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klpesh yagnik

  एक बड़े हिंदी अखबार का प्रधान संपादक रात साढ़े दस बजे अपने ही न्यूज रूम में कोलेप्स कर जाता है. महज 55 साल की उम्र में. यह महज सहानुभूति और सांत्वना व्यक्त करने वाली खबर नहीं है. यह खबर कहीं अधिक बड़ी है. यह एक सवाल है कि क्या हमारा न्यूजरूम पत्रकारों की जान लेने लगा है. अखबारों में काम करने वाले हमारे ज्यादातर मित्र इस बात से इत्तेफाक रखते होंगे कि पिछले कुछ सालों में न्यूजरूम का प्रेशर लगातार बढ़ रहा है. सीनियर लेवल के लोग लगातार प्रेशर में काम कर रहे हैं. अखबार में होने वाली एक चूक दिन भर के मूड का भट्ठा बैठा देती है. डांट-डपट का सिलसिला जो टॉप लेवल से शुरू होता है वह नीचे तक रिसता रहता है. जो अखबार जितना प्रोफेशनल है वहां यह तनाव उतना ही अधिक है.   और यह चूक कोई पत्रकारिता से संबंधित चूक नहीं होती. मुमकिन है आपने बहुत अच्छी खबर लगायी हो और उसकी वजह से सरकार के लोग आपके अखबार से नाराज हो जायें और यह तनाव का सबब बन जाये. क्योंकि सरकार के नाराज होने का मतलब है, विज्ञापन का फ्लो एक झटके में बंद हो जाना. यह तनाव इसलिए भी हो सकता है कि आपके कोई दो साथी आपस में झगड़ बैठे हों और उसे सुलझाने की जिम्मेदारी आपकी हो.   यह इसलिए भी हो सकता है कि आप ही सनक में आकर किसी पटना के पत्रकार का तबादला सूरत कर दें और वह पत्रकार भरे दफ्तर में आपसे गाली-गलौज या मारपीट कर बैठे. इसलिए भी कि प्रसार विभाग घटती बिक्री का खामियाजा संपादकीय विभाग पर फोड़ दे और आप जवाब देते रहें. यह इसलिए भी सकता है कि आपके बॉस आपसे किसी मंत्री का फेवर चाहते हों और आप ऐसा काम करने से बचते हों. यह इसलिए भी हो सकता है कि बिहार आया आपका बॉस चाहता हो कि आप उसके लिए कहीं से दारू की एक बोतल जुगाड़ दें. और कुछ तो परमानेंट किस्म के तनाव होते हैं, आप टॉप पर हैं तो आपके दस किस्म के दुश्मन होते हैं, आप हमेशा खतरे की जद में रहते हैं. वे आपके लिए गड्ढ़ा खोदने में जुटे रहते हैं, आप उनके लिए. यह सब ऐसा ही है जैसा किसी भी कॉरपोरेट कंपनी में होता है. यह सब इसलिए लिख रहा हूं कि जो पत्रकार नहीं हैं, वे इस दुनिया को समझें. अब पत्रकार पत्रकारिता के, खबर लिखने के और किसी को अपनी खबर से नाराज करने के दबाव में कम है. उस पर ज्यादा दबाव मैनेजेरियल किस्म के हैं. और हमारा न्यूजरूम इन दबावों की वजह से कत्लगाह बनता जा रहा है. कल्पेश जी की मौत कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी न्यूज रूम में पत्रकारों को हार्ट अटैक आये हैं और उनकी जान चली गयी है. इनमें संपादक और न्यूज एडिटर किस्म के लोग भी हैं. भड़ास डॉट कॉम जैसे मंचों का शुक्रिया कि ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं. वरना इन मसलों पर बात भी कौन करता.   और एक प्रधान संपादक की या किसी पत्रकार की न्यूज रूम में मौत को ही न देखें. आप न्यूजरूम में काम करने वाले हमारे साथियों का हेल्थ प्रोफाइल चेक करें. अगर किसी न्यूज में रूम में 50 लोग काम करते हैं तो उनमें 30 जरूर हाई ब्लड प्रेशर का शिकार होगा और 10 से अधिक शुगर के मरीज बन चुके होंगे. इसी तरह स्पोंडेलाइटिस, किडनी, लिवर, गॉल ब्लाडर से जुड़ी परेशानियां यह आम है. हम रोज अपने साथियों को इनसे जूझते हुए देखते हैं और इसी प्रक्रिया में हमारा कोई साथी एक रोज अचानक विदा ले लेता है. फिर हम ऑर्बिच्युरी लिखते रह जाते हैं. दरअसल उदारीकरण की शुरुआत के साथ ही टाइम्स ऑफ इंडिया के समीर जैन ने भारतीय पत्रकारिता का कल्चर ही बदल दिया. उसके बाद अखबार एक आंदोलन नहीं, एक उत्पाद बनने लगा. उत्पाद बनते ही संपादक सुपर वाइजर की भूमिका में आ गया. वह खबरों से कम अखबार को रसीला बनाने की कोशिश में अधिक जुट गया. साथ ही यह प्रेशर भी कि सरकार के साथ-साथ हर बड़े विज्ञापनदाता को भी खुश रखना संपादक नामक पदाधिकारी की ही जिम्मेदारी बन गयी. जिलों और प्रखंडों तक फैली उसकी टीम विज्ञापन और प्रसार के मसले पर भी काम करने लगी, लिहाजा उसे भी इसमें शामिल होना पड़ा. फिर कंपनी की जायज नाजायज ख्वाहिशें जो सरकार से जुड़ी होती हैं, वह भी संपादक को ही करना है. यह साधारण दबाव नहीं है. मैंने अपने संपादक साथियों को देखा है, सुबह पांच बजे ही फोन आने शुरू हो जाते हैं कि फलां सेंटर पर अखबार समय से नहीं पहुंचा. आठ से नौ बजे तक यही झमेला रहता है. उसका बाद खबरों की मिसिंग. आज आगे रहे या पिट गये. फिर 11 बजे मीटिंग, वहां पत्रकारों की क्लास लेना और सीनियर्स को रिपोर्ट करना. फिर को स्पेशल प्लान, फिर एक या डेढ़ बजे घर गये दो घंटे आराम करके फिर दफ्तर वापस. कई संपादक फिर रात के बारह बजे घर लौटते हैं. कुछ समझदार हैं जो दस बजे लौट जाते हैं, वे भी आखिरी एडीशन छूटने तक घर में रहने के बावजूद जगे रहते हैं. टीवी और नेट पर नजर रहती है कि कहीं कोई बड़ी घटना तो नहीं हो गयी. ऑफिस से पन्ने बन बन कर वाट्सएप पर उनके पास भेजे जाते हैं. पहले दिन भर फोन घनघनाता था. अब इसकी जगह वाट्सएप ने ले ली है. मगर वाट्सएप से चीजें आसान होने के बदले और जटिल हो गयी हैं. वाट्सएप ग्रुप में पचास लोग हैं. उनके अनावश्यक झगड़े भी आपका अटेंशन खींचते हैं. आप उसमें उलझे रहते हैं. इसके अलावा आप संपादक बनते ही कई लोगों की निगाह में आ जाते हैं. हर कोई सोचता है कि आप मोटा माल बना रहे हैं, फिर आपके परिचित पत्रकारों को लगता है कि आप उन्हें आसानी से बेहतर नौकरी दे सकते हैं. मतलब आपको चैन नहीं हैं. यह गणेश शंकर विद्यार्थी या प्रभाष जोशी वाली संपादक की कुरसी नहीं है, जहां आप अपने विचारों से अपने अखबार और समाज को समृद्ध करते हैं. आज संपादकों की दुनिया बिल्कुल अलग है. आपको लिखना-पढ़ना छोड़कर तमाम किस्म के प्रबंधकीय काम में जुटना है. तनाव की जलती भट्ठी में खुद को झोंक देना है. जाहिर है कि ऐसे में ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं. मगर सवाल यह है कि क्या मीडिया कंपनियों के मालिकानों की निगाह में यह बात है कि आपकी धनलिप्सा ने हमारे न्यूजरूम को कत्लगाह बना दिया है? क्या वे सोचते हैं कि इस स्थिति में कोई बदलाव होना चाहिए. अगर नहीं तो जैसे मोरचे पर फौजी शहीद होते हैं, वैसे न्यूजरूम में संपादक इसी तरह मरते रहेंगे। [बिहार के वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र की एफबी वॉल से]

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Dakhal News 17 July 2018


नरोत्तम मिश्रा- बुंदेलखंड बुलेटिन

 जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया में  दैनिक 'बुंदेलखंड बुलेटिन' समाचार पत्र के मध्यप्रदेश संस्करण का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों का प्रमुख कार्य जनता की आवाज को सरकार तक तथा सरकार की आवाज को जनता तक पहुंचाना है। इस दिशा में बुंदेलखंड बुलेटिन समाचार पत्र खरा उतरेगा, ऐसी मैं कामना करता हूँ। उन्होने कहा कि दतिया में विकास की दशा और दिशा दोनों बदली है, चौतरफा विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया कर्मी बदलते हुए दतिया के साक्षी बनें। इस अवसर पर समाचार पत्र के सम्पादक श्री पुरूषोत्तम नारायण श्रीवास्तव, विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

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Dakhal News 16 July 2018


anurag upadhyay

मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल  ने भोपाल में चर्चित पत्रकार अनुराग उपाध्याय को मैन ऑफ़ मीडिया के रूप में सम्मानित किया। जनपरिषद के 29 वे स्थापना दिवस समारोह में 2017-18  में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए अनुराग उपाध्याय को यह सम्मान दिया गया।  पत्रकार अनुराग उपाध्याय ने इस साल एक सर्जरी के 14 घंटे बाद अस्पताल के बेड से अपने पॉपुलर हेडलाइन शो को होस्ट कर एक इतिहास रच दिया। अनुराग से पहले किसी भी ऐंकर ने अस्पताल के पलंग से शो होस्ट नहीं किया। अस्पताल से पहले दिन लोकमत समाचार के वरिष्ठ पत्रकार लेखक शिवाअनुराग पटेरिया ,दूसरे दिन दैनिक भास्कर के राहुल शर्मा और तीसरे दिन दैनिक जागरण के स्थानीय सम्पादक मृगेंद्र सिंह लाइव शो में अनुराग के साथ रहे। हेडलाइन शो और बेबाक़ बात अनुराग के फेमस शो हैं एक मेजर एक्सीडेन्ट के बाद अनुराग का पैर जांघ के पास से टूट गया ,बड़ी सर्जरी के बाद अनुराग ठीक हुए और काम पर लौटे लेकिन पैर में लगी रॉड ,प्लेटें,और नट से होने वाली तकलीफ से निजात पाने के लिये उन्होंने 20 जून 2018 को फिर सर्जरी करवाई ,इससे पहले सुबह 10:30 बजे अपना प्रोग्राम हेडलाइन शो लाइव प्रजेंट किया...शाम को ऑपरेशन के बाद 21 जून 2018 की सुबह 10:30 बजे अनुराग टीवी स्क्रीन पर अस्पताल के icu से हेडलाइन शो प्रस्तुत करते नज़र आए। टीवी  पत्रकारिता की इतिहास में ऐसा इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ ,एक पत्रकार के हौसले के सामने हर चुनौती बहुत छोटी नजर आई। अनुराग के हौंसले को जनपरिषद ने मैन ऑफ़ मीडिया के रूप में सम्मानित किया।  जनपरिषद के समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि समाज में ऐसे ढेरों लोग हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, लेकिन संस्थाएं उनको पूछती तक नहीं हैं। राज्यपाल का कहना था कि प्रदेश के जिलों, कस्बों और गांवों में कई ऐसी महिलाएं और युवा हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, महिला सशक्तिकरण आदि पर उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। संस्थाओं का कर्तव्य है कि वे ऐसी प्रतिभाओं का खोजें और उनका सम्मान कर उनके कार्य को भी प्रोत्साहित करें। राज्यपाल आनंदी बेन ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सबसे अधिक काम करने की जरूरत है। पूरी दुनिया ग्लोबल वर्मिंग की समस्या से जूझ रही है।  इस मौके पर मध्यप्रदेश के  पूर्व डीजीपी डीपी खन्ना की किताब 'इतिहास पुनःपुनः' का विमोचन राज्यपाल सहित अन्य अतिथियों ने किया। इसके पूर्व समारोह के प्रारंभ में जनपरिषद के अध्यक्ष और पूर्व पुलिस महानिदेशक एनके त्रिपाठी ने अतिथियों को स्वागत किया। प्रतिवेदन संस्था के उपाध्यक्ष और होमगार्ड के महानिदेशक महान भारत सागर और मेजर जनरल (पूर्व) पीएन त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया। समारोह में पुलिस महानिदेशक ऋषिकुमार शुक्ला, ब्यूरो ऑफ आउट रीच कम्यूनिकेशन (भारत सरकार) के डीजी अनिल सक्सेना का भी सम्मान किया गया।   

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Dakhal News 15 July 2018


गोविन्द न्यूज़ 24 छोड़ टाइम्स नाउ के साथ

 आखिरकार मध्य प्रदेश में अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ  का 2 साल का सूखा खत्म और चैनल को मिल गया नया ब्यूरो...! हालांकि 2 साल पहले Times Now का भोपाल ब्यूरो खाली होने के बाद से ही दर्जनों पत्रकार भोपाल से दिल्ली तक और दिल्ली से दिल्ली तक भी , जमकर हाथ-पैर पटक रहे थे...लेकिन बाज़ी मारी 4 साल पहले News 24 ब्यूरो बनकर दिल्ली से भोपाल आये गोविंद प्रताप गुर्जर ने...गोविन्द  ने दिल्ली से आते ही न्यूज़-24 के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जमकर खबरदारी भी की और इस दौरान गोविंद के कार्यकाल में बारी-बारी से MP/CG में 2 भव्य कॉन्क्लेव भी हुए...इसका इनाम भी भाई को मिला...जो अब वो Times Now जैसे बड़े ब्रांड में ब्यूरो की ज़िम्मेदारी संभालने जा रहे हैं...! कह सकते हैं देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर Times Now ने इस फैसले के लिए भले ही 2 साल का लंबा वक्त लिया हो लेकिन बताते हैं कि दिल्ली-मुम्बई में बैठी Times Now की पूरी लीडिंग टीम ने गोविंद भाई को खूब ठोक-बजाकर परखा और उसके बाद ही फैसला लिया गया..! खैर MP/CG में चुनाव से ठीक पहले Times Now ने तो खाली स्थान भर दिया लेकिन News 24 के लिए बने खाली स्थान में कौन सा विकल्प चुना जाएगा ये जल्द ही तय होगा...!   

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Dakhal News 15 July 2018


नवेद शिकोह

  नवेद शिकोह डीएवीपी के खिलाफ कोर्ट जायेगा ‘अखबार बचाओ मंच’, पहले राजनीतिक दलों से मांगों फिर अखबारों से मांगना हिसाब! अस्तित्व बचाने की आखिरी कोशिश में ‘अखबार बचाओ मंच’ न्यायालय की शरण में जायेगा। मंच ये तर्क रखेगा कि जब राजनीतिक दल अपने चंदे का हिसाब और टैक्स नहीं देते तो फिर अखबारों पर एक-एक पैसे का हिसाब और नये-नये टैक्स क्यों थोपे जा रहे हैं। दरअसल दो-तीन महीने बाद पूरे देश के अखबारों का नवीनीकरण होना है। जिसके लिये डीएवीपी द्वारा एक-एक कागज और पाई-पाई का हिसाब मांग लेने से देश के 95%अखबार नवीनीकरण नहीं करा पायेंगे। अखबार बचाओ मंच का कहना है कि अखबारों से संबधित सरकार की पालिसी के खिलाफ डीएवीपी मनमाने ढंग से अखबारों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। सरकार की विज्ञापन नीति के हिसाब से एक करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले अखबारों को बैलेंस शीट देना अनिवार्य है। जबकि डीएवीपी ने बीस लाख के ऊपर के टर्नओवर वाले अखबारों के लिए बैलेंस शीट अनिवार्य कर दी है। पूरा मामला जानिए :- शायद ही कोइ ऐसा व्यवसाय होगा जिसमे कोई manipulation न होता हो , उसी तरह नियमों और कानूनों को देखते हुए देश के 99% मान्यता प्राप्त अखबारों को भी प्रसार संख्या में manipulation करना पड़ता है। बड़े-बड़े ब्रांड अखबार भी बीस हजार कापी को दो लाख प्रसार बताने पर मजबूर है। इस झूठ की मंडी की जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियां भी हैं। यदि कोई अपने अखबार का वास्तविक दो हजार के अंदर का प्रसार बताता है तो उसे डीएवीपी से विज्ञापन की सरकारी दरें नहीं मिलती। और यदि दो हजार से पंद्रह हजार तक के प्रसार का दावा करता है तो उसे लघु समाचार की श्रेणी में रखा जाता है। लघु श्रेणी की विज्ञापन दर इतनी कम होती हैं कि इन दरों से कम संसाधनों वाला अखबार भी अपना बेसिक खर्च भी नहीं निकाल सकता है। यूपी सहित देश के बहुत सारे राज्यों में कम प्रसार वाले अखबारों के पत्रकारों को राज्य मुख्यालय की मान्यता भी नहीं मिलती। शायद राज्य सरकारों का मानना है कि कम प्रसार वाले अखबारों में राज्य मुख्यालय यानी प्रदेश स्तर की खबरें नहीं छपतीं हैं। सरकारों की इन गलत नीतियों के कारण भी प्रकाशक अपना प्रसार बढ़ा कर प्रस्तुत करता है। अब ये झूठ देश के करीब 95% अखबारों को ले डूबेगा। और देश के लाखों अखबार कर्मी और पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे। यानी सरकारी नीतियों और प्रकाशकों के टकराव की इस चक्की में आम अखबार कर्मी/पत्रकार पिस जायेंगे। क्योंकि अब बताये गये प्रसार के हिसाब से करोड़ों की राशि के कागज की खरीद और अन्य प्रोडक्शन कास्ट का हिसाब दिये बिना डीएवीपी अखबारों का नवीनीकरण नहीं करेगा। अखबारी कागज पर जीएसटी होने के कारण अब तीन का तेरह बताना संभव नहीं है। यही कारण है कि अखबारी कागज पर से जीएसटी हटाने की मांग को लेकर प्रकाशकों, अखबार कर्मियों और पत्रकारों ने खूब संघर्ष किया। सरकार के नुमाइंदों को दर्जनों बार ज्ञापन दिये। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक धरना-प्रदर्शन किये। वित्त मंत्री से लेकर पीएमओ और जीएसटी कौंसिल से लेकर विपक्षी नेता राहुल गांधी तक फरियाद की। फिर भी हासिल कुछ नहीं हुआ। डीएवीपी ने अखबारों की नयी मान्यता के आवेदन पत्र में अखबारों से एक एक पैसे का पक्का हिसाब मांगा है। यानी कागज की जीएसटी से लेकर बैंक स्टेटमेंट मांग कर ये स्पष्ट कर दिया है कि तीन महीने बाद नवीनीकरण के लिए देशभर के सभी अखबारों से ऐसे ही हिसाब मांगा जायेगा। और इस तरह का हिसाब देशभर के 95%अखबार नहीं दे सकेंगे। इस संकट से लड़ने के लिए पत्रकार संगठन एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं। इन संगठनों का मानना है कि अखबार बंद होने से प्रकाशक तो हंसी-खुशी अखबार बंद करके किसी दूसरे धंधे में आ जायेंगे लेकिन देश के लाखों अखबार कर्मी/पत्रकारों के पास रोजगार का दूसरा विकल्प नहीं होगा। इस बार पत्रकार संगठन सरकार से पहले तो ये मांग करेंगे कि अखबारों के कम और वास्तविक प्रसार को सरकारी विज्ञापनों की इतनी दरें मिल जायें कि कम संसाधनों का बेसिक खर्च निकल आये। दूसरी महत्वपूर्ण मांग ये होगी कि कम प्रसार वाले अखबारों के पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की प्रेस मान्यता बरकरार रहे। दस लाख से कम कुल वार्षिक विज्ञापन पाने वालों से डीएवीपी आय-व्यय का हिसाब ना मांगे। कम संसाधनों, कम आमदनी और कम विज्ञापन पाने वाले इन अखबारों को जीएसटी से मुक्त किया जाये। अखबारों को इन संकटों से बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा पत्रकार संगठनों का साझा मंच ‘अखबार बचाओ मंच’ का कहना है कि यदि ये मांगे भी पूरी नहीं हुयीं तो न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा। मंच का सबसे मजबूत तर्क होगा कि जब राजनीतिक दल चंदे का हिसाब देने के लिए विवश नहीं हैं तो कम संसाधन और बहुत ही कम सरकारी विज्ञापन पाने वाले देश के अधिकांश अखबार एक-एक पैसे का हिसाब देने के लिए विवश क्यों किए जा रहे हैं। कार्पोरेट के अखबार करोड़ों रुपये की लागत लगाकर अखबारों में घाटे सह भी सकते हैं। क्योंकि वो अपने मुख्य व्यापार से अरबों रूपये का मुनाफा कमाते है। इनके मुख्य व्यापारों में सरकारों के सहयोग की जरूरत पड़ती है। सरकारों को समाचार पत्रों में सरकारों के गुड वर्क को ज्यादा उजागर करने और खामियों को छिपाने की गरज रहती है। इन कारणों से देश की जनता कार्पोरेट के ब्रांड अखबारों से विश्वसनीयता खोती जा रहे है। पाठक सच पढ़ना चाहता है। उसका रूझान छोटे-छोटे अखबारों की तरफ बढ़ रहा है। लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कार्पोरेट और पेड न्यूज की बेड़ियों में ना जकड़ जाये इसलिए पाठक चार पन्ने के छोटे अखबार में चार सच्ची खबरें पढ़ना चाहता है। जिस तरह राजनीतिक दलों की नीतियों से प्रभावित होकर लोग गुप्त दान करते हैं ऐसे ही छोटे अखबारों को अभी अब लोग दान स्वरुप टुकड़ों – टुकड़ों में कागज देने लगे हैं। जब राजनीतिक दलों के चंदे का हिसाब नहीं तो छोटे अखबारों का हिसाब क्यों?[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]  

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Dakhal News 10 July 2018


देश का प्रथम मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर भोपाल में

जनसम्‍पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्विद्यालय, भोपाल में नीति आयोग के सहयोग से स्थापित मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह देश का पहला मीडिया इन्क्यूवेशन सेंटर है। इस सेंटर में मीडिया उद्यमशीलता का प्रशिक्षण दिया जाएगा और उद्यमियों को समय-समय पर मेंटरिंग करने की भी योजना है। उल्लेखनीय है कि मीडिया के सभी संस्थानों में विषय-वस्तु बनाना एवं मीडिया प्रबंधन का प्रशिक्षण भली प्रकार दिया जा रहा है, परंतु वास्तविक मीडिया के परिवेश में स्वतंत्र विषय वस्तु बनाने वालों की मांग बढ़ती जा रही है। इसलिए मीडिया में उद्यमशीलता का प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। इस आवश्यकता को ध्यान में रखकर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने नीति आयोग के सहयोग से अटल इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना करने का निर्णय लिया। यह केन्द्र मीडिया उद्यमियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देने का कार्य करेगा। सेंटर का संचालन संवाद भारती संस्था के माध्यम से किया जाएगा। इस अवसर पर संचालक जनसम्पर्क श्री आशुतोष प्रताप सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने, कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा और कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी उपस्थति थे। नीति आयोग द्वारा मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल का चयन एक विशेष उपलब्धि है। इस सेंटर को सक्षम, उपयोगी और विशिष्ट केन्द्र बनाकर मीडिया के क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया जाए। यह बात जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज यहाँ विश्वविद्यालय की प्रबंध उप-समिति की बैठक में कही। डॉ. मिश्र ने आज विश्वविद्यालय में प्रारंभ मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर के लिए चार करोड़ 50 लाख रुपए की राशि आवंटन करने और सोशल मीडिया रिसर्च सेंटर के लिए दो करोड़ रुपए की अतिरिक्त बजट राशि मंजूरी का अनुमोदन भी किया गया। विश्वविद्यालय की महा-परिषद पूर्व में इसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति ले चुकी है। जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि देश में इस तरह के इन्क्यूबेशन सेंटर का सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में शुरू होना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि मीडिया के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता को निरंतर बढ़ाने का प्रयास किया जाए। डॉ. मिश्र ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा दतिया में प्रारंभ परिसर के विकास के साथ ही अन्य केन्द्रों की गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की। बैठक में अधिकारियों-कर्मचारियों के कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। मंत्री डॉ. मिश्र ने बैठक में विश्वविद्यालय की नवीन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। डॉ. मिश्र ने प्रारंभ में नीति आयोग के सहयोग से विश्वविद्यालय में स्थापित विशेष मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण किया।  

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Dakhal News 5 July 2018


पाकिस्तानी रिपोर्टर ने खोली सरकार की पोल

इन दिनों पाकिस्तान में मानसून की जोरदार बारिश जारी है। लगातार हो रही बारिश के चलते कई शहरों में हालात खराब हैं और लाहौर में तो रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है जिसके चलते 8 लोगों की मौत हो गई है। देश के बड़े शहरों में बारिश से बिगड़ते हालात की रिपोर्टिंग भी जारी है। बेहतर कवरेज और शानदार रिपोर्टिंग करने की होड़ में पत्रकार हर तरह की कोशिश में लगे हैं। इन्हीं में एक पत्रकार हैं जो सरकार की अनदेखी का कवरेज बड़े मजेदार तरीके से करता नजर आया। इस पत्रकार का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, लाहौर में हुए तेज बारिश के चलते शहर में हर जगह पानी भर गया, सड़कें भी नदी बन गईं और इसी का कवरेज एक स्थानीय न्यूज चैनल का रिपोर्टर करने निकला। उसने सरकार पर तंज कसने के लिए बेहद मजेदार तरीका अपनाया और सड़क पर ही स्विमिंग पूल में बच्चों के लिए उपयोग होने वाले खिलोनों और बाथटब को सड़क पर लेकर उन पर सवार हो गया। वाडियो में रिपोर्टर इन खिलौनों के बीच पानी में तैरता नजर आ रहा है। अपने कवरेज में उसने कहा कि, 'मैं किसी स्विमिंग पूल में नहीं हूं बल्कि सड़क के बीच में हूं जो पानी से भरी हुई है। ऐसे ही हाल शहर के अन्य हिस्सों के भी है। मैं पानी के इस पूल में मजे कर रहा हूं और लोगों को भी राय दूंगा कि वो भी ऐसा ही करें क्योंकि यह पानी जल्द उतरने वाला नहीं है।' यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी रिपोर्टर्स के इस तरह के मजेदार वीडियो सामने आए हों। इससे पहले भी कई भार कवरेज करते हुए उनकी अटपटी हरकतें कैमरे में कैद हुई हैं।

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Dakhal News 4 July 2018


मराठी साहित्य के लिये भास्कर रामचन्द्र तांबे पुरस्कार घोषित

एमपी के संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा ने मराठी कृतियों के लिये संस्कृति विभाग की मराठी साहित्य अकादमी द्वारा स्थापित पुरस्कारों की पहली बार घोषणा की है। म.प्र. संस्कृति परिषद द्वारा राजकवि भास्कर रामचन्द्र तांबे के नाम से स्थापित मराठी कृतियों के वर्ष 2014 एवं 2015 के पुरस्कार हेतु रचनाकारों के नामों की घोषणा की गई है। कैलेण्डर वर्ष 2014 एवं 2015 के लिये मराठी साहित्य अकादमी द्वारा मराठी कविता अथवा नाट्य लेखन और मराठी कहानी अथवा कादम्बरी (उपन्यास) के क्षेत्र में यह पुरस्कार दिया जाएगा। घोषणा के मुताबिक कविता लेखन के क्षेत्र में श्री श्रीनिवास हवलदार की कृति 'ग्रेसच्या कविता' के लिए तथा मराठी कहानी के क्षेत्र में डॉ. म.द. वैद्य को उनकी कृति 'माझा चिकित्सा प्रवास' के लिये राजकवि भास्कर रामचन्द्र तांबे पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कार के लिये चयनित प्रत्येक रचनाकार को 50 हजार रुपये की राशि तथा प्रशस्ति-पत्र, शॉल, श्रीफल भेट किया जाएगा। घोषित पुरस्कार राजकवि की उपाधि से अलंकृत श्री तांबे के कार्य क्षेत्र ग्वालियर में समारोह पूर्वक प्रदान किए जायेंगे।  

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Dakhal News 4 July 2018


व्हाट्सएप

  व्हाट्सएप लगातार अपने यूजर्स के लिए नए अपडेट्स लेकर आ रहा है और इसी कड़ी में उसने एक बड़ा फीचर पेश किया है। इस फीचर का नाम है 'सेंड मैसेज'। यह ऐसा फीचर है जो विशेष तौर पर ग्रुप एडमीन के लिए लाया गया है। इसके बाद ग्रुप एडमिन अपने ग्रुप में जुड़े सदस्यों को मैसेज भेजने से रोक सकेंगे। इसके लिए ग्रुप एडमिन को सेटिंग्स में जाकर कुछ बदलाव करने होंगे जिसके बाद वो ग्रुप मेंबर्स को मैसेज भेजने से रोक सकेंगे। ऐसा करने के लिए एडमिन को ग्रुप सेटिंग में जना होगा। यहां उसे दो ऑप्शन मिलेंगे 'सिर्फ एडमिन' और 'सभी मैंबर्स'। अगर एडमिन यहां सिर्फ एडमीन वाले ऑप्शन को चुनता है तो ग्रुप में उसके अलावा और कोई मैसेज नहीं भेज पाएगा। साथ ही सभी यूजर्स को इसका संदेश भी जाएगा कि उन्हें ग्रुप में मैसेज भेजने से रोक दिया गया है। हालांकि, इसमें एक फायदा यह है कि एडमिन किसी भी वक्त यह सेटिंग बदल सकता है और सभी ग्रुप मैंबर्स को मैसेज भेजने की मंजूरी दे सकता है। व्हाट्सएप के इस नए फीचर को साल का सबसे शानदार फीचर माना जा रहा है। यह फीचर एंड्रायड, आईओएस व अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम्स के लिए जारी भी कर दिया गया है।

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Dakhal News 2 July 2018


जियो वालों को जल्‍द मिल सकती है 5G सेवा

टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जल्‍द ही अपने ग्राहकों को 5जी की सुविधा प्रदान करने की कोशिश में लगी हुई है। इस बात की घोषणा रिलायंस जियो के एमडी आकाश अंबानी ने सगाई वाले दिन इस बात की घोषणा की थी। रिलायंस इसके लिए अमेरिकी कंपनी रेडिसिएसिस की पूरी हिस्‍सेदारी खदीदने वाली है। रिलायंस जियो की पेरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज से मिली जानकारी के मुताबिक ओपन टेलिकॉम प्लेटफार्म सॉल्यूशन में रेडिसिएसिस एक ग्लोबल लीडर है। इस जानकारी के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज इस कंपनी में 100 प्रतिशत की हिस्सेदारी 1.72 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से खरीदने वाली है। रिलायंस इंडस्ट्री के निदेशक मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी ने इस डील पर कहा कि इस अधिग्रहण से जियो को 5G और इंटरनेट ऑफ थिंग्स में आगे बढ़ने में काफी मदद मिलेगी। आपको बता दें कि बीते 30 जून को ही आकाश अंबानी और हीरा कारोबारी रसेल मेहता की पुत्री श्लोका मेहता की सगाई मुंबई में धूम-धाम से मनाई गई। आकाश अंबानी ने इस डील की घोषणा अपने सगाई के मौके पर की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से मिली जानकारी के मुताबिक इस डील के लिए फिलहाल ट्राई से मंजूरी नहीं मिली है। कंपनी को उम्मीद है कि इसके लिए 2018 की चौथी तिमाही में मंजूरी मिल सकती है। इस साल के अंत तक यह डील पूरी हो जाएगी। वहीं, रिलायंस जियो की प्रमुख प्रतिद्वंदी कंपनी भारती एयरटेल ने भी 5G सेवा के लिए तैयारी कर ली है। भारती एयरटेल इस समय देश के कई शहरों में 4G की अपग्रेडेड सेवा MIMO (मल्टीपल इनपुट मल्टीपल आउटपुट) उपलब्ध करा रही है। इस सेवा की शुरुआत बेंगलूरू से की गई है। MIMO को 4G और 5G के बीच की तकनीक कहा जाता है।  

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Dakhal News 2 July 2018


भोपाल में टीवी चैनल के सिग्नल चुराने के मामले में केस दर्ज

भोपाल में केबल कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के बाद सिग्नल चोरी कर सोनी और कलर्स चैनल का प्रसारण करने के आरोप में पुलिस ने धोखाधड़ी, कॉपीराइट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एमपी नगर पुलिस के मुताबिक मेसर्स रिचनेट केबल सर्विस प्रायवेट लिमिटेड की तरफ से प्रकाश मोहन कामले ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उसमें बताया था कि डीजी नेट केबल के भोपाल। केबल कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के बाद सिग्नल चोरी कर सोनी और कलर्स चैनल का प्रसारण करने के आरोप में पुलिस ने धोखाधड़ी, कॉपीराइट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एमपी नगर पुलिस के मुताबिक मेसर्स रिचनेट केबल सर्विस प्रायवेट लिमिटेड की तरफ से प्रकाश मोहन कामले ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उसमें बताया था कि डीजी नेट केबल के ऑपरेटर संतोष पंवार और उनके साथी सिग्नल चोरी कर सोनी और कलर्स चैनल का प्रसारण कर रहे हैं। शिकायत में बताया गया कि उनकी फर्म से पहले डीजी नेट केबल का अनुबंध था, लेकिन तय राशि का भुगतान नहीं करने पर अनुबंध समाप्त कर उनके चैनल ने डीजी नेट के लिए प्रसारण बंद कर दिया था। लेकिन डीजी नेट केबल ऑपरेटर ने पैसों का भुगतान करने के बजाय डीटीएच से सिग्नल चोरी कर कलर्स व सोनी चैनल का प्रसारण करना शुरू कर दिया। शिकायत की जांच कर आरोपित संतोष पंवार व उसके साथियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।  

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Dakhal News 30 June 2018


जनसम्पर्क मंत्री से मिले पत्रकार संगठन के प्रतिनिधि

   मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र से आज एम.पी.वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट की। भेंट करने वालों में यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष श्री राधावल्लभ शारदा, संगठन महासचिव श्री विकास बोन्द्रिया, रायसेन जिले के अध्यक्ष श्री जगदीश जोशी और अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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Dakhal News 28 June 2018


दबंग नेता ने पत्रकार के परिवार से की मारपीट

अंबिकापुर में खबर प्रकाशित होने से खफा दबंगई और मारपीट करने के आरोपी  भाजपा सांसद कमलभान सिंह के पुत्र व जनपद पंचायत अध्यक्ष देवेंद्र सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार तो किया लेकिन थाने लाकर खातिरदारी की और मुचकले पर रिहा कर दिया। सोमवार को देवेंद्र ने साथियों के साथ एक स्थानीय पत्रकार  के घर धावा बोल दिया था। वह कोई खबर छपने से नाराज थे। हद यह कि पत्रकार के बुजुर्ग माता-पिता को बेल्ट से पीटा। मामला रसूखदार से जुड़ा होने के कारण पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी करती रही। जैसे तैसे सांसद पुत्र व उनके साथियों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने की धाराओं में मामला दर्ज किया था।  

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Dakhal News 28 June 2018


 पी नरहरि से मिले महाराष्ट्र के वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी

मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क आयुक्त  पी. नरहरि से आज संचालनालय में महाराष्ट्र राज्य के जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। दल का नेतृत्व महाराष्ट्र के संचालक जनसम्पर्क शिवाजी मानकर ने किया। आयुक्त जनसम्पर्क श्री नरहरि ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि मध्यप्रदेश में हाल ही में लागू मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना विश्व की अनुकरणीय योजना साबित हुई है। इस योजना से राज्य सरकार, समाज के सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के जीवन स्तर में व्यापक स्तर पर बदलाव लाने में सफल हुई है। श्री नरहरि ने बताया कि इस योजना में करीब पौने दो करोड़ से अधिक लोगों ने अभी तक पंजीयन करवाया है। यह योजना पंजीबद्ध हितग्राहियों को जन्म से अंतिम समय तक मददगार साबित हो रही है। सौजन्य भेंट के दौरान महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश में संचालित जनसम्पर्क विभाग संबंधी गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के बारे में आपसी तौर पर विचार-विमर्श भी किया।  

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Dakhal News 25 June 2018


पत्रकार शुजात बुखारी

कश्मीरी पत्रकार और राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के मामले में पुलिस ने कहा है कि उनकी हत्या का आदेश पाकिस्तान से दिया गया था। जम्मू कश्मीर पुलिस का कहना है कि इस मामले में विभाग को कुछ ऐसे सुराग हाथ लगे हैं, जिसके बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सच्चाई सामने आ जाएगी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जून के आखिर तक शुजात बुखारी मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकियों को सीमा पार से बुखारी की हत्या के आदेश मिले थे। शुजात बुखारी घाटी में शांति कायम करने के लिए काम कर रहे थे। रमजान के महीने मेंं 14 जून 2018 को अज्ञात हमलावरों ने पत्रकार शुजात बुखारी की उनके दफ्तर के बाहर हत्या कर दी थी। इससे पहले भी शुजात बुखारी पर हमले हुए थे। बुखारी की हत्या के मामले में पुलिस अलगाववादी हुर्रियत नेताओं की भूमिका को लेकर भी जांच कर रही है। हुर्रियत की ओर से वरिष्ठ पत्रकार बुखारी को दुबई में कॉन्फ्रेंस का हिस्सा न बनने की सलाह दी गई थी। जांच से सीधे जुड़े हुए अधिकारी ने बताया कि इस बात की ज्यादा आशंका है कि उनकी हत्या घाटी में शांति को बढ़ावा देने की उनकी कोशिशों के चलते की गई। उनके मुताबिक, ये बातें अलगाववादी और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दोनों ओर के जमियत-ए-इस्लामी नेताओं को नागवार गुजरी। उन्होंने बताया कि हमने आरोपियों को लेकर सीधी जांच की है। हत्यारे की पहचान कर ली गई है। खुफिया विभाग को मिले इनपुट हत्या के मामले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की ओर इशारा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तानी पत्रकार और कार्यकर्ता इरशद महमूद के 16 जून को किए गए फेसबुक पर उर्दू पोस्ट को बेहद गंभीरता से लिया है। महमूद राइजिंग कशमीर के संपादक शुजात बुखारी के करीबी थे। अधिकारियों के मुताबिक, दुबई में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में शुजात बुखारी ने भी शिरकत की थी और उनकी बातें अलगाववादी समूहों को रास नहीं आई। महमूद के पोस्ट के मुताबिक, बुखारी की राय घाटी के अलगाववादियों और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल की अध्यक्षता करने वाले सीनियर जमियत और हिजबुल मुजाहिदीन नेता सैयद सलाहुद्दीन को पसंद नहीं आई। महमूद ने दावा किया कि दुबई में आयोजित कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले राइजिंग कश्मीर के संपादक और अन्य सभी लोगों को ‘इंडिया का पेड एजेंट्स’ बताने के बाद उन्होंने बुखारी को लेकर सलाहुद्दीन से बात की थी। प्रतिबंधित आतंकी संगठन के प्रवक्ता ने भी उस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले लोगों को गद्दार कहते हुए उन्हें जल्द ही सबक सिखाने के बात कही थी। अरशद महमूद के अनुसार बुखारी भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत करने को लेकर आतंकियों और आईएसआई के निशाने पर आ गए थे। महमूद ने उर्दू में लिखी अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा, 'वह लोग कश्मीर पर किसी नए विचार के हिमायती नहीं हैं।' खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक एएस दुलत ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी ने कुछ दिन पहले ही सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से संपर्क किया था। निजी सुरक्षा गार्ड के तौर पर उन्हें उपलब्ध कराए गए दो पुलिस अधिकारी भी इस हमले में मारे गए थे। दुलत ने एक बयान में कहा था बुखारी ने बार-बार अलगाववाद, आतंकवाद में वृद्धि और व्यापक डर की चेतावनी दी थी और कहा था कि ऐसे माहौल में कोई भी सुरक्षित नहीं है।  

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Dakhal News 25 June 2018


सोशल मीडिया फेसबुक देगा पैसा कमाने का मौका

 फेसबुक जल्द ही अपने प्लेटफॉर्म पर विशेष सामग्री प्रदान करने के लिए सदस्यों को चार्ज करेगा। सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर पेरेंटिंग, कुकिंग और होम क्लीनिंग ग्रुप्स पहले होंगे जो इस पायलट कार्यक्रम के हिस्से के रूप में नई सुविधा का उपयोग करेंगे। फेसबुक के इस फीचर से कई ग्रुप को पैसा कमाने को मौका मिलेगा। फेसबुक पर सक्रिय ग्रुप में शामिल होने या ग्रुप के कंटेंट को एक्सेस करने के लिए महीने के 340 रुपए से लेकर 2,050 रुपए देने होंगे। फेसबुक ने अपने ब्लॉग में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि कई सर्वे के बाद हमें पता चला कि जो लोग फेसबुक पर बड़े ग्रुप चला रहे हैं वे पैसे भी कमाना चाहते हैं। शुरुआत में फेसबुक मेंबरशिप फीस सिर्फ खाना बनाने और घरों को साफ करने वाले ग्रुप के लिए ही होगा। यहां आपको साफ तौर पर बता दें कि यह शुल्क आपके लिए नहीं, बल्कि फेसबुक ग्रुप के लिए है। उदाहरण के तौर पर फेसबुक पर कोई ग्रुप है जो काफी मशहूर है और आप उस ग्रुप में कुछ पोस्ट करना चाहते हैं या फिर उस ग्रुप का सदस्य बनना चाहते हैं तो आपको पैसे देने होंगे। फेसबुक ने कहा है कि इस कदम से ब्लॉगर और फेसबुक पर ग्रुप चलाने वालों की अच्छी कमाई होगी। यह फीस ग्रुप एडमिनिस्ट्रेटर ही डिसाइड करेगा। उनके पास विकल्प भी होगा कि वे फ्री में भी उपलब्ध करा सकते हैं, यह निर्भर करेगा कि उनका उद्देश्य क्या है। टेस्टिंग फेज़ में फेसबुक इस फीचर से कुछ कमाएगा नहीं। ये फीचर ग्रुप एडमिनिस्ट्रेटर्स को उनकी पोस्टिंग से कमाने का मौका देगा जो कि वह रेग्यूलर बेसिस पर पोस्ट करते हैं।एडमिनिस्ट्रेटर्स की कमाई होगी तो इससे कंटेंट की क्वॉलिटी भी सुधरेगी। यह पूरी तरह से कब शुरू होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह फीचर भारत के एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए उपलब्ध होगा या नहीं।  

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Dakhal News 22 June 2018


फड़नवीस सरकार

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को केंद्र सरकार ने कुछ सवालों के साथ लौटा दिया है। यह कानून पिछले वर्ष तैयार कर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। महाराष्ट्र मीडिया पर्सन्स एंड मीडिया इंस्टीट्यूशंस (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज ऑर लॉस टू प्रॉपर्टी) एक्ट 2017 को पिछले वर्ष राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया था। राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी और राज्यपाल के दस्तखत के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। केंद्र ने 15 दिन पहले इसे राज्य सरकार को लौटा दिया। यह कानून बनवाने के लिए मुंबई प्रेस क्लब सहित राज्य के कई पत्रकार संगठन करीब एक दशक से प्रयासरत थे। 2011 में जागरण समूह के अंग्रेजी दैनिक "मिड डे" के वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे की दिनदहाड़े हत्या के बाद राज्य सरकार पर पत्रकार संगठनों का दबाव बढ़ गया था। लेकिन यह कानून फड़नवीस सरकार में ही बन सका। राष्ट्रपति की मंजूरी के बगैर यह कानून राज्य सरकार को लौटाने की जानकारी देते हुए सूचना एवं जनसंपर्क सचिव बृजेश सिंह का कहना है कि कानून वापस नहीं हुआ है, बल्कि इससे संबंधित कुछ सवाल पूछे गए हैं। जिसका उचित समाधान राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा इस प्रकार सवाल पूछा जाना एक सामान्य प्रक्रिया है। राज्य सरकार केंद्र के सवालों के उचित समाधान तैयार कर जल्द ही पुनः मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज देगी। इस कानून में पत्रकारों या मीडिया संस्थानों पर किसी भी प्रकार के हमले को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसके तहत आरोपी की गिरफ्तारी गैरजमानती होगी और पुलिस उपाधीक्षक स्तर से नीचे का अधिकारी इस मामले की जांच नहीं कर सकेगा। अपराध सिद्ध होने पर दोषी को तीन साल तक की कैद एवं/अथवा 50,000 रुपये का जुर्माना भी हो सकता है। यही नहीं, दोषी सिद्ध व्यक्ति को पीड़ित को हर्जाना देना पड़ सकता है। यह हर्जाना तोड़फोड़ में हुए नुकसान की भरपाई से लेकर पीड़ित के इलाज के खर्च तक हो सकता है। इस कानून में मीडिया संस्थानों एवं मीडियाकर्मियों को भी परिभाषित किया गया है।  

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Dakhal News 21 June 2018


पी. नरहरि

मध्यप्रदेश में जल्दी ही पत्रकारों के हित में पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लाया जायेगा। पत्रकार सुरक्षा अधिनियम का मसौदा तैयार कर लिया गया है, इसके साथ ही राज्य सरकार पत्रकारों की दुर्घटना बीमा हितलाभ राशि भी बढ़ा दी हैं। 25 लाख तक के गृह ऋण पर साढ़े प्रतिशत का ब्याज भी सरकार भरेगी।  उक्त जानकारी  मध्यप्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त पी. नरहरि ने ग्वालियर में मीडिया प्रतिनिधियों के एक सेमीनार में दी। उन्होंने बताया कि पत्रकार सुरक्षा अधिनियम तैयार है, इसे जल्दी ही केबिनेट में प्रस्तुत हो सकता है। नरहरि ने बताया कि राज्य सरकार पत्रकारों के हित में कई फैसले लागू कर रही है। पत्रकारों की दुर्घटना बीमा राशि को बढ़ाया जा रहा है। वहीं अब इसमें माता पिता को भी शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा 25 लाख तक के पत्रकारों के गृह ऋण को सुगम बनाया जा रहा है, वहीं इस गृह ऋण का साढ़े पांच प्रतिशत का ब्याज भी सरकार ही देगी। जनसंपर्क आयुक्त पी. नरहरि ने बताया कि पत्रकार कल्याण के मामलों में भी सरकार ने उदारता से काम करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि अधिमान्यता के नियमों में भी उदारता बरती जा रही है। जल्दी ही इसको साप्ताहिक, मासिक और न्यूज पोर्टल के लिये  भी खोला जायेगा। नरहरि ने पत्रकारों से विभिन्न मुददों पर सुझाव भी लिये, उन्होंने पत्रकारों द्वारा प्रेस टूर मामले पर कहा कि पत्रकारों के प्रेस टूूर जिले से लेकर संभाग बल्कि अन्य राज्यों में भी कराने के निर्देश दे दिये गये हैं।  नरहरि ने बताया कि हम चाहते है कि पत्रकारों के टूर हो ताकि दूसरे जिले, राज्यों से जाकर उनका विजन बदले और प्रदेश का इतिहास, पर्यटन व विकास की जानकारी अन्य जगह भी फेलें। नरहरि ने पत्रकारों के मानदेय प्रदान करने की उम्र 62 वर्ष से 60 वर्ष करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यह मानदेय 6 हजार से बढ़ाकर 7 हजार रूपये कर दिया गया है। जनसंपर्क आयुक्त ने इलैक्ट्रोनिक मीडिया के पत्रकारों को सीएम कव्रेज के दौरान दिक्कत आने पर कहा कि अब सीएम की सुरक्षा डी को छोटा किया जा रहा है, ताकि फोटोग्राफ व इलैक्ट्रोनिक मीडिया के कैमरामैन बेहतर कवरेज कर सकें। जनसंपर्क आयुक्त पी. नरहरि ने जिलों में कलेक्टरों और पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक कराने की भी बात कही।

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Dakhal News 11 June 2018


दिल्ली वर्किंग जर्नलिस्ट

  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘ दिल्ली वर्किंग जर्नलिस्ट संशोधन अधिनियम को मंजूरी दे दी है। यह मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने को सुनिश्चित करता है और कानून का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में दंडनीय प्रावधान भी करता है। इस कानून का पालन नहीं किए जाने पर एक साल तक की कैद की सजा हो सकती है। दिल्ली विधानसभा ने ‘ वर्किंग जनर्लिस्ट अधिनियम ’ में संशोधन के लिए दिसंबर 2015 में यह विधेयक पारित किया था। इस कदम का उद्देश्य मौजूदा कानून में बदलावों को प्रभावी करना है। श्रम मंत्री गोपाल राय ने कहा कि देश में मजीठिया वेतन बोर्ड को प्रभावी ढंग से लागू करने को सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन करने वाला दिल्ली पहला राज्य बन गया है। यह कानून दिल्ली आधारित मीडिया संगठनों पर लागू होगा। इस कानून के मुताबिक अनुबंध ( कॉंट्रेक्ट ) पर रखे गए पत्रकारों से श्रमजीवी पत्रकार ( वर्किंग जनर्लिस्ट ) जैसा व्यवहार किया जाएगा। दिल्ली सरकार की एक अधिसूचना में कहा गया है कि किसी कर्मचारी को बकाया राशि का भुगतान नहीं करने की स्थिति में नियोक्ता को दंडित किया जाएगा। कानून , न्याय और विधायी मामलों के विभाग ने सात मई को यह अधिसूचना जारी की है। नये कानून के मुताबिक इसका उल्लंघन करने वाले पर 5,000 रूपया से 10,000 रूपया तक जुर्माना और उसे एक साल तक की सजा हो सकती हैं।

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Dakhal News 1 June 2018


भास्कर और राजस्थान पत्रिका

दैनिक भास्कर अखबार को राजस्थान में मीडियाकर्मियों की जरूरत है. इससे संबंधित एक विज्ञापन भास्कर ने छापा है. संपादकीय विभाग में कंटेंट राइटर/ कॉपी राइटर, सब एडिटर/ सीनियर सब एडिटर/ चीफ सब एडिटर, रिपोर्टर/ सीनियर रिपोर्टर, डीटीपी ऑपरेटर, ग्राफिक्स डिजायनर आदि चाहिए. प्रसार विभाग में सर्कुलेशन एग्जिक्यूटिव/ सर्कुलेशन मैनेजर की जरूरत है. ऐड सेल्स के लिए भी लोग चाहिए. जो आवेदन करना चाहते हैं वो रिज्यूमे hr_rajasthan@dbcorp.in पर भेजें. ज्यादा जानकारी के लिए उपरोक्त विज्ञापन देखें. उधर, राजस्थान पत्रिका अखबार को भी अनुभवी रिपोर्टरों की जरूरत है. खासकर उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें राजस्थान के बारे में ज्यादा समझदारी हो. सीनियर रिपोर्टर का यह पद दिल्ली ब्यूरो में खाली है. पांच साल का अनुभव होना चाहिए. प्रिंट और डिजिटल के लिए कॉपी लिख सकने और मोबाइल से विडियो कवरेज कर पाने वालों को प्राथमिकता. वेतन अनुभव और योग्यता के मुताबिक. रिज्यूमे यहां diwan.karki@gmail.com पर मेल करें.

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Dakhal News 1 June 2018


वरिष्ठ पत्रकार गोविंदलाल वोरा का निधन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दैनिक समाचार-पत्र अमृत संदेश, रायपुर के प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार श्री गोविंदलाल वोरा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। श्री चौहान ने शोक संदेश में कहा है कि श्री वोरा का पूरा जीवन सादगी,सिद्धाँतों और सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित रहा। उनका आमजन से सीधा संवाद रहता था। उन्होंने पत्रकारिता का दीर्घ जीवन हमेशा सच के  लिए लड़ते हुये जिया। श्री वोरा के निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना की है और शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त की है। उल्लेखनीय है कि श्री गोविंदलाल वोरा दैनिक समाचार-पत्र अमृत संदेश में स्थापना के समय से ही प्रधान संपादक के रूप में कार्य कर रहे थे। श्री वोरा लगभग 28 वर्ष तक नवभारत और क्रानिकल, रायपुर के संपादक रहे। उनका निधन गत दिवस 84 वर्ष की आयु में दिल्ली में हो गया।

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Dakhal News 14 May 2018


राजनीतिक विज्ञापन देने वालों के नाम बताएगा गूगल

  फेसबुक डाटा लीक के बाद खड़े हुए विवाद से सीख लेते हुए सर्च इंजन गूगल ने सियासी विज्ञापनों को पारदर्शी बनाने के लिए नई नीतियों की घोषणा की है। गत माह फेसबुक ने अपनी धूमिल छवि को सुधारने के लिए कई उपाय किए थे जिसमें राजनीतिक विज्ञापनदाताओं की पहचान की सत्यता जांचना आदि शामिल था। इसी तर्ज पर तकनीक के दिग्गज गूगल ने भी अपनी विज्ञापन नीतियों में सुधार किया है। नई नीति के मुताबिक, विज्ञापन देने वाले को कंपनी के सामने यह प्रमाणित करना होगा कि वह अमेरिका के वैध नागरिक हैं। इसके लिए उन्हें सरकार द्वारा जारी आइ-डी एवं अन्य जानकारियां जमा करनी होगी। गूगल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष केंट वाल्कर ने कहा, 'विज्ञापन के साथ ही उसके लिए भुगतान करने वाले का नाम सार्वजनिक करना भी अब अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त सियासी विज्ञापनों के लिए एक लाइब्रेरी भी तैयार की जा रही है। इससे यूजर खुद सियासी विज्ञापन और उसका भुगतान करने वाले का नाम सर्च कर पाएंगे।' इन सुधारों के साथ ही गूगल विशेष रूप से राजनीतिक विज्ञापनों पर केंद्रित एक 'पारदर्शी रिपोर्ट' भी जारी करने जा रहा है। इससे यह सामने आ जाएगा कि कौन-कौन से लोग सियासी विज्ञापन के लिए भुगतान कर रहे हैं और इसमें कितनी राशि खर्च की जा रही है। ऑनलाइन हमलों का शिकार होने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए गूगल ने अपने 'प्रोटेक्ट योर इलेक्शन' प्रोग्राम के तहत कई नए टूल्स भी तैयार किए हैं। वाल्कर ने बताया कि चुने गए अधिकारियों, अभियानों और कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक सिक्योरिटी ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाया जाएगा। प्रोग्राम को फंड करने के लिए कंपनी ने 'नेशनल साइबर सिक्योरिटी एलायंस' और हार्वर्ड केनेडी स्कूल के 'डिजिटल डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट' से समझौता भी किया है।  

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Dakhal News 7 May 2018


अब एक और न्यूज चैनल जनतंत्र

    नोएडा से जल्द शुरू होने वाले नेशनल न्यूज़ चैनल “जनतंत्र” को युवा सहयोगियों की जरूरत है। अनुभवी से लेकर फ्रेशर्स तक आवेदन कर सकते हैं। योग्यता बस इतनी सी है कि आपके अंदर काम करने की ललक और चुनौतियों को स्वीकार करने का जज्बा होना चाहिए। जिन विभागों में योग्य मीडियाकर्मियों की आवश्यकता है वो हैं, आउटपुट, इनपुट, एंकर, असाइनमेंट, पीसीआर/एमसीआर, वीडियो एडिटर, ग्राफिक्स, आईटी और डिजिटल विंग। एंकरिंग और ग्राफिक्स के लिए आवेदन करने वाले अपनी शो-रील भी भेज दें तो बेहतर होगा। इच्छुक अभ्यर्थी अपना सीवी resume.jantantra@gmail.com पर भेज सकते हैं।

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Dakhal News 5 May 2018


india tv

  इस साल के 17वें सप्ताह की टीआरपी में कुछ भी ऐसा ख़ास नहीं है. सबकुछ लगभग पिछले सप्ताह जैसा ही है. आज तक नंबर एक पर डटा हुआ है और इंडिया टीवी का नंबर दो पर दबदबा कायम है. जी न्यूज नंबर तीन पर बना हुआ है. हालांकि अंबानी के चैनल न्यज 18 इंडिया की टीआरपी थोड़ी गिरी है. ABP न्यूज ने इस सप्ताह टीआरपी में थोड़ा सा सुधार किया है. Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 17 Aaj Tak 14.8 up 0.2 India TV 14.5 same Zee News 13.1 up 0.1 News18 India 12.5 dn 0.4 ABP News 11.9 up 0.4 News Nation 11.0 dn 0.2 India News 8.7 same News 24 7.0 up 0.6 Tez 2.7 dn 0.1 NDTV India 2.1 dn 0.2 DD News 1.9 dn 0.3 TG: CSAB Male 22+ India TV 14.7 up 0.3 Zee News 14.5 dn 0.1 Aaj Tak 14.3 up 0.5 News18 India 13.6 dn 0.4 ABP News 10.6 up 0.4 News Nation 10.3 dn 0.5 India News 8.3 up 0.1 News 24 6.4 up 0.2 Tez 3.2 dn 0.2 NDTV India 2.6 dn 0.1 DD News 1.5 dn 0.2  

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Dakhal News 5 May 2018


ani

आज प्रेस फ्रीडम डे मनाया जा रहा है यानी प्रेस की आज़ादी का दिन. वहीं हालिया जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में मीडिया की आज़ादी खतरे में हैं. लगातार बढ़ते पॉलिटिकल पार्टियों और सत्ता पक्ष के दबाव के चलते प्रेस की आज़ादी पूरी तरह से संकट में है. इसी की एक और भयावह तस्वीर उभरी है, यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ करार कर लेने से. दरअसल यूपी सरकार ने एक शासनादेश जारी किया है, जिसके मुताबिक़, योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यक्रमों की लाइव कवरेज करने पर समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनैशनल यानी एएनआई को एक करोड़ रुपए सालाना मिलेंगे.  इस करार के चलते अब सरकार का हर कार्यक्रम चाहे वह छोटा हो या बड़ा एएनआई कवर करेगी. सरकार का इस बाबत कहना है कि उन्होंने बहुत सोच समझ कर यह निर्णय लिया है. सरकारी लोगों का इस बाबत कहना है कि सरकार की योजना योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार को सोशल मीडिया तक पहुंचाने की है. सोशल मीडिया द्वारा लोगों से जुड़ कर सरकार अपनी हर एक बात सीधे सीधे उन तक पहुंचाना चाहती है. साथ ही अपने कामों के बारे में लोगों से लगातार फीडबैक लेना चाहती है. गौरतलब है कि फेसबुक पर योगी के 5479051 और ट्विटर पर 26 लाख फॉलोवर्स हैं. वहीं यूपी सरकार को 6 लाख 32 हजार लोग फॉलो करते हैं. सरकार चाहती है कि इन सभी लोगों तक सरकार के हर कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग पहुंच सके. ताकि सभी लोग इसे देख सके, इसीके चलते एएनआई को यह ठेका दिया गया. ऐसे में अब यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर हर जगह योगी सरकार का हर कार्यक्रम प्रसारित होगा और इसके प्रसारण की पूरी जवाबदारी एएनआई की होगी.[साभार भड़ास फॉर मीडिया ]  

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Dakhal News 3 May 2018


लोकसभा टीवी में इंटर्नशिप का मौक़ा

लोकसभा टीवी इंटर्नशिप तलाश रहे युवा लोगों के लिए एक सुनहरा मौक़ा लेकर आई है. यह मौक़ा है, इंटर्नशिप का और इस इंटर्नशिप के लिए छात्रों को मिलेंगे तीस हजार रुपए भी. यह इंटर्नशिप एक और तीन महीने की होगी. दोनों ही इंटर्नशिप के लिए 50 -50 सीटें तय की गई है. इनके लिए आप 4 मई तक   अप्लाई कर सकते हैं. तीन महीने वाली इंटर्नशिप 2 जुलाई से शुरू होकर 28 सितंबर तक चलेगी. इसके लिए आवेदक की आयु कम से कम 21 साल और अधिकतम 30 साल होनी चाहिए. साथ ही आवेदक का पोस्ट ग्रेजुएट होना भी जरूरी है. आवेदक को समाज शास्त्र, विज्ञान, पर्यावरण, क़ानून, पत्रकारिता और वाणिज्य का भी ज्ञान होना जरूरी है. इंटर्न को इसके लिए 20 हजार स्टाइपेंड और टाइपिंग के लिए 10 हजार का स्टाइपेंड दिया जाएगा. एक महीने वाली इंटर्नशिप 28 जून से 27 जुलाई तक चलेगी.इसके लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 साल और अधिकतम 30 साल होनी चाहिए. साथ ही आवेदक का पोस्ट ग्रेजुएट होना भी जरूरी है. आवेदक को समाज शास्त्र, विज्ञान, पर्यावरण, क़ानून, पत्रकारिता और वाणिज्य का भी ज्ञान होना जरूरी है. इंटर्न को इसके लिए 20 हजार स्टाइपेंड और टाइपिंग के लिए 5 हजार का स्टाइपेंड दिया जाएगा. इस पोस्ट के लिए आपको ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. इसके लिए लोकसभा की साईट पर जाएं. आधिकारिक वेबसाइट sri.nic.in  विजित करें और फॉर्म भरें.

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Dakhal News 27 April 2018


1st इण्डिया चैनल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने जगदीश चन्द्र

  जी मीडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद छोड़ने के बाद  जयपुर में जगदीश चन्द्र ने एक दूसरे रीजनल चैनल 1st India के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार ग्रहण कर लिया. यह चैनल 5 वर्ष पुराना है. राजस्थान से संचालित सभी रीजनल चैनल्स में से सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी और साजोसामान इसी चैनल के पास हैं. जगदीश चन्द्र के साथ ही Zee राजस्थान के 70 लोगों ने भी Zee से त्यागपत्र दे दिया है. ये सभी लोग जगदीश चन्द्र के साथ 1st India ज्वाइन करने जा रहे हैं. लगभग डेढ़ साल पहले इसी तर्ज पर लगभग २०० लोगों ने जगदीश चन्द्र के साथ ई टीवी राजस्थान छोड़ Zee राजस्थान ज्वाइन किया था. इसी कहानी की पुनरावृत्ति कल शाम जयपुर में देखने को मिली. राजस्थान में पहले से ही ई टीवी और Zee राजस्थान दो बड़े रीजनल न्यूज़ चैनल्स थे और इन दोनों को अलग अलग समय में जगदीश चन्द्र ने ही खड़ा किया था. रीजनल टेलीविज़न इंडस्ट्री में यह कैसा विचित्र संयोग है कि इस तीसरे 1st India चैनल को भी जगदीश चन्द्र ही खड़ा करने जा रहे हैं.  

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Dakhal News 23 April 2018


1st इण्डिया चैनल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने जगदीश चन्द्र

  जी मीडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद छोड़ने के बाद  जयपुर में जगदीश चन्द्र ने एक दूसरे रीजनल चैनल 1st India के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार ग्रहण कर लिया. यह चैनल 5 वर्ष पुराना है. राजस्थान से संचालित सभी रीजनल चैनल्स में से सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी और साजोसामान इसी चैनल के पास हैं. जगदीश चन्द्र के साथ ही Zee राजस्थान के 70 लोगों ने भी Zee से त्यागपत्र दे दिया है. ये सभी लोग जगदीश चन्द्र के साथ 1st India ज्वाइन करने जा रहे हैं. लगभग डेढ़ साल पहले इसी तर्ज पर लगभग २०० लोगों ने जगदीश चन्द्र के साथ ई टीवी राजस्थान छोड़ Zee राजस्थान ज्वाइन किया था. इसी कहानी की पुनरावृत्ति कल शाम जयपुर में देखने को मिली. राजस्थान में पहले से ही ई टीवी और Zee राजस्थान दो बड़े रीजनल न्यूज़ चैनल्स थे और इन दोनों को अलग अलग समय में जगदीश चन्द्र ने ही खड़ा किया था. रीजनल टेलीविज़न इंडस्ट्री में यह कैसा विचित्र संयोग है कि इस तीसरे 1st India चैनल को भी जगदीश चन्द्र ही खड़ा करने जा रहे हैं.  

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Dakhal News 23 April 2018


महिला पत्रकार का गाल -राज्यपाल ने दी सफाई

महिला पत्रकार द्वारा सवाल पूछने पर उसका गाल छू कर विवादों में घिर गए तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने इस मामले में सफाई दी है। उन्होंने महिला पत्रकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि मैंने तुम्हें अपनी नातिन, पोती समझकर हाथ लगाया था। बता दें कि मंगलवार को राज्यपाल ने महिला कॉलेज में कथित स्कैंडल पर संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था। इसी दौरान एक महिला पत्रकार के सवालों का जवाब देते समय उन्होंने उनके गाल छू लिए। उनके इस कदम की चौतरफा आलोचना होने लगी। द्रमुक ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे एक व्यक्ति की यह हरकत अशोभनीय है। द्रमुक के राज्यसभा सदस्य कनीमोरी ने ट्वीट में कहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने महिला पत्रकार के निजी क्षेत्र का उल्लंघन किया। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी अपनी ट्विटर हैंडल पर राज्यपाल की आलोचना की है। राज्यपाल पुरोहित यौन दुर्व्यवहार के एक अन्य मामले में भी घिरे हैं। संवाददाता सम्मेलन में उन्हें इसी मुद्दे पर घेरा गया था। सवाल पूछे जाने पर उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया। उनसे पूछा गया था कि क्या उनके खिलाफ गृह मंत्रालय जांच कर रहा है? राज्यपाल पुरोहित ने कहा कि स्कैंडल के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महिला कॉलेज की एक व्याख्याता ने कथित रूप से छात्राओं को अच्छे अंक के लिए विश्वविद्यालय के उच्चाधिकारियों के साथ एडजेस्ट करने का प्रलोभन दिया था। सोशल मीडिया पर रविवार को बातचीत का आडियो टेप वायरल होने के बाद व्याख्याता निर्मला देवी को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलवार को इस मामले की जांच तमिलनाडु पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई।

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Dakhal News 18 April 2018


  न्यूयॉर्कर और न्यूयॉर्क टाइम्स को पुलित्जर अवार्ड

अपनी खबरों के जरिये दुनियाभर में यौन उत्पीड़न को मुद्दा बनाने के लिए न्यूयॉर्क टाइम्स और द न्यूयॉर्कर अखबार को इस साल के प्रतिष्ठित पुलित्जर अवार्ड के लिए चुना गया है। दोनों अखबारों ने अपनी पैनी रिपोर्टिंग के जरिये हॉलीवुड के दिग्गज निर्माता हार्वे वीनस्टीन को कठघरे में खड़ा करते हुए अमेरिका के सबसे बड़े यौन उत्पीड़न मामले को उजागर किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के जोडी कानटोर व मेगन टोही और न्यूयॉर्कर के रोनन फैरो को पुलित्जर अवार्ड से नवाजा जाएगा। दोनों अखबारों ने पिछले साल अक्टूबर से यौन उत्पीड़न से जुड़ी खबरें प्रकाशित करना शुरू किया था। इसके बाद 100 से अधिक महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न को सार्वजनिक तौर पर उजागर किया। इसी के चलते सोशल मीडिया समेत अन्य प्लेटफार्म पर "मी टू" अभियान की शुरुआत हुई, जिसकी वजह से कई जानी-मानी हस्तियों को अपनी साख और नौकरी से हाथ धोना पड़ा। खोजी पत्रकारिता के वर्ग में वाशिंगटन पोस्ट को पुरस्कार के लिए चुना गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट को 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल की रिपोर्टिंग के लिए साझा तौर पर नेशनल रिपोर्टिंग श्रेणी का पुरस्कार दिया जाएगा। फिलीपींस के राष्ट्रपति रॉड्रिगो दुतेर्ते की ड्रग्स के खिलाफ मुहिम की कवरेज के लिए संवाद एजेंसी रायटर को "इंटरनेशनल रिपोर्टिंग" और रोहिंग्या संकट की कवरेज के लिए "फीचर फोटोग्राफी" वर्ग में पुलित्जर अवार्ड दिया जाएगा।  

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Dakhal News 17 April 2018


5 जी सुविधा 21 से

  देश को सस्ती 5जी नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराने के लिए काउंट डाउन शुरू हो गया है। शुक्रवार को देश के पहले 5जी बेस स्टेशन में 5जी नेटवर्क का ट्रायल सफल रहा है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई हैं कि देश को वर्ष 2021 से सस्ती 5जी नेटवर्क सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी, जो वर्तमान दर से दस गुना सस्ती होगी। आईआईटी दिल्ली में देश का पहला 5जी बेस स्टेशन स्थापित किया गया है। प्रोफेसर सैफ खान मोहम्मद ने कहा कि यह लैब ऐल्गोरिदम सॉफ्टवेयर विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस तरह के बेस स्टेशन अगले साल तक विभिन्न आईआईटी में स्थापित किए जाएंगे। अभी किसी भी सेलुलर कंपनी ने बेस स्टेशन देश में नहीं बनाया है। सभी विदेश में बने 4जी बेस स्टेशन से सुविधा लेती हैं, जो उन्हें महंगी मिलती हैं। इस कारण इंटरनेट टैरिफ मंहगा पड़ता है, लेकिन देश में स्थापित 5जी बेस स्टेशन के सुचारू हो जाने के बाद सेलुलर कंपनी को सुविधा यहीं से मिल जाएगी, जो दस गुना सस्ती होगी। इससे आम आदमी का इंटरनेट टैरिफ भी दस गुना तक सस्ता होगा।

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Dakhal News 16 April 2018


patrkar madhyprdesh

 मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों के स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना में कैशलेस इलाज की व्यवस्था को बढ़ाकर 4 लाख रूपये करने की घोषणा की है। अभी तक यह सीमा दो लाख रूपये की है। उन्होंने पत्रकारों की मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता देने की अधिकतम राशि को भी एक लाख से बढ़ाकर चार लाख रूपये करने, पत्रकारों के कैमरे क्षतिग्रस्त होने पर आर्थिक सहायता राशि 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रूपये करने और पत्रकारों को 25 लाख रूपये तक के आवास ऋण पर पाँच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिये जाने की घोषणा की है। श्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय एवं आंचलिक पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकारिता असाधारण और चुनौतिपूर्ण कार्य है। पत्रकार को विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। सूचना को खबर का आकार देने की तड़प और संघर्ष आसान नहीं होता है। लोकतंत्र में पत्रकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। व्यवस्था का आधार स्तंभ है। गलतियों को उजागर करना उनका महत्वपूर्ण दायित्व है। खबरों की खबर निकालने के लिये किये जाने वाला संघर्ष सामान्यत: दिखाई नहीं देता है। प्राकृतिक विपदा, साम्प्रदायिक तनाव या आतंकी घटनाओं की खबरों की खोज में कई बार जान का जोखिम भी उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज की सच्चाई को सही ढ़ंग से सामने लाने और समाज को सही दिशा देने का कार्य पूरी सक्रियता और सजगता के साथ करते रहें। मध्यप्रदेश सरकार सामाजिक सरोकारों में पत्रकारों की भूमिका का सम्मान करती है और समाज के प्रति उनकी सेवा भावना को बखूबी समझती है। इसी भाव से वरिष्ठ पत्रकारों के लिये श्रद्धानिधि स्थापित की है। श्री चौहान ने पत्रकारिता के बदलते दौर का जिक्र करते हुये कहा कि देश की आजादी, स्वतंत्रता आंदोलन, आपातकाल के दौरान पत्रकारों का योगदान महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय है। उन्होंने वर्तमान युग की पत्रकारिता पर आधुनिक तकनीक के प्रभावों का जिक्र किया। साथ ही देश और प्रदेश के मूर्धन्य पत्रकारों का उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 2015 एवं 2016 के लिये राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय एवं आंचलिक पत्रकारिता सम्मान से 30 पत्रकारों को अलंकृत किया। जनसंपर्क एवं जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने स्वागत उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निरंतर सजग और सक्रिय रहना होता है। प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना और दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। राज्य सरकार पत्रकारों की इस भूमिका का सम्मान करती है। आभार प्रदर्शन आयुक्त जनसंपर्क श्री पी.नरहरि ने किया। इस अवसर पर सांसद श्री आलोक संजर, महापौर श्री आलोक शर्मा, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के. मिश्रा सहित वरिष्ठ पत्रकार, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सम्मानित पत्रकारगण राष्ट्रीय सम्मान : माणिकचन्द्र बाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री रामबहादुर राय, दिल्ली और श्री रमेश पतंगे, मुम्बई को दिया गया। गणेशशंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री अश्विनी कुमार, दिल्ली, सुश्री नलिनी सिंह, दिल्ली, विद्यानिवास मिश्र राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री अभिलाष खाण्डेकर, भोपाल और श्री पी. नारायणन, केरल को दिया गया। राष्ट्रीय चैनलों के मध्यप्रदेश में कार्यरत पत्रकार श्रेणी में श्री मनोज शर्मा को सम्मानित किया गया तथा राष्ट्रीय चैनलों के मध्यप्रदेश में कार्यरत कैमरामेन श्रेणी में श्री आर.सी. साहू को भी सम्मानित किया गया। राज्य-स्तरीय सम्मान : सत्यनारायण श्रीवास्तव राज्य-स्तरीय पत्रकारिता सम्मान श्री अरुण पटेल और श्री गणेश साकल्ले को दिया गया। राज्य-स्तरीय चैनलों के पत्रकारों को पत्रकारिता सम्मान श्री राकेश अग्निहोत्री और श्री अजय त्रिपाठी को दिया गया। महेन्द्र चौधरी राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान श्री संजीव गुप्ता और श्री महेश झा को दिया गया। राज्य स्तरीय चैनलों के कैमरामेन श्रेणी में श्री मकरंद जंभोरकर और श्री अजय पाण्डेय को सम्मानित किया गया। आंचलिक पत्रकारिता सम्मान : शरद जोशी (भोपाल) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री ओ.पी. श्रीवास्तव और श्री अनिल दुबे को, राहुल बारपुते (इंदौर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री जयप्रकाश तापड़िया और श्री रमण रावल को, रतनलाल जोशी (ग्वालियर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और श्री गणेश सांवला, जीवनलाल वर्मा विद्रोही (जबलपुर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार श्री चैतन्य भट्ट और श्री योगेश कुमार को, कन्हैयालाल वैद्य (उज्जैन) पत्रकारिता सम्मान डॉ. घनश्याम बटवाल और श्री संदीप कुलश्रेष्ठ को, मास्टर बल्देव प्रसाद (सागर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री रमेश राजपूत और श्री शैलेन्द्र ठाकुर को और श्री बनारसी दास चतुर्वेदी (रीवा) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान से श्री गया प्रसाद श्रीवास एवं श्री संजय कुमार पयासी को सम्मानित किया गया।    

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Dakhal News 13 April 2018


फेसबुक विवाद - सियासी विज्ञापन के साथ दिखेंगे पैसे देनेवालों के नाम

  डाटा लीक मामले के कारण विवादों में घिरी दुनिया की दिग्गज सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक अब अपनी छवि सुधारने में जुट गई है। उसने चुनावों के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों में अपनी पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहतर करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। फेसबुक की नई नीति के अनुसार, विज्ञापनदाता की पहचान सत्यापित होने के बाद ही सियासी विज्ञापन दिखाई पड़ेंगे। इसके साथ ही विज्ञापन का भुगतान करने वाले के नाम का भी जिक्र होगा। फेसबुक ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब उसने हाल ही में माना है कि उसके 8.70 करोड़ यूजरों के डाटा का इस्तेमाल ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका (सीए) ने किया था। इस मामले की जांच में सीए के एक पूर्व कर्मचारी ने ब्रिटेन की एक संसदीय समिति को बताया था कि फेसबुक यूजर्स के डाटा का उपयोग सीए ने कथित तौर पर साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान किया था। फेसबुक पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस सोशल नेटवर्किंग साइट का उपयोग चुनावों को प्रभावित करने के लिए भी किया जा रहा है। फेसबुक की नई नीति के अनुसार, अब हर राजनीतिक विज्ञापन पैसा देने वाले व्यक्ति या संस्था के नाम के साथ जारी किए जाएंगे।  

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Dakhal News 9 April 2018


 इंडिया टीवी के नीतीश चंद्र

   बिहार में शराबबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक म्यूजिक वीडियो ‘तौबा तौबा शराब’ का लोकार्पण किया। इस म्यूजिक वीडियो को इंडिया टीवी के बिहार संवाददाता नीतीश चंद्र ने तैयार किया है। नीतीश पिछले 15 वर्षों से इंडिया टीवी से जुड़े हुए हैं। गीत के बोल हैं- ‘कहिए-कहिए जनाब तौबा-तौबा शराब, कहिए-कहिए जनाब छोड़ो-छोड़ो शराब…’. इसे खुद नीतीश चंद्र ने लिखा और गाया है. इसकी धुन भी उन्होंने ही तैयार की है। लोकार्पण के बाद काफी तेजी से ये गीत वायरल हो रहा है। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस वीडियो से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मंच से ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस वीडियो को बिहार के हर स्कूलों तक पहुंचाया जाय। ताकि बिहार की नई पौध शराब जैसी बुरी लत के प्रति जागरूक हो सकें। सीएम नीतीश कुमार ने सराहना करते हुए कहा कि मेरे हमनाम नीतीश जी ने काफी अच्छा गीत बनाया है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की तरफ से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार, पुलिस महानिदेशक एस.के. द्विवेदी, और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुभानी ने भाग लिया। शराब छोड़ने की अपील से जुड़े इस वीडियो में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि कैसे महिलाओं की तरफ से उठी मांग के बाद शराबबंदी का फैसला किया गया। इसके बाद समाज के हर तबके के लोगों का इसे समर्थन मिला। वीडियो में भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और रविकिशन के अलावा पटना के तेजतर्रार एसएसपी मनु महाराज, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रत्यय अमृत और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चौधरी ने भी नीतीश चंद्र के साथ ‘तौबा तौबा शराब’ कहा है। इस वीडियो में सभी दलों के विधायकों, पटना के डॉक्टरों, वकीलों और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने भी भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि इससे पहले भी नीतीश ने शादी से जुड़े एक गीत को रिलीज किया था। नीतीश चंद्र ने कहा, “संगीत में मेरी रुचि रही है। पत्रकारिता के दौरान मैने करीब से शराब से होने वाले नुकसान को देखा है, यही कारण है कि इस विषय पर मैं अपनी तरफ से भी कुछ योगदान देना चाहता था। शराबबंदी एक अच्छी पहल है।” लंबे समय से प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के लिए रिपोर्टिंग करते रहे नीतीश स्वभाव से संवेदनशील हैं। उनकी संगीत में काफी रुचि है। नीतीश चंद्र इससे पहले शादी से जुड़े एक वीडियो को रिलीज कर चुके हैं जिसे काफी लोगों ने पसंद किया था। इनका नया म्यूजिक वीडियो ‘तौबा तौबा शराब’ न सिर्फ मनोरंजक है बल्कि ये लोगों को शराब से नुकसान के प्रति जागरूक भी करता है।[साभार -भड़ास फॉर मीडिया]  

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Dakhal News 7 April 2018


एमपी में पत्रकारों की सुरक्षा

   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिये कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी।  भोपाल में मीडिया महोत्सव 2018 के अंतर्गत आयोजित ''भारत की सुरक्षा, मीडिया, विज्ञान एवं तकनीकी की भूमिका' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। श्री चौहान ने कहा कि व्यापक अर्थ में राष्ट्रीय सुरक्षा में महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और गरीबों की सुरक्षा भी शामिल है। उन्होने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ गई है। श्री चौहान ने कहा कि बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों के मानव अधिकार नहीं होते। इनका महिमामंडन किसी भी हाल में नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वालों को फांसी देने का कानून बनाया गया है। श्री चौहान ने कहा कि झूठी खबरों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की जरूरत होती है। इसलिये श्रमिकों को जमीन और घर देने तथा महिलाओं को सुरक्षा देने जैसे कदम उठाये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में चुनावों की तैयारियां चलती रहती हैं और सरकारों को विकास पर फोकस करने के लिय कम समय मिल पाता है। इसीलिये लोक सभा और विधान सभा के चुनावों को एक साथ कराने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया को भी इस विषय पर विचार करना चाहिये। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर श्री निखिल दवे की किताब ''अंतस यात्रा'' और श्री ओम प्रकाश की किताब 'सृजन समुच्चय' का लोर्कापण किया।    

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Dakhal News 7 April 2018


न्‍यूज एंकर राधिका रेड्डी

भारत में एक महिला एंकर यह लिखकर सुसाइड कर लेती है कि- ”मेरा दिमाग ही मेरा दुश्मन है”.  आत्महत्या करने वाली यह महिला एंकर अपने पति से तलाक के बाद डिप्रेशन में चल रही थी. मामला आंध्र प्रदेश का है.   हैदराबाद के मूसपेट इलाके में न्‍यूज एंकर राधिका रेड्डी श्रीविला अपार्टमेंट में रहती थीं. रविवार को ऑफिस से घर लौटने के बाद उन्होंने इमारत के पांचवें फ्लोर से कूद कर आत्महत्या कर लिया. न्‍यूज एंकर राधिका रेड्डी की उम्र 36 साल थी. वे तेलुगू न्‍यूज चैनल ‘वी6’ में एंकर थीं. राधिका का 14 साल का एक विकलांग बेटा है. राधिका का साल भर पहले पति से तलाक हो गया था. उसके बाद वे माता-पिता के साथ श्रीविला अपार्टमेंट के कमरा नंबर 204 में रह रहीं थीं. सुसाइड के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को राधिका का सुसाइट नोट भी मिला है. राधिका रेड्डी ने सुसाइड नोट में लिखा है- ‘मेरा दिमाग ही मेरा दुश्‍मन है. मैं डिप्रेशन में हूं. ये खतरनाक कदम उठाने जा रही हूं.’ पुलिस ने राधिका के फोन कॉल्स को खंगालना शुरू कर दिया है.

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Dakhal News 3 April 2018


संतोष गंगवा

 केंद्र सरकार ने आज स्वीकार किया कि मीडिया संस्थानों में पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी और मजीठिया वेतनबोर्ड के क्रियान्वयन का मामला वाकई में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर कर रहा है, जिसके समाधान के लिए विशेष प्रयास की जरूरत है। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने दिल्ली स्थित अपने निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये बात कही। गंगवार ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को सुचारु रूप से लागू करने, पत्रकारों की समस्याओं को दूर करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया संस्थानों में पत्रकारों को अनुबंध पर नियुक्त  करने, मजीठिया वेतन बोर्ड को लागू करने से जुड़ी दिक्कतों और पत्रकारों की अन्य समस्याओं से अवगत कराया जाता रहा है। वह पत्रकारों की दिक्कतों काे दूर करने को लेकर काफी संजीदा है और इस बारे में चर्चा करने के लिए हमेशा उपलब्ध हैं। उन्होंने अगले सप्ताह पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए अपने कार्यालय में आमंत्रित भी किया। केन्द्रीय श्रम मंत्री ने कहा कि वह असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं को लेकर बहुत गंभीर हैं। देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 40 करोड़ लोगों को राहत एवं सुरक्षा देने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनानेे के लिए प्रतिबद्ध है और वह 40 कानूनों को मिला कर चार कानून बनाने वाली है जिनमें श्रमजीवी पत्रकारों से जुड़े मामलों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।  कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट और दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में जल संसाधन व संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सांसद धर्मेन्द्र कश्यप भी मौजूद थे।   मेघवाल ने माना कि यदि पत्रकार स्वतंत्र, सुरक्षित एवं निर्भीक नहीं रहेंगे तो लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि संसद की विभिन्न समितियों की बैठक में ठेके पर नौकरियों एवं मजीठिया वेतन बोर्ड का मामला आता रहा है लेकिन पहले यह उतना गंभीर नहीं लगा लेेकिन आज उन्हें इसकी गंभीरता का अहसास हुआ है। वह मानते हैं कि निश्चित रूप से पत्रकार समाज की सूरत में बदलाव आना चाहिए और सरकार इसके लिए गंभीरता से विचार करेगी।  कार्यक्रम में देश के जाने-माने पत्रकारों ने मंत्रियों को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कामकाज की दशाओं की जानकारी दी। वयोवृद्ध पत्रकार और एनयूजे आई के संस्थापक सदस्य राजेन्द्र प्रभु, के.एन. गुप्ता, विजय क्रांति ने कहा कि ठेके पर नौकरी के चलन ने पत्रकारों व पत्रकारिता को कमजोर कर दिया है। पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा नहीं है और उनका जीवन अनिश्चितता से भरा है। सरकार को इन विसंगतियों को दूर करने के लिए कुछ करना चाहिए। महिला पत्रकारों ने भी अपनी दिक्कतों से उन्हें अवगत कराया। इस अवसर पर दोनों मंत्रियों वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु, अच्युतानंद मिश्र और अन्य पत्रकारों को सम्मानित किया। इनमें श्री प्रभु, श्री गुप्ता, श्री हेमंत विश्नोई, रवीन्द्र अग्रवाल, यूनीवार्ता के विशेष संवाददाता एवं यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार मिश्रा, एनयूजे आई के अध्यक्ष अशोक मलिक, महासचिव मनोज वर्मा, कोषाध्यक्ष राकेश आर्य, पाँच्यजन्य के संपादक हितेश शंकर, दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह, महासचिव प्रमोद कुमार आदि शामिल थे।

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Dakhal News 31 March 2018


पत्रकार संदीप शर्मा

      मध्यप्रदेश के भिंड में   रेत माफिया और पुलिस की साठ-गाठ का खुलासा करने वाले पत्रकार संदीप शर्मा को एक ट्रक ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई| वहीं यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि हत्या की साजिश की आशंका जताई जा रही है| इस मामले के तूल पकड़ने के बाद एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इस मामले की सीबीआई से जाँच करवाने की बात कही है।  संदीप शर्मा तत्कालीन अटेर एसडीओपी इंद्रवीर भदौरिया का स्टिंग कर चर्चा में आए थे। संदीप ने रेत माफिया और पुलिस की साठगांठ का खुलासा करने के बाद झूठे प्रकरण में फंसाने और हत्या की साजिश रचने की आशंका पहले ही जाहिर की थी और एसपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की भी मांग की थी और सोमवार को एक घटना में उनकी मौत हो गई| घटना का सीसीटीवी वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसके आधार पर हत्या की आशंका जताई जा रही है| फिलहाल पत्रकार संदीप शर्मा की मौत की जांच के लिए एसपी प्रशांत खरे ने एसआईटी गठित की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सोमवार को सुबह एक ट्रक ने बाइक पर जा रहे पत्रकार संदीप  शर्मा को कुचल दिया और तेजी से ट्रक चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया|  हादसे के बाद जो सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं उसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है ट्रक चालक ने संदीप शर्मा को जानबूझकर मारा है । फुटेज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि संदीप शर्मा बिल्कुल सड़क के किनारे कच्चे रास्ते में खड़े हुए थे और ट्रक चालक ने इतना ज्यादा ट्रक घुमाया कि वे उसकी चपेट में आ गए और जिससे उनकी मौत हो गई | इसके बाद में डायल हंड्रेड उनको लेकर जिला चिकित्सालय पहुंची तो डायल हंड्रेड के कर्मियों के द्वारा उन्हें सीधे डेड हाउस भेज दिया गया । जबकि नियमानुसार उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाना था जहां पर उनका इलाज किया जा सकता था  । जब कुछ पत्रकार साथियों ने इस बात पर आपत्ति जताई तो उनके घायल शरीर को ट्रामा सेंटर लाया गया जहां चेकअप के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया | ज्ञात हो कि पत्रकार संदीप शर्मा ने करीब 6 महीने पहले तत्कालीन एसडीओपी अटेर इंद्रवीर सिंह भदौरिया का रेत के कारोबार में संलिप्तता का वीडियो वायरल किया था जो कि लगभग सभी चैनलों ने प्रमुखता से दिखाया था| इसके अलावा भी कई अन्य रेत कारोबारियों से उनका छत्तीस का आंकड़ा रहा करता था | आज सुबह एक सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जब देखो तो वाली से गुजर रहे थे तो ठीक कोतवाली के सामने ट्रक ने उन्हें कुचल दिया| पुलिस ने अभी इस मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है लेकिन 302 का मुकदमा अभी तक दर्ज नहीं हुआ है और इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे कुछ भी कहने से अभी कतरा रहे हैं | संदीप शर्मा के द्वारा इस बात की शिकायत कोतवाली से लेकर डीजीपी तक की गई थी कि उनकी जान को खतरा है और उन्हें किसी झूठे संडयंत्र में फंसाया जा सकता है या फिर उनकी हत्या करवाई जा सकती है। मामले की जांच के लिए   एसपी प्रशांत खरे ने एसआईटी गठित की है। डीएसपी राकेश छारी, टीआई मेहगांव नरेंद्र त्रिपाठी, टीआई कोतवाली शैलेन्द्र कुशवाह, एसआई आशुतोष शर्मा, एएसआई सत्यवीर सिंह और साइबर सेल एसआईटी में शामिल हैं। एसआईटी जांच कर एसपी रिपोर्ट देगी।

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Dakhal News 27 March 2018


 पत्रकार जगदीश उपासने

राहुल शर्मा कोई भी व्यक्ति या संस्थान किसी पर अपनी विचारधारा नहीं थोप सकता। सभी किसी भी विषय पर विचार करने के लिए स्वतंत्र हैं। अगर विचारधारा थोपी जा रही होती तो सबकी सोच एक जैसी होना थी। लेकिन, ऐसा नहीं है। जो लोग सवाल उठाते हैं वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं और बेहतरी चाहते हैं। यह बात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नए कुलपति और प्रतिष्ठित पत्रकार जगदीश उपासने ने कही। उन्होंने पत्रकारिता और समाज से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। वे जानी-मानी पत्रिका इंडिया टुडे (हिंदी) के लंबे समय तक संपादक रहे हैं। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश... सवाल - माखनलाल विवि पर हमेशा संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाने या उस पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं, आप क्या मानते हैं? उपासने - ऐसा नहीं है। अगर संघ की विचारधारा पर ही काम करने के आरोप हैं तो यह आरोप आए कहां से ? विश्वविद्यालय की बेहतरी चाहने वालों ने ही यह आरोप लगाए हैं। आरोप लगाने वाले बहुत से लोग यहां से किसी न किसी रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें पूर्व छात्र भी शामिल हो सकते हैं। अगर विचारधारा थोपी जाती तो वे यह आरोप कैसे लगाते। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि संघ की विचारधारा को थोपा जा रहा है। सभी यह चाहते हैं कि विवि की बेहतरी के लिए काम हो। इसी पर फोकस भी करना है। सवाल - पत्रकारिता से विवि का कुलपति बनना। भूमिका बदली है, कैस लग रहा है? उपासने - विवि से पूर्व से जुड़ा रहा हूं। लंबे समय तक पत्रकारिता की है। इसकी चुनौतियों को समझता हूं। चाहता हूं कि यहां के छात्रों को अच्छा रोजगार मिले। जो मांग है उसके मुताबिक छात्र तैयार हों। डिजीटल मीडिया के आने से प्रिंट मीडिया के लिए चुनौती बढ़ी है। सवाल - आपको लगता है समाचारों के प्रस्तुतीकरण में बदलाव होना चाहिए? उपासने - समाचार मनोरंजन नहीं है। समाचार को मनोरंजन समझा भी नहीं जाना चाहिए। खासकर चैनलों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। समाचारों की गंभीरता को बनाए रखना चाहिए। जब छात्र इस बात को समझते हैं तो मीडिया संस्थानों को भी इस ओर सोचने की जरूरत है। सवाल - विवि के नए परिसर में गौशाला खोले जाने के विचार का मुद्दा काफी गर्माया था। क्या गौशाला को यथावत रखेंगे ? उपासने - अभी तो मैं यहां आया ही हूं। इस बारे में सुना था। अभी इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा। पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकूंगा। सवाल - विवि के लिए क्या करना चाहेंगे? उपासने - छात्रों को बेहतर शिक्षा मिले। यहां से पास होने के बाद अच्छा रोजगार मिले इसके लिए काम करेंगे। बाजार की जरूरत के मुताबिक छात्र तैयार करेंगे। जरूरत पड़ी तो पाठ्यक्रम में भी बदलाव करेंगे।[नवदुनिया से साभार ]  

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Dakhal News 25 March 2018


दैनिक स्वदेश ग्वालियर

लम्बी फेहरिश्त है ऐसे पत्रकारों की ,पत्रकारिता का विद्यालय जैसा स्वदेश डॉ राकेश पाठक दैनिक स्वदेश ग्वालियर के बारे में पिछली पोस्ट पर स्वस्थ विमर्श हुआ।कुछ बिंदु स्पष्ट करना ज़रूरी है। 1.स्वदेश घोषित तौर पर एक विचारधारा विशेष से सम्बद्ध है।इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 2.विचारधारा से जुड़े होने के कारण स्वदेश को जो भी हानि लाभ होता है वो उसके खाते में। 3.अन्य विचारधारों से सम्बद्ध अखबार भी तो आखिर निकल ही रहे हैं जैसे कांग्रेस से सम्बद्ध नवजीवन, नेशनल हेराल्ड, सीपीएम के लोकलहर, पीपुल्स डेमोक्रेसी, सीपीआई का न्यू एज, मुक्ति संघर्ष आदि आदि भी प्रकाशित होते हैं। लेकिन विचारधारा से बंधे अख़बार कभी भी व्यापक प्रसार प्रचार पाने में सफल नहीं होते। 4.स्वदेश भी इसी विडंबना का शिकार हुआ। यहां तक कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के काडर तक ने अख़बार की चिंता नहीं की।  5.फिर भी किसी भी विचार समूह को प्रकाशनों के जरिये अपने विचार को प्रचारित, प्रसारित करने का अधिकार तो है ही । होना भी चाहिए।  विशेष विचार से सम्बद्ध होने के बावजूद 'स्वदेश' ने देश को अनगिनत पत्रकार दिए हैं। पहली किश्त में बताया था कि अटलबिहारी बाजपेयी और मामा माणिकचन्द बाजपेयी जैसे मूर्धन्य लोग स्वदेश के संपादक रहे। सिर्फ ग्वालियर की ही बात करें तो स्वदेश,ग्वालियर एक समय पत्रकारिता का विद्यालय हुआ करता था। राजेन्द्र शर्मा, जयकिशन शर्मा संपादक रहे तो बलदेवभाई शर्मा भी यहीं से निकले।बलदेवभाई बाद में 'पांचजन्य' के संपादक बने और इन दिनों राष्ट्रीय पुस्तक न्यास NBT के अध्यक्ष हैं। राजेन्द्र शर्मा मप्र की पत्रकारिता में विशिष्ट स्थान रखते हैं। जयकिशन शर्मा मप्र के सूचना आयुक्त पद पर रहे। महेश खरे स्वदेश से ही आगे बढ़े और नवभारत टाइम्स,भास्कर में संपादक रहे। हरीश पाठक जैसे जुझारू पत्रकार स्वदेश से निकल कर धर्मयुग में पहुंचे और बाद में हिंदुस्तान,राष्ट्रीय सहारा जैसे अखबारों में संपादक रहे। हरीश जाने माने कथाकार भी हैं। हरिमोहन शर्मा स्वदेश से निकल कर दैनिक भास्कर , पीपुल्स समाचार ,राज एक्सप्रेस आदि में वर्षों संपादक रहे। इसी पीढ़ी के प्रभात झा स्वदेश में पत्रकारिता के झंडे गाड़ने के बाद राजनीति में आये और आज बीजपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य हैं। डॉ तानसेन तिवारी भी इसी दौर का खास नाम हैं। वे लंबे समय स्वदेश में रहे और बाद में भास्कर का हिस्सा बने। आजकल डॉ तिवारी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय हैं। इसी पीढ़ी के बच्चन बिहारी कई साल स्वदेश में रहे और आजकल आचरण के संपादक हैं। देश मे अपनी विशिष्ट शैली के लिए विख्यात रहे आलोक तोमर(अब स्मृति शेष) भी स्वदेश से निकल कर जनसत्ता में पहुंचे थे और धूम मचा दी थी। बालेंद्र मिश्र स्वदेश ग्वालियर में लंबे समय रहे और कालांतर में नवस्वदेश सतना और परिवार टुडे आदि अखबारों में संपादक बने।नई पीढ़ी में भी तमाम नाम ऐसे हैं जो स्वदेश से पत्रकारिता की बारहखड़ी सीख कर निकले और आज देश में नाम कमा रहे हैं। भूपेंद्र चतुर्वेदी(अब स्मृति शेष) स्वदेश के बाद मुम्बई नवभारत के संपादक रहे। लोकेंद्र पाराशर संपादक रहे और अब बीजपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं।इसी पीढ़ी के अनुराग उपाध्याय भोपाल पहुंचे और कई साल इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहने के बाद आजकल डीएनएन चैनल के संपादक हैं। अतुल तारे लगभग तीन दशक से स्वदेश में ही हैं और अब प्रधान संपादक का दायित्व निभा रहे हैं। जबर खबरनवीस प्रमोद भारद्वाज स्वदेश के बाद जनसत्ता,दैनिक भास्कर, अमर उजाला में संपादक रहे और अब हरिभूमि भोपाल में संपादक हैं। प्रदीप मांढरे स्वदेश से निकल कर भास्कर में गए और अब अपना खुद का अखबार ग्वालियर हलचल निकालते हैं। अनिल कौशिक भी स्वदेश से ही अपनी पारी शुरू कर नवभारत टाइम्स में पहुंचे। चंद्रवेश पांडेय ने स्वदेश से पत्रकारिता शुरू की फिर नवभारत, नईदुनिया में रहने के बाद आजकल प्रदेश टुडे में संपादक हैं। प्रखर पत्रकार हिमांशु द्विवेदी स्वदेश के बाद नवभारत और भास्कर में रहे और आजकल हरिभूमि के प्रधान संपादक हैं। अभिमन्यु शितोले ने मुम्बई की राह पकड़ी और बाल ठाकरे के  अखबार सामना और 'दोपहर का सामना' में काम किया। अब वे नवभारत टाइम्स मुंबई में राजनैतिक संपादक हैं। फिरोज खान भी स्वदेश से सीख कर आगे बढ़े।नवभारत, भास्कर में रहे और आजकल मुंबई नवभारत टाइम्स में चीफ कॉपी एडिटर हैं। देश के शीर्ष कार्टूनिस्ट में शुमार इरफ़ान भी स्वदेश ग्वालियर में ही आड़ी टेढी रेखाएं खींचते हुए जनसत्ता जैसे अखबार में पहुंचे और आज भी धूम मचाते हैं। हरिओम तिवारी भी स्वदेश में ही कार्टूनिस्ट थे। बाद में भास्कर, पत्रिका आदि में रहे और अब हरिभूमि भोपाल में हैं। के के उपाध्याय और मनोज पमार भी स्वदेश से निकले और आज हिंदुस्तान जैसे राष्ट्रीय अखबार में संपादक हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मनोज मनु आज एक सुपरिचित नाम है। मनोज आजकल 'सहारा' मप्र चैनल के हेड हैं।वे भी ग्वालियर स्वदेश से ही निकले हैं। भोपाल के तमाम चैनलों में काम कर चुके अजय त्रिपाठी भी स्वदेश में ही थे। आजकल अजय आईबीसी चैनल में हैं। इंदौर के प्रतिष्ठित पत्रकार प्रतीक श्रीवास्तव भी स्वदेश में काम कर चुके हैं। प्रतीक चौथा संसार के संपादक रहे और आजकल साधना चैनल के ब्यूरो प्रमुख हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जो स्वदेश में रहने के बाद अन्य क्षेत्रों में सक्रिय हुए उनमें से सुधीर फड़नीस का नाम प्रमुख है। सुधीर लंबे समय पत्रकार रहने के बाद अब स्वामी चिन्मयानंद मिशन में बड़ी जिम्मेदारी सम्हाल रहे हैं। ब्रजेश पूजा त्रिपाठी पत्रकारिता छोड़ सरकारी नौकरी में गए और आजकल महिला बाल विकास में अधिकारी हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव नरेंद्र पांडेय भी स्वदेश में रहे हैं। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विसुवविद्यालय में प्राध्यापक व लेखक लोकेंद्र सिंह लोकेन्द्र सिंह ने भी स्वदेश से ही पत्रकारिता शुरू की। बाद में जागरण, भास्कर व पत्रिका में भी रहे। अभय सरवटे स्वदेश में ही प्रबंधन में थे और आजकल अमर उजाला उत्तर प्रदेश में क्लस्टर हेड हैं।[डॉ राकेश पाठक की वॉल से ]  

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Dakhal News 24 March 2018


एमपी में वेब जर्नलिज्म

रजत मिश्रा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दौर में जैसे ही सोशल मीडिया खास कर वेब पोर्टल की शुरुआत हुई लोगों का फटा-फट और बगैर मैनेज होने वाले मीडिया से भरोसा जुड़ गया।चेनल जो फर्जी तरीके से सरकार पर अपने झूठे ID फर्जी स्ट्रिंगर और मार्फिन वीडियो के बल पर दबाव बनाकर येन केन प्रकारेण मोटी राशि वसूल रहे थे ,उनकी दुकान  बंद होती दिखी, प्रिंट मीडिया भी इससे अछूता नहीं रहा। फर्जी सरकुलेशन आंकड़े डीएवीपी को घूस देकर जिन्होंने विज्ञापन लेकर अपने खजाने चुपचाप भर लिए थे उनका भी पेट दर्द होने लगा। सोशल मीडिया को बढ़ाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहल करते हुवे एक विज्ञापन नीति बनाकर "जितने हिट उतने विज्ञापन" के फार्मूले पर 10 वर्ष पुरानी 5 वर्ष पुरानी और 3 वर्ष पुरानी अलग अलग वेब पोर्टल नीति के अनुसार 1 वित्तीय वर्ष में  विज्ञापन दिए जिसका अब दुष्प्रचार हो रहा है यह बात सही है कि भीड़ में  असली के बीच नकली भी जम गए ।पिछले दिनों ऐसे ही एक जलते भूनते आधे अधूरे पत्रकार ने कम पढ़े लिखे और जनहित से दूर स्वहित के सवाल पूछने वाले विधायक से विधानसभा में जानकारी बुलवा ली। विधायक की जानकारी को अब सार्वजनिक करके वे फूले नहीं समा रहे । विज्ञापन लेना देना और उसे प्रसारित करना क्या घोटाला है ?यदि विज्ञापन देना घोटाला है तो आजादी के बाद से अब तक जितने पत्र-पत्रिकाओं चैनल्स  स्मारिका आदि व्यक्तियों संगठनों उनके मालिकों ने जो लाभ लिया है शासन की योजनाओं के प्रचार के बदले उन्हें मिला उपहार है ....।तो वह सब अपना रिकॉर्ड सार्वजनिक करें और खुद को बेदाग साबित करें वेब पोर्टल 15 हजार से ₹50 हजार प्रतिमाह हिट संख्या के आधार पर गूगल एनालिटिक्स के जरिए जो पा रहा है उसका और उसके मालिकों का इनकम टैक्स से रिकॉर्ड भी निकाला जाए साथ ही जो कथित ईमानदार बन रहे हैं और पर्दे के पीछे सरकार के साथ अखबार और चैनल के माध्यम से अब तक जनता का पैसा  हजारों करोड़ लूटते आए हैं उन्हें अपना हिसाब देना चाहिए । 

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Dakhal News 22 March 2018


इंडिया टीवी फिर नंबर दो

  अंबानी जी का न्यूज चैनल हो और उसके अच्छे दिन न आएं, वो भी योगी राज में, हो ही नहीं सकता. अंबानी का चैनल News18 India टीआरपी में कुल 5.2 की उछाल के साथ नंबर तीन पर आ गया है. इंडिया टीवी भी अच्छी खासी टीआरपी गेन करके नंबर दो पर पहुंच गया है. सबसे ज्यादा नुकसान एबीपी न्यूज का हुआ है जो भयंकर रूप से गोता लगाते हुए चौथे नंबर पर टिकने को मजबूर हुआ है. आजतक की टीआरपी भी अच्छी खासी गिरी है, बावजूद इसके वह नंबर वन पर बना हुआ है. इंडिया न्यूज और न्यूज नेशन की टीआरपी में भी अच्छी खासी वृद्धि हुई है.  Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 10 Aaj Tak 16.5 dn 4.7  India TV 13.8 up 3.1  News18 India 12.9 up 5.2  ABP News 12.3 dn 8.7  Zee News 11.8 dn 0.6  News Nation 10.5 up 1.1  India News 8.9 up 3.2  News 24 6.8 up 0.7  Tez 2.8 same   NDTV India 1.9 up 0.1  DD News 1.8 up 0.6 TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.3 dn 4.6  India TV 14.3 up 2.6  News18 India 14.2 up 4.8  Zee News 13.5 up 0.5  ABP News 11.0 dn 6.9  News Nation 9.1 up 0.7  India News 8.0 up 2.2  News 24 6.6 up 0.6  Tez 3.1 dn 0.2  NDTV India 2.5 up 0.1  DD News 1.3 up 0.3

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Dakhal News 15 March 2018


ओम थानवी बने पत्रिका समूह में सलाहकार संपादक

  आज औपचारिक रूप से मैंने राजस्थान पत्रिका समूह के सलाहकार सम्पादक का ज़िम्मा संभाल लिया। ‘औपचारिक रूप से’ इसलिए कि अनौपचारिक विमर्श हफ़्ते भर पहले शुरू हो गया था! पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत मैंने पत्रिका से ही की थी। 1980 में, संस्थापक कर्पूरचंद कुलिश के बुलावे पर। तीस वर्ष पहले पत्रिका से आकर ही चंडीगढ़ में जनसत्ता का सम्पादक हुआ। वहाँ से दिल्ली आया। आप कह सकते हैं, आज घर वापसी हुई। इस बीच पत्रिका समूह बहुत व्यापक हो गया है। अख़बार, टीवी, रेडियो, डिज़िटल आदि विभिन्न मीडिया क्षेत्रों में उसकी अपनी जगह है। दैनिक पत्रिका का प्रकाशन अब राजस्थान के अलावा दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, गुजरात, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु से भी होता है। 33 संस्करण छपते हैं। कोई 1 करोड़ 29 लाख पाठक इसे पढ़ते हैं। बीबीसी-रायटर के एक सर्वे में देश के सर्वाधिक विश्वसनीय तीन अख़बारों में पत्रिका एक था। मेरे लिए पत्रिका का प्रस्ताव स्वीकार करने की एक बड़ी वजह रहा समूह का जुझारू अन्दाज़। संघर्ष की ललक और सत्ता के समक्ष न झुकने का तेवर। इसकी एक वजह शायद यह है कि मीडिया ही इस समूह का मुख्य व्यवसाय है। इससे समझौते की जगह लिखना अहम हो जाता है। हाल में राजस्थान सरकार ने मीडिया को क़ाबू करने के लिए जिस काले क़ानून को थोपने की कोशिश की, वह पत्रिका के मोर्चा लेने के कारण ही आंदोलन बना और अंततः सरकार झुकी। क़ानून का इरादा हवा हुआ।[भड़ास फॉर मीडिया से ]

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Dakhal News 9 March 2018


शिवराज बोले -सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग हो

जनसंपर्क अधिकारियों की सोशल मीडिया प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्यमंत्री  एमपी के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक  उपयोग व्यापक जनहित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अत्यधिक गतिशील मीडिया है। नकारात्मक घटनाओं और असत्य सूचनाओं के प्रसार को रोकने  के लिए सक्रिय, सचेत और सावधान रहकर तथ्यों को  तत्काल प्रकाश में लाना चाहिए। इससे समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी। श्री चौहान आज यहां जनसंपर्क अधिकारियों के लिये सोशल मीडिया पर प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। श्री चौहान ने कहा कि सोशल मीडिया में आम लोगों और सरकार के बीच संपर्क सेतु बनने की क्षमता है। लोगों को सरकार की प्रत्येक कल्याणकारी और विकास गतिविधियों की जानकारी होना जरूरी है। यह उनका अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाना और उन्हें समाचारों की प्राथमिकता बनाना बड़ा काम है। इसे थोड़ी-सी विशेषज्ञता और प्रशिक्षण से आसान बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया का स्वभाव तेज गति से काम करने का है। इसलिये गलत सूचनाओं के प्रसार से भ्रम फैलता है। इससे निपटने के लिये समय पर सही तथ्यों को प्रस्तुत करना होगा। समाज के हित में जरूरी है कि समाज की सकारात्मक सोच बनाने वाले अच्छे और प्रेरणादायी समाचारों का तेजी से प्रसार हो। इसके लिये सक्रिय और सावधान रहते हुए दक्षता के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक कार्यों और सृजनात्मक विकास की रणनीतियों को मूल्य आधारित समाचार के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। श्री चौहान ने अनूठी योजनाओं और नवाचारी प्रयासों की चर्चा करते हुये कहा कि इन्हें आम हितग्राहियों तक पहुंचाने और नागरिकों को सूचना सम्पन्न बनाने के लिये सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग करना समय की आवश्यकता है। सरकार की नवाचारी और परिणामोन्मुखी योजनाओं की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के सभी मंचों पर इनकी उपस्थिति होना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इनका लाभ मिले। साथ ही आम नागरिकों और संभावित हितग्राहियों के विचारों से भी सरकार अवगत हो सके, ताकि समय पर तत्काल प्रभाव से आवश्यक सुधार किया जा सके। आयुक्त जनसंपर्क श्री पी.नरहरि ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि विभिन्न विभागों की गतिविधियों और नवाचारी योजनाओं की सोशल मीडिया में प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए काम शुरू कर दिया गया है। जिन हितग्राहियों ने सरकार की योजनाओं से लाभ लेकर अपना जीवन बदल लिया है, उन्हें भी सोशल मीडिया में सक्रिय रहकर अन्य लोगों को प्रेरित करने का आग्रह किया गया है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री एस. के. मिश्रा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। अपर संचालक जनसंपर्क श्री सुरेश गुप्ता, अपर सचिव जनसंपर्क डॉ. एच.एल. चौधरी, कार्यकारी संचालक मध्यप्रदेश माध्यम श्री मंगला मिश्रा एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। संचालक जनसंपर्क श्री अनिल माथुर ने आभार व्यक्त किया।  

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Dakhal News 7 March 2018


इंडिया टीवी नंबर दो पर

  इस साल के छठवें हफ्ते की टीआरपी के आंकड़े बताते हैं कि इंडिया टीवी ने जबरदस्त छलांग लगाकर नंबर दो की अपनी पुरानी कुर्सी हासिल करने में सफलता पा ली है. वहीं एबीपी न्यूज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. यह चैनल ढेर सारी टीआरपी खोकर नंबर पांच पर आ गिर है. वहीं निचले पायदान पर घिसट रहे न्यूज ट्वेंटी फोर ने थोड़ी बहुत अपनी स्थिति बेहतर की है. यही हाल इंडिया न्यूज का भी है. टीआरपी  Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 6 Aaj Tak 17.0 up 0.1  India TV 13.5 up 1.1  Zee News 13.0 dn 0.9  News18 India 12.4 up 0.7  ABP News 10.9 dn 1.7  News Nation 10.4 up 0.6  India News 9.4 up 0.9  News 24 7.5 up 0.4  Tez 2.7 dn 1.2  NDTV India 1.8 dn 0.2  DD News 1.4 up 0.1 TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.2 dn 0.3  Zee News 14.3 dn 0.4  India TV 14.0 up 0.7  News18 India 13.3 up 0.9  ABP News 10.5 dn 1.4  News Nation 9.4 up 0.8  India News 8.5 up 0.8  News 24 7.1 up 0.5  Tez 3.1 dn 1.3  NDTV India 2.3 dn 0.2  DD News 1.3 same  

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Dakhal News 16 February 2018


लुढ़कने के बाद भी आज तक नंबर वन

  2018  के पांचवें हफ्ते की टीआरपी से पता चलता है कि एबीपी न्यूज अपनी स्थिति सुधारते हुए नंबर तीन पर पहुंच गया है. वहीं इंडिया टीवी की हालत पतली हुई है. यह चैनल चौथे नंबर पर खिसक गया है. सबसे ज्यादा टीआरपी आजतक की गिरी है लेकिन यह चैनल अभी काफी अंतर से नंबर एक पर बना हुआ है. जी न्यूज की भी टीआरपी गिरी है लेकिन यह अब भी दो नंबर पर है।    TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 5 Aaj Tak 16.9 dn 1.3  Zee News 13.9 dn 1.0  ABP News 12.6 up 0.4  India TV 12.4 same   News18 India 11.7 dn 0.3  News Nation 9.7 up 0.3  India News 8.4 up 0.4  News 24 7.2 same   Tez 3.9 up 1.3  NDTV India 2.0 up 0.2  DD News 1.4 dn 0.1    TG: CSAB Male 22+    Aaj Tak 16.5 dn 1.8  Zee News 14.7 dn 0.8  India TV 13.3 up 0.4  News18 India 12.4 dn 0.4  ABP News 11.9 up 0.3  News Nation 8.6 up 0.2  India News 7.7 up 0.6  News 24 6.6 up 0.1  Tez 4.4 up 1.3  NDTV India 2.5 up 0.2  DD News 1.3 dn 0.1  

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Dakhal News 8 February 2018


मार्क जकरबर्ग

  फेसबुक में किए गए जरूरी बदलाव के बाद फेसबुक यूजर्स फेसबुक पर अब फेसबुक पर कम समय में ज्यादा सुविधाओं का मजा ले रहे हैं। यह कहना है फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग का। पिछले साल दी गई सेवाओं के बदले फेसबुक पर अब यूजर्स 5 फीसद या 50 मिलियन घंटे कम समय बिता रहा है। जकरबर्ग ने लिखा है, 'पिछले क्वार्टर में हमने कुछ वायरल वीडियोज दिखने के लिए बदलाव किए। ये बदलाव इसलिए किए गए की यूजर्स साइट पर ज्यादा समय व्यतीत करें। कुल मिलाकर, हमने फेसबुक पर कुछ ऐसे बदलाव कर दिए जिसके परिणामस्वरूप यूजर्स साइट पर लगभग 50 मिलियन घंटे प्रति दिन कम समय बिताने लगे। बेहतर कम्युनिटी और बिजनस से जुड़ने के बाद आने वाले समय में हम और बेहतर प्लेटफार्म साबित होंगे।' कंपनी ने कंटेंट को लेकर भी बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। फेसबुक को फेक न्यूज फैलाने और अन्य हिंसक सामग्री के सन्दर्भ में काफी आलोचना का सामन करना पड़ा था। पिछले वर्ष अप्रैल में एक फेसबुक यूजर्स ने एक वृद्ध पुरुष को जान से मारते हुए अपना वीडियो शूट कर के साइट पर अपलोड कर दिया था। पिछले वर्ष नवम्बर में जकरबर्ग ने कहा था, 'मैं यह साफ कर देना चाहता हूं की हमारे लिए मुनाफा कमाने से ज्यादा समुदाय की सुरक्षा मायने रखती है।' डिजिटल एक्टिवेशन के डाइरेक्टर Ben Hovaness के अनुसार, टाइम स्पेंट में कमी के चलते कंपनी को न्यूज फीड में अतिरिक्त एड डालने की जरुरत पड़ सकती है।  

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Dakhal News 3 February 2018


गूगल के डूडल लेखिका कमला दास

  गूगल ने गुरुवार को अपना डूडल मलयाली लेखिका कमला सुरय्या को समर्पित किया है। उनका पूर्व नाम कमला दास था और आज ही के दिन उनकी आत्मकथा छपी थी। वो आत्मकथा जिसने पूरे पुरुष समाज को हिला कर रख दिया। 1984 में उन्हों नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था। एक साधारण जिंदगी जीने वाली कमला दास वैसे तो कम ही पहचानी जाती थी लेकिन जब उन्होंने कागज पर अपनी भावनाओं को उतारा तो दुनिया के लिए प्रेरणा बन गईं। 1934 में केरल में जन्मी कमला ने काफी कम उम्र में कविताएं लिखना शुरू किया था। उन्हें यह विरासत में मिला था क्योंकि उनकी मां भी एक अच्छी कवियित्री थीं। कमला ने अपनी जिंदगी के ऊपर एक किताब लिखी जिसका नाम ता माई स्टोरी। उनकी इस आत्मकथा ने पुरुष समाज को हिलाकर रख दिया था। अपनी छवि के विपरीत उन्होंने जो आत्मकथा लिखी थी उसमें उन्होंने बड़ी ही बेबाकी से एक औरत की भावनाओं को व्यक्त किया था और इसके चलते कुछ लोगों ने उनकी लेखनी को गलत भी ठहराया।उनकी इस आत्मकथा ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याती दिलाई थी।  

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Dakhal News 1 February 2018


गूगल के डूडल लेखिका कमला दास

  गूगल ने गुरुवार को अपना डूडल मलयाली लेखिका कमला सुरय्या को समर्पित किया है। उनका पूर्व नाम कमला दास था और आज ही के दिन उनकी आत्मकथा छपी थी। वो आत्मकथा जिसने पूरे पुरुष समाज को हिला कर रख दिया। 1984 में उन्हों नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था। एक साधारण जिंदगी जीने वाली कमला दास वैसे तो कम ही पहचानी जाती थी लेकिन जब उन्होंने कागज पर अपनी भावनाओं को उतारा तो दुनिया के लिए प्रेरणा बन गईं। 1934 में केरल में जन्मी कमला ने काफी कम उम्र में कविताएं लिखना शुरू किया था। उन्हें यह विरासत में मिला था क्योंकि उनकी मां भी एक अच्छी कवियित्री थीं। कमला ने अपनी जिंदगी के ऊपर एक किताब लिखी जिसका नाम ता माई स्टोरी। उनकी इस आत्मकथा ने पुरुष समाज को हिलाकर रख दिया था। अपनी छवि के विपरीत उन्होंने जो आत्मकथा लिखी थी उसमें उन्होंने बड़ी ही बेबाकी से एक औरत की भावनाओं को व्यक्त किया था और इसके चलते कुछ लोगों ने उनकी लेखनी को गलत भी ठहराया।उनकी इस आत्मकथा ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याती दिलाई थी।  

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Dakhal News 1 February 2018


इंडिया टुडे सबसे ज्यादा बिकने वाली मैग्जीन

  ‘इंडियन री‍डरशिप सर्वे 2017’ के आंकड़े बताते हैं कि अंग्रेजी दैनिक अखबारों में ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ नंबर एक पर है. इसकी कुल रीडरशिप 1.3 करोड़ से ज्यादा है. ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ अंग्रेजी भाषा में दूसरा नंबर पर है. इसकी कुल रीडरशिप 68 लाख से ज्यादा है. 'द हिन्दू’ 53 लाख से ज्यादा रीडरशिप के साथ तीसरे नंबर पर है. ‘द इकनॉमिक टाइम्स’ ने ‘मुंबई मिरर’ और ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को पछाड़ दिया है. 'द इकनामिक टाइम्स' की कुल रीडरशिप 31 लाख से ज्यादा है. ‘मुंबई मिरर’ की 18 लाख से ज्यादा रीडरशिप है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की कुल रीडरशिप 15 लाख है. मैगजीन कैटगरी में ‘इंडिया टुडे’ अंग्रेजी नंबर एक पर है. इसकी कुल रीडरशिप 79 लाख है. इंडिया टुडे हिंदी नंबर दो पर है. इसकी कुल रीडरशिप 71 लाख से ज्यादा है. हिंदी की ‘सामान्य ज्ञान दर्पण’ मैग्जीन नंबर तीन पर है. इसकी कुल रीडरशिप 68 लाख से ज्यादा है.

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Dakhal News 20 January 2018


एबीपी न्यूज

‘एबीपी न्यूज’ चैनल को खोजी पत्रकारिता के लिए विशेष संवाददाताओं की जरूरत है. इनवेस्टिगेटिव स्टोरीज के लिए स्पेशल/प्रिंसिपल कॉरेस्पोंडेंट के पद हेतु अप्लाई वही लोग करें जो मीडिया में कम से कम 8 से 10 वर्षों का अनुभव रखते हैं. एबीपी न्यूज को नोएडा आफिस के लिए असिस्टेंट मैनेजर (प्रॉडक्टर मैनेजर- वेब, मोबाइल, ऐप, विडियोज) व सीनियर एग्जिक्यूटिव भी चाहिए. असिस्टेंट मैनेजर के लिए तीन वर्ष से ज्यादा का अनुभव होना चाहिए. सीनियर एग्जीक्यूटिव के लिए 2-3 वर्ष का अनुभव होना जरूरी है. इच्छुक अभ्यर्थी अपना बायोडाटा resumes@abpnews.in पर भेजें. साथ ही सब्जेक्ट लाइन में पद का नाम जरूर लिखें.

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Dakhal News 20 January 2018


जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र मिले जर्नलिस्ट यूनियन के पदाधिकारी

एमपी के जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र से आज निवास पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश, इंदौर शाखा के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। भेंट करने वालों में श्री ओमप्रकाश फरकिया, श्री चम्पालाल गुर्जर, श्री राजेन्द्र पुरोहित, श्री ओमप्रकाश जैन, श्री ओम बाबा, श्री संतोष वाजपेयी, श्री घनश्याम सोनी और श्री अशोक बड़गुजर आदि शामिल थे। डॉ. मिश्र से की सौजन्य भेंट  जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र से आज निवास पर मालवा श्रमजीवी पत्रकार संघ, रतलाम के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर मालवा श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री लखन गेहलोत, जाट पत्रिका के संपादक श्री गजेन्द्र जाट, संस्कार टुडे के संपादक श्री गोपाल परमार आदि उपस्थित थे। डायरी, कैलेण्डर का विमोचन किया  डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज साप्ताहिक कृषक जगत भोपाल द्वारा प्रकाशित वर्ष 2018 की डायरी का विमोचन किया। इस अवसर पर समाचार पत्र के संपादक श्री सुनील गंगराड़े और संपादकीय सहयोगी श्री राजेश दुबे उपस्थित थे। जनसम्पर्क मंत्री ने निवास पर दैनिक लोकोत्तर, भोपाल द्वारा प्रकाशित वर्ष 2018 के टेबिल कैलेण्डर का भी विमोचन किया। विमोचन अवसर पर अखबार के संपादक श्री विवेक पटैरिया और प्रबंध संपादक श्री कैलाश वाजपेयी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 16 January 2018


जी न्यूज बढ़ा,इंडिया टीवी का बुरा हाल

  इस साल के पहले हफ्ते की टीआरपी में  सबसे अच्छी खबर जी न्यूज के लिए है. यह चैनल तेजी से नंबर एक की तरफ बढ़ रहा है. पंद्रह प्लस कैटगरी में यह सबसे ज्यादा टीआरपी हासिल करके अपने प्रतिद्वंदियों को काफी पीछे छोड़ चुका है. नंबर वन पर काबिज 'आजतक' को तगड़ी चुनौती दे रहा है. बाइस प्लस कैटगरी में तो जी न्यूज नंबर वन बन भी चुका है. सबसे बुरा हाल इंडिया टीवी का है. यह चैनल हमेशा नंबर दो पर रहा है और कभी कभी नंबर एक भी हो जाया करता था. लेकिन इसने पांच नंबर पर गोता लगा दिया है. इससे आगे एबीपी न्यूज, न्यूज एट्टीन इंडिया और जी न्यूज हो चुके हैं. लग रहा है नए साल में रजत शर्मा को कुछ बड़ा करना पड़ेगा और ठीकठाक नए-तेजतर्रार लोगों के हवाले चैनल को करना पड़ेगा.  नेशनल न्यूज़ चैनल trp week  1  Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 1'2018 Aaj Tak 16.0 dn 0.1 Zee News 15.6 up 1.8 News18 India 12.6 dn 0.6 ABP News 12.0 up 1.1 India TV 11.9 dn 0.5 News Nation 9.1 dn 0.4 India News 8.2 dn 0.5 News 24 7.9 dn 0.5 Tez 2.9 same  NDTV India 2.0 dn 0.1 DD News 1.8 dn 0.1 TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.8 up 2.8 Aaj Tak 15.6 dn 0.8 News18 India 13.7 dn 0.3 India TV 12.1 dn 0.9 ABP News 11.2 up 0.5 News Nation 7.8 same  News 24 7.3 dn 0.5 India News 7.1 dn 0.8 Tez 3.4 same  NDTV India 2.5 dn 0.1 DD News 1.6 same  

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Dakhal News 15 January 2018


विष्णु श्रीधर वाकणकर

मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव संस्कृति  मनोज श्रीवास्तव एवं जनसम्पर्क आयुक्त पी. नरहरि ने स्वराज भवन में प्रख्यात कला गुरु और पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर पर केन्द्रित दस्तावेजी पुस्तक 'मालवा की कला-विभूति- पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर'' का संयुक्त रूप से लोकार्पण किया। अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय के आचार्य श्री रामदेव भारद्वाज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वरिष्ठ साहित्कार श्री कैलाशचन्द्र पंत कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। पुस्तक में डॉ. वाकणकर के व्यक्तित्व और कृतित्व के प्राय: सभी पक्षों का समावेश है। वरिष्ठ पुरातत्व वेत्ता पं. नारायण व्यास ने आभार व्यक्त किया। समारोह में कला, साहित्य और पुरातत्व विषय के जानकार विशिष्टजन के साथ-साथ डॉ. वाकणकर की वरिष्ठ शिष्या डॉ. पुष्पा चौरसिया (उज्जैन) भी मौजूद थीं।  

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Dakhal News 13 January 2018


प्रो.बीके कुठियाला

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिलने तक यहां के वर्तमान कुलपति प्रो.बीके कुठियाला ही यहां की कमान सभालेंगे। उनका कार्यकाल 18 जनवरी को समाप्त हो रहा है। मंगलवार को विवि की प्रबंध समिति और महापरिषद की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। नए कुलपति के लिए सर्च कमेटी के गठन को मंजूरी दी गई। बैठक में तय हुआ कि मीडिया के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के लिए विवि में मीडिया इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके लिये नीति आयोग से मंजूरी मिल गई है। यह बैठक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज में सामाजिक, आर्थिक विषमता फैलाने वाले कारकों और उनके समाधान के विषयों पर विश्वविद्यालय द्वारा विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय में अद्वैत वेदांत विषय पर भी शोध और अध्ययन किया जाए। बैठक में कहा गया कि नए पदों की पूर्ति उधा शिक्षा और यूजीसी नियमों के अंतर्गत की जाए। बैठक में बताया गया कि विवि में भाषा अध्ययन और संस्कृति अध्ययन केंद्रों ने काम शुरू कर दिया है। 

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Dakhal News 10 January 2018


 मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर

मुख्यमंत्री चौहान की अध्यक्षता में प्रबंध समिति और महा-परिषद की बैठक सम्पन्न  मीडिया के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के लिये माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जायेगा। इसके लिये नीति आयोग से मंजूरी मिल गयी है। समाज में सामाजिक, आर्थिक विषमता फैलाने वाले कारकों और उनके समाधान के विषयों पर विश्वविद्यालय द्वारा विस्तृत अध्ययन कराया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज यहाँ सम्पन्न विश्वविद्यालय की प्रबंध समिति और महापरिषद की बैठक में ये निर्णय लिये गये। मुख्ममंत्री श्री चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय में अद्वैत वेदांत विषय पर भी शोध और अध्ययन किया जाये। नये पदों की पूर्ति उच्च शिक्षा तथा यूजीसी नियमों के अंतर्गत की जाये। बैठक में बताया गया कि विश्वविद्यालय में भाषा अध्ययन केन्द्र तथा संस्कृति अध्ययन केन्द्रों ने कार्य शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय में विदेशी मीडिया अध्ययन केन्द्र स्थापित किया जायेगा जिसमें पाकिस्तान, चीन और नेपाल के मीडिया में प्रकाशित समाचारों का विश्लेषण किया जायेगा। विश्वविद्यालय द्वारा बी.सी.ए. की परीक्षा ऑनलाइन ली गयी है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीते एक वर्ष में 210 नयी अध्ययन संस्थाओं को मान्यता दी गई है। इस अवधि में विद्यार्थियों की संख्या 12 प्रतिशत बढ़ी है। विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत की पहली न्यूज मैग्जीन अतुल्य भारतम का प्रकाशन किया गया है। विश्वविद्यालय में सोशल मीडिया रिसर्च सेंटर बनाया गया है। बैठक में वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, जनसम्पर्क एवं जल-संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, सांसद श्री आलोक संजर, कुलपति डॉ. बी.के. कुठियाला सहित महा-परिषद के अशासकीय और शासकीय सदस्यगण उपस्थित थे।  

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Dakhal News 10 January 2018


राकेश पाठक बने कर्मवीर के प्रधान संपादक

  वरिष्ठ पत्रकार व कवि डॉ राकेश पाठक को "कर्मवीर" के 'प्रधान संपादक' का दायित्व सौंपा गया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दादा माखनलाल चतुर्वेदी सन 1920 में प्रारम्भ "कर्मवीर" के संस्थापक संपादक थे। वर्तमान में पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर के पास 'कर्मवीर' का सर्वाधिकार है। श्रीधर जी ने 'कर्मवीर' का दायित्व डॉ पाठक को सौंपा है। पहले चरण में "कर्मवीर" न्यूज़ पोर्टल/ वेबसाइट के रूप में अगले कुछ दिनों में प्रारम्भ होगा। 'कर्मवीर' पत्रिका का प्रकाशन विवेक श्रीधर के संपादन में नियमित हो रहा है। अगले चरण में 'कर्मवीर' अख़बार के रूप में पुनः प्रकाशित होगा। उल्लेखनीय है कि डॉ राकेश पाठक नईदुनिया, नवभारत, नवप्रभात,प्रदेशटुडे जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में वर्षों तक संपादक रहे हैं। इसके अलावा न्यूज़ पोर्टल "डेटलाइन इंडिया" के 'प्रधान संपादक' रहे। 'सांध्य समाचार' से पत्रकारिता शुरू करने वाले डॉ पाठक ने स्वदेश, सांध्यवार्ता, आचरण, लोकगाथा आदि अखबारों में भी काम किया। उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं। हाल ही में डॉ पाठक को उनके कविता संग्रह "बसंत के पहले दिन से पहले" के लिए राष्ट्रीय स्तर का "हेमंत स्मृति कविता सम्मान" देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा अनेक सम्मान और पुरस्कार उन्हें मिल चुके हैं।

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Dakhal News 6 January 2018


सिंधी पत्रकारिता पर 6 को राष्ट्रीय संगोष्ठी

    भोपाल के संत हिरदाराम नगर में  राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद एवं अखंड सिंधु संसार विचार मंच ने सिंधी भाषा के विकास में सिंधी अखबारों का योगदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है।  विचार मंच के अध्यक्ष ज्ञानचंद लालवानी के अनुसार दो दिवसीय संगोष्ठी 6 जनवरी को शहीद भवन में जनवरी को समन्वय भवन में होगी। संगोष्ठी में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, अजमेर, लखनऊ आदि शहरों के सिंधी संपादकों एवं प्रकाशकों को आमंत्रित किया गया है। कार्यशाला के दौरान सिंधी संस्कृति पर केंद्रित कार्यक्रम भी होंगे।  

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Dakhal News 4 January 2018


ओशो

ओशो रेत पर खींची गई लकीरों की तरह वह जिंदगी है। हवाएं आएंगी और रेत पुंछ जाएगी। कितने लोग हमसे पहले रहे हैं इस पृथ्वी पर! झहां हम बैठे हैं उस जमीन में नामालूम कितने लोगों की कब्र बन गई होगी। जिस रेत पर हम बैठे हैं वह रेत नामालूम कितने लोगों की जिंदगी की राख का हिस्सा है। लोग इस पृथ्वी पर रह रहे हैं और कितने लोग खो गए हैं! एाज कौन-सा उनका निशान है? खेौन-सा उनका ठिकाना है? उन्होंने क्या नहीं सोचा होगा, क्या नहीं किया होगा! बाहर की जिंदगी बेमानी है। बाहर की जिंदगी का बहुत अंतिम अर्थ नहीं है। मैं सुनता हूं कि द्वारिका सात बार बनी और बिगड़ी। सात करोड़ बार बन-बिगड़ गई होगी। कुछ पता नहीं है। इतना अंतहीन है विस्तार यह सब, इसमें सब रोज बनता है और बिगड़ जाता है। लेकिन कितने सपने देखे होंगे उन लोगों ने! इकतनी इच्छाएं की होंगी कि ये बनाएं, ये बनाएं। सब राख और खेत हो गया, सब खो गया। हम भी खो जाएंगे कल। हमारे भी बड़े सपने हैं। हम भी क्या-क्या नहीं कर लेना चाहते हैं! लेकिन समय की रेत पर सब पुछ जाता है। हवाएं आती हैं, और सब बह जाता है। बाहर की जिंदगी का बहुत अंतिम अर्थ नहीं है। बाहर की जिंदगी का बहुत अंतिम अर्थ नहीं है। बाहर की जिंदगी खेल से ज्यादा नहीं है। हां, ठीक से खेल लें, इतना काफी है। क्योंकि ठीक से खेलना भीतर ले जाने में सहयोगी बनता है। लेकिन बाहर की जिंदगी का कोई बहुत मूल्य नहीं है। तो कुछ लोग बाहर की जिंदगी में खोकर भटक जाते हैं। फिर कुछ लोग भीतर की तरफ चलते हैं तो वहां एक गलत रास्ता बनाया हुआ है। वहां धर्म के नाम पर दुकानें लगी हैं। वहां धर्म के नाम पर हिंदू, मुसलमान, ईसाइयों के पुरोहित बैठे हैं। वहां धर्म के नाम पर आदमी के बनाए हुए ईश्वर आदमी के बनाए हुए देवता, आदमी की बनाई हुई किताबें बैठी हैं। वे भटका देती हैं। बाहर से किसी तरह आदमी बचता है क्क कुएं से बचता है और खाई में गिर जाता है। उस भटकन में चल पड़ता है। उस भटकन से कुछ लोगों को फेायदा है। कुछ लोग शोषण कर रहे हैं। हजारों साल से कुछ लोग इसी का शोषण कर रहे हैं क्क आदमी की इस कमजोरी का, आदमी की इस नासमझी का, आदमी की इस असहाय अवस्था का-कि आदमी जब बाहर से भीतर की तरफ मुड़ता है तो वह अनजान होता है, उसे कुछ पता नहीं होता कि कहां जाऊं? वहां गुरु खड़े हुए हैं। वे कहते हैं, आओ, हम तुम्हें रास्ता बताते हैं। हमारे पीछे चलो। हम जानते हैं। और ध्यान रहे, जो आदमी कहता है, मैं जानता हूं, मेरे पीछे आओ, यह आदमी बेईमान है। क्योंकि धर्म की दुनिया में जो आदमी प्रविष्ट होता है, उसका मैं ही मिट जाता है, वह यह भी कहने की हिम्मत नहीं कर सकता कि मैं जानता हूं। सच तो यह है कि वहां कोई जानने वाला नहीं बचता, वहां कुछ जाना जाने वाला नहीं होता। वहां जानने वाला भी मिट जाता है, जो जाना जाता है वह भी मिट जाता है। वहां न ज्ञाता होता है और न ज्ञेय। इसलिए जो जान लेता है वह यह नहीं कहता कि मैं जानता हूं, आओ मैं तुम्हें ले चलूंगा। और जो जान लेता है वह यह भी जान लेता है कि कोई कभी किसी दूसरे को नहीं ले गया है। प्रन्येक को स्वय ही जाना पड़ता है। धर्म की दुनिया में कोई गुरु नहीं होते। लेकिन वह जो पाखंड का धर्म है, वहां गुरुओं के अड्डे हैं। इसलिए ध्यान रहे, जो गुरु के पीछे जाएगा वह कभी परमात्मा तक नहीं पहुंचता। क्योंकि वे गुरुओं की दुकानें अपने पीछे ले जाती हैं और आदमी के बनाए हुए जाल में उलझा देती हैं। करोड़ों-करोड़ों लोग चींटियों की तरह यात्रा करते रहते हैं पीछे एक- दूसरे के। यह सारी-की सारी यात्रा व्यर्थ है। न कोई धर्म का तीर्थ है, न कोई धर्म का मंदिर है, न कोई धर्म की किताब है, न कोई धर्मगुरु है। और जब तक हम इन बातों में भटके रहेंगे, तब तक हम कभी भी धर्म को नहीं जान सकते। लेकिन आप कहेंगे, फिर हम क्या करें? एगर हम गुरु के पीछे न जाएं तो हम कहां जाएं? इकसी के पीछे मत जाओ! ठहर जाओ! तुम वहां पहुंच जाओगे जहां पहुंचना जरूरी है। कुछ चीजें हैं, जहां चलकर पहुंचा जाता है और कुछ चीजें ऐसी हैं जहां रूककर पहुंचा जाता है। धर्म ऐसी की चीज है, वहां चलकर नहीं पहुंचना पड़ता। यह कभी शायद सोचा नहीं होगा। मैं द्वारिका तक आया तो मुझे यात्रा करके आना पड़ा, क्योंकि मेरे और आपके बीच में फेासला था। फेासले को पूरा करना पड़ा। अगर मैं अभी उटकर आपके पास आऊं तो मुझे चलना पड़ेगा, क्योंकि आपके और मेरे बीच में दूरी है, दूरी को पार करना पड़ेगा। लेकिन आदमी और परमात्मा के बीच में दूरी ही नहीं है। इसलिए चलने का सवाल नहीं है वहां। वहां जो चलेगा वह भटक जाएगा। वहां जो ठहर जाता है वह पहुंच जाता है। इसलिए पहली बात ठीक से समझ लेना, वहां चलकर नहीं पहुंचना है। इसलिए किसी गुरु की जरूरत नहीं है, किसी वाहन की जरूरत नहीं है, किसी यात्रा की जरूरत नहीं है। वहां तो वे पहुंचते हैं जो सब तरह से रुक जाते हैं और ठहर जाते हैं।  

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Dakhal News 31 December 2017


 सीडी कांड में पत्रकार विनोद वर्मा को मिली जमानत

    रायपुर में कथित अश्‍लील सीडी कांड मामले में पत्रकार विनोद वर्मा को जमानत मिल गई है। सीबीआई कोर्ट ने 1 लाख रुपए के मुचलके पर वर्मा को जमानत दी है। जानकारी के अनुसार नियत तिथि पर सीबीआई द्वारा चालान पेश नहीं करने का लाभ देते हुए जमानत दी गई है। सीबीआई कोर्ट के जज शांतनु देशलहरे ने उन्‍हें जमानत दी है। मंत्री की कथित सीडी मामले में विनोद वर्मा को गाजियाबाद से 28 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। तय नियम के मुताबिक 60 दिन के भीतर चालान पेश किया जाना था लेकिन चालान अभी तक पेश नहीं किया। इसी वजह से जिला एवं सत्र न्यायालय ने बिनोद वर्मा की जमानत की याचिका मंजूर कर ली। आपको बता दें कि इस पूरे मामले में जांच सीबीआई कर रही है। पिछले दिनों ही मंत्री की कथित सीडी के मामले में गिरफ्तार वरिष्‍ठ पत्रकार विनोद वर्मा को सीबीआई ने 12 दिनों की न्यायिक रिमांड पर लिया था। सीबीआई ने 14 दिनों की रिमांड मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 3 जनवरी तक 12 दिनों की ही रिमांड दी गयी थी। मंत्री राजेश मूणत ने 27 अक्टूबर को रायपुर के सिविल लाइन थाने में विनोद वर्मा व भूपेश बघेल के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद सरकार ने सीडी की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया। सरकार के आवेदन के बाद ही सीबीआई ने जांच शुरू की। मंत्री का आरोप है कि भूपेश बघेल व अन्य ने उनके नाम की झूठी सीडी लोगों को बांटी है।  

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Dakhal News 28 December 2017


चैतन्य कीर्ति

चैतन्य कीर्ति  अक्सर कुछ लोग अच्छे विचार को अपनाने से भी परहेज करते नजर आते हैं। उनका मानना है कि यह विचार उनके गुरु का तो नहीं है, उनके धर्म का तो है ही नहीं फिर उसे वे कैसे अपना सकते हैं। कुछ लोग अपने विचारों को दूसरों से छिपाकर रखते हैं और मानते हैं कि इस पर सिर्फ उनका या उनके अनुयायियों का ही अधिकार है। इन दोनों ही तरह के लोगों के लिए एक गुरु और शिष्य संवाद मिसाल हो सकता है। संवाद कुछ इस तरह है। एक बार एक शिष्य ने गुरु से कहा, 'हर दिन आप गूढ़ उद्बोधन देते हैं जो हमारे जीवन को बदलने की क्षमता रखते हैं। क्या अच्छा नही होगा कि हम इन विचारों को पुस्तक रूप में संग्रहित कर लें और उन्हें आने वाली पीढ़ी के लिए किताब रूप में सुरक्षित करें? किताबें आपकी कीर्ति को सदियों तक बनाए रखेंगी और जो पैसा आएगा उसका उपयोग हम आश्रम और अपने रोजमर्रा के खर्च में कर सकते हैं।' गुरु ने कहा, 'हां, इन्हें प्रकाशित करना एक अच्छा विचार है। लेकिन याद रहे कि मेरे उद्बोधन में जो गूढ़ तत्व और तीव्रता है वह मेरी अपनी नहीं है, वह तो दैवीय है जो मेरे जरिए व्यक्त हो रही है। मैं इन उद्बोधनों का श्रेय खुद नहीं लेना चाहता हूं। मैं तो सिर्फ खोखले बांस की तरह हूं और दैवीय गीत मेरे जरिए व्यक्त हो रहा है। जब भी साधु बोलता है तो वह तो केवल माध्यम होता है और उसके लिए दैवीय शक्ति लोगों तक पहुंचती है। बांसुरी अपने आप नहीं गा सकती है। मगर वह धुन को लोगों तक पहुंचाने की शक्ति रखती है। मनुष्य बांसुरी की तरह ही है। पक्षी, वृक्ष, सूर्य और चंद्रमा सबकुछ बांसुरी की तरह ही तो हैं। जो गूढ़ संदेश कृष्ण, बुद्ध, जीसस, मोहम्मद साहब, नानक, कबीर, मीरा और उपनिषद के अज्ञात संतों ने दिया है वह असल में तो दैवीय ही है।' गुरु ने आगे कहा, 'उपनिषद में कितनी गूढ़ बाते हैं लेकिन कितना आश्चर्य कि हम उसके लेखक को नहीं जानते। दैवीय शक्ति अपनी शिक्षा किसी भौतिक लाभ के लिए नहीं साझा करती है, यह सबकुछ नाम और ख्याति के लिए नहीं होता। अगर वे ऐसा करती हैं तो उनकी शिक्षाएं बेकार हो जाएंगी। इन लेखकों के जरिए सत्य प्रवाहित होता है और इससे ज्यादा वे ज्यादा कुछ नहीं सोचते हैं। उनके साथ यह भी जोखिम रहता है कि उन्हें गलत समझ लिया जाए और किसी भी तरह की छेड़छाड़ कर दी जाए लेकिन फिर भी वे कोई समझौता नहीं करते। जीसस को सत्य की राह पर चलने के लिए सूली पर चढ़ा दिया गया। सत्य किसी भी व्यक्ति से संबंधित नहीं है वह तो सार्वभौमिक है।' तब शिष्य ने एक और प्रश्न पूछा, 'प्रिय गुरु, मगर कुछ गुरु चोला ओढ़े हुए होते हैं। ये फर्जी साधु आपके शब्दों को चुरा सकते हैं और लोगों तक पहुंचा सकते हैं। क्या हमें आपके प्रवचनों को कॉपीराइट नहीं करना चाहिए, ताकि कोई उन्हें चुरा न सके?' गुरु ने जवाब दिया, 'सत्य पर सिर्फ मेरा अधिकार नहीं है। मैं सत्य को सिर्फ अपनी बपौती नहीं मान सकता। इस तरह का ज्ञान तो सदियों से ज्ञानी पुरुष देते आए हैं और भविष्य में भी यह व्यक्त किया जाता रहेगा। इसलिए विचारों के कॉपीराइट को लेकर उलझन में मत रहो। इस तरह की चिंता भी मत करो। अगर तुम कुछ करना ही चाहते हो तो इसे बिना किसी चिंता के लोगों के बीच फैलाओ। मैं तुम्हें वही बात कहना चाहूंगा जो जीसस ने अपने शिष्यों से कही थी। उन्होंने कहा था कि छत पर चढ़ जाओ और वहां से जोर से सच बोलो क्योंकि लोगों के कान बहरे हैं। उन्होंने कहा था कि जब तक तुम जोर से नहीं बोलोगे सच सुना नहीं जाएगा। मैं कहता हूं कि सच तो बिना किसी बाधा के लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए सीमा मत बांधो। ज्ञान के प्रकाश को फैलने दो, इसकी सुगंध चारों ओर हो जाने दो। ओशो कहते थे, 'वस्तुओं का कॉपीराइट किया जा सकता है लेकिन विचारों का नहीं और इसलिए ध्यान का कॉपीराइट नहीं किया जा सकता। ये बाजार की चीजें ही नहीं हैं। कोई भी व्यक्ति इन पर अपना एकाधिकार नहीं कर सकता। पश्चिमी देश वस्तु और अनुभव के बीच का फर्क नहीं समझ सकते हैं। हजार वर्षों से पूर्व में ध्यान किया जाता रहा है लेकिन किसी ने भी उसके कॉपीराइट या ट्रेडमार्क की बात नहीं की है।  

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Dakhal News 24 December 2017


ndtv india

एनडीटीवी समूह में जमकर छंटनी की जा रही है. खुद एनडीटीवी ग्रुप ने मुंबई स्टाक एक्सचेंज को सूचित किया है कि वह करीब 25 प्रतिशत स्टाफ में कटौती करने जा रहा है. उधर, एनडीटीवी की एडिटोरियल डायरेक्टर और सीनियर एंकर सोनिया सिंह ने ट्विटर पर कहा है कि एनडीटीवी को सरकारी विज्ञापन नहीं मिल रहा है. पायनियर के पत्रकार जे गोपीकृष्णन ने ट्विटर पर कहा है कि एनडीटीवी में छंटनी के खिलाफ क्या कोई प्रेस क्लब में इकट्ठा होगा? ‘NDTV informs Stock Exchange of terminating 25% of staffers. anybody assembling in Press Clubs to protest?’. एनडीटीवी की पूर्व मैनेजिंग एडिटर बरखा दत्त ने  जे गोपीकृष्णन के ट्वीट का समर्थन करते हुए कहा कि वाकई अब कोई छंटनी के मारे पत्रकारों के समर्थन में प्रेस क्लब से मार्च नहीं निकालेगा. पायनियर के पत्रकार के ट्वीट के जवाब में एनडीटीवी की सोनिया सिंह ने सरकारी विज्ञापन न मिलने वाली बात कही है. ‘Yes they should actually to ask why NDTV isnt getting any 'official' ads. Speaking truth to power has its financial costs & we're paying it’। उधर, बताया जा रहा है कि कई दिनों से हर रोज पचास मीडियाकर्मी की नौकरी एनडीटीवी समूह से जा रही है. कुल तीन सौ लोगों को निकाला गया है या निकाला जाने की प्रक्रिया जारी है. इस बाबत वरिष्ठ पत्रकार शाहिद फरीदी कहते हैं : ''NDTV sacked 50 employees yesterday and will fire another 200 in the next couple of weeks. I hope Press Club managing committee would convene a meeting in support of fired journalists just like it did when the owners of NDTV were raided for alleged financial bungling. It's time to see if the present committee of the Press Club stands as strongly for working journalists as it did with owners of the TV channel.'' सूत्रों का कहना है कि एनडीटीवी वल्ड वाइड की पूरी टीम बाहर कर दी गई है. स्पोट्स डेस्क इंग्लिश से कई लोग बाहर किए गए हैं. अमिताव, अदिति, मधुसूदन आदि छंटनी के दायरे में आए हुए बताए जाते हैं. करीब पंद्रह वीडियो एडिटर्स की नौकरी गई है. एनडीटीवी इंडिया से भी ढेर सारे लोग निकाले गए हैं. [साभार भड़ास फॉर मीडिया ]    

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Dakhal News 21 December 2017


रवि जैन

  सागर में मोती नगर वार्ड निवासी रवि जैन को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना ने सफल उद्यमी बना दिया है। इनके सामान्य परिवार का गुजारा फोटो फ्रेमिंग के परिवारिक व्यवसाय से ही अभी तक चलता रहा है। अब रवि उन्नत तकनीक से फोटो फ्रेमिंग करते हैं। इससे अच्छी आमदनी होने लगी है, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है, बाजार में रवि की साख भी बढ़ी है।  रवि कुछ समय पहले तक अपने इस परिवारिक व्यवसाय को उन्नत तकनीक एवं नए उपकरणों की सहायता से आगे बढ़ाकर जिला एवं प्रदेश स्तर तक पहुँचाना चाहते थे। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह यह सब कर पाएँ। इसी दौरान उन्हें अखबार एवं रेड़ियो के माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के बारे पता चला। योजना की सम्पूर्ण जानकारी लेकर रवि ने तुरन्त इस योजना में पंजीयन करवाकर बैंक को ऋण के लिये आवेदन दिया। रवि जैन को व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए बैंक ने 99 लाख 37 हजार का रूपये का ऋण मिला। इसके साथ-साथ उन्हें सरकार द्वारा मार्जिन मनी की सहायता एवं ब्याज में अनुदान भी मिला। रवि जैन ने योजना में मिली सहायता से नए उपकरण खरीदे और उन्नत तकनीक का प्रयोग कर अपने व्यवसाय का विस्तार किया। आज रवि का कारोबार राज्य स्तरीय हो गया है। कारोबार इतना बढ़ गया है कि अन्य 5 लोगों को भी नियमित रोजगार पर रख लिया है। अब रवि अन्य लोगों को भी मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का लाभ लेने के लिये प्रेरित कर रहे हैं।  

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Dakhal News 21 December 2017


जयपुर से आईबीए न्यूज़ चैनल

  जयपुर से आईबीए न्यूज़ चैनल  लांच होने जा रहा हैं | इस चैनल को ढेर सारे स्टॉफ की जरूरत है |  आईबीए को आउटपुट और इनपुट असाइनमेंट में ट्रेनी, असिस्टेंट प्रोड्यूसर, एसोसिएट प्रोड्यूसर, प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर (जयपुर के लिए) 38 पद ,आई.टी. (जयपुर के लिए) 6 पद, ग्राफ़िक्स एडिटर (जयपुर के लिए) 6 पद,पैनल, एमसीआर, पीसीआर में काम करने वाले स्टॉफ (जयपुर के लिए), वीडियो एडिटर (जयपुर के लिए) 8 पद,एंकर,दिल्ली में रिपोर्टर, कैमरामैन |  जो लोग इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वो ibanewschannel@gmail.com पर CV  भेज सकते हैं।  

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Dakhal News 14 December 2017


वीरम टीवी

सैटेलाइट हिंदी न्यूज चैनल 'वीरम टीवी न्यूज 24×7' को नोएडा ऑफिस के लिए विभिन्न पदों पर अनुभवी युवक-युवतियों की शीघ्र आवयश्कता है |  चैनल में  मैनेजर 1 पोस्ट,संपादक न्यूज़ 2 पोस्ट, न्यूज़ एडिटर 6 पद , प्रोड्यूसर  6 पद ,वीडियो एडिटर 6 पद ,ग्राफिक्स एडिटर 6 पद , न्यूज़ एंकर  4 पद कम्प्यूटर ऑपरेटर 20 पद,कैमरामेन 5 पोस्ट,रिपोर्टर 5 पोस्ट,मार्केटिंग हेड 2 पोस्ट,आईटी 4 पोस्ट |  इंटर्नशिप से जुड़ने के लिए भी युवक युवतियां संपर्क कर सकते हैं... पूर्ण विवरण फ़ोटो सहित इस ईमेल पर बायोडाटा भेजें... सब्जेक्ट लाइन में पद का नाम जरूर लिखें... ईमेल पता Viramtvnews@gmail.com है |   

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Dakhal News 14 December 2017


नईदुनिया

  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 'नईदुनिया संसदीय सम्मान' 2017 समारोह में प्रदेश के 10 विधायकों (महिला और पुरुष) को सम्मानित किया गया। नईदुनिया द्वारा स्थापित यह पुरस्कार उन विधायकों को दिया जाता है जिनका विधानसभा में प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहता है। जिन विधायकों को सम्मानित किया गया है, उनमें शामिल हैं - डॉ. गोविंद सिंह (कांग्रेस), ऊषा चौधरी (बसपा), यशपाल सिंह सिसोदिया (भाजपा), शीला त्यागी (बसपा), मुरलीधर पाटीदार (भाजपा), ममता मीना (भाजपा), सुखेंद्र सिंह (कांग्रेस) और हिना कावरे (कांग्रेस)। वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया को समारोह में उत्कृष्‍ट मंत्री का सम्मान मिला। संसदीय परंपराओं के बेहतर निर्वहन और सवालों के संतोषजनक उत्तर श्रेणी में उनका चयन किया गया। विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे। वहीं अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने की। विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह कार्यक्रम के विशेष अतिथि रहे। आरंभ में नईदुनिया परिवार के सदस्यों ने अतिथियों का स्‍वागत किया। एक बड़ी स्‍क्रीन पर नईदुनिया, नवदुनिया के सामाजिक सरोकारों को प्रदर्शित किया गया। अपने संबोधन में दैनिक जागरण समूह के सीईओ व प्रधान संपादक संजय गुप्त ने कहा कि वे चाहेंगे कि अन्‍य प्रदेशों और संसद में भी उनके साथी यह कार्य आरंभ करें जो प्रेरणा बने। उन्होंने कहा कि पत्रकार होने के नाते हमने संसदीय सम्मान का बीड़ा उठाया है। अतिथियों के स्वागत की रस्म के बाद चुन गए सर्वश्रेष्‍ठ विधायकों को सम्‍मानित किया गया। मप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने नईदुनिया/नवदुनिया परिवार को आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कहते थे, हमें सपने देखना चाहिए। आप बड़े सपने देखेंगे तो ही आगे बढ़ेंगे। डॉ. कलाम को हमने बुलाया था। उनका सम्मान किया था। हम सब उनसे बड़े प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा कि सदन में उपस्थिति रहती है तो इसका सार्थक नतीजा निकलता है। जो चार महिलाएं श्रेष्ठ चुनी गई हैं, वे किसी भी विषय पर बोलने में सक्षम हैं। श्री सिंह ने कहा कि गोविंद सिंह जी काफी अनुभवी हैं। हम उन्हें ऑलराउंडर करते हैं। जहां कमी पड़े, वहां हम बल्लेबाजी करने भेज देते हैं। कई बार उनके तेवर बहुत तीखे होते हैं। श्रेष्ठ चुने गए विधायकों को भी उन्‍होंने बधाई देते हुए कहा कि जयंत मलैया बड़े ही सहज व्यक्ति हैं। लांजी विधायक हिना कावरे जब मंच पर आई तो सीएम ने कहा बहुत-बहुत बधाई बेटी। हिना के प्रभावी भाषण देने की काबिलियत की भी मंच से तारीफ की गई। हमारी तीन बहनों और एक बेटी को सम्मान मिला है। ये भी बधाई के पात्र हैं। उन्‍होंने कहा कि गोविंद सिंह जी सिर्फ सच बोलते हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जयंत भाई के हाथ में खजाना सुरक्षित है। नईदुनिया में स्वस्थ परंपरा सीएम ने कहा कि नईदुनिया में स्वस्थ परंपरा है। मुमकिन है आपने दिखाया। दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं। जनप्रतिनिधियों के सामने अपेक्षाओं का अथाह सागर होता है। बहुत उम्मीदें हैं। ऐसे में आपने सम्मानित करके मनोबल बढ़ाया है। इसके लिए नईदुनिया परिवार का धन्यवाद। उन्होंने कहा कि यह हम सब का सम्मान है। मैं उनका अभिनंदन करता हूं। अच्छे काम का सम्मान होने ही चाहिए। इन्होंने एक बड़ी लकीर खींची है। अपराधों के खिलाफ सामाजिक आंदोलन चले और इसमें नईदुनिया जैसे मीडिया संस्थान अहम भूमिका निभा सकते हैं। आभार प्रदर्शन नईदुनिया के वॉइस प्रेसीडेंट संजय शुक्ला ने किया। गुढ़ के विधायक सुंदरलाल तिवारी कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। विधायकों का चयन विधानसभा सचिवालय द्वारा तैयार रिकॉर्ड के आधार पर ज्यूरी ने किया है। ज्यूरी ने उन विधायकों को चुना है जिन्होंने प्रश्न, ध्यानाकर्षण सूचना, विधेयक चर्चा और उपस्थिति में सर्वाधिक भागीदारी की है। संसदीय सम्मान समारोह का यह निरंतर दूसरा वर्ष है। ज्यूरी ने तय किए नाम विधानसभा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विधायकों का चयन करने के लिए नईदुनिया ने वरिष्ठ नेताओं और संसदीय विशेषज्ञों की ज्यूरी बनाई थी।इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, पूर्व विधायक शैलेंद्र प्रधान और विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव ईसराणी शामिल थे।  

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Dakhal News 5 December 2017


CM शिवराज सिंह

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'नईदुनिया संसदीय सम्मान' 2017 समारोह में प्रदेश के श्रेष्ठ 10 विधायकों को सम्मानित किया गया। विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि, राजनीति तोड़ती है, लेकिन नईदुनिया ने जोड़ दिया। उन्होंने सम्मानित विधायकों को बधाई देते हुए कहा, यह हम सब का सम्मान है। मैं अभिनंदन करता हूं। अच्छे काम का सम्मान होना ही चाहिए। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा मैं बधाई देना चाहता हूं सम्‍मानित मित्रों को।जयंत मलैया जी खजाने को संभालने की कोशिश करते हैं लेकिन हम भावांतर जैसी योजना ले आते हैं तो एक झटके में 4 हजार करोड़ खजाने से निकल जाते हैं। लेकिन मैं आश्‍वस्‍त रहता हूं कि जयंत भाई के हाथ में प्रदेश का खजाना सुरक्षित है।हमारे सारे साथी गण बड़ी कुशलता से अपने कार्य को अंजाम देते हैं। डाॅ गोविंद सिंह जी जो सच होता है वही बोलते हैं, बाकी लोग तो सीआर खराब होने के डर से बोलते नहीं हैं।भाई यशपाल जी जब जरूरत पड़ती है तो हमेशा याद आते हैं। हमारी बहनें भी सम्‍मानित हुईं हैं। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है | राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन संजय जी (जागरण समूह के प्रधान संपादक) आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आजकल हमारा मिलना-जुलना कम हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि राजनीति तोड़ती है और नईदुनिया ने आज सबको जोड़ दिया। डॉक्‍टर साहब थोड़ा शरमा रहे थे कि गले लगें या नहीं, लेकिन आखिर गले लग ही गए।आजकल प्रिंट मीडिया और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया अक्‍सर दिखाता रहता है कि माननीय ने ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया। माननीय शब्‍द एक व्‍यंग्‍य हो गया है।लेकिन यदि आप दिनचर्या देखें। सुबह से लेकर देर रात तक काम में व्‍यस्‍त रहते हैं।आज सुबह सात बजे टेलीफोन पर मैंने बात करना शुरू की। सुबह 10 बजे पहली मीटिंग की। उसके बाद 15-20 विधायक साथियों से चर्चा की। उसके बाद वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड की बैठक, नर्मदा संघ की बैठक। वहां से निपटे तो पुलिस स्‍पोर्टस के कार्यक्रम में पहुंचे। उसके बाद खिलाडि़यों को पुरस्‍कृत करके आए। वहां से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में कुछ को सस्‍पेंड कर आए। और यहां आकर अब पुरस्‍कार दे रहे हैं। अभी रात में मैं एक मीटिंग करूंगा जिसमें फूलों की स्थिति पर बात करना है कि कितने आ रहे हैं, जा रहे हैं। गोपालन का काम भी देखना है। ये मेरी कहानी नहीं है। हर विधायक की, सांसद की, निर्वाचित जनप्रतिनिधि की यही कहानी है। सुबह से लेकर देर रात तक वे व्‍यस्‍त रहते हैं। घनघोर परिश्रम करते हैं।  

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Dakhal News 5 December 2017


पद्मावती

  देशभर में पद्मावती को लेकर विरोध प्रदर्शनजारी हैं और वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर दखल से इन्कार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस खारिज कर दिया है। अदालत ने इसके साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा फिल्म को लेकर दिए बयानों पर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट में निर्माता की तरफ से कहा गया कि सेंसर बोर्ड के प्रमाणपत्र के बाद ही फिल्म रिलीज होगी। अदालत ने कहा कि बिना फिल्म देखे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आखिर कैसे इसे लेकर बयान दे सकते हैं। अदालत ने सभी जिम्मेदार लोगों से कहा कि वो फिल्म को लेकर बयानबाजी बंद करे क्योंकि इससे सेंसर बोर्ड के दिमाग में पक्षपात पैदा होगा। जब तक मामला सेंसर बोर्ड के पास लंबित हो तब तक ऐसे मामलों में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।  आपको बता दें कि वकील मनोहर लाल शर्मा ने फिल्म पद्मावती की रिलीज पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि करणी सेना और राजपूत समुदाय 'पद्मावती' पर बैन की मांग लगातार कर रहे हैं। कुछ सींस को लेकर उन्हें आपत्ति है। राजपूत समुदाय के प्रतिनिधियों को लगता है कि उन दृश्यों की वजह से रानी पद्मावती की तौहीन हो जाएगी। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भंसाली ने कुछ पत्रकारों को भी फिल्म दिखायी थी, जिसके बाद उन्होंने फिल्म के पक्ष में अपनी प्रतिक्रिया दी थी।  

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Dakhal News 28 November 2017


राकेश पाठक

  ग्वालियर के कवि और वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश पाठक को  प्रतिष्ठित "हेमंत स्मृति कविता सम्मान" देने  की घोषणा की गई है। हेमंत फाउंडेशन द्वारा स्थापित यह सम्मान उनके कविता संग्रह " बसंत के पहले दिन से पहले" (दख़ल प्रकाशन से प्रकाशित )के लिए दिया जा रहा है। पुरस्कार समिति के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार भारत भारद्वाज ने यह घोषणा की। राकेश जी खामोशी से लेखन करने वाले सशक्त हस्ताक्षर हैं जिनकी कविताओं में शब्द सीमित और भाव असीमित होते हैं। ग्वालियर (मप्र) निवासी डॉ पाठक वरिष्ठ पत्रकार हैं और 'नईदुनिया' , 'नवभारत,' 'नवप्रभात', 'प्रदेश टुडे 'जैसे अखबारों के संपादक और न्यूज़ पोर्टल 'डेटलाइन इंडिया' के प्रधान संपादक रहे हैं। उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं। हेमंत फाउंडेशन की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव व सचिव डॉ प्रमिला वर्मा ने बताया कि डॉ राकेश पाठक को यह सम्मान जनवरी 2018 में मुम्बई में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ पाठक से पहले  राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान बोधिसत्व, संजय कुंदन,वाज़दा खान,आलोक श्रीवास्तव,हरि मृदुल,लीना मल्होत्रा, एकांत श्रीवास्तव,हरे प्रकाश उपाध्याय, यतीन्द्र मिश्र, कृष्णमोहन झा, रीता दास राम आदि को मिल चुका है।

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Dakhal News 11 November 2017


आजतक पहुंचे रोहित सरदाना

 जी न्यूज से इस्तीफा दे चुके पत्रकार रोहित सरदाना आजतक चैनल से जुड़ गए हैं. वे आजतक पर भी शाम 5 बजे के स्लॉट देखेंगे. रोहित के लिए 'आजतक' पर शाम पांच बजे का नया शो शुरू किया जा रहा है, ''दंगल : बहस का राजनीतिक अखाड़ा'' नाम से.  रोहित सरदाना जी न्यूज में सीनियर एंकर के साथ-साथ आउटपुट एडिटर भी हुआ करते थे. वे करीब दस साल से जी ग्रुप के साथ थे. उनका जी न्यूज में ‘ताल ठोक के’ डिबेट शो काफी चर्चित था और टीआरपी में नंबर वन था जिसके कारण आजतक प्रबंधन को रोहित को अपने यहां ज्वाइन कराने को मजबूर होना पड़ा. रोहित ईटीवी, सहारा समय में भी काम कर चुके हैं. उधर, खबर है कि अम्बुजेश कुमार ने एबीपी न्यूज ज्वाइन किया है.

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Dakhal News 11 November 2017


जयराम शुक्ल

  जयराम शुक्ल सोशल मीडिया में जीएसटी के रोलबैक को लेकर मचे शोर की तस्दीक करने के लिए सोचा, कि चलो देखें टीवी चैनल्स में क्या चल रहा है। पिछले एक महीने से राम रहीम की वही एनीमेटेड रहस्यमयी गुफा देखते देखते उकता सा गया था सो कई दिनों से चैनल्स खोलने की हिम्मत ही नहीं हुई। बहरहाल टीवी खोलते ही  चैनलों में  फिर वही बकवास चल रहा था, एक में किंमजोंग, दूसरे में रामरहीम की हनीप्रीत..हनीप्रीत। रात दस बजे का प्राइम टाइम इन्हीं के नाम था। कुछेक अँग्रजी चैनल जरूर इकोनामिस्टों को बैठाकर जीएसटी पर बहस चला रहे थे। अँग्रेजी समझने में वैसे भी दिमाग में अतिरिक्त जोर देना पड़ता है ऊपर से भभकती हुई लपटों वाले टीवी स्क्रीन से सिर्फ चीख और चिल्लाहट सिवाए कुछ भी सुनाई नहीं देता।  हमारा मीडिया भेड़ियाधसान है। जिधर एक भेड़ चली उधर ही सब निकल पड़ी। अर्नब ने जबसे ..नेशन वान्ट टु नो...की चिल्लपों शुरू की तब से सभी चैनल देशवासियों की जिग्यासा के स्वयंभू ठेकेदार बने हुए हैं। चैनलों ने भी एक दूसरे की देखा देखी एक अजीब सा तिलस्म रच रखा है। पढे लिखे एंकर भी उसीमें उलझे हैं,कई प्रिंट मीडिया से गए वे भी। जब वे अखबारों में तब अच्छी खासी विवेकसम्मत बातें लिख लिया करते थे। वही लोग जब किमजोंग की सनक और हनीप्रीत की रंगीन दुनिया को चटखारे के साथ परोसते हैं तो निरा जोकर लगते हैं। किमजोंग से पहले बगदादी का बुखार चढा़ था।.. बच के कहां जाएगा बगदादी.. जैसी पंच लाइनों के साथ सभी चैनल एकजुट होकर पिले थे फिर भी वो बचा हुआ है। इन दिनों किमजोंग के आगे बगदादी भूला हुआ है। उत्तर कोरिया के इस तानाशाह को लेकर जो फुटेज दिखाए जाते हैं,सभी चैनलों में लगभग एक से। तो क्या किमजोंग इन्हें यह उपलब्ध कराया है या अपने चैनलिया वीरबहादुर जान जोखिम में डालकर प्योंगयांग से शूट करके लाए हैं ? उत्तर कोरिया क्या तबाही मचाना चाहता है उसके पूरी कहानी और फुटेज की पटकथा कहीं और लिखी जाती है। किमजोंग सनकी है ये हम खुद नहीं चूंकि हमें  बार बार यही बताया जा रहा है इसलिए मान बैठे हैं कि सनकी ही होगा। क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि उत्तर कोरिया व किमजोंग को लेकर लगभग वही सब दोहराया जा रहा है जो कभी ईराक और सद्दाम को लेकर, लीबिया और गद्दाफी के साथ किया गया था। दरअसल यह किसी देश के खिलाफ युद्ध पूर्व प्रपोगंडा होता है ताकि उसपर हमले के लिए विश्व जनमत तैयार किया जा सके। दुनिया की नब्बे फीसदी सूचनाओं पर एसोशियेटड प्रेस आफ अमेरिका(एपी), रायटर ब्रिटेनऔर एएफपी फ्रांस का कब्जा है। ये तीनों मिलकर किसी भी देश या व्यक्ति की छवि को पलभर में नरकिस्तान और राक्षस गढ सकते हैं। शेष दुनिया की सभी मीडिया एजेंसियों से इनका अनुबंध होता है। इसी नियंत्रण को तोड़ने के लिए अरब में ..अलजजीरा.. पैदा हुआ था लेकिन अब उसे भी बधिया बना दिया गया। ताकतवर देशों के इस हेट मीडिया मिशन से क्यूबा के फिदेल कास्त्रो और लीबिया के ह्यूगोसावेज इसलिए बचे रहे क्योंकि ये गद्दाफी और सद्दाम की भाँति आत्ममुग्ध व स्वेच्छाचारी नहीं थे और देश की जनता की नब्ज इनके हाथ थी और दुनिया भर में अपने शुभचिंतक बना रखे थे। याद करिए 1982 में नई दिल्ली में हुए गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सम्मेलन के अगले वर्ष यहीं तीसरी दुनिया के मीडिया का सम्मेलन हुआ था। इसे ..नामीडिया.. के नाम से जाना गया। इस सम्मेलन में ये बात किसी पंच लाइन की तरह उभरकर आई थी कि ...अमेरिका के एटमबम्ब से ज्यादा खतरनाक है एपी और रायटर। शायद यह किसी अखबार की  हेडलाइन ही थी। उस वक्त मैं पत्रकारिता का विद्यार्थी था सो इस वैश्विक मीडिया सम्मेलन की खबरों की क्लिपिंग सालों तक मेरे संदर्भ में रही है। सम्मेलन में दूसरी बड़़ी बात जो निकल कर आई थी वो ये थी कि सूचनाओं के अधिनायकवाद से कैसे मुक्त हुआ जाए? एक सहमति बनी थी कि तीसरी दुनिया की मीडिया एजेंसियों का परिसंघ बने जो गुटनिरपेक्ष देशों के हितों की रक्षा कर सके। दुर्भाग्य से 1984 में तीसरे विश्व की नेता इंदिरा जी इस दुनिया में रही नहीं। गुटनिर्पेक्ष आंदोलन बिखरने लगा, रही सही कसर 1989 में सोवियत विघटन ने पूरी कर दी। और तब से दुनिया एकध्रुवीय व्यवस्था के आधीन है, जिसका स्वयंभू  चौधरी अमेरिका है। अब अमेरिका जो चाहता है भारत जैसे देशों का मीडिया वही दिखाता है क्यों कि वैश्विक मामलों में हमारा मीडिया कंगाल है। वे हमारे मीडिया को एक प्रपोगंडा मशीन की भांँति उपयोग करते हैं, हो सकता है इसके लिये वे पैसा भी देते हों। इराक युद्ध कवर करने गए एक पत्रकार ने पोल खोली थी कि किस तरह विदेशी मीडिया को युद्ध क्षेत्र से सैकडों किलोमीटर दूर किसी शहर के आलीशान होटलों में ठहराया जाता था। शाम को एक सैन्य अधिकारी फुटेज और ब्रीफिंग थमा देता था। वही सब चैनल्स देश को दिखाते थे और अब भी वही कर रहे हैं। दरअसल अमेरिका का मुख्य धंधा हथियारों का है। सो यदि युद्ध नहीं हुए, युद्ध का भय नहीं बना तो उसका बाजार धड़ाम से गिरकर दीवालिया हो जाएगा। गौर करिए कि क्या ऐसा कोई भी दिन,महीना या हफ्ता गुजरा है जब दुनिया के किसी कोने में युद्ध न हो रहा हो। रही आतंकवादियों की बात तो पिछले दिनों यूएनओ में पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने यह कहकर आईना दिखा दिया कि कभी वो भी दिन थे जब ह्वाइट हाउस हाफिज सईद जैसे लोगों के लिए रेड कारपेट बिछाए रहता था। ये उस दौर की बात है जब अफगानिस्तान में सोवियत पालित सरकार थी और अमेरिका तालेबान और अलकायदा जैसे संगठनों को खड़ा करने की भूमिका में था। सो युद्ध के बाजार के लिए जरूरी है कि माहौल बना रहे, चाहे वह उत्तर कोरिया के किमजोंग के जरिए बने या आतंकवादी संगठनों के। जापान और दक्षिण कोरिया एशिया के ये दो सबसे बड़े सेठों में हैं,जब ये डरे रहेंगे तभी तक अमरीकी जंगीबाजार गुलजार रहेगा। इस फेर में गरीब भारत और पाकिस्तान भी फँसे हैं, जो शिक्षा और स्वास्थ के बजट मदों की कटौती करके रक्षा बजट बढाते जा रहे हैं। चैनलों के एंकर अब सेलिब्रिटी हैं जाहिर है मैं उनके मुकाबले जाहिल हूँ। वे इंडिया इंटरनेशनल, कांस्टीट्यूशन क्लब की बौद्धिक बैठकों गप्पे मारते हैं।लेकिन यही लोग जब डिजाइन सूट पर टाई बाँधे जोकरों जैसी हरकत करते हुए बेसिरपैर की वही-वही खबरें परोसते हैं तो इनकी नियति पर तरस आता है। अपना मीडिया या तो किसी वैश्विक ताकत की प्रपोगंडा मशीन है या फिर किसी की इज्जत की धज्जियाँ बिखेरने वाला परपीडक यंत्र। हनीप्रीत के साथ यही हो रहा है। अदालत से पहले ही सब ट्रायल में लगे हैं। अपने अपने तईं फैसला भी सुना रहे हैं। मीडिया एक महिला के इज्ज़त की चिंदियां बिखेर रहा है, हम देख रहे हैं। पूरा मीडिया उस डरी हुई लड़की के मुँह से कहवाना चाहता है कि ..कह.. तू अपने बाप की रखैल थी..। मुँह ढंके आयटमों से हनीप्रीत का रहस्य, रोमांच व प्रेमकथाएँ उगलवाई जा रही हैं। ये सब मीडियाकी फ्राडगीरी का हिस्सा है जो महज टीआरपी के लिए चल  रहा है। यदि हनीप्रीत अदालत से बरी होती है तो क्या उसके इज्जत की धज्जियों का शाल बुनकर ये चैनल वाले उसकी इज्जत लौटा पाएंगे ? ये निहायत गलत हो रहा है। महिला अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली वो बाबकटें कहां हैं..? क्या उन्हें ये सब नहीं दिख रहा कि टीवी स्क्रीन पर एक पथ से भटकी हुई हिरण को शिकारी कुत्तों की तरह नोंचा जा रहा है। याद रखिये आज जो हम कर रहे हैं प्रकारान्तर में अपने भविष्य का ही इंतजाम कर रहे हैं।[लेखक पत्रकार जयराम शुक्ल की वॉल से उनसे  8225812813 पर संपर्क किया जा सकता है ]

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Dakhal News 11 October 2017


rajdhani patrkar

मुख्यमंत्री चौहान द्वारा “प्रेस एन्क्लेव” के प्रवेश द्वार का लोकार्पण भोपाल में मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. की भूमि को फ्री-होल्ड करने का विचार किया जाएगा ताकि सदस्य आवास निर्माण के लिये आसानी से बैंक लोन ले सकें। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिक और फोटो पत्रकारिता में सक्रिय सदस्यों के लिये आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री आज यहां आवासीय कालोनी “प्रेस एन्क्लेव” के कार्यालय एवं प्रवेश द्वार के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी काम करते हैं और समाज को सूचना संपन्न बनाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रमजीवी पत्रकारों के लिये आवास एक आधारभूत सुविधा है। राज्य सरकार इसमें हर प्रकार से सहयोग करेगी। सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रजातंत्र के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता से जुड़े लोगों को मजबूत बनाने की दिशा में आवासीय कालोनी का निर्माण मील का पत्थर साबित होगा। सांसद श्री आलोक संजर ने पत्रकारों के लिये श्रद्धानिधि स्थापित करने जैसे प्रयासों के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान की सराहना की। संस्था के अध्यक्ष श्री के.डी. शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिन्हा ने मुख्यमंत्री को कालोनी की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। सेंट्रल प्रेस क्लब के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और संस्था के संस्थापक संचालक श्री विजयदास ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के. मिश्रा, आयुक्त जनसम्‍पर्क श्री अनुपम राजन एवं बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी एवं संस्था के सदस्य उपस्थित थे।  

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Dakhal News 25 September 2017


 कड़वे वचन  का विमोचन

      भोपाल  में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां अपने निवास पर मुनि श्री तरूण सागर महाराज की पुस्तक 'कड़वे वचन भाग -9' का विमोचन किया।  इस अवसर पर जैन समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

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Dakhal News 23 September 2017


इण्डिया टीवी  अंजुम

सभी छोटे बड़े मसले पर तड़ाक तपाक टिप्पणी करने वाले अजीत अंजुम अपने इस्तीफे जैसे बड़े घटनाक्रम पर लंबी चुप्पी साध गए. उनकी कोशिश थी कि इंडिया टीवी से हटाए जाने की सूचना ज्यादा चर्चा में न आए क्योंकि इससे संपादक का मार्केट डाउन होता है, सो वह अपनी विदाई के मसले पर मुंह सिए रहे. पर अब उन्होंने धीरे से अपने एफबी एकाउंट में खुद को इंडिया टीवी का पूर्व मैनेजिंग एडिटर घोषित कर दिया है. इस तरह अजीत अंजुम के इंडिया टीवी से विदा होने को लेकर कायम सस्पेंस खत्म हो गया है और भड़ास पर प्रकाशित खबर सही साबित हुई. सबसे अच्छी बात ये हुई है कि सभी टीवी संपादकों ने मिलकर अपने बेरोजगार साथी अजीत अंजुम को ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन का जनरल सेक्रेट्री बनाकर एक नया काम सौंप दिया है ताकि उनकी सक्रियता बनी रहे और वे बेरोजगारी जैसा कुछ फील न कर सकें. पर अजीत अंजुम प्रतिभाशाली पत्रकार हैं और ढेर सारे संबंधों-संपर्कों के धनी हैं, इसलिए वे बहुत दिन तक घर न बैठेंगे. जल्द ही वे नई पारी शुरू करने का धमाका कर सकते हैं. कुछ और नहीं तो स्टार वाले उदय शंकर ही कोई न कोई प्रोजेक्ट दे देंगे ताकि रोजी रोटी चलती रहे. दरअसल न्यूज चैनल्स के बड़े लोगों यानि संपादकों / प्रबंधकों में आपस में खूब एकता होती है. ये एक दूसरे की जमकर तारीफ करते रहते हैं और एक दूसरे के बुरे वक्त में आड़ ढाल बनकर मदद करने को तैयार रहते हैं, हां इसके चलते मालिकों को भले ही ठीकठाक चून लग जाए. इनकी ये एकता एक तरह से हिंदी टीवी पत्रकारिता का दुर्भाग्य भी है जिसके चलते अच्छे भले प्रतिभावान पत्रकार कई बार इस संपादकों के रैकेट का कोपभाजन बन जाते हैं और अपने ठीकठाक करियर को बर्बाद कर बैठते हैं. जो लोग इस रैकेट को सलाम नमस्ते करते हुए 'यस सर यस सर' ठोंकते रहते हैं वह खूब तरक्की करते हैं. न्यूज चैनल्स के संपादकों पर 'तेरा आदमी मेरा आदमी' करने का गंभीर आरोप लगता रहा है लेकिन यही संपादक लोग पब्लिक डोमेन में किसी भी किस्म के डिसक्रिमिनेशन की मुखालफत करते पाए जाते हैं.[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]    

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Dakhal News 18 September 2017


पत्रकार भवन में दी श्रध्दांजलि

  भोपाल के प्रखर और प्रतिष्ठित पत्रकार महेश बागी के असमयिक निधन पर मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के तत्वावधान में पत्रकार भवन में एक शोक सभा रखी गई। जिसमें महेश बागी के साथ काम कर चुके और उनके अधीनस्थ रहे पत्रकारों के साथ शहर के कई पत्रकार उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित पत्रकारों ने स्व. बागी के साथ बिताए गए समय के संदर्भ में अपने अनुभव साझा किए तथा स्व.बागी की विशेषताओं को विशेषरूप से रेखांकित किया। श्रद्धांजली कार्यक्रम में पत्रकार साथी सर्वश्री नीवन आनंद जोशी, गणेश पांडे, भगवान उपाध्याय, संजय शर्मा, शब्बीर कादरी, अनुराधा त्रिवेदी, शिशुपाल सिंह तोमर, दिलीप भदौरिया, अरशद अली खान, उदय मौर्या, दिनेश निगम, डा. राज, राजेन्द्र जैन, आलोक गुप्ता,प्रेम कुशवाह,रामानंद दिवेदी, जतिन मिंडोरे, दया प्रसाद, रमेश निगम, बलभद्र मिश्रा, उमाशरण श्रीवास्तव, महफूज अली, अनिल श्रीवास्तव, सरल भदौरिया, राजेन्द्र महेश्वरी,मोहम्मद इकराम और उज्जैन से उपस्थित हुए अनन्य साथियों में से सर्वश्री प्रकाश दिवेदी , प्रशांत अनजाना, ललित जैन, संजय कुंडल उन्हेल और राजधानी में कार्यरत साथी विनोद उपाध्याय विशेषरूप से उपस्थित थे।

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Dakhal News 14 September 2017


अरशद अली खान

भोपाल में शनिवार को पत्रकार महेश बागी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।    अरशद अली खान मैं समझता हूं कि पत्रकारिता में सीधे दखल रखने वाला कोई भी ऐसा पत्रकार नहीं होगा जो महेश बाग़ी के तेवरों से वाक़िफ़ ना हो.... उनके लेखन में पत्रकारिता की उस आबरु की झलक दिखती थी, जिसका पत्रकारिता के मंचों और नारों में सिर्फ ज़िक्र होता है....और जिसकी अपेक्षा समाज एक पत्रकार से करता है... महेश बागी ने लगभग सभी बड़े बैनरों में काम किया लेकिन अपनी फक्कड़ मिज़ाजी और स्वाभिमान की क़ीमत पर वो कहीं टिक नहीं पाए.... मैं उन खुशनसीब लोगों में से हूं जिसे महेश बाग़ी जैसे बहुत ईमानदार और शानदार पत्रकार का साथ मिला.... महेश बाग़ी का साथ पाकर में अपने आप को गौरांवित महसूस करता रहा....बल्कि यूं कहें कि मुझे इस बात का घमंड था कि महेश बाग़ी जैसा नेक दिल पत्रकार मेरा दोस्त है....   महेश बाग़ी ने कभी अपने उसूलों से समझोता नहीं किया.... यही वजह है कि आज वो मुफलिसी की हालत में हमारा साथ छोड़ गए....आज उनके परिवार को सहयोग की सख्त ज़रुरत होगी... वो चाहते तो और लोगों की तरह पत्रकारिता को प्रोफेशन के तोर पर कर सकते थे, लेकिन उनहोंने पत्रकारिता मिशन के रूप में की....जिसका खामियाज़ा अब उनके परिवार को भोगना होगा.... मुझे इस बात का हमेशा अफ़सोस रहेगा कि जो साथी पत्रकारों पर कॉलम लिखते हैं उनकी नज़र इस हुनर बाज़ पर नहीं पड़ी... शायद इसलिए कि वह केवल बड़े बैनर में काम करने वालों को ही महत्व देते हैं.... जैसा नाम वैसा काम.... ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है... भाषा - शैली पर ऐसी पकड़ थी कि जवाब नहीं.... मैं दावे के साथ यह बात कह रहा हूं कि पत्रकारिता जगत में ऐसा सूरमा अब पैदा होने वाला नहीं है.... मुझे उनका यूं अचानक चले जाना बहुत खल रहा है...... यह मेरी व्यक्तिगत छति है, इसकी भरपाई दुनियां की कोई दौलत नहीं कर सकती.... आप बहुत याद आओगे "बाग़ी जी".... वरिष्ठ पत्रकार शलभ भदौरिया ने अपनी वॉल पर लिखा हैं प्रिय महेश के अचानक यूँ चले जाना हमारे परिवार के लिए पारिवारिक क्षति है।महेश उज्जैन से इंदौर होते हुए सीधे हमारे घर ही आया और कोई 2 साल परिवार का सदस्य की तरह रहा ।इतनी छोटी उमर और कच्चा परिवार छोड़ कर हमारे छोटे भाई के  निधन से आहत हूं ।ईश्वर से प्रार्थना है कि वो मेरे छोटे भाई महेश की पवित्र आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे और समूचे पवार (बागी) परिवार को इस गहन दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ।  

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Dakhal News 10 September 2017


पत्रकार लंकेश

पत्रकार गौरी लंकेश के हत्यारों का सुराग देने वाले को सरकार 10 लाख रुपये का इनाम देगी। कर्नाटक सरकार ने ये घोषणा की है। पुलिस ने गुरुवार को लोगों से अपील की थी कि इस हत्याकांड के बारे में कुछ भी पता है तो उसे बताए। इसके लिए एक ईमेल आइडी व फोन नंबर भी जारी किया गया है। इसके एक दिन बाद ही गृह मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने दस लाख के इनाम की घोषणा की है। गृहमंत्री रेड्डी का कहना है कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने निर्देश दिया है कि एसआईटी में पर्याप्त संख्या में अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए जाए ताकि जांच का काम तेजी से हो। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एसआईटी के प्रमुख बीके सिंह के साथ एक बैठक भी की। बैठक में डीजीपी आरके दत्ता, डीजी (खुफिया) एएम प्रसाद भी मौजूद थे।रेड्डी ने बताया कि जांच टीम से कहा गया है कि भाजपा विधायक जीवराज को बुलाकर पूछताछ की जाए। उन्होंने गुरुवार को पत्रकार की हत्या को लेकर विवादास्पद बयान दिया था। रेड्डी ने ये भी कहा कि विधायक से पूछा जाएगा कि उन्होंने इस तरह का बयान क्यों दिया था। उन्होंने कहा कि ये बात अखरने वाली है कि गौरी लंकेश की हत्या के बाद न तो कोई भाजपा नेता उनके घर गया, न ही शमशान घाट पर। गौरी लंकेश की हत्या को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में भी चर्चा की गई। दक्षिण व मध्य एशिया के मामलों को सहायक सचिव एलिस वेल्स ने एक उप समिति में कहा कि मामला वाकई हतप्रभ करने वाला है। पत्रकार की हत्या लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि भारत इससे जल्दी उबर जाएगा और लोकतंत्र वहां और ज्यादा मजबूत होगा। इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस ने कहा कि लगता है कि एक प्रभावशाली आवाज को दबाने की साजिश पहले ही रच ली गई थी। यूनेस्को की महानिदेशक इरिना बोकोवा ने कहा कि भारत इस मामले का पर्दाफाश जल्द करे, क्योंकि प्रैस पर हमले का मतलब मूलभूत अधिकारों के हनन का प्रयास है।

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Dakhal News 8 September 2017


ज़ी न्यूज़ के कार्यक्रम में शिवराज

  शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों की केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने की सराहना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पूरे देश के लिये एक समान शिक्षा नीति होना चाहिये। इसके लिये मध्यप्रदेश पूरा सहयोग करेगा। उन्होने कहा कि प्रयोग के तौर पर माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के लिये बैतूल जिले में पठन-पाठन की सारी सुविधाओं और अधोसंरचनात्मक व्यवस्थाओं से सम्पन्न एक विद्यालय खोला जाएगा जिसमें आसपास के गांवों से विद्यार्थियों को लाया जाएगा और वापस छोड़ा जाएगा। इस प्रयोग के सफल होने पर इसका विस्तार करने पर विचार किया जाएगा। श्री चौहान आज यहां ज़ी न्यूज चैनल द्वारा राज्य शिक्षा समिट कार्यक्रम में सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होने शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थाओं को सम्मानित किया। मप्र को शिक्षा में केन्द्र से मिलेगा पूरा सहयोग केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक सवाल के जवाब में मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाने, स्वायत्तता बढ़ाने और नये शैक्षणिक संस्थानों को प्रोत्साहित करने के मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करने के बाद अब प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। किसी समय बीमारू राज्य कहलाने वाला मध्यप्रदेश अब प्रथम श्रेणी के राज्यों में शामिल हो गया है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि मध्यप्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में हर प्रकार से सहयोग दिया जाएगा। श्री जावड़ेकर ने कहा कि विशेषज्ञों का एक पैनल पूरे देश में बीस उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों का चयन करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश का भी इसमें स्थान होगा। श्रमोदय विद्यालय खुलेंगे श्री चौहान ने राज्य में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिये किये गये प्रयासों की चर्चा करते हुये कहा कि उत्कृष्ट विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, ज्ञानोदय विद्यालय खोले गये हैं । चार श्रमोदय विद्यालय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में खोले जा रहे हैं। इन विद्यालयों में विशेष रूप से शिक्षित और प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती की गई है। इनकी सेवा शर्ते भी भिन्न हैं। श्री चौहान ने कहा कि समाज की ओर से भी शिक्षकों को मान-सम्मान मिलना चाहिये। इस प्रवृत्ति में कमी आई है। उन्होंने कहा कि वेतन और सुविधाओं के अलावा शिक्षक मान-सम्मान चाहता है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने चलेगा अभियान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक दशक पहले तक प्राथमिक शिक्षा बुरी स्थिति में थी। शुरू से ही कठिन प्रयास करने पड़े । उच्च शिक्षा का प्रतिशत 13-14 था जो अब 20 हो गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को जब भी आवश्यकता पड़ी केन्द्र ने पूरी मदद की। अब उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये अभियान चलाया जाएगा। नये कॉलेज खुल रहे हैं, जो कम्प्यूटर लैब, लाइब्रेरी और आई.टी. आधारित अन्य पठन-पाठन टूल्स से सज्जित हैं। श्री चौहान ने मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना की चर्चा करते हुये कहा कि अब प्रतिभाशाली बच्चों को उच्च शिक्षा के लिये पैसों की कमी नहीं आएगी। उनकी फीस सरकार भरेगी। प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की सेवा-शर्तें और वेतन में सुधार किया गया है। अब उन्हें सम्मानजनक 25 से 30 हजार रूपये प्रति माह वेतन मिल रहा है। उनका प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा। कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति का प्रतिशत भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के माता पिता नहीं हैं, वे रेल्वे स्टेशनों, सड़कों पर भटकते रहते हैं, उनके लिये भी शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे किराये का आवास लें और उन्हें स्कूल भेजें। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को साइकिल, गणवेश, लैपटॉप, स्मार्टफोन देने जैसी पहल की गई है। निजी क्षेत्र में कई विश्वविद्यालय स्थापित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के तीन आयाम गिनाते हुये कहा कि शिक्षा का उददेश्य ज्ञान देना, कौशल देना और नागरिक संस्कार देना है। विश्वस्तरीय आई.टी.आई की स्थापना भोपाल में की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है इस साल के 12वी कक्षा के जो उत्कृष्ट परिणाम आये, उनमें सबसे ज्यादा बच्चे शासकीय स्कूलों के थे।  

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Dakhal News 3 September 2017


इंदौर वूमंस प्रेस क्लब

इंदौर वूमंस प्रेस क्लब, म.प्र. के स्थापना अवसर पर हक़, हैसियत और हिफाज़त विषय पर परिसंवाद ‘मंथन’ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में श्रीमती मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ महापौर, श्रीमती शोभा ओझा अध्यक्ष, अ.भा. महिला कांग्रेस, सुश्री कविता पाटीदार अध्यक्ष, जिला पंचायत, इंदौर, सुश्री माला ठाकुर क्षेत्रीय संयोजिका, दुर्गा वाहिनी, श्रीमती अर्चना जायसवाल, पूर्व अध्यक्ष, म.प्र. महिला कांग्रेस, डॉ. दिव्या गुप्ता, अध्यक्ष संस्था ज्वाला, श्रीमती फौजिया शेख अलीम नेता प्रतिपक्ष प्रमुख अतिथियों के रूप में उपस्थित थीं.  इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि पत्रकारिता हो या अन्य क्षेत्र अब महिलाओं के प्रति नजरिया बदल गया है. देश में सर्वोच्च पदों पर महिलाओं ने पुरुषों से बेहतर कार्य करके स्वयं को सिद्ध किया है. वर्तमान में महिला आरक्षण का फायदा उठाते हुए हमें कड़ी मेहनत के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए. पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के महानगर मिसाल बन गए हैं जहाँ बराबरी की संख्या में महिला पत्रकार बेहतर कार्य कर रही हैं. मध्यप्रदेश की महिला पत्रकारों को भी संगठित होकर आगे बढ़ना चाहिए.  इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग, म.प्र शासन में सदस्य बनने पर डॉ रजनी भंडारी का अभिनन्दन किया गया. प्रारंभ में वूमंस प्रेस क्लब, म.प्र. की अध्यक्ष शीतल रॉय ने क्लब के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी. अतिथियों का स्वागत शीतल रॉय, नाज़ पटेल, गरिमा राजपूत, रीना शर्मा, वैशाली व्यास, नेहा चौधरी, संध्या शर्मा,मोनालिसा  मीना राणा शाह, पुष्पा शर्मा ने किया. कार्यक्रम का संचालन वैशाली व्यास ने किया और सचिव नाज़ पटेल ने आभार माना. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता उपस्थित थे.स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों ने भी वूमंस प्रेस क्लब की स्थापना पर सभी सदस्यों को और अध्यक्ष को बधाई दी।

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Dakhal News 1 September 2017


सुप्रियो प्रसाद BEA के अध्यक्ष बने

आज तक और इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडीटर सुप्रिय प्रसाद को ब्रॉडकास्ट एडीटर्स असोसिएशन (BEA) यानी न्यूज चैनलों के संपादकों की संस्था का नया अध्य़क्ष चुन लिया गया है। वहीं वरिष्ठ संपादक अजीत अंजुम नये महासचिव चुने गये। दिबांग (ABP NEWS) और अरनब गोस्वामी (Republic TV) उपाध्यक्ष और अजय कुमार (News Nation) कोषाध्यक्ष बने। इन सभी का चुनाव सर्वसम्मति से बीईए की आम सभा में हुआ। चुनाव में 15 सदस्यीय नयी एक्जीक्यूटिव कमेटी का भी गठन किया गया। इसमें वरिष्ठ संपादक क़मर वहीद नक़वी, शाज़ी ज़मां, एन के सिंह, मिलिंद खांडेकर (ABP NEWS), राहुल कंवल ( India Today  & Aajtak), संजय बरागटा ( ZEE NEWS), सोनिया सिंह (Ndtv), दीपक चौरसिया ( India News), संजीव पालीवाल (Aajtak), अभिषेक कपूर (Republic TV), रवि प्रकाश (TV9), सुकेश रंजन (News 24), नविका कुमार (Times Now), भूपेंद्र चौबे (CNN News18) और राजेश रैना ( ETV) शामिल हैं।  संस्था के नवनिर्नाचित अध्यक्ष सुप्रिय प्रसाद ने अपने स्वागत भाषण में पिछली कमेटी के योगदान और उनके द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की। उन्होंने नये सदस्य बनाने, सदस्यों के बीच संवाद और जनता के बीच मीडिया की छवि को सुधारने के उपाय अपनाने पर जोर दिया। महासचिव अजीत अंजुम ने बताया कि बीईए के विस्तार के लिए क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के संपादकों को जोड़ने की मुहिम चलायी जायेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सदस्यता बढ़ाने के लिये एक नयी कमेटी का गठन किया गया जिसमें संजीव पालीवाल, राहुल कंवल और संजय बरागटा होंगे।   

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Dakhal News 16 August 2017


 इंडिया टीवी से हेमंत शर्मा का इस्तीफा ?

एक बड़ी चर्चा इंडिया टीवी न्यूज चैनल से आ रही है. लंबे समय से इंडिया टीवी और इसके मालिक रजत शर्मा के आंख नाक कान बने रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने चैनल से इस्तीफा दे दिया है. भाजपा और भाजपा से जुड़ी सरकारों में गहरे पैठ रखने वाले हेमंत शर्मा ने अचानक क्यों इस्तीफा दे दिया, इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. किसी का कहना है कि रजत शर्मा दिन प्रतिदिन हेमंत शर्मा के बढ़ते कद से परेशान थे और चैनल पर पूरी तरह काबिज हो चुके हेमंत से चैनल को मुक्त कराना चाहते थे जिसको लेकर उनकी आपस में बातचीत हुई और विवाद बढ़ता गया. इसके बाद हेमंत शर्मा ने इस्तीफा देकर खुद को चैनल से अलग कर लिया है. वहीं कुछ अन्य लोगों का कहना है कि चैनल की गिरती टीआरपी को लेकर चैनल प्रबंधन इन दिनों बेहद आक्रामक है और तरह-तरह से मंथन कर रहा है. प्रबंधन को ये समझा दिया गया कि हेमंत शर्मा द्वारा चैनल के कामकाज में हस्तक्षेप के कारण चैनल की टीआरपी सुधर नहीं रही है. कुछ लोग ये भी कहते सुने जा रहे हैं कि चैनल की टीआरपी गिरने की गाज अजीत अंजुम पर गिरने की चर्चा थी लेकिन गिर गई हेमंत शर्मा पर. इसे एक तरह से अजीत अंजुम खेमे की जीत मानी जा रही है और हेमंत के इस्तीफे के बाद चैनल अब पूरी तरह अजीत अंजुम के कब्जे में आ गया है. उधर, इंडिया टीवी प्रबंधन ने हेमंत के इस्तीफे पर चुप्पी साध रखी है. यह भी कहा जा रहा है कि हेमंत को प्रबंधन मनाने की कोशिश कर सकता है. फिलहाल हेमंत शर्मा के इस्तीफे की अफवाह जोरशोर से फैल रही है और इसको लेकर जितने मुंह उतनी बातें की जा रही हैं.  

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Dakhal News 9 August 2017


फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज ने की अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा  मुंबई मे फिल्म और टेलीविजन शो निर्माताओं की वायदा खिलाफी के विरोध में 'फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज' (एफ डव्लूआइ सी इ) की तरफ से 14 अगस्त की रात 12 बजे से अनिश्चित कालीन हड़ताल की घोषणा की गई है. इस हड़ताल में फिल्म एवं टीवी इंडस्ट्रीज के सभी कामगार, टेक्निशियन और कलाकार शामिल हो रहे हैं. फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज के प्रेसिडेंट श्री बीएन तिवारी ने कहा कि इस अनिश्चित कालीन हड़ताल का उद्धेश्य फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों के साथ बरसों से हो रही वायदाखिलाफी और नाइंसाफी को हमेशा के लिये समाप्त करना है. श्री तिवारी के मुताबिक फेडरेशन लंबे समय से मांग करता रहा है कि आठ घंटे की शिफ्ट हो और हर अतिरिक्त घंटे के लिये डबल पेमेंट हो. तिवारी ने कहा कि हर क्राफ्ट के सभी कामगारों , टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपेड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ोत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जायेगा. साथ ही जॉब सुरक्षा , उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है. मगर निर्माता हमारी मांग को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं. 22 यूनियनों ने किया हड़ताल का समर्थन... इस हड़ताल को इंडस्ट्री के 22 यूनियनों का समर्थन प्राप्त है.फेडरेशन में जो 22 यूनियन शामिल हैं उसमें द साउंड एशोसिएशन आॅफ इंडिया, कैमरा एशोसिएशन , डायरेक्टर एशोसिएशन , आर्ट्स डायरेक्टर एशोसिएशन, स्टिल फोटोग्राफर एशोसिएशन, म्यूजिक डायरेक्टर एशोसिएशन, म्यूजिशियन एशोसिएशन , सिंगर एशोसिएशन, वाइसिंग एशोसिएशन, डांस मास्टर एशोसिएशन, डांसर एशोसिएशन, फाइटर एशोसिएशन , डमी एशोसिएशन , राइटर एशोसिएशन , प्रोडक्शन एशोसिएशन, एडिटर एशोसिएशन , जूनियर आर्टिस्ट एशोसिएशन, महिला कलाकार एशोसिएशन , मेकअप और ड्रेस डिपार्टमेंट एशोसिएशन, एलाइड मजदूर एशोसिएशन, सिने आर्टिस्ट एशोसिएशन और जूनियर आर्टिस्ट सप्लायर एशोसिएशन प्रमुख है. इस हड़ताल को देश की कई दूसरी भाषा की फिल्म इंडट्रीज का भी समर्थन मिला है. देश के किसी भी हिस्से में 15 अगस्त के बाद से फिल्म, टेलिविजन शोे और सिरीयलों की शूटिंग नहीं हो पायेगी. फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज के प्रेसिडेंट श्री बीएन तिवारी के मुताबिक इस हड़ताल के बाद से देश के किसी भी हिस्से में 15 अगस्त के बाद से फिल्म, टेलिविजन शोे और सिरीयलों की शूटिंग नहीं हो पायेगी. बॉलीवुड में काम कर रहे ये कामगार अपना नया एमओयू साइन करवाना चाहते हैं, जिसकी मियाद पिछली फरवरी में खत्म हो चुकी है. ये एमओयू हर 5 साल में साइन होता है. इस बार नए एग्रीमेंट में कामगारों की मांगों में उनका मेहनताना, सुरक्षा, समय पर भुगतान, काम करने की समय सीमा और बीमा शामिल हैं. इनके मुताबिक इनका मेहनताना 3 से 6 महीने बाद मिलता है साथ ही 18-18 घंटे काम करवाया जाता है. फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज के प्रेसिडेंट श्री बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा के मुताबिक 15 अगस्त से प्रस्तावित इस हड़ताल के बावत फेडरेशन की तरफ से फिल्म और टेलीविजन शो निर्माताओंं की संस्थायें इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर असोसिएशन, द फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्युसर गिल्ड आॅफ इंडिया लिमिटेड, इंडियन फिल्म एंड टीवी प्रोड्युसर काउंसिल, वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्युसर्स असोसिएशन को भी मंगलवार 1 अगस्त को हड़ताल की लिखित सूचना दे दी गयी है. साथ ही हड़ताल के दौरान किसी भी कामगारों , टैक्निशियनों और कलाकारों को परेशान ना किया जाये इसके लिये फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज की तरफ से मुंबई के पुलिस आयुक्त सहित सभी पुलिस स्टेशनों को भी लिखित सूचना दी गयी है.

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Dakhal News 9 August 2017


etv

  खबर है कि ईटीवी दिल्ली एनसीआर में बड़े पैमाने पर छंटनी चल रही है. अब तक तेरह रिपोर्टर हटाए जा चुके हैं. ये सभी लोग लंबे समय से ईटीवी से जुड़े हुए थे. हटाए गए जिन कुछ लोगों के नाम पता चले हैं, वे इस प्रकार हैं- सुनीता आर्या झा, अक्षय राय, हिमांशु देव, हाशिम इमरान, मनोहर विश्नोई, रामेश्वर, प्रकाश पीयूष, रवि यादव, रजा आदि. सूत्रों के मुताबिक रवि यादव ने लेबर कोर्ट में केस कर दिया है ईटीवी पर. मुकुंद शाही को लेकर चर्चा है कि उन्हें भी साइडलाइन कर दिया गया है. सुनीता आर्या झा पीएमओ कवर करती थीं. अक्षय राय बीजेपी बीट देखते थे. सूत्रों के मुताबिक शैलेंद्र बांगू, अविनाश कौल आदि मिलकर अपने खास लोगों को नियुक्त कर रहे हैं और पुराने लोगों को किसी तरह परेशान कर निकाल रहे हैं. जिन जिन लोगों को हटाया गया, उन्हें पहले न्यूज वाले ग्रुप से हटाया जाता, फिर इनका मेल बंद कर दिया जाता. अंत में हैदराबाद से सेवा समाप्त किए जाने की काल करा दी जाती.  

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Dakhal News 5 August 2017


स्ट्रिंगर भर्ती

अनिल सक्सेना  हाल ही में मध्यप्रदेश के दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश में हुई स्ट्रिगंरो की भर्ती इन दिनों राजधानी सहित प्रदेश के अंचलों में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश की प्रमुख पूजा पन्नालाल वर्धन ने इन दो सालो में दूरदर्शन न्यूज के तो मायने ही बदल दिए हैं। अपनी विवादित कार्यप्रणाली के चलते अपने सहयोगी समाचार सम्पादक राय जो हाल ही में प्रमोट होकर सहायक निदेशक बने हैं, के साथ मिलकर अनियमितता के सारे रिकार्ड ही तोड़ दिये। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2017 में दूरदर्शन समाचार एकांश भोपाल ने मध्यप्रदेश के सभी जिलों में स्ट्रिंगर की भर्ती के लिये विज्ञापन दिये। दूरदर्शन के इतिहास में पहली बार दूरदर्शन पर इसे भर्ती के आखरी दिन तक प्रचारित किया गया। एंकर बाईट में भी समाचारों को बीच में रोककर इस भर्ती के बारे में बताया गया। प्रसार भारती द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में नियुक्त पीटीसी हाईकार्ट की शरण में चले गये। हाईकोर्ट में पहले जिन सात जिलों के पीटीसी ने शिकायत की उस पर हाईकार्ट ने इन जिलों में परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी। इसके बाद 14 और पीटीसी भी हाईकार्ट चले गये। न्यायालय में पीटीसी के ये दोनों मामले क्लब हो गये जो अब भी विचाराधीन हैं। एक समय था जव समाचार सम्पादक राय स्ट्रिगंरो और पीटीसी को स्टोरी के लिये अनुमति देते थे। बाद में इनकी अनियमितता को देखकर राय से स्टोरी अप्रूअल के अधिकार छीनकर पूजा वर्धन खुद स्टोरी अप्रूअल देने लगीं। समाचार सम्पादक राय हाशिये पर चले गये और पूजा बर्धन का विरोध करना शुरू कर दिया। जैसे ही दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश में स्ट्रिगंरो की भर्ती की कार्यवाही चली समाचार सम्पादक राय ने अपने समकक्ष और आकाशवाणी भोपाल में पदस्थ मित्र के साथ स्ट्रिंगरों की भर्ती से लाभ लेने की रूप रेखा बनाई। इन दोनो अधिकारियों ने दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश की प्रमुख पूजा पन्नालाल वर्धन को विश्वास में लेकर अनियमितता के खेल शुरू किए। आरोप है कि भर्ती में जमकर पैसा चलने लगा। कोर्ट के कारण जब नियुक्तियों में विलम्ब होने लगा और कई खेल तमाशे लोगों को मालूम पड़े तो पैसे वापस करने का दबाव बढने लगा। ऐसे में हाईकोर्ट का निर्णय आने से पहले ही सात जिले छोड़कर रिजल्ट घोषित कर दिये गए। दूसरे ही दिन राय का नागपुर का स्थानांतरण का आदेश आ गया। स्ट्रिगंर के पद पर कहीं गुन्डा लिस्ट में शामिल तो कहीं 10वीं पास तो कहीं जीवन में पत्रकारिता न करने वाले चाय पान के खोके चलाने वालों को चयन कर लिया गया। पत्रकारिता से स्नातक व स्नाकोत्तर डिग्रीधारी बाहर हो गये। लगभग पुराने अधिकांश स्ट्रिगंर भी बाहर कर दिये गये। इसे लेकर अब स्ट्रिंगर लामबन्द होकर हाईकोर्ट की शरण में जा रहे हैं और एक याचिका दायर कर रहे हैं।    पूजा वर्धन की पहले भी स्टाफ और स्ट्रिंगर दिल्ली उच्चाधिकारियों को शिकायत करते रहे हैं। लेकिन दिल्ली उच्चाधिकारी जाने किस भय से चुप्पी साधे रहे। आपको बता दें कि इस महिला अधिकारी ने  पूर्व में अपने महिला होने का लाभ उठाते हुए कई अधिकारियों की शिकायतें कर चुकी हैं जिससे विभागीय लोग इससे डरते हैं। इस महिला के लिए अपने पिता के पूर्व पुलिस अधिकारी होने की धमकी देना आम बात है। देखना है कि मध्य प्रदेश के योग्य स्ट्रिंगरों को दूरदर्शन भर्ती में न्याय मिल पाता है या नहीं।[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]  

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Dakhal News 4 August 2017


news trp week 30

  आजतक ने जी न्यूज़ को झटका दे दिया है। 30 वे सप्ताह की trp की बाद आजतक नंबर वन ,ज़ी टू ,एबीपी थ्री और इण्डिया टीवी फोर्थ पोजीशन पर है। इंडिया टीवी तमाम कोशिशों के बाद भी एबीपी को नहीं पछाड़ पा रहा है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 30 Aaj Tak 17.7 up 0.8  Zee News 15.6 dn 0.6  ABP News 13.4 up 1.0  India TV 11.3 up 0.2  News18 India 10.6 dn 0.2  News Nation 9.1 dn 0.7  News 24 7.7 same   India News 7.4 dn 0.2  Tez 2.8 dn 0.4  DD News 2.2 up 0.2  NDTV India 2.1 same     TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 17.6 up 0.5  Zee News 16.8 dn 0.7  ABP News 13.5 up 1.1  India TV 11.9 up 0.4  News18 India 11.1 dn 0.3  News Nation 8.2 dn 0.7  News 24 7.2 dn 0.1  India News 6.2 dn 0.1  Tez 3.0 dn 0.2  NDTV India 2.6 up 0.1  DD News 1.9 up 0.1 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 30   Zee                       70.6 Etv.                        14.6 Ibc24                     10.2 Sahara  sa            1.8 Bansal                   1.0   

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Dakhal News 3 August 2017


पत्रकार सुधीर जैन

श्रमजीवी पत्रकार संघ के रायपुर में संपन्न प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन में उत्कृष्ठ पत्रकारिता एवं बस्तर की समस्याओं को निरंतर उठाने के लिए मुख्य अतिथि प्रदेश के कबीना मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे द्वारा बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार सुधीर जैन को सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सहित संघ के प्रदेशाध्यक्ष अरविंद अवस्थी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि सुधीर जैन विगत 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में सेवारत हैं। इस दौरान लगभग ढाई दशक तक वे दैनिक नवभारत एवं दैनिक भास्कर से बतौर ब्यूरो प्रमुख जुड़े रहे। वर्तमान में वे पिछले एक दशक से हिंदुस्थान समाचार एवं राष्ट्रीय न्यूज सर्विस समाचार सेवा के ब्यूरो प्रमुख के पद पर सेवारत हैं।  

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Dakhal News 1 August 2017


राघवेंद्र सिंह

राघवेंद्र सिंह एक कहावत है अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैैं। इसलिये आदमी बातों से नहीं अपने कर्मों से पहचाना जाता है। यह कहावत राजनैतिक, सामाजिक, प्रशासनिक से लेकर मीडिया कर्मियों पर भी लागू होती है। यह इसलिये इन बिरादियों के लोगों से भी माफी के साथ आज की बातें। हमारा फोकस फिर सियासत पर है क्योंकि देश को दिशा देने के काम यही सबसे बड़े ठेकेदार हैैं। रावण ने भी सीता जी का हरण साधु बनकर किया था। गुरू का स्थान भी गोविंद के पहले था, डाक्टर को भगवान बाद दूसरा भगवान माना जाता था और मीडिया को महाभारत के संजय और विदुर की तरह सही बात बताने और सच दिखाना वाला माना जाता था। हम यहीं से अपनी बात शुरू कर रहे हैैं। पिछले दिनों नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की क्षेत्रीय बैठक में जो कुछ कहा गया वह सब बहुत अच्छा था लेकिन कहने वाले और कराने वालों के आचरण पर नजर डालें तो वही निकलकर आता है, अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैैं। हमेशा लोग कामकाज से ही जाने जाते हैैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने जल, जंगल और जमीन का जिक्र करते हुये बताया कि बंदर, भालू जंगल छोड़- छोड़ कर बाजार और शहरों में आने लगे हैैं क्योंकि हमने उनके घरों को उजाड़ दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी अन्य राज्य को लेकर इसका जिक्र नहीं कर रहे हैैं। उन्हाेंने कि साल एेसा पेड़ जाे पानी छाेड़ता है। अमरकंटक से मंडला तक साल के पेड़ अगर सूख जायें ताे समझाे नर्मद जी संकट में अा जायेंगी। सूख जाएंगी, खत्म हो जाएंगी। यहां साल के पेड़ सूख रहे हैं अाैर किसी काे इसकी चिंता नहीं है। इनको बचाने के लिये कोई शाेध नहीं कर रहा है। जाहिर है कि यह एहतियात उन्होंने मध्यप्रदेश को लेकर बरता होगा क्योंकि एनजीटी के क्षेत्राधिकार में  मध्यप्रदेश भी आता है और अक्सर राजधानी भोपाल के केरवा पहाड़ी और कोलार क्षेत्र में  शेर, तेंदुए की आमद आम हो गई है। अक्सर शहर और गांव के लोगों से रात तो क्या दिन में भी जंगल महकमा इन इलाकों में जाने से रोकने की एडवाइजरी जारी करता है। यहां हम बता दें कि कोलार और केरवा इलाके में बस्तियों के साथ शिक्षण संस्थान भी खुल गये हैैं। याने अब गाय बैलों के साथ आम आदमी भी शेर, तेदुए की शिकारगाह में आ गया है। मुद्दा यहीं से शुरू होता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भावुक और संवेदनशील स्वभाव के अनुरूप एनजीटी के निर्णयों की जमकर तारीफ की। उन्होंने जो कहा उसका लब्बोलुआब यह है कि ट्रिब्यूनल की  सक्रियता से भोपाल हिल स्टेशनों की तरह सुंदर बना हुआ है। यहां जंगल और नदियां एक तरह से सुरक्षित हैैं। इन बातों से अलग दूसरी तस्वीर भी है। मसलन हम भोपाल का ही जिक्र करें तो एनजीटी ने बड़ी झील को बचाने के लिये निर्देश दिये थे। उनके पालन में हफ्तों नहीं महीनों बीत गये हैैं लेकिन सरकार और प्रशासन का काम दीवार धकाने जैसा साबित हुआ है। मिसाल के तौर पर भोपाल के बीचोबीच आये स्लाटर हाउस को हटाने के निर्देश दिये थे लेकिन सरकारी जलेबी नहीं इमरतीनुमा कोशिशों के चलते अभी तक वह टस से मस नहीं हुआ है। जबकि एनजीटी ने नगर निगम, मुख्य सचिव तक को निर्देश दिये थे। मगर समूची कार्यवाही एनजीटी को थकाने वाली साबित हुई। ऐसे ही बड़ी झील को कहते तो भोपाल की लाइफ लाइन हैैं लेकिन इसका दम घोंटने के लिये रिटर्निंग वाल कैचमेंट एरिया में बनाने के बजाय झील की अंदर ही बना दी गई। यह बात पिछले साल बारिश की है। वह तो अच्छा हुआ कि बरसात इतनी हुई कि झील ने खुद अपनी हद तय कर ली। नतीजा यह हुआ कि रिटर्निंग वाल पानी में डूब कई और बड़ी झील कई मीटर दूर तक निकल गई।  इस पर खुद मुख्यमंत्री ने झील किनारे घूम कर रिटर्निंग वाल तोडऩे के निर्देश दिये थे। मगर एनजीटी और सीएम के आदेश सुरक्षित स्थान पर रखे हुये हैैं और समस्या का भी बालबांका नहीं हुआ है। ऐसी ही कहानी जो मुनारें झील के बाहर लगनी थी वे भी झील के भीतर लगा दी गईं। उन्हें भी एक साल से ढूंढा जा रहा है। मगर महापौर, चीफ सेक्रेटरी और चीफ मिनिस्टर की बातों के बावजूद उन्हें ढूंढा नहीं जा सका है। यानें झील का गला घोंटने वाली सरहद न तो तोड़ी गई हैैं और न ही मुनारें मिली हैैं। आगे इसकी कोई संभावना भी नजर नहीं आती है। आगे देखें तो सरकारें गुड गवर्नेंस की बातें करती हैैं। मगर होता उसके उलट है। स्कूल शिक्षा का स्तर उठाने की बात होती है, परिणाम में गिरता हुआ दिखता है। अस्पतालों में मरीज का इलाज और दवा देने की बात होती है लेकिन न डाक्टर होते हैैं न दवाएं मिलती हैैं। इसी तरह खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात होती है और वह बनता है मौत का धंधा। एनजीटी के और आदेश की बातें करें नर्मदा समेत नदियों से रेत निकालने और पहाड़ को खोदने से रोकने की लेकिन होता है इसके खिलाफ। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कहा था कि रेत की चोरी रोकने के लिये अब नदियों के हरेक घाट पर तो हथियारबंद लोगों की तैनाती नहीं की जा सकती। सरकार ऐलान कर चुकी हैै कि मरीजों के इलाज के लिये अस्पतालों में डाक्टर नहीं मिल रहे हैैं। इसका मतलब अब जिसको जैसे इलाज कराना हो वह खुद तय कर ले। इसी तरह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी  अपने भाषणों में अक्सर कहती थीं गरीबी हटायेंगे। बाद में विरोधियों ने इसमें सुधार किया और कहा इंदिरा जी ने गरीबी तो नहीं गरीब को जरूर हटा दिया। ऐसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बातें करते हैैं कि न खाऊंगा न खाने दूंगा। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में ही देखें तो वहां लोग खा भी रहे हैैं और खाने भी दे रहे हैैं और लोग देख रहे हैैं कि नरेंद्र मोदी के नारे के खिलाफ आचरण करने वालों का कुछ नहीं बिगड़ रहा है।  इस तरह की बातें के अनेक उदाहरण मिल सकते हैैं लेकिन बात वही है कि अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैैं। सही मायने में आदमी आचरण, व्यवहार और कर्मों से ही जाना जाता है।[पत्रकार राघवेंद्र सिंह की वॉल से ]  

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Dakhal News 31 July 2017


सोशल मीडिया

देश और दुनिया में वर्तमान में जितनी भी विद्याएं काम कर रही है, उनमें सोशल मीडिया सबसे सशक्त संचार माध्यम बन गया है। सोशल मीडिया वर्तमान में प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रिाॅनिक मीडिया से भी आगे निकल गया है। सोशल मीडिया ने गांव-गांव में मोबाईल फोन, इंटरनेट के माध्यम से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा दी है। आज देश और दुनिया में कहीं भी कोई घटना घटित होती है, तो सोशल मीडिया के माध्यम से हमें कुछ ही पलों में उसकी जानकारी लग जाती है। सूचनाओं के आदान-प्रदान में सोशल मीडिया अपनी महती भूमिका का निर्वाह करता है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद  नंदकुमारसिंह चौहान ने भोपाल में  पं. दीनदयाल परिसर में आयोजित आईटी सेल की बैठक के संबोधित करते हुए कही। उन्होने कहा कि आज का युग सोशल मीडिया का है इसलिए पार्टी की रीति नीति एवं केंद्र व प्रदेश सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाकर उन्हें राहत प्रदान करना युवाओं नैतिक कर्त्तव्य है। भारत युवाओं का देश है और युवाओं की उर्जा राष्ट्रहित के लिए उपयोगी है। नगर पालिका चुनाव में आईटी विभाग की टीम पूरी तरह तैयार है जिसके माध्यम से प्रचार प्रसार पर जोर दिया जायेगा। इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री  अजयप्रताप सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी  लोकेन्द्र पाराशर, आईटी विभाग के प्रदेश संयोजक  शिवराजसिंह डाबी, प्रदेश सह संयोजक  अनिल पटेल,  पवन दुबे,  सोमेश पालीवाल,  धर्मेन्द्र सिंह, श्री आशीष अग्रवाल, सेन गुप्ता,  विकास श्रीवास्तव, युवा मोर्चा आईटी के सह संयोजक  सत्येन्द्र सिंह, जिला संयोजक सहित आईटी विभाग के काॅलेज समन्वय उपस्थित थे।

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Dakhal News 29 July 2017


प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे   मेरे प्रिय टीआरपी मापक यंत्र, कई दिनों की खदबदाहट के बाद आज आपको खुला ख़त लिखने से खुद को रोक नहीं पाया. भैया, आपसे एमपी-छतीसगढ़ में कहीं कुछ चूक हो रही है ऐसा मुझे दिखता है. आप क्यूँ नहीं स्कूली या महाविद्यालयीन परीक्षा की तरह पुनर्गणना, वो जिसे अंग्रेजी में रिवैल्यूएशन कहते हैं, का प्रावधान कर देते..बताइए कि अव्वल आने वाले परीक्षार्थी ने क़माल क्या किया और बाकियों ने कहाँ ग़लती की....आप कहें तो हम तिथिवार आपको दिखा दें कि हमने क्या चलाया और कैसे चलाया और बाकियों ने क्या चलाया...बताइए कि 7 करोड़ से अधिक की आबादी वाले एमपी और ढाई करोड़ से ज्यादा जनसंख्या वाले छतीसगढ़ में आपने कितने टीआरपी मापक यंत्र लगा रखे हैं...प्रभु, मान ही नहीं सकता मैं कि आपके आंकड़े कंटेट का सटीक आकलन हैं. इतना बता दीजिए कि वैज्ञानिक तरीक़े से ही तो आप गणना करते हैं न...? आंकड़े देखकर तो लगता है कि टैरो कार्ड रीडर टाइप एक कार्ड निकालकर या फिर सिक्का उछालकर आप तय कर देते हो [क्षमा करिए...] प्रतिदिन अपना और बाकी चैनल का प्रस्तुतिकरण और ब्रेकिंग दम साधे देखता हूँ...23 साल से मुख्यधारा की पत्रकारिता कर रहा हूँ...ख़बरों से खेलने, कॉपी और प्रस्तुतीकरण का साधक हूँ...जो परीक्षार्थी आपकी मार्क-शीट में अव्वल में आ रहे हैं, उनकी क्षमता का भी ज्ञाता हूँ.. कुछ मत करिए सिर्फ तीन उचित कारण बता दीजिये कि जबरदस्त तरीके से आगे बढ़ने वाला चैनल ऐसा क्या कर रहा है, जो बाकी के नहीं कर रहे हैं...कितनी बड़ी ख़बरें सबसे पहले उनके पास होती हैं...एक उदाहरण आपको देता हूँ कि हमारी जिन ख़बरों के वीडिओ को हमारी वेव साईट में लाखों की तादात में वीडिओ व्यू मिलते हैं और हज़ारों लोग उसे शेयर करते हैं, उसे आप टीआरपी में ज़ीरो दिखा देते हो..श्रीमान आपको शायद पता नहीं होगा कि डिजिटल में नम्बर लाना बेहद कठिन है क्यूंकि व्यक्ति अपना डेटा पैक यानि रुपैया खर्च करके वीडिओ देखता है..ऐसा कैसे संभव है कि फोन में वीडियो देखा जा रहा हो और टीवी में नहीं...भैया आपकी मापक मशीन पुरानी हो गई हो या उसका कोई कल-पुर्जा घिस गया हो तो मरम्मत करा लो यार  ;) लेकिन आंकड़े तो ऐसे भेजो, जिसमें दाल में नमक के बराबर चूक दिखे...देखो, ऐसा है बिना पढ़े फेल होने वाला व्यक्ति नहीं कहता कि कॉपी ठीक से नहीं जाँची गयी लेकिन जो लपक के पढ़ रहा है, उसे कर्री तकलीफ़ हो जाती है..हम तो आपके साथ कैसा भी शाष्त्रार्थ करने को तैयार हैं...भैया, क्या है अन्याय करना जितना बड़ा पाप है,उसे चुपचाप सहन करना और भी बड़ा पाप है, जेई से अपन से मौन नहीं रहा जा रहा..और फिर आपकी विश्वसनीयता पर जनता भी सवाल उठाने लगे, ऐसा न करो.... सादर  आपका ही एक हितग्राही [ ईटीवी एमपी /सीजी के सीनियर एडिटर प्रवीण दुबे की फेसबुक वॉल से ]  

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Dakhal News 28 July 2017


सेंट्रल प्रेस क्लब

  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सेंट्रल प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के सदस्यों ने आज मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अरूण दीक्षित, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री विजय कुमार दास, प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश साकल्ले, प्रदेश महासचिव श्री राजेश सिरोठिया, श्री मृगेंद्र सिंह, सुश्री सुचांदना गुप्ता, सुश्री दीप्ति चौरसिया, श्री धनंजय प्रताप सिंह, श्री कन्हैया लोधी, श्री अक्षय शर्मा, श्री के डी शर्मा, श्री अजय बोकिल, श्री अजय त्रिपाठी, श्री अश्विनी कुमार मिश्रा, श्री रिजवान अहमद सिद्धीकी, श्री नासिर हुसैन, श्री नितेंद्र शर्मा, श्री विकास तिवारी और श्री वीरेंद्र सिन्हा उपस्थित थे।  

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Dakhal News 28 July 2017


news trp 29

पिछले दो महीने से ज़ी न्यूज़ ने आजतक को कड़ी तक्कर दे रखी है,एक श्रेणी में जी न्यूज़ नंबर वन है तो एक में आज तक। एबीपी न्यूज़ नंबर तीन और इंडिया टीवी चौथे नंबर का चैनल बन गया है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 29 Aaj Tak 17.0 up 0.3  Zee News 16.2 dn 0.2  ABP News 12.4 up 0.1  India TV 11.1 same   News18 India 10.8 same   News Nation 9.8 dn 0.2  News 24 7.7 dn 0.3  India News 7.6 same   Tez 3.2 same   NDTV India 2.1 same   DD News 2.0 up 0.3    TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.5 up 0.3  Aaj Tak 17.1 up 0.6  ABP News 12.3 up 0.3  India TV 11.5 dn 0.1  News18 India 11.4 same   News Nation 9.0 same   News 24 7.3 dn 0.4  India News 6.4 dn 0.5  Tez 3.2 dn 0.3  NDTV India 2.5 dn 0.2  DD News 1.8 up 0.3 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 29   Zee                       72.1 Ibc24                    12.3 Etv.                        11.1 Sahara  sa            1.7 Bansal                   1.0

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Dakhal News 27 July 2017


ईशर जज की किताब हमारे शहरों का रूपांतरण का विमोचन

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शहरीकरण की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता लेकिन बेहतर प्रबंधन संभव है। बेहतर प्रबंधन से शहर स्वर्ग बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि गांव तेजी से शहर की ओर बढ़ रहे हैं। इससे शहरों के लिये चुनौतियाँ भी पैदा हो रही हैं। इसलिये बेहतर शहरी प्रबंधन और नियोजन पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। श्री चौहान आज यहाँ प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ईशर जज आहलूवालिया की किताब ‘हमारे शहरों का रूपांतरण’ का विमोचन कर रहे थे। इस किताब का प्रकाशन मंजुल प्रकाशन द्वारा किया गया है। इस अवसर पर पूर्व में कार्यरत योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष श्री मोंटेक सिंह आहलुवालिया एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। श्री चौहान ने कहा कि हाल के सफाई सर्वेक्षण में सौ शहरों में 22 मध्यप्रदेश के हैं। इनमें भी इंदौर प्रथम और भोपाल दूसरे स्थान पर है। प्रदेश के सात शहर स्मार्ट शहर की सूची में शामिल हैं। श्री चौहान ने हिन्दी में इस किताब के प्रकाशन का महत्व बताते हुये कहा कि यह शहरी निकायों, प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं के लिये मार्गदर्शी साबित होगी। उन्होंने कहा कि सभी शहरी निकायों को यह किताब उपलब्ध करायी जायेगी। किताब की लेखिका ईशर जज आहलूवालिया ने शहरी प्रबंधन और नियोजन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश द्वारा की गई प्रगति की सराहना करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश स्मार्ट सिटी के लिये उपलब्ध फण्ड का बेहतर उपयोग कर रहा है। उन्होंने इंदौर में निजी और सार्वजनिक भागीदारी से शहर बस सेवा की परियोजना पर चर्चा करते हुये कहा कि भोपाल और इंदौर में शहरी यातायात में अनूठा काम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिबद्धता से शहरीकरण की चुनौतियों का सामना करते हुये बेहतर प्रक्रिया और व्यवस्थायें स्थापित की हैं उनकी प्रेरणादायी कहानियाँ किताब में शामिल की गई हैं।  

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Dakhal News 26 July 2017


सुदर्शन न्यूज चैनल को नोटिस

सुदर्शन न्यूज़ के सुरेश चह्वाणके को राज्यसभा की तरफ से नोटिस भेजा गया है. इस नोटिस में कहा गया है कि 28 सांसदों ने लिखित शिकायत की है कि सुदर्शन न्यूज चैनल ने उनकी मानहानि करते हुए धमकाया. नोटिस में 28 जुलाई तक सुदर्शन न्यूज चैनल को अपना पक्ष रखने को कहा गया है. अगर पक्ष नहीं रखा जाता है तो एकपक्षीय रूप से ही राज्यसभा के चेयरमैन इस मामले को देखकर अपना फैसला सुनाएंगे. उधर, इस मामले में  सुरेश चह्वाणके ने खुद को पीड़ित की तरह प्रस्तुत कर धार्मिक भावनाओं को भड़काते हुए पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने लगा है. सुरेश चह्वाणके का इस मामले पर कहना है-  ''नरेश अग्रवाल के ख़िलाफ़ बोलने के कारण मुझे और सुदर्शन न्यूज के ख़िलाफ़ राज्यसभा का गंभीर नोटिस मिला है। धर्म के अपमान पर आमादा व पद के मद में चूर नरेश अग्रवाल, दिग्विजय सिंह, सहित कुल 28 सांसदों ने राज्यसभा में दबाव बनाया जिसके बाद मुझे और चैनल के खिलाफ दबाव में राज्यसभा ने नरेश अग्रवाल की अवमानना का विशेषाधिकार नोटिस भेजा है. प्रभु श्रीराम के सम्मान लिए मैं मृत्यु से भी टकराने को तैयार हूँ, ये 28 सांसद तो बहुत छोटी चीज़ हैं... मुझे आशा है कि प्रभु राम के अलावा मेरे साथ आप भी हैं .... यही धर्मयुद्ध है और मैं ये चुनौती स्वीकार करता हूँ.''[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]

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Dakhal News 25 July 2017


महुआ प्लस का लाइसेंस रद्द

केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने छह टीवी चैनलों के लाइसेंस रद करने का आदेश जारी किया है जिसमें महुआ प्लस भी है. प्रज्ञा विजन कंपनी का चैनल महुआ प्लस का लाइसेंस रद्द होने से मुश्किल में जी रहे पीके तिवारी एंड फेमिली को एक और झटका लगा है. इससे पहले मार्च महीने में मंत्रालय ने श्री न्यूज चैनल का लाइसेंस रद्द किया था. मंत्रालय ने जून में चार अपलिंकिंग और दो डाउनलिंकिंग लाइसेंस रद किए हैं. इसमें एक बांग्‍ला एंटरटेनमेंट चैनल के अपलिंकिंग लाइसेंस को रद किया गया है. ‘365 दिन’ नामक चैनल का भी लाइसेंस रद्द हुआ है.

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Dakhal News 24 July 2017


news paper

रतन भूषण  सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को लेकर जो फैसला दिया है, उसके बाद हर जिले के डीएलसी आफिस यानी सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय के हर कर्मचारियों का रवैया बदला है। इन कर्मचारियों का रुख इसलिए बदला है कि 19 जून 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आये फैसले में यह स्पष्ट लिखा है कि मजीठिया वेतन आयोग के मामले में सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के क्या दायित्व होंगे। यही वजह है कि मजीठिया का मामला 19 जून के बाद जहां भी शुरू हुआ है, मालिकान की तरफदारी करने वाले सभी सरकारी अधिकारी का रवैया बदला है। पहले इनकी बातों से, इनके काम करने के तरीकों से, इनके हाव भाव से स्पष्ट होता था जैसे ये अख़बार मालिकानों की नौकरी करते हों। वर्कर की मदद के लिए बनाये गए ये अफसर सही में मालिकानों के लिए काम करने में जुटे होते थे, लेकिन मजीठिया मामले के आये आदेश के बाद इनका मिजाज और काम करने का अंदाज़ बदला है। हालांकि माना यह भी जाता है कि ये किसी न किसी तरह अब भी मालिकान के लिए काम करेंगे। इसलिए अब वर्करों को भी इनसे सतर्क रहना होगा। इन पर नज़र भी रखनी होगी, इनकी कार्य करने के तरीके को समझना होगा और वर्कर को आगे बढ़ने के लिए तैयार रहना होगा, मसलन हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इनकी शिकायत करने के लिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट से आये आदेश का डर सरकारी अफसर के मन में हुआ है। यही वजह है कि इन दिनों जहाँ भी मजीठिया का केस चल रहा है, अफसर इस काम को करने में देर नहीं लगा रहे हैं। पिछले दिनों राजस्थान पत्रिका का मामला वर्करों के लिए खुश करने वाला था। वहां जीतेन्द्र जाट के मामले में लेबर कोर्ट ने पत्रिका प्रबंधन से नौकरी पर रखने के लिए कहा। अभी कानपुर में दैनिक जागरण के वर्कर का मामला भी ऐसा ही सुना गया। कोर्ट ने जागरण की एक नहीं सुनी और लगातार सुनवाई करने की बात की। दो दिन सुनवाई हुई, जिसके बाद जागरण ने कोर्ट के आगे गिड़गिड़ाया कि सर एक तारीख आप अपनी मर्ज़ी से दे दें, तब कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी। जागरण ने पिछले दिनों पंजाब के जालन्धर में भी सरकारी बाबू के आगे हाथ जोड़े और वर्कर के वकील से मिलकर और उन्हें लोभ देकर मामले को निपटाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। कुल मिलाकर वर्कर के पक्ष में हवा चली है और इसका श्रेय जाता है माननीय सुप्रीम कोर्ट को, जिनके फैसले ने मालिकानों की हर चाल को जकड़ रखा है। मालिकान तन से हारे अभी भले ही नहीं दिख रहे हैं, पर वे जल्दी ही तन और मन दोनों से हारे नज़र आएंगे। वर्करों का धन उन्हें देना ही पड़ेगा। संभव है, अख़बार मालिकानों के खिलाफ मजीठिया के केस जहां भी चल रहे होंगे, कमोवेश सभी सरकारी अफसर की नीयत अब बदली सी होगी और ये मालिकान के प्यादे सरकारी दफ्तर से पालतू की तरह भगाए जा रहे होंगे। बाबजूद हमें उस कहावत को नहीं भूलना चाहिए कि कुत्ते की दुम को सालोंसाल चोंगे में यानी पाइप में डाल कर छोड़ दो, वह तब भी सीधी नहीं होगी। सरकारी अफसर थोड़े बदल भी जाएँ, मालिकान के ये प्यादे कभी भरोसे के लायक नहीं हो सकते। [ पत्रकार रतन भूषण की फेसबुक वॉल से]  

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Dakhal News 23 July 2017


trp week 28

 28वें हफ्ते की टीआरपी में नई बात ये है कि जी न्यूज 15+ वाली कैटगरी में भी आजतक के सिर तक पहुंच गया है. दोनों के बीच बहुत मामूली-सा अंतर रह गया है. बुरा हाल इंडिया न्यूज का है. लगता है दीपक चौरसिया का जादू खत्म हो गया है और यह न्यूज चैनल आखिरी सांसें गिनने लगा है. इंडिया टीवी ने इस हफ्ते स्थिति सुधारी है और नंबर चार पर आ पहुंचा है. न्यूज18इंडिया ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए नंबर पांच पर छलांग लगा दी है. न्यूज नेशन जो पिछले सप्ताह नंबर चार पर था, नंबर छह पर लुढ़क गया है. देखें आंकड़े... Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 28   Aaj Tak 16.7 same   Zee News 16.4 up 0.3  ABP News 12.4 dn 0.1  India TV 11.2 up 0.6  News18 India 10.7 up 0.5  News Nation 10.0 dn 0.8  News 24 8.0 up 0.6  India News 7.7 dn 0.4  Tez 3.2 up 0.1  NDTV India 2.1 dn 0.2  DD News 1.7 dn 0.5   TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.2 dn 0.2  Aaj Tak 16.5 dn 0.2  ABP News 12.1 dn 0.1  India TV 11.5 up 0.7  News18 India 11.4 up 0.3  News Nation 9.0 dn 1.0  News 24 7.7 up 1.0  India News 6.9 dn 0.1  Tez 3.5 up 0.2  NDTV India 2.8 dn 0.1  DD News 1.6 dn 0.5  

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Dakhal News 22 July 2017


भारत रक्षा पर्व

  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश जब सरहद पर तैनात जवानों को मिलेगे, तब उनका मनोबल और आत्मबल कई गुना बढ़ जायेगा। इस भावनात्मक प्रयास के लिये नव दुनिया परिवार बधाई का पात्र है। श्री चौहान ने यह बात आज मुख्यमंत्री निवास में नवदुनिया की पहल पर भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ की फ्लैग ऑफ सेरेमनी में कही। इस अवसर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह भी मौजूद थीं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम अपने घरों में चैन से सोते हैं क्योंकि देश की सीमाओं पर हमारे जवान मुस्तैद रहते हैं। हमारे जवान सीमाओं की रक्षा के लिये होली, दीपावली और रक्षा बंधन आदि त्यौहार भी घर पर नहीं मनाते हैं। सदैव जान हथेली पर लेकर देश भक्ति के जज्बे के साथ सरहद की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन पर्व पर जब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की हजारों बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश लेकर नवदुनिया का रक्षा रथ उनके पास पहुंचेगा, तब जवानों को अपार हर्ष होगा, भावनात्मक प्रसन्नता की अनुभूति होगी। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि विधान से रक्षा रथ को रवाना किया। इस अवसर पर बताया गया कि नवदुनिया द्वारा भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ के माध्यम से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भ्रमण कर बहनों से राखियां, ग्रीटिंग कार्ड और मैसेज का संकलन किया जा रहा है। संकलित सामग्री सेना के माध्यम से सीमा पर तैनात जवानों को उपलब्ध करवाई जायेगी। इस अवसर नवदुनिया के संपादक श्री सुनील शुक्ला, स्टेट ब्यूरो हेड श्री धनंजय प्रताप सिंह, श्री राजीव सोनी, हेड श्री विनित कौशिक सहित मॉडल स्कूल के एन.सी.सी.के छात्र एवं नव दुनिया के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

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Dakhal News 21 July 2017


भड़ास4मीडिया

दीपक आज़ाद  चर्चित मीडिया केन्द्रित वेबसाइट भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने ऐलान किया है कि 26 अगस्त से वेबसाइट का संचालन बंद कर दिया जाएगा। पिछले एक दशक से मीडिया संस्थानों के न्यूज़ रूम के अंदर और बाहर पत्रकारों और उनके मालिकों के अच्छे-बुरे कर्मों को बेबाकी के साथ प्रकाशित करने वाले यशवंत सिंह आर्थिक संकट की वजह से भड़ास को बंद करने की बात पहले भी करते रहे हैं, लेकिन जैसे-तैसे यह वेबसाइट अब तक चलती आ रही है। अब एक बार फिर यशवंत सिंह ने बकायदा 26 अगस्त का दिन मुर्करर करते हुए भड़ास को बंद करने का ऐलान किया है। यशवंत ने इसकी वजह आर्थिक संकट के साथ ही हिन्दी समाज और समझ को बताया है। भड़ास की भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह वेबसाइट देश के ज्यादातर हिन्दी अखबारों व न्यूज़ चैनल के कार्यालयों में बैन कर दी गई है। संपादक की कुर्सी पर बैठकर सामंतों की तरह व्यवहार करने वाले मालिक-संपादकों को हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कहीं उनके काले कारनामे लीक होकर भड़ास तक न पहुंच जाएं। संपादकों की अयाशी से लेकर दलाली तक की खबरों को भड़ास पर जगह मिलती रही है। मीडिया के भीतर की सड़ाध को बाहर लाने में भड़ास का एक अहम रोल रहा है। यही वजह रही है कि भड़ास, भ्रष्ट व सत्ता की दलाली करने वाले पत्रकार व मीडिया मालिकों की आंख की किरकिरी बना रहता है। हालांकि भड़ास पर भी आरोप लगता रहा है कि वह एकतरफा रिपोर्टिंग के जरिये सनसनी की तरह खबरें प्रकाशित करता है और गाहे-बगाहे चिरकुट किस्म के धंधेबाजों को जरूरत से ज्यादा स्पेस देता है। ऐसे वक्त में जब भारत में मीडिया का कारपोरेटीकरण तेजी से हो रहा हैे, और मीडिया संस्थाओं के न्यूज़ रूम में साजिशों, षडयंत्रों का सिलसिला पहले से और भयावह होता जा रहा है, तब भड़ास जैसी संस्थाओं का होना और भी बेहद जरूरी है। ऐसे में भड़ास की बंदी का ऐलान हम सब जो भी उसके चाहने वाले हैं, के लिए एक बुरी खबर है। इस पर हम मातम ही मना सकते हैं! यशवंत की हिम्मत अब अगर जवाब दे रही है और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि  भड़ास के लिए अब मौत ही बेहतर विकल्प है तो यही सही! नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं! [लेखक दीपक आज़ाद उत्तराखंड के तेजतर्रार पत्रकार और 'वाचडाग' के एडिटर हैं.]

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Dakhal News 19 July 2017


 नर्मदा सेवा यात्रा

सरकारी खर्चे पर अपने प्रचार-प्रसार का पागलपन किस हद तक जा सकता है। इसका नमूना सामने आया है। शिवराज सिंह सरकार ने भारत ही नहीं बल्कि विदेशी अखबार तक में नर्मदा सेवा यात्रा का विज्ञापन छपवाया। हर विज्ञापन में सीएम शिवराज सिंह चौहान का फोटो था। सरकार ने सेवा यात्रा के प्रचार-प्रसार पर करीब 22 करोड़ रुपए फूंक दिए वो भी उस समय जबकि मध्यप्रदेश पर डेढ़ लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है और यह बढ़ता ही जा रहा है। सरकार ने न्यूयार्क से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र 'इंडिया एब्रॉड' में विज्ञापन दिया। न्यूयार्क के इस समाचार पत्र को 10 लाख 26 हजार रुपए का विज्ञापन दिया गया था। यह जानकारी विधानसभा में सरकार ने कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह और जीतू पटवारी के लिखित प्रश्न के उत्तर में दी है।  नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के पत्र-पत्रिकाओं, इलेक्ट्रॉनिक चैनल और होर्डिंग्स के माध्यम से प्रचार-प्रसार पर सरकार ने 21 करोड़ 58 लाख 40 हजार 344 रुपए खर्च किए। हालांकि सरकार ने यह स्वीकारा कि न्यूयार्क के समाचार पत्र के अलावा किसी विदेशी चैनल को विज्ञापन नहीं दिया। यात्रा के लिए दो इवेंट फर्म मेसर्स भोपाल ग्लास एंड टेंट स्टोर और मेसर्स विजन फोर्स भोपाल को कार्य दिया गया था। यह भी बताया गया है कि नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा के लिए जनसंपर्क विभाग की तरफ से प्रिंट मीडिया को 10.77 करोड़ रुपए, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को 1.74 करोड़ रुपए का विज्ञापन दिया गया तो इसके मुद्रण कार्य पर 48.71 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके अलावा माध्यम ने भी इसके विज्ञापन और प्रचार-प्रसार पर 8 करोड़ 58 लाख 69 हजार 344 रुपए का खर्च किए।

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Dakhal News 19 July 2017


अमिताभ अग्निहोत्री ईटीवी

'के न्यूज' नामक चैनल के संपादक पद से इस्तीफा देकर अमिताभ अग्निहोत्री ईटीवी समूह पहुंच गए हैं. उन्हें ईटीवी में एक्जीक्यूटिव एडिटर बनाया गया है. अमिताभ 'के न्यूज' से पहले टोटल टीवी, समाचार प्लस समेत कई चैनलों में कार्यरत रहे. अमिताभ मीडिया में 30 साल से सक्रिय हैं. जेएनयू से पढ़ाई करने वाले अमिताभ मूलतः फर्रूखाबाद के रहने वाले हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 1990 में उन्होंने दैनिक जागरण के दिल्ली से की थी. वे दैनिक आज, दैनिक भास्कर, देशबंधु में भी नौकरी कर चुके हैं.  

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Dakhal News 17 July 2017


रायपुर दैनिक भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर, रायपुर को 1985 में कांग्रेस द्वारा प्रेस लगाने के लिए (अविभाजित मध्‍य प्रदेश में) पट्टे पर दी गई ज़मीन को छत्‍तीसगढ़ प्रशासन ने शुक्रवार 7 जुलाई के एक शासनादेश के माध्‍यम से रद्द कर के उस पर प्रशासनिक कब्‍ज़े का आदेश दे दिया है। ज़मीन का कुल आकार 45725 वर्गफुट और अतिरिक्‍त 9212 वर्ग फुट है यानी कुल करीब 5000 वर्ग मीटर है। नजूल की यह ज़मीन रायपुर भास्‍कर को प्रेस लगाने के लिए इस शर्त पर कांग्रेस शासन द्वारा दी गई थी कि संस्‍थान अगर प्रेस लगाने के विशिष्‍ट प्रयोजन से मिली ज़मीन को किसी और प्रयोजन के लिए इस्‍तेमाल करेगा तो शासन उसे वापस ले लेगा। इस ज़मीन का पट्टा 31 मार्च 2015 को समाप्‍त हो चुका था और दैनिक भास्‍कर ने इसके नवीनीकरण के लिए अग्रिम आवेदन किया था। छत्‍तीसगढ़ सरकार के राजस्‍व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 7 जुलाई को जारी आदेश कहता है कि कलेक्‍टर रायपुर से प्राप्‍त स्‍थल निरीक्षण प्रतिवेदन में पाया गया है कि ”उक्‍त भूमि पर 7 मंजिला पक्‍का व्‍यावसायिक कांपलेक्‍स बनाया गया है तथा प्रत्‍येक मंजिल पर प्रेस स्‍थापना से भिन्‍न अन्‍य व्‍यावसायिक प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग किया जा रहा है।” इसके बाद शासन ने कई बार अख़बार से इस संबंध में जवाब मांगा लेकिन अखबार प्रबंधन ने जवाब देने के लिए लगातार वक्‍त मांगा और जवाब दाखिल नहीं किया। आदेश कहता है, ”तदनुसार उक्‍त भूमियों पर निर्मित परिसंपत्तियों को निर्माण सहित नियमानुसार राजसात कर बेदखली की कार्यवाही करने हेतु कलेक्‍टर, रायपुर को आदेशित किया जाता है।” आदेश की प्रति प्रधान संपादक, दैनिक भास्‍कर, रायपुर को भी भेजी गई है। सवाल है कि रमन सिंह किस बात पर बिफर गए हैं कि उन्‍होंने रायपुर से दैनिक भास्‍कर का डेरा-डंडा ही उखाड़ने का आदेश दे डाला? सवाल यह भी उठता है कि करीब तीन दशक से रायपुर शहर के भीतर अपना धंधा चला रहा यह अख़बार अब क्‍या करेगा?(साभार- मीडिया विजिल)  

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Dakhal News 16 July 2017


नईदुनिया जागरण समूह

  नईदुनिया जागरण समूह के भारत रक्षा रथ को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना। शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को भारत रक्षा रथ पूरे दिन राजधानी रायपुर में घूमेगा। इसके बाद यह रथ बिलासपुर के लिए रवाना हो जाएगा। वहां ये यह रथ जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर होते हुए 2 अगस्त को जम्मू पहुंचेगा।

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Dakhal News 14 July 2017


 आनंद पांडे

पत्रकारिता जगत में अभी आनंद पांडे का नईदुनिया से इस्तीफा गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसने भी इस खबर को सुना, चौंक गया। आनंद पांडेय के फ़ोन घनघनने लगे। जो उन्हें सीधे कॉल नहीं कर सकते थे, वो करीबियों से पर्दे के पीछे की कहानी समझने की कोशिश करते रहे। अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। लेकिन हकीकत किसी को पता नहीं कि आखिर इस्तीफा हुआ क्यों? इसके लिए थोड़ा बैक ग्राउंड जानना जरूरी है। नवंबर 2014 में पांडे जी ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा दिया था। उस वक़्त वो भास्कर ग्रुप में शिखर पर थे। उनकी तेज तर्रार कार्यशैली के भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल इतने प्रभावित हुए कि उनका प्रमोशन पर प्रमोशन होता गया। एडिटोरियल से लेकर ब्रांड और अवार्ड organising कमिटी के वो मेंबर बन गए। हर महत्वपूर्ण इवेंट के लिए उनकी राय ली जाने लगी। पांडेजी के बढ़ते कद से ग्रुप एडिटर कल्पेश याग्निक तक को अपनी कुर्सी का खतरा महसूस होने लगा। सुधीरजी ने पांडे जी के काम को देखते हुए उन्हें गुजरात की बड़ी जिम्मेदारी दी। भाषायी प्रॉब्लम के कारण आनंदजी जाना नहीं चाहते थे और खुलकर इस बात को सुधीरजी के समाने रख भी नहीं पा रहे थे। इसी दौरान उन्हें नईदुनिया से आफर आया। एडिटर इन चीफ संजय गुप्ता से 2-3मीटिंग के बाद उन्होंने नईदुनिया जॉइन कर लिया। पद-पैसा दोनों की तरक्की हुई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि श्रवण गर्ग के कार्यकाल में पहले से ही कमजोर हो चुका नईदुनिया रसातल में जा चुका था। पांडे जी ने challenge स्वीकारा। उन्हें काम करने की पूरी आजादी दी गई। वो भास्कर संस्थान के ही महत्वपूर्ण व्यक्ति मनोज प्रियदर्शी को नईदुनिया लाने में कामयाब रहे। सीनियर न्यूज़ एडिटर प्रियदर्शी को महत्वपूर्ण सेंट्रल डेस्क (एमपी-सीजी) की जिम्मेदारी उन्होंने दी। शुरुआती विरोध के बाद पांडे जी ने अपनी कार्य योजना को अंजाम देना शुरू किया। नए-नए आईडिया पर काम शुरू हुआ। अखबार चर्चा में आने लगा। चूंकि पांडे और प्रियदर्शी, दोनों भास्कर को बखूबी समझते थे, इसलिए अनेकों बार लोग फ्रंट पेज पढ़कर आश्चर्य में पड़ जाते थे कि भास्कर और नईदुनिया लगभग एक जैसा न्यूज़ कंटेंट और पैकेज कैसे दे रहे हैं? इसके बाद रुमनी घोष के काम से संतुष्ट नहीं होने के कारण सिटी की जिम्मेदारी प्रमोद त्रिवेदी को दी गई। उससे पहले भोपाल का संपादक भी बदल दिया गया और भास्कर के ही सुनील शुक्ला को वहां बैठाया गया। नईदुनिया ने अपने कामों से मुकाम हासिल करना शुरू किया। 'निःशब्द ' वाली तस्वीर हो या रेत-शराब के ठेके जैसी खबरें... सरकार हिलने लगी। जागरण के मालिकों को ये सूट नहीं कर रहा था। इस बीच संजय शुक्ला ने बतौर सीओओ जॉइन किया। उन्हें भी पांडेजी की तेज-तर्रार कार्यशैली से परेशानी होने लगी। वे खुद की मनमानी नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने मालिकों के कान भरने शुरू किए। पांडेजी अखबार को आगे ले जाना चाहते थे। लेकिन संजय शुक्ला के हर बात में टांग अड़ाने से वो इसे अंजाम नहीं दे पा रहे थे। कई कोशिशों के बाद भी रायपुर संपादक का प्रिंट लाइन में नाम नहीं दिया गया। जागरण ग्रुप के संजय गुप्ता ने कई दफे संजय शुक्ला को फटकार लगाई, चेतावनी दी, लेकिन उसके बावजूद वो एडिटोरियल और उनके खिलाफ साजिश करता रहा। लोग कहते हैं कि स्थानीय संपादक आशीष व्यास भी इसमें पर्दे के पीछे शामिल हो गए। इस बीच अचानक बिना जानकारी दिए जागरण मैनेजमेंट ने वाराणसी यूनिट प्रभारी आलोक मिश्र को रायपुर में राज्य संपादक बनाकर बैठा दिया। तीन ब्यूरो बंद कर दिए गए। पांडेजी जो सोचकर आए थे, उसमें उन्हें निराशा हाथ लगी। काम से ज्यादा सियासत होने लगी। इस बात को संजय गुप्ता भी नहीं समझ सके। इस बीच भास्कर ग्रुप से हर दो-तीन महीने में पांडेजी का बुलावा आने लगा। एमडी हर हाल में चाहते थे कि आनंद पांडे जल्द से जल्द जॉइन करें। चूंकि नईदुनिया और जागरण ग्रुप से उनका नेचर जेल नहीं कर रहा था और सियासत भी तेज हो गई थी, लिहाजा उन्होंने नईदुनिया को छोड़ना ही बेहतर समझा। भास्कर की भी कोशिश है कि नईदुनिया के सिर्फ 4-5 प्रमुख लोगों को वो तोड़े, जिससे इस अखबार का बचा-खुचा अस्त्तित्व भी खत्म हो जाए। इसके लिए वह इन्हें मुँह मांगी कीमत भी देने को तैयार है। वैसे ये चर्चा आम हो चली है कि पांडे जी के जाने के बाद नईदुनिया सामान्य अखबार बन जायेगा। उनके साथ जुड़े लोगों के साथ ही 2-3 और लोगों के भी नईदुनिया छोड़ने की अफवाह है। इसमें सबसे फायदे में आशीष व्यास हैं, जो लंबे वक्त से बड़ी कुर्सी पर नजर गड़ाए हैं। लोगों का कहना है कि श्रवण गर्ग को हटाने और आनंन्द पांडे का संबंध मैनेजमेंट से बिगाड़ने में उनकी बड़ी भूमिका हैं। [एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.भड़ास फॉर मीडिया से ]

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Dakhal News 12 July 2017


 प्रदीप परिहार

जी मप्र और छग के एसाइनमेंट हेड प्रदीप परिहार ने इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है वे किसी बड़े समूह के साथ जल्द ही अपनी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं. प्रदीप करीब तीन सालों से जी मीडिया के साथ जुडे हुए थे. इसके पहले वे ANI के साथ काम कर चुके हैं. प्रदीप की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पकड़ काफी मजूबत मानी जाती है. साथ ही उनका रीजनल नेटवर्क भी बहुत तगड़ा है. प्रदीप ने जी में रहते हुए भोपाल और रायपुर में अच्छी रिपोर्टिंग भी की है. प्रदीप का इस्तीफा देना जी मप्र–छग के तगड़ा झटका माना जा रहा है.

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Dakhal News 11 July 2017


RSS की वेबसाइट सेवा गाथा

    मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सबसे बड़ा धर्म जरूरतमंद की सेवा है। मदद के अच्छे कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिये। अच्छे कार्यों की जानकारियाँ लोगों को प्रोत्साहित करेंगी। इससे अच्छाई को मजबूती मिलेगी। समाज में सकारात्मक वातावरण बनेगा। श्री चौहान आज समन्वय भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा प्रभाग की वेबसाईट 'सेवा गाथा' का लोकार्पण कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारतीय चिंतन सारे विश्व को परिवार मानता है। एक ही चेतना सभी प्राणियों में देखता है। स्वयंसेवक संघ ऐसा ही विशाल हृदय वाला राष्ट्रवादी संगठन है। यह संगठन समाज के लिये जीने वाले नागरिकों का निर्माण करता है। सेवा के संकल्प में सर्वस्व अर्पित कर, समाज को रोशन करने का कार्य, इसके स्वयंसेवक करते हैं। उन्होंने मातृ छाया, आनंद धाम आदि सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ के रहवासियों का स्वावलंबी और समरस जीवन देख आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। ऐसे कार्यों का व्यापक प्रचार–प्रसार किया जाना चाहिये। इससे नैराश्य का भाव दूर होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वेबसाइट से समाज को अच्छे कार्यों की प्रेरणा और नई ऊर्जा मिलेगी। संघ के सरकार्यवाह श्री सदाशिव सुरेश जोशी भैय्या जी ने कहा कि भारतीय जीवन-शैली में सेवा का संस्कार रचा-बसा है। यहाँ मानव सेवा ईश्वर की सेवा मानकर की जाती है। उन्होंने कहा कि सेवा कार्य निश्चित धारणा के साथ नहीं हो सकता है। इसके लिये दृष्टि और संवेदनशील विचारधारा की जरूरत है। बंधु भाव के साथ जरूरतमंद की पीड़ा, वेदना और दुर्बलता को समझ सेवा कार्य किया जाना चाहिये। इस भावना के साथ किये गये कार्यों के परिणाम सदैव अच्छे होते हैं। उन्होंने कहा कि गलत सामाजिक मान्यताओं से पीड़ित, अस्थिर जीवन शैली और दूरस्थ अंचलों में रहने वालों का एक बहुत बड़ा ऐसा वर्ग है, जो अपने मौलिक सामाजिक अधिकारों से वंचित है। उनमें बेहतर जीवन का आत्म-विश्वास जगाने के लिये समाज को विचार करना होगा। सामाजिक प्रश्नों के हल समाज को ही खोजने होंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वेबसाइट की गाथाएँ, सेवा कार्य के लिये लोगों को आगे आने के लिये प्रेरित करेंगी। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संचालक मध्य भारत श्री सुरेश पिंपलीकर ने किया। आभार प्रदर्शन सह प्रांत संचालक मध्य भारत श्री अशोक पांडे ने किया। सेवा गाथा वेबसाइट की संपादक श्रीमती विजय लक्ष्मी ने गाथाओं के संकलन, वेबसाइट के स्वरूप और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। वेबसाइट सृजक श्री स्वप्निल पारखिया ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोबाइल फ्रेंडली होने के साथ ही फेसबुक और ट्वीटर पर शेयर भी की जा सकेगी।

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Dakhal News 10 July 2017


पत्रकार  शैलेन्द्र तिवारी

जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र को आज पत्रकार और लेखक श्री शैलेन्द्र तिवारी ने हाल ही में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'रावण एक अपराजित योद्धा' पुस्तक भेंट की। मंत्री डॉ. मिश्र ने लेखक श्री तिवारी को रचनात्मक लेखन और पुस्तक प्रकाशन के लिए बधाई दी

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Dakhal News 9 July 2017


पत्रकार अनुराग उपाध्याय की कविता

आक्रामक शैली में लिखने वाले चर्चित पत्रकार अनुराग उपाध्याय एक बेहतरीन कवि भी हैं। उनकी रचनाएँ जिंदगी और प्रकृति के इर्दगिर्द बतियाती हुई प्रतीत होती हैं। ऐसी ही उनकी एक रचना।  संपादक    //धूप // सुबह सुबह बिन बताये  तुम्हारी तरह  धूप जीने से उतर आई मेरे अँधेरे कमरे में । सुबह की धूप  का मिजाज तुम सा ही है, एकदम सिंदूरी  तमाम सौम्य लालिमा को खुद में समेटे।   दोपहर में तमतमाती हुई धूप तुम्हारी तरह घुस आई मेरे कमरे में, जैसे हो उसे मुझसे झगड़ना ठीक तुम जैसा उग्र रूप मैं समझ ही नहीं पाया तुम थीं या धूप  अद्भुत है धूप का ये रूप।   विदा हो रही थी धूप साँझ को मेरे कमरे से  तुम्हारी तरह, कुछ ठिठकी सी, कुछ अनमनी सी कुछ कहना चाहती लेकिन चुप सी कल आने का कुछ कहने का वादा करके  मेरे कमरे से रुखसत हो गई धूप। *अनुराग उपाध्याय

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Dakhal News 8 July 2017


रजत शर्मा -इंडिया टीवी की वाट लगी

बार्क की 26 वें सप्ताह की टीआरपी ने रजत शर्मा एण्ड कंपनी के होश उड़ा दिए हैं। रजत शर्मा के इंडिया टीवी को ऐसा झटका लगा कि वो खिसक कर  छठवे नंबर पर पहुँच गया है। इंडिया टीवी के महादफ्तर ब्रॉडकास्ट सेंटर में आपातकालीन बैठकों के दौर शुरू हो गई हैं और पूरे सम्पादकीय विभाग को नए सिरे से खड़ा करने पर विचार किया जा रहा है। इण्डिया टीवी में प्रमुख पदों पर बैठे लोगों को बहार करने पर भी कंपनी विचार कर रही है।    नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 26 Aaj Tak 16.6 up 0.1  Zee News 16.0 up 1  ABP News 12.0 dn 0.3  News18 India 10.5 dn 0.3  News Nation 10.0 up 0.2  India TV 9.7 dn 0.3  India News 8.8 dn 0.5  News 24 7.4 up 0.2  Tez 3.5 same   NDTV India 2.8 dn 0.2  DD News 2.7 up 0.2    TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.7 up 2.1  Aaj Tak 16.3 same   ABP News 11.7 same   News18 India 11.3 dn 0.7  India TV 10.2 dn 0.5  News Nation 9.0 dn 0.4  India News 7.5 dn 0.6  News 24 6.8 up 0.1  Tez 3.8 up 0.1  NDTV India 3.2 dn 0.6  DD News 2.5 up 0.5 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 26   Zee                       64.6 Etv.                        21.8 Ibc 24                   10.0 Sahara  sa            1.7 Bansal                   0.9

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Dakhal News 6 July 2017


पत्रकार शिवअनुराग पटैरया

  मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटैरया साल में एक दो किताबें तो लिख ही देते हैं। उनके इस अंदाज पर भोपाल के प्रदेश टुडे अखबार के कॉलम सूरमा की फैंक में खूब लिखा गया है।  सूरमा ने लिखा -ए खुदा अता कर मुझे इल्म की दौलत, इतनी अता कर जितना समंदर का पानी। शिवअनुराग पटैरया, सूबे के वो सहाफी हैं जो इल्मो-अदब से भी बावस्ता हैं। गोया के पत्रकार तो भोत सारे होते हैं बाकी ज्ञान, रिफरेंस और भाषा पे हरएक का अधिकार नहीं होता। पटैरयाजी के बारे में इस बात से हर कोई इत्तफाक रखता है कि मियां खां पत्रकारिता के साथ ही सूबे की तारीख, रिवायत, कल्चर वगैरह का जीता जागता रिफरेंस हैं। मध्यप्रदेश की सियासत और यहां के तमाम मुख्यमंत्रियों की खासियतें और किस्सों की तो खान हैं पंडितजी। जाहिर है छतरपुर के इस बुंदेली खांटी पत्रकार ने सहाफत में अड़तीस-चालीस साल ऐसेई नर्इं बिता दिये। चीजों को समझना, मेहसूस करना और अपने इल्म को दूसरों में बांटने की इनकी अदा ही निराली है। पत्रकारिता का कोई भी तालिबे इल्म इनसे कभी भी कोई रिफरेंस या जानकारी बेखटके ले सकता है। भैया ने कई किताबें लिखीं। हाल ही में इनकी एक और किताब आई है। मध्यप्रदेश: अतीत और आज। 453 पेज की इस किताब को मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी ने शाया किया है। इसके 56 चेप्टरों में सूबे की भाषा, बोली, शिल्प, कल्चर, मेले, तीज-त्यौहार, लोकनाट्य, खानपान वगैरह पे बेहद सटीक सामग्री है। इसे लिखने में कोई ढाई साल रिसर्च की पटैरयाजी ने। बिलाशक ये किताब पत्रकारिता के तालिबेइल्म बच्चों के लिए भी भोत सटीक साबित होगी। इस नायाब किताब के लिए मुबारकबाद कुबूल करें जनाब। 

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Dakhal News 5 July 2017


ईटीवी भारत

इनाडु ग्रुप ‘ईटीवी भारत’ लांच कर रहा है. यह इनाडु समूह का डिजिटल नेशनल न्यूज प्लेटफॉर्म होगा. इसमें ढेर सारे मीडियाकर्मियों की जरूरत है. न्यूज कोऑर्डिनेटर, रीजनल न्यूज कोऑर्डिनेटर, न्यूज एडिटर, ब्यूरो चीफ, चीफ-सीनियर कंटेंट एडिटर (शिफ्ट इंचार्ज), कंटेंट एडिटर, रिपोर्टर, बुलेटिन प्रड्यूसर, पैनल प्रड्यूसर, न्यूज कास्टर, कंटेंट रिसर्चर आदि के लिए आवेदन मांगा गया है. ये सभी पद हैदराबाद स्थित रामोजी फिल्म सिटी के लिए हैं. अनुभवीं लोगों को प्राथमिकताएं दी जाएगी. फ्रेशर भी आवेदन कर सकते हैं.

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Dakhal News 4 July 2017


etv up

  इसे 'जल्दबाज़ी जो न कराए' तभी कहा जाएगा जब यह मानवीय गलती हो. यानि 24 घंटे की जगह 25 घंटे गलती से टाइप हो गया हो. पर अगर जानबूझ कर 25 घंटे लिखा और दिखाया गया है तो इसका मतलब साफ है कि ईटीवी समूह योगी को तेल लगाने के चक्कर में खुद को अनपढ़-गंवार चैनल साबित करने से भी गुरेज नहीं कर रहा है. वैसे कहा भी जाता है कि मुख्यधारा की मीडिया में मोदी और योगी के प्रति प्रेम इस कदर उमड़ा है कि इनके अलावा देश में कोई दूसरा कायदे का नेता ही नहीं नजर आता है. फिलहाल सोशल मीडिया पर ईटीवी की इस गंभीर चूक को लेकर लोग खूब मजे ले रहे हैं.[साभार भड़ास फॉर मीडिया ]

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Dakhal News 1 July 2017


इंडिया टीवी की हालत ख़राब ,पहुंचा पांचवे नंबर पर

इस साल के 25 सप्ताह बीत जाने पर सबसे ज्यादा नुक्सान रजत शर्मा के इंडिया टीवी को हुआ है। चैनल पहले नंबर से खिसक खिसक पर पांचवे नंबर पर पहुँच गया है।  इंडिया टीवी की जितनी हालत अजीत अंजुम के आने के बाद ख़राब हुई है इतनी बुरी स्थिति उसके शुरुवाती दौर 2004 में भी नहीं रही। इंडिया टीवी के सूत्र बताते हैं अजीत अंजुम की कार्यप्रणाली से वहां का सारा स्टाफ नाराज़ है और उनकी चैनल में फैलाई गुटबाजी का नतीजा चैनल को भोगना पड़ रहा है। खबर तो यहाँ तक है कि अजीत अंजुम अपनी कार्यप्रणाली नहीं ठीक करते हैं तो इंडिया टीवी प्रबंधन तत्काल उनका विकल्प खोजना पडेगा। इंडिया टीवी के हाल इस कदर ख़राब हुए हैं कि अब न तो उसके पास दमदार ख़बरें न ही कोई बड़ी ब्रेकिंग ख़बरें। चैनल के रिपोर्टर भी सुस्त पड़े हैं और किसी का भी बड़ी ख़बरों  से कोई लेनादेना नजर नहीं आता है।    नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 25 Aaj Tak 16.6 dn 0.3  Zee News 15.0 up 0.7  ABP News 12.3 up 0.4  News18 India 10.8 up 0.3  India TV 10.1 dn 0.6  News Nation 9.8 dn 0.7  India News 9.3 up 0.1  News 24 7.2 dn 0.3  Tez 3.4 up 0.1  NDTV India 3.0 up 0.2  DD News 2.5 up 0.2    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.4 same   Zee News 15.6 up 0.5  News18 India 12.0 up 0.4  ABP News 11.7 up 0.2  India TV 10.7 dn 0.8  News Nation 9.4 dn 0.6  India News 8.1 dn 0.1  News 24 6.7 dn 0.2  NDTV India 3.8 up 0.5  Tez 3.7 up 0.1  DD News 2.0 dn 0.1   मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 25   Zee                       61.7 Etv.                        23.9 Ibc 24                   10.5 Sahara  sa            1.6 Bansal                   1.0  

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Dakhal News 29 June 2017


एबीपी न्यूज़  जीएसटी

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में  जी.एस.टी. पर एबीपी न्यूज़ द्वारा आयोजित चर्चा में कहा कि जी.एस.टी. राज्य और देश के आर्थिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। जी.एस.टी. से देश का फायदा होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नई सोच और पहल एवं वित्त मंत्री  अरुण जेटली के अथक प्रयास के कारण ही जीएसटी लागू होने से एक देश और एक कर व्यवस्था पूरे देश में आगामी एक जुलाई से लागू होगी। श्री चौहान ने कहा कि 30 जून को रात्रि 12 बजे पार्लियामेंट हाउस के प्रांगण में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी नई कर व्यवस्था का शुभारम्भ करेंगे। यह एक ऐतिहासिक पल होगा जिसजी.एस.टी. राज्य और देश के आर्थिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होगा से जनता को 16 करों और उपकरों से आजादी मिलेगी, 1150 चुंगियों से निजात मिलेगी, टैक्स पर टैक्स लगने से आजादी मिलेगी, टैक्स ऑफिस के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और पूरे देश में अलग-अलग कीमतों से छुटकारा मिलेगा तथा कर की जटिलताओं से आजादी मिलेगी। श्री चौहान ने बताया कि जी.एस.टी. लागू होने से कारोबार करना और आसान हो जायेगा। नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि किसान सबसे बड़ा उपभोक्ता है वह भी इस नई कर प्रणाली से लाभ उठायेगा। आम आदमी के उपयोग की वस्तुओं के दाम घटेंगे और महँगाई कम होगी। वहीं दूसरी तरफ विलासिता वाली चीजों के दाम बढ़ेंगे। आम आदमी को राहत मिलेगी। नाके और चेक-पोस्ट खत्म होंगे। छोटे व्यापारियों को लाभ होगा। इंस्पेक्टर राज की समाप्ति होगी। उन्होंने बताया कि नयी कर प्रणाली से जुड़ी राज्यों की सभी आशंकाओं का निराकरण किया जा चुका है। इसके बाद भी जी.एस.टी. काउंसिल में राज्यों के वित्त मंत्रियों के माध्यम से शेष आशंकाओं को दूर किया जा सकेगा। श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा प्रत्येक स्तर पर जी.एस.टी. हेल्प डेस्क बनाई गई है। इस तरह की हेल्प डेस्क की संख्या 101 है। विभाग के अधिकारियों को जी.एस.टी. का प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा पूरे प्रदेश में लगभग 300 से अधिक कार्यशालाएँ आयोजित की गई हैं जिसमें नई कर प्रणाली जी.एस.टी. की बारीकियों को समझाया गया है। जी.एस.टी. के आने से राज्यों की आय में वृद्धि होगी और राज्य का विकास होगा।  

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Dakhal News 28 June 2017


पत्रकार राघवेंद्र की कलम से

राघवेंद्र सिंह राजनीति में एक जमाना था खास तौर पर कांग्रेस में, जब यह जुमला चलता था खाता न बही केसरी कहे वही सही... केसरी से तात्पर्य श्री सीताराम केसरी था। केसरी कांग्र्रेस के कोषाध्यक्ष थे बाद में वे राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। कांग्र्रेस सत्ता में थी और सत्ताधारी दल के पास नामी-बेनामी चंदा बहुत आता है। सो उनके पास भी पैसे देने वालों की रेलमपेल मची रहती थी। मगर सत्ता के तमाम दुर्गुणों से भरी कांग्रेस में काजल की कोठरी में बैठे केसरी जी जो कहे वह सही माना जाता था। इसके पीछे नेतृत्व, कार्यकर्ता और जनता का भरोसा होना बड़ी बात थी। मगर यह गुजरे जमाने की बात हो रही है। अब सबसे ज्यादा संकट भरोसे का है और यह हर दिन टूट रहा है। यह मुसीबत तो देशव्यापी है मगर हम फोकस कर रहे हैैं मध्यप्रदेश पर। सत्ता संगठन और नौकरशाही ....सब के सब चाहते हैैं कि जो वह कहे वही सही लेकिन कोई ऐसा केसरी नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस भी अपने केसरी की तरह नहीं। वह जनता के लिये संघर्ष करने एकजुट होने की बही तो खोलती है लेकिन खाते में सब सही नहीं दिखता। धर्म आधारित राजनीति का झंडा उठाने वाली भाजपा के धर्मराजों के रथ भी जो कभी जमीन से उपर चलते थे नीचे आ रहे हैैं। सात किसानों की मौत पर सत्ताग्र्रह करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उपवास पर ही प्रश्न खड़े हो चुके हैैं। वे किसान व जनहितैषी छवि को उजला करने के लिये पसीने-पसीने हो रहे हैैं। इसमें प्रदेश भाजपा और मंत्रीगण मदद तो कर रहे हैैं मगर अटपटी सी। प्रदेश अध्यक्ष नंदू भैया कहते हैैं किसानों की आत्महत्या के पीछे कर्ज को कारण बताना फैशन हो गया है। यह जख्मों पर नमक जैसा लगता है। कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन कहते हैैं दो सौ करोड़ की प्याज किसानों से खरीदेंगे भले ही भंडारण के अभाव में वह सड़ जाये। तेरह साल की सरकार भंडारण की व्यवस्था नहीं कर पाई, उचित दाम तय नहीं कर पाई जबकि उसका वादा दावा था कि किसानी लाभ का धंधा बनायेंगे और वह बन गया आत्महत्या का धंधा। विश्वास के टूटने की हजारों हजार वजहों में एक बड़ी वजह है। आमजन 2003 से भरोसा करके ही भाजपा को वोट देते आ रहे हैैं।  लेकिन खेती को लाभ का धंधा बनाने की तोता रटंत झूठ ही साबित हो रही है। भोला किसान इस सदमे को सह नहीं कर पा रहा है और उसकी आत्महत्या को सत्ताधारी दल तरह तरह के नाम दे रहे हैैं। इससे मुख्यमंत्री की छवि और भाजपा का ब्रांड मटियामेट हो रहा है। नेताओं के टूटते भरोसे के बीच करेला और नीम चढ़ा यह हो रहा है कि नौकरशाही ने झूठ बोलने में नेताओं को भी मात दे दी है। सबसे भयानक उदाहरण मंदसौर किसान गोलीकांड का है। जिसमें कलेक्टर एसपी तो होम मिनिस्टर से लेकर सीएम तक से झूठ बोलते रहे हैैं कि आंदोलनकारी किसानों की मौत पुलिस गोली से नहीं हुई। हालांकि बाद में सरकार ने स्वीकार किया पुलिस से ही किसान मरे। यह अपराध करने वाले कलेक्टर एसपी पंद्रह दिन बाद सस्पेंड किये गये। अभी इस सदमे से सूबा और सरकार उबरे भी नहीं थे कि भोपाल के कलेक्टर (अब इंदौर) निशांत बरबड़े ने अपने वरिष्ठ अफसरों को बता दिया कि किसानों से खरीदी गई हजारों क्विंटल प्याज का नब्बे फीसदी परिवहन हो गया है। वे सीएम की आंख के तारे अफसर हैैं सो भोपाल सिम्मी जेल तोड़ कांड के बाद भी उन्हें राज्य की आर्थिक राजनीति इंदौर की कमान लगता है इन्हीं काबिलियत भरी बातों के कारण सौैंप दी गई। हालांकि मुख्य सचिव वी.पी. सिंह ने तंज कसा कि यही है सक्सेसफुल अफसर की निशानी। लेकिन यहां मुख्य सचिव थोड़ा कमजोर साबित हुये उन्होंने सदन में गलत जानकारी देने से लेकर गोलीकांड और प्याज परिवहन के मसले पर कठोर कार्रवाई नहीं की।  ऐसी तमाम कमजोरियों के लिये कार्रवाई नहीं करने के लिये इतिहास में नेता-अफसरों को दागी के रूप में याद किया जायेगा। अफसर झूठ बोल रहे हैैं साथ ही नेताओं पर अवांछित टिप्पणी कर नियम कायदों का उल्लंघन कर रहे हैैं। लगता है कोई देखने सुनने वाला नहीं है। भाजपा का टूटता विधान नियम अनुशासन से चलने वाली प्रदेश भाजपा में लगता है स्वेच्छाचारिता हावी है। बयानवीरों को छोड़ दें  तो संगठन चलाने वालों का रवैया ऐसा है मानो वे पालिटिकल टूरिज्म पर आये हैैं। प्रदेश युवा मोर्चा पार्टी संविधान के बाहर जाकर निर्णय कर रहा है। मनमाने तरीके से तेरह समितियां गठित कर दीं। उस पर एतराज के बाद मोर्चा अध्यक्ष का बयान आता है कि जिन्हें आपत्ति है वे अपने पदों से त्यागपत्र दे दें। ऐसा लगता है पार्टी में इवेंट का नशा उसे जन संगठन के बजाये प्राइवेट प्रापर्टी में बदल रहा है। यह बीमारी प्रदेश भाजपा को भी लगी है। इसकी एक मिसाल यह है कि परंपरा के मुताबिक जिला भाजपा अध्यक्षों के द्वारा अपने जिले में भाजयुमो से लेकर अन्य मोर्चो की इकाइयां घोषित की जाती हैैं। ताकि वे मोर्चा उनके आग्र्रह पर पार्टी हित में काम करे। इसे समझने के लिये एक उदाहरण यह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ही प्रदेश के मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा करते हैैं न कि राष्ट्रीय अध्यक्ष। अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश के मोर्चा अध्यक्षों का ऐलान दिल्ली से  करे तो केसा रहेगा? होगा यह कि दिल्ली से घोषित मोर्चा अध्यक्ष अपने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की सुनेंगे ही नहीं। अब हो यह रहा है कि प्रदेश भाजपा कार्यालय से जिलों के मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा हो रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जिला भाजपा अध्यक्षों की पकड़ से मोर्चा नेता निकल जायेंगे। वे मनमानी करेंगे तो उन्हें रोकने वाला कोई नहीं होगा क्योंकि वे तो प्रदेश नेतृत्व सीधे जुड़े हैं उनके द्वारा घोषित किये गये हैैं। इसके अलावा हर मोर्चा की कार्यकारिणी सदस्यों की संख्या जो कि अध्यक्ष समेत छियालीस होनी चाहिये उसका भी पालन नहीं हो रहा है। चिंताजनक यह है कि प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री से लेकर प्रदेश प्रभारी सब खामोश है। जबकि पार्टी विधान में पेज 32 के कालम छह में सब स्पष्ट है। मगर सब टूट फूट रहा है। नियम, परंपरा और भावनाएं भी...।

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Dakhal News 27 June 2017


इंडिया टीवी -अजीत अंजुम

इंडिया टीवी चैनल की टीआरपी लगातार गिरने से चैनल में हड़कंप मचा हुआ है. रजत शर्मा एंड कंपनी धांय-धूंय पर आमादा दिख रही है. सबसे भारी दबाव में अजीत अंजुम हैं. अंजुम जी के खासमखास आउटपुट हेड संत प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया है. अब अंजुम पर दबाव है कि हफ्ते-दो हफ्ते में टीआरपी दुरुस्त करो वरना जाओ. बताया जा रहा है कि अजीत अंजुम ने अपने खास लोगों को इशारा कर दिया है कि जो अपनी जहां व्यवस्था कर पा रहा हो, कर ले. उधर, चर्चा है कि शाजी जमां या विनोद कापड़ी में से कोई एक इंडिया टीवी आ सकता है. विनोद कापड़ी लगातार फ्लाप फिल्में बनाने से काफी संकट में आ गए हैं और आजकल शिद्दत से नौकरी तलाश रहे हैं. पर उनके अतीत को देखते हुए कहीं कोई घास नहीं डाल रहा. ऐसे में वह अपने पुराने बॉस रजत शर्मा के पास रिरियाते हुए पहुंचे. कहा जा रहा है कि विनोद कापड़ी के चाल चरित्र चेहरे को देखते हुए इंडिया टीवी प्रबंधन उन्हें पूरा दायित्व नहीं देना चाह रहा. इसलिए संभव है कि वे संपादकीय सलाहकार टाइप का कोई पद पा जाएं. हालांकि यह अभी तक फाइनल नहीं है कि उनकी इंट्री किसी भी रूप में इंडिया टीवी में हो रही है या नहीं.  हां, रजत शर्मा और विनोद कापड़ी के बीच एक लंबी बैठक हो चुकी है, यह तो कनफर्म है. शाजी जमां एबीपी न्यूज से इस्तीफा देने के बाद से खाली बैठे हैं. अकबर पर एक किताब लिखने के बाद शाजी जमां किसी उपयुक्त मंच की तलाश में हैं. पर इंडिया टीवी का जो भाजपाई तेवर है, उसमें शाजी जमां वहां खुद को कैसे एडजस्ट करेंगे या रजत शर्मा उन्हें लाने को कितना उत्सुक होंगे, ये दोनों सवाल मुंह बाए खड़े हैं. इंडिया टीवी के सूत्रों का कहना है कि अजीत अंजुम को प्रबंधन ने दो हफ्ते का नोटिस दे रखा है. खासकर रजत शर्मा की पत्नी रीतू धवन बहुत नाराज चल रही हैं और उन्होंने इंडिया टीवी के पांच नंबर पर लुढ़क कर गिरने के बाद अजीत अंजुम की लंबी क्लास ली है. ज्ञात हो कि अजीत अंजुम इंडिया टीवी में आने के बाद यहां काम कर रहे कई पुराने लोगों की नौकरी खा चुके हैं और अपने कई खास लोगों की भर्ती कर चुके हैं. बावजूद इसके टीआरपी न आने से प्रबंधन नाराज है. उधर, चौथी दुनिया में लंबे समय से कार्यरत मनीष कुमार ने भी इंडिया टीवी ज्वाइन कर लिया है. मनीष लंबे समय तक चौथी दुनिया के एडिटर इन चीफ संतोष भारतीय के खासमखास हुआ करते थे.[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]  

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Dakhal News 26 June 2017


इंडिया टीवी की हालत पतली

इण्डिया टीवी की हालत लगातार पतली हो रही है ,रजत शर्मा का जादू भी दर्शकों पर असर नहीं डाल पा रहा है और ऐसे में कमजोर खबरदारी ने सात साल में पहली बार उसे चौथे नंबर पर धकेला है। वहीँ एबीपी न्यूज़ भी कुछ ख़ास नहीं कर पाया। ऐसे में आजतक नंबर वन और ज़ी न्यूज़ नंबर दो की पोजीशन पर कायम है।  नेशनल न्यूज़ चैनल Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 24 Aaj Tak 16.8 up 0.2  Zee News 14.3 dn 0.3  ABP News 12.0 dn 0.5  India TV 10.7 dn 0.1  News18 India 10.5 dn 0.1  News Nation 10.5 same   India News 9.2 up 0.2  News 24 7.5 up 0.5  Tez 3.3 up 0.3  NDTV India 2.9 dn 0.1  DD News 2.3 dn 0.1    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.4 dn 0.2  Zee News 15.0 dn 1.2  News18 India 11.6 up 0.6  ABP News 11.5 dn 0.2  India TV 11.5 up 0.1  News Nation 10.0 up 0.4  India News 8.2 up 0.4  News 24 6.9 up 0.2  Tez 3.6 up 0.2  NDTV India 3.3 dn 0.2  DD News 2.1 dn 0.1 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 24   Zee                       72.4 Etv.                        13.7 Ibc 24                    9.4 Sahara  sa            2.8 Bansal                   0.8

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Dakhal News 22 June 2017


राज्य सभा टीवी

राज्य सभा टीवी में जॉब की चाह रखने वालों के लिए सुनहरा मौका है। यहां विभिन्न पदों के लिए आवेदन निकाले गए हैं, जिसके लिए उसने वॉक इन इंटरव्यू/स्किल टेस्ट का सिस्टम अपनाया है। ये पोस्ट प्रड्यूसर (हिंदी), असोसिएट कॉपी एडिटर (न्यूज मीडिया- हिंदी व अंग्रेजी), सीनियर एंकर (हिंदी), एंकर (हिंदी), सीनियर गेस्ट कोआर्डिनेटर, गेस्ट कोआर्डिनेटर, जूनियर गेस्ट कोआर्डिनेटर, विडियो लाइब्रेरियन, विडियो लाइब्रेरियन  के लिए निकाली गई हैं। बता दें कि इन पदों के लिए 21 से 58 साल तक के योग्य व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवारों को राज्य सभा टीवी की वेबसाइट पर मौजूद फॉर्म डाउनलोड कर भरने के बाद इंटरव्यू के लिए दी गई तारीखों पर राज्य सभा टीवी के नीचे दिए ऑफिस में पहुंचना है। इसके आवेदन फॉर्म के साथ सेल्फ अटेस्ट किए हुए क्वॉलिफिकेशन डॉक्युमेंट्स की कॉपीज ले जानी जरूरी है। ओरिजनल क्वॉलिफिकेशन डॉक्युमेंट्स नहीं ले जाने हैं। अधिक जानकारी के लिए आप लिंक http://rajyasabha.nic.in/rsnew/rstv/rstvrec.pdf पर क्लिक कर सकते हैं या फिर नीचे पढ़ सकते हैं: पता: Rajya Sabha Television, 3rd Floor, Talkatora Stadium Annexe Building, New Delhi-110001

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Dakhal News 21 June 2017


किशन कृष्णा युवक मंडल

  जनसंपर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज किशन कृष्णा युवक मंडल, ग्वालियर की स्मारिका का विमोचन किया। इस अवसर पर स्मारिका के संपादक श्री सौरभ सक्सेना सहित पत्रकार श्री संजय जैन, श्री संतोष हिंगणकर उपस्थित थे।

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Dakhal News 20 June 2017


tv एंकर

अरशद अली खान  एक जमाना था, जब दूरदर्शन ही था, तब प्रतिमा पुरी, मुक्ता श्रीवास्तव, सलमा सुलतान और जेवी रमन ही खबर वाचन किया करते थे। वे ही एंकर होते थे, वे ही वाचक होते थे। उनके चेहरे हमेशा खबर देने की जिम्मेदारी के प्रति एकदम सजग दिखते और अंत में मुस्कुरा कर विदा लेते। जब निजी खबर चैनल आए तब भी दो हजार सात आठ तक एंकर खबर देते, चरचा कराते। इनमें एक अनुशासन रहता। एनडीटीवी में बरखा दत्ता का ‘‘वी द पीपल’ या विक्रम चंद्रा का ‘‘बिग फाइट’ तीखी बहसें कराते, लेकिन एंकर संतुलित और संयोजक की भूमिका में ही रहते।लेकिन जब अन्ना आंदोलन दिन-रात कवर हुआ, रामदेव का अनशन लाइव चौबीस बाई सात के भाव से कवर हुआ, जब निर्भया कवरेज हुआ तो एंकरों की मुखमुद्रा बदलने लगी। वे दिन भर बैठते। फील्ड से आतीं रपटों को कंट्रोल करते। बहसें कराते और अांदोलनकर्ता के भाव में आ जाते, आह्वानकर्ता बनने लगते। जनता से कहने लगते कि निकल पड़ो। चुप मत बैठो। कब तक सहोगे। जनता जवाब मांगती है। लाइनें खुली हैं। आप बताइए कि क्या करना है? यह चैनल और एंकरों और रिपोर्टरों के ‘‘एक्टिविस्ट’ ‘‘विजिलांत’ होने की शुरुआत थी। पगार पर काम करने वाले एंकरों और रिपोर्टरों को लगने लगा कि वे चाहें तो ‘‘एक धरने’ को आंदोलन बना सकते हैं। सरकार को मजबूर कर सकते हैं। वे चाहें तो एक बर्बर बलात्कार को एक राष्ट्रीय आंदोलन बना सकते हैं। वे समाज का ‘‘आईना’ बनने की जगह उसे ‘‘हांकने वाले’ बन गए! तब भी एंकरों के चेहरे उतने क्रुद्ध नहीं दिखते थे, जितने आज दिखते हैं जबकि आज एंकर किसी आंदोलन को हवा न देकर सिर्फ विपक्ष का एक्सपोजे ज्यादा कर रहे हैं। तब वे किस बात पर इतने नाराज, इतने भड़के हुए, इतने कुपित, इतने आक्रामक नजर आते हैं? तीन लाख से पचास लाख की पगार लेने वालों को इतना गुस्सा क्यों आता है? हमें दो-तीन कारण नजर आते हैं: एक : यह वह दौर है जिसमें ‘‘बदतमीज’ और ‘‘बदमिजाज’ की कीमत है (सौजन्य : सोशल मीडिया); दूसरा : एंकर और उनके चैनल अपनी खास आवाज, अपनी खबर की प्रस्तुति शैली की जगह अपने क्षुब्ध और क्रुद्ध चेहरे को ही अपना ब्रांड समझते हैं। तीसरा : अस्थायी और ठेके की नौकरी की अस्थिरता, कभी भी नोकरी जाने का डर, एंकरों व रिपोर्टरों को दिन-रात ‘‘अंतस्फोट’ की स्थिति में पहुंचाते रहते हैं। इसलिए भी वे गुर्राते दिखते हैं। कारण जो भी हो, एक-दो घंटे तक ऐसा गुर्राना अगर अभिनय भी है, तो भी सेहत के लिए तो हानिकारक हो ही सकता है। 

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Dakhal News 19 June 2017


अखबारों पर एक्शन

269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त होंगे सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने  स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार छोटे या मझौले अखबारों पर कार्रवाई नहीं कर रही है| केवल उन्हीं अखबारों पर कार्रवाई होगी जो केवल फाइलों में छपते हैं। दिल्ली में अपने अन्य मंत्रालय से जुड़ी एक प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा, ‘‘एक भी चलने वाला अखबार प्रभावित नहीं हुआ है| जो पेपर में पेपर हैं उन्हीं के ऊपर कार्यवाही की गई है| जो केवल विज्ञापन के लिए डीएवीपी के लिए छापे जाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे अखबारों को अलग रखा गया है जो नियमित छप रहे हैं| चाहे वह छोटा हो या बड़ा हो किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि एक तंत्र विकसित किया गया है कि अंग्रेजी, हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं के लिए डीएवीपी के तहत क्या ज़रूरी है । उन्होंने कहा कि एक छवि बनाई जा रही है कि हम छोटे अखबारों पर कारवाई कर रहे हैं| अगर किसी को लगता है कि उनके अखबार के साथ गलत हुआ है तो वह उनसे या उनके अधिकारी से मिलकर पुन: जांच का आग्रह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रिंटिंग प्रेस में 65 अखबार छप रहे हैं, क्या यह संभव है? हमने राज्यों से भी सहायता मांगी है कि वह प्रिंटिंग प्रेस के बिजली के बिल चेक करें| उसी से पता चल जाएगा कितने अखबार छप रहे हैं। पिछले काफी समय से मोदी सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है। आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दिया है। समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए।

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Dakhal News 18 June 2017


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सिंगरौली में  इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट की जिला इकाई के तत्वाधान में 20 मई से लगातार चलाये जा रहे आंदोलन को विराम लगा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सूर्य कांत शर्मा, एसडीएम श्री विकास सिंह, एस्सार प्रबंधन के जनसंपर्क अधिकारी श्री सुधांशु चर्तुवेदी, सिक्योरिटी चीफ श्री परमिन्दर सिंह तथा आईएफडब्लूजे के प्रतिनिधियों के बीच हुयी त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान मांगी गयी मांगो पर चर्चा की गयी। चर्चा के दौरान एस्सार प्रबंधन ने स्वीकार किया कि विस्थापितों के पुर्नवास में विसंगतियां है। उन्होंने पुर्नवास की विसंगतियों को सुधारने का वचन दिया।  हालांकि एस्सार प्रबंधन ने जो अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था उसमें उनके अनुसार पुर्नवास की समुचित व्यवस्था की गयी है। लेकिन कलमकारों तथा एसडीएम श्री विकास सिंह के तर्को का वे जवाब नहीं दे पाये।  एस्सार प्रबंधन के लिए हो रहे कोयला परिवहन के सवाल पर प्रबंधन ने विकल्प प्रस्तुत करते हुए बताया कि छ: माह के अंदर महुआगांव में कोल यार्ड की व्यवस्था की जायेगी तथा फिर वही से कोयले का परिवहन कराया जायेगा। ऐसी स्थिति में गोरबी से लेकर कर्सुआलाल तक हो रहे प्रदूषण पर भी पूर्ण विराम लगाया जा सकेगा।  प्रत्येक तीन महीने पर होगी कार्य समीक्षा वार्ता के दौरान लिखित रूप से तय किया गया कि एस्सार प्रबंधन प्रत्येक तीन माह पर सारी समस्याओं को लेकर शिविर का आयोजन करेगा। जिसमें प्रशासन तथा आईएफडब्लूजे के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जायेगा। विस्थापितों की समस्याओं को लेकर होने वाली इस मानीटरिंग बैठक में सारे लंबित मामले सुलझाये जायेंगे। इस संदर्भ में 20 जुलाई के आस-पास एस्सार प्रबंधन द्वारा नंदविहार में कैंप का आयोजन किया जायेगा।  कलमकारों का अभूतपूर्व आंदोलन प्रदूषण, बेरोजगारी, विस्थापन, पुर्नवास जैसी जन समस्याओं को लेकर कलमकारो का आंदोलनरत होना संभाग की ऐतिहासिक घटना कही जा सकती है। जिले में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण, बीमारियां, बेरोजगारी तथा विस्थापन जैसी संवेदनशील समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट के कलमकारो ने सड़क पर उतर कर 25 दिनो तक तपती दोपहरी में पंडाल में बैठकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन किया। प्रदूषण की रोकथाम, बेरोजगारो को नौकरी, विस्थापितों को पुनर्वास का लाभ दिलाने की इस मुहिम में वे अपने मुकाम तक पहुंचे। पत्रकारों का यह मिशन अनवरत जारी रहेगा। प्रबंधन के साथ सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बनाकर पीड़ितो को न्याय दिलाना पत्रकारो का उद्देश्य था आगे भी जारी रहेगा। मांगी गयी मांगो के क्रियान्वयन तक कलमकार अपनी प्रतिबद्धता कायम रखने के लिए प्रयासरत रहेंगे। पत्रकारों के इस आंदोलन में शिवसेना, ऊर्जांचल विस्थापित एवं कामगार यूनियन, माकपा, भाकपा तथा अन्य पत्रकार संगठनो ने भी अपना योगदान दिया।  त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सूर्यकांत शर्मा, एसडीएम श्री विकास सिंह, एस्सार प्रबंधन के जनसंपर्क अधिकारी श्री सुधांशु चर्तुवेदी, सिक्योरिटी चीफ श्री परमिन्दर सिंह के साथ आईएफडब्लूजे के प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री आरके श्रीवास्तव, संभागीय उपाध्यक्ष आरएन पांडेय, संभागीय उपाध्यक्ष सुरेश पांडेय, जिलाध्यक्ष विकास देव पांडेय, महासचिव राजकिशोर पांडेय, कोषाध्यक्ष शशिकांत कुशवाहा, जिला सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष विजय वर्मा, दीपक वर्मा आदि उपस्थित थे।    

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Dakhal News 16 June 2017


trp इंडिया टीवी चौथे नंबर पर

ज़ी टीवी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है इस सप्ताह उसकी टीआरपी 74. 8 रही है। वहीँ नेशनल चैनल में आज तक नंबर वन बना हुआ है। पूरी ताकत लगाने के बाद एबीपी तीसरे नंबर पर और रजत शर्मा का इण्डिया टीवी चौथे नंबर पर आ गया है। हिंदी भाषी इलाके में इण्डिया टीवी की रिपोर्टिंग टीम ने चैनल का भट्टा बैठा दिया है। मध्यप्रदेश ,राजस्थान ,यूपी ,बिहार में इण्डिया टीवी और एबीपी के दर्शक तेजी से घटे हैं।    BARC MARKET SHARE THIS WEEK IN MPCG:  ZEE MPCG 74.8 %,  ETV 11.7%,  IBC 7.8%   Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 23 Aaj Tak 16.7 up 0.2  Zee News 14.6 dn 0.5  ABP News 12.5 up 0.3  India TV 10.8 dn 0.1  News18 India 10.6 up 0.1  News Nation 10.5 up 0.2  India News 9.0 dn 0.1  News 24 7.0 up 0.2  Tez 3.1 dn 0.3  NDTV India 2.9 up 0.1  DD News 2.4 same     TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.5 up 1.1  Zee News 16.2 dn 0.5  ABP News 11.7 up 0.2  India TV 11.4 dn 0.3  News18 India 11.0 dn 0.7  News Nation 9.6 up 0.1  India News 7.8 same   News 24 6.7 up 0.5  NDTV India 3.5 same   Tez 3.4 dn 0.3  DD News 2.2 up 0.1

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Dakhal News 15 June 2017


jitu patvari

  कांग्रेस नेता जीतू पटवारी की पत्रकार वार्ता को भोपाल के दो प्रमुख समाचार पत्रों में नहीं मिला स्थान। बताया जा रहा है मध्यप्रदेश सरकार के एक प्रमुख अधिकारी ने दो प्रमुख समाचार पत्रों को कहा था कि जीतू पटवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस न छापें और बाद में ऐसा ही हुआ।  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य जीतू पटवारी पत्रकारों से बात कर रहे थे। वह उन आरोपों का खंडन कर रहे थे जिसमे कुछ आन्दोलनकारी किसान युवकों के बारे में कहा जारहा है कि उनके नाम पर एक इंच ज़मीन भी नहीं है तो फिर वह किसान कैसे हो सकते हैं। पटवारी ने स्पष्ट किया कि देश - प्रदेश में लाखों युवा ऐसे हैं जिनके नाम पर ज़मीन नहीं है, ज़मीन उनके पिता चाचा अथवा दादा - काका के नाम पर है, लेकिन यह बात सिर्फ किसान ही समझता है। कांग्रेस नेता ने शिवराज के उपवास को भाजपा नेता - कार्यकर्ता सम्मलेन करार देते हुए कहा कि उस कार्यक्रम में भाजपा के लोगों का जमावड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिवराज जी का उपवास तुड़वाने के लिए जिस किसान के आने की बात कही गयी है, उसका जवान बेटा पुलिस की गोली से मारा गया है और उसकी अभी तेरवीं भी नहीं हुयी है। पटवारी ने सवाल किया कि कौन पिता तेरवीं से पहले मुख्यमंत्री का उपवास तुड़वाने आएगा ? उन्होंने आरोप लगाया कि उस किसान को विधायक - अधिकारी डरा - धमका कर भोपाल लाए थे।  इसके अलावा भी जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार पर बहुत गंभीर आरोप लगाए।  लेकिन पत्रकारिता का दुर्भाग्य देखिये अपने आपको पत्रकारिता का सूरमा समझने वाले राजधानी के दो प्रमुख समाचार पत्रों ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेता की इस पत्रकार वार्ता को अपने अखबार में ही स्थान नहीं दिया।  

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Dakhal News 14 June 2017


shiv sena-shivraj

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह निशाने पर आ गए हैं। इस बार शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए लिखा है कि पहले तो किसानों पर गोली चलाई और अब उपवास का ड्रामा किया जा रहा है। सामना के संपादकीय में छपे लेख के मुताबिक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माहात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान को एक बेकार मुख्यमंत्री के तौर पर देखा गया। किसानों, महिलाओं और आम लोगों के लिए कल्याणकारी नीतियों के बावजूद किसान आंदोलन कर रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। शिवसेना ने कहा कि शिवराज ने कभी किसानों का कभी अपमान नहीं किया और न प्रदर्शन को समाज-विरोधी गतिविधि कर कोई राजनीति करने की कोशिश की। शिवसेना ने कहा कि जब दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में आंदोलन का आह्वान किया तो बीजेपी ने अपना डबल स्टैंडर्ड दिखाया। शिवसेना ने कहा, 'हाल ही में बीजेपी ने केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले दिल्ली के सीएम की आलोचना की। उन्हें प्रदर्शन करने की जगह नीतियों को सुलझाने कहा गया।' संपादकीय के मुताबिक, 'यह शिवराज सिंह चौहान पर भी लागू होता, जो कि फास्ट पर जाकर महात्मा गांधी की विचाराधारा का अनुसरण कर रहे हैं। क्या गाधी की विचाराधारा का अनुसरण करने से हर समस्या का समाधान हो जाएगा? पहले वे बुलेट चलाते हैं,फिर फास्ट पर जाते हैं।' उल्लेखनीय है कि कर्जमाफी और एमएसपी की मांग को लेकर मंदसौर में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। इन प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी जिसमें 5 किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद किसानों का आंदोलन राज्य के दूसरे हिस्से में भी फैल गया।   

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Dakhal News 12 June 2017


अरुण शौरी

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्तनशीं था, उसको भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था. शुक्रवार की शाम दिल्ली के प्रेस क्लब में इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक और लेखक अरुण शौरी ने जब पाकिस्तानी शायर हबीब जालिब का ये शेर पढ़ा तो वहाँ मौजूद 500 से ज़्यादा पत्रकारों को मालूम था कि शेर दरअसल किसके लिए पढ़ा गया है. उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट से शेर का स्वागत किया. प्राइवेट टीवी चैनल एनडीटीवी के प्रोमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के घर और दफ़्तरों पर पिछले हफ़्ते सीबीआई के छापों के ख़िलाफ़ दिल्ली के पत्रकारों की ये दुर्लभ बैठक थी और अरुण शौरी के सीधे निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे. हिंदुत्व की राजनीति के वो अकेले बुद्धिजीवी हैं जो खुले मंच पर नरेंद्र मोदी का नाम लेकर उनकी आलोचना करते हैं और मज़ाक उड़ाते हैं. पिछले तीन बरस में पत्रकारों को मोदी के साथ कई बार सेल्फ़ी खींचने की होड़ लगाते देखा गया है, लेकिन दिल्ली में उनकी ओर से विरोध की ये पहली तीखी आवाज़ थी. अपनी बात की शुरुआत में अरुण शौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया कि "मोदी के कारण इतनी बड़ी संख्या में पुराने दोस्त यहाँ इकट्ठा हुए हैं." उन्होंने ये बातें प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ से सिर्फ़ डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर प्रेस क्लब में कहीं. और अगर मोदी की टीम ने इस बैठक का नोटिस नहीं लिया या इसको उसी तरह अपने ठहाके लगाकर हवा में उड़ा दिया जैसा कि वो राहुल गाँधी की राजनीति को हवा में उड़ाते हैं तो इसका सिर्फ़ एक ही मतलब है कि ये सरकार धरातल से छह इंच ऊपर तैर रही है. मंच पर वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर, एचके दुआ, शेखर गुप्ता, प्रणय रॉय के साथ क़ानूनविद् फली एस नरीमन आदि वो लोग बैठे थे जिनमें से ज़्यादातर ने इंदिरा गाँधी की इमर्जेंसी का दौर देखा था. तब बोलने की आज़ादी ख़त्म कर दी गई थी और प्रेस की आवाज़ दबा दी गई थी. हबीब जालिब का शेर पढ़ने के बाद अरुण शौरी ने मुस्कुराते हुए कहा कि ये पाकिस्तानी शायर का शेर था, पर मैं ख़ुद को बचाने के लिए गुरुग्रंथ साहिब में लिखी बात कहता हूँ: राम गयो, रावण गयो- जा के बहु परिवार. और थोड़ा रुककर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- "राम गए, रावण गए… ये भी जाएँगे." अरुण शौरी और कुलदीप नैयर जैसे पत्रकार 1988 में भी सत्ता का प्रतिकार करने को ठीक इसी जगह पर एकजुट हुए थे जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने मानहानि विधेयक लाकर प्रेस (तब प्राइवेट टीवी चैनल नहीं हुआ करते थे) पर लगाम लगाने की कोशिश की थी. प्रेस बिल के ख़िलाफ़ विरोध जताने के लिए दिल्ली के पत्रकारों ने इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक जुलूस निकाला था जिसमें कई नामी-गिरामी संपादक शामिल हुए थे. सफ़ेद कुर्ता और धोती पहने रामनाथ गोयनका इस जुलूस की सबसे अगली क़तार में चले थे. उन दिनों राजीव गाँधी के मीडिया मैनेजरों ने बड़े जतन से उनकी 'मिस्टर क्लीन' की छवि गढ़ी थी. उनके पास लोकसभा में जैसा बहुमत था वैसा नरेंद्र मोदी के पास आज भी नहीं है. पर राजीव गाँधी को इस सबका कोई फ़ायदा नहीं हुआ. इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर पर सवार होकर सत्ता में पहुँचे राजीव गाँधी की 'गुडविल' मुट्ठी की रेत की तरह तेज़ी से छीजी जा रही थी. राजीव गाँधी के मंत्री जिस शहर में जाते उनसे सबसे पहले सवाल पूछा जाता कि क्या आप मानहानि विधेयक का समर्थन करते हैं या नहीं? अगर मंत्री गोलमोल जवाब देते या कहते कि हाँ, तो बिना कुछ कहे सभी पत्रकार चुपचाप उठकर प्रेस कांफ़्रेंस से बाहर आ जाते. ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक राजीव गाँधी ने अपनी कैबिनेट की बैठक बुलाकर मानहानि विधेयक को वापिस लेने का ऐलान नहीं कर दिया, हालाँकि इसे लोकसभा में पास किया जा चुका था. शुक्रवार को प्रेस क्लब में अरुण शौरी ने उन पुरानी घटनाओं को याद किया और पत्रकारों से नरेंद्र मोदी के मंत्रियों के लिए भी यही नुस्ख़ा अपनाने को कहा. उन्होंने कहा,"बॉयकॉट कीजिए. उनकी (मंत्रियों की) प्रेस कांफ़्रेंस का बॉयकॉट कीजिए. उन्हें (यानी मंत्रियों को) अपने किसी समारोह या सभा में आमंत्रित मत कीजिए." शौरी ने मीडिया के साथ नरेंद्र मोदी सरकार के रिश्तों पर बिना लाग लपेट के अपनी बात कही. उन्होंने कहा मोदी सरकार ने कई तरह से मीडिया को चुप कराने या उसे बहलाने की कोशिश की- "पहले विज्ञापन देकर मीडिया का पेट भरा- एक ज़ुलू कहावत है कि कुत्ते के मुँह में हड्डी डाल दो तो वो भौंकना बंद कर देता है. और अब भय फैलाया जा रहा है कि 'मोदी सब कुछ सुन रहे हैं'. 'अमित शाह सीबीआई को कंट्रोल करते हैं'." अपनी बात के आख़िर में उन्होंने कहा, "भारत में जिस किसी ने प्रेस के ख़िलाफ़ हाथ उठाया है, उसका हाथ जल गया है और उसे अपना हाथ वापिस खींचना पड़ा है." अरुण शौरी के ऐसे तेवर तब दिखाई पड़ते थे जब वो इमरजंसी और उसके बाद के दिनों में मानवाधिकार आंदोलनों में सक्रिय थे और सरकारें उन्हें चुप कराने की कोशिश करती थीं. अस्सी के दशक में जब इंडियन एक्सप्रेस के संपादक के तौर पर उन्हें हिंदुस्तान का सबसे बड़ा प्रतिष्ठान विरोधी पत्रकार माना जाता था. आम तौर पर एक्टिविज़्म या राजनीतिक विचारधाराओं के विवाद से दूर रहने वाले प्रणय रॉय तक का चेहरा बोलते वक़्त तमतमा उठा और उन्होंने मौजूद पत्रकारों से कहा - "अगर आप इनके सामने रेंगने लगे तो ये आप को छोड़ेंगे नहीं. लेकिन अगर आप डिगे नहीं और इनके सामने तने रहे तो आपको ये परेशान नहीं कर पाएँगे." इंडिया टुडे ग्रुप के संपादक और मालिक अरुण पुरी ने एक लिखित बयान जारी करके एनडीटीवी का खुलकर समर्थन किया, बुज़ुर्ग हो चले कुलदीप नैयर ने सत्ताधीशों के साथ अपने संघर्षों को याद किया, शेखर गुप्ता, ओम थानवी और कई दूसरे पत्रकारों ने मीडिया हाउस पर सीबीआई के छापे को आने वाले काले दिनों का संकेत बताया, कुलदीप नैयर ने कहा कि मैं सोचता था कि इमर्जेंसी के बाद अब ये और इमर्जेंसी नहीं लगाएँगे मगर इन्होंने फिर से वैसा ही कर दिया. और क़ानूनविद् फली एस नरीमन ने नात्सी विरोधी जर्मन पादरी मार्टिन निमोलर की वो प्रसिद्ध कविता सुनाई: पहले वो कम्युनिस्टों को दबोचने आए, पर मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था… पर तीन बरस में क्या हुआ कि देश के बड़े संपादक मोदी की नाव के चप्पू चलाने की बजाए उनके सामने कमर पर हाथ रखकर खड़े हो गए हैं? एनडीटीवी और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच की कड़वाहट कुछ वैसी ही होती जा रही है जैसी इमरजेंसी में और उससे पहले इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप और इंदिरा गाँधी के बीच हो गई थी. इंदिरा गाँधी जब एक्सप्रेस की पत्रकारिता को क़ाबू में करने में नाकाम रहीं तो उन्होंने एक्सप्रेस के मैनेजमेंट को हड़पने की कोशिश की. उनकी हत्या के बाद राजीव गाँधी और एक्सप्रेस के बीच भी वैसी ही कड़वाहट जारी रही. राजीव ने एक्सप्रेस ग्रुप पर और रामनाथ गोयनका के सुंदरनगर गेस्ट हाउस पर सीबीआई, इनकम टैक्स और एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट के छापे डलवाए. बाद की घटनाओं ने साबित कर दिया कि इस लड़ाई में न इंदिरा गाँधी जीतीं और न ही राजीव गाँधी. अरुण शौरी ने ठीक कहा कि जब भी सत्ताधीशों ने मीडिया पर हाथ डाला है तो उनका हाथ जला ही है. इंदिरा गाँधी को इमरजेंसी का भुगतान करना पड़ा और रोड रोलर बहुमत के दम पर मीडिया की बाँह मरोड़ने की हिम्मत करना राजीव गाँधी को भी भारी पड़ा. ये कोशिश उनसे पहले बिहार के काँग्रेसी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र ने भी की थी और अपनी इसी कोशिश में उन्होंने बिखरे हुए मीडिया को एकजुट करने में मदद की. ठीक यही काम आज भी हो रहा है वरना शेखर गुप्ता, राज चेंगप्पा, अरुण पुरी और यहाँ तक कि ख़ुद प्रणय रॉय कब से सत्ता-प्रतिष्ठान विरोधी पत्रकार हो गए? इन सबका पाँच सौ पत्रकारों की मौजूदगी में कुलदीप नैयर और अरुण शौरी के साथ एक मंच पर बैठना ही ये साबित करता है कि नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के नॉन-स्टॉप बोलने वाले तमाम प्रवक्तागणों ने एनडीटीवी को भारत में प्रेस की आज़ादी का प्रतीक बना दिया है. देश में इमरजेंसी न होने के बावजूद बीजेपी सरकार ने एनडीटीवी को अपनी स्क्रीन काली करके विरोध दर्ज करने का मौक़ा दिया और अब सीबीआई के छापे डलवाकर प्रेस और सरकार के बीच एक नए और खुले द्वंद्व का बीज बो दिया है. पिछले तीन बरस में शायद ही किसी राजनीतिक पार्टी के किसी नेता ने मोदी और उनकी सरकार पर इतना सीधा और तीखा हमला बोलने की हिम्मत की हो. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ज़रूर 'घुस कर मारूँगा' की तर्ज़ पर राजनीति की शुरुआत की थी पर पंजाब, गोवा विधानसभा चुनावों और दिल्ली के स्थानीय चुनावों में हार के बाद वो भी चुप्पी साध गए हैं. क्योंकि उन्हें चुनावी राजनीति करनी है और वोटर फ़िलहाल नरेंद्र मोदी के बारे में कोई सवाल सुनने के मूड में नहीं है. पर अरुण शौरी कोई अरविंद केजरीवाल नहीं हैं. उन्हें न कोई चुनाव लड़ना है, न किसी वोट बैंक को मनाए रखने के लिए सोच समझ कर, सधी भाषा में बोलना है. मोदी ने जिस तरह लालकृषण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा को बर्फ़ में लगाया उसी तरह शौरी को भी किनारे कर दिया. संघ परिवार से गर्भनाल का संबंध आडवाणी-जोशी का मुँह बंद रखने पर मजबूर करता है पर शौरी ने निक्कर-टोपी पहनकर संघ की शाखा में कभी ध्वज-प्रणाम नहीं किया. वो अगर अपनी पर उतारू हो गए तो हर फ़ोरम पर बोलने, लिखने और मोदी और उनके मंत्रियों का मखौल उड़ाने से उन्हें कौन रोकेगा? मसलन, मोदी के कैबिनेट मंत्री वेंकैया नायडू के बारे में उन्होंने कहा ही कि वेंकैया को तीसरी जमात की किताब से एक पन्ना लिखने को कहा जाए तो उन्हें नहीं आएगा और उनसे इंडियन एक्सप्रेस में लेख लिखवाए जाते हैं ! इसी तरह अरुण शौरी अभेद्य से लगने वाले मोदी के उस इमेज कवच को धीरे धीरे कुछ हद तक प्रभावहीन करने की ताक़त रखते हैं जो विज्ञापन और इमेज-मेकिंग कंपनियों ने कई वर्षों की मेहनत से तैयार किया है. अगर मोदी की इमेज के ये कवच-कुंडल एक बार उतर गए तो उन्हें हर मर्ज़ की दवा, हर सवाल का जवाब और हर समस्या का समाधान मानने वाले लोगों की नज़र बदलते देर नहीं लगेगी. लेकिन अभी वहाँ पहुँचने के लिए प्रेस और मीडिया पर कई छापे और डालने होंगे.[साभार ]

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Dakhal News 12 June 2017


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सरकार ने  277 अखबारों की मान्यता खत्म कर दी है जो केवल विज्ञापन लेने के लिए  प्रकाशित करते थे। पिछले एक साल में इन प्रकाशनों ने करीब दो करोड़ रपए का विज्ञापन बटोरा है। एक-एक प्रिंटिंग प्रेस से 70 अखबार छापे जा रहे हैं। सरकार केवल आफिस कापी छापने वाले अखबारों से विज्ञापन की राशि वापस लेने की कार्रवाई भी शुरू कर सकती है और उन नौ प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है जो एक दिन में 70 से अधिक अखबार छाप रहे थे।सामान्य तौर पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के विज्ञापन पाने के लिए कुछ लोग प्रिंटिंग प्रेस, डीएवीपी और राज्यों के सूचना निदेशालयों के साथ मिलकर केवल आधिकारिक कापी छापते हैं और उनको दिखाकर विज्ञापन ले लेते हैं। डीएवीपी के नियम के अनुसार प्रत्येक प्रकाशक को हर महीने अपने अंकों को जमा करना होता है। छोटे अखबारों को सीए सर्टिफिकेट देने की भी छूट है। प्रकाशक डीएवीपी में जमा करने लायक ही अखबार छापते हैं और बाजार में उनकी उपस्थिति नहीं होती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू के निर्देश पर आरएनआई और डीएवीपी से अधिकारियों ने कुछ प्रिंटिंग प्रेस और अखबारों के कार्यालयों पर छापेमारी की। चार दिल्ली की और चार लखनऊ की प्रिंटिंग प्रेसों से 70-70 अखबार छापे जा रहे थे। एक प्रिंटिंग प्रेस को एक से अधिक अखबार छापना भारी पड़ जाता है। ऐसे में 70 से अधिक अखबार छापने पर डीएवीपी और आरएनआई ने 277 प्रकाशकों और प्रिंटरों को नोटिस भेजा जिसमें से 118 ने सफाई दी जबकि 159 ने नोटिस का जवाब ही नहीं दिया। डीएवीपी ने इन अखबारों की मान्यता खत्म कर दी। अब इन अखबारों को विज्ञापन नहीं दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि झूठे काजग-पत्रों के मार्फत इम्पैनलमेंट कराने और विज्ञापन हासिल करने पर इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इनसे विज्ञापन की राशि वापस ली जा सकती है। इन अखबारों ने अकेले वर्ष 2015-16 के दौरान दो करोड़ रपए के विज्ञापन ले लिए थे। डीएवीपी के जो लोग इस घपले में शामिल हैं उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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Dakhal News 10 June 2017


एनडीटीवी फाउण्डर प्रणय रॉय

एनडीटीवी के को-फाउण्डर प्रणय रॉय के यहां सीबीआई के छापे के बाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीटर पर हर्षातिरेक में किलक उठना गौरतलब है कि 'कानून का डर हर किसी के अंदर होना चाहिए, फिर वो चाहे कितनी बड़ी शख्सियत क्यों न हो?' स्वामी का ट्वीटर सरकारी भयादोहन की उन काली परछाइयों की ओर इशारा करता है, जो कूट-संरचनाओं की काली दीवारों पर राजनीतिक हिकमत के साथ मंडरा रही हैं। केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने इस छापे के बाद कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है। वैसे जब कानून अपना काम करता है, तो  लोगों को डर नहीं लगता है। डर उस वक्त पैदा होता है, जब कानून 'अपना' काम करने के बजाय 'सरकार' का काम करने लगता है।  स्वामी का ट्वीट सीधे सवालों को आमंत्रित करता है कि क्या सही अर्थो में कानून का डर सब लोगों को समान रूप से आशंकित, आतंकित और आरोपित कर रहा है? स्वामी के ट्वीटर से उपजे डर के परिदृश्यै पर अदृश्या भयादोहन की इन परछाइयों के पीछे छिपी राजनीतिक हिकमतों को समझना और सुलझाना मुश्किल नहीं है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने यह कहकर घटना को वैधानिक-तिलिस्म की चादर से ढंकने की कोशिश की है कि कानून अपना काम कर रहा है। लेकिन नायडू का यह कानूनी-दांव पिलपिला है, क्योंकि प्रणय रॉय पर कार्रवाई के बाद 7.33 लाख करोड़ के लोन पर ऐश कर रहे देश के दस बड़े उद्योगपतियों के एनपीए अकाउंट्स, विराट प्रश्न-चिन्ह बनकर खड़े हो जाते हैं कि इन लोगों में कानून का भय कैसे अंकुरित होगा?  स्वामी क्या यह बता पाएंगे कि प्रणय रॉय के मन में डर पैदा करने को ये कोशिशें 1.14 लाख करोड़ के कर्जदार अनिल अंबानी को कैसे अपनी गिरफ्त में लेंगी? हाल ही में रिलायंस कम्युनिकेशन के नाम पर दस बैंको के कर्जदार अनिल अंबानी के लिए 25 हजार करोड़ की ऋण चुकाने की अवधि दिसम्बर 2017 तक क्यों बढ़ा दी गई है?  अनचीन्हे और अपर्याप्त आरोपों से घिरे प्रणय रॉय को डराने से पहले क्या केन्द्र सरकार को गौतम अडानी, रुईया ब्रदर्स, जिंदल, जयप्रकाश गौड़ या राजकुमार धूत जैसे अरबों के कर्जदारों को डराने की जरूरत नहीं हैं? प्रणय रॉय के मुताबिक ऋण की यह रकम भी वे सात-आठ साल पहले अदा कर चुके है।        एनडीटीवी घोषित रूप से मोदी-सरकार की रीति-नीति पर तीखे सवाल उठाता रहा है। यह बात आसानी से गले उतरने वाली नहीं है कि कोई भी, भले ही वह एनडीटीवी क्यों नहीं हो, दल-दल में खड़े होकर सरकार पर कीचड़ उछालने का दुस्साहस करेगा...? एनडीटीवी पर सीबीआई के छापे की प्रतिध्वनि में कानून की कम, सरकार की टंकार ज्यादा सुनाई दे रही है। एनडीटीवी से सरकार की नाराजी पुरानी है। उस पर शिकंजा कसने की कोशिशें भी नई नहीं हैं। नवम्बर 2016 के पहले सप्ताह में भी मोदी-सरकार ने एनडीटीवी के प्रसारण पर एक दिन की रोक लगाने की कोशिश की थी। मीडिया की आजादी के सवालों में उलझने के कारण आदेश को वापस लिया गया था। इस मर्तबा सरकार ने आपराधिक मामले को आगे रखा है ताकि कार्रवाई को मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से नहीं जोड़ा जा सके। लेकिन एनडीटीवी व्दारा प्रस्तुत तथ्यों के बाद कार्रवाई में बदनीयती सिर उठाती महसूस हो रही है।  एनडीटीवी के बहाने मीडिया में डर पैदा करने की कोशिशें आपातकाल की चालीसवीं सालगिरह पर प्रकाशित लालकृष्ण आडवाणी की उन आंशकाओं को गहरा कर रही हैं कि आपातकाल की प्रवृत्तियों से सावधान रहना जरूरी है। मोदी-सरकार सवालों से परहेज करती है, जो मीडिया सवाल करेगा, वह परेशान होगा। दशकों तक मीडिया-फ्रेण्डली रही भाजपा का यह कठोर राजनीतिक चेहरा मीडिया के लिए अजनबी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नकेल डालने के साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रिंट मीडिया पर फंदा कसने का क्रम शुरू कर दिया है। मध्यम और छोटे अखबारों का अस्तित्व सवालिया होता जा रहा है। अभिव्यक्ति के आजाद परिन्दों को कार्पोरेट-मीडिया के पिंजरों में बंद करने की साजिशें परवान चढ़ने लगी हैं।  2003 में फिल्म डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने फिल्म बनाई थी- 'डरना मना है' ... 2006 में उन्होंने इसके सिक्वल का नाम रखा था- 'डरना जरूरी है'... रामगोपाल सुब्रमण्यम स्वामी जैसे ही विवादास्पद व्यक्ति हैं, जो कानून की लाठी से सबको डराना चाहते हैं। स्वामी ने प्रणय रॉय के मसले में कहा है कि सबका 'डरना जरूरी है।'  इसका जवाब 1975 में प्रदर्शित शोले फिल्म में गब्बर का यह डॉयलॉग है कि 'जो डर गया, वह मर गया' … मीडिया का तो मूल-मंत्र ही यही है कि वह डरे नहीं, क्योंकि 'जो डर गया, वह मर गया' ...। - उमेश त्रिवेदी - लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।

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Dakhal News 9 June 2017


abp-india tv

  22 वें सप्ताह के न्यूज़ टेलीविजन रेटिंग पॉइंट बताते हैं कि अब नंबर वन होने की दौड़ आज तक और ज़ी न्यूज़ के बीच है ,trp देखें तो पता चलता है abp न्यूज़ और इण्डिया टीवी के बीच तीसरे और चौथे नंबर पर बने रहने  का संघर्ष चल रहा है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 22 Aaj Tak 16.5 up 0.5  Zee News 15.1 up 0.2  ABP News 12.2 dn 0.6  India TV 10.9 dn 0.6  News18 India 10.5 up 0.3  News Nation 10.2 up 0.5  India News 9.1 dn 1.0  News 24 6.8 dn 0.2  Tez 3.4 up 0.3  NDTV India 2.9 up 0.3  DD News 2.4 up 0.2    TG: CSAB Male 22+ Zee News 16.7 up 0.5  Aaj Tak 15.5 same   India TV 11.7 dn 0.1  News18 India 11.7 up 1.0  ABP News 11.5 dn 1.2  News Nation 9.5 up 0.3  India News 7.9 dn 0.9  News 24 6.3 dn 0.2  Tez 3.7 up 0.4  NDTV India 3.5 up 0.4  DD News 2.1 dn 0.1 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 22 Zee                       66.7 Ibc 24                   14.6 Etv                         9.9 Sahara  sa            5.8 Bansal                   1.4

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Dakhal News 8 June 2017


प्रदेश टुडे

मध्यप्रदेश के प्रमुख सांध्य दैनिक प्रदेश टुडे अखबार ने छ किसानों की सरकारी गोलीबारी में मौत के बाद अपने सम्पादकीय को  खाली छोड़ दिया है। प्रदेश टुडे के इस कदम की सराहना की जा रही है। ऐसा तब ही होता है जब विचार होते हुए भी शब्द कम पड़ जाएँ।  प्रदेश टुडे ने सम्पादकीय स्थान भले ही रिक्त छोड़ा हो लेकिन सच्चाई यही है कि किसान आंदोलन को अब तक असामाजिक तत्वों का आंदोलन कह रही शिवराज सरकार अब बैकफुट पर है। पुलिस की गोलाबारी में छ किसानों की मौत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अफसर उन्हें किस तरह गुमराह करते रहते हैं। पहला मौका है जब मीडिया ने भी सरकार के साथ मुख्यमंत्री को भी इस सब का जिम्मेदार माना है। जाहिर है जब अच्छे कामों का श्रेय शिवराज सिंह लेते हैं तो छ निर्दोष किसानों की मौत की जवाबदारी भी उनकी बनती है।   

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Dakhal News 7 June 2017


इंदौर  प्रेस क्लब

इंदौर  प्रेस क्लब के 'संवाद' कार्यक्रम पत्रकार  खबर इंदौर से। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी पत्रकार सुरक्षा कानून जल्दी से जल्दी लागू किया जाए, इसका लाभ सभी पत्रकारों को मिले और इसके प्रावधान ऐसे हों कि उनको शारीरिक और संपत्ति की सुरक्षा मिले। आज पत्रकार चौतरफा संघर्ष में घिरा है और हमें एकजुट होकर अपनी बात को आगे बढ़ाना चाहिए, तभी हम सरकार से पत्रकारों के हित में उक्त कानून लागू करवा पाएंगे और इसका लाभ हर श्रेणी के पत्रकार को मिले। यह बात इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकार सुरक्षा कानून पर आयोजित 'संवाद' कार्यक्रम में इंदौर-उज्जैन संभाग के पत्रकारों के प्रतिनिधि संगठनों के नुमाइंदों ने कही। सभी ने एकमत से कहा कि एक लंबी लड़ाई का हम सूत्रपात कर रहे हैं। संवाद की शुरुआत में इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने प्रेस क्लब द्वारा विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए गए पत्रकार सुरक्षा कानून प्रारूप के कानून की जानकारी दी और कहा कि इसे लागू करवाने के लिए हमारा एकजुट होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो सकता है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। इस कानून में यह प्रावधान भी होना चाहिए कि कोई भी पत्रकार इसका दुरुपयोग भी न कर सके। इस मुद्दे पर जल्दी ही पत्रकार संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।  इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सतीश जोशी ने कहा कि सरकार व्यापक स्वरूप में पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल प्रभाव से लागू करे। यह बहुत ही गंभीर विषय है और इसके लिए हमें जिस भी स्तर पर संघर्ष करना पड़े हम उससे पीछे नहीं हटेंगे। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि सरकार हमारी सुरक्षा की व्यवस्था करे, उक्त कानून में हमारी संपत्ति और शरीर की सुरक्षा का प्रावधान हो। कानून लागू करने से पहले सरकार इस पर हमारी राय भी ले। वरिष्ठ पत्रकार हेमन्त पाल ने कहा कि एक्ट के दायरे में अंशकालिक पत्रकारों को भी लाया जाना चाहिए और पत्रकारों की भी एक परिभाषा तय होना चाहिए।  देवास प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिलसिंह सिकरवार ने कहा कि हम एक लम्बी लड़ाई का सूत्रपात कर रहे हैं। पत्रकार सुरक्षा कानून के दायरे में हर श्रेणी के पत्रकारों को शामिल करना चाहिए। इसके लिए हम तहसील व जिला स्तर से भी आवाज उठाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार छोटू शा ी ने कहा कि उक्त कानून में ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रेस क्लब महासचिव नवनीत शुक्ला ने कहा कि हम जल्दी ही उक्त प्रारूप के आधार पर एक अंतिम प्रारूप तैयार करेंगे, इस पर अलग-अलग पत्रकार संगठनों से भी चर्चा की जाएगी और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रेस की आजादी में भरोसा रखने वाले संगठनों को साथ लेकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखेंगे। प्रेस क्लब उपाध्यक्ष संजय जोशी ने कहा इस कानून के दायरे में हर पत्रकार को लाना चाहिए भले ही वह किसी भी पत्रकार संगठन से वास्ता रखता हो। सूरज उपाध्याय ने कहा हम अपनी लड़ाई में नेता, समाजसेवी और जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करेंगे। प्रदीप जोशी ने कहा कि कवरेज के दौरान सुरक्षा का विशेष प्रावधान कानून में किया जाना चाहिए। संजय त्रिपाठी ने कहा कि महाराष्ट्र जैसा कानून मध्यप्रदेश में भी लागू हो और पत्रकारिता करने वाला हर शख्स इस कानून के दायरे में लाया जाए। मुकेश मिश्रा ने कहा हम एकजुट हो जाएंगे तो सरकार को निर्णय लेना ही पड़ेगा। प्रदीप मिश्रा ने कहा हम जनप्रतिनिधियों से बार-बार यह सवाल करें कि आखिर मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून क्यों लागू नहीं हो पा रहा है। म.प्र. श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शर्मा ने कहा एक होकर ही हम इस कानून को लागू करवा पाएंगे। सुरक्षा मिलेगी तो ही हम मजबूती से काम कर पाएंगे। राहुल वावीकर ने कहा कि इसमें डॉक्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट जैसे ही प्रावधान होना चाहिए। प्रेस क्लब सचिव हेमन्त शर्मा, कोषाध्यक्ष दीपक कर्दम, वरिष्ठ पत्रकार विमल गर्ग, अनुराग पुरोहित ने भी इंदौर प्रेस क्लब द्वारा तैयार ड्राफ्ट पर अपनी राय प्रकट की। संवाद में उज्जैन प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री विशाल हाड़ा, नीमच प्रेस क्लब के अध्यक्ष भूपेन्द्र गौड़ बाबा, देवास प्रेस क्लब के सचिव मोदी, वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु राठौर, पवन शर्मा, प्रकाश त्रिवेदी, अनिलसिंह भाटी, कपिल पंवार, अभिषेक चेंडके, राजीव उपाध्याय, वरिष्ठ छायाकार राजू रायकवार, आशु पटेल सहित कई पत्रकार इस संवाद में शामिल हुए।

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Dakhal News 6 June 2017


पत्रकार आंद्रे वॉकर

  ब्रिटेन के एक पत्रकार ने लंदन ब्रिज पर हुए आतंकी हमले के बाद इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को चुनौती दी है। इस हमले में आतंकियों ने सात लोगों की हत्या कर दी थी। हमले के कुछ समय बाद न्यूयॉर्क ऑब्जर्वर में पत्रकार आंद्रे वॉकर ने एक ट्वीट कर इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को उन पर हमला करने की चुनौती दी है। आंद्रे ने आतंकी संगठन को चुनौती देते हुए ट्वीट किया, 'मैं अपने सिर पर खुद इनाम रखता हूं। अगर कोई भी आईएस का आतंकी मुझे मारता है, तो उसे 50 हजार पाउंड (41 लाख 42 हजार 209 रुपए) मिलेंगे। मैं आपको अपना पता देता हूं। पुलिस भी तुम्हें नहीं रोकेगी, लेकिन मैं बता दूं कि मेरे पास एक तलवार है। शुभकामनाएं।' आंद्रे ने इस युद्ध में अपना सिर काटने वाले आतंकी को 50 हजार पाउंड देने की बात लिखने के साथ ही थेम्स नदी के किनारे वेस्टमिंस्टर टेरस पर खींची गई एक तस्वीर भी लगाई है। इसमें दिख रहा है कि वह अपने दोनों हाथों में एक तलवार पकड़े हैं। उन्होंने आगे लिखा, 'मुझे इस बात की फिक्र नहीं कि ऐसा करके मैं कुछ लोगों को बेवकूफ दिख सकता हूं, न ही मैं आईएस के बारे में सोचकर परेशान हूं। आओ आओ, कोशिश करो।' लंदन ब्रिज और बरो मार्केट इलाके में हुए आतंकी हमले में 7 लोगों की हत्या और 48 लोगों के घायल हो जाने के बाद उन्होंने आईएस के आतंकियों को अपने साथ तलवारबाजी करने की चुनौती दी है। हालांकि, अब आंद्रे के इस ट्वीट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस ट्वीट को मजाकिया तौर पर ले रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे पोस्ट किए जाने की टाइमिंग के कारण इसकी आलोचना कर रहे हैं। एक शख्स ने कमेंट किया कि मैं नहीं जानता कि यह चुनौती देकर तुम क्या कहना चाहते हो? वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि सीधे-सीधे बोलो कि तुम आतंकवाद की फंडिंग करने का प्रस्ताव दे रहे हो?' एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया कि इस तरह सड़क पर तलवार लेकर चलना शायद गैरकानूनी है। आज सुबह तक ट्विटर पर मैंने इससे ज्यादा बेवकूफाना चीज नहीं देखी थी। इन आलोचनाओं पर आंद्रे ने कहा कि यह प्रस्ताव देने का कारण काफी सरल है। आतंकियों को किसी ऐसे इंसान से लड़ना चाहिए, जो उनके बराबर का हो। बच्चों को कुचलने में क्या बहादुरी है?' पुलिस ने लंदन ब्रिज में शामिल 3 आतंकवादियों को भी मार गिराया है और करीब दर्जनभर संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। मार्च से अब तक यह तीसरा बड़ा आतंकी हमला लंदन में हुआ है।  

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Dakhal News 5 June 2017


प्रणय रॉय के घर CBI का छापा

ndtv ने कहा- फंसा रहे झूठे केस में सीबीआई ने एनडीटीवी के को-फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन प्रणय रॉय और उनकी पत्नी के घर छापामार कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार यह छापा उनके दिल्ली स्थित आवास पर पड़ा है। प्रणय रॉय पर फंड डायवर्जन का आरोप है। इस मामले में सीबीआइ ने केस दर्ज कर लिया है। इसके बाद चैनल ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि झूठे आरोप में रॉय को फंसाया जा रहा है। हम लोकतंत्र को इस तरह से कमजोर करने की कोशिशों के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। सीबीआइ ने बताया कि दिल्ली और देहहरादून में छापेमारी की है। प्रणय रॉय पर आईसीआईसीआई बैंक को 48 करोड़ का घाटा पहुंचाने का आरोप लगा है। इस मामले पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि कानून का डर हर किसी के अंदर होना चाहिए फिर वो चाहे कितनी बड़ी ही शख्सियत क्यों न हो। सोमवार सुबह 8.00 बजे के करीब केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की टीम एनडीटीवी न्यूज चैनल के प्रमोटर प्रणय रॉय के ग्रेटर कैलाश-1 स्थित घर पर पहुंची और छापेमारी की। प्रणय रॉय पर फंड डायवर्जन और बैंक से फ्रॉड का आरोप है। सीबीआइ की टीम प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय से बैंक फ्रॉड के मामले में भी पूछताछ कर रही है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने फेमा प्रावधानों का उल्लंघन करने को लेकर एनडीटीवी के खिलाफ 2,030 करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया था। ईडी का ये नोटिस प्रणय रॉय, राधिका रॉय और सीनियर एग्जीक्यूटिंव केवीएल नारायण राव के खिलाफ जारी किया गया था।  

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Dakhal News 5 June 2017


हिंदी वाले पत्रकार राहुल देव

देश के प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता पुरस्कार से प्रसिद्ध पत्रकार राहुल देव को सम्मानित किया गया।  राहुल देव ने पत्रकारिता की शुरूआत 1979 में स्नातकोत्तर पढ़ाई के दौरान लखनऊ में ‘दि पायोनियर’ से की। इस तरह वे आपातकाल की छाया से ताजा-ताजा मुक्त हुए वातावरण में पत्रकार बने थे, जो एक तरह से देश के दूसरे मोहभंग (नेहरू से विरक्ति के बाद) का काल था। इंदिरा गांधी को हराकर विपक्षी दलों ने केंद्र में जो सरकार बनाई थी, उसमें विखंडन और टूट-फूट का दौर चरम पर था। खोजी पत्रकारिता से प्रारंभ उनका सफर अंग्रेजी साप्ताहिक ‘करेंट’ के जरिए राजनैतिक और विश्लेषणात्मक लेखन की ओर मुड़ गया। ‘दि इलेस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ (दोनों दिल्ली), 'दि वीक’ व 'प्रोब इंडिया’ (दोनों लखनऊ) तक वे अंगरेजी के पत्रकार रहे। बाद में लोकप्रिय हिन्दी पत्रिका 'माया’ के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख बने। तत्पश्चात कुछ समय वे अंगरेजी पत्रिका 'सूर्या इंडिया’ के संपादक भी रहे। 1989 में वे 'दैनिक जनसत्ता’ के मुंबई संस्करण के स्थानीय संपादक बने। सही कहा जाए तो यहीं से असली राहुल देव के बनने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। उनके नेतृत्व गुणों, संगठन कौशल तथा मानवीय गुणों का उत्कर्ष हमें यहीं देखने को मिलता है। उन्होंने जनसत्ता में कार्यरत विभिन्न विचारधाराओं तथा मिजाजों के साथियों को संभालते-संवारते हुए जनसत्ता को मुंबई और गैर हिन्दी प्रदेश महाराष्ट्र में लोकप्रिय ही नहीं, जीवन की आवश्यकता ही बनाया। उन्होंने जनसत्ता के दौरान 1993 में सिर्फ 11 दिन की अवधि में सांध्य दैनिक 'संझा जनसत्ता’ का प्रकाशन प्रारंभ किया। साप्ताहिक पत्रिका 'सबरंग’ भी उन्होंने ही शुरू की और ये तीनों प्रकाशन सामूहिक तौर पर मुंबई के साथ देशभर के पाठकों और लेखकों की अभिव्यक्ति का प्रभावी मंच साबित हुआ।  जब मुंबई में बाल ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना ने धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील  ताकतों व पत्रकारिता के खिलाफ हल्ला बोला था और कुछ पत्रकारों पर हमले भी हुए थे, तब राहुल देव ने ही शिवसेना भवन के ठीक सामने पत्रकारों का बड़ा धरना देकर शिवसेना को झुकाया था। यह इस मायने में ऐतिहासिक घटना थी कि वह ठोकशाही में विश्वास करने वाली पार्टी के कार्यालय के सामने हुआ और उसमें देश के अनेक बड़े पत्रकार शामिल हुए थे। इसके कारण राहुल देव को करीब दो महीने पुलिस सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी। जिस प्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी सांप्रदायिक सौहार्द्र के बड़े सेनानी थे, वैसे ही राहुल देव ने बाबरी मस्जिद के गिरने के कारण मुंबई में उपजी हिंसा को खत्म करने के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हुए अनेक दंगाग्रस्त क्षेत्रों में काम किया। शांति के लिए कार्यरत व्यक्तियों और संगठनों के साथ सामूहिक तौर पर तो कभी एकाकी रूप से उन्होंने काम किया। कुछ अशांत क्षेत्रों से राहुलजी ने अल्पसंख्यक परिवारों को सुरक्षित बाहर निकालने में भी मदद की।  जनसत्ता के माध्यम से राहुल देव ने मुंबई के हिन्दीभाषी समुदाय को सामाजिक और बौद्धिक नेतृत्व प्रदान किया। 100 से अधिक मंडलियों को जोड़कर रामलीला महासंघ बनाया और हिन्दीभाषियों को मुंबई में गरिमामय स्थान प्राप्त करने में मदद की। अनेक हिन्दीभाषी समुदायों की उपलब्धियों और गतिविधियों का प्रतिबिंब जनसत्ता बना।  बाद में राहुल देव जनसत्ता के दिल्ली में संपादक बने। फिर ‘आज तक’, ‘जी टीवी’, ‘सीएनईबी’, ‘दूरदर्शन’ आदि में कभी नियमित तो कभी बतौर फ्रीलांसर जुड़े और इलेक्ट्रानिक मीडिया को अपनी वैचारिकता, संवेदनशीलता और  प्रतिभा से संपन्न किया। अगर उनके प्रोफेशनल आयाम को एक तरफ रख दिया जाए, वर्तमान दौर में वे हिन्दी और भारतीय भाषाओं को बचाने का बड़ा अभियान छेड़े हुए हैं। हिन्दी की गहनता और ऊंचाइयों को दर्शाने वाले कार्यक्रम वे अपनी संस्था सम्यक न्यास की ओर से बनाते हैं तथा स्वयं देश भर में घूम-घूमकर हिन्दी को सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित करने तथा उसके अधिकाधिक उपयोग करने जनजागरण में रत हैं।  गणेश शंकर विद्यार्थी (26 अक्टूबर 1890-25 मार्च 1931) और राहुल देव के कालखंड चाहे पृथक हों, परंतु साम्प्रदायिक सद्भाव और हिन्दी की प्राणप्रतिष्ठा दो ऐसे तथ्य हैं, जो इन दोनों पत्रकारों को आपस में जोड़ते हैं। राहुलजी की पत्रकारिता चाहे देश के नैराश्यकाल से प्रारंभ हुई हो, परंतु उनके लेखन को आशावाद हमेशा दमकाता चला आया है। 

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Dakhal News 3 June 2017


निधि राजदान-संबित पात्रा

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा और अंग्रेजी न्यूज चैनल एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान के बीच इतनी तीखी बहस हो गई कि संबित पात्रा को शो से बाहर निकाल दिया गया। शो की एंकर निधि राजदान ने संबित को लगभग डांटते हुए ये कह दिया कि ये मेरा शो है मैं आपको निकाल रही हूं। दरअसल इस शो में केरल में कांग्रेस कार्यकतार्ओं द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई गोहत्या पर डिबेट की जा रही थी । इस मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ से अपना पक्ष रखने के लिए शर्मिष्ठा मुखर्जी मौजूद थीं तो वहीं भाजपा की तरफ से संबित पात्रा मौजूद थे। इन दोनों के साथ कुछ मेहमान और भी शो से जुड़े थे। इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे दूसरे मेहमानों के बोलने के दौरान ही बीच में संबित बोलने लगे। बीजेपी प्रवक्ता को दूसरों की बात के बीच में टोकता देख एंकर निधि राजदान ने पहले तो उन्हें आराम से समझाया कि आप दूसरों को इंटरप्ट ना करें। एंकर की ये बात सुनकर संबित ने कहा कि मैं दूसरों चैनलों पर भी जाता हूं वहां मैं किसी को डिस्टर्ब नहीं करता हूं लेकिन यहां मुझे करना पड़ रहा है क्योंकि एनडीटीवी एक एजेंडे पर काम कर रही है। संबित ने कहा कि चैनल गाय को बार-बार बैल बताने की कोशिश कर रहा है। पात्रा ने कहा कि एनडीटीवी का झुकाव कांग्रेस के प्रति है। संबित पात्रा की ये बातें सुनकर शो की एंकर निधि राजदान गुस्से में आ गईं। उन्होंने संबित से नम्रतापूर्वक उठकर चले जाने को कह दिया। एंकर के शो छोड़ने के लिए कहने वाली बात पर संबित और ज्यादा उखड़ गए और बोलने लगे कि आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझसे ऐसा बोलने की। एंकर ने कहा कि ये मेरा शो है मैं जो मर्जी करूंगी..आपकी हिम्मत कैसे हुई कि आप मेरे चैनल पर इस तरह का आरोप लगा रहे हैं। एंकर के बार-बार बोलने पर भी संबित शो छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए और बोलने लगे कि आपने मुझे बुलाया है मैं शो खत्म होने तक नहीं जाउंगा यहां से। संबित को अड़ता देख एंकर निधि राजदान ने कहा कि ठीक है आप बैठिये लेकिन पहले आपने चैनल के बारे में जो कहा उसके लिए माफी मांगिए। संबित माफी मांगने के लिए राजी नहीं हुए तो मजबूरन एंकर ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस डिबेट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है। लोग लिख रहे हैं कि आखिरकार वह दिन आ ही गया जब संबित पात्रा को टीवी पर से उठा कर भगाया गया।[जनसत्ता से साभार ]  

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Dakhal News 2 June 2017


india tv trp

21 वें सप्ताह में इण्डिया टीवी को झटका लगा और वो लुढ़क के चौथे नंबर पर आ गया है। रजत शर्मा की व्यू रचना और अजीत अंजुम का स्टाइल भी चैनल को नंबर वन नहीं बना पा रहे हैं। इंडिया टीवी को लगातार अपनी स्टेटजी बदलना पड़ रही है। एडिटोरियल से लेकर नेटवर्क सम्हालने वाले तक सभी को ठीक से काम करने के लिए ताकीद किया गया है।    नेशनल न्यूज चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 21 Aaj Tak 15.9 up 0.3  Zee News 14.9 up 1.3  ABP News 12.8 up 0.2  India TV 11.6 dn 1.3  News18 India 10.1 dn 0.3  India News 10.1 dn 0.2  News Nation 9.7 up 0.4  News 24 7.0 dn 0.2  Tez 3.1 same   NDTV India 2.5 dn 0.3  DD News 2.2 same    TG: CSAB Male 22+ Zee News 16.2 up 0.7  Aaj Tak 15.5 up 0.3  ABP News 12.7 up 0.3  India TV 11.8 dn 1.3  News18 India 10.7 dn 0.8  News Nation 9.3 up 0.7  India News 8.8 up 0.6  News 24 6.5 dn 0.1  Tez 3.3 same   NDTV India 3.1 dn 0.5  DD News 2.2 up 0.1     Mp/cg के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल TRP Regional Channels WK 21 ज़ी           59.2 Ibc24      25.3 Etv          7.9 सहारा     4.0 Smbc     1.8

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Dakhal News 2 June 2017


पत्रकार कमलेश जैन हत्या

मध्यप्रदेश में मंदसौर के पिपलियामंडी में बुधवार शाम समाजसेवी और नईदुनिया के पत्रकार कमलेश जैन की दो अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। प्रारंभिक जांच में जैन का एक माह पहले किसी से विवाद का मामला सामने आ रहा है। इस मामले में पुलिस के लापरवाही सामने आई है। वैसे भी मध्यप्रदेश में पुलिस की छवि पहले जैसी नहीं है और उसके अपराधियों से मिलीभगत के कई किस्से सामने आ चुके है।  कमलेश जैन (43) पिपलियामंडी में अन्नपूर्णा टॉकिज रोड स्थित लवली चौराहे पर अपने कार्यालय पर थे। टीआई अनिलसिंह ठाकुर ने बताया कि बाइक से दो बदमाश आए और कार्यालय में जाकर जैन पर गोली चला दी। गोली उनके सीने में लगी। हमले के बाद दोनों बदमाश बाइक से खात्याखेड़ी की तरफ भाग गए। घायल हालत में जैन को जिला अस्पताल लाया जा रहा था, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पिपलियामंडी में व्यवसायियों ने अपनी दुकानें बंद कर लीं। जिला अस्पताल में एडीशनल एसपी अजयप्रतापसिंह, शहर थाना प्रभारी विनोदसिंह कुशवाह सहित पुलिस बल भी पहुंचा। पिपलियामंडी और आसपास क्षेत्र में पुलिस ने नाकाबंदी की। कमलेश गत 12 सालों से नईदुनिया वितरक के रूप में जुड़े हुए थे। पिपलियामंडी टीआई ठाकुर ने बताया कि करीब एक माह पहले एनडीपीएस एक्ट के मामले में जेल से छूटकर आए एक बदमाश से जैन का कुछ विवाद हुआ था। हत्या में उसका भी हाथ हो सकता है। यह बदमाश नाहरगढ़ क्षेत्र का है। इस विवाद के आधार पर भी जांच की जा रही है। कमलेश जैन के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा : सीएम पिपलियामंडी में समाजसेवी और नईदुनिया वितरक ,पत्रकार कमलेश जैन की हत्या पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हत्यारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानून की कड़ी से कड़ी सजा हत्यारों को दी जाएगी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कमलेश जैन की आत्मा की शांति के लिए सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। कमलेश जैन की हत्या के विरोध में नागदा में पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को ज्ञापन देकर प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की। बुरहानपुर में भी हत्या के खिलाफ रैली निकालकर कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन दिया। आलीराजपुर में भी हत्या पर एसएसपी को ज्ञापन दिया गया।

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Dakhal News 1 June 2017


rakesh achal patrkar

ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान ग्वालियर अपने अलग तरह के कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है । पत्रकारिता में आने वाले बदलावों , इनके विकास और विस्तार के चलते इसके नफा ,नुक्सान और चुनौतियों से निपटने के तरीको की खोजबीन  के सतत् प्रयास करता है । विचार और विमर्श । बदलाव पर चर्चा  और सम्मान ।हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थी देश की जानी मानी ब्लॉगर , ई पत्रिका की संस्थापक और सुप्रसिद्ध कवियित्री सुश्री प्रीति 'अज्ञात' । अज्ञात  अन्तर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन में सम्मानित हो चुकी है । उल्लेखनीय यह कि वे भिंड में जन्मी और पली , बढ़ी है । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार  राकेश अचल थे । अध्यक्षता संसथान के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार श्री देव श्रीमाली ने की । विशिष्ठ अतिथि के तौर पर सहायक संचालक जन संपर्क श्री मधु सोलपुरकर और पीआरओ हितेन्द्र भदौरिया मोजूद रहे । इस मौके पर स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर देश के नव निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की गौरावशाली भूमिका , वर्तमान दशा और दिशा , शक्तिशाली होती सोशल और डिजिटल मीडिया और उससे जुडी समस्याओ तथा भाषा पर होने वाले अतिक्रमण आदि विषयो पर गंभीर चिंतन हुआ । इस मौके पर सुश्री प्रीति अज्ञात को हिंदी सेवी गौरव सम्मान भी दिया गया । कार्यक्रम का सफल सञ्चालन पत्रकार साहित्यकार श्री राजेश अवस्थी लावा ने किया । कार्यक्रम में प्रो एस  के जैन , विनोद शर्मा , जावेद खान,नासिर गौरी,तेजपाल सिंह,अतुल मल्होत्रा ,सुरेन्द्र ठाकुर ,रवि सिकरवार ,अजय दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार ,पत्रकार मौजूद थे ।

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Dakhal News 31 May 2017


 आईसना

म.प्र.मीडिया की विशेष बैठक दैनिक भारत मत के एमपी नगर स्थित प्रदेश कार्यालय मेअध्यक्ष आईसना व अवधेश भार्गव जी की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई। बैठक मे कई पत्रकारो ने ज्वलन्त विषयो पर चर्चा की। जिसमे पत्रकारो ने एक स्वर से मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चोहान से मांग की हे कि म.प्र.मे तत्काल  प्रभाव से पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाये। म.प्र.सरकार मे कई पत्रकार झुठे मुकदमो का शिकार हुये है और इस बात को म.प्र मीडिया  संघ विभिन्न जिलो से जन-जागरण अभियान शुरु किया जायेगा। जिस तरह से महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागु किया है इसी प्रकार म.प्र.सरकार भी पत्रकार हित मे त्वरित निर्णय ले।  बैठक मे म.प्र.मीडीया सँघ के प्रदेश अध्यक्ष  जयवन्त ठाकरे,प्रदेश प्रवक्ता  शुभकरण पान्डेय,प्रदेश मीडीया प्रभारी अनुज सक्सेना,आदित्य नारायण उपाध्याय(सम्पादक पालिटिकल व्यु),संजय रायजादा(सम्पादक),विमल कुँवर(सम्पादक ब्रह्म भारत),सन्तोष कुमार (सम्पादक अमन संवाद)दीपक शर्मा(सम्पादक प्रतिवाद ),समीम (सम्पादक दैनिक समाचार).जावेद अख्तर सिद्दिकी(सम्पादक समाचार का असर),नदीम भाई(सम्पादक नदीम एक्सप्रेस),गुलफान खान(सम्पादक मन समाचार) मौजूद थे। 

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Dakhal News 26 May 2017


पत्रकार अनुराग उपाध्याय की कविता

गोरे हों या फिर काले देखो सत्ता वालों  के साले देखो ...  भरे पड़े '' गोदाम'' तुम्हारे  आंत में अन्न के लाले देखो ...  वोट हमारे और सूरज तुम  हमारी आँख में  जाले देखो ... सड़कों सी अब टूटी निंदिया  कितने  सपने पाले देखो ... जनता को आस झोपड़ी की   नेताजी के कई माले देखो ... =================

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Dakhal News 23 May 2017


टॉप एंकर

कल्पना कीजिए....  एक टॉप का एंकर छह महीने तक गायब रहे, फिर एक दिन अपना चैनल लेकर आए और एक ही सप्ताह में अपने चैनल को सबसे ज्यादा इक्यावन फीसद दर्शक खींचने वाला बताए तो आप क्या कहेंगे ? इन आंकड़ों को देखकर कोई भी चौंकेगा। एक चैनल ने इस आंकड़े को  खारिज ही कर दिया। एक वक्त में एक ही चैनल टॉप पर हो सकता है। फिर भी सभी अपने को नंबर वन सिद्ध करने वाले आंकड़े दिखाते रहते हैं। जाहिर है कि सभी कुछ न कुछ गड़बड़ करते हैं वरना यह संभव नहीं कि एक ही सप्ताह में सब नंबर वन पर रहें। नंबर वन पर रहने की हवस इसलिए है क्योंकि दर्शक संख्या के हिसाब से ही इनको विज्ञापनों के रेट मिलते हैं। निजी चैनलों की कमाई का जरिया विज्ञापन ही होते हैं। अगर विज्ञापन न हों तो निजी खबर चैनल दो दिन में खत्म हो जाएं।खबर जुटाना एक महंगा काम है। अगर आपकी कमाई अधिक है तभी आप फील्ड रिपोर्टरों, कैमरामैनों और ओबी वैनों की तामझाम रख सकते हैं और विविध खबरें जुटा सकते हैं वरना नहीं। इसीलिए चैनल विविध खबरों की जगह ‘‘ओपिनियनों और चरचाओं’ से काम चलाते हैं। अगर बहुत हुआ तो पांच मिनट में पचास या दस मिनट में सौ खबरों की ‘‘कटपीस’ बांचकर काम चलाया जाता है जिनमें खबर पलभर आकर गायब हो जाती है। एक ही खबर को खींचतान कर, दिनभर बजाकर, बहुत सी खबरों की कमी को, पूरा किया जाता है और शाम से प्राइम टाइम तक किसी एक खबर की राजनीति पर बहस चलाके खबर चैनल होने का कर्तव्य पूरा किया जाता है। अगर किसी चैनल को किसी से किसी का ‘‘एक्सपोजे’ मिल गया या स्टिंग हाथ लग गया है तो उसी में दो-तीन दिन निकाले जा सकते हैं। इसीलिए हमारे चैनलों का रवैया किसी एनजीओ या एक्टिविस्ट जैसा नजर आरहा है कि अपने लक्षित दल या नेता को पहले नंगा करो; इसमें भी निशाने पर प्राय: विपक्ष ही रहता है, सत्ता पक्ष की सिर्फ उपलब्धियां ही गिनाई जाती हैं। फिर कहो कि कहां छिपा है? आकर बताता क्यों नहीं क्या सचाई है? यह एंकरों का ‘‘एक्टिविज्म’ है।कंपटीशन भी यहीं हैं : तरह-तरह के एक्सपोजे दिखाने में सब लगे हैं, लेकिन एक चैनल उनको नरम भाषा में दिखाता है और दूसरा चैनल गरम भाषा में दिखाता है तो बताइए कौन-सा चैनल ज्यादा देखा जाएगा? जाहिर है कि गरम भाषा वाला चैनल ही ज्यादा पसंद आएगा। अगर एक अंग्रेजी चैनल दिनभर लालू के या चिदम्बरम के या थरूर के पीछे पड़ा रहता है और उसका एंकर लालू को कहता है कि वह घर में बंद हो गए हैं और हमारा चैनल देख रहे हैं या कहता है कि ‘‘थरूर तुम; चारों तरफ से घेर लिए गए हो, अब तुम बचके नहीं जा सकते’ तो बताइए उसे अधिक दर्शक मिलेंगे कि नहीं? आजकल टीवी की खबरों के दर्शकों का मिजाज भी बिगड़ गया है। उनका मिजाज एक्टिविस्ट एंकरों ने बिगाड़ा है। वे बदल गए हैं। अब उनको सिर्फ ‘‘सूखी सूचना’ नहीं चाहिए। उनको हर पल नए से नया भंडाफोड़ चाहिए। हर वक्त एक खलनायक चाहिए। हर बड़े आदमी संदिग्ध है। उसे नंगा किया जाना चाहिए। यह ‘‘सूडो समाजवाद’ है,‘‘न्याय की चाहत’ है, जिसे हर एक्सपोजे के जरिए एंकरों ने दिन-रात बेचा है। समाजवाद लाना तो बेहद कष्टकर और फिलहाल असंभव-सा है, लेकिन एक-दो घंटे के आनंदकारी ड्रामे में एक प्रकार का ‘‘सूडो समाजवादी मजा’ तो पैदा किया जा सकता है। एंकर आजकल यही करते हैं। असली न सही तो ‘‘सूडो समाजवाद’ ही सही। इसी का बाजार है।विपक्ष ही खलनायक है/विपक्ष ही सारी समस्याओं की जड़ है/ विपक्ष से बड़ा कोई पापी नहीं है/ सारे भ्रष्टाचार के काम विपक्ष के नाम है/ सत्तर साल से ऐसा ही होता चला आया है /कभी कहा जाता है कि साठ साल से ऐसा ही होता चला आया है अब आकर उस पर रोक लगी है।बाहुबली ने पंद्रह दिन में पंद्रह सौ करोड़ कमा लिए। मीडिया ने उसे जिस तरह से उठाया वैसा कम ही फिल्मों को नसीब हुआ। पंद्रह दिन पहले से पंद्रह दिन बाद तक उसको जमाया जाता रहा। पिछले दिनों चार दशमलव आठ प्रतिशत के हिसाब से प्रिंट मीडिया बढ़ा है दुनिया के हर देश में प्रिंट मीडिया पिट रहा है कम छप रहा है खत्म हो रहा है, लेकिन हिंदुस्तान में वह बढ़ रहा है। कारण क्या हैं? सर्वे ने सीधे कारण तो नहीं बताए, लेकिन संकेत दे दिए कि क्या-क्या कारण हो सकते हैं।

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Dakhal News 22 May 2017


trp week 19

  टीआरपी बताती है कि एबीपी न्यूज़ अपनी गलतियों से सबक नहीं ले रहा है और चौथे नंबर का चैनल बना हुआ है। आज तक और इण्डिया टीवी को चौनौती देना फिलहाल उसके बूते की बात नहीं है।  नेशनल न्यूज़ trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 19 Aaj Tak 15.7 dn 0.4  India TV 13.6 dn 0.4  Zee News 13.3 dn 0.3  ABP News 12.1 up 0.1  News18 India 10.7 same   India News 10.3 up 0.5  News Nation 9.6 dn 0.5  News 24 6.6 up 0.5  Tez 3.2 up 0.3  NDTV India 2.8 up 0.1  DD News 2.2 up 0.1   TG: CSAB Male 22+ Zee News 15.6 up 0.8  Aaj Tak 15.2 dn 0.8  India TV 12.8 dn 1.1  ABP News 12.4 up 0.2  News18 India 11.3 dn 0.5  India News 9.0 up 0.4  News Nation 8.8 dn 0.1  News 24 5.8 up 0.4  NDTV India 3.6 up 0.2  Tez 3.3 up 0.2  DD News 2.3 up 0.3   Mp/cg के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल week-19 Zee         59.5 Ibc24      26.5 Etv          9.0 सहारा      4.9 बंसल        1.5

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Dakhal News 18 May 2017


vijay das patrkar

  भोपाल से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी मेल के प्रधान संपादक विजयकुमार दास  को पिछले दिनों भुवनेश्वर में आयोजित सम्मान समारोह में हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में किये गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए चिंतामणि पाणिग्रही अवार्ड से सम्मानित किया गया। श्री दास मध्यप्रदेश के एक मात्र ऐसे पत्रकार हैं,जिन्हें यह सम्मान मिला है।  

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Dakhal News 16 May 2017


राघवेंद्र सिंह

राघवेंद्र सिंह आज जब हम यह लिख रहे हैं तब अंग्रेजियत के हिसाब से पूरी दुनिया मदर्स डे मना रही है। यानि मां जैसा दुनिया में कोई नहीं। जब भगवान स्वर्ग से पृश्वी पर भेज रहे थे उनके साथ रहने की जिद करने वालों से उन्होंने कहा मैं तो साथ रहूंगा नहीं मगर तुम्हारे साथ मां रहेगी जो मेरी तरह तुम्हारा ध्यान रखेगी। जैसे मैं दिल से मांगी गई माफी से हर गुनाह माफ कर देता हूं वैसे ही मां भी करेगी, इसलिए सृष्टि की हर मां को नमन करते हुए यह बात कर रहे हैं। मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों की जीवन दायिनी है मां नर्मदा। इसके अलावा पापियों को तो केवल दर्शनभर करने से ही पाप मुक्त कर देती हैं। उसके जल के आचमन करने का तो पुण्य ही अलग है। इसलिए नालायक बेटों ने उसके जल को लगता है आचमन करने लायक भी नहीं छोड़ा और भविष्य में दर्शन करने लायक भी नहीं छोड़ेगे, क्योंकि दुनिया के जानकार कहते हैं कि जैसा सुलूक मां नर्मदा के साथ हो रहा है आने वाले कुछ सालों में वह खेल का मैदान बन जाएगा। उसके बेटे नर्मदा मैया की जय के साथ हर दिन मार रहे हैं। जयकारे का नाद का दायरा बढता है उसी रफ्तार से उसपर प्रहार की गति बढ़ती है। सोमवार 15 मई को गुजरात के लाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमरकंटक आ रहे हैं। नर्मदा सेवा के समापन पर। यह उद्गम है माई का। मगर अपने आरंभ से कुछ ही किलोमीटर बाद वह सूख चुकी हैं। यह लिखते हुए हाथ कांपते हैं और शब्द ठिठक जाते हैं।  लेकिन सच यही है। कपिलधारा से लेकर कबीरकुंडी के पास आते आते इसके प्रमाण भी मिल जाते हैं। बस यहीं से मां नर्मदा की सांसें उखड़ने की कहानी शुरू होती है, जो पूरे प्रदेश में रेत उलीचने और नोंचने खचोटने तक चल रही है। उसे अब बेटों ने जीवित होने का दर्जा देने का ऐलान किया है। मगर यह तब जब उसके मरने की ताऱीखें लोग तय करने लगे हैं। इसके आभूषण रूपी पहाडों सतपुड़ा,विन्ध्याचल काटकर सड़कें बनाई जा रही हैं और गहनों के रूप में लगे सागौन और साल के वृक्षों को बेतहाशा काटकर फर्नीचल बनाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर एक मां की बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम है। अब नर्मदा माई जगह जगह से कमजोर हैं। धाराएं टूट फूट गई हैं। उसकी शिराओं से रक्तरूपी जल और मज्जा में रेत खत्म सी हो रही है। लुटेरे बेटों ने लीवर,आंत,किडनी,दिल, जिगर सब छलनी सा कर दिया है। उसकी मदद करने वाली सखियां(सहायक नदियां) भी मर रही हैं। अब वे साल में कुछ महीने ही बहती हैं। बेटों के गांव से लेकर शहरों का मलमूत्र मिलना तो एक मां को मंजूर था लेकिन फैक्ट्री और शुगर मिलों का जहर उसे मारे डाल रहा है। हालात खतरनाक हैं और जीवन देने वाली नर्मदा माई वेंटीलेटर पर हैं। नरेन्द्रमोदी उसके उद्गम पर आकर क्या कहेंगे उसे सुनने समझने के लिए माई अपने दिल दिमाग को चैतन्य किए हुए है। मोदी ने भी कुछ नहीं किया तो अमेरिका की एक एजेंसी समेत कई जल के जानकारों ने उसे मरती हुई माई तो घोषित कर ही दिया है। हालात नहीं बदले तो कुछ ही सालों की मेहमान है वह। इस सबके बाद भी मां नर्मदा गुजरात और मध्यप्रदेश को बददुआ नहीं दे रही हैं क्योंकि वो मां जो है।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि नर्मदा माई को नहीं बचाया तो वह खेल का मैदान बन जाएगी। बेटे के मुंह से मां के मरने का यह अघोषित ऐलान भला किसे अच्छा लगेगा लेकिन ऐसा भी हो रहा है। सत्ता पर बारह साल से काबिज एक परमज्ञानी,चुनाव जीतने वाले पराक्रमी बेटे का परमहंसी भाव हो सकता है। दुनिया कई बार बनी है और मिटी है । आगे भी ऐसा होगा। विकास के लिए रेत निकालों मगर आहिस्ता आहिस्ता ताकि तकलीफ न हो। विकास पुरुष बने बेटे इससे ज्यादा क्या संवेदना जता सकते हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि मां को तो मरना ही है। मरणासन्न मां को शायद इसी बात का सबसे ज्यादा दुख होगा कि उसे नोंचने वालों में उसके अपने बेटे की सबसे ज्यादा हैं। अब अपने बड़े बेटे नरेन्द्र मोदी से कुछ करने की आस लगाए होगी जैसे वह लुटेरे बेटों को डराएगा,धमकाएगा नहीं माने तो दंडित भी करेगा। क्योंकि उसके ही जल से तो साबरमती जिंदा हुई है। गुजरात के कच्छ में हरियाली आई है और धरती सोना उगलने लगी है। क्या इसका कोई मोल बेटा नहीं चुकाएगा। अभी तो उसके बचाने का जितना ढिंढोरा पीटा जा रहा है पैसा और श्रम बर्बाद हो रहा है उसे अगर उसके किनारे रहने वाले लोगों पर खर्च किया जाता तो हालात बिगड़ने से बचते। मां के दुख की कहानी यहीं नहीं रुकती। एक साल पहले बहन क्षिप्रा में उसे मिला दिया गया था, अरबों रुपए लगाकर, मगर सिंहस्थ के बाद क्षिप्रा भी नाले की तरह बनी हुई है। पैंतालिस छोटे बड़े शहर और कस्बों की गंदगी उसमें मिल रही है। जनअभियान परिषद ने तो उसमें मिलने वाले गंदे नालों का आंकड़ा सात सौ बताया है। हालत यह है कि उसमें पलने वाले जीव जंतु मर रहे हैं। साफ पानी में रहने वाली दुर्लभ प्रजाति की महाशीर मछली और पातल भी खत्म होने की कगार पर है। नर्मदा माई के दर्शन से पुण्य पाने वाले जल प्रदूषण के कारण अब उसके आचमन के लिए भी तरस रहे हैं। कभी पानी में कई फीट नीचे की रेत चांदी जैसी चमकती थी अब वह दिखना भी दुर्लभ हो गया है। इसलिए तो उसे डाईंग रिभर कहने लगे हैं। यह सुन कलेजा कांप उठता है। उसके प्राण ले रहे पुत्रों से इतना ही कहना है क्या भगवान से जरा भी डर नहीं लगता। नर्मदा माई की तलहटी में कई विजेता सदियों से मिट्टी बने पड़े हैं। कम से कम यह बात तो सबको याद रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और प्रधानमंत्री मोदीजी को भी। लिखने को बहुत कुछ है लेकिन अभी दिल भारी है और शब्द भी साथ नहीं दे रहे हैं। मामला मां का है और मदर्स डे भी तो है। तो शायर मुनव्वर राना का शेर तो बनता है... ‘किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई’ (लेखक IND24 के समूह प्रबंध संपादक हैं)

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Dakhal News 16 May 2017


 महबूबा मुफ्ती

    जम्मू कश्मीर राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मीडिया से अनुरोध किया है कि वे घाटी के लोगों के खिलाफ घृणा फैलाने वाली चर्चाएं टीवी पर ना दिखाए। क्योंकि इससे राज्य के लोगों पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी करने में कुछ छात्रों का हाथ जरूर है लेकिन इसके लिए सभी छात्राओं को गुनहगार समझा नहीं जा सकता। अगर सारे छात्र पत्थरबाजी करते होते तो हाल ही में निकले परिणाम में इतने छात्र पास ही ना होते।  उल्लेखनीय है कि कश्मीर में छात्रों के साथ-साथ अब छात्राएं भी पत्थरबाजी करने पर उतर आई हैं। सोपोर में छात्राओं द्वारा किए जा रहे हिंसक प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें 8 छात्र घायल हुए और 20 छात्राएं बेहोश हो गईं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब स्कूल की यूनिफॉरम पहन कर छात्राएं इस तरह से हिंसक प्रदर्शन में शामिल हुई हैं। इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 

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Dakhal News 8 May 2017


अरशद अली खान bhopal

अरशद अली खान  अपने चैनल खबर कम देते हैं बहसें ज्यादा। बहसों को भी ‘‘शो’ की तरह दिया जाता है। ‘‘शो’ में अतिरिक्त प्रदर्शन का तत्व होता है, जिसे एंकर अतिरिक्त उत्तेजना पैदा करके बनाए रखता है। ‘‘शो’ में आकर खबर अचानक विचार, और विचार अचानक ‘‘शो’ बन जाते हैं। हम विचार नहीं ओपिनियन भी नहीं विचारों या ओपिनियनों के शो को चुनते हैं।चूंकि एंकर इस तरह के शोज के संयोजक होते हैं, सवाल पूछने वाले होते हैं, नतीजे निकालने वाले और आखिरी फैसला देने वाले होते हैं, इसलिए दर्शक समझने लगते हैं कि असली ज्ञानी एंकर ही होते हैं, और कुछ एंकर भी ऐसा मान लेते हैं कि वे ही ज्ञानी हैं। कुछ एंकर तो ऐसे भी हो गए हैं, जो मानते रहे हैं कि वे अपने शो से देश का एजेंडा तय करते हैं, उसे हांकते हैं, उसे दिशा देते हैं। लेकिन जब उनके चैनलों के मालिकों ने किसी कारण से उनको काम से हटा दिया तो मालूम हुआ कि वे न देश चला रहे थे, न समाज को चला रहे थे बल्कि चैनल ही उनको चला रहा था। हमारा टीवी इसी शोबाजी की प्रक्रिया में खबर का माध्यम न रह कर शो बिज का माध्यम बन गया है। चैनलों के सबसे अच्छे दिन शनिवार और रविवार होते हैं, जब उनको अपने स्टूडियो को फिल्मी दुनिया के हवाले कर देना होता है, या इंपेक्ट फीर्चस यानी किराए के शो के हवाले कर देना पड़ता है। इन दिनों कॉनक्लेव, एन्कलेव, समिट आदि कराना भी विचारों के नए लाइव शोज की तरह आने लगा है, जिनमें खबरें ब्रेक की जाती हैं, ताली मिलती हैं, सलेक्टेड जनता सवाल करती है, और जवाब दिए जाते हैं। यह भी राजनीति के परफारमेंस में बदल जाने का परिणाम है कि खबर के स्रेत अब पांच सितारा होटल बनने लगे हैं।यह खबर की ऐलीट (श्रेष्ठि वर्ग) से ऐलीट तक की एक जैसी यात्रा है। ऐलीट ही खबर बना रहा है। इधर विचार चल रहा है, सवाल पूछे जा रहे हैं, जवाब दिए जा रहे हैं। उधर सामने बैठा उच्चवर्गीय ऐलीट विचारों के साथ अपने सामने रखी मेज पर रखी प्लेट से मेवे कुटक रहा है, भोजन कर रहा है, और पी-पिला रहा है, और ताली बजा रहा है, हंस रहा है। यह है ‘‘ओपिनियन का उपभोग’! ओपिनियन आई, हमने खाने के संग खाई और हजम। हम ओपिनियनों को हजम करते रहते हैं। वे हमें न सताती हैं, न परेशान करती हैं। वे हमें सिर्फ ‘‘आनंद’ देती हैं।ऐसा नहीं है कि टीवी में खबरें नहीं हैं। वे हैं लेकिन खंडित और टूटी हुई दो-चार खबरों की तरह होती हैं। एक खबर को तोड़कर उसकी दस टुकड़ा खबर बनाई जाती हैं, और बीच-बीच में तीखा म्यूजिक डाल कर सनसनी के अंदाज में दिखाई जाती हैं। इस तरह से हम खबर नहीं खबरों की चिंदियां देखते सुनते हैं। बाकी समय हम फीचर या ओपिनियनों के शो देखते हैं। ऐसे शोज में आप किसी के विचार की गुणवत्ता पर नहीं जाते। आप विचार को बोलने वाले की अदा, उसके शोर-शराबे, उसकी धमकी, उसकी ताल ठोकू मुद्रा के कायल होते हैं। आप विचार नहीं, विचारों का दंगल देखा करते हैं, जहां जो कुश्ती मार ले, वही सही माना जाता है। यानी विचार की सही-गलत होना उतना महत्त्वपूर्ण नहीं जितना कि कुश्ती मारने वाले की जीत की मुद्रा। इसलिए हम तर्क, तय, प्रति-तर्क या प्रति-तय की चिंता न करके शोर-शराबे और हल्ले को सत्य समझने लगते हैं। हम खबर की जगह हल्ले को देखते-सुनते हैं। अगर हमारे समाज में विचार-वितर्क की आदत कम हो रही है, एक दूसरे के विचार को सहने की आदत कम हुई जा रही है, तो उसका एक बड़ा कारण बहसों का शो में बदलना भी है, जिनकी नकल करके हम विचार की जगह हल्ले को सही समझते हैं। हम भी उसकी नकल पर हल्ले का शो ही करते हैं। इस खेल को बनाए रखने का कारण यह भी है कि खबर जुटाना महंगा पड़ता है। ओपिनियन जुटाना सस्ता पड़ता है। ओपिनियन जुटाने से एंकर का जनसंपर्क बढ़ता है। बुद्धिजीवी हलकों में गुडविल बनती है। अब हम जरा ‘‘डिबेट शोज’ की बात करें। डिबेट शो अपने आप में वैचारिक कट्टरता के हामी बन चले हैं। इन दिनों इन शोज से ‘‘वैचारिक विविधता’ का अवसान हो गया है। कई एंकर तो स्वयं कट्टर वैचारिकता के प्रवक्ता बन जाते हैं। यह हमारी वैचारिकता का संकट है। सवा सौ करोड़ की जनता में सत्तर से अस्सी करोड़ तक टीवी की पहुंच कही जाती है, यानी अस्सी करोड़ जनता तो दर्शक है ही लेकिन उसे समझाने वाले, नसीहत देने वालों की संख्या है कुल सौ से डेढ़ सौ। टीवी हमें इसी तरह विचार-विपन्न और विचार-संकीर्ण बना रहा है।{पत्रकार अरशद अली की वॉल से }

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Dakhal News 7 May 2017


trp week 17

  इस साल हर सप्ताह टीआरपी आने के बाद ये तय हो गया है कि सभी न्यूज़ चैनल आज तक की नक़ल करते हैं लेकिन उसकी जगह पर उसके बावजूद कोई चैनल नहीं पहुँच पा रहा। इंडिया टीवी और ज़ी न्यूज़ कुछ सम्हले हैं। लेकिन एबीपी की हालत अब भी पतली है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 17 Aaj Tak 16.1 up 0.6  India TV 13.9 dn 0.3  ABP News 13.6 up 0.9  Zee News 13.5 up 0.5  News18 India 10.1 dn 0.5  News Nation 9.5 dn 0.4  India News 9.3 dn 1.0  News 24 5.9 dn 0.4  Tez 3.3 up 0.3  NDTV India 2.6 up 0.2  DD News 2.2 same    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.1 up 1.4  Zee News 14.6 up 0.6  India TV 14.1 dn 0.9  ABP News 13.9 up 1.6  News18 India 10.8 dn 0.9  News Nation 8.8 dn 0.5  India News 7.9 dn 0.6  News 24 5.0 dn 0.7  Tez 3.6 up 0.2  NDTV India 3.2 up 0.2  DD News 2.0 dn 0.3 =========================== Mp/cg के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल week-17 Zee         46.1 Ibc24      35.7 Etv          10.0 सहारा      3.8 बंसल        2.2

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Dakhal News 4 May 2017


भारतीय मीडिया

उमेश त्रिवेदी 22-23 मार्च 2017 को राज्यसभा में भारत में मीडिया के दर्दनाक हालात पर सम्पन्न एक सार्थक बहस को 'ब्लैलक-आउट' करने वाले भारतीय मीडिया में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर पत्रकारिता की आजादी पर जारी शानदार बहस (?) सुनने के बाद कतई भ्रमित होने की जरूरत नहीं हैं कि हिन्दुस्तान में प्रेस की आजादी बेहतरीन दौर से गुजर रही है। दुनिया भर में 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व 'प्रेस फ्रीडम-डे' पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीटर पर यह  औपचारिक संदेश दिया है कि 'विश्व प्रेस-फ्रीडम डे' पर हम स्वतंत्र और बहुमुखी पत्रकारिता का समर्थन करते हैं। यह लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।'  सवा महीने पहले राज्यसभा में भी कई विपक्षी नेताओं ने 'प्रेस-फ्रीडम' के मसले पर भारत में मीडिया की बरबादी को लेकर कुछ इसी प्रकार की भावनाओं को व्यक्त किया था।  राज्यसभा की बहस में शरद यादव जैसे कई नेताओं ने कई सार्थक सवाल उठाए थे। राज्यसभा व्दारा व्यक्त प्रेस की आजादी से जुड़ी चिंताओं का 'ब्लैपक-आउट' करके मीडिया के कर्ताधर्ताओं ने खुद ही काला नकाब पहन लिया था। भारत में मीडिया का स्व-आरोपित 'ब्लैलक-आउट' ही मीडिया का असली चेहरा है। भारत दुनिया के उन 72 देशों में शामिल है, जहां प्रेस की आजादी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 180 देशों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने का दावा करने वाला भारत वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 136 वें स्थान पर खड़ा है। पिछले साल की तुलना में भारत तीन स्थान नीचे उतरा है।  वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम के ये आंकड़े 2002 से जारी किए जा रहे हैं। इस रैंकिंग में विविधता, आजादी, वैधानिक-व्यवस्थाओं और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े कारकों का अध्ययन किया जाता है। इन 180 देशों के विशेषज्ञों से एक प्रश्नावली के आधार पर जानकारी जुटाई जाती है। 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि लोकतांत्रिक देशों में प्रेस की आजादी पर परोक्ष-अपरोक्ष नियंत्रण के चील-कौए मंडरा रहे हैं और उनसे बचाव के मामले में वहां की सरकारों का अजीबोगरीब उपेक्षा का भाव नजर आ रहा है। प्रेस की आजादी की यह हदबंदी बेहद चिंताजनक है।  तानाशाह देशों का जिक्र बेमानी है, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी इससे अछूते नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव-अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस प्रकार मीडिया विरोधी-अभियान चलाया, उन्हे अच्छे संकेत नहीं कहा जा सकता है। ब्रिटेन में 'ब्रेक्जिट' जनमत संग्रह के दौरान मीडिया को हाशिए पर ढकेलने की कोशिशें चेतावनी हैं कि आने वाले दिन मीडिया के लिए मुनासिब नहीं हैं। भारत में सूचना के अधिकारों को बेड़ियों में जकड़ा जा रहा है और वैचारिक-खुलेपन को राष्ट्रसवाद की लक्ष्मण-रेखाओं में घेरा जा रहा है।  वैचारिक लक्ष्मण-रेखाओं का रेखांकन और राष्ट्रहित के नाम पर सूचना के दायरों को समेटना प्रेस की आजाद आबोहवा में जहर घोलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन इस प्रक्रिया के साथ यह सवाल भी नत्थी है कि सरकारी प्रतिष्ठान इतने दुस्साहसी कैसे हो पा रहे हैं कि वो प्रेस की आजादी की हदबंदी और नसबंदी करने लगें...। मोटेतौर पर राजनेताओं और समाज में यह धारणा विकसित होती जा रही है कि मीडिया के अपने निहित-स्वार्थों और पूर्वाग्रहों ने तटस्थ पत्रकारिता के मानदंडों को छोटा कर दिया है। अमेरिका में मीडिया के प्रति डोनाल्ड ट्रम्प की बदमिजाजी और भारत में वैचारिक-लक्ष्मण-रेखाओं की घेराबंदी इन कमजोरियों को लिपिबध्द करने वाली है। आर्थिक-सर्वेक्षण कहते हैं कि भारत में मीडिया का कारोबार 1300 अरब रूपयों के आंकड़े को छू रहा है। मीडिया कारोबार की दुनिया में मानवीय सरोकारों और लोकतंत्र की संवेदनाओं का कद खुद छोटा होता जा रहा है। भारत में मीडिया काला-सफेद धंधा करने वाले सभी कारोबारियों का मुखौटा बन चुका है। सही अर्थों में एक व्यवसाय के रूप में मीडिया का आकलन कहता है कि यह पूंजी और कॉरपोरेट घरानों की कारोबारी जुगलबंदी है, जिसके तार निहित-स्वार्थों की लय पर तान छेड़ते हैं। सरकारों का यह उपेक्षा-भाव उन परिस्थितियों की देन है, जिन्हें मीडिया ने खुद अपने सामने खड़ा कर लिया है। सवाल यह है कि भारत में प्रेस की आजादी से जुड़ी इऩ 'इंटरनेशनल-एकडेमिक' चिंताओं को वैधानिकता और नैतिकता के  कौन से तराजू पर तौलना मुनासिब होगा। एक तराजू वह है, जहां मीडिया ने खुद को अनैतिक-दुराग्रहों के चक्रव्यूह में कैद कर रखा है। दूसरे तराजू में संवैधानिक व्यवस्थाओं की छत्रछाया झीनी पड़ने लगी है, जिसके लिए सरकारी प्रतिष्ठान उत्तरदायी हैं। भारत का मीडिया उस बुलबुल की तरह है, जिसने खुद को  निहित स्वार्थों के पिंजरे में कैद कर लिया है। पिंजरे के सामने यदि सत्ता के सैयाद मुस्कुरा रहे हैं तो इसके लिए दोषी किसे माना जाएगा...?  किसी ने ठीक ही कहा है- 'कैद में है बुलबुल सैयाद मुस्कुराए, रहा भी न जाए, कुछ कहा भी न जाए...?' मीडिया जब तक खुद अपनी बेडियां नहीं तोड़ेगा, तब तक प्रेस की आजादी से जुड़ी इन रिपोर्टों को तवज्जो नहीं मिल पाएगी।[लेखक भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]

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Dakhal News 4 May 2017


हिन्दी पत्रकारिता पर समग्र चिंतन

जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज निवास पर श्री निलय श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ''हिन्दी पत्रकारिता पर समग्र चिंतन'' का विमोचन किया। पुस्तक में पिछले आठ दशक के दौरान मध्यप्रदेश की हिन्दी पत्रकारिता पर केन्द्रित सामग्री का सचित्र विवरण है। इस अवसर पर सहारा एमपी के ब्यूरो प्रमुख वीरेंद्र शर्मा और बीजेपी मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर भी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 3 May 2017


भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन

भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की परिचर्चा में जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र   जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र आज भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा ''समाचार-पत्रों में पाठकों का स्थान'' पर परिचर्चा में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा लिए गए पत्रकार कल्याण के फैसलों के लिए जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र का एसोसिएशन की ओर से अभिनंदन किया गया। परिचर्चा के मुख्य अतिथि जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकार कल्याण के निर्णय लेकर पत्रकारों को उनका हक ही दिया है। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित यह परिचर्चा प्रासांगिक है क्योंकि आज पाठकों के मनोनुकूल अनेक स्तंभ सीमित हो गए हैं। नए संचार साधनों के उपयोग के बाद भी पत्र-पत्रिकाओं के स्तंभों और उन्हें लिखने वालों का महत्व बना रहेगा। इसलिए पाठक की भूमिका भी कम नहीं होगी। डॉ. मिश्र ने कहा कि संगठन की ओर से दिए गए सुझाव पर विचारोपरांत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार और मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि आज पत्रकारिता की स्थिति ऐसी है कि ''जान निकली है, मगर साँस अभी बाकी है।'' कहने का आशय पत्रकारिता का प्राण तत्व कम जरूर हुआ है लेकिन अभी कायम है। समय के साथ परिवर्तन हुए हैं। पाठक अखबार की रीढ़ है। वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश त्रिवेदी ने कहा कि अखबारों में पाठक का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रख्यात संपादक श्री राजेन्द्र माथुर ने अखबार में पाठकों के विचारों के लिए अधिक स्थान सुरक्षित रखा था। श्री उमेश त्रिवेदी ने जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र को सुदर्शन व्यक्तित्व का धनी बताया। परिचर्चा को श्री अलीम बज़मी ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सतीश सक्सेना ने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को हल करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने सक्रिय भूमिका निभाई है। संचालन श्री पंकज शुक्ला ने किया। एसोसिएशन के महासचिव श्री संजय सक्सेना के अलावा श्री प्रेमनारायण प्रेमी, श्री आनंद सक्सेना, श्री राधेश्याम सोमानी आदि उपस्थित थे।

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Dakhal News 2 May 2017


 एंकर सोनिका सिंह चौहान

कोलकाता में  एंकर सोनिका सिंह चौहान (28) की तड़के कार हादसे में मौत हो गई, जबकि कार चला रहे बांग्ला धारावाहिकों के अभिनेता विक्रम चटर्जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर पर चोट लगी है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कार के परखच्चे उड़ गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पार्टी करने के बाद तड़के करीब 3.30 बजे दोनों कार से लौट रहे थे। टॉलीगंज थाना अंतर्गत लेक मॉल के पास उनकी कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराकर फुटपाथ पर चढ़ गई। घटना में गंभीर रूप से घायल दोनों को रुबी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान प्रातः पांच बजे के करीब सोनिका ने दम तोड़ दिया। टॉलीगंज थाने की पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। पार्टी में मौजूद उनके दोस्तों से पूछताछ कर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां से निकलने से पहले दोनों की मानसिक स्थिति कैसी थी। गौरतलब है कि सोनिका 2013 में "दीवा मिस इंडिया कांटेस्ट" की विजेता रह चुकी हैं। वह एक न्यूज चैनल में एंकरिग भी करती थीं। बताया जा रहा है कि कार विक्रम की है। घटना के समय वह काफी तेज गति से कार चला रहे थे। जब गाड़ी डिवाइडर से टकराकर फुटपाथ पर चढ़ी उस समय कार में मौजूद पांच एयरबैग में से एक भी नहीं खुला। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। इस बीच लापरवाही से गाड़ी चलाने को लेकर विक्रम के खिलाफ टॉलीगंज थाने में मामला दर्ज किया गया है।  

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Dakhal News 30 April 2017


पत्रकार-अखिलेश

समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया अखिलेश यादव ने कल एक पत्रकार पर गम्भीर टिप्पणी करने के मामले पर सफाई देते हुए कहा कि पत्रकार ने जो सवाल किया था, वह अच्छा नहीं था. वह सवाल पूछने वाले पहले सपा का संविधान पढ़ें. अखिलेश ने कल एक वरिष्ठ टीवी संवाददाता पर तल्ख टिप्पणी के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा ‘देखिये, पत्रकार ने जो सवाल किया था, वह अच्छा नहीं था. वह कुछ जानते ही नहीं हैं मेरे बारे में. एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझसे कहा कि आपके घर का झगड़ा टीवी चैनलों पर बहुत ज्यादा चल गया, जिसकी वजह से चुनाव में सपा की हार हुई.’सपा प्रमुख ने कहा ‘अरे, क्या आपको मेरा ही घर मिला था. मैं नहीं चाहता कि कोई सवाल बार-बार पूछा जाए. आखिर किसके परिवार में झगड़ा नहीं होता है.’ हालांकि उन्होंने माना कि परिवार में रार भी पार्टी की हार का एक कारण है. इस सवाल पर कि सपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक शिवपाल सिंह यादव कह रहे हैं कि अखिलेश को चुनाव के बाद अपने वादे के मुताबिक सपा अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिये, उन्होंने कहा ‘आप हमारी पार्टी का संविधान पढ़ लें, चुनाव आयोग का संविधान पढ़ लें, फिर सवाल करें.’ हालांकि कल इसी सवाल पर अखिलेश ने एक टीवी चैनल के वरिष्ठ संवाददाता पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था ‘तुम्हारे जैसे लोगों की वजह से ही देश बरबाद हो रहा है.’ बहरहाल, अखिलेश ने आज भी मीडिया पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में होने वाली किसी भी घटना की खबर को टीवी पर उनकी तस्वीर के साथ दिखाया जाता था. ‘क्या अब आप में से किसी की हिम्मत है कि मौजूदा मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) की तस्वीर लगाकर खबर दिखा दे.’उन्होंने कहा कि सहारनपुर में दंगा हुआ, इलाहाबाद में एक परिवार की हत्या की गयी और प्रतापगढ़ में एक वकील का कत्ल हो गया. क्या ये खबरें मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ दिखायी गयीं?

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Dakhal News 26 April 2017


 के. विक्रमराव

 विक्रमराव बोले इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट के  सम्मेलन में  आंध्रप्रदेश के विशाखापट्नम में इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट(IFWJ) के 126 वे वर्किंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई । इस बैठक के मुख्यतिथि भारत सरकार में केंद्रीय स्टील मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह  और हरियाणा की विधायक श्रीमती प्रेमलता सिंह  थी। बैठक  की अध्यक्षता फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रमराव ने की । इस कार्यक्रम में देश के सभी राज्यो से आये पत्रकारो ने हिस्सा लिया।साथ ही पत्रकारों को अपने कार्य के दौरान हो रही दिक्कतों पर मंत्री बीरेंद्र सिंह  का ध्यान आकर्षित कराया, चर्चा के दौरान पत्रकारो की सुरक्षा के विषय में अतिशीघ्र कानून पास कराने के लिए अपनी मांग मंत्री  के सामने रखी और प्रधानमंत्री तक पत्रकारो की बात पहुँचाने के लिए भी कहाँ जिस पर मंत्री बीरेंद्र सिंह  ने आश्वासन दिया।  तमिलनाडु के पत्रकारों ने पुरे देश में पत्रकारों को टोल प्लाजा में छूट देने की मांग की जिसपर मंत्री ने शीघ्र नितिन गड़करी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से बात कर पत्रकारो को राहत देने की बात कही । देश के विभिन्न राज्यो से आये पत्रकारों ने इस कार्यक्रम में अपनी -अपनी बात रखी, मुख्यअतिथि ने देश के चौथे स्तभ को  मजबूत बताया और कहाँ की आप सब की जागरूकता से ही सरकार बेहतर कार्य कर पा रही है । कार्यक्रम के अंत में सभी राज्यो की इकाइयों ने मुख्यतिथि को स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित गया । वर्किंग कमेटी के दूसरे सत्र की बैठक पाढ़ेरु में रखी गई थी, जहां पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की बात पर सभी राज्यो की मांगों को देखते हुए सभी की राय लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के.विक्रमराव ने कहाँ की शीघ्र ही देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से समय लेकर  पत्रकार सुरक्षा सबंधी मांगपत्र लेकर फेडरेशन उनसे मिलेगा और कानून बनाने की मांग करेगा अगर हमारी मांग पर कोई हिला-हवाला किया गया तो IFWJ  में अपने हजारों सदस्यों के साथ  दिल्ली कूच करेगा और आर-पार, की लड़ाई पत्रकारो के हित के लिए सरकार से लड़ेगी । इस कार्यक्रम में फेडरेशन के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी,सभी प्रदेशों के अध्यक्षो के साथ उत्तर प्रदेश व  बिहार,दिल्ली,हरियाणा,मध्यप्रदेश,केरला, तमिलनाडू, आसाम,राजस्थान,काश्मीर,महाराष्ट्र,ओडिशा,तेलंगाना सहित अन्य राज्यो के पत्रकारो ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया । पत्रकार साथी कार्यक्रम में शामिल हुए । कार्यक्रम के समापन अवसर पर आंध्रप्रदेश के अध्यक्ष वीरभद्र राव ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए देशभर से आये सभी पत्रकारो का आभार व्यक्त किया ।   

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Dakhal News 24 April 2017


dijital mediya

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया पत्रकारों को भी श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम के दायरे में लाने के लिए कदम उठाने शुरूकर दिए हैं। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो बीजेपी नीत एनडीए सरकार श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम में संशोधन करेगी ताकि इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया को भी इसके दायरे में लाया जा सके। उन्होंने कहा, 'हम श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम के तहत डिजिटल मीडिया समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक चैनलों को लाने के लिए कदम उठा रहे हैं। अगर जरूरत पडी तो हम अधिनियम में संशोधन करेंगे।' कोच्चि में दत्तात्रेय ने  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी श्रमजीवी पत्रकार कानून के अंदर लाने की तैयारी कर रही है। दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार सुनिश्चित कर रही है कि न्यूज पेपर्स में श्रम कानून और वेजबोर्ड के सिफारिशो को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा, 'मैंने सभी मुख्यमंत्रियों को लिखा है कि अगर किसी कर्मी को पर्याप्त मुआवजा और पारिश्रमिक नहीं मिल रही है तो उसपर ध्यान दिया जाए।' मंत्री ने कहा कि वह न्यूज आर्गनाइजेशन में श्रम से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मीडिया संगठन, जर्नलिस्ट असोसिएशन और श्रम मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक बुलाएंगे।

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Dakhal News 23 April 2017


फर्जी प्रेस

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा वाहनों पर फर्जी तरीके से प्रेस या पुलिस लिखकर धौंस जमाने वालों की अब खैर नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में निर्देश जारी कर दिए हैं । इसके तहत अब यदि कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से अपने वाहन पर प्रेस या पुलिस लिखवाएगा, तो उसके खिलाफ 420 धारा के तहत कार्रवाई होगी। कोर्ट के निर्णय के बाद फर्जी पत्रकारों में हडकम्प मचा हुआ है। ख़ास तौर पर प्रेस लिखवाने वाले व्यक्ति से पत्रकारिता से सम्बंधित चीज़े भी पूछी जा सकती है व् पैसे देकर प्रेस कार्ड बनाने वाले व्यक्ति को एवं बनवाने वाले व्यक्ति को भारी जुर्माने के साथ साथ 7 वर्ष की कैद भी हो सकती है साथ ही सम्बंधित वहन सीज़ कर दिया जायेगा। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत किसी को व्यक्ति को कपट पूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित कर आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, संपत्ति या ख्याति संबंधी क्षति पहुंचाना शामिल है। यह एक दंडनीय अपराध है। इसके तहत सात साल तक के कारावास की सजा का प्रावधान है।  

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Dakhal News 22 April 2017


मोदी सरकार - मीडिया

  प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मीडिया पर प्रचार खरीदने के लिए सौ दो सौ करोड़ रुपये नही पूरे 11 अरब (1100करोड़) रुपये से ज्यादा खर्च किए।मीडिया को बिकाऊ कहने वाले बीजेपी के समर्थक भक्तों के लिए ये खबर झटका देने वाली हो सकती है। नोटबंदी को लेकर कठघरे में खड़ी भाजपा सरकार इस खुलासे के बाद और घिर सकती है। आर.टी.आई.के मुताबिक मोदी सरकार ने पिछले ढाई सालों के भीतर अपने प्रचार-प्रसार पर 11 अरब रुपए से ज्याघदा खर्च किए हैं। ग्रेटर नोएडा के आर.टी.आई. एक्टिविस्टे रामवीर तंवर ने 29 अगस्त 2016 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से सूचना के अधिकार के जरिए पूछा था कि केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनाने से लेकर अगस्ते 2016 तक विज्ञापन पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है।तीन माह बाद जब आर.टी.आई.के जरिए मिले इस जवाब को देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे. इसमें बताया गया है कि पिछले ढाई साल में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर ग्यारह अरब रुपए से भी ज्यादा खर्च कर चुकी है। आर.टी.आई. के जरिए मंत्रालय से मिले विज्ञापन की जानकारी में बताया गया कि ब्रॉडकास्डह, कम्यु—निटी रेडियो, इंटरनेट, दूरदर्शन, डिजिटल सिनेमा, प्रोडक्शान, टेलीकास्ट, एसएमएस के अलावा अन्य खर्च शामिल हैं। प्रचार प्रसार के इन माध्यमों पर किया गया इतना खर्च SMS –  2014 – 9. 07 करोड़ 2015 – 5.15 करोड़ अगस्त 2016 तक – 3. 86 करोड़ इंटरनेट –  2014 – 6. 61 करोड़ 2015 – 14.13 करोड़ अगस्त 2016 तक – 1.99 करोड़ ब्राडकास्ट – 2014 – 64. 39 करोड़ 2015 – 94.54 करोड़ अगस्त 2016 तक – 40.63 करोड़ कम्युनिटी रेडियो – 2014 – 88.40 लाख 2015 – 2.27 करोड अगस्त 2016 तक – 81.45 लाख डिजिटल सिनेमा  2014 -77 करोड़ 2015 – 1.06 अरब अगस्त 2016 तक – 6.23 करोड़ टेलीकास्ट – 2014 – 2.36 अरब 2015-2.45 अरब अगस्त 2016 तक – 38.71 करोड़ प्रोडक्शन – 2014 – 8.20 करोड़ 2015 – 13.90 करोड़ अगस्त 2016 तक -1.29 करोड़ तीन साल में हर साल इतना किया खर्च 2014 – एक जून 2014 से 31 मार्च 2015 तक करीब 4.48 अरब रुपए खर्च 2015 – 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 5.42 अरब रुपए खर्च 2016 – 1 अप्रैल 2016 से 31 अगस्त 2016 तक 1.20 अरब रुपए खर्च जब ढाई साल में 1100 सौ करोड़ का खर्च आया है केवल विज्ञापन पर तो पूरे पांच साल में मोदी जी के विज्ञापनों पर 3000 हजार करोड़ का खर्च आ सकता है।इसकी तुलना उन्होंने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी की और कहा कि वहां सरकार के चुनाव प्रचार में 800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। जबकि हमारे देश में एक केंद्र सरकार इतना पैसा खर्च कर दिया ये बहुत ही निंदनीय है। हुकुमत मुँह भराई के हुनर से खूब वाकिफ है, ये हर शख़्स के आगे शाही टुकड़ा डाल देती है  

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Dakhal News 21 April 2017


साइबर न्यूज बुलेटिन्स

 राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने साइबर सुरक्षा संबंधी वीडियो और न्यूज पोर्टल साइबर न्यूज बुलेटिन्स का विमोचन किया। यह न्यूज बुलेटिन यू-ट्यूब पर दिखेगा। श्री गुप्ता ने कहा कि इस न्यूज बुलेटिन्स के माध्यम से लोग साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे। बुलेटिन में वाट्सएप सुरक्षा, जी-मेल सुरक्षा, फेसबुक प्रोफाइल सुरक्षा और इंटरनेट गतिविधियों को सुरक्षित करने संबंधी 25 वीडियो देखे जा सकते हैं। वीडियो को देखने के लिए यू-ट्यूब पर सोसाइटी ऑफ एमटेक फॉर साइबर एथिक्स, भोपाल के चेनल को सब्सक्राइब करना होगा। एक वीडियो में यह भी बताया गया है कि साइबर सेल में किन साइबर क्राइम के खिलाफ किस तरह की शिकायत दर्ज करवाना है। पोर्टल का एड्रेस http://www.cybernewsbulletins.com/ है। बुलेटिन और वीडियो साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट श्री अक्षय वाजपेयी द्वारा तैयार किया गया है।  

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Dakhal News 20 April 2017


पत्रकार को जेल भेजने वाला SDM सस्पेंड

  वरिष्ठ पत्रकार दशरथ सिंह परिहार  के साथ मारपीट क्रर खुद को सरकारी गुंडा साबित करने वाले श्योपुर एडीएम वीरेंद्र सिंह को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया है। सीएम ने घटना पर नाराजगी जताते हुए एडीएम के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आश्वासन दिया है। फिलहाल के लिए वीरेंद्र सिंह को ग्वालियर अटैच कर दिया गया है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर कई लोगों ने विरोध जताया था। वरिष्ठ पत्रकार दशरथ सिंह परिहार  के साथ हुई मारपीट के विरोध में पत्रकारों का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को स्टेट हैंगर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिला था। पत्रकारों ने सीएम को वरिष्ठ पत्रकार के साथ हुई घटना की जानकारी देते हुए श्योपुर के एडीएम वीरेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। इस पर सीएम ने उचित कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए वीरेंद्र सिंह को सस्पेंड करते हुए ग्वालियर अटैच कर दिया है। मंगलवार को दशरथ सिंह परिहार को उस समय गिरफ्तार करवाया गया, जब वे जिला जनसंपर्क कार्यालय में बैठे थे। परिहार दैनिक भास्कर के श्योपुर ब्यूरोचीफ हैं।एडीएम के गनमैन उन्हें एडीएम के चेंबर में ले गए। वहां एडीएम वीरेंद्र सिंह मौजूद थे। गनमैन ने दशरथ से मारपीट शुरु कर दी। रीडर ने भी दशरथ के साथ मारपीट की।इस बीच पुलिस को बुलवाकर एडीएम ने दशरथ को गिरफ्तार करवा दिया। सूचना मिलने पर कई पत्रकार वहां पहुंचे तो एडीएम ने उन्हें भी धमकी दी कि यदि किसी ने बीच में हस्तक्षेप किया तो उसे भी जेल भिजवा दूंगा।इसके बाद में एडीएम ने दशरथ सिंह को जेल भिजवा दिया गया। उनसे मिलने जेल पहुंचे पत्रकारों ने बताया कि उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं। उनके कपड़े भी मारपीट में फट गए थे।पत्रकारों ने उनकी जमानत लेने का प्रयास किया था लेकिन एडीएम के इशारे पर उनकी जमानत भी नहीं हो सकी। जेल में हालत बिगड़ने पर पत्रकारों की मांग पर दशरथ सिंह को इलाज के लिए देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना की प्रदेश के पत्रकार संगठनों ने निंदा की हैं। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शलभ भदौरिया ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया था।

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Dakhal News 19 April 2017


मजीठिया वेज नई दुनिया

छत्तीसगढ़ के श्रम आयुक्त ने मजीठिया वेज लागू करने के लिए नई दुनिया प्रबंधन को नोटिस किया है. नोटिस के साथ उन कर्मचारियों की सूची भी संलग्न की है  जिन्होंने मजीठिया वेज का क्लेम किया है. नोटिस में श्रम आयुक्त ने कहा है की क्लेम करने वाले कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में क्लेम की राशि जमा कर 2 मई 17 को उनके कार्यालय को बैंक स्लीप सहित दस्तावेज प्रस्तुत करें. छत्तीसगढ़ श्रम आयुक्त की इस कार्रवाई से जहां नई दुनिया प्रबंधन सकते में है , वहीं कर्मचारियों में हर्ष है. लगभग छह सात माह से मजीठिया वेज के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को सफलता मिली है.  

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Dakhal News 18 April 2017


मजीठिया वेज नई दुनिया

छत्तीसगढ़ के श्रम आयुक्त ने मजीठिया वेज लागू करने के लिए नई दुनिया प्रबंधन को नोटिस किया है. नोटिस के साथ उन कर्मचारियों की सूची भी संलग्न की है  जिन्होंने मजीठिया वेज का क्लेम किया है. नोटिस में श्रम आयुक्त ने कहा है की क्लेम करने वाले कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में क्लेम की राशि जमा कर 2 मई 17 को उनके कार्यालय को बैंक स्लीप सहित दस्तावेज प्रस्तुत करें. छत्तीसगढ़ श्रम आयुक्त की इस कार्रवाई से जहां नई दुनिया प्रबंधन सकते में है , वहीं कर्मचारियों में हर्ष है. लगभग छह सात माह से मजीठिया वेज के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को सफलता मिली है.  

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Dakhal News 18 April 2017


शिवसेना के सामना का सम्पादकीय

शिवसेना के सामना का सम्पादकीय  भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा, ‘भाजपा के लिए स्वर्णिम काल आ गया हो लेकिन जम्मू कश्मीर में हिंसा जारी है। पाकिस्तान ने कुलभूषण के मामले में रूख सख्त किया हुआ है, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसान सामूहिक आत्महत्या करने पर आमादा हैं, मुद्रस्फीति कम नहीं हुई साथ ही रोजगार दर बढ़ा नहीं है। देश का स्वर्णिम काल अभी नहीं शुरू हुआ है।’ उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी ने कहा कि उसका मानना है कि किसी एक पार्टी के लिए स्वर्णिम काल नहीं हो सकता बल्कि पूरे देश के लिए होना चाहिए।’ संपादकीय के अनुसार, प्रत्येक राज्य में पार्टी की सत्ता होने के बारे में सोचना काफी सुखद और उत्साहजनक है लेकिन भाजपा को राजग के 33 सहयोगियों के बारे में अपनी नीतियां स्पष्ट करनी चाहिए जिनके लिए हाल ही में (प्रधानमंत्री द्वारा) रात्रि भोज आयोजित किया गया था। शिवसेना, अकाली दल और तेदेपा जैसी पार्टियां अपने-अपने राज्यों में मजबूती के साथ खड़ी हैं। यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि हमारी मित्रता की आवश्यकता (भाजपा को) है या नहीं।   संपादकीय में आगे कहा गया कि भाजपा पंचायत से संसद तक शासन के अपने अभियान में आगे बढ़ती रहे लेकिन जो उनके खिलाफ बोलते हैं उन्हें देश विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए नहीं तो लोकतंत्र में जो भी बचा है वह भी खो जाएगा।  प्रत्येक राजनीतिक दल को अपना विस्तार करने का हक है लेकिन भारत जैसे विशाल देश में, सत्तासीन दल पर विपक्षी पार्टियों को मजबूती देने और संसदीय लोकतंत्र चलता रहे यह सुनिश्चत करने की भी जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल को भाजपा के 2 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था, ‘भाजपा को अभी अपने शीर्ष पर पहुंचना बाकी है उसका स्वर्ण काल तब आएगा जब वह पंचायत से देशभर की विधानसभाओं और संसद तक उसका शासन होगा।

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Dakhal News 17 April 2017


आईएएस को धमकी के मामले में पत्रकार पर केस

भोपाल जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आईएएस अफसर आशीष भार्गव को फोन पर मिली धमकी के मामले में पुलिस को प्रकरण दर्ज करने में 1 साल लग गया। पुलिस ने कॉल डिटेल निकलने के बाद नामजद आरोपी पत्रकार के खिलाफ हत्या की धमकी देने का प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी जमीन के एक मामले को अपने पक्ष में निपटाने के लिए दबाव बना रहा था। बैरसिया पुलिस के अनुसार तत्कालीन एसडीएम बैरसिया आशीष भार्गव ने 16 मार्च 2016 में बैरसिया पुलिस से फोन पर धमकी मिलने की शिकायत की थी। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन नंबर की कॉल डिटेल निकालने के लिए कंपनी से जानकारी मांगी। पुलिस के कई बार आवेदन करने के बाद शनिवार को पुलिस को आरोपी की कॉल डिटेल मिल पाई। इसके बाद बैरसिया पुलिस ने शनिवार देर रात भोपाल निवासी पत्रकार अरशद अली खान के खिलाफ फोन पर धमकी देने का प्रकरण दर्ज किया। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसडीएम भार्गव की कोर्ट में जमीन के नामांतरण संबंधी एक मामला चल रहा था। यह जमीन अरशद के रिश्तेदारों के नाम पर बताई जाती है। इस संबंध में अरशद ने कई बार एसडीएम को फोन कर मामला निपटाने के लिए दबाव बनाया। उसने धमकाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने फैसला उसके हक में नहीं दिया तो अंजाम बुरा होगा। टीआई एचसी लाडिया ने बताया कि जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। उसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो पाएगा कि आखिर वह तत्कालीन एसडीएम को क्यों धमका रहा था?  

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Dakhal News 16 April 2017


शिवराज के करीबी नेता ने पत्रकार को धमकाया

पत्रकारवार्ता बुलाकर पत्रिका के ब्यूरो चीफ के साथ की बदसलूकी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे खास और विदिशा के स्वयंभू सीएम व विदिशा नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन, तो लगता है सज्जन, सहज और प्रदेश की जनता के सर्वप्रिय शिवराज सिंह  की लुटिया डुबोकर दम लेंगे। अभी तक तो टंडन की दहशत  से विदिशा की जनता, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्त्ता और अफसर ही परेशान थे, अब टंडन खुलेआम मीडिया को धमकाने लगे हैं।  सीएम के खास सिपहसालार टंडन ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता बुलाकर पत्रिका के ब्यूरो चीफ  गोविंद सक्सेना के साथ नगर पालिका की वाहवाही न छापने के लिए न केवल उनसे बदसलूकी की, अभद्रता की, बल्कि उन्हें धमकाया कि, यदि बच्चे पालना है, तो चुपचाप  पत्रकारिता करो, हम जो कहें वो छापो, वर्ना हमें ठीक करना आता है(देखें वीडियो)। प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन (PMJA) के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महासचिव  महेश दीक्षित ने टंडन की मीडिया के साथ इस बदसलूकी की तीखी भर्त्सना की है। तथा इसे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला करार दिया है। श्री दीक्षित ने मुख्यमंत्री से टंडन पर कड़ी कार्रवाई के साथ उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने की भी मांग की है।  

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Dakhal News 14 April 2017


 रमेशचंद्र अग्रवाल

  दैनिक भास्कर ग्रुप के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल (73) गुरुवार सुबह पंचतत्व में विलीन हो गए। अंतिम संस्कार भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर हुआ। इसमें एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत, बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी कैलाश विजयवर्गीय समेत अादि शामिल हुए। बुधवार सुबह 11 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पर रमेशजी को हार्ट अटैक आया था। उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका।  रमेशजी को अंतिम विदाई देने के लिए छत्तीसगढ़ के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, एएस सिंह देव, मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग और नरोत्तम मिश्रा भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। विधायक रामेश्वर शर्मा, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव भी शोक की इस घड़ी पर मौजूद थे।उमाशंकर गुप्ता, सुरेश पचौरी, मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने भी रमेशजी को अंतिम विदाई दी। जब लोगों ने मेरा मजाक बनाया, तब रमेशजी ने हौसला बढ़ाया था: शिवराज सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रमेशजी को याद करते हुए भास्कर में लिखे एक लेख में कहा, "मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया था, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। "उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया, बल्कि खुलकर सहयोग दिया। उनके ही सुझावों और व्यक्तिगत संबंधों से उस समिट में देश के ही नहीं, बल्कि विदेश के भी कई प्रतिष्ठित उद्योग समूहों ने भाग लिया। यह उन्हीं के प्रयासों का ही परिणाम था कि कई औद्योगिक घरानों ने मप्र में पूंजी निवेश किया। वे मप्र की बेहतर छवि बनाने के लिए प्रयत्नशील रहे।हर बार उनका अतुलनीय सहयोग हमें प्राप्त हुआ। इसे प्रदेशवासी कभी भूल नहीं पाएंगे। असल में वे पूरे मध्य प्रदेश के ब्रांड एम्बेसडर थे। रमेशजी प्रदेश में हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध थे। रियल एस्टेट, सोयाबीन उद्योग, टेक्सटाइल्स, चेंबर ऑफ कॉमर्स और वैश्य समाज, सभी लोगों से उनका जीवंत संवाद बना रहता था।" 'उनके पास समस्याओं के समाधान रहते थे' शिवराज ने आगे कहा, "वह अक्सर लोगों के साथ मेरे पास समस्याओं को लेकर आते थे। किंतु उनकी एक अच्छी बात यह थी कि वह समस्याओं के साथ समाधान और सुझाव भी लेकर आते थे।वे सरकार की सीमाओं को समझते थे। जिन लोगों के साथ मांग और समस्याओं को लेकर आते थे, वे उनसे कहते थे कि हमें राज्य के हितों व राजस्व का भी ध्यान रखना है। हम सभी को मिलकर सरकार का सहयोग भी करना है। उनकी यह बात मुझे बहुत ही अच्छी लगती थी।"  "उन्होंने पूरे देश में दैनिक भास्कर को आगे बढ़ाया। यह सिर्फ भास्कर समूह या एक कंपनी का ही प्रसार नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में मप्र के वर्चस्व का प्रसार था। दैनिक भास्कर आगे बढ़ा तो प्रदेश का नाम भी बढ़ा। हमें सदैव गर्व रहा कि मप्र का एक उद्योगपति इतना सफल हुआ। मुझे याद है कि दैनिक भास्कर पुराने भोपाल से निकलता था। वहां से प्रगति करते हुए वह आज सिर्फ भारत का ही नहीं, विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय अखबार बन गया है।" "दैनिक भास्कर की सफलता के शिखर पर पहुंचने की यह यात्रा रमेशजी के अथक परिश्रम, बुद्धिमत्ता एवं दूरदर्शिता का ही परिणाम है। दैनिक भास्कर आज अपनी निष्पक्ष लेखनी के लिए स्थापित हो चुका है। पत्रकारिता में नए प्रतिमान छूने के साथ ही रमेशजी हमेशा सामाजिक सरोकारों के लिए संवेदनशील भी रहे। पानी बचाने के अभियान में उनके मार्गदर्शन में भास्कर ने लोगों में जागृति लाने और उनके व्यवहार परिवर्तन में अतुलनीय सहयोग दिया।चाहे सूखे रंगों की होली हो या सिंहस्थ में वैश्य महासभा के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यस्था, ये पुण्य कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। एक बड़े पत्र समूह की बागडोर संभालने की महती जिम्मेदारी के साथ ही वे सामाजिक एकता और समरसता के लिए हमेशा कार्यरत रहे। उनकी कोशिश होती थी कि सभी धर्मों और वर्गों के लोग मिल-जुलकर रहें। उनके होली-मिलन और ईद-मिलन जैसे कार्यक्रम समाज को यही संदेश देते रहे। यह उनका ही निरंतर योगदान रहा, जिससे राजधानी का भोपाल उत्सव मेला प्रदेश की पहचान बन गया।" मोदी-सोनिया ने दी श्रद्धांजलि नरेंद्र मोदी ने कहा, "मीडिया जगत में अपने योगदान की वजह से रमेशजी हमेशा याद किए जाएंगे।सोनिया गांधी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "मीडिया और समाजसेवा के क्षेत्र में रमेशजी का योगदान सराहनीय है। उनके जाने से रिक्त हुई जगह भरने में समय लगेगा।लोकसभा स्पीकर ने सुमित्रा महाजन ने कहा, "मीडिया के मॉडर्नाइजेशन के लिए रमेशजी याद किए जाएंगे। वे मीडिया ही नहीं, सामाजिक कार्यों में भी सदा आगे रहते थे।मोरारी बापू ने कहा, "परमात्मा के निर्णय को स्वीकारना ही पड़ता है। चैत्र नवरात्रि में उन्होंने पूरी रामकथा सुनी। प्रसन्नता के साथ उन्होंने कथा की पूर्णाहुति की और खुद का जीवन रामायण को अर्पण कर गए। इस निर्वाण को मेरा प्रणाम और श्रद्धांजलि।आचार्य महाश्रमण ने कहा, "ज्ञात हुआ कि श्री रमेशजी का देहावसान हो गया। इस समय उनके सभी पारिवारिक व संबंधीजन धैर्य और मनोबल का परिचय दें। आध्यात्मिक मंगलकामना।"  

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Dakhal News 13 April 2017


 रमेशचंद्र अग्रवाल

भास्कर समूह के चेयरमेन रमेशचंद्र अग्रवाल का अहमदाबाद में आज सुबह 11 बजे हृदयाघात से  निधन हो गया। वे 73  वर्ष के थे। श्री अग्रवाल अहमदाबाद से एक फ्लाइट में जा रहे थे जब उन्हें हार्ट अटैक हुआ। उनके पार्थिक शरीर को आज शाम भोपाल लाया गया । श्री अग्रवाल का अंतिम संस्कार गुरूवार को भोपाल में किया जाएगा। एयरपोर्ट पर मध्यप्रदेश सरकार के जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ,राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये।  रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर दुख प्रकट किया। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी ट्वीट कर अपनी संवेदना प्रकट की। शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट किया, 'भास्कर समूह के चेयरमैन रमेश अग्रवाल जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखदायी है। वह संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय हेतु याद किये जायेंगे।' श्री अग्रवाल ने भोपाल विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान डिग्री प्राप्त की थी है। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे द्वारा उन्हें भारत के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दैनिक भास्कर समूह के अध्यक्ष श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री चौहान ने कहा कि स्वर्गीय श्री अग्रवाल पत्रकारिता के उदात्त सिद्धांतों और मूल्यों से जुड़े थे। उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता को समृद्ध बनाने में अमूल्य योगदान दिया है। श्री चौहान ने कहा कि पत्रकारिता के साथ-साथ वे सामाजिक मुद्दों में गहरी रूचि लेते थे और एक प्रतिबद्ध समाज सेवक के रूप में उन्होंने कई प्रकल्प सफलतापूर्वक संपादित किये। इसके अलावा स्वर्गीय श्री रमेश जी आध्यात्मिक व्यक्ति थे और धर्म-संस्कृति के काम को तन-मन से पूरा करते थे। उनके निधन से प्रदेश ने एक कर्मठ पत्रकार, समाजसेवक और साधक को खो दिया है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकमग्न परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

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Dakhal News 12 April 2017


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नरेंद्र मोदी सरकार की सख्ती की गाज छोटे अखबारों और पत्रिकाओं पर पड़ी है. इससे दूर दराज की आवाज उठाने वाली पत्र-पत्रिकाओं का संचालन ठप पड़ गया है, साथ ही इससे जुड़े लाखों लोग बेरोजगार भी हो गए हैं. ऐसे दौर में जब बड़े मीडिया घराने पूरी तरह कारपोरेट के चंगुल में आ चुके हैं और असल मुद्दों को दरकिनार कर नकली खबरों को हाईलाइट करने में लगे हैं, मोदी सरकार उन छोटे अखबारों और पत्रिकाओं की गर्दन दबोचने में लगी है जो अपने साहस के बल पर असली खबरों को प्रकाशित कर भंडाफोड़ किया करते थे. हालांकि दूसरा पक्ष यह है कि उन हजारों लोगों की अकल ठिकाने आ गई है जो अखबारों पत्रिकाओं की आड़ में सिर्फ और सिर्फ सरकारी विज्ञापन हासिल करने की जुगत में लगे रहते थे और उनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं हुआ करता था. वो अखबार पत्रिका के जरिए ब्लैकमेलिंग और उगाही के धंधे में लिप्त थे. मोदी सरकार द्वारा सख्ती के इशारे के बाद आरएनआई यानि समाचार पत्रों के पंजीयक का कार्यालय और डीएवीपी यानि विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय काफी सख्त हो चुके हैं. समाचार पत्र के संचालन में जरा भी नियमों को नजरअंदाज किया गया तो आरएनआई समाचार पत्र के टाईटल पर रोक लगाने को तत्पर हो जा रहा है. उधर, डीएवीपी विज्ञापन देने पर प्रतिबंध लगा दे रहा है. देश के इतिहास में पहली बार हुआ है जब लगभग 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए गए और 804 अखबारों को डीएवीपी ने अपनी विज्ञापन सूची से बाहर निकाल दिया है. इस कदम से लघु और माध्यम समाचार पत्रों के संचालकों में हड़कम्प मच गया है. पिछले काफी समय से मोदी सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है. आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दिया है. समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए. इसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के अखबार-मैग्जीन (संख्या 59703) और फिर उत्तर प्रदेश के अखबार-मैग्जीन (संख्या 36822) हैं. इन दो के अलावा बाकी कहां कितने टाइटिल निरस्त हुए हैं  बिहार 4796, उत्तराखंड 1860, गुजरात 11970, हरियाणा 5613, हिमाचल प्रदेश 1055, छत्तीसगढ़ 2249, झारखंड 478, कर्नाटक 23931, केरल 15754, गोआ 655, मध्य प्रदेश 21371, मणिपुर 790, मेघालय 173, मिजोरम 872, नागालैंड 49, उड़ीसा 7649, पंजाब 7457, चंडीगढ़ 1560, राजस्थान 12591, सिक्किम 108, तमिलनाडु 16001, त्रिपुरा 230, पश्चिम बंगाल 16579, अरुणाचल प्रदेश 52, असम 1854, लक्षद्वीप 6, दिल्ली 3170 और पुडुचेरी 52. [भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]    

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Dakhal News 11 April 2017


पत्रकार की मौत

रजनीश जैन  पत्रकारों के सम्मान और पत्रकारिता पर व्याख्यानों की नियमित श्रंखला के इस नृशंस दौर में वाट्सएप पर पत्रकारों के एक ग्रुप में तफरी कर रहा था कि तीन तस्वीरें एक साथ सरकीं। पत्रकारनुमा भाजपा कार्यकर्ता ने अपने इलाके सागर के भूतेश्वर रोड से वे तस्वीरें दो लाइन के मैसेज के साथ पोस्ट की थीं। 'एक वृद्ध को सड़क किनारे लावारिस पड़े पाया गया,108 बुला कर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।उनकी जेब से ये कागजात मिले हैं।'दो कागज थे ,एक आधार कार्ड और दूसरा साप्ताहिक अखबार का परिचय पत्र जिसे देखकर मैं ठिठक गया था। वे छोटेलाल भारतीय थे, 'सैनिक गर्जना' अखबार के संपादक। इस मैसेज पर दिनभर और कोई डीटेल नहीं आया।अगले दिन के अखबारों में भी इस बाबत कुछ नहीं था। मैंने पोस्ट डालने वाले भाजपा कार्यकर्ता को संपर्क किया कि उन बुजुर्ग के बारे में कोई अपडेट है क्या? उसने बताया कि उनकी हालत गंभीर थी कुछ ही घंटे जीवित रहे।उनके परिवार का पता चल गया , वे लोग लाश लेने पहुँच गये थे।  कुछ साप्ताहिक अखबार वालों को मैंने जब यह खबर दी तो वे उनकी मौत पर दुखी तो हुए लेकिन लावारिस पड़े मिलने पर उन्हें कोई हैरत न थी। एक ने कहा हम लोगों की हालत अब यही है, गनीमत है कि उनका परिवार पहुँच गया था, यहां तो यह उम्मीद भी खत्म है। खामोश कथन था लेकिन हजार सवालों से भरा हुआ। लेकिन मैं चुप नहीं रह सकता।छोटेलाल भारतीय पर लिख रहा हूँ यह जानते हुए कि इस लेख को पाठक नहीं मिलेंगे ,...तो क्या सिर्फ इस वजह से मुझे भी खामोश रह जाना चाहिए। वह भी तब जब मुझे इल्म है कि यह सिर्फ साप्ताहिक वाले छोटेलाल की लावारिस मौत नहीं है बल्कि अखबारी दुनिया की एक दुर्धुष विधा की सोची समझी हत्या है जिसमें हमारी सरकारें और समाज शामिल है। छोटेलाल दलित थे ,'भारतीय' सरनेम लिखते थे।लेकिन इस निष्ठुर देश में नाम बदलने भर से जाति का फंदा काटा नहीं जा सकता। 1975 की एमरजेंसी के दमनकारी वक्त में जब अखबार और अखबार वाले बंद किए जा रहे थे, छोटेलाल अखबार निकालने की जिद पर काम कर रहे थे। लगातार निकालने पर 1976 में उनके अखबार को आरएनआई नंबर भी मिल गया। सागर,भोपाल और दिल्ली के गलियारों में वे कांग्रेस नेताओं के यहाँ सागर के ग्रामीण दलित समाज की समस्याएं ले जाते थे, समस्याओं के हल कराते समय ही सरकारी विज्ञापन भी लिखा लेते थे जिससे उनका और उनके अखबार का खर्च चलता था। पचास साल की उम्र तक शादी नहीं की।बाद में समाज की ही एक विवाहिता को उसकी संतानों सहित अपना मान लिया। एक दशक तक यही उनका परिवार था। वह परिवार बर्बादी जिसके मुखिया का इंतजार कर रही थी। मुख्यमंत्री रहते दिग्विजय सिंह को अपने परवर्ती काल में साप्ताहिकों की घातकता और व्यर्थता का बोध हुआ और उन्होंने साप्ताहिकों को मिलने वाले सरकारी विज्ञापनों पर सख्ती शुरु कर दी। अभी तक जिलों और कस्बों से सैकड़ों की तादाद में निकल रहे टेबलायड साइज के छोटे छोटे साप्ताहिकों को सरकारी विज्ञापनों की कुल राशि के 40 प्रतिशत एड दिए जाते थे। इसी वित्तीय आधार पर साप्ताहिकों की काली, सफेद, नीली, लाल, पीली दुनिया चलती थी। इनमें विभिन्न क्षेत्रीय और छोटी विचारधाराओं को भी खाद पानी मिलता था। दूरस्थ और गुमनाम इलाकों के भ्रष्टाचार और समस्याएं उजागर होती थीं। बिजली, पानी, सड़़कों की बढ़ती समस्याएं छाप रहे इन सैकड़ों इदारों पर नियंत्रण में असफल होता देख दिग्गी राजा ने इनका गला घोंटने की ठानी और बड़े अखबारी संस्थानों की तरफ फण्ड का प्रवाह बढ़ा दिया। राजा की गौरमेंट भी साप्ताहिकों के साथ ही रसातल में चली गयी। भाजपा आई तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की चमक में खो गयी। दिग्विजय की विज्ञापननीति को भाजपा नेतृत्व ने और कड़ाई से लागू किया।उधर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रमोद महाजन ने सन 77 में आडवाणी द्वारा लागू की गई विज्ञापननीति को बदलते हुए साप्ताहिक अखबारनवीसी को सूली पर चढ़ा दिया। यहां से साप्ताहिकों की उम्मीद का आखिरी चिराग बुझ गया। तकनीक के मंहगे दौर में जब बड़े संस्थानों के साप्ताहिक काल के गाल में समा गये तो छोटेलाल भारतीय की 'सैनिक गर्जना' कब तक गरजती। आखिरी बार चार पाँच साल पहले 'सैनिक गर्जना' का अंक लिए छोटेलाल भारतीय को सागर सर्किट हाऊस में ठहरे पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर से मिलते देखा गया।वे अखबार की कापी देने आए थे। इस अंक में उन्होंने एक लेख छापा जिसमें पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा पत्रकारों को दी जाने वाली मंथली पर तीक्ष्ण रिपोर्ट छपी थी। विभाग ने यह रसद रोक दी।कुछ स्थानीय पत्रकार लंबे समय तक छोटेलाल को कोसते रहे। पर किसी ने यह मालूम करने की कोशिश नहीं की कि परिवार के भरणपोषण में नाकाम भारतीय को अपना घर छोड़ देना पड़ा था। दस साल से वे अकेले शहर के एक रेस्टोरेंट के बाजू की छपरी में सो रहे थे और बचा खुचा खा रहे थे। कभी कभी उनके कोई शिष्य उनकी बौद्धिक मदद लेने के बहाने ठीकठाक खिला देते थे। शहर में वृद्धों के मुफ्त भोजन के ठिकाने सीताराम रसोई भी वे चले जाते थे। अपने मौसरे भाई के पास नजदीक के गांव कुड़ारी में भी कुछ दिन काट लेते थे। गांव में अब भी लोग उनसे सरकारी योजनाओं के आवेदन भरवाते और शहर भिजवा देते थे। बीमारी में कई कई दिन अस्पताल में कटे।एक थैला उनकी कुल संपत्ति था। जेब में हमेशा की तरह खुद के अखबार का ,खुद के हस्ताक्षर से , खुद को जारी आईडेंटिटी कार्ड और आधारकार्ड की फोटोकापी रहती थी। पर यह सब अब निराधार है। लावारिस ही सही,74 साल की पकी उम्र में वे चले गये हैं। अच्छा ही हुआ। छोटेलाल भारतीय विकास की राजनीति का ये दौर शायद ही बर्दाश्त कर पाते जिसके पैकेज में गरीब को 5 रु की थाली से लेकर सबको घर , कर्जामाफी, मुफ्त शिक्षा स्वास्थ्य तीर्थयात्राएं हैं। सचमुच जिंदगी घोषणापत्रों में कितनी आसान लगती है।...पर हम प्रदेश का पहला दैनिक निकालने वाले मास्टर बल्देवप्रसाद के शहर के लोग एक छोटे से अखबार वाले की मौत किस पन्ने पर लिखें।...कौन छापता है ऐसी मौतों को। शीर्षक की दूसरी पंक्ति दुष्यंत के शब्दों में कुछ यूं है,जोड़ कर पढ़ लें ...घर अंधेरा देख तू आकाश के तारे न देख।'  (पत्रकार रजनीश जैन की वॉल से )  

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Dakhal News 10 April 2017


navlok bharat

प्रचंड जनादेश: चुनौतियाँ और संभावनाएँ विषय पर हुई संगोष्ठी जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज पाक्षिक पत्रिका 'नवलोक भारत', भोपाल द्वारा आयोजित वैचारिक संगोष्ठी प्रचंड जनोदश: चुनौतियाँ और संभावनाएँ में हिस्सा लिया। मंत्री डॉ. मिश्र ने समन्वय भवन में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता की। जनसंपर्क मंत्री ने संगोष्ठी में आए अतिथि वक्ताओं श्री सुधांशु त्रिवेदी और सुश्री शाज़िया इल्मी का मध्यप्रदेश आगमन पर स्वागत किया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राजनैतिक दल को प्राप्त प्रचंड बहुमत अधिक अपेक्षाओं को साथ लाता है। उन्होंने कहा कि अपेक्षाओं के ज्वार और उत्तरदायित्वों के भार का संगम हाल ही में उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव परिणामों में देखने को मिला है। श्री त्रिवेदी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में विकास का नया युग प्रारंभ होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व का यह नैतिक प्रभाव ही है कि उनके स्वच्छता अभियान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के आव्हान को जनता ने अंगीकार्य किया। श्री त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की नेतृत्व क्षमता से विश्व के कई राष्ट्र प्रभावित हुए हैं। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रीय एकता समिति मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने किया। संगोष्ठी को दैनिक भास्कर समाचार पत्र समूह के प्रमुख श्री रमेशचंद्र अग्रवाल और सुश्री शाजिया इल्मी,  ने भी सम्बोधित किया। सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग ने प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत किया। संचालन श्री विवेक सारंग ने किया। पत्रिका के संस्थापक संपादक वरिष्ठ राजनेता श्री कैलाश सारंग ने कहा कि पत्रिका द्वारा ऐसी विचार संगोष्ठियों का आयोजन भविष्य में भी किया जाएगा। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति-चिन्ह किए गए। कार्यक्रम में श्री राजीव मोहन गुप्त प्रधान संपादक दैनिक जागरण, श्री राजेन्द्र शर्मा प्रधान संपादक दैनिक स्वदेश, श्री भरत पटेल प्रधान संपादक दैनिक सांध्य प्रकाश, वरिष्ठ साहित्यकार श्री बटुक चतुर्वेदी के साथ ही राजधानी के अनेक वरिष्ठ पत्रकार, जन-प्रतिनिधि और प्रबुद्धजन उपस्थित थे। शुरूआत सुश्री उपासना सारंग के वन्दे-मातरम् गायन से हुई।  

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Dakhal News 9 April 2017


ibc 24 एन्कर सुरप्रीत

छत्तीसगढ़ में एक टीवी न्यूज एंकर सुरप्रीत कौर ने ब्रेकिंग न्यूज में अपने ही पति की मौत की खबर पढ़ डाली। यह न्यूज रीडर कौर छत्तीसगढ़ के एक प्राईवेट चैनल आईबीसी-24 में काम करती है। शनिवार सुबह वह रोजाना की तरह ऑफिस आई और न्यूज बुलेटिन पढ़ने लगी। इसी दौरान महासमु्ंद जिले के पिथौरा में हुए एक सड़क हादसे की जानकारी आई तो महिला एंकर ने उसकी ब्रेकिंग न्यूज पढ़ी। हालांकि इस दौरान महिला को पता नहीं था कि इस हादसे में उसके पति की भी मौत हो गई है। इसके बाद महिला एंकर ने रिपोर्टर को फोन करके घटना की जानकारी हासिल की। रिपोर्टर ने बताया कि हादसे में व्हीकल में पांच लोग सवार थे जिसमें से तीन की मौत हो गई है। रिपोर्टर ने यह भी बताया कि मरने वाले तीन लोगों की पहचान नहीं हो सकी है।  इस दौरान महिला एंकर कौर को याद आया कि जहां ये हादसा हुआ है उसी रूट से उस वक्त उसके पति अपने चार साथियों के साथ जाते हैं।  यह खबर सुनने के बाद महिला एंकर टूट गई और न्यूज अवर खत्म करने के बाद टीवी स्टूडियो से निकल गई। महिला एंकर के साथियों का कहना है कि वह बहुत बहादुर महिला है। हमें गर्व है कि वह हमारी एंकर है लेकिन इस घटना से आज हम सभी सदमे में हैं। 28 वर्षीय कौर आईबीसी-24 न्यूज चैनल में एंकर है। कौर की शादी एक साल पहले हरशद कवादे के साथ हुई थी और ये दंपत्ति रायपुर में रहता है। कौर न्यूज अवर के बाद हादसे वाली जगह गई थी, लेकिन उसके बाद वापस ऑफिस लौटी। खबर साभार- लाइव हिन्‍दुस्‍तान

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Dakhal News 8 April 2017


पत्रकार सुरक्षा कानून

महाराष्ट्र में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमले करने वालों की अब खैर नहीं है। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को पत्रकार सुरक्षा कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है। संभवत: महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है जहां की कैबिनेट ने पत्रकार सुरक्षा कानून पास किया है। राज्य में पत्रकारों पर हमले की घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ दिनों पहले विधानसभा ने आश्वासन दिया था कि इससे जुड़ा विधेयक इसी सत्र में लाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट में मसौदे को मंजूरी देने के बाद सरकार शुक्रवार को बजट सत्र के आखिरी दिन दोनों सदनों में पारित करा सकती है। सरकार ने जो मसौदा तैयार किया है उसके मुताबिक पत्रकारों, मीडिया संस्थानों के साथ कांट्रैक्ट पर काम करने वाले पत्रकारों पर हमला करना गैरजमानती अपराध होगा। हमला करने वाले को इलाज का खर्च और मुआवजा भी अदा करना होगा। मुआवजा न देने पर आरोपियों के खिलाफ दीवानी न्यायालय में मुकदमा चलाया जाएगा। वही, विधेयक में कानून का दुरुपयोग रोकने का भी प्रावधान है। यदि जांच में शिकायत झूठी पाई गई तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग 2005 से ही हो रही है। तत्कालीन गृहमंत्री दिवंगत एनसीपी नेता आरआर पाटिल ने पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बनाने का वादा किया था। इसको लेकर नारायण राणे की अध्यक्षता  में समिति गठित की गई थी लेकिन कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार इस कानून को पारित करने में टालमटोल करती रही।

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Dakhal News 8 April 2017


पत्रकारअनुराग उपाध्याय

       // माकूल ज़वाब // उस के पास सवाल बहुत थे मेरे पास थे कुछ माकूल जवाब... सिलसिला चला तो मैं सवाल बन गया ,लेकिन उसके पास जवाब नहीं था ...  सवालों के जवाब उसकी खूबसूरत झुकी पलकें देती रहती थीं ... और लब ख़ामोशी अख्तियार  कर लेते थे ... उँगलियों पर सजे नाख़ून  दूसरे नाख़ून से नेलपेंट कुरेदने में लग जाते जैस पुराने जख्मों को शिद्दत से कुरेदा जा रहा हो... जवाब ढूंढते हुये हम सवालों की दीवार खड़ी करते रहे  पता ही नहीं चला वो दीवार गिर पड़ी ,हमारे रिश्ते उसमें लहूलुहान हो गए ... अनसुलझे सवाल अब भी उसके जहन में होंगे, कुछ माकूल हल मैंने भी लिख लिए थे उसके लिए ... शायद उम्र के किसी मोड़ पर उसे जरूरत पड़े तो ... "अनुराग उपाध्याय" 11/7/2016 * पत्रकार ,लेखक- कवि अनुराग उपाध्याय समाज के हर विषय पर अपनी कलम चलाते हैं।  साफ़ साफ़ और बिना लाग लपेट के सच बयान कर देना उनके लेखन की सबसे बड़ी खूबी है। अनुराग की कवितायेँ  कई बार रुमानियत की सरहदों पर चहलकदमी करती नज़र आती हैं तो कई दफ़ा सामाजिक बदलाव के लिए हल्ला बोलती प्रतीत होती हैं।  संपादक   

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Dakhal News 7 April 2017


एक्जिट पोल प्रतिबंधित

भारत निर्वाचन आयोग ने एक्जिट पोल के संबंध में निर्देश जारी किये हैं। उप निर्वाचन के संबंध में किसी भी प्रकार के एक्जिट पोल का संचालन तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा उसका प्रकाशन या प्रचार अथवा किसी भी तरीके से उसके प्रसार पर प्रतिबंध रहेगा। किसी भी प्रकार के निर्वाचन संबंधी मामले का किसी भी ओपीनियन पोल या अन्य किसी पोल सर्वे के परिणामों सहित प्रदर्शन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से करवाने पर प्रतिबंध रहेगा।  

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Dakhal News 7 April 2017


trp week 13 indiatv

नेशनल न्यूज़ चैनल्स में आज तक सिरमौर बना हुआ है। लेकिन इण्डिया टीवी के लिए पिछले दो हफ्ते बहुत ही ख़राब साबित हुए हैं। ऐसा लग रहा है 2004 से लेकर अबतक  इंडिया टीवी के इतिहास का सबसे ख़राब दौर चल रहा है। रजत शर्मा की टीम के परफॉर्मेंस को दर्शकों ने नकार दिया है। इण्डिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम ने 12  वें सप्ताह में में इंडिया टीवी के ख़राब प्रदर्शन के चलते आधा दर्जन पत्रकारों को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अब देखना है 13 वें सप्ताह भी इंडिया टीवी के ख़राब प्रदर्शन की गाज किस पर गिरती है। देश के साथ मध्यप्रदेश में भी इंडिया टीवी पहले दूसरे नंबर से खिसक कर पांचवे और छठवे नम्बर पर पहुँच गया है। मध्यप्रदेश में पिछले एक साल से लगातार इंडिया टीवी की trp डाउन हुई है।  बीत सप्ताह हर दृष्टि से एबीपी न्यूज़ के लिए बेहतरीन परिणाम देने वाला रहा है।  -------------------------------------------------------------------- Mp/cg के रीजनल टॉप फाइव न्यूज़ चैनल trp week  13    --------------------------------------------------------------------     ज़ी न्यूज........  51.5  आईबीसी.....    21.8 ईटीवी.......       17.5 सहारा समय....    5.1 बंसल न्यूज.....     2.1 ------------------------------------- नेशनल न्यूज़ चैनल्स  trp Wk 13 Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs,  Aaj Tak 16.8 dn 0.5  ABP News 15.4 same   India TV 12.8 dn 0.3  Zee News 12.8 dn 0.8  News18 India 9.7 up 1.7  India News 9.4 same   News Nation 8.6 dn 0.1  News 24 6.9 dn 0.4  Tez 3.2 up 0.2  NDTV India 2.3 up 0.1  DD News 2.1 up 0.1    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.1 dn 1.0  ABP News 15.3 up 0.3  Zee News 14.0 dn 0.6  India TV 13.2 dn 0.7  News18 India 10.1 up 1.6  India News 8.1 same   News Nation 8.0 dn 0.4  News 24 6.5 up 0.1  Tez 3.6 up 0.4  NDTV India 2.9 up 0.1  DD News 2.2 up 0.2 ------------------------------------------------------------------------  

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Dakhal News 6 April 2017


 शलभ भदौरिया

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा विधानसभा में पत्रकारों के लिए पत्रकार कौशल विकास प्रकोष्ठ की स्थापना तथा श्रद्धानिधि की राशि में वृद्धि और आयु सीमा घटाकर62 से 60 वर्ष किए तथा फोटो जर्नलिस्ट, कैमरामेन को भी श्रद्धानिधि की पात्रता दिए जाने का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।  इसके लिए संघ मुख्यमंत्री व जनसंपर्क मंत्री का अभिनंदन करेगा।  संघ के प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया तथा मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष शरद जोशी ने कहा कि जनसंपर्क मंत्रीजी ने पत्रकार चिकित्सा सहायता योजना में पत्रकार के आश्रित माता-पिता को भी इलाज के लिए सहायता देने, गंभीर रोगों के इलाज के लिए अब तक दिए जाने वाले अधिकतम सहायता राशि को 50 हजार से एक लाख रुपए करने, गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी बीमा योजना में शामिल करने, श्रद्धानिधि की राशि को 6 हजार से 7 हजार रुपए बढ़ाने,राज्य तथा राज्य से बाहर पत्रकारों के लिए अध्ययन योजना लागू करने तथा पत्रकारों की समस्याओं के अध्ययन के निराकरण के लिए राज्य स्तर पर समिति का गठन करने, राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं से फाउंडेशन कोर्स प्रशिक्षण प्राप्त करने पर 50 प्रतिशत शुल्क शासन द्वारा वहन करने की घोषणा की है। शासन का यह निर्णय स्वागत योग्य है।  श्री भदौरिया तथा श्री जोशी ने बताया कि संघ विगत कई वर्षों से पत्रकारों के कल्याण और समस्याओं को लेकर संघर्षरत है। कई बार शासन को इस संबंध में ज्ञापन भी दिए है, जिसमें से अधिकांश मांगें शासन द्वारा स्वीकृत की गई, जिसमें श्रद्धानिधि की राशि में वृद्धि करने, आयु सीमा 62 से घटाकर 60 वर्ष करने, गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बीमा योजना में शामिल करने, अधिमान्य पत्रकारों को लेपटाप देने, स्वास्थ्य योजना मे पत्रकारों के माता-पिता को शामिल करने, अधिमान्य कार्ड की अवधि 2 वर्ष करने, टोल नाकों पर पत्रकारों को छूट देने, पत्रकारों की कार्यशाला आयोजित करने, तहसील स्तर पर अधिमान्यता देने, पत्रकार भवन के लिए अनुदान देने, पत्रकार प्रताडऩा के मामले में गृह मँत्रालय के परिपत्र का कड़ाई से पालन करने जैसी अनेक मांगे शासन ने संघ की पहल  पर स्वीकृत की है।  जनसंपर्क मंत्री श्री मिश्रा ने सलकनपुर सिहोर में आयोजित सम्मेलन के अवसर संघ के ज्ञापन के प्रति उत्तर में मांगे  शीघ्र स्वीकृत करने का आश्वासन दिया था और यह आश्वासन उन्होने विधानसभा में घोषणा कर पूरा कर दिया है। पूर्व जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने भी सिहोर में आयोजित जिला सम्मेलन में संघ के ज्ञापन को सरकार के लिए मार्गदर्शन भी बताया था और कहा था कि पत्रकारों की समस्याओं को लेकर इससे बढिय़ा कोई मांग पत्र नहीं हो सकता।  श्री भदौरिया व श्री जोशी ने बताया कि देश व  प्रदेश में पत्रकारों पर हो रहे हमलों और प्रताडऩा के मामलों को देखते हुए संघ   केंद्र व राज्य सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग वर्षों से कर रहा है, जिस प्रकार से डाक्टरों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट बना है, इसी प्रकार पत्रकारों के लिए भी एक्ट बनाया जाए, ताकि पत्रकार निर्भिक होकर अपने दायित्व का निर्वहन कर सके। इस संबंध मे सांसदोंं एवं केंंद्रिय मंत्री के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी भेजे गए  और प्रदेश स्तर पर पोस्टकार्ड अभियान भी चलाया गया,जिसमें लगभग 10 हजार पोस्टकार्ड प्रधानमंत्रीजी को भेजे गए।   प्रदेश में टोल नाकों को सरकार समाप्त करे या पत्रकारों को रियायत दें। अधिमान्य पत्रकारों को राष्ट्रीय राजमार्ग के टोलनाकों पर छूट  दे। पत्रकार पंचायत बुलाने,  जिला स्तर पर  पत्रकार प्रताडऩा जांच सेल गठित करने, तहसील व ब्लाक स्तर पर पत्रकारों के नाम शासन की सूची में दर्ज करने, शासन की कमेटियों में संघ के सदस्यों को शामिल करने सहित कुछ ओर मांगे लंबित है,जिसकी ओर भी शासन का ध्यान आकर्षित किया गया है।  श्रम दिवस 1 मई को इन मांगों को लेकर पुन: शासन का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। 

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Dakhal News 5 April 2017


यशवंत सिंह

यशवंत सिंह कहने को तो ये बड़े लोग होते हैं लेकिन दिल इनका इतना छोटा होता है कि ये अपने इर्द-गिर्द रहने वालों के दुखों-भावनाओं को भी नहीं समझते. इंडिया न्यूज चैनल के मालिक कार्तिक शर्मा उर्फ कार्तिकेय शर्मा अरबों-खरबों के मालिक हैं. होटल, मीडिया समेत कई किस्म के बिजनेस हैं. इनके पिता विनोद शर्मा हरियाणा के बड़े नेता हैं. एक भाई मनु शर्मा इन दिनों तिहाड़ जेल में जेसिका लाल मर्डर केस की सजा काट रहा है. सारे कारोबार का दारोमदार कार्तिक शर्मा के कंधों पर है. लेकिन इनकी ओछी मेंटलटी के चलते इनसे काफी लोग नाराज रहते हैं. इन महाशय ने अपने ड्राइवर तक को कई महीने की सेलरी नहीं दी थी. खफा ड्राइवर ने हिसाब बराबर करने का ऐसा खौफनाक प्लान बनाया कि सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. नोएडा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कार्तिकेय शर्मा अपने मित्र अशोक डोगरा के साथ इंडिया न्यूज चैनल के आफिस से दिल्ली के जोरबाग स्थित अपने घर जा रहे थे. बात 27-28 मार्च की रात की है. इंडिया न्यूज़ चैनल का आफिस नोएडा के सेक्टर तीन में है. कार्तिकेय शर्मा के ड्राइवर राम प्रकाश ने उनकी मर्सिडीज कार निकाली और दोनों को लेकर चल पड़ा. कार चालक रामप्रकाश मर्सिडीज को लेकर रजनीगंधा चौराहे के अंडरपास पर पहुंचा. इसके बाद उसने कार की स्पीड असामान्य रूप से बढ़ा दी. कार्तिकेय शर्मा के तो होश उड़ गये. उन्होंने ड्राइवर को डांटा और स्पीड कम करने को कहा. चालक रामप्रकाश ने सेलरी कई महीने से न देने की बात कहते हुए कार्तिकेय शर्मा को गरियाना शुरू किया और कहा- ''तुझसे तो आज हिसाब बराबर करके रहूंगा, तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.'' ड्राइवर रामप्रकाश कार को डीएनडी पर ले जाकर साइड से दीवार में टक्कर मारना शुरू कर दिया. टक्कर पीछे के उस साइड से मार रहा था जिस तरफ कार्तिकेय शर्मा बैठे हुए थे. इसके बाद उसने कार को बैक करते हुए कस कर टक्कर मारी. कार्तिकेय शर्मा और उनके मित्र को मौत साक्षात नजर आने लगी. ये लोग चिल्लाने लगे और अपनी जान की गुहार लगाने लगे. किसी तरह ये लोग कार से निकल कर भागे. पुलिस ने सूचना मिलते ही ड्राइवर को अरेस्ट कर लिया और आईपीसी की धारा 307 में मुकदमा लिखकर उसे जेल भेज दिया. फिलहाल यह बड़ी खबर न किसी चैनल के क्राइम शो में दिखी न किसी चैनल के टिकर में झलकी. मीडिया के धंधेबाज और काले दिल के मालिक अपनी एकता कायम रखते हुए इस बड़े घटनाक्रम को पी गए. हां नोएडा में कुछ एक अखबारों में खबर है लेकिन किसकी पक्षधरता लेकर लिखी गई है, उसे आप पढ़ कर जान सकते हैं.  सवाल यह है कि क्या इससे मीडिया मालिक सबक लेंगे? वे कई महीनों तक लोगों से काम कराते हैं और सेलरी दिए बिना निकाल देते हैं. एक ड्राइवर ने जिस तरह से बदला लिया, उससे समझा जा रहा है कि उसने बाकियों को भी रास्ता दिखा दिया है. नोएडा दिल्ली जैसे महंगे इलाके में कोई कर्मचारी बिना सेलरी कैसे अपने परिवार को जिंदा रख सकता है. एक ब्वायलिंग प्वाइंट आता है जिसके बाद खुद को कीड़े मकोड़े की तरह जिंदा रखने की जगह आर-पार करने का फैसला लेते हुए मरने मारने पर उतारू हो जाता है.[bhadas4media.com से साभार लेखक भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं ]  

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Dakhal News 4 April 2017


अनुराग उपाध्याय की कविता

  * पेशे से पत्रकार ,लेखक- कवि अनुराग उपाध्याय समाज के हर विषय पर अपनी कलम चलाते हैं।  साफ़ साफ़ और बिना लाग लपेट के सच बयान कर देना उनके लेखन की सबसे बड़ी खूबी है। संपादक      //दंगा // अनुराग उपाध्याय    उस भीड़ में  तुम ही नहीं  हम भी थे ...  कुचले गए  सपने पाँव से  वो तुम्हारे नहीं  हमारे भी थे ...  टपकता रहा  शरीर से वह  लाल-लाल सा लहू  तुम्हारा नहीं  हमारा ही था ...  बदहवासी का आलम  चीखों का सिसकना  लाशों का सड़ना  जिस सहारे बैठे थे तुम  वो लहूलुहान जिस्म  हमारा ही था ...  ------------------------------------

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Dakhal News 2 April 2017


patrkar madhyprdesh

राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को अधिमान्यता देने के लिये राज्य स्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है। समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। समिति में आयुक्त जनसंपर्क या उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। समिति में श्री आनंद पांडे नवदुनिया इंदौर, श्री मनीष दीक्षित दैनिक भास्कर भोपाल, श्री मृगेन्द्र सिंह दैनिक जागरण भोपाल, श्री राजेन्द्र शर्मा टाइम्स ऑफ इंडिया भोपाल, श्री मनोज शर्मा आईबीएन 7 भोपाल, श्री प्रकाश तिवारी न्यूज आर्बजर भोपाल, श्री शरद द्विवेदी बंसल न्यूज भोपाल, श्री अक्षत शर्मा स्वेदश भोपाल, श्री नवीन पुरोहित आईएनडी 24 भोपाल, श्री गिरजा शंकर स्वतंत्र पत्रकार भोपाल, श्री राजेश सिरोठिया अग्निबाण भोपाल, श्री उमेश निगम एमपी न्यूज टुडे डॉट कॉम, श्री नितेन्द्र शर्मा फ्री प्रेस भोपाल, श्री प्रवीण दुबे ईटीवी भोपाल, श्री प्रशांत जैन यूएनआई भोपाल, श्री सोमित्र जोशी तरूण भारत नागपुर, भोपाल, श्रीमती दीप्ति चौरसिया इंडिया न्यूज भोपाल, श्री रमेश राजपूत दैनिक भास्कर ग्वालियर, श्री अरविन्द तिवारी अध्यक्ष प्रेस क्लब इंदौर, श्री विशाल हाडा अध्यक्ष, प्रेस क्लब उज्जैन, श्री सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी दैनिक यश भारत भोपाल, श्री रमाकांत द्विवेदी दैनिक भास्कर रीवा, श्री योगेश सोनी दैनिक भास्कर जबलपुर और श्री सुरेश शर्मा आचरण ग्वालियर को सदस्य बनाया गया है। राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को जिला एवं तहसील-स्तरीय अधिमान्यता देने के लिये संभाग-स्तरीय अधिमान्यता समिति का गठन किया गया है। समिति दो साल के लिये प्रभावशील रहेगी। भोपाल संभाग श्री अनिल गुप्ता दैनिक भास्कर भोपाल, श्री कन्हैया लाल लोधी राज एक्सप्रेस भोपाल, श्री सीताराम ठाकुर पीपुल्स समाचार भोपाल, श्री अरूण त्रिवेदी दैनिक भास्कर विदिशा, श्री दिनेश निगम त्यागी हरिभूमि भोपाल, श्री कमल खस दैनिक जागरण राजगढ़, श्री रघुवीर तिवारी ब्यूरो चीफ स्वदेश ग्वालियर और श्री महेन्द्र सिंह पीटीआई सीहोर। ग्वालियर संभाग श्री उमेश भारद्वाज स्वदेश शिवपुरी, श्री गणेश सांवला दैनिक भास्कर दतिया, श्री लाजपत राय अग्रवाल दैनिक भास्कर भिण्ड, श्री रजनीश दुबे दैनिक भास्कर मुरैना, श्री सत्यप्रकाश शर्मा फ्री प्रेस ग्वालियर, श्री हरीश चंद्रा नव दुनिया ग्वालियर, श्री राजकुमार दुबे दैनिक जागरण मुरैना और श्री प्रवीण मिश्रा पत्रिका गुना। उज्जैन संभाग श्री राजेन्द्र पुरोहित दैनिक नई दुनिया उज्जैन, श्री अर्जुन सिंह चंदेल दैनिक अग्निपथ उज्जैन, श्री तरूण मेहता दैनिक अग्निबाण देवास, श्री शौकीन जैन दैनिक नवभारत नीमच, श्री दिलीप पाटनी पीटीआई रतलाम, श्री महेश शर्मा यूनीवार्ता आगर, श्री बृजेश परमार टाइम्स ऑफ इंडिया उज्जैन और श्री धनश्याम बटवाल स्वतंत्र पत्रकार मंदसौर। इंदौर संभाग श्री राजेश राठौर दैनिक प्रभात किरण इंदौर, श्री राजेश ज्वेल दैनिक अग्निबाण इंदौर, श्री कपीश दुबे नई दुनिया इंदौर, श्री ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी धार, श्री राजेश शर्मा चौथा संसार धार, श्री हरिनारायण शर्मा दैनिक भास्कर इंदौर, श्री दिलीप वर्मा वार्ता झाबुआ और श्री हर्ष भान तिवारी निमाड़ दर्शन खण्डवा। रीवा संभाग श्री अजय सिंह दैनिक नव स्वदेश रीवा, श्री संजय कुमार पयासी दैनिक नवभारत सतना, श्री राम अवतार गुप्ता यूएनआई शहडोल, श्री राजेश शुक्ला दैनिक स्वतंत्र मत अनूपपुर, श्री ब्रजेश पाठक दैनिक स्टार समाचार सीधी, श्री गोपाल अवस्थी दैनिक भास्कर सिंगरौली, श्री देवेन्द्र सिंह दैनिक जागरण रीवा और श्री संतोष गुप्ता दैनिक जन-दुनिया उमरिया। जबलपुर संभाग श्री अंशुमान भार्गव दैनिक हितवाद जबलपुर, श्री जहीर अंसारी ईएमएस जबलपुर, श्री संजय सिंह जनपक्ष सिवनी, श्री आशीष शुक्ला दैनिक नई दुनिया डिण्डोरी, श्री धर्मेन्द्र दैनिक लोकमत समाचार छिन्दवाड़ा, श्री आदित्य पंडित दैनिक यशभारत बालाघाट, श्री कुशलेन्द्र श्रीवास्तव नरसिंहपुर और श्री संजय जैन कटनी। सागर संभाग श्री सुनील गौतम दैनिक भास्कर दमोह, श्री बी.एन. जोशी दैनिक आचरण पन्ना, श्री श्याम अग्रवाल दैनिक शुभ भारत छतरपुर, श्री जितेन्द्र सोनकिया दैनिक भास्कर सतना, टीकमगढ़, श्री रामशंकर तिवारी दैनिक सागर दिनकर सागर, श्री राघवेन्द्र दुबे दैनिक जागरण सागर, श्री अमित कृष्ण श्रीवास्तव दैनिक नई दुनिया सागर, श्री प्रमोद चौबे दैनिक नवदुनिया सागर। होशंगाबाद संभाग श्री पंकज पटेरिया स्वतंत्र पत्रकार, श्री प्रकाश मंडलोई सा. पिपरिया प्रकाश होशंगाबाद, श्री विनोद सोमवंशी दैनिक भास्कर, श्री सौरभ तिवारी पीटीआई, श्री नवनीत कोहली दैनिक पायनियर, श्री लोमेश गौर दैनिक नई दुनिया हरदा, श्री प्रकाश भारद्वाज दैनिक देशबंधु होशंगाबाद और श्री विनय वर्मा दैनिक नवदुनिया बैतूल को सदस्य बनाया गया है। पत्रकार संचार कल्याण समिति गठित  राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को आर्थिक सहायता देने के लिये मध्यप्रदेश पत्रकार संचार कल्याण समिति का गठन किया गया है। समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। समिति में आयुक्त जनसंपर्क या उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। श्री विजय मनोहर तिवारी दैनिक भास्कर भोपाल, श्री प्रकाश भटनागर एलएन स्टार भोपाल, श्री सुनील शुक्ला नवदुनिया भोपाल, श्री रंजन श्रीवास्तव हिन्दुस्तान टाइम्स भोपाल, श्री आशुतोष गुप्ता आईएनडी 24 भोपाल, श्री वीरेन्द्र शर्मा सहारा समय भोपाल, श्री विनोद तिवारी बी.टी.वी. भोपाल, श्री बृजेश राजपूत एबीपी न्यूज भोपाल, श्री सिंकदर अहमद सांध्य प्रकाश भोपाल, श्री सुनील शर्मा प्रदेश टुडे भोपाल, श्री शिव अनुराग पटेरिया लोकमत समाचार भोपाल, श्री अजय त्रिपाठी आईबीसी 24 भोपाल, डॉ. नवीन आनंद जोशी स्वदेश इंदौर, श्री सुरेश शर्मा शिखर वाणी भोपाल, श्री मनीष श्रीवास्तव पीटीआई भोपाल, श्री राकेश अग्निहोत्री नया इंडिया भोपाल, श्री विजय दास राष्ट्रीय हिन्दी मेल भोपाल, श्री हरीश दिवेकर डी. बी. पोस्ट भोपाल, श्री अवधेश गुप्ता संपादक नव स्वदेश रीवा, श्री श्याम अवस्थी सा. स्पूतनिक इंदौर, श्री सुदेश तिवारी आचरण सागर, श्री विनय अग्रवाल नवभारत ग्वालियर, श्री अनूप शाह नई दुनिया जबलपुर और श्री राजेश माली दैनिक भास्कर उज्जैन को समिति का सदस्य बनाया गया है।  

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Dakhal News 1 April 2017


चुनावी भविष्यवाणी पर भी रोक

चुनाव में नेताओं और पार्टियों की जीत की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषियों से चुनाव आयोग नाराज है। एक्जिट पोल के प्रसारण पर प्रतिबंध से बचने के लिए मीडिया में [प्रकाशित /प्रसारित ] दिखाए जाने वाले ज्योतिषियों और टैरो कार्ड रीडरों की चुनावी भविष्यवाणी पर सख्त ऐतराज जताया है। आयोग ने अब इन ज्योतिषियों की चुनावी भविष्यवाणी पर भी रोक लगा दी है।  दिल्ली में चुनाव आयोग ने गुरुवार को इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया दोनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य के चुनावों में प्रतिबंधित काल में ज्योतिषियों के माध्यम से भी ऐसी खबरों का प्रसारण और प्रकाशन न किया जाए। ताकि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न हो सकें। मीडिया संगठनों को भेजी गई एडवाइजरी में कहा गया है कि जनप्रतिनिधि कानून की धारा 126 ए के तहत किसी भी व्यक्ति कोई एक्जिट पोल नहीं कराना चाहिए। साथ ही इसका प्रकाशन या किसी भी तरीके से प्रिंट या इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिए उसका प्रचार-प्रसार नहीं करना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित एक निश्चित अवधि में किसी भी एक्जिट पोल का प्रसारण नहीं होना चाहिए।  

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Dakhal News 31 March 2017


trp 12 week इंडिया टीवी चौथे नंबर पर पहुंचा

  12 वें सप्ताह के टेलीविजन रेटिंग पॉइंट में रजत शर्मा का इंडिया टीवी लुढ़क कर चौथे नंबर पर आ गया है। लगता है दर्शकों को इंडिया टीवी  पर बीजेपी का गुणगान पसंद नहीं आया। आजतक पहले ,एबीपी दूसरे और ज़ी न्यूज़ तीसरे नंबर पर रहे। वहीँ एमपी -छत्तीसगढ़ में रीजनल ज़ी नंबर वन बना हुआ है लेकिन ibc 24 और etv तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।     Mp/cg रीजनल टॉप फाइव न्यूज़ चैनल  Trp week-12 ज़ी न्यूज............  45.1 आईबीसी............ 24.7 ईटीवी.........         20.7 सहारा.........          4.6 बंसल.......             2.9 नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 12 Aaj Tak 17.2 up 0.9  ABP News 15.4 up 0.4  Zee News 13.6 up 0.7  India TV 13.1 up 0.6  India News 9.4 dn 0.1  News Nation 8.7 up 0.2  News18 India 8.0 dn 1.4  News 24 7.3 dn 2.0  Tez 3.1 up 0.6  NDTV India 2.2 dn 0.1  DD News 2.0 up 0.1   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 17.1 up 0.9  ABP News 15.0 up 0.2  Zee News 14.6 up 0.9  India TV 13.9 up 0.9  News18 India 8.5 dn 1.5  News Nation 8.4 dn 0.5  India News 8.1 up 0.3  News 24 6.4 dn 1.5  Tez 3.1 up 0.5  NDTV India 2.8 same   DD News 1.9 dn 0.1

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Dakhal News 30 March 2017


मीडियाकर्मी से बदसलूकी

मध्यप्रदेश में पत्रकारों पर पुलिसिया जुल्म के पिछले दिनों 15 मामले सामने आये। कल एक ट्रेनी आईपीएस ने फिर पत्रकारों से बदसलूकी की। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई तो उन्होंने कहा वो ऐसे अफसरों पर नकेल कसेंगे।   भोपाल में नव दुनिया अखबार के प्रेस फोटोग्राफर निर्मल व्यास  का 70 हज़ार का कैमरा प्रशिक्षु आईपीएस धर्मराज मीना ने फेका ज़मीन पर और  कलेक्टर से शिकायत कर  निर्मल व्यास को बंद करने की  दी धमकी । अयोध्या नगर थाना इलाके में दिनदहाड़े महिला को बंधक बनाकर लूट के मामले में इस नए नवेले अफसर ने  मीडिया पर निकाला गुस्सा। लूट की घटना को दरकिनार करते हुए इस अफसर ने पूरे मामले को किया दबाने का प्रयास किया और कहा मेरा थाना क्षेत्र  है यहाँ नही कर सकते पीड़िता से बात। इनके बाद जब पीड़िता मीडिया को अपना पक्ष  बताने लगी तो लूट की घटना न होने के लिए पीड़िता को भी धमकाया ,मीडियाकर्मियों के साथ की अभद्रता। कैमरामैनों के कैमरा छीनकर तोड़े । मीणा को प्रशिक्षु के तौर पर एक दिन पहले ही 3 माह के लिए बनाया गया है थाना प्रभारी। आयोध्या नगर थाने में कवरेज के दौरन फोटो जर्नलिस्ट वेल फेयर समिति के संयोजक ,नव दुनिया के सीनियर फोटो जर्नलिस्ट  निर्मल व्यास का कैमरा  छीनने के कारण कैमरा बुरी तरहा से छतिग्रस्त हो  चुका है जिसके चलते नवदुनिया के फोटोग्राफर निर्मल व्यास  के द्वारा अयोध्या थाने में धर्मराज मीणा के खिलाफ आवेदन दिया गया। 

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Dakhal News 29 March 2017


सागर पत्रकारिता विभाग

पहला छात्र मिलन समारोह दिल्ली के एमपी भवन में आयोजित हुआ।  मध्यप्रदेश के सागर के डॉ हरिसिंह गौर विवि के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विद्यार्थियों का पहला मिलन समारोह दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में आयोजित हुआ। इसमे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो कृष्णा आत्रे, प्रो श्याम कश्यप सहित दिल्ली में कार्यरत पत्रकार और अधिकारी शामिल हुए।  निर्णय लिया गया कि पहले भोपाल और उसके बाद सागर विवि में 25 और 26 नवंबर को एल्युमिनी कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।  दिल्ली में आयोजित छात्र मिलान आयोजन को संबोधित करते हुए प्रो कृष्णा आत्रे ने कहा कि मैं दुनिया भर में घूमता रहा लेकिन सागर ले जैसी प्रतिभा और क्षमता कहीं नहीं मिली। प्रो श्याम कश्यप वा मुकेश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए। इस कार्यक्रम में प्रो कृष्णा आत्रे, प्रो श्याम कश्यप, आलोक मोहन नायक, मुकेश कुमार, विनय मिश्रा, सूर्यकांत पाठक, मनोज वर्गीस, अखलेश श्रीवास्तव रामनारायण श्रीवास्तव,राज पाठक, अथोवा मिथी, दीपनारायण,ऋतु त्रिपाठी शामिल हुए।   

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Dakhal News 28 March 2017


 डा. एम एल सोनी बने साधना न्यूज के सीएमडी

भोपाल के जानेमाने शिक्षाविद एवं सामजिक कार्यकर्ता डा. एम एल सोनी साधना न्यूज मप्र छग के सीएमडी  (चेयरमेन व प्रबंध संचालक) नियुक्त किए गए हैं। यह जानकारी चेनल हेड रवीन्द्र जैन ने दी है। जैन ने बताया कि डा. सोनी लगभग 32 वर्ष तक उच्च शिक्षा विभाग में रहे। उन्होंने तत्कालीन सहकारिता मंत्री गोविंदसिंह व जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा के ओएसडी के रूप में सफलतापूर्वक काम किया। वे भोपाल के एमएलबी कन्या महाविद्यालय में वाणिज्य विभाग के हेड आफ द डिपार्टमेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। साधना न्यूज मप्र व छग को संचालित करने वाली एक्यूट डेली मीडिया प्रा लि में उन्हें सीएमडी बनाया गया है। डा.सोनी के आने के बाद साधना न्यूज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। डा.सोनी सरल, सहज व नेतृत्व क्षमता के धनी हैं, उनके निर्देशन में साधना न्यूज अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफल होगा। शनिवार को साधना न्यूज के समस्त स्टाफ  ने डा.सोनी के सीएमडी बनने पर उन्हें बधाईयां दी हैं।

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Dakhal News 27 March 2017


शरद यादव बोले यह भाषण कोई नहीं छापेगा

पत्रकारिता छोड़कर सब धंधे कर रहे मीडिया मालिक जदयू सांसद शरद यादव ने यह भाषण 22 मार्च, 2017 को राज्यसभा में दिया. अपनी बात रखते हुए उन्होंने देश में पत्रकारिता की दशा और दिशा पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. पढ़ें पूरा भाषण… हिंदुस्तान का जो लोकतंत्र है, जो पार्लियामेंट है, उसमें दोनों सदन चुने हुए सदन हैं. इन दोनों सदनों के ऊपर हिंदुस्तान के पूरे लोगों की हिफाजत का जिम्मा है. हम सब लोगों की बात का हिंदुस्तान के लोगों के पास पहुंचने का रास्ता एक ही है और वह मीडिया है. आज हालत ऐसी है, एक नया मीडिया, विजुअल मीडिया आया है, सोशल मीडिया आया है. मैंने एक-दो बात सच्ची कही, उपसभापति जी, मैं आपसे कह नहीं सकता कि सोशल मीडिया किस तरह से बढ़ा है, उसमें कई तरह की अफवाह चल रही है, लेकिन किस तरह से गाली-गलौज चल रही है, उसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है. मजीठिया कमीशन कब से मीडिया के लिए बना हुआ है. आज ये सारा मीडिया- हम लोकतंत्र में चुनाव सुधार की बात कर रहे हैं कि चुनाव सुधार कैसे हो? इस चुनाव सुधार की सबसे बड़ी बात है- हमारी लोकशाही और लोकतंत्र कहां जा रहा है, इसको वहां पहुंचाने वाले कौन लोग हैं? वह तो मीडिया ही है, जिसको चौथा खंभा कहते हैं, वही है ना? उसकी क्या हालत है? पत्रकार के लिए मजीठिया कमीशन बना हुआ है. याद रखना मीडिया और पत्रकारिता का मतलब है पत्रकार और वह उसकी आत्मा है. यह लोकशाही या लोकतंत्र जो खतरे में हैं, उसका एक कारण यह है कि हमने पत्रकार को ठेके में नहीं डाल दिया, बल्कि हायर एंड फायर एक नई चीज़ यूरोप से आई है यानी सबसे ज्यादा हायर एंड फायर का शिकार यदि कोई है, तो वह पत्रकार है. मैं बड़े-बड़े पत्रकार के साथ रहा हूं, मैं बड़े-बड़े लोगों के साथ रहा हूं. हमने पहले भी मीडिया देखा है, आज का मीडिया भी देखा है. उसकी सबसे बड़ी आत्मा कौन है? सच्ची खबर आए कहां से? राम गोपाल जी, जब पिछला चुनाव विधानसभा का हो रहा था, तो मैंने खुद जाकर चुनाव आयोग को कहा था कि यह पेड न्यूज है. आज जो पत्रकार है, वे बहुत बेचैन और परेशान हैं, पत्रकार के पास ईमान भी है, लेकिन वह लिख नहीं सकता. मालिक के सामने उसे कह दिया जाता है कि इस लाइन पर लिखो, इस तरह से लिखो. उसका अपना परिवार है, वह कहां जाए? वह सच्चाई के लिए कुछ लिखना चाहता है. हमारे लोकतंत्र में बाजार आया, खूब आए लेकिन यह जो मीडिया है, इसको हमने किनके हाथों में सौंप दिया है? यह किन-किन लोगों के पास चला गया है? एक पूंजीपति है इस देश का, उसने 40 से 60 फीसदी मीडिया खरीद लिया है. इस देश का क्या होगा? अब हिंदुस्तान टाइम्स भी बिकने वाला है. कल बिक गया? कैसे चलेगा यह देश? यह चुनाव सुधार, यह बहस, ये सारी चीजें कहां आएंगी? कोई यहां पर बोलने के लिए तैयार नहीं है? निश्चित तौर पर मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जो मीडिया है, लोकशाही में, लोकतंत्र में, यह आपके हाथ में है, इस पार्लियामेंट के हाथ में है. कोई रास्ता निकलेगा या नहीं निकलेगा? ये जो पत्रकार है, ये चौथा खंभा है, उसके मालिक नहीं हैं और हिंदुस्तान में जब से बाजार आया है, तब से तो लोगों की पूंजी इतने बड़े पैमाने पर बढ़ी है. मै आज बोल रहा हूं, तो यह मीडिया मेरे खिलाफ तंज कसेगा, वह बुरा लिखेगा. लेकिन मेरे जैसा आदमी, जब चार-साढ़े चार साल जेल में बंद रहकर आजाद भारत में आया, तो अगर अब मैं रुक जाऊंगा तो मैं समझता हूं कि मैं हिंदुस्तान की जनता के साथ विश्वासघात कर के जाऊंगा. सर, आज सबसे ज्यादा ठेके पर लोग रखे जा रहे हैं और पूरे हिंदुस्तान में लोगों के लिए कोई नौकरी या रोजगार नहीं पैदा हो रहा है. सब जगह पूंजीपति और सारे प्राइवेट सेक्टर के लोग हैं. अखबार में सबसे ज्यादा लोगों को ठेके पर रखा जाता है. इस तरह मजीठिया कमीशन कौन लागू करेगा? इनके कर्मचारियों को कोई यूनियन नहीं बनाने देता है. आप किसी पत्रकार से सच्ची बात कहो, तो वह दहशत में आ जाएगा क्योेंकि उसका मालिक दूसरे दिन उसे निकाल कर बाहर करेगा. तो यह मीडिया कैसे सुधरेगा? अगर वह नहीं सुधरेगा तो चुनाव सुधार की यह बहस यहीं मर जाएगी. ये भी उसे छांट-छांटकर देंगे. उसका मालिक बोलेगा कि किस का देना है, किस का नहीं देना है. हम रोज यहां बोलते हैं और ये रोज बोलता है कि हमारे जैसे आदमी को मत छापो क्योंकि यह सच बोल रहा है और सच ही इस बैलेट पेपर का ईमान है. इस ईमान को चारों तरफ से पूंजी ने घेर लिया है. बड़े पैसे वालों ने घेर लिया है और अब सब से बड़ी मुश्किल यह है कि बहस करें तो कैसे करें? सर यह देश बहुत बड़ा है, एक कांटिनेंट है, लेकिन हमारी बहस और हमारी बात कहीं जाने को तैयार नहीं है, कहीं पहुंचने को तैयार नहीं है. ये अखबार के पूंजीपति मालिक कई धंधे कर रहे हैं. इन्होंने बड़ी-बड़ी जमीनें ले ली हैं और कई तरह के धंधे कर रहे हैं. वे यहां भी घुस आते हैं. इनको सब लोग टिकट दे देते हैं. मैं आपसे कह रहा हूं इस तरह यह लोकतंत्र कभी नहीं बचेगा. सर, इसके लिए एक कानून बनना चाहिए कि अगर कोई मीडिया हाउस चलाता है या अखबार चलाता है , तो वह कोई दूसरा धंधा नहीं कर सकता है. सर, इस देश में क्रास होल्डिंग बंद होनी चाहिए. यह कानून पास करो, फिर देखेंगे कि कैसे हिंदुस्तान नहीं सुधरता? हमारे जैसे कई लोग हिंदुस्तान में हैं जिन्होंने सच को बहुत बगावत के साथ बोला है. पहले भी हिंदुस्तान को बनाने में ऐसे लोगों ने काम किया है. मैं नहीं मानता कि आज ऐसे लोग नहीं है. ऐसे बहुत लोग हैं जो सच को जमीन पर उतारना चाहते हैं लेकिन कैसे उतारें? यानी इस चौथे खंबे पर आपातकाल लग गया है. हिंदुस्तान में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है. यह जो पत्रकार ऊपर बैठा हुआ है, वह कुछ नहीं लिख सकता है क्योंकि उसके हाथ में कुछ नहीं है. यही जब सूबे में जाता है तो मीडिया वहां की सरकार की मुट्ठी में चला जाता है. जो पत्रकार सच लिखते हैं उसे निकालकर बाहर कर दिया जाता है. फिर यह देश कैसे बनेगा? आप कैसे सुधार कर लोगे? मैं आप से ही नहीं सब से पूछना चाहता हूं कि सुधार कैसे होगा? सर, इस देश में मीडिया के बारे में बहस क्यों नहीं होती? इस देश में ऐसा कानून क्यों नहीं बनता कि कोई भी व्यापार या किसी तरह की क्रास होल्डिंग नहीं कर सकता? तब हिंदुस्तान बनेगा. सर, हिंदुस्तान जिस दिन आजाद हुआ था, तो इसी तरह था. गणेश शंकर विद्यार्थी थे, जिन्होंने हिंदुस्तान के लिए जान दे दी थी. मैं इस पार्लियामेंट में रविशंकर प्रसाद जी आप से निवेदन करना चाहता हूं कि आज आप वहां हैं, हम यहां हैं, कल चले जाएंगे, लेकिन आने वाले हिंदुस्तान के गरीब, मजदूर, किसान से लोकतंत्र दूर हट गया है. आप कितने ही तरीके से स्टैंड-अप करिए, आप कितनी भी तरह की योजनाएं, लेकिन वह दूर हटता जाएगा. हम सभी ने बहुत ताकत लगाई है, लेकिन वह गरीब तक नहीं पहुंच पाता है. सर, जब इनके यहां चुनाव हो रहा था, तो मैं तीन अखबारों के पास गया था. उन अखबार में मेरा कहा नहीं छप रहा था. मै महीने भर से कंप्लेंट कर रहा था, लेकिन उनमें मेरे बारे में एक लाइन नहीं आई. वे आज भी नहीं छापेंगे क्योंकि वहां मालिक बैठा हुआ है. वे सारे पत्रकार मेरी बात को हृदय से जब्त करेंगे, लेकिन उसका मालिक उसकी तबाही करेगा.  

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Dakhal News 25 March 2017