई की वेबसाइट के अनुसार एसबीआई के बचत खाताधारकों को मासिक आधार पर न्यूनतम राशि को अपने खाते में रखना होगा. ऐसा नहीं होने पर उन्हें 20 रुपए (ग्रामीण शाखा) से 100 रुपए (महानगर) देने होंगे. बैंक में 31 मार्च तक बिना चेक बुक वाले बचत खाते में 500 रुपये और चेक बुक की सुविधा के साथ 1,000 रुपये रखने की आवश्यकता थी. हालांकि सुरभि, मूल बचत खाता और प्रधानमंत्री जनधन योजना खातों में यह व्यवस्था लागू नहीं होगी. इसके अलावा बैंक ने लॉकर किराया भी बढ़ा दिया है. साथ ही एक साल में लॉकर के उपयोग की संख्या भी कम कर दी है. 12 बार उपयोग करने के बाद ग्राहक 100 रुपए के साथ सेवा कर देना होगा. चेक बुक के मामले में चालू खाताधारकों को एक वित्त वर्ष में 50 चेक मुफ्त मिलेंगे. उसके बाद उन्हें चेक के प्रति पन्ने के लिए तीन रुपए देने होंगे. इस प्रकार, 25 पन्नों वाले चेक बुक के लिए उन्हें 75 रुपए के साथ सेवा कर देना होगा. एसबीआई के बचत खाते में अगर 25,000 रुपये बना रहता है तो संबंधित ग्राहक असीमित बार एटीएम का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि पांच बार से अधिक एटीएम के उपयोग करने पर ग्राहक को शुल्क देना होगा. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर सहित भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का शनिवार को देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो गया. इसके साथ ही स्टेट बैंक दुनिया के 50 बड़े बैंकों में शामिल हो गया है. स्टेट बैंक द्वारा शनिवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी) और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) तथा भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) का एक अप्रैल से भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो गया है. इस विलय के साथ भारतीय स्टेट बैंक के खाताधारकों की कुल संख्या 37 करोड़ और उसकी शाखाओं का नेटवर्क 24,000 के आंकड़े को छू जायेगा. देशभर में उसके 59,000 एटीएम होंगे. विलय के बाद बैंक की जमा राशि 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक और कर्ज पर दी गई राशि 18.50 लाख करोड़ रुपये होगी.  

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Dakhal News 17 April 2017


ट्रिपल तलाक

  देश में ट्रिपल तलाक को लेकर मामला गर्म है। इस बीच मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बड़ा ऐलान किया है। लागातार ट्रिपल तालक को लेकर आ रही खबरों और इसे खत्म करने की मांग के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि जो भी इसका दुरुपयोग करेगा उसका बायकॉट किया जाएगा। इस बारे में बात करते हुए मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि बोर्ड कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में तय हुआ है कि ट्रिपल तलाक को लेकर कुछ गलतफहमी है और हम इसे लेकर नए कोड ऑफ कंडक्ट जारी करेंगे। जो इसका दुरुपयोग करेगा उसका बहिष्कार किया जाएगा। लखनऊ में नदवा कालेज में हुई इस बैठक में यह भी तय हुआ है कि पर्सनल लॉ बोर्ड बाबरी-अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही चलेगा।  

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Dakhal News 16 April 2017


ग्रामोदय से भारत उदय अभियान शुरु

 मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि हम सबका सौभाग्य है कि भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर जैसे महापुरूष ने प्रदेश की धरती पर जन्म लिया। बाबा साहब प्रखर बुद्धिमान और प्रतिभा के धनी थे। वे व्यक्ति नहीं पूरी संस्था थे। अभाव और कठिनाइयों में भी उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगे बढ़े। उनका जीवन हम सबके लिये प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान अम्बेडकर नगर (महू) में डॉ. अम्बेडकर की जयंती महाकुंभ में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 'ग्रामोदय से भारत उदय अभियान'' की शुरूआत भी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महाकुंभ में देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालु सरकार के मेहमान हैं। सरकार आज मेजबान की भूमिका में है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वे पहली बार महू आये थे, तो देखा कि कुंभ की तरह बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ बाबा साहब के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने आते हैं, किंतु उनके रुकने, खाने-पीने के कोई प्रबंध नहीं हैं। तभी तय किया कि डॉ.अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को हर साल महाकुंभ होगा और सरकार महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करेगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें बाबा साहब की जन्म-स्थली पर स्मारक बनवाने का सौभाग्य मिला। महाराष्ट्र सरकार ने भी इन्दु मिल की जमीन को बाबा साहब की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के लिये सौंप दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र और भारत सरकार ने लंदन में उस भवन को भी स्मारक बनाने के लिये खरीद लिया है, जिसमें रहकर बाबा साहब ने पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि बाबा साहब के जीवन से जुड़े पाँच स्थान पंच तीर्थ के रूप में बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारी सरकार सभी वर्गों की सरकार है, किंतु पहले उनकी है जो सबसे गरीब हैं, जो सबसे नीचे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने गरीबों के उत्थान के लिये सतत् प्रयास किये। वे हमेशा शिक्षित बनने की बात कहते थे। सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के बच्चों में शिक्षा को  बढ़ावा देने के लिये नि:शुल्क गणवेश, किताबें, साइकिल जैसी सुविधाओं के साथ छात्रवृत्ति, छात्रावास, विदेश में अध्ययन की व्यवस्था और शहरों में किराये से कमरा लेकर पढ़ने की सुविधा की योजना लागू की है। साथ ही प्रायवेट मेडिकल/इंजीनियरिंग/ प्रबंधन संस्थानों में प्रवेश मिलने पर सरकार की ओर से फीस दिये जाने दिये की भी योजना संचालित है। रोजगार के लिये  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी और स्व-रोजगार जैसी योजनाएँ विशेषकर अनुसूचित जाति-जनजाति के युवकों के लिये शुरू की गई हैं। इन योजनाओं में बैंक ऋण की गारंटी राज्य शासन द्वारा दी जाती है। वन, योजना, आर्थिक और सांख्यिकी मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के कार्यकाल में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। सामाजिक समरसता के क्षेत्र में भी सर्वाधिक प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की दरों में खासी बढ़ोत्तरी की गयी है। प्रदेश में छात्रावासों की संख्या भी दोगुनी हो गयी है।    महाराष्ट्र की सांसद और भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री पूनम महाजन ने कहा कि बाबा साहब बड़े दूरदृष्टा थे। उन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया जो हर परिस्थिति में समीचीन है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने इन्दु मिल की जमीन को बाबा साहब अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापना के लिये दे दी है और यह प्रतिमा जल्द ही बनकर तैयार होगी। सम्मेलन को बौद्ध संत भंते श्री संघशीलजी ने भी संबोधित किया। स्वागत भाषण नर्मदा घाटी विकास, सामान्य प्रशासन और विमानन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लालसिंह आर्य ने दिया। जिला पंचायत की अध्यक्ष सुश्री कविता पाटीदार ने आभार माना। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बौद्ध संत भंते श्री संघशीलजी का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया। सम्मेलन में सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर, विधायक सुश्री उषा ठाकुर सहित अन्य जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।      

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Dakhal News 14 April 2017


mp कृषि  रोडमेप

मध्यप्रदेश के किसानों की आय को दोगुना करने का रोडमेप अब देश के अन्य राज्यों की कृषि आय बढ़ाने का पथ प्रदर्शन करेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान कृषि आय को दोगुना करने के लिये किये गये कार्यों, नीतियों, प्रावधानों और योजनाओं का नीति आयोग की बैठक में प्रस्तुतिकरण देंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान को किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयासों को मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के लिये कहा है। उन्होंने श्री चौहान को नीति आयोग की बैठक में कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि में हुई प्रगति और भविष्य की कार्य-योजनाओं का प्रस्तुतिकरण दें। प्रदेश के कृषि नवाचारों की जानकारी अन्य राज्यों को भी हो। कृषि आय को दोगुना करने के प्रयासों में उनका मार्गदर्शन होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज मंत्रालय में नीति आयोग में दिये जाने वाले स्व- प्रस्तुतिकरण पर अधिकारियों के साथ चर्चा की। बताया गया कि कृषि आय दोगुना करने के प्रदेश के प्रयासों के उत्कृष्ट परिणाम मिलने लगे हैं। ये भारत सरकार द्वारा जारी की जाने वाली सूचनाओं में स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारत सरकार की सूचनाओं के आधार पर ही प्रदेश की कृषि क्षेत्र की उपलब्धियाँ प्रस्तुत की जायें। उनको टेम्पलेट के रूप में संयोजित किया जाये। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और उसके उपयोग के संबंध में जानकारी देने के साथ ही विद्युत की उपलब्धता के लिये किये गये कार्यों और सुधारों के बारे में भी बताया जाये। श्री चौहान ने कहा कि किसानों की साख संबंधी जरूरतों में सरकार की मदद, फसल परिवर्तन के प्रयासों हार्टिकल्चरल, फ्लोरीकल्चर, एग्रो फॉरेस्ट्री के साथ ही फसल राहत, बीमा, समर्थन मूल्य पर खरीदी, गहरी जुताई, यंत्रीकरण के लिये कस्टम हायरिंग सेंटर, किसानों को खेती के जमीन के अधिकतम उपयोग और नई जानकारियों के लिये उनके विदेश भ्रमण प्रयासों की भी जानकारी दी जाये। इसके साथ ही नई योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री खेततीर्थ योजना, कृषि कैबिनेट जैसे संगठनात्मक सुधारों का भी संक्षिप्त परिचय हो। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, अपर मुख्य सचिव कृषि श्री पी.सी. मीणा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव किसान-कल्याण और कृषि विकास श्री राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री अजीत केसरी, आयुक्त मंडी बोर्ड श्री राकेश श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे  

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Dakhal News 13 April 2017


चुनाव आयोग की चुनौती

मतदान मशीन यानी ईवीएम को ले कर उठाए जा रहे तमाम सवालों पर चुनाव आयोग ने हमेशा के लिए विराम लगाने की तैयारी कर ली है। मई के पहले सप्ताह में यह सभी राजनीतिक दलों के साथ वैज्ञानिकों और तकनीकविदों को भी खुली चुनौती दे कर अपनी मशीनें इनके सामने पेश करेगा। इस दौरान लोगों को इसमें हेर-फेर के अपने दावों को साबित करने का मौका मिलेगा। अब आयोग ने यह भी तय कर लिया है कि वह अगले महीने के पहले हफ्ते से ही इसकी शुरुआत कर देगा। अधिक से अधिक लोगों को यह मौका मिल सके, इसलिए वह लगातार एक हफ्ते या उससे भी अधिक समय तक यह मौका उपलब्ध करवा सकता है। तारीख तय होते ही आयोग विज्ञापन जारी कर इसके लिए लोगों को आमंत्रित कर सकता है। आयोग ने फैसला किया है कि यह मौका सिर्फ राजनीतिक दलों को ही नहीं बल्कि गैर राजनीतिक लोगों को भी मिलेगा। जिनकी ऐसी मशीनों की तकनीक को ले कर विशेषज्ञता होगी, वैसे लोग भी इसमें मनमुताबिक छेड़छाड़ करने की कोशिश कर सकेंगे। आयोग ने इससे पहले वर्ष 2009 में भी ऐसा ही मौका दिया था। तब भी कोई अपने आरोप साबित नहीं कर सका था। पिछले महीने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। हालांकि आयोग लगातार यह दावा करता रहा है कि इसकी तकनीक ऐसी है कि इसमें किसी भी स्तर पर कोई छेड़छाड़ संभव ही नहीं है। इसके बावजूद आरोपों को थमता नहीं देख कर आयोग ने यह बड़ा फैसला किया है। एक बार अपनी मशीनों को उपलब्ध करवा देने के बाद भी अगर कोई अपने आरोप साबित नहीं कर सका तो फिर लोगों की नजर में इन आरोपों की कोई अहमियत नहीं रह जाएगी। आयोग के अधिकारी कहते हैं कि लोकतंत्र में आम लोगों के विश्वास को कायम रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि ईवीएम को ले कर लोगों के मन में कोई आशंका नहीं रह जाए। इसलिए आयोग ने यह बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है।  

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Dakhal News 12 April 2017


प्लास्टिक कैरी बैग पर 1 मई से प्रतिबंध

  900 करोड़ लागत के मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम को मंजूरी   मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज संपन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश में प्लास्टिक कैरी बैग पर 1 मई से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के पालन में पूरे प्रदेश में प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए मध्यप्रदेश जैव अनाश्य अपषिष्ट (नियंत्रण) संशोधन अध्यादेश 2017 को अनुमोदन प्रदान किया। मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेव्लपमेंट कार्यक्रम को भी अनुमोदन प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के विकास में युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और विजन का उपयोग करना तथा युवाओं को सरकारी कामकाज की करीबी समझ विकसित करने के लिए अवसर प्रदान करना है। कार्यक्रम अंतर्गत 51 मुख्यमंत्री रिसर्च एसोसियेट एवं 6 कार्यक्रम समन्वयक चयनित किये जायेंगे। मंत्रि-परिषद ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के नाम से एक नई योजना प्रारंभ करने की स्वीकृति दी। योजना की लागत 900 करोड़ रुपए है। इसके अंतर्गत वर्ष 2017-18 में प्रदेश की 10 हजार ग्रामीण बसाहटों में हैंड पंप से पेयजल उपलब्ध कराये जाने तथा 5000 ग्रामीण बसाहटों में नल-जल योजनाओं के कार्य किये जायेंगे। ग्रामीण नल-जल योजनाओं का स्त्रोत संरक्षण, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हैंडपंपों तथा समूह पेयजल योजनाओं का संधारण भी इस योजना में किया जायेगा। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के 49 जिला मुख्यालयों के नगरीय क्षेत्रों में दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना का प्रथम चरण आरंभ करने का निर्णय लिया। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के दृष्टिगत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में एमबीबीएस सीट्स को 150 से बढ़ाकर 250 करने तथा निर्माण, उपकरण, फर्नीचर एवं वाहन के लिए 119.68 करोड़ रुपये तथा कुल 555 पदों के सृजन और पूर्ति की स्वीकृति प्रदान की। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में विदिशा, शहडोल, रतलाम, खंडवा, छिंदवाड़ा और शिवपुरी में नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए उपकरण, फर्नीचर, वाहन और पुस्तक क्रय के लिए क्रमश: 70.98 करोड़, 69 करोड़, 70.98, 69 करोड़, 68.99 करोड़ तथा 69.01 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। मंत्रि-परिषद ने इन महाविद्यालयों के लिए पदों के निर्माण और आउट सोर्सिंग से सेवाएँ लेने की भी प्रशासकीय स्वीकृति दी। मंत्रि-परिषद की बैठक में एम वाय अस्पताल इंदौर में बोन मेरो ट्रांसप्लांट सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति जारी करने की प्रक्रिया में संशोधनों को अनुमोदन प्रदान किया। अन्वेषण अभिकरण/व्यक्तिगत परिवादी द्वारा अभियोजन स्वीकृति के प्रकरण /आवेदन अभिलेख सहित सीधे प्रशासकीय विभाग को भेजते हुए उसकी एक प्रति विधि एवं विधायी कार्य विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग को पृष्ठांकित करेगा। प्रशासकीय विभाग प्रकरण का परीक्षण कर यदि यह पाता है कि प्रकरण अभियोजन की स्वीकृति के योग्य है, तो वह प्रकरण की प्राप्ति से 45 दिन की अवधि के भीतर अभियोजन की स्वीकृति जारी कर, उसे अन्वेषण अभिकरण/व्यक्तिगत परिवादी को प्रेषित करेगा तथा स्वीकृति आदेश की एक प्रति विधि और विधायी कार्य विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग को भी अग्रेषित करेगा। मंत्रि-परिषद ने भोपाल नगर निगम में स्मार्ट सिटी मिशन अंतर्गत चयनित क्षेत्र आधारित विकास घटक के लिए नार्थ तथा साउथ टीटी नगर स्थित 342 एकड़ भूमि को नगरीय विकास एवं आवास विभाग एवं तदुपरांत भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड को स्थानांतरित किये जाने की स्वीकृति दी। मंत्रि-परिषद ने एमपी मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट के अंतर्गत दमोह जिले के अभाना-तेंदूखेड़ा मार्ग, श्योपुर के गांधी तिराहा -इकलोड जंक्शन मार्ग, अशोक नगर जिले के हापाखेड़ी पनवाड़ीघाट मार्ग , सीहोर जिले के अहमदपुर- भोजपुर मार्ग तथा इटारसी छीपानेर मार्ग, रायसेन जिले के भोपाल सागर से देपालपुर सुनहरा पीतमपुर, बड़गांव मरखेड़ी उइका मरखेड़ा गुलाब-सुलतानगंज सागर मार्ग तथा एसएच -15 के गुढरई खमरिया-बरेली पड़रियाखुरे-मौसपिपलिया- हमीरपुर से एस 44 तक और ग्‍वालियर के जैनोर-करारिया-भितरवार (सभी मार्ग की कुल लंबाई 161.36 किलोमीटर) के उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की। सड़कों का उन्नयन न्यू डेवलपमेंट बैंक की सहायता से किया जायेगा। मंत्रि-परिषद ने आज तीन जिलों की सिंचाई परियोजनाओं की भी प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इनमें सागर जिले में कडान मध्यम सिंचाई परियोजना की 9 हजार 990 हेक्टर सिंचाई क्षमता के लिए 385.79 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना से सागर जिले के राहतगढ़ और बंडा विकासखंड के 53 गाँव लाभान्वित होंगे। परियोजना से सागर जिले के राहतगढ़ विकासखंड के 107 गाँवों को पेयजल प्रदान किया जायेगा। इसी प्रकार बिलगाँव मध्यम सिंचाई परियोजना के कुल सैंच्य क्षेत्र 9 हजार 980 हेक्टयर रबी सिंचाई के लिए 269.90 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना से डिंडौरी जिले की शहपुरा तहसील के 46 गाँव लाभान्वित होंगे। मंत्रि-परिषद ने लोअर और वृहद सिंचाई परियोजना की 90 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता के लिए 2208.03 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इस परियोजना से शिवपुरी जिले के विकासखंड खनियाधाना, पिछौर, करेरा के 222 ग्राम तथा दतिया जिले के दतिया विकासखंड के 36 गाँव लाभान्वित होंगे।    

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Dakhal News 11 April 2017


योगी सरकार खरीदेगी आलू

खबर लखनऊ से है।  उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देते हुए इसी सत्र से चार रुपये 87 पैसे प्रतिकिलो के हिसाब से आलू खरीदने का फैसला किया है। सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश महासचिव विजय बहादुर पाठक ने बताया कि सरकार किसानों से सीधे आलू खरीदेगी। इसमें बिचौलियों का कोई स्थान नहीं होगा। आमतौर पर खोदाई के बाद किसान आलू लेकर दर-दर भटकता था। कई बार तो उसे फेंकना पड़ता था। कभी-कभी लागत से कम पैसे मिलने की आशंका के मद्देनजर खोदाई ही नहीं करता था। पाठक ने कहा कि राज्य सरकार ने सीधे किसानों से 487 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू खरीदने का फैसला कर अन्नदाताओं को बड़ी राहत दी है। उनका कहना था कि योगी सरकार किसानों के लिये लगातार काम कर रही है। किसानों की कर्ज माफी और 80 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य इसका जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राज्य सरकार आंवला, केला और अमरुद उत्पादकों को भी बडी राहत देने जा रही है। खाद्य प्रसंस्करण के जरिये इन तीनों फलों के उत्पादकों को नई-नई योजनाएं दी जायेंगी। इन तीनों फलों के जूस आदि का निर्यात भी किया जा सकता है।  

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Dakhal News 10 April 2017


evm

चुनावों के दौरान इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी किए जाने संबंधी विपक्षी दलों की आशंकाओं पर निर्वाचन आयोग ने सफाई दी है। उसने कहा है कि वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ करना संभव नहीं है। ये इतनी मजबूत हैं कि यदि निर्माता भी चाहे तो इनमें कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने के मद्देनजर चुनाव आयोग ने सभी आशंकाओं का सवाल-जवाब के क्रम में उत्तर दिया है। जैसे ईवीएम को क्या हैक किया जा सकता है? आयोग ने इसका जवाब 'नहीं' में दिया है। हैकिंग संभव नहीं उसने स्पष्ट किया है कि एम1 (मॉडल वन) ईवीएम का उत्पादन 2006 तक किया गया। इसमें वह सभी तकनीकी फीचर थे, जिससे इसे हैक किया जाना संभव नहीं था। 2006 के बाद एम2 (मॉडल टू) ईवीएम तैयार की गईं। 2012 तक इनके 'की कोड की डायनेमिक कोडिंग' कर इन्हें तकनीकी रूप से और भी उन्नत किया गया ताकि बटन दबाने पर संदेश बैलेट यूनिट से कंट्रोल यूनिट तक कूट भाषा (एनक्रिप्टेड फार्म) में पहुंचना सुनिश्चित हो जाता है। कंप्यूटर नियंत्रित नहीं ईवीएम आयोग ने यह भी साफ किया है कि उसका ईवीएम कंप्यूटर नियंत्रित नहीं है। यह इंटरनेट अथवा किसी भी दूसरे नेटवर्क से नहीं जुड़ी हैं। इसे रिमोट से हैक नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा इन मशीनों में फ्रीक्वेंसी रिसीवर या वायरलेस डाटा के लिए डिकोडर नहीं है। लिहाजा इनको किसी भी दूसरे उपकरण से नहीं जोड़ा जा सकता है। ऐसे में वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ करना संभव ही नहीं है। हेरफेर संभव नहीं आयोग ने इस आशंका को भी खारिज कर दिया है कि इन मशीनों में निर्माता द्वारा हेरफेर किया जा सकता है। उसने बताया है कि इन मशीनों का निर्माण 2006 से अलग-अलग वर्षों में करा कर विभिन्न राज्यों को भेजा गया। इसी तरह ईवीएम निर्माता कंपनियां इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीआइएल) और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) वर्षों पहले यह कैसे जान लेंगी कि किस क्षेत्र से कौन सा उम्मीदवार है और मत पत्र पर उसका क्रमांक क्या होगा? चुनाव आयोग ने इस आशंका को भी निराधार करार दिया है कि मतदान से पूर्व ईवीएम में ट्रोजन हॉर्स (एक हानिकारक कंप्यूटर प्रोग्राम, जो मशीन के सिस्टम को नियंत्रित कर लेता है) से लैस किया जा सकता है। उसने बताया है कि 2013 के बाद बनीं एम3 (मॉडल थ्री) ईवीएम टेंपर डिटेक्शन (छेड़छाड़ का पता लगाने) और सेल्फ डायग्नोस्टिक (आत्म निदान) सरीखे अतिरिक्त तकनीकी फीचर से लैस हैं। टेंपर डिटेक्शन फीचर के चलते जैसे ही कोई मशीन खोलेगा, ईवीएम पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाएगी। ईवीएम को जैसे ही चालू किया जाता है सेल्फ डायग्नोस्टिक फीचर सक्रिय हो जाता है। यह मशीन को हर समय चेक करता रहता है। देश में ही बनती हैं ईवीएम आयोग के अनुसार, ईवीएम का निर्माण देश में ही किया जाता है। इसका सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग कोड देश में ही लिखा जाता है। फिर उसे मशीन कोड में तब्दील कर विदेशी चिप निर्माताओं को दिया जाता है। देश में अभी सेमी कंडक्टर माइक्रोचिप बनाने की सुविधा नहीं है। हर माइक्रोचिप पर निर्माता के हस्ताक्षर हर माइक्रोचिप की अलग पहचान संख्या होती है, जो मेमोरी में दर्ज होती है और उन पर निर्माताओं के डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। इसलिए माइक्रोचिप को बदले जाने की आशंका निर्मूल है। माइक्रोचिप बदलने की किसी भी कोशिश को पकड़ने का इंतजाम है और ईवीएम फौरन निष्क्रिय हो जाएगी। कड़ी सुरक्षा में रखी जाती हैं मशीनें आयोग ने बताया है कि जिला मुख्यालय पर इन मशीनों को डबल लॉक सिस्टम के तहत बहुस्तरीय कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। कोई भी अधिकारी स्ट्रांग रूम का ताला नहीं खोल सकता। वे केवल यह सुनिश्चित करते रहते हैं कि ताला ठीक तरीके से लगा और सुरक्षित है अथवा नहीं। हैकिंग के डर से अमेरिका में ईवीएम नहीं अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किए जाने के बारे में भी आयोग ने सफाई दी है। उसका कहना है कि इन देशों में मशीनें पूरी तरह से कंप्यूटर नियंत्रित और नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। इससे इनके हैक होने का खतरा बना रहता है।    

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Dakhal News 9 April 2017


lalu prasad yadav

जालंधर में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने तमाम धर्म निरपेक्ष दलों को एकजुट करने की पहल करने का ऐलान किया। इस एकता को वह लोकतंत्र तथा सामाजिक ताने-बाने के लिए जरूरी बताते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने 2019 के चुनावों को देखते हुए बातचीत शुरू कर दी है। अभी फोन से बात कर रहा हूं तथा जल्द ही मिलकर सभी को इक्ट्ठा करेंगे। उन्होंने कहा कि यू.पी. में धर्म निरपेक्ष मतों के बिखराव के कारण भाजपा की जीत हुई है।  यू.पी. में किसी की आंधी नहीं थी, वहां बसपा, समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस के वोट को एक साथ जोड़ दें तो यह लगभग 52 प्रतिशत बन जाता है। भाजपा को इससे बहुत कम वोट मिले। अगर हम एकजुट हो गए तो फिर भाजपा हमारे सामने नहीं टिक पाएगी, परंतु हम एकजुट न हुए तो हम खत्म हो जाएंगे। लालू यादव ने कहा कि उड़ीसा के पंचायत चुनावों में भाजपा को सफलता मिली तथा उसका वोट बढ़ा परंतु इसके पीछे भी हमारा बिखराव ही बड़ा कारण है। यू.पी. में भाजपा के पास तो अपने उम्मीदवार तक नहीं थे। इन्हीं दलों से वह उम्मीदवार भी ले गई। सबसे बड़ा कारण समाजवादी पार्टी का गृह युद्ध रहा। अखिलेश को घर की लड़ाई ने काफी उलझा दिया।  एक प्रश्न के उत्तर में लालू ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर सपा, बसपा तथा कांग्रेस एक साथ आ जाएं तो ये (भाजपा) कहीं पर भी नहीं टिकेंगे। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी हैं, पंजाब में कांग्रेस मजबूत है। इसी तरह बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब में सीटों की संख्या काफी है। हम अन्य राज्यों में समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों को जोडऩे की पहल करेंगे। वाम दलों से भी अपील है कि वे एकता के मार्ग पर चलें। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, इसलिए उसे महागठबंधन की दिशा में पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यू.पी. की जीत से उत्साहित प्रधानमंत्री मोदी अगले साल 5 राज्यों के चुनाव के साथ ही लोकसभा के चुनाव करवाने की तैयारी में हैं, इसलिए हमें जो भी करना है, जल्दी करना है।   हाथ पर हाथ रखने से काम नहीं चलेगा। पी.एम. उम्मीदवार के नाम पर सहमति पर बोलते हुए लालू ने कहा कि उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है। पी.एम. उम्मीदवार कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, इसके लिए बहुत कसरत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सवाल यह भी बड़ा नहीं है कि किस में पी.एम. मैटीरियल है और किस में नहीं, फिलहाल सबसे पहली जरूरत तो यह है कि सब एक जगह बैठ कर एकजुट हों। कार्यक्रम व रणनीति बनाएं, अभी माहौल बनाने के लिए समय है।   

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Dakhal News 8 April 2017


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

राजनीति और धर्म को मिलाने के लिए भाजपा पर नए सिरे से हमला करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी पर राज्य में सांप्रदायिक तनाव भड़काने का प्रयास करने का आरोप लगाया और लोगों से अलर्ट रहने को कहा। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भाजपा राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे का प्रयास कर रही है। वे इस बात का फैसला करने वाले कौन होते हैं कि कोई व्यक्ति क्या खाएगा और क्या पहनेगा। हर धर्म के अपने रीति-रिवाज हैं और सबको अपनी मान्यता के अनुसार अपना धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि मैं धर्म के नाम पर विभाजन पैदा करने में विश्वास नहीं करती। मेरा जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ, इसका मतलब यह नहीं कि मैं सिखों, मुस्लिमों या ईसाइयों के धार्मिक कार्यों में हिस्सा नहीं लूंगी। मैं इन कार्यक्रमों में 100 बार हिस्सा लूंगी। अगर आपमें ताकत है तो मुझे रोकें। आरएसएस-भाजपा समर्थित रामनवमी जुलूस का उल्लेख करते हुए बनर्जी ने कहा कि अगर आप बिना अनुमति के हथियार रखते हैं तो कानून इसकी अनुमति नहीं देगा। मैं इस तरह के कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दूंगी।  उन्होंने कहा कि हम विभाजन की राजनीति में शामिल नहीं होते और हम बंगाल में सांप्रदायिक दंगेे बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने खडग़पुर में रामनवमी पर एक कार्यक्रम में तलवार लहरायी थी। उन्होंने कहा कि बगैर अनुमति के कोई भी इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर सकता।     

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Dakhal News 8 April 2017


दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना

मुख्यमंत्री ने किया दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि महान चिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश सरकार गरीब कल्याण एजेण्डा बनाकर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सम्मान से जीने का हक दिलवाने के लिये कृत- संकल्पित है। इसी कड़ी में प्रदेश में गरीब-मजदूरों को पाँच रूपए में भरपेट भोजन देने की महत्वाकांक्षी “दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना” का शुभारंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री आज ग्वालियर में योजना का शुभारंभ कर रहे थे। कार्यक्रम में केन्द्रीय पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह, स्वास्थ्य मंत्री श्री रूस्तम सिंह, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने प्रत्येक गरीब को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है। इसी भावना से सभी जिलों में एक साथ दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना का शुभारंभ सामाजिक सहभागिता से किया जा रहा है। योजना में ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले गरीब मजदूरों को पाँच रूपए में भरपेट भोजन उपलब्ध करवाया जायेगा। गाँव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आवासीय पट्टा और शहरों में रहने वाले बेघर लोगों को आवास बनाकर देने का काम सरकार बहुत तेजी से कर रही है। श्री चौहान ने शिक्षा के क्षेत्र में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि अब सरकार ऐसे सभी छात्र जो 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करेंगे और जो मेडिकल, इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक, लॉ आदि की शिक्षा प्राप्त करेंगे, उनकी फीस भरने का काम सरकार करेगी। इसके लिये बजट में एक हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, जिसे प्रति वर्ष बढ़ाया जायेगा। अगले पाँच वर्ष में इस मद में पाँच हजार करोड़ रूपए तक का प्रावधान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जो बेटा-बेटी विदेश में शिक्षा के लिये जायेंगे, उनकी फीस देने की व्यवस्था भी सरकार करेगी। श्री चौहान ने गरीबों के लिये स्वास्थ्य, रोजगार सहित अन्य क्षेत्र में चलाई जा रहीं जन-हितकारी योजनाओं की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में योजना का संचालन करने वाली वैश्य महासभा को बधाई देते हुए योजना में सहभागी बनने के लिये राज्य सरकार की ओर से आभार व्यक्त किया। केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जन-कल्याण के अनेक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें अब दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना भी जुड़ गयी है।

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Dakhal News 8 April 2017


दीनदयाल रसोई योजना

  सरकार ने शुरू की दीनदयाल रसोई योजना   नगरीय विकास मंत्री  माया सिंह ने कहा है कि दीनदयाल अन्योदय रसोई योजना से न सिर्फ कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध होगा बल्कि हर वर्ग के व्यक्ति को अपने सामाजिक दायित्व निभाने का सुअवसर भी मिलेगा।  'दीनदयाल थाली' 5 रूपये में 4 रोटी, एक सब्जी और एक दाल। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय। लगभग 2 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था। आधुनिक मशीनों से बनेगी रोटी। उचित मूल्य की दुकान के माध्यम से खाद्यान्न की व्यवस्था। नगर निगम द्वारा पानी-बिजली की न:शुल्क व्यवस्था। नगरीय विकास मंत्री  माया सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान की मंशानुसार नगरीय क्षेत्रों में व्यवसाय एवं श्रम कार्य करने वाले गरीबों को आवास व्यवस्था के साथ-साथ भोजन की समुचित व्यवस्था के मद्देनजर दीनदयाल रसोई योजना की शुरूआत की गई है। प्रथम चरण में 7 अप्रैल को 49 जिला मुख्यालय पर एक साथ इस योजना को किया जा रहा है । भिण्ड और उमरिया जिले में विधानसभा उपचुनाव के कारण इस योजना की शुरूआत बाद में की जायेगी। जिला मुख्यालय में न्यूनतम एक स्थान पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ की जायेगी। आवश्यकतानुसार बड़े शहरों में एक से अधिक केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगें। नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि 5 रूपये की थाली में कोई भी व्यक्ति भरपेट भोजन कर सकेगा। थाली में 4 रोटी, एक सब्जी और दाल शामिल होगी। रोजाना पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक लगभग 2 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था होगी। श्रीमती सिंह ने बताया कि योजना की व्यवस्था की मानटरिंग जिला स्तरीय समन्वय एवं अनुश्रवण समिति करेगी। समिति में शासकीय अधिकारियों के अतिरिक्त अनाज व्यापारी संघ तथा सब्जी मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी सदस्य बनाया गया है। रसोई केन्द्रों के लिए गेहूँ एवं चावल एक रूपये प्रति किलो की दर से उचित मूल्य की दुकान के माध्यम से उपलब्ध करवाया जायेगा। पानी तथा बिजली की व्यवस्था नगर निगम द्वारा नि:शुल्क की जायेगी। श्रीमती सिंह ने बताया कि केन्द्रों की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना से राशि उपलब्ध होगी। प्रत्येक केन्द्र के लिए स्थानीय मुख्यालय के राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोला जायेगा।  

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Dakhal News 7 April 2017


पापों के लिए भुगतान

डंपर मामले में सरकार ने दिए हर पेशी पर लाखों रुपये  मध्यप्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के.मिश्रा ने दिल्ली की एक अदालत में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के विरुद्ध वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा लगाये गए एक "मानहानि"  प्रकरण में वकील को दी जाने वाली फीस को लेकर भाजपा पर दोहरे राजनैतिक चरित्र अपनाने का आरोप लगाया है। मिश्रा ने कहा की दिल्ली में भाजपा , केजरीवाल द्वारा उनके वकील राम जेठमलानी को दी जाने वाली फ़ीस को जनता के पैसों व् सरकार के खजाने में डाका बता रही है, जबकि म.प्र. में उन्हीं की पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के खिलाफ म.प्र.उच्च न्यायालय,जबलपुर में लंबित दाण्डिक पुनरीक्षण क्र.1919/2011 रमेश साहू विरुद्ध शिवराजसिंह चौहान के मामले में राज्य सरकार ने दिल्ली के वरिष्ठ वकील उदय ललित को रु.11 लाख प्रति पेशी दिए जाने की शर्त पर पैरवी करने के लिए नियुक्त किया गया था और यह भी सुनिश्चित किया गया था कि यह भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा किया जायेगा।इस सम्बन्ध में विधिवत आदेश म.प्र.शासन वे विधि एवम् विधायी कार्य विभाग ने 9 दिसम्बर,2011 को जारी किये थे। मिश्रा ने केजरीवाल प्रकरण में वकील की फ़ीस को जनता के धन की बर्बादी व् सरकार के खजाने में डाका बताने वाली भाजपा से पूछा है कि   अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार (डम्पर कांड) के आरोप से बचने के लिए शिवराजसिंह द्वारा राज्य सरकार के कोष से खर्च की गई यह बड़ी धनराशि क्या " पवित्र मानव सेवा " को समर्पित थी ? उन्होंने भाजपा को सलाह दी है कि  "जिनके घर खुद कांच के बने हों,उन्हें दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।" इधर दिल्ली में ऐसे ही मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि के एक मुकदमे से जुड़े बिलों को मंजूर कराने के दिल्ली सरकार के कदम को भाजपा ने लोगों के धन की ‘डकैती और लूट’ करार दिया और कहा कि वह ऐसा नहीं होने देगी . केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरोप लगाया कि केजरीवाल को उनके ‘निजी अपराध’ के लिए वित्त मंत्री अरूण जेटली अदालत ले गए और ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक के वकील के बिल को मंजूर करने का दिल्ली सरकार का फैसला सरकार के नियम-कायदों के खिलाफ है . उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, ‘यह अवैध और अनैतिक है . दिल्ली के लोग आपके (केजरीवाल के) पाप के लिए भुगतान क्यों करें ? यह उनके धन की डकैती और लूट है और पूरी तरह अस्वीकार्य है .’ जावड़ेकर ने कहा कि जेटली ने अपनी जेब से 10 लाख रूपए की स्टैंप ड्यूटी का भुगतान किया था और अपने वकीलों के बिल का भी भुगतान करते रहे हैं . उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल की राजनीति दूसरों को बदनाम करने पर टिकी है और लोगों को उनके ‘पापों’ के लिए भुगतान नहीं करना चाहिए . 

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Dakhal News 6 April 2017


prakash javdekar

    मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि के एक मुकदमे से जुड़े बिलों को मंजूर कराने के दिल्ली सरकार के कदम को भाजपा ने लोगों के धन की ‘डकैती और लूट’ करार दिया और कहा कि वह ऐसा नहीं होने देगी . केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरोप लगाया कि केजरीवाल को उनके ‘निजी अपराध’ के लिए वित्त मंत्री अरूण जेटली अदालत ले गए और ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक के वकील के बिल को मंजूर करने का दिल्ली सरकार का फैसला सरकार के नियम-कायदों के खिलाफ है . उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, ‘यह अवैध और अनैतिक है . दिल्ली के लोग आपके (केजरीवाल के) पाप के लिए भुगतान क्यों करें ? यह उनके धन की डकैती और लूट है और पूरी तरह अस्वीकार्य है .’ जावड़ेकर ने कहा कि जेटली ने अपनी जेब से 10 लाख रूपए की स्टैंप ड्यूटी का भुगतान किया था और अपने वकीलों के बिल का भी भुगतान करते रहे हैं . उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल की राजनीति दूसरों को बदनाम करने पर टिकी है और लोगों को उनके ‘पापों’ के लिए भुगतान नहीं करना चाहिए .  खबरों के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने केजरीवाल के वकील (राम जेठमलानी) की ओर से मांगे गए करीब चार करोड़ रूपए के बिल के भुगतान का प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से सलाह मांगी है . जावड़ेकर ने कहा कि केजरीवाल मानहानि के कम से कम सात मुकदमों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में उनसे भुगतान के लिए कहा जाए तो क्या दिल्ली सरकार 100 करोड़ रूपए से ज्यादा का बिल भरेगी . केंद्रीय मंत्री ने ‘आप’ पर आरोप लगाया कि पहले तो उसने ऐसे किसी प्रस्ताव से इनकार किया, लेकिन अब दावा कर रही है कि सरकार इस बिल का भुगतान करना चाहती है क्योंकि मामला मुख्यमंत्री के खिलाफ है .  

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Dakhal News 5 April 2017


abhishek bhargav bjp

  भाजपा नेता का एंटी शराब दल  मध्यप्रदेश  के केबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव ने  शराबबंदी को लेकर अभियान शुरू किया है और बीजेपी सरकार को नींद से जगाने की कोशिस की है ।मंत्री पुत्र भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक भार्गव ने  Facebook  पर लिखा है -जब शराब दुकानों के प्रति प्रदेश की आधी आबादी अर्थात महिलाओं  में इतना आक्रोश है की वे प्रतिदिन अपना विरोध प्रदर्शन कर रही है तब शासन क्यों कुम्भकर्णी नींद सोया हुआ है प्रत्येक छोटे से छोटे मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने वाला प्रशासन क्या इतने बड़े विरोध को नही देख पा रहा  ।  अभिषेक ने लिखा है मुख्यमंत्री  से व्यक्तिगत तौर पर निवेदन है कृपया मध्य प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी शीघ्र लागू करवाने का कष्ट करें ।मध्य प्रदेश की जनता खास करके महिलाये आपको मुख्यमंत्री के तौर पर नही अपने परिवार के सदस्य की तरह देखती है ।आपको हमेशा अपने सुख दुख के साथी की तरह पहचानती है परंतु इतने बड़े मुद्दें पर आपकी ओर से निर्णय न आना उन्हें अचंभे में डालता है ।समय समय पर आपने निश्चित तौर पर शराब खोरी पर लगाम लगाने के लिए साहसिक और लोकप्रिय  निर्णय लिए है परंतु अब वक्त पूर्ण शराब बंदी का निर्णय लेने का है ।मध्यप्रदेश का एक आम नागरिक होने के नाते जो आसपास महिलाओ में शराब के प्रति आक्रोश देख रहा हु उसी के आधार पर सोशल मीडिया के माध्यम से आपको सम्पूर्ण हालात से अवगत करवाना चाहता हूं । राजनीति से हटकर शीघ्र ही पूर्ण शराब बंदी को लेकर तथा हर जगह चल रही अवैध शराब दुकानों (मुझे कहने में कतई परहेज नही है कि प्रशासन की मिली भगत से ) के विरोध में नव रात्रि के पश्चात वृहद आंदोलन शुरू होगा जिसकी शुरुवात स्वयं के गृह नगर गढ़ाकोटा से करूँगा ।युवाओ और मातृ शक्ति को साथ लेकर बनाऊंगा एन्टी शराब दल। हमारी मांग है प्रदेश में लागू हो पूर्ण शराब बंदी ।आशा है हमारे सम्वेदनशील मुख्यमंत्री जी से की वह इस विषय पर विशेष ध्यान देंगे ।

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Dakhal News 4 April 2017


बाघों की मौत मध्यप्रदेश

मप्र बाघों की मौत का गढ़ बनता जा रहा है जहां हर महीने औसत 2 से 3 बाघों की मौत हो रही है। पिछले 15 महीने में 37 बाघों (शावक भी शामिल) की मौत हो चुकी है। इसमें से 75 फीसदी बाघों की मौत करंट लगने, जादू-टोने के लिए शिकार करने, ट्रेन की चपेट में आने और बाघों के बीच आपसी लड़ाई के कारण हुई है। यह आंकड़ा देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। इसके बावजूद बाघों की मौत की घटनाएं थम नहीं रही है। शुक्रवार रात को फिर भोपाल के पास  मिडघाट से बुदनी घाट सेक्शन के बीच ट्रेन की चपेट में आने से एक और बाघ (मादा) की मौत हुई है। उसके पहले जनवरी 2016 से मार्च 2017 तक 36 बाघों की मौत हो चुकी है। मिडघाट-बुदनी सेक्शन में 23 मई 2015 को पहली बार बाघ की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई। उसके बाद से 01 अप्रैल 2017 तक दो बाघ और एक तेंदुए की मौत इसी सेक्शन में ट्रेन की चपेट में आने से हुई। फिर भी कॉरिडोर का काम अटका है, वन विभाग ने जाली लगाने में देरी की। शहडोल, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कान्हा व पेंच टाइगर रिजर्व में एक दर्जन बाघों की मौत करंट लगने से हुई। कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच टाइगर रिजर्व में करीब 10 बाघों की मौत आपसी लड़ाई में हुई। मई-जून 2015 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों का शिकार हुआ। बाघों की हड्डी और खाल दिल्ली व छिंदवाड़ा के नवेगांव थाने से जब्त की। इसी मामले में दिल्ली से एक आरोपी जे तमांग को गिरफ्तार किया। जिसके खिलाफ इंटरपोल ने नोटिस जारी किया। बाघों की मौत के आंकड़े बताते हैं मध्यप्रदेश बाघों की कब्रगाह बन रहा है ,नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के अधिकृत पोर्टल से प्राप्त आंकड़े मध्यप्रदेश के लिए चौकाने वाले हैं।    कहां कितनी मौत (2016)           राज्य                              बाघों की मौत                           मध्यप्रदेश                     31 कर्नाटक                     18 महाराष्ट्र                     16 उत्तराखंड                     12 तमिलनाडू                      07 असम                     06 राजस्थान                     04 केरला                     04 उत्तरप्रदेश                     03 बिहार                     02 नागालैंड                     02 अरूणाचल प्रदेश     01 उड़ीसा                     01 आंध्रप्रदेश                     01   साल 2017 मध्यप्रदेश                    05 ऐसे बढ़ा बाघों की मौत का ग्राफ साल       मौतें 2015 12 2014 15 2013 10 2012 13 2011 06 2010 09 2009 19 इस गंभीर मसले पर मध्यप्रदेश के वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार ने कहा बाघों की प्राकृतिक मौतों पर रोक नहीं लगा सकते। शिकार और आपसी लड़ाई को कम करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। बरखेड़ा-बुदनी के बीच ग्रीन कॉरिडोर के लिए स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने अनुमति दे दी है। सेंट्रल वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पास मामला है आगे और कोशिश की जाएगी कि बाघों की मौत न हो।    

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Dakhal News 2 April 2017


MP में बिजली महंगी

मध्यप्रदेश में बिजली की दरें बढ़ा दी गई हैं ,जिससे गर्मी में उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका लगा है। आम उपभोक्ता से लेकर किसान तक सब इसका शिकार हुए हैं।  मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 2017-18 के लिए बिजली टैरिफ की नई दरें घोषित की है। प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों द्वारा रूपये 32 हजार 073 करोड़ की राजस्व आवश्यकता हेतु याचिका दायर की गई थी एवं टैरिफ के माध्यम से रूपये 4400 करोड की मांग की गई थी। पहली बार ग्रामीण क्षेत्र के अमीटरीकृत कनेक्शनों हेतु टैरिफ में पृथक श्रेणी बनाई गई है, जिससे उन्हें आंकलित खपत के आधार पर दिये जाने वाले देयकों की शिकायतों को समाप्त किया जा सके। अभी वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे अमीटरीकृत कनेक्शन, जिनका संयोजित भार 200 वॉट है, को रूपये 345 का देयक प्रतिमाह जारी हो रहा था, जो अब नई श्रेणी बनने पर रूपये 200 प्रतिमाह हो जावेगा। इसी प्रकार ग्रामीण अमीटरीकृत 200 से 300 वॉट तक के कनेक्शन, को भी रूपये 345 प्रतिमाह के स्थान पर केवल रूपये 300 प्रतिमाह का भुगतान करना होगा।   प्रदेश में 30 यूनिट तक बिजली उपभोग करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 38 लाख है। 31 यूनिट से 50 यूनिट तक के खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 10 लाख है। नियामक आयोग ने इस श्रेणी के उपभोक्‍ताओं की बिजली की दरों में 6.9 प्रतिशत वृद्धि की है। परन्‍तु राज्‍य शासन ने निर्णय लिया है कि अतिरिक्‍त अनुदान देकर इन 48 लाख उपभोक्‍ताओं पर कोई अतिरिक्‍त भार नहीं पड़ने दिया जाये। इस प्रकार अनुसूचित जाति/जनजाति तथा 50 यूनिट तक बिजली का भुगतान करने वाले घरेलू उपभोक्‍ताओं की दरों में कोई वृद्धि नहीं होगी । 50 यूनिट से 300 यूनिट तक की खपत वाले उपभोक्‍ताओं पर 7 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी। 301 यूनिट से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 5 लाख है पर लगभग 3 प्रतिशत का अतिरिक्त भार आयेगा। राज्‍य शासन ने तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में एक समान विद्युत दरें जारी रखने तथा कृषि उपभोक्ताओं को फ्लैट रेट विद्युत प्रदाय जारी रखने की अनुशंसा नियामक आयोग को की थी। टैरिफ आदेश में कृषि पम्पों के लिए विद्युत की दरों में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। राज्‍य शासन ने निर्णय लिया है कि कृषि दरों का कोई अतिरिक्‍त भार किसानों पर न पड़े। फ्लैट रेट योजना जारी रखने के लिये पंप उपभोक्ताओं को पूर्ववत रू. 1400 प्रति हार्सपावर प्रतिवर्ष का भुगतान ही करना होगा। कृषि पम्पों के लिए विद्युत दरों में नियामक आयोग का वृद्धि का कोई भार किसानों पर नहीं पड़ेगा। वर्तमान में राज्य शासन किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के विरूद्ध विद्युत वितरण कंपनियों को लगभग 7500 करोड़ रूपये की सब्सिडी दे रहा है। नये टैरिफ आदेश में कृषि पम्पों के लिए 13 प्रतिशत की टैरिफ वृद्धि के विरूद्ध लगभग 950 करोड़ रूपये की अतिरिक्त सब्सिडी राज्य शासन विद्युत कंपनियों को प्रदान करेगा। इस प्रकार राज्य सरकार का कृषि सब्सिडी भार बढ़कर वर्ष में लगभग 8500 करोड रूपये हो जायेगा तथा वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए जारी नये टैरिफ आदेश से किसानों पर कोई भार नहीं पड़ेगा। उद्योग क्षेत्र की उच्‍च दाब बिजली दरों में लगभग 6.8 प्रतिशत की गई है। परन्‍तु उद्योग को बढ़ावा देने की दृष्टि से निम्‍नलिखित रियायतों का भी प्रावधान किया गया है:- सभी नये उच्च दाब कनेक्शन औद्योगिक, गैर-औद्योगिक, शॉपिंग मॉल एवं पावर इन्टेंशिव उद्योग, जो एच.व्ही.-3 श्रेणी में होंगे, को उनकी पूर्ण खपत पर रूपये 1 प्रति यूनिट या 20 प्रतिशत, जो भी कम हो, की छूट ऊर्जा प्रभारों के लिये अभिलेखित खपत पर दी गई है। एच.व्ही.-3 श्रेणी के सभी उच्च दाब उपभोक्ताओं (औद्योगिक, गैर-औद्योगिक, शॉपिंग मॉल एवं पावर इन्टेंशिव उद्योग) को इन्क्रीमेंटल खपत पर ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट। कैप्टिव विद्युत संयंत्र के उद्योग बिजली वितरण कंपनियों से विद्युत क्रय करने के लिए आकर्षित हों इसके लिए उन्‍हें इन्क्रीमेंटल खपत पर रू. 2 प्रति यूनिट की छूट का प्रावधान किया गया है। यह छूट पांच वर्षों की अवधि के लिये लागू होगी। रेलवे के उच्च दाब कनेक्शनों के लिये भी ऊर्जा प्रभारों में रूपये 2 प्रति यूनिट की छूट 5 वर्ष के लिए प्रदान की गई है। उल्‍लेखनीय है कि विगत वर्ष रेलवे ने वितरण कंपनियों से विद्युत लेना बंद कर दिया जिससे कंपनियों को घाटा उठाना पड़ा। इस छूट से रेलवे को पुन: बिजली देना संभव हो सकेगा ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने के लिए निम्‍न प्रावधान किये गये हैं:- उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिये विद्युत देयक का ऑनलाईन भुगतान करने पर कुल देयक राशि पर 0.5 प्रतिशत की छूट - अधिकतम राशि रू. 1000 के अंतर्गत। ऑनलाईन भुगतान को बढावा देने के लिए सभी निम्न दाब उपभोक्ताओं को ऑनलाईन भुगतान करने पर 0.5 प्रतिशत की छूट - न्यूनतम राशि रू. 5 तथा अधिकतम राशि रू. 20 के अंतर्गत तक लागू होगी। घरेलू तथा गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं द्वारा प्री-पेड मीटर लेने पर ऊर्जा प्रभार में दी जाने वाली छूट 5 पैसे प्रति यूनिट से बढ़ाकर 20 पैसे प्रति यूनिट कर दी गई है।    इसके अलावा वृद्धावस्था आवास गृहों, डे-केयर सेंटर, रेसक्यू सेंटर तथा शासन एवं धर्मस्व न्यास द्वारा संचालित अनाथालयों को अब उच्‍च दाब श्रेणी 6.2 में शामिल कर लिया गया है ताकि उन्‍हें सस्‍ती बिजली मिल सके।  

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Dakhal News 2 April 2017


akshay kumar

  खरगोन जिले के कसरावद विकासखण्ड के ग्राम रेगवा में खरगोन जिले को ओडीएफ घोषित किये जाने का कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी शामिल हुए। अक्षय ने इस संबंध में आयोजित कार्यक्रम और अपनी भागीदारी को लेकर ट्वीट भी किया। अक्षय कुमार स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बन रहे उन्नत तकनीक के शौचालयों के अवलोकन के लिए इंदौर संभाग के खरगोन जिले के ग्राम रेगवा भी पहुंचे । इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री तोमर तथा संभाग आयुक्त संजय दुबे सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधिगण भी विशेष रूप से मौजूद थे । फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने भी राधेश्याम गोबरू के घर बने शौचालय में निर्मित सोन खाद निकाली। अभिनेता अक्षय कुमार ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर देश को स्वच्छ और स्वस्थ देखना है, तो इसकी शुरूआत हमे अपने घर परिवार से करनी होगी। देश के लिए यह बेहद जरूरी है कि अपने घर को स्वच्छ रखा जाए। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि घरों में शौचालय बनाना और शौच करना कोई बुरी बात नहीं है और न ही कोई गलत है।  

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Dakhal News 1 April 2017


GST से ई-कॉमर्स

जीएसटी देश में तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स कारोबार की राह आसान करेगा। इसके लागू होने पर टैक्सेशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े तमाम मुद्दों का हल निकालने में मदद मिलेगी। एक अध्ययन में यह बात कही गई है। सीआईआई-डेलॉयट ने देश में ई-कॉमर्स उद्योग पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि यह तेजी से बढ़ा है, लेकिन कई चुनौतियां सामने आई हैं। इनमें टैक्सेशन, लॉजिस्टिक्स, पेमेंट, इंटरनेट की पहुंच और कुशल श्रम शक्ति की समस्याएं प्रमुख हैं। टैक्सेशन का उदाहरण देते हुए कहा गया कि एकसमान टैक्स स्ट्रक्चर नहीं होने की वजह से देश में वस्तुओं के मुक्त प्रवाह में बाधा आती है। दोहरा-कराधान जैसे मुद्दे भी इसी का नतीजा हैं। हालांकि, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से एकसमान टैक्स स्ट्रक्चर के जरिये ऐसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। जीएसटी में ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन के लिए स्पष्ट नियम और इन नियमों को बनाने में सलाहकार दृष्टिकोण सरकार और ई-कॉमर्स कंपनियों दोनों के पक्ष में होगा। रिपोर्ट यह भी कहती है कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों का समय से और प्रभावी क्रियान्वयन ई-कॉमर्स वातावरण को समर्थन देगा। इससे ग्रामीण इंटनरेट पहुंच की दिक्कतों और कुशल श्रम शक्ति से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में इस सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में कई उपाय सुझाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि दस्तावेज संबंधी जरूरतों को आसान किया जाना चाहिए। पॉलिसी के साथ प्रशासन के मामले में अप्रत्यक्ष कर का माहौल भी उद्योग की क्षमता का लाभ उठाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। इनसे जुड़े कानूनों को विकसित और दोबारा तैयार करने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य और स्थानीय निकायों को सुनिश्चित करना होगा कि व्यापक कर को एक जैसा समझा जाए। साथ ही इसका क्रियान्वयन सेक्टर की ग्रोथ में मदद करे। जीएसटी कानूनों को विक्रेता की कर देनदारी का निर्धारण करने के लिए ट्रांजैक्शन की वास्तविक प्रकृति को ध्यान में रखना चाहिए।  

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Dakhal News 31 March 2017


तीन तलाक मामला संविधान पीठ को

  सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक का मामला संविधान पीठ को भेज दिया है। मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की पीठ ने संबंधित मामले को संविधान पीठ को सौंप दिया। 11 मई से संविधान पीठ तीन तलाक सुनवाई शुरू करेगी। संविधान पीठ लगातार चार दिनों तक इस मामले पर दोनों पक्ष को सुनेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्ष चार हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करें। इससे पहले 27 मार्च को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मुसलमानों में प्रचलित तीन तलाक, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह की प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिकाएं विचारयोग्य नहीं हैं क्योंकि ये मुद्दे न्यायपालिका के दायरे में नहीं आते हैं। बोर्ड ने कहा कि इस्लामी कानून, जिसकी बुनियाद अनिवार्य तौर पर पवित्र कुरान एवं उस पर आधारित सूत्रों पर पड़ी है, की वैधता संविधान के खास प्रावधानों पर परखी नहीं जा सकती है। इनकी संवैधानिक व्याख्या जबतक अपरिहार्य न हो जाए, तबतक उसकी दिशा में आगे बढ़ने से न्यायिक संयम बरतने की जरूरत है। उसने कहा कि याचिकाओं में उठाये गये मुद्दे विधायी दायरे में आते हैं, और चूंकि तलाक निजी प्रकृति का मुद्दा है अतएव उसे मौलिक अधिकारों के तहत लाकर लागू नहीं किया जा सकता। एआईएमपीएलबी ने शीर्ष अदालत में अपने लिखित हलफनामे में कहा, ‘शुरू में यह स्पष्ट किया जाता है कि वर्तमान याचिकाएं विचारयोग्य नहीं हैं क्योंकि याचिकाकर्ता निजी पक्षों के खिलाफ मौलिक अधिकारों को लागू करने की मांग करते हैं। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि 14,15 और 21 अनुच्छेदों के तहत गारंटित संरक्षण की उपलब्धता की मंशा विधायिका और कार्यपालिका के विरूद्ध है न कि निजी व्यक्तियों के विरुद्ध है।’ उसने कहा, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता न्यायिक आदेश की मांग कर हे हैं जो बिल्कुल अनुच्छेद 32 के दायरे के बाहर है। निजी अधिकारों को संविधान के अनुच्छेद 32 (1) के तहत व्यक्तिगत नागरिकों के विरूद्ध लागू नहीं किया जा सकता है।    

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Dakhal News 30 March 2017


अयोध्या मसला

भरतचन्द्र नायक विश्व के लब्ध प्रतिष्ठित इतिहासकार मौलाना आजाद स्मृति व्याख्यान माला में भाग लेने आये थे। तब उन्होनें आक्रांताओं द्वारा विजित देशों में की गयी ज्यादियतों का हवाला देते हुए कहा था कि आक्रांता विजित देश में अपने समर्थन में भवन प्रासाद स्मृति के रूप में बनाते रहे है। लेकिन इन स्मारकों का उद्देश्य मजहबी नहीं सियासी होता आया है। इसलिए साम्प्रदायिक भावुकता से इन स्मारकों को देखना अपने आपको धोखा देना है। विश्व इतिहासकार अर्नोल्ड टोनवी ने बताया कि 1614 में रूस ने पोलेंड के वारसा पर अपना अधिकार जमा लिया था। रूस ने अपनी विजयी महत्वाकांक्षा में ईस्टर्न आर्थोडाॅक्स क्रिश्चियन केथेडूल प्रमुख स्थान पर बना डाला। रूस का इसके पीछे उद्देश्य यही था कि पोलिस में यह भावना बैठ जाये कि उनका असल मालिक रूस है। बाद में 1918 में पोलेंड की आजादी के बाद केथेडूल को जमीदोंज करने में पोलिस ने वक्त नहीं लगाया। उन्होनें भारत सरकार की इस बात के लिए खुले मन से प्रशंसा की कि उसने औरंगजेब की मसजिदों को सम्मान के साथ वजूद में रहने दिया। उलटे भारत सरकार पुरातत्व विभाग मुगलकालीन स्मारकों का संधारण करता है, जबकि स्मारकों का उद्देश्य सिर्फ आक्रान्ता, विदेश से भारत आये आक्रांताओं का वर्चस्व याद दिलाना, भारतीय अस्मिता को आहत करना है। अर्नोल्ड टोनवी ने भारतीयों की सहिष्णुता को विश्व में सर्वोच्च निरूपित किया है। ऐसे में अयोध्या में राम मंदिर को ढहाये जाने और विध्वंस में बचे अवशेषों को जोड़कर बाबर द्वारा मजिस्द बनाये जाने का मंतव्य समझना कठिन नहीं है। ऐसे में बरसों से अदालत में चल रहे इस विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस मसले को यदि हिन्दू-मुस्लिम के बीच सुलह सफाई से हल करने को कहा है तो यह अदालत की दूरदर्शितापूर्ण परामर्ष है। सर्वोच्च न्यायालय ने यहां पर सदाशयता बतायी कि जरूरत पड़ने पर न्यायालय मध्यस्थता करने को भी तैयार है। मुख्य न्यायाधीश ने माननीय न्यायाधीश की सेवाएं देने का प्रस्ताव किया है।  अध्योध्या में राम मंदिर विवाद पर तकनीकी रूप से स्पष्ट है कि आक्रान्ता बाबर ने राम मंदिर के विशाल ढांचे को ध्वस्त किया और मसजिद का निर्माण करा दिया, जिसे बाद में बाबरी मसजिद कहा गया और कार सेवा करते हुए आवेश में कार सेवकों ने ढांचा जमीदोंज कर दिया। इस विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि रामलला जहां तम्बू के नीचे विराजमान है, उस भूमि पर मंदिर के स्थान पर मंदिर बनाया जाये। एक तिहायी भूमि अखाड़े को शेष आवेदक मुस्लिम समाज के हक में जायेगी। लेकिन फैसला माना नही गया और सर्वोच्च न्यायालय में विवाद पहुंचा जहां सर्वोच्च न्यायालय ने सुलह करने की सलाह दी है। अगर इस सद्परामर्श पर भी असहमति जताते हुए कुछ मुस्लिम संगठन मामले पर न्यायालय के निर्देश की अवमानना करते हुए जिद पर अड़े है। न्यायालय के आदेश के समर्थन में कुछ अल्पसंख्यक संगठन आगे भी आये है। लेकिन उनकी आवाज कमजोर मानी जा रही है। मजे की बात यह है कि अयोध्या में बाबरी ढांचा ढहाये जाने के बाद अदालत में जिस बुजुर्ग मुस्लिम हाशिम अंसारी ने याचिका दर्ज की थी, उसका बाद में हृदय परिवर्तन हुआ और उसने सुलह सफायी की बात करते हुए इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि मजहब के नाम पर आक्रामक तेवर अपनाने वाले लोग खाते-पीते लड़ रहे है और आराध्य रामलला एक तंबू में ऐसे मौसम की मार झेल रहे है कि उन्हें भोग लगना भी मयस्सर नहीं है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज जब परस्पर संवाद का अवसर मिला है, हासिम अंसारी जन्नत सिधार चुके है, मुस्लिमों के बीच ऐसे नेक इंसानों की कमी है, अहंकार और तर्क परोसा जा रहा है। वे भूलते है कि राममंदिर विवाद आस्था का विषय है, यह जायदाद के बंटवारे का मामला नहीं है। आस्था में तर्क कम हृदय की विशालता, संवेदशनीलता अपेक्षित होती है।  राम जन्मभूमि जमीन के विवाद में उच्च न्यायालय अपना फैसला पहले ही दे चुका है, जिसे मान्य नहीं किया गया। अस्मिता से जुड़े मामले को दीवानी विवाद मानते हुए जो लोग अंतिम रूप से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की बात कहने पर अड़े है, वे मुगालते में है कि विवाद में उनके पक्ष में ही निर्णय सुनाया जायेगा। कुछ लोग देश की न्याय व्यवस्था पर इस मामले के निर्णय कराने का दायित्व थोप रहे है, उनमें दूरदर्शितापूर्ण सोच की आस्था केन्द्रित भावना और न्यायालय के प्रति सम्मान की कमी है। कमी इस बात से जाहिर हो जाती है कि वे अपनी महत्वाकांक्षा के मोह में न्यायपालिका की मर्यादा नहीं समझ पा रहे है, वास्तव में सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश खेहर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का निर्णय एक आदर्श है जो दोनों पक्षों को सम्मान देता है और उनकी सदाशयता पर विश्वास करता है। राष्ट्र में समरसता का स्थायी भाव जगाता है। आत्म परीक्षण का संकेत करता है। आज समस्या यह है कि भावनात्मक विवाद न्यायालय की देहलीज पर पहुंचते है और जब लंबे खिंचने के बाद उन पर अदालत का निर्णय आता है तो सरकारें निर्णय को अमल में लाने में अपने को असमर्थ पाती है। दुनिया की महाशक्ति अमेरिका भी ऐसे हालात से गुजरा है। इसलिए भारत को सबक लेने की आवश्यकता है। अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय शक्तिमान है और अमेरिकी न्याय व्यवस्था हर मामले में हमारी व्यवस्था से परिपक्व और शासन व्यवस्था साधन संपन्न है। फिर भी 1930 में जब एक मामले पर निर्णय आया तो अमेरिका प्रशासन के हाथ-पैर फूल गये। तत्कालीन राष्ट्रपति रूजवेल्ट को कहना पड़ा था कि निर्णय का अनुपालन भी सर्वोच्च न्यायालय ही करे, सरकार सक्षम नहीं है। हमें भारतीय न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और न्याय की अस्मिता को उस दिशा में धकेलना बुद्धिमानी नहीं कही जा सकती। देश में सर्वधर्म समभाव से सभी जी रहे है। उन्हें भावनात्मक अतिरेक में धकेलना बुद्धिमानी नहीं है।  परस्पर विश्वास जीतकर ले-देकर इस समस्या का समाधान कर आने वाली पीढ़ी को सद्भाव से जीने, आजाद मुल्क की तरह बरताव करने, राष्ट्र की अस्मिता को कायम रखने का संदेश देना है। इसलिए अहंकार और जिद् पर अड़े रहने का यह वक्त नहीं है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की हम सभी संतान है, हिन्दु और मुसलमान, क्योंकि जो भारत में जन्मा है उसके आदिपुरूष श्रीराम ही थे। धर्म परिवर्तन एक आकस्मिता थी जो दंड के भय, लालच और प्रलोभन से विवशता बनी। लेकिन धर्म परिवर्तन मात्र से पुरखे तो नहीं बदल जाते। इस बात पर हमें गौरव भी महसूस करना है कि भारत ही हमारा वतन है और श्रीराम हमारे आदर्श पूर्वज है। राम मंदिर अयोध्या का हल वार्तालाप से ही निकलेगा। सर्वोच्च न्यायालय को तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के समय राष्ट्रपति जी ने कहा था कि वे समस्या का समाधान बतावें। तब सर्वोच्च न्यायलय ने दूरदर्शितापूर्ण उत्तर दिया था कि यह तो भावना का ज्वार है, इसे अपने ढंग से शांत होने दीजिये। एक कौम के रूप में हमें संकेत है कि आस्था में दखल देने के बजाय भाईचारा और बढ़प्पन का परिचय दें