मीडिया


जयपुर से आईबीए न्यूज़ चैनल

  जयपुर से आईबीए न्यूज़ चैनल  लांच होने जा रहा हैं | इस चैनल को ढेर सारे स्टॉफ की जरूरत है |  आईबीए को आउटपुट और इनपुट असाइनमेंट में ट्रेनी, असिस्टेंट प्रोड्यूसर, एसोसिएट प्रोड्यूसर, प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर (जयपुर के लिए) 38 पद ,आई.टी. (जयपुर के लिए) 6 पद, ग्राफ़िक्स एडिटर (जयपुर के लिए) 6 पद,पैनल, एमसीआर, पीसीआर में काम करने वाले स्टॉफ (जयपुर के लिए), वीडियो एडिटर (जयपुर के लिए) 8 पद,एंकर,दिल्ली में रिपोर्टर, कैमरामैन |  जो लोग इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वो ibanewschannel@gmail.com पर CV  भेज सकते हैं।  

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Dakhal News 14 December 2017


वीरम टीवी

सैटेलाइट हिंदी न्यूज चैनल 'वीरम टीवी न्यूज 24×7' को नोएडा ऑफिस के लिए विभिन्न पदों पर अनुभवी युवक-युवतियों की शीघ्र आवयश्कता है |  चैनल में  मैनेजर 1 पोस्ट,संपादक न्यूज़ 2 पोस्ट, न्यूज़ एडिटर 6 पद , प्रोड्यूसर  6 पद ,वीडियो एडिटर 6 पद ,ग्राफिक्स एडिटर 6 पद , न्यूज़ एंकर  4 पद कम्प्यूटर ऑपरेटर 20 पद,कैमरामेन 5 पोस्ट,रिपोर्टर 5 पोस्ट,मार्केटिंग हेड 2 पोस्ट,आईटी 4 पोस्ट |  इंटर्नशिप से जुड़ने के लिए भी युवक युवतियां संपर्क कर सकते हैं... पूर्ण विवरण फ़ोटो सहित इस ईमेल पर बायोडाटा भेजें... सब्जेक्ट लाइन में पद का नाम जरूर लिखें... ईमेल पता Viramtvnews@gmail.com है |   

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Dakhal News 14 December 2017


नईदुनिया

  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 'नईदुनिया संसदीय सम्मान' 2017 समारोह में प्रदेश के 10 विधायकों (महिला और पुरुष) को सम्मानित किया गया। नईदुनिया द्वारा स्थापित यह पुरस्कार उन विधायकों को दिया जाता है जिनका विधानसभा में प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहता है। जिन विधायकों को सम्मानित किया गया है, उनमें शामिल हैं - डॉ. गोविंद सिंह (कांग्रेस), ऊषा चौधरी (बसपा), यशपाल सिंह सिसोदिया (भाजपा), शीला त्यागी (बसपा), मुरलीधर पाटीदार (भाजपा), ममता मीना (भाजपा), सुखेंद्र सिंह (कांग्रेस) और हिना कावरे (कांग्रेस)। वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया को समारोह में उत्कृष्‍ट मंत्री का सम्मान मिला। संसदीय परंपराओं के बेहतर निर्वहन और सवालों के संतोषजनक उत्तर श्रेणी में उनका चयन किया गया। विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे। वहीं अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने की। विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह कार्यक्रम के विशेष अतिथि रहे। आरंभ में नईदुनिया परिवार के सदस्यों ने अतिथियों का स्‍वागत किया। एक बड़ी स्‍क्रीन पर नईदुनिया, नवदुनिया के सामाजिक सरोकारों को प्रदर्शित किया गया। अपने संबोधन में दैनिक जागरण समूह के सीईओ व प्रधान संपादक संजय गुप्त ने कहा कि वे चाहेंगे कि अन्‍य प्रदेशों और संसद में भी उनके साथी यह कार्य आरंभ करें जो प्रेरणा बने। उन्होंने कहा कि पत्रकार होने के नाते हमने संसदीय सम्मान का बीड़ा उठाया है। अतिथियों के स्वागत की रस्म के बाद चुन गए सर्वश्रेष्‍ठ विधायकों को सम्‍मानित किया गया। मप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने नईदुनिया/नवदुनिया परिवार को आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कहते थे, हमें सपने देखना चाहिए। आप बड़े सपने देखेंगे तो ही आगे बढ़ेंगे। डॉ. कलाम को हमने बुलाया था। उनका सम्मान किया था। हम सब उनसे बड़े प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा कि सदन में उपस्थिति रहती है तो इसका सार्थक नतीजा निकलता है। जो चार महिलाएं श्रेष्ठ चुनी गई हैं, वे किसी भी विषय पर बोलने में सक्षम हैं। श्री सिंह ने कहा कि गोविंद सिंह जी काफी अनुभवी हैं। हम उन्हें ऑलराउंडर करते हैं। जहां कमी पड़े, वहां हम बल्लेबाजी करने भेज देते हैं। कई बार उनके तेवर बहुत तीखे होते हैं। श्रेष्ठ चुने गए विधायकों को भी उन्‍होंने बधाई देते हुए कहा कि जयंत मलैया बड़े ही सहज व्यक्ति हैं। लांजी विधायक हिना कावरे जब मंच पर आई तो सीएम ने कहा बहुत-बहुत बधाई बेटी। हिना के प्रभावी भाषण देने की काबिलियत की भी मंच से तारीफ की गई। हमारी तीन बहनों और एक बेटी को सम्मान मिला है। ये भी बधाई के पात्र हैं। उन्‍होंने कहा कि गोविंद सिंह जी सिर्फ सच बोलते हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जयंत भाई के हाथ में खजाना सुरक्षित है। नईदुनिया में स्वस्थ परंपरा सीएम ने कहा कि नईदुनिया में स्वस्थ परंपरा है। मुमकिन है आपने दिखाया। दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं। जनप्रतिनिधियों के सामने अपेक्षाओं का अथाह सागर होता है। बहुत उम्मीदें हैं। ऐसे में आपने सम्मानित करके मनोबल बढ़ाया है। इसके लिए नईदुनिया परिवार का धन्यवाद। उन्होंने कहा कि यह हम सब का सम्मान है। मैं उनका अभिनंदन करता हूं। अच्छे काम का सम्मान होने ही चाहिए। इन्होंने एक बड़ी लकीर खींची है। अपराधों के खिलाफ सामाजिक आंदोलन चले और इसमें नईदुनिया जैसे मीडिया संस्थान अहम भूमिका निभा सकते हैं। आभार प्रदर्शन नईदुनिया के वॉइस प्रेसीडेंट संजय शुक्ला ने किया। गुढ़ के विधायक सुंदरलाल तिवारी कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। विधायकों का चयन विधानसभा सचिवालय द्वारा तैयार रिकॉर्ड के आधार पर ज्यूरी ने किया है। ज्यूरी ने उन विधायकों को चुना है जिन्होंने प्रश्न, ध्यानाकर्षण सूचना, विधेयक चर्चा और उपस्थिति में सर्वाधिक भागीदारी की है। संसदीय सम्मान समारोह का यह निरंतर दूसरा वर्ष है। ज्यूरी ने तय किए नाम विधानसभा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विधायकों का चयन करने के लिए नईदुनिया ने वरिष्ठ नेताओं और संसदीय विशेषज्ञों की ज्यूरी बनाई थी।इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, पूर्व विधायक शैलेंद्र प्रधान और विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव ईसराणी शामिल थे।  

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Dakhal News 5 December 2017


CM शिवराज सिंह

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'नईदुनिया संसदीय सम्मान' 2017 समारोह में प्रदेश के श्रेष्ठ 10 विधायकों को सम्मानित किया गया। विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि, राजनीति तोड़ती है, लेकिन नईदुनिया ने जोड़ दिया। उन्होंने सम्मानित विधायकों को बधाई देते हुए कहा, यह हम सब का सम्मान है। मैं अभिनंदन करता हूं। अच्छे काम का सम्मान होना ही चाहिए। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा मैं बधाई देना चाहता हूं सम्‍मानित मित्रों को।जयंत मलैया जी खजाने को संभालने की कोशिश करते हैं लेकिन हम भावांतर जैसी योजना ले आते हैं तो एक झटके में 4 हजार करोड़ खजाने से निकल जाते हैं। लेकिन मैं आश्‍वस्‍त रहता हूं कि जयंत भाई के हाथ में प्रदेश का खजाना सुरक्षित है।हमारे सारे साथी गण बड़ी कुशलता से अपने कार्य को अंजाम देते हैं। डाॅ गोविंद सिंह जी जो सच होता है वही बोलते हैं, बाकी लोग तो सीआर खराब होने के डर से बोलते नहीं हैं।भाई यशपाल जी जब जरूरत पड़ती है तो हमेशा याद आते हैं। हमारी बहनें भी सम्‍मानित हुईं हैं। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है | राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन संजय जी (जागरण समूह के प्रधान संपादक) आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आजकल हमारा मिलना-जुलना कम हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि राजनीति तोड़ती है और नईदुनिया ने आज सबको जोड़ दिया। डॉक्‍टर साहब थोड़ा शरमा रहे थे कि गले लगें या नहीं, लेकिन आखिर गले लग ही गए।आजकल प्रिंट मीडिया और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया अक्‍सर दिखाता रहता है कि माननीय ने ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया। माननीय शब्‍द एक व्‍यंग्‍य हो गया है।लेकिन यदि आप दिनचर्या देखें। सुबह से लेकर देर रात तक काम में व्‍यस्‍त रहते हैं।आज सुबह सात बजे टेलीफोन पर मैंने बात करना शुरू की। सुबह 10 बजे पहली मीटिंग की। उसके बाद 15-20 विधायक साथियों से चर्चा की। उसके बाद वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड की बैठक, नर्मदा संघ की बैठक। वहां से निपटे तो पुलिस स्‍पोर्टस के कार्यक्रम में पहुंचे। उसके बाद खिलाडि़यों को पुरस्‍कृत करके आए। वहां से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में कुछ को सस्‍पेंड कर आए। और यहां आकर अब पुरस्‍कार दे रहे हैं। अभी रात में मैं एक मीटिंग करूंगा जिसमें फूलों की स्थिति पर बात करना है कि कितने आ रहे हैं, जा रहे हैं। गोपालन का काम भी देखना है। ये मेरी कहानी नहीं है। हर विधायक की, सांसद की, निर्वाचित जनप्रतिनिधि की यही कहानी है। सुबह से लेकर देर रात तक वे व्‍यस्‍त रहते हैं। घनघोर परिश्रम करते हैं।  

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Dakhal News 5 December 2017


पद्मावती

  देशभर में पद्मावती को लेकर विरोध प्रदर्शनजारी हैं और वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर दखल से इन्कार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस खारिज कर दिया है। अदालत ने इसके साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा फिल्म को लेकर दिए बयानों पर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट में निर्माता की तरफ से कहा गया कि सेंसर बोर्ड के प्रमाणपत्र के बाद ही फिल्म रिलीज होगी। अदालत ने कहा कि बिना फिल्म देखे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आखिर कैसे इसे लेकर बयान दे सकते हैं। अदालत ने सभी जिम्मेदार लोगों से कहा कि वो फिल्म को लेकर बयानबाजी बंद करे क्योंकि इससे सेंसर बोर्ड के दिमाग में पक्षपात पैदा होगा। जब तक मामला सेंसर बोर्ड के पास लंबित हो तब तक ऐसे मामलों में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।  आपको बता दें कि वकील मनोहर लाल शर्मा ने फिल्म पद्मावती की रिलीज पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि करणी सेना और राजपूत समुदाय 'पद्मावती' पर बैन की मांग लगातार कर रहे हैं। कुछ सींस को लेकर उन्हें आपत्ति है। राजपूत समुदाय के प्रतिनिधियों को लगता है कि उन दृश्यों की वजह से रानी पद्मावती की तौहीन हो जाएगी। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भंसाली ने कुछ पत्रकारों को भी फिल्म दिखायी थी, जिसके बाद उन्होंने फिल्म के पक्ष में अपनी प्रतिक्रिया दी थी।  

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Dakhal News 28 November 2017


राकेश पाठक

  ग्वालियर के कवि और वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश पाठक को  प्रतिष्ठित "हेमंत स्मृति कविता सम्मान" देने  की घोषणा की गई है। हेमंत फाउंडेशन द्वारा स्थापित यह सम्मान उनके कविता संग्रह " बसंत के पहले दिन से पहले" (दख़ल प्रकाशन से प्रकाशित )के लिए दिया जा रहा है। पुरस्कार समिति के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार भारत भारद्वाज ने यह घोषणा की। राकेश जी खामोशी से लेखन करने वाले सशक्त हस्ताक्षर हैं जिनकी कविताओं में शब्द सीमित और भाव असीमित होते हैं। ग्वालियर (मप्र) निवासी डॉ पाठक वरिष्ठ पत्रकार हैं और 'नईदुनिया' , 'नवभारत,' 'नवप्रभात', 'प्रदेश टुडे 'जैसे अखबारों के संपादक और न्यूज़ पोर्टल 'डेटलाइन इंडिया' के प्रधान संपादक रहे हैं। उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं। हेमंत फाउंडेशन की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव व सचिव डॉ प्रमिला वर्मा ने बताया कि डॉ राकेश पाठक को यह सम्मान जनवरी 2018 में मुम्बई में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ पाठक से पहले  राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान बोधिसत्व, संजय कुंदन,वाज़दा खान,आलोक श्रीवास्तव,हरि मृदुल,लीना मल्होत्रा, एकांत श्रीवास्तव,हरे प्रकाश उपाध्याय, यतीन्द्र मिश्र, कृष्णमोहन झा, रीता दास राम आदि को मिल चुका है।

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Dakhal News 11 November 2017


आजतक पहुंचे रोहित सरदाना

 जी न्यूज से इस्तीफा दे चुके पत्रकार रोहित सरदाना आजतक चैनल से जुड़ गए हैं. वे आजतक पर भी शाम 5 बजे के स्लॉट देखेंगे. रोहित के लिए 'आजतक' पर शाम पांच बजे का नया शो शुरू किया जा रहा है, ''दंगल : बहस का राजनीतिक अखाड़ा'' नाम से.  रोहित सरदाना जी न्यूज में सीनियर एंकर के साथ-साथ आउटपुट एडिटर भी हुआ करते थे. वे करीब दस साल से जी ग्रुप के साथ थे. उनका जी न्यूज में ‘ताल ठोक के’ डिबेट शो काफी चर्चित था और टीआरपी में नंबर वन था जिसके कारण आजतक प्रबंधन को रोहित को अपने यहां ज्वाइन कराने को मजबूर होना पड़ा. रोहित ईटीवी, सहारा समय में भी काम कर चुके हैं. उधर, खबर है कि अम्बुजेश कुमार ने एबीपी न्यूज ज्वाइन किया है.

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Dakhal News 11 November 2017


जयराम शुक्ल

  जयराम शुक्ल सोशल मीडिया में जीएसटी के रोलबैक को लेकर मचे शोर की तस्दीक करने के लिए सोचा, कि चलो देखें टीवी चैनल्स में क्या चल रहा है। पिछले एक महीने से राम रहीम की वही एनीमेटेड रहस्यमयी गुफा देखते देखते उकता सा गया था सो कई दिनों से चैनल्स खोलने की हिम्मत ही नहीं हुई। बहरहाल टीवी खोलते ही  चैनलों में  फिर वही बकवास चल रहा था, एक में किंमजोंग, दूसरे में रामरहीम की हनीप्रीत..हनीप्रीत। रात दस बजे का प्राइम टाइम इन्हीं के नाम था। कुछेक अँग्रजी चैनल जरूर इकोनामिस्टों को बैठाकर जीएसटी पर बहस चला रहे थे। अँग्रेजी समझने में वैसे भी दिमाग में अतिरिक्त जोर देना पड़ता है ऊपर से भभकती हुई लपटों वाले टीवी स्क्रीन से सिर्फ चीख और चिल्लाहट सिवाए कुछ भी सुनाई नहीं देता।  हमारा मीडिया भेड़ियाधसान है। जिधर एक भेड़ चली उधर ही सब निकल पड़ी। अर्नब ने जबसे ..नेशन वान्ट टु नो...की चिल्लपों शुरू की तब से सभी चैनल देशवासियों की जिग्यासा के स्वयंभू ठेकेदार बने हुए हैं। चैनलों ने भी एक दूसरे की देखा देखी एक अजीब सा तिलस्म रच रखा है। पढे लिखे एंकर भी उसीमें उलझे हैं,कई प्रिंट मीडिया से गए वे भी। जब वे अखबारों में तब अच्छी खासी विवेकसम्मत बातें लिख लिया करते थे। वही लोग जब किमजोंग की सनक और हनीप्रीत की रंगीन दुनिया को चटखारे के साथ परोसते हैं तो निरा जोकर लगते हैं। किमजोंग से पहले बगदादी का बुखार चढा़ था।.. बच के कहां जाएगा बगदादी.. जैसी पंच लाइनों के साथ सभी चैनल एकजुट होकर पिले थे फिर भी वो बचा हुआ है। इन दिनों किमजोंग के आगे बगदादी भूला हुआ है। उत्तर कोरिया के इस तानाशाह को लेकर जो फुटेज दिखाए जाते हैं,सभी चैनलों में लगभग एक से। तो क्या किमजोंग इन्हें यह उपलब्ध कराया है या अपने चैनलिया वीरबहादुर जान जोखिम में डालकर प्योंगयांग से शूट करके लाए हैं ? उत्तर कोरिया क्या तबाही मचाना चाहता है उसके पूरी कहानी और फुटेज की पटकथा कहीं और लिखी जाती है। किमजोंग सनकी है ये हम खुद नहीं चूंकि हमें  बार बार यही बताया जा रहा है इसलिए मान बैठे हैं कि सनकी ही होगा। क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि उत्तर कोरिया व किमजोंग को लेकर लगभग वही सब दोहराया जा रहा है जो कभी ईराक और सद्दाम को लेकर, लीबिया और गद्दाफी के साथ किया गया था। दरअसल यह किसी देश के खिलाफ युद्ध पूर्व प्रपोगंडा होता है ताकि उसपर हमले के लिए विश्व जनमत तैयार किया जा सके। दुनिया की नब्बे फीसदी सूचनाओं पर एसोशियेटड प्रेस आफ अमेरिका(एपी), रायटर ब्रिटेनऔर एएफपी फ्रांस का कब्जा है। ये तीनों मिलकर किसी भी देश या व्यक्ति की छवि को पलभर में नरकिस्तान और राक्षस गढ सकते हैं। शेष दुनिया की सभी मीडिया एजेंसियों से इनका अनुबंध होता है। इसी नियंत्रण को तोड़ने के लिए अरब में ..अलजजीरा.. पैदा हुआ था लेकिन अब उसे भी बधिया बना दिया गया। ताकतवर देशों के इस हेट मीडिया मिशन से क्यूबा के फिदेल कास्त्रो और लीबिया के ह्यूगोसावेज इसलिए बचे रहे क्योंकि ये गद्दाफी और सद्दाम की भाँति आत्ममुग्ध व स्वेच्छाचारी नहीं थे और देश की जनता की नब्ज इनके हाथ थी और दुनिया भर में अपने शुभचिंतक बना रखे थे। याद करिए 1982 में नई दिल्ली में हुए गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सम्मेलन के अगले वर्ष यहीं तीसरी दुनिया के मीडिया का सम्मेलन हुआ था। इसे ..नामीडिया.. के नाम से जाना गया। इस सम्मेलन में ये बात किसी पंच लाइन की तरह उभरकर आई थी कि ...अमेरिका के एटमबम्ब से ज्यादा खतरनाक है एपी और रायटर। शायद यह किसी अखबार की  हेडलाइन ही थी। उस वक्त मैं पत्रकारिता का विद्यार्थी था सो इस वैश्विक मीडिया सम्मेलन की खबरों की क्लिपिंग सालों तक मेरे संदर्भ में रही है। सम्मेलन में दूसरी बड़़ी बात जो निकल कर आई थी वो ये थी कि सूचनाओं के अधिनायकवाद से कैसे मुक्त हुआ जाए? एक सहमति बनी थी कि तीसरी दुनिया की मीडिया एजेंसियों का परिसंघ बने जो गुटनिरपेक्ष देशों के हितों की रक्षा कर सके। दुर्भाग्य से 1984 में तीसरे विश्व की नेता इंदिरा जी इस दुनिया में रही नहीं। गुटनिर्पेक्ष आंदोलन बिखरने लगा, रही सही कसर 1989 में सोवियत विघटन ने पूरी कर दी। और तब से दुनिया एकध्रुवीय व्यवस्था के आधीन है, जिसका स्वयंभू  चौधरी अमेरिका है। अब अमेरिका जो चाहता है भारत जैसे देशों का मीडिया वही दिखाता है क्यों कि वैश्विक मामलों में हमारा मीडिया कंगाल है। वे हमारे मीडिया को एक प्रपोगंडा मशीन की भांँति उपयोग करते हैं, हो सकता है इसके लिये वे पैसा भी देते हों। इराक युद्ध कवर करने गए एक पत्रकार ने पोल खोली थी कि किस तरह विदेशी मीडिया को युद्ध क्षेत्र से सैकडों किलोमीटर दूर किसी शहर के आलीशान होटलों में ठहराया जाता था। शाम को एक सैन्य अधिकारी फुटेज और ब्रीफिंग थमा देता था। वही सब चैनल्स देश को दिखाते थे और अब भी वही कर रहे हैं। दरअसल अमेरिका का मुख्य धंधा हथियारों का है। सो यदि युद्ध नहीं हुए, युद्ध का भय नहीं बना तो उसका बाजार धड़ाम से गिरकर दीवालिया हो जाएगा। गौर करिए कि क्या ऐसा कोई भी दिन,महीना या हफ्ता गुजरा है जब दुनिया के किसी कोने में युद्ध न हो रहा हो। रही आतंकवादियों की बात तो पिछले दिनों यूएनओ में पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने यह कहकर आईना दिखा दिया कि कभी वो भी दिन थे जब ह्वाइट हाउस हाफिज सईद जैसे लोगों के लिए रेड कारपेट बिछाए रहता था। ये उस दौर की बात है जब अफगानिस्तान में सोवियत पालित सरकार थी और अमेरिका तालेबान और अलकायदा जैसे संगठनों को खड़ा करने की भूमिका में था। सो युद्ध के बाजार के लिए जरूरी है कि माहौल बना रहे, चाहे वह उत्तर कोरिया के किमजोंग के जरिए बने या आतंकवादी संगठनों के। जापान और दक्षिण कोरिया एशिया के ये दो सबसे बड़े सेठों में हैं,जब ये डरे रहेंगे तभी तक अमरीकी जंगीबाजार गुलजार रहेगा। इस फेर में गरीब भारत और पाकिस्तान भी फँसे हैं, जो शिक्षा और स्वास्थ के बजट मदों की कटौती करके रक्षा बजट बढाते जा रहे हैं। चैनलों के एंकर अब सेलिब्रिटी हैं जाहिर है मैं उनके मुकाबले जाहिल हूँ। वे इंडिया इंटरनेशनल, कांस्टीट्यूशन क्लब की बौद्धिक बैठकों गप्पे मारते हैं।लेकिन यही लोग जब डिजाइन सूट पर टाई बाँधे जोकरों जैसी हरकत करते हुए बेसिरपैर की वही-वही खबरें परोसते हैं तो इनकी नियति पर तरस आता है। अपना मीडिया या तो किसी वैश्विक ताकत की प्रपोगंडा मशीन है या फिर किसी की इज्जत की धज्जियाँ बिखेरने वाला परपीडक यंत्र। हनीप्रीत के साथ यही हो रहा है। अदालत से पहले ही सब ट्रायल में लगे हैं। अपने अपने तईं फैसला भी सुना रहे हैं। मीडिया एक महिला के इज्ज़त की चिंदियां बिखेर रहा है, हम देख रहे हैं। पूरा मीडिया उस डरी हुई लड़की के मुँह से कहवाना चाहता है कि ..कह.. तू अपने बाप की रखैल थी..। मुँह ढंके आयटमों से हनीप्रीत का रहस्य, रोमांच व प्रेमकथाएँ उगलवाई जा रही हैं। ये सब मीडियाकी फ्राडगीरी का हिस्सा है जो महज टीआरपी के लिए चल  रहा है। यदि हनीप्रीत अदालत से बरी होती है तो क्या उसके इज्जत की धज्जियों का शाल बुनकर ये चैनल वाले उसकी इज्जत लौटा पाएंगे ? ये निहायत गलत हो रहा है। महिला अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली वो बाबकटें कहां हैं..? क्या उन्हें ये सब नहीं दिख रहा कि टीवी स्क्रीन पर एक पथ से भटकी हुई हिरण को शिकारी कुत्तों की तरह नोंचा जा रहा है। याद रखिये आज जो हम कर रहे हैं प्रकारान्तर में अपने भविष्य का ही इंतजाम कर रहे हैं।[लेखक पत्रकार जयराम शुक्ल की वॉल से उनसे  8225812813 पर संपर्क किया जा सकता है ]

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Dakhal News 11 October 2017


rajdhani patrkar

मुख्यमंत्री चौहान द्वारा “प्रेस एन्क्लेव” के प्रवेश द्वार का लोकार्पण भोपाल में मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. की भूमि को फ्री-होल्ड करने का विचार किया जाएगा ताकि सदस्य आवास निर्माण के लिये आसानी से बैंक लोन ले सकें। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिक और फोटो पत्रकारिता में सक्रिय सदस्यों के लिये आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री आज यहां आवासीय कालोनी “प्रेस एन्क्लेव” के कार्यालय एवं प्रवेश द्वार के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी काम करते हैं और समाज को सूचना संपन्न बनाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रमजीवी पत्रकारों के लिये आवास एक आधारभूत सुविधा है। राज्य सरकार इसमें हर प्रकार से सहयोग करेगी। सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रजातंत्र के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता से जुड़े लोगों को मजबूत बनाने की दिशा में आवासीय कालोनी का निर्माण मील का पत्थर साबित होगा। सांसद श्री आलोक संजर ने पत्रकारों के लिये श्रद्धानिधि स्थापित करने जैसे प्रयासों के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान की सराहना की। संस्था के अध्यक्ष श्री के.डी. शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिन्हा ने मुख्यमंत्री को कालोनी की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। सेंट्रल प्रेस क्लब के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और संस्था के संस्थापक संचालक श्री विजयदास ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के. मिश्रा, आयुक्त जनसम्‍पर्क श्री अनुपम राजन एवं बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी एवं संस्था के सदस्य उपस्थित थे।  

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Dakhal News 25 September 2017


 कड़वे वचन  का विमोचन

      भोपाल  में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां अपने निवास पर मुनि श्री तरूण सागर महाराज की पुस्तक 'कड़वे वचन भाग -9' का विमोचन किया।  इस अवसर पर जैन समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

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Dakhal News 23 September 2017


इण्डिया टीवी  अंजुम

सभी छोटे बड़े मसले पर तड़ाक तपाक टिप्पणी करने वाले अजीत अंजुम अपने इस्तीफे जैसे बड़े घटनाक्रम पर लंबी चुप्पी साध गए. उनकी कोशिश थी कि इंडिया टीवी से हटाए जाने की सूचना ज्यादा चर्चा में न आए क्योंकि इससे संपादक का मार्केट डाउन होता है, सो वह अपनी विदाई के मसले पर मुंह सिए रहे. पर अब उन्होंने धीरे से अपने एफबी एकाउंट में खुद को इंडिया टीवी का पूर्व मैनेजिंग एडिटर घोषित कर दिया है. इस तरह अजीत अंजुम के इंडिया टीवी से विदा होने को लेकर कायम सस्पेंस खत्म हो गया है और भड़ास पर प्रकाशित खबर सही साबित हुई. सबसे अच्छी बात ये हुई है कि सभी टीवी संपादकों ने मिलकर अपने बेरोजगार साथी अजीत अंजुम को ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन का जनरल सेक्रेट्री बनाकर एक नया काम सौंप दिया है ताकि उनकी सक्रियता बनी रहे और वे बेरोजगारी जैसा कुछ फील न कर सकें. पर अजीत अंजुम प्रतिभाशाली पत्रकार हैं और ढेर सारे संबंधों-संपर्कों के धनी हैं, इसलिए वे बहुत दिन तक घर न बैठेंगे. जल्द ही वे नई पारी शुरू करने का धमाका कर सकते हैं. कुछ और नहीं तो स्टार वाले उदय शंकर ही कोई न कोई प्रोजेक्ट दे देंगे ताकि रोजी रोटी चलती रहे. दरअसल न्यूज चैनल्स के बड़े लोगों यानि संपादकों / प्रबंधकों में आपस में खूब एकता होती है. ये एक दूसरे की जमकर तारीफ करते रहते हैं और एक दूसरे के बुरे वक्त में आड़ ढाल बनकर मदद करने को तैयार रहते हैं, हां इसके चलते मालिकों को भले ही ठीकठाक चून लग जाए. इनकी ये एकता एक तरह से हिंदी टीवी पत्रकारिता का दुर्भाग्य भी है जिसके चलते अच्छे भले प्रतिभावान पत्रकार कई बार इस संपादकों के रैकेट का कोपभाजन बन जाते हैं और अपने ठीकठाक करियर को बर्बाद कर बैठते हैं. जो लोग इस रैकेट को सलाम नमस्ते करते हुए 'यस सर यस सर' ठोंकते रहते हैं वह खूब तरक्की करते हैं. न्यूज चैनल्स के संपादकों पर 'तेरा आदमी मेरा आदमी' करने का गंभीर आरोप लगता रहा है लेकिन यही संपादक लोग पब्लिक डोमेन में किसी भी किस्म के डिसक्रिमिनेशन की मुखालफत करते पाए जाते हैं.[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]    

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Dakhal News 18 September 2017


पत्रकार भवन में दी श्रध्दांजलि

  भोपाल के प्रखर और प्रतिष्ठित पत्रकार महेश बागी के असमयिक निधन पर मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के तत्वावधान में पत्रकार भवन में एक शोक सभा रखी गई। जिसमें महेश बागी के साथ काम कर चुके और उनके अधीनस्थ रहे पत्रकारों के साथ शहर के कई पत्रकार उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित पत्रकारों ने स्व. बागी के साथ बिताए गए समय के संदर्भ में अपने अनुभव साझा किए तथा स्व.बागी की विशेषताओं को विशेषरूप से रेखांकित किया। श्रद्धांजली कार्यक्रम में पत्रकार साथी सर्वश्री नीवन आनंद जोशी, गणेश पांडे, भगवान उपाध्याय, संजय शर्मा, शब्बीर कादरी, अनुराधा त्रिवेदी, शिशुपाल सिंह तोमर, दिलीप भदौरिया, अरशद अली खान, उदय मौर्या, दिनेश निगम, डा. राज, राजेन्द्र जैन, आलोक गुप्ता,प्रेम कुशवाह,रामानंद दिवेदी, जतिन मिंडोरे, दया प्रसाद, रमेश निगम, बलभद्र मिश्रा, उमाशरण श्रीवास्तव, महफूज अली, अनिल श्रीवास्तव, सरल भदौरिया, राजेन्द्र महेश्वरी,मोहम्मद इकराम और उज्जैन से उपस्थित हुए अनन्य साथियों में से सर्वश्री प्रकाश दिवेदी , प्रशांत अनजाना, ललित जैन, संजय कुंडल उन्हेल और राजधानी में कार्यरत साथी विनोद उपाध्याय विशेषरूप से उपस्थित थे।

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Dakhal News 14 September 2017


अरशद अली खान

भोपाल में शनिवार को पत्रकार महेश बागी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।    अरशद अली खान मैं समझता हूं कि पत्रकारिता में सीधे दखल रखने वाला कोई भी ऐसा पत्रकार नहीं होगा जो महेश बाग़ी के तेवरों से वाक़िफ़ ना हो.... उनके लेखन में पत्रकारिता की उस आबरु की झलक दिखती थी, जिसका पत्रकारिता के मंचों और नारों में सिर्फ ज़िक्र होता है....और जिसकी अपेक्षा समाज एक पत्रकार से करता है... महेश बागी ने लगभग सभी बड़े बैनरों में काम किया लेकिन अपनी फक्कड़ मिज़ाजी और स्वाभिमान की क़ीमत पर वो कहीं टिक नहीं पाए.... मैं उन खुशनसीब लोगों में से हूं जिसे महेश बाग़ी जैसे बहुत ईमानदार और शानदार पत्रकार का साथ मिला.... महेश बाग़ी का साथ पाकर में अपने आप को गौरांवित महसूस करता रहा....बल्कि यूं कहें कि मुझे इस बात का घमंड था कि महेश बाग़ी जैसा नेक दिल पत्रकार मेरा दोस्त है....   महेश बाग़ी ने कभी अपने उसूलों से समझोता नहीं किया.... यही वजह है कि आज वो मुफलिसी की हालत में हमारा साथ छोड़ गए....आज उनके परिवार को सहयोग की सख्त ज़रुरत होगी... वो चाहते तो और लोगों की तरह पत्रकारिता को प्रोफेशन के तोर पर कर सकते थे, लेकिन उनहोंने पत्रकारिता मिशन के रूप में की....जिसका खामियाज़ा अब उनके परिवार को भोगना होगा.... मुझे इस बात का हमेशा अफ़सोस रहेगा कि जो साथी पत्रकारों पर कॉलम लिखते हैं उनकी नज़र इस हुनर बाज़ पर नहीं पड़ी... शायद इसलिए कि वह केवल बड़े बैनर में काम करने वालों को ही महत्व देते हैं.... जैसा नाम वैसा काम.... ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है... भाषा - शैली पर ऐसी पकड़ थी कि जवाब नहीं.... मैं दावे के साथ यह बात कह रहा हूं कि पत्रकारिता जगत में ऐसा सूरमा अब पैदा होने वाला नहीं है.... मुझे उनका यूं अचानक चले जाना बहुत खल रहा है...... यह मेरी व्यक्तिगत छति है, इसकी भरपाई दुनियां की कोई दौलत नहीं कर सकती.... आप बहुत याद आओगे "बाग़ी जी".... वरिष्ठ पत्रकार शलभ भदौरिया ने अपनी वॉल पर लिखा हैं प्रिय महेश के अचानक यूँ चले जाना हमारे परिवार के लिए पारिवारिक क्षति है।महेश उज्जैन से इंदौर होते हुए सीधे हमारे घर ही आया और कोई 2 साल परिवार का सदस्य की तरह रहा ।इतनी छोटी उमर और कच्चा परिवार छोड़ कर हमारे छोटे भाई के  निधन से आहत हूं ।ईश्वर से प्रार्थना है कि वो मेरे छोटे भाई महेश की पवित्र आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे और समूचे पवार (बागी) परिवार को इस गहन दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ।  

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Dakhal News 10 September 2017


पत्रकार लंकेश

पत्रकार गौरी लंकेश के हत्यारों का सुराग देने वाले को सरकार 10 लाख रुपये का इनाम देगी। कर्नाटक सरकार ने ये घोषणा की है। पुलिस ने गुरुवार को लोगों से अपील की थी कि इस हत्याकांड के बारे में कुछ भी पता है तो उसे बताए। इसके लिए एक ईमेल आइडी व फोन नंबर भी जारी किया गया है। इसके एक दिन बाद ही गृह मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने दस लाख के इनाम की घोषणा की है। गृहमंत्री रेड्डी का कहना है कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने निर्देश दिया है कि एसआईटी में पर्याप्त संख्या में अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए जाए ताकि जांच का काम तेजी से हो। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एसआईटी के प्रमुख बीके सिंह के साथ एक बैठक भी की। बैठक में डीजीपी आरके दत्ता, डीजी (खुफिया) एएम प्रसाद भी मौजूद थे।रेड्डी ने बताया कि जांच टीम से कहा गया है कि भाजपा विधायक जीवराज को बुलाकर पूछताछ की जाए। उन्होंने गुरुवार को पत्रकार की हत्या को लेकर विवादास्पद बयान दिया था। रेड्डी ने ये भी कहा कि विधायक से पूछा जाएगा कि उन्होंने इस तरह का बयान क्यों दिया था। उन्होंने कहा कि ये बात अखरने वाली है कि गौरी लंकेश की हत्या के बाद न तो कोई भाजपा नेता उनके घर गया, न ही शमशान घाट पर। गौरी लंकेश की हत्या को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में भी चर्चा की गई। दक्षिण व मध्य एशिया के मामलों को सहायक सचिव एलिस वेल्स ने एक उप समिति में कहा कि मामला वाकई हतप्रभ करने वाला है। पत्रकार की हत्या लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि भारत इससे जल्दी उबर जाएगा और लोकतंत्र वहां और ज्यादा मजबूत होगा। इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस ने कहा कि लगता है कि एक प्रभावशाली आवाज को दबाने की साजिश पहले ही रच ली गई थी। यूनेस्को की महानिदेशक इरिना बोकोवा ने कहा कि भारत इस मामले का पर्दाफाश जल्द करे, क्योंकि प्रैस पर हमले का मतलब मूलभूत अधिकारों के हनन का प्रयास है।

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Dakhal News 8 September 2017


ज़ी न्यूज़ के कार्यक्रम में शिवराज

  शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों की केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने की सराहना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पूरे देश के लिये एक समान शिक्षा नीति होना चाहिये। इसके लिये मध्यप्रदेश पूरा सहयोग करेगा। उन्होने कहा कि प्रयोग के तौर पर माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के लिये बैतूल जिले में पठन-पाठन की सारी सुविधाओं और अधोसंरचनात्मक व्यवस्थाओं से सम्पन्न एक विद्यालय खोला जाएगा जिसमें आसपास के गांवों से विद्यार्थियों को लाया जाएगा और वापस छोड़ा जाएगा। इस प्रयोग के सफल होने पर इसका विस्तार करने पर विचार किया जाएगा। श्री चौहान आज यहां ज़ी न्यूज चैनल द्वारा राज्य शिक्षा समिट कार्यक्रम में सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होने शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थाओं को सम्मानित किया। मप्र को शिक्षा में केन्द्र से मिलेगा पूरा सहयोग केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक सवाल के जवाब में मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाने, स्वायत्तता बढ़ाने और नये शैक्षणिक संस्थानों को प्रोत्साहित करने के मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करने के बाद अब प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। किसी समय बीमारू राज्य कहलाने वाला मध्यप्रदेश अब प्रथम श्रेणी के राज्यों में शामिल हो गया है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि मध्यप्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में हर प्रकार से सहयोग दिया जाएगा। श्री जावड़ेकर ने कहा कि विशेषज्ञों का एक पैनल पूरे देश में बीस उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों का चयन करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश का भी इसमें स्थान होगा। श्रमोदय विद्यालय खुलेंगे श्री चौहान ने राज्य में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिये किये गये प्रयासों की चर्चा करते हुये कहा कि उत्कृष्ट विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, ज्ञानोदय विद्यालय खोले गये हैं । चार श्रमोदय विद्यालय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में खोले जा रहे हैं। इन विद्यालयों में विशेष रूप से शिक्षित और प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती की गई है। इनकी सेवा शर्ते भी भिन्न हैं। श्री चौहान ने कहा कि समाज की ओर से भी शिक्षकों को मान-सम्मान मिलना चाहिये। इस प्रवृत्ति में कमी आई है। उन्होंने कहा कि वेतन और सुविधाओं के अलावा शिक्षक मान-सम्मान चाहता है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने चलेगा अभियान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक दशक पहले तक प्राथमिक शिक्षा बुरी स्थिति में थी। शुरू से ही कठिन प्रयास करने पड़े । उच्च शिक्षा का प्रतिशत 13-14 था जो अब 20 हो गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को जब भी आवश्यकता पड़ी केन्द्र ने पूरी मदद की। अब उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये अभियान चलाया जाएगा। नये कॉलेज खुल रहे हैं, जो कम्प्यूटर लैब, लाइब्रेरी और आई.टी. आधारित अन्य पठन-पाठन टूल्स से सज्जित हैं। श्री चौहान ने मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना की चर्चा करते हुये कहा कि अब प्रतिभाशाली बच्चों को उच्च शिक्षा के लिये पैसों की कमी नहीं आएगी। उनकी फीस सरकार भरेगी। प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की सेवा-शर्तें और वेतन में सुधार किया गया है। अब उन्हें सम्मानजनक 25 से 30 हजार रूपये प्रति माह वेतन मिल रहा है। उनका प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा। कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति का प्रतिशत भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के माता पिता नहीं हैं, वे रेल्वे स्टेशनों, सड़कों पर भटकते रहते हैं, उनके लिये भी शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे किराये का आवास लें और उन्हें स्कूल भेजें। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को साइकिल, गणवेश, लैपटॉप, स्मार्टफोन देने जैसी पहल की गई है। निजी क्षेत्र में कई विश्वविद्यालय स्थापित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के तीन आयाम गिनाते हुये कहा कि शिक्षा का उददेश्य ज्ञान देना, कौशल देना और नागरिक संस्कार देना है। विश्वस्तरीय आई.टी.आई की स्थापना भोपाल में की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है इस साल के 12वी कक्षा के जो उत्कृष्ट परिणाम आये, उनमें सबसे ज्यादा बच्चे शासकीय स्कूलों के थे।  

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Dakhal News 3 September 2017


इंदौर वूमंस प्रेस क्लब

इंदौर वूमंस प्रेस क्लब, म.प्र. के स्थापना अवसर पर हक़, हैसियत और हिफाज़त विषय पर परिसंवाद ‘मंथन’ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में श्रीमती मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ महापौर, श्रीमती शोभा ओझा अध्यक्ष, अ.भा. महिला कांग्रेस, सुश्री कविता पाटीदार अध्यक्ष, जिला पंचायत, इंदौर, सुश्री माला ठाकुर क्षेत्रीय संयोजिका, दुर्गा वाहिनी, श्रीमती अर्चना जायसवाल, पूर्व अध्यक्ष, म.प्र. महिला कांग्रेस, डॉ. दिव्या गुप्ता, अध्यक्ष संस्था ज्वाला, श्रीमती फौजिया शेख अलीम नेता प्रतिपक्ष प्रमुख अतिथियों के रूप में उपस्थित थीं.  इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि पत्रकारिता हो या अन्य क्षेत्र अब महिलाओं के प्रति नजरिया बदल गया है. देश में सर्वोच्च पदों पर महिलाओं ने पुरुषों से बेहतर कार्य करके स्वयं को सिद्ध किया है. वर्तमान में महिला आरक्षण का फायदा उठाते हुए हमें कड़ी मेहनत के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए. पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के महानगर मिसाल बन गए हैं जहाँ बराबरी की संख्या में महिला पत्रकार बेहतर कार्य कर रही हैं. मध्यप्रदेश की महिला पत्रकारों को भी संगठित होकर आगे बढ़ना चाहिए.  इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग, म.प्र शासन में सदस्य बनने पर डॉ रजनी भंडारी का अभिनन्दन किया गया. प्रारंभ में वूमंस प्रेस क्लब, म.प्र. की अध्यक्ष शीतल रॉय ने क्लब के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी. अतिथियों का स्वागत शीतल रॉय, नाज़ पटेल, गरिमा राजपूत, रीना शर्मा, वैशाली व्यास, नेहा चौधरी, संध्या शर्मा,मोनालिसा  मीना राणा शाह, पुष्पा शर्मा ने किया. कार्यक्रम का संचालन वैशाली व्यास ने किया और सचिव नाज़ पटेल ने आभार माना. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता उपस्थित थे.स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों ने भी वूमंस प्रेस क्लब की स्थापना पर सभी सदस्यों को और अध्यक्ष को बधाई दी।

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Dakhal News 1 September 2017


सुप्रियो प्रसाद BEA के अध्यक्ष बने

आज तक और इंडिया टुडे के मैनेजिंग एडीटर सुप्रिय प्रसाद को ब्रॉडकास्ट एडीटर्स असोसिएशन (BEA) यानी न्यूज चैनलों के संपादकों की संस्था का नया अध्य़क्ष चुन लिया गया है। वहीं वरिष्ठ संपादक अजीत अंजुम नये महासचिव चुने गये। दिबांग (ABP NEWS) और अरनब गोस्वामी (Republic TV) उपाध्यक्ष और अजय कुमार (News Nation) कोषाध्यक्ष बने। इन सभी का चुनाव सर्वसम्मति से बीईए की आम सभा में हुआ। चुनाव में 15 सदस्यीय नयी एक्जीक्यूटिव कमेटी का भी गठन किया गया। इसमें वरिष्ठ संपादक क़मर वहीद नक़वी, शाज़ी ज़मां, एन के सिंह, मिलिंद खांडेकर (ABP NEWS), राहुल कंवल ( India Today  & Aajtak), संजय बरागटा ( ZEE NEWS), सोनिया सिंह (Ndtv), दीपक चौरसिया ( India News), संजीव पालीवाल (Aajtak), अभिषेक कपूर (Republic TV), रवि प्रकाश (TV9), सुकेश रंजन (News 24), नविका कुमार (Times Now), भूपेंद्र चौबे (CNN News18) और राजेश रैना ( ETV) शामिल हैं।  संस्था के नवनिर्नाचित अध्यक्ष सुप्रिय प्रसाद ने अपने स्वागत भाषण में पिछली कमेटी के योगदान और उनके द्वारा किये गये कार्यों की सराहना की। उन्होंने नये सदस्य बनाने, सदस्यों के बीच संवाद और जनता के बीच मीडिया की छवि को सुधारने के उपाय अपनाने पर जोर दिया। महासचिव अजीत अंजुम ने बताया कि बीईए के विस्तार के लिए क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के संपादकों को जोड़ने की मुहिम चलायी जायेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सदस्यता बढ़ाने के लिये एक नयी कमेटी का गठन किया गया जिसमें संजीव पालीवाल, राहुल कंवल और संजय बरागटा होंगे।   

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Dakhal News 16 August 2017


 इंडिया टीवी से हेमंत शर्मा का इस्तीफा ?

एक बड़ी चर्चा इंडिया टीवी न्यूज चैनल से आ रही है. लंबे समय से इंडिया टीवी और इसके मालिक रजत शर्मा के आंख नाक कान बने रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने चैनल से इस्तीफा दे दिया है. भाजपा और भाजपा से जुड़ी सरकारों में गहरे पैठ रखने वाले हेमंत शर्मा ने अचानक क्यों इस्तीफा दे दिया, इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. किसी का कहना है कि रजत शर्मा दिन प्रतिदिन हेमंत शर्मा के बढ़ते कद से परेशान थे और चैनल पर पूरी तरह काबिज हो चुके हेमंत से चैनल को मुक्त कराना चाहते थे जिसको लेकर उनकी आपस में बातचीत हुई और विवाद बढ़ता गया. इसके बाद हेमंत शर्मा ने इस्तीफा देकर खुद को चैनल से अलग कर लिया है. वहीं कुछ अन्य लोगों का कहना है कि चैनल की गिरती टीआरपी को लेकर चैनल प्रबंधन इन दिनों बेहद आक्रामक है और तरह-तरह से मंथन कर रहा है. प्रबंधन को ये समझा दिया गया कि हेमंत शर्मा द्वारा चैनल के कामकाज में हस्तक्षेप के कारण चैनल की टीआरपी सुधर नहीं रही है. कुछ लोग ये भी कहते सुने जा रहे हैं कि चैनल की टीआरपी गिरने की गाज अजीत अंजुम पर गिरने की चर्चा थी लेकिन गिर गई हेमंत शर्मा पर. इसे एक तरह से अजीत अंजुम खेमे की जीत मानी जा रही है और हेमंत के इस्तीफे के बाद चैनल अब पूरी तरह अजीत अंजुम के कब्जे में आ गया है. उधर, इंडिया टीवी प्रबंधन ने हेमंत के इस्तीफे पर चुप्पी साध रखी है. यह भी कहा जा रहा है कि हेमंत को प्रबंधन मनाने की कोशिश कर सकता है. फिलहाल हेमंत शर्मा के इस्तीफे की अफवाह जोरशोर से फैल रही है और इसको लेकर जितने मुंह उतनी बातें की जा रही हैं.  

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Dakhal News 9 August 2017


फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज ने की अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा  मुंबई मे फिल्म और टेलीविजन शो निर्माताओं की वायदा खिलाफी के विरोध में 'फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज' (एफ डव्लूआइ सी इ) की तरफ से 14 अगस्त की रात 12 बजे से अनिश्चित कालीन हड़ताल की घोषणा की गई है. इस हड़ताल में फिल्म एवं टीवी इंडस्ट्रीज के सभी कामगार, टेक्निशियन और कलाकार शामिल हो रहे हैं. फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज के प्रेसिडेंट श्री बीएन तिवारी ने कहा कि इस अनिश्चित कालीन हड़ताल का उद्धेश्य फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्रीज के सभी कामगारों, टैक्निशियनों और कलाकारों के साथ बरसों से हो रही वायदाखिलाफी और नाइंसाफी को हमेशा के लिये समाप्त करना है. श्री तिवारी के मुताबिक फेडरेशन लंबे समय से मांग करता रहा है कि आठ घंटे की शिफ्ट हो और हर अतिरिक्त घंटे के लिये डबल पेमेंट हो. तिवारी ने कहा कि हर क्राफ्ट के सभी कामगारों , टैक्निशियनों और कलाकारों आदि की चाहे वह मंथली हो या डेलीपेड, पारिश्रमिक में तत्काल वाजिब बढ़ोत्तरी, बिना एग्रीमेंट के काम पर रोक, मिनीमम रेट से कम पर एग्रीमेंट नहीं माना जायेगा. साथ ही जॉब सुरक्षा , उत्तम खानपान और सरकार द्वारा अनुमोदित सारी सुविधायें और ट्रेड यूनियन के प्रावधान हमारी प्रमुख मांग है. मगर निर्माता हमारी मांग को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं. 22 यूनियनों ने किया हड़ताल का समर्थन... इस हड़ताल को इंडस्ट्री के 22 यूनियनों का समर्थन प्राप्त है.फेडरेशन में जो 22 यूनियन शामिल हैं उसमें द साउंड एशोसिएशन आॅफ इंडिया, कैमरा एशोसिएशन , डायरेक्टर एशोसिएशन , आर्ट्स डायरेक्टर एशोसिएशन, स्टिल फोटोग्राफर एशोसिएशन, म्यूजिक डायरेक्टर एशोसिएशन, म्यूजिशियन एशोसिएशन , सिंगर एशोसिएशन, वाइसिंग एशोसिएशन, डांस मास्टर एशोसिएशन, डांसर एशोसिएशन, फाइटर एशोसिएशन , डमी एशोसिएशन , राइटर एशोसिएशन , प्रोडक्शन एशोसिएशन, एडिटर एशोसिएशन , जूनियर आर्टिस्ट एशोसिएशन, महिला कलाकार एशोसिएशन , मेकअप और ड्रेस डिपार्टमेंट एशोसिएशन, एलाइड मजदूर एशोसिएशन, सिने आर्टिस्ट एशोसिएशन और जूनियर आर्टिस्ट सप्लायर एशोसिएशन प्रमुख है. इस हड़ताल को देश की कई दूसरी भाषा की फिल्म इंडट्रीज का भी समर्थन मिला है. देश के किसी भी हिस्से में 15 अगस्त के बाद से फिल्म, टेलिविजन शोे और सिरीयलों की शूटिंग नहीं हो पायेगी. फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज के प्रेसिडेंट श्री बीएन तिवारी के मुताबिक इस हड़ताल के बाद से देश के किसी भी हिस्से में 15 अगस्त के बाद से फिल्म, टेलिविजन शोे और सिरीयलों की शूटिंग नहीं हो पायेगी. बॉलीवुड में काम कर रहे ये कामगार अपना नया एमओयू साइन करवाना चाहते हैं, जिसकी मियाद पिछली फरवरी में खत्म हो चुकी है. ये एमओयू हर 5 साल में साइन होता है. इस बार नए एग्रीमेंट में कामगारों की मांगों में उनका मेहनताना, सुरक्षा, समय पर भुगतान, काम करने की समय सीमा और बीमा शामिल हैं. इनके मुताबिक इनका मेहनताना 3 से 6 महीने बाद मिलता है साथ ही 18-18 घंटे काम करवाया जाता है. फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज के प्रेसिडेंट श्री बीएन तिवारी और जनरल सेक्रेटरी दिलीप पिठवा के मुताबिक 15 अगस्त से प्रस्तावित इस हड़ताल के बावत फेडरेशन की तरफ से फिल्म और टेलीविजन शो निर्माताओंं की संस्थायें इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर असोसिएशन, द फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्युसर गिल्ड आॅफ इंडिया लिमिटेड, इंडियन फिल्म एंड टीवी प्रोड्युसर काउंसिल, वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्युसर्स असोसिएशन को भी मंगलवार 1 अगस्त को हड़ताल की लिखित सूचना दे दी गयी है. साथ ही हड़ताल के दौरान किसी भी कामगारों , टैक्निशियनों और कलाकारों को परेशान ना किया जाये इसके लिये फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज की तरफ से मुंबई के पुलिस आयुक्त सहित सभी पुलिस स्टेशनों को भी लिखित सूचना दी गयी है.

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Dakhal News 9 August 2017


etv

  खबर है कि ईटीवी दिल्ली एनसीआर में बड़े पैमाने पर छंटनी चल रही है. अब तक तेरह रिपोर्टर हटाए जा चुके हैं. ये सभी लोग लंबे समय से ईटीवी से जुड़े हुए थे. हटाए गए जिन कुछ लोगों के नाम पता चले हैं, वे इस प्रकार हैं- सुनीता आर्या झा, अक्षय राय, हिमांशु देव, हाशिम इमरान, मनोहर विश्नोई, रामेश्वर, प्रकाश पीयूष, रवि यादव, रजा आदि. सूत्रों के मुताबिक रवि यादव ने लेबर कोर्ट में केस कर दिया है ईटीवी पर. मुकुंद शाही को लेकर चर्चा है कि उन्हें भी साइडलाइन कर दिया गया है. सुनीता आर्या झा पीएमओ कवर करती थीं. अक्षय राय बीजेपी बीट देखते थे. सूत्रों के मुताबिक शैलेंद्र बांगू, अविनाश कौल आदि मिलकर अपने खास लोगों को नियुक्त कर रहे हैं और पुराने लोगों को किसी तरह परेशान कर निकाल रहे हैं. जिन जिन लोगों को हटाया गया, उन्हें पहले न्यूज वाले ग्रुप से हटाया जाता, फिर इनका मेल बंद कर दिया जाता. अंत में हैदराबाद से सेवा समाप्त किए जाने की काल करा दी जाती.  

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Dakhal News 5 August 2017


स्ट्रिंगर भर्ती

अनिल सक्सेना  हाल ही में मध्यप्रदेश के दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश में हुई स्ट्रिगंरो की भर्ती इन दिनों राजधानी सहित प्रदेश के अंचलों में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश की प्रमुख पूजा पन्नालाल वर्धन ने इन दो सालो में दूरदर्शन न्यूज के तो मायने ही बदल दिए हैं। अपनी विवादित कार्यप्रणाली के चलते अपने सहयोगी समाचार सम्पादक राय जो हाल ही में प्रमोट होकर सहायक निदेशक बने हैं, के साथ मिलकर अनियमितता के सारे रिकार्ड ही तोड़ दिये। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2017 में दूरदर्शन समाचार एकांश भोपाल ने मध्यप्रदेश के सभी जिलों में स्ट्रिंगर की भर्ती के लिये विज्ञापन दिये। दूरदर्शन के इतिहास में पहली बार दूरदर्शन पर इसे भर्ती के आखरी दिन तक प्रचारित किया गया। एंकर बाईट में भी समाचारों को बीच में रोककर इस भर्ती के बारे में बताया गया। प्रसार भारती द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में नियुक्त पीटीसी हाईकार्ट की शरण में चले गये। हाईकोर्ट में पहले जिन सात जिलों के पीटीसी ने शिकायत की उस पर हाईकार्ट ने इन जिलों में परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी। इसके बाद 14 और पीटीसी भी हाईकार्ट चले गये। न्यायालय में पीटीसी के ये दोनों मामले क्लब हो गये जो अब भी विचाराधीन हैं। एक समय था जव समाचार सम्पादक राय स्ट्रिगंरो और पीटीसी को स्टोरी के लिये अनुमति देते थे। बाद में इनकी अनियमितता को देखकर राय से स्टोरी अप्रूअल के अधिकार छीनकर पूजा वर्धन खुद स्टोरी अप्रूअल देने लगीं। समाचार सम्पादक राय हाशिये पर चले गये और पूजा बर्धन का विरोध करना शुरू कर दिया। जैसे ही दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश में स्ट्रिगंरो की भर्ती की कार्यवाही चली समाचार सम्पादक राय ने अपने समकक्ष और आकाशवाणी भोपाल में पदस्थ मित्र के साथ स्ट्रिंगरों की भर्ती से लाभ लेने की रूप रेखा बनाई। इन दोनो अधिकारियों ने दूरदर्शन केन्द्र के समाचार एकांश की प्रमुख पूजा पन्नालाल वर्धन को विश्वास में लेकर अनियमितता के खेल शुरू किए। आरोप है कि भर्ती में जमकर पैसा चलने लगा। कोर्ट के कारण जब नियुक्तियों में विलम्ब होने लगा और कई खेल तमाशे लोगों को मालूम पड़े तो पैसे वापस करने का दबाव बढने लगा। ऐसे में हाईकोर्ट का निर्णय आने से पहले ही सात जिले छोड़कर रिजल्ट घोषित कर दिये गए। दूसरे ही दिन राय का नागपुर का स्थानांतरण का आदेश आ गया। स्ट्रिगंर के पद पर कहीं गुन्डा लिस्ट में शामिल तो कहीं 10वीं पास तो कहीं जीवन में पत्रकारिता न करने वाले चाय पान के खोके चलाने वालों को चयन कर लिया गया। पत्रकारिता से स्नातक व स्नाकोत्तर डिग्रीधारी बाहर हो गये। लगभग पुराने अधिकांश स्ट्रिगंर भी बाहर कर दिये गये। इसे लेकर अब स्ट्रिंगर लामबन्द होकर हाईकोर्ट की शरण में जा रहे हैं और एक याचिका दायर कर रहे हैं।    पूजा वर्धन की पहले भी स्टाफ और स्ट्रिंगर दिल्ली उच्चाधिकारियों को शिकायत करते रहे हैं। लेकिन दिल्ली उच्चाधिकारी जाने किस भय से चुप्पी साधे रहे। आपको बता दें कि इस महिला अधिकारी ने  पूर्व में अपने महिला होने का लाभ उठाते हुए कई अधिकारियों की शिकायतें कर चुकी हैं जिससे विभागीय लोग इससे डरते हैं। इस महिला के लिए अपने पिता के पूर्व पुलिस अधिकारी होने की धमकी देना आम बात है। देखना है कि मध्य प्रदेश के योग्य स्ट्रिंगरों को दूरदर्शन भर्ती में न्याय मिल पाता है या नहीं।[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]  

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Dakhal News 4 August 2017


news trp week 30

  आजतक ने जी न्यूज़ को झटका दे दिया है। 30 वे सप्ताह की trp की बाद आजतक नंबर वन ,ज़ी टू ,एबीपी थ्री और इण्डिया टीवी फोर्थ पोजीशन पर है। इंडिया टीवी तमाम कोशिशों के बाद भी एबीपी को नहीं पछाड़ पा रहा है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 30 Aaj Tak 17.7 up 0.8  Zee News 15.6 dn 0.6  ABP News 13.4 up 1.0  India TV 11.3 up 0.2  News18 India 10.6 dn 0.2  News Nation 9.1 dn 0.7  News 24 7.7 same   India News 7.4 dn 0.2  Tez 2.8 dn 0.4  DD News 2.2 up 0.2  NDTV India 2.1 same     TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 17.6 up 0.5  Zee News 16.8 dn 0.7  ABP News 13.5 up 1.1  India TV 11.9 up 0.4  News18 India 11.1 dn 0.3  News Nation 8.2 dn 0.7  News 24 7.2 dn 0.1  India News 6.2 dn 0.1  Tez 3.0 dn 0.2  NDTV India 2.6 up 0.1  DD News 1.9 up 0.1 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 30   Zee                       70.6 Etv.                        14.6 Ibc24                     10.2 Sahara  sa            1.8 Bansal                   1.0   

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Dakhal News 3 August 2017


पत्रकार सुधीर जैन

श्रमजीवी पत्रकार संघ के रायपुर में संपन्न प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन में उत्कृष्ठ पत्रकारिता एवं बस्तर की समस्याओं को निरंतर उठाने के लिए मुख्य अतिथि प्रदेश के कबीना मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे द्वारा बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार सुधीर जैन को सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सहित संघ के प्रदेशाध्यक्ष अरविंद अवस्थी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि सुधीर जैन विगत 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में सेवारत हैं। इस दौरान लगभग ढाई दशक तक वे दैनिक नवभारत एवं दैनिक भास्कर से बतौर ब्यूरो प्रमुख जुड़े रहे। वर्तमान में वे पिछले एक दशक से हिंदुस्थान समाचार एवं राष्ट्रीय न्यूज सर्विस समाचार सेवा के ब्यूरो प्रमुख के पद पर सेवारत हैं।  

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Dakhal News 1 August 2017


राघवेंद्र सिंह

राघवेंद्र सिंह एक कहावत है अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैैं। इसलिये आदमी बातों से नहीं अपने कर्मों से पहचाना जाता है। यह कहावत राजनैतिक, सामाजिक, प्रशासनिक से लेकर मीडिया कर्मियों पर भी लागू होती है। यह इसलिये इन बिरादियों के लोगों से भी माफी के साथ आज की बातें। हमारा फोकस फिर सियासत पर है क्योंकि देश को दिशा देने के काम यही सबसे बड़े ठेकेदार हैैं। रावण ने भी सीता जी का हरण साधु बनकर किया था। गुरू का स्थान भी गोविंद के पहले था, डाक्टर को भगवान बाद दूसरा भगवान माना जाता था और मीडिया को महाभारत के संजय और विदुर की तरह सही बात बताने और सच दिखाना वाला माना जाता था। हम यहीं से अपनी बात शुरू कर रहे हैैं। पिछले दिनों नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की क्षेत्रीय बैठक में जो कुछ कहा गया वह सब बहुत अच्छा था लेकिन कहने वाले और कराने वालों के आचरण पर नजर डालें तो वही निकलकर आता है, अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैैं। हमेशा लोग कामकाज से ही जाने जाते हैैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने जल, जंगल और जमीन का जिक्र करते हुये बताया कि बंदर, भालू जंगल छोड़- छोड़ कर बाजार और शहरों में आने लगे हैैं क्योंकि हमने उनके घरों को उजाड़ दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी अन्य राज्य को लेकर इसका जिक्र नहीं कर रहे हैैं। उन्हाेंने कि साल एेसा पेड़ जाे पानी छाेड़ता है। अमरकंटक से मंडला तक साल के पेड़ अगर सूख जायें ताे समझाे नर्मद जी संकट में अा जायेंगी। सूख जाएंगी, खत्म हो जाएंगी। यहां साल के पेड़ सूख रहे हैं अाैर किसी काे इसकी चिंता नहीं है। इनको बचाने के लिये कोई शाेध नहीं कर रहा है। जाहिर है कि यह एहतियात उन्होंने मध्यप्रदेश को लेकर बरता होगा क्योंकि एनजीटी के क्षेत्राधिकार में  मध्यप्रदेश भी आता है और अक्सर राजधानी भोपाल के केरवा पहाड़ी और कोलार क्षेत्र में  शेर, तेंदुए की आमद आम हो गई है। अक्सर शहर और गांव के लोगों से रात तो क्या दिन में भी जंगल महकमा इन इलाकों में जाने से रोकने की एडवाइजरी जारी करता है। यहां हम बता दें कि कोलार और केरवा इलाके में बस्तियों के साथ शिक्षण संस्थान भी खुल गये हैैं। याने अब गाय बैलों के साथ आम आदमी भी शेर, तेदुए की शिकारगाह में आ गया है। मुद्दा यहीं से शुरू होता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भावुक और संवेदनशील स्वभाव के अनुरूप एनजीटी के निर्णयों की जमकर तारीफ की। उन्होंने जो कहा उसका लब्बोलुआब यह है कि ट्रिब्यूनल की  सक्रियता से भोपाल हिल स्टेशनों की तरह सुंदर बना हुआ है। यहां जंगल और नदियां एक तरह से सुरक्षित हैैं। इन बातों से अलग दूसरी तस्वीर भी है। मसलन हम भोपाल का ही जिक्र करें तो एनजीटी ने बड़ी झील को बचाने के लिये निर्देश दिये थे। उनके पालन में हफ्तों नहीं महीनों बीत गये हैैं लेकिन सरकार और प्रशासन का काम दीवार धकाने जैसा साबित हुआ है। मिसाल के तौर पर भोपाल के बीचोबीच आये स्लाटर हाउस को हटाने के निर्देश दिये थे लेकिन सरकारी जलेबी नहीं इमरतीनुमा कोशिशों के चलते अभी तक वह टस से मस नहीं हुआ है। जबकि एनजीटी ने नगर निगम, मुख्य सचिव तक को निर्देश दिये थे। मगर समूची कार्यवाही एनजीटी को थकाने वाली साबित हुई। ऐसे ही बड़ी झील को कहते तो भोपाल की लाइफ लाइन हैैं लेकिन इसका दम घोंटने के लिये रिटर्निंग वाल कैचमेंट एरिया में बनाने के बजाय झील की अंदर ही बना दी गई। यह बात पिछले साल बारिश की है। वह तो अच्छा हुआ कि बरसात इतनी हुई कि झील ने खुद अपनी हद तय कर ली। नतीजा यह हुआ कि रिटर्निंग वाल पानी में डूब कई और बड़ी झील कई मीटर दूर तक निकल गई।  इस पर खुद मुख्यमंत्री ने झील किनारे घूम कर रिटर्निंग वाल तोडऩे के निर्देश दिये थे। मगर एनजीटी और सीएम के आदेश सुरक्षित स्थान पर रखे हुये हैैं और समस्या का भी बालबांका नहीं हुआ है। ऐसी ही कहानी जो मुनारें झील के बाहर लगनी थी वे भी झील के भीतर लगा दी गईं। उन्हें भी एक साल से ढूंढा जा रहा है। मगर महापौर, चीफ सेक्रेटरी और चीफ मिनिस्टर की बातों के बावजूद उन्हें ढूंढा नहीं जा सका है। यानें झील का गला घोंटने वाली सरहद न तो तोड़ी गई हैैं और न ही मुनारें मिली हैैं। आगे इसकी कोई संभावना भी नजर नहीं आती है। आगे देखें तो सरकारें गुड गवर्नेंस की बातें करती हैैं। मगर होता उसके उलट है। स्कूल शिक्षा का स्तर उठाने की बात होती है, परिणाम में गिरता हुआ दिखता है। अस्पतालों में मरीज का इलाज और दवा देने की बात होती है लेकिन न डाक्टर होते हैैं न दवाएं मिलती हैैं। इसी तरह खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात होती है और वह बनता है मौत का धंधा। एनजीटी के और आदेश की बातें करें नर्मदा समेत नदियों से रेत निकालने और पहाड़ को खोदने से रोकने की लेकिन होता है इसके खिलाफ। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कहा था कि रेत की चोरी रोकने के लिये अब नदियों के हरेक घाट पर तो हथियारबंद लोगों की तैनाती नहीं की जा सकती। सरकार ऐलान कर चुकी हैै कि मरीजों के इलाज के लिये अस्पतालों में डाक्टर नहीं मिल रहे हैैं। इसका मतलब अब जिसको जैसे इलाज कराना हो वह खुद तय कर ले। इसी तरह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी  अपने भाषणों में अक्सर कहती थीं गरीबी हटायेंगे। बाद में विरोधियों ने इसमें सुधार किया और कहा इंदिरा जी ने गरीबी तो नहीं गरीब को जरूर हटा दिया। ऐसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बातें करते हैैं कि न खाऊंगा न खाने दूंगा। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में ही देखें तो वहां लोग खा भी रहे हैैं और खाने भी दे रहे हैैं और लोग देख रहे हैैं कि नरेंद्र मोदी के नारे के खिलाफ आचरण करने वालों का कुछ नहीं बिगड़ रहा है।  इस तरह की बातें के अनेक उदाहरण मिल सकते हैैं लेकिन बात वही है कि अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैैं। सही मायने में आदमी आचरण, व्यवहार और कर्मों से ही जाना जाता है।[पत्रकार राघवेंद्र सिंह की वॉल से ]  

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Dakhal News 31 July 2017


सोशल मीडिया

देश और दुनिया में वर्तमान में जितनी भी विद्याएं काम कर रही है, उनमें सोशल मीडिया सबसे सशक्त संचार माध्यम बन गया है। सोशल मीडिया वर्तमान में प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रिाॅनिक मीडिया से भी आगे निकल गया है। सोशल मीडिया ने गांव-गांव में मोबाईल फोन, इंटरनेट के माध्यम से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा दी है। आज देश और दुनिया में कहीं भी कोई घटना घटित होती है, तो सोशल मीडिया के माध्यम से हमें कुछ ही पलों में उसकी जानकारी लग जाती है। सूचनाओं के आदान-प्रदान में सोशल मीडिया अपनी महती भूमिका का निर्वाह करता है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद  नंदकुमारसिंह चौहान ने भोपाल में  पं. दीनदयाल परिसर में आयोजित आईटी सेल की बैठक के संबोधित करते हुए कही। उन्होने कहा कि आज का युग सोशल मीडिया का है इसलिए पार्टी की रीति नीति एवं केंद्र व प्रदेश सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाकर उन्हें राहत प्रदान करना युवाओं नैतिक कर्त्तव्य है। भारत युवाओं का देश है और युवाओं की उर्जा राष्ट्रहित के लिए उपयोगी है। नगर पालिका चुनाव में आईटी विभाग की टीम पूरी तरह तैयार है जिसके माध्यम से प्रचार प्रसार पर जोर दिया जायेगा। इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री  अजयप्रताप सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी  लोकेन्द्र पाराशर, आईटी विभाग के प्रदेश संयोजक  शिवराजसिंह डाबी, प्रदेश सह संयोजक  अनिल पटेल,  पवन दुबे,  सोमेश पालीवाल,  धर्मेन्द्र सिंह, श्री आशीष अग्रवाल, सेन गुप्ता,  विकास श्रीवास्तव, युवा मोर्चा आईटी के सह संयोजक  सत्येन्द्र सिंह, जिला संयोजक सहित आईटी विभाग के काॅलेज समन्वय उपस्थित थे।

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Dakhal News 29 July 2017


प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे   मेरे प्रिय टीआरपी मापक यंत्र, कई दिनों की खदबदाहट के बाद आज आपको खुला ख़त लिखने से खुद को रोक नहीं पाया. भैया, आपसे एमपी-छतीसगढ़ में कहीं कुछ चूक हो रही है ऐसा मुझे दिखता है. आप क्यूँ नहीं स्कूली या महाविद्यालयीन परीक्षा की तरह पुनर्गणना, वो जिसे अंग्रेजी में रिवैल्यूएशन कहते हैं, का प्रावधान कर देते..बताइए कि अव्वल आने वाले परीक्षार्थी ने क़माल क्या किया और बाकियों ने कहाँ ग़लती की....आप कहें तो हम तिथिवार आपको दिखा दें कि हमने क्या चलाया और कैसे चलाया और बाकियों ने क्या चलाया...बताइए कि 7 करोड़ से अधिक की आबादी वाले एमपी और ढाई करोड़ से ज्यादा जनसंख्या वाले छतीसगढ़ में आपने कितने टीआरपी मापक यंत्र लगा रखे हैं...प्रभु, मान ही नहीं सकता मैं कि आपके आंकड़े कंटेट का सटीक आकलन हैं. इतना बता दीजिए कि वैज्ञानिक तरीक़े से ही तो आप गणना करते हैं न...? आंकड़े देखकर तो लगता है कि टैरो कार्ड रीडर टाइप एक कार्ड निकालकर या फिर सिक्का उछालकर आप तय कर देते हो [क्षमा करिए...] प्रतिदिन अपना और बाकी चैनल का प्रस्तुतिकरण और ब्रेकिंग दम साधे देखता हूँ...23 साल से मुख्यधारा की पत्रकारिता कर रहा हूँ...ख़बरों से खेलने, कॉपी और प्रस्तुतीकरण का साधक हूँ...जो परीक्षार्थी आपकी मार्क-शीट में अव्वल में आ रहे हैं, उनकी क्षमता का भी ज्ञाता हूँ.. कुछ मत करिए सिर्फ तीन उचित कारण बता दीजिये कि जबरदस्त तरीके से आगे बढ़ने वाला चैनल ऐसा क्या कर रहा है, जो बाकी के नहीं कर रहे हैं...कितनी बड़ी ख़बरें सबसे पहले उनके पास होती हैं...एक उदाहरण आपको देता हूँ कि हमारी जिन ख़बरों के वीडिओ को हमारी वेव साईट में लाखों की तादात में वीडिओ व्यू मिलते हैं और हज़ारों लोग उसे शेयर करते हैं, उसे आप टीआरपी में ज़ीरो दिखा देते हो..श्रीमान आपको शायद पता नहीं होगा कि डिजिटल में नम्बर लाना बेहद कठिन है क्यूंकि व्यक्ति अपना डेटा पैक यानि रुपैया खर्च करके वीडिओ देखता है..ऐसा कैसे संभव है कि फोन में वीडियो देखा जा रहा हो और टीवी में नहीं...भैया आपकी मापक मशीन पुरानी हो गई हो या उसका कोई कल-पुर्जा घिस गया हो तो मरम्मत करा लो यार  ;) लेकिन आंकड़े तो ऐसे भेजो, जिसमें दाल में नमक के बराबर चूक दिखे...देखो, ऐसा है बिना पढ़े फेल होने वाला व्यक्ति नहीं कहता कि कॉपी ठीक से नहीं जाँची गयी लेकिन जो लपक के पढ़ रहा है, उसे कर्री तकलीफ़ हो जाती है..हम तो आपके साथ कैसा भी शाष्त्रार्थ करने को तैयार हैं...भैया, क्या है अन्याय करना जितना बड़ा पाप है,उसे चुपचाप सहन करना और भी बड़ा पाप है, जेई से अपन से मौन नहीं रहा जा रहा..और फिर आपकी विश्वसनीयता पर जनता भी सवाल उठाने लगे, ऐसा न करो.... सादर  आपका ही एक हितग्राही [ ईटीवी एमपी /सीजी के सीनियर एडिटर प्रवीण दुबे की फेसबुक वॉल से ]  

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Dakhal News 28 July 2017


सेंट्रल प्रेस क्लब

  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सेंट्रल प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के सदस्यों ने आज मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अरूण दीक्षित, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री विजय कुमार दास, प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश साकल्ले, प्रदेश महासचिव श्री राजेश सिरोठिया, श्री मृगेंद्र सिंह, सुश्री सुचांदना गुप्ता, सुश्री दीप्ति चौरसिया, श्री धनंजय प्रताप सिंह, श्री कन्हैया लोधी, श्री अक्षय शर्मा, श्री के डी शर्मा, श्री अजय बोकिल, श्री अजय त्रिपाठी, श्री अश्विनी कुमार मिश्रा, श्री रिजवान अहमद सिद्धीकी, श्री नासिर हुसैन, श्री नितेंद्र शर्मा, श्री विकास तिवारी और श्री वीरेंद्र सिन्हा उपस्थित थे।  

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Dakhal News 28 July 2017


news trp 29

पिछले दो महीने से ज़ी न्यूज़ ने आजतक को कड़ी तक्कर दे रखी है,एक श्रेणी में जी न्यूज़ नंबर वन है तो एक में आज तक। एबीपी न्यूज़ नंबर तीन और इंडिया टीवी चौथे नंबर का चैनल बन गया है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 29 Aaj Tak 17.0 up 0.3  Zee News 16.2 dn 0.2  ABP News 12.4 up 0.1  India TV 11.1 same   News18 India 10.8 same   News Nation 9.8 dn 0.2  News 24 7.7 dn 0.3  India News 7.6 same   Tez 3.2 same   NDTV India 2.1 same   DD News 2.0 up 0.3    TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.5 up 0.3  Aaj Tak 17.1 up 0.6  ABP News 12.3 up 0.3  India TV 11.5 dn 0.1  News18 India 11.4 same   News Nation 9.0 same   News 24 7.3 dn 0.4  India News 6.4 dn 0.5  Tez 3.2 dn 0.3  NDTV India 2.5 dn 0.2  DD News 1.8 up 0.3 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 29   Zee                       72.1 Ibc24                    12.3 Etv.                        11.1 Sahara  sa            1.7 Bansal                   1.0

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Dakhal News 27 July 2017


ईशर जज की किताब हमारे शहरों का रूपांतरण का विमोचन

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शहरीकरण की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता लेकिन बेहतर प्रबंधन संभव है। बेहतर प्रबंधन से शहर स्वर्ग बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि गांव तेजी से शहर की ओर बढ़ रहे हैं। इससे शहरों के लिये चुनौतियाँ भी पैदा हो रही हैं। इसलिये बेहतर शहरी प्रबंधन और नियोजन पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। श्री चौहान आज यहाँ प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ईशर जज आहलूवालिया की किताब ‘हमारे शहरों का रूपांतरण’ का विमोचन कर रहे थे। इस किताब का प्रकाशन मंजुल प्रकाशन द्वारा किया गया है। इस अवसर पर पूर्व में कार्यरत योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष श्री मोंटेक सिंह आहलुवालिया एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। श्री चौहान ने कहा कि हाल के सफाई सर्वेक्षण में सौ शहरों में 22 मध्यप्रदेश के हैं। इनमें भी इंदौर प्रथम और भोपाल दूसरे स्थान पर है। प्रदेश के सात शहर स्मार्ट शहर की सूची में शामिल हैं। श्री चौहान ने हिन्दी में इस किताब के प्रकाशन का महत्व बताते हुये कहा कि यह शहरी निकायों, प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं के लिये मार्गदर्शी साबित होगी। उन्होंने कहा कि सभी शहरी निकायों को यह किताब उपलब्ध करायी जायेगी। किताब की लेखिका ईशर जज आहलूवालिया ने शहरी प्रबंधन और नियोजन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश द्वारा की गई प्रगति की सराहना करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश स्मार्ट सिटी के लिये उपलब्ध फण्ड का बेहतर उपयोग कर रहा है। उन्होंने इंदौर में निजी और सार्वजनिक भागीदारी से शहर बस सेवा की परियोजना पर चर्चा करते हुये कहा कि भोपाल और इंदौर में शहरी यातायात में अनूठा काम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिबद्धता से शहरीकरण की चुनौतियों का सामना करते हुये बेहतर प्रक्रिया और व्यवस्थायें स्थापित की हैं उनकी प्रेरणादायी कहानियाँ किताब में शामिल की गई हैं।  

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Dakhal News 26 July 2017


सुदर्शन न्यूज चैनल को नोटिस

सुदर्शन न्यूज़ के सुरेश चह्वाणके को राज्यसभा की तरफ से नोटिस भेजा गया है. इस नोटिस में कहा गया है कि 28 सांसदों ने लिखित शिकायत की है कि सुदर्शन न्यूज चैनल ने उनकी मानहानि करते हुए धमकाया. नोटिस में 28 जुलाई तक सुदर्शन न्यूज चैनल को अपना पक्ष रखने को कहा गया है. अगर पक्ष नहीं रखा जाता है तो एकपक्षीय रूप से ही राज्यसभा के चेयरमैन इस मामले को देखकर अपना फैसला सुनाएंगे. उधर, इस मामले में  सुरेश चह्वाणके ने खुद को पीड़ित की तरह प्रस्तुत कर धार्मिक भावनाओं को भड़काते हुए पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने लगा है. सुरेश चह्वाणके का इस मामले पर कहना है-  ''नरेश अग्रवाल के ख़िलाफ़ बोलने के कारण मुझे और सुदर्शन न्यूज के ख़िलाफ़ राज्यसभा का गंभीर नोटिस मिला है। धर्म के अपमान पर आमादा व पद के मद में चूर नरेश अग्रवाल, दिग्विजय सिंह, सहित कुल 28 सांसदों ने राज्यसभा में दबाव बनाया जिसके बाद मुझे और चैनल के खिलाफ दबाव में राज्यसभा ने नरेश अग्रवाल की अवमानना का विशेषाधिकार नोटिस भेजा है. प्रभु श्रीराम के सम्मान लिए मैं मृत्यु से भी टकराने को तैयार हूँ, ये 28 सांसद तो बहुत छोटी चीज़ हैं... मुझे आशा है कि प्रभु राम के अलावा मेरे साथ आप भी हैं .... यही धर्मयुद्ध है और मैं ये चुनौती स्वीकार करता हूँ.''[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]

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Dakhal News 25 July 2017


महुआ प्लस का लाइसेंस रद्द

केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने छह टीवी चैनलों के लाइसेंस रद करने का आदेश जारी किया है जिसमें महुआ प्लस भी है. प्रज्ञा विजन कंपनी का चैनल महुआ प्लस का लाइसेंस रद्द होने से मुश्किल में जी रहे पीके तिवारी एंड फेमिली को एक और झटका लगा है. इससे पहले मार्च महीने में मंत्रालय ने श्री न्यूज चैनल का लाइसेंस रद्द किया था. मंत्रालय ने जून में चार अपलिंकिंग और दो डाउनलिंकिंग लाइसेंस रद किए हैं. इसमें एक बांग्‍ला एंटरटेनमेंट चैनल के अपलिंकिंग लाइसेंस को रद किया गया है. ‘365 दिन’ नामक चैनल का भी लाइसेंस रद्द हुआ है.

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Dakhal News 24 July 2017


news paper

रतन भूषण  सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को लेकर जो फैसला दिया है, उसके बाद हर जिले के डीएलसी आफिस यानी सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय के हर कर्मचारियों का रवैया बदला है। इन कर्मचारियों का रुख इसलिए बदला है कि 19 जून 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आये फैसले में यह स्पष्ट लिखा है कि मजीठिया वेतन आयोग के मामले में सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के क्या दायित्व होंगे। यही वजह है कि मजीठिया का मामला 19 जून के बाद जहां भी शुरू हुआ है, मालिकान की तरफदारी करने वाले सभी सरकारी अधिकारी का रवैया बदला है। पहले इनकी बातों से, इनके काम करने के तरीकों से, इनके हाव भाव से स्पष्ट होता था जैसे ये अख़बार मालिकानों की नौकरी करते हों। वर्कर की मदद के लिए बनाये गए ये अफसर सही में मालिकानों के लिए काम करने में जुटे होते थे, लेकिन मजीठिया मामले के आये आदेश के बाद इनका मिजाज और काम करने का अंदाज़ बदला है। हालांकि माना यह भी जाता है कि ये किसी न किसी तरह अब भी मालिकान के लिए काम करेंगे। इसलिए अब वर्करों को भी इनसे सतर्क रहना होगा। इन पर नज़र भी रखनी होगी, इनकी कार्य करने के तरीके को समझना होगा और वर्कर को आगे बढ़ने के लिए तैयार रहना होगा, मसलन हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इनकी शिकायत करने के लिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट से आये आदेश का डर सरकारी अफसर के मन में हुआ है। यही वजह है कि इन दिनों जहाँ भी मजीठिया का केस चल रहा है, अफसर इस काम को करने में देर नहीं लगा रहे हैं। पिछले दिनों राजस्थान पत्रिका का मामला वर्करों के लिए खुश करने वाला था। वहां जीतेन्द्र जाट के मामले में लेबर कोर्ट ने पत्रिका प्रबंधन से नौकरी पर रखने के लिए कहा। अभी कानपुर में दैनिक जागरण के वर्कर का मामला भी ऐसा ही सुना गया। कोर्ट ने जागरण की एक नहीं सुनी और लगातार सुनवाई करने की बात की। दो दिन सुनवाई हुई, जिसके बाद जागरण ने कोर्ट के आगे गिड़गिड़ाया कि सर एक तारीख आप अपनी मर्ज़ी से दे दें, तब कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी। जागरण ने पिछले दिनों पंजाब के जालन्धर में भी सरकारी बाबू के आगे हाथ जोड़े और वर्कर के वकील से मिलकर और उन्हें लोभ देकर मामले को निपटाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। कुल मिलाकर वर्कर के पक्ष में हवा चली है और इसका श्रेय जाता है माननीय सुप्रीम कोर्ट को, जिनके फैसले ने मालिकानों की हर चाल को जकड़ रखा है। मालिकान तन से हारे अभी भले ही नहीं दिख रहे हैं, पर वे जल्दी ही तन और मन दोनों से हारे नज़र आएंगे। वर्करों का धन उन्हें देना ही पड़ेगा। संभव है, अख़बार मालिकानों के खिलाफ मजीठिया के केस जहां भी चल रहे होंगे, कमोवेश सभी सरकारी अफसर की नीयत अब बदली सी होगी और ये मालिकान के प्यादे सरकारी दफ्तर से पालतू की तरह भगाए जा रहे होंगे। बाबजूद हमें उस कहावत को नहीं भूलना चाहिए कि कुत्ते की दुम को सालोंसाल चोंगे में यानी पाइप में डाल कर छोड़ दो, वह तब भी सीधी नहीं होगी। सरकारी अफसर थोड़े बदल भी जाएँ, मालिकान के ये प्यादे कभी भरोसे के लायक नहीं हो सकते। [ पत्रकार रतन भूषण की फेसबुक वॉल से]  

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Dakhal News 23 July 2017


trp week 28

 28वें हफ्ते की टीआरपी में नई बात ये है कि जी न्यूज 15+ वाली कैटगरी में भी आजतक के सिर तक पहुंच गया है. दोनों के बीच बहुत मामूली-सा अंतर रह गया है. बुरा हाल इंडिया न्यूज का है. लगता है दीपक चौरसिया का जादू खत्म हो गया है और यह न्यूज चैनल आखिरी सांसें गिनने लगा है. इंडिया टीवी ने इस हफ्ते स्थिति सुधारी है और नंबर चार पर आ पहुंचा है. न्यूज18इंडिया ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए नंबर पांच पर छलांग लगा दी है. न्यूज नेशन जो पिछले सप्ताह नंबर चार पर था, नंबर छह पर लुढ़क गया है. देखें आंकड़े... Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 28   Aaj Tak 16.7 same   Zee News 16.4 up 0.3  ABP News 12.4 dn 0.1  India TV 11.2 up 0.6  News18 India 10.7 up 0.5  News Nation 10.0 dn 0.8  News 24 8.0 up 0.6  India News 7.7 dn 0.4  Tez 3.2 up 0.1  NDTV India 2.1 dn 0.2  DD News 1.7 dn 0.5   TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.2 dn 0.2  Aaj Tak 16.5 dn 0.2  ABP News 12.1 dn 0.1  India TV 11.5 up 0.7  News18 India 11.4 up 0.3  News Nation 9.0 dn 1.0  News 24 7.7 up 1.0  India News 6.9 dn 0.1  Tez 3.5 up 0.2  NDTV India 2.8 dn 0.1  DD News 1.6 dn 0.5  

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Dakhal News 22 July 2017


भारत रक्षा पर्व

  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश जब सरहद पर तैनात जवानों को मिलेगे, तब उनका मनोबल और आत्मबल कई गुना बढ़ जायेगा। इस भावनात्मक प्रयास के लिये नव दुनिया परिवार बधाई का पात्र है। श्री चौहान ने यह बात आज मुख्यमंत्री निवास में नवदुनिया की पहल पर भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ की फ्लैग ऑफ सेरेमनी में कही। इस अवसर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह भी मौजूद थीं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम अपने घरों में चैन से सोते हैं क्योंकि देश की सीमाओं पर हमारे जवान मुस्तैद रहते हैं। हमारे जवान सीमाओं की रक्षा के लिये होली, दीपावली और रक्षा बंधन आदि त्यौहार भी घर पर नहीं मनाते हैं। सदैव जान हथेली पर लेकर देश भक्ति के जज्बे के साथ सरहद की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन पर्व पर जब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की हजारों बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश लेकर नवदुनिया का रक्षा रथ उनके पास पहुंचेगा, तब जवानों को अपार हर्ष होगा, भावनात्मक प्रसन्नता की अनुभूति होगी। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि विधान से रक्षा रथ को रवाना किया। इस अवसर पर बताया गया कि नवदुनिया द्वारा भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ के माध्यम से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भ्रमण कर बहनों से राखियां, ग्रीटिंग कार्ड और मैसेज का संकलन किया जा रहा है। संकलित सामग्री सेना के माध्यम से सीमा पर तैनात जवानों को उपलब्ध करवाई जायेगी। इस अवसर नवदुनिया के संपादक श्री सुनील शुक्ला, स्टेट ब्यूरो हेड श्री धनंजय प्रताप सिंह, श्री राजीव सोनी, हेड श्री विनित कौशिक सहित मॉडल स्कूल के एन.सी.सी.के छात्र एवं नव दुनिया के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

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Dakhal News 21 July 2017


भड़ास4मीडिया

दीपक आज़ाद  चर्चित मीडिया केन्द्रित वेबसाइट भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने ऐलान किया है कि 26 अगस्त से वेबसाइट का संचालन बंद कर दिया जाएगा। पिछले एक दशक से मीडिया संस्थानों के न्यूज़ रूम के अंदर और बाहर पत्रकारों और उनके मालिकों के अच्छे-बुरे कर्मों को बेबाकी के साथ प्रकाशित करने वाले यशवंत सिंह आर्थिक संकट की वजह से भड़ास को बंद करने की बात पहले भी करते रहे हैं, लेकिन जैसे-तैसे यह वेबसाइट अब तक चलती आ रही है। अब एक बार फिर यशवंत सिंह ने बकायदा 26 अगस्त का दिन मुर्करर करते हुए भड़ास को बंद करने का ऐलान किया है। यशवंत ने इसकी वजह आर्थिक संकट के साथ ही हिन्दी समाज और समझ को बताया है। भड़ास की भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह वेबसाइट देश के ज्यादातर हिन्दी अखबारों व न्यूज़ चैनल के कार्यालयों में बैन कर दी गई है। संपादक की कुर्सी पर बैठकर सामंतों की तरह व्यवहार करने वाले मालिक-संपादकों को हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कहीं उनके काले कारनामे लीक होकर भड़ास तक न पहुंच जाएं। संपादकों की अयाशी से लेकर दलाली तक की खबरों को भड़ास पर जगह मिलती रही है। मीडिया के भीतर की सड़ाध को बाहर लाने में भड़ास का एक अहम रोल रहा है। यही वजह रही है कि भड़ास, भ्रष्ट व सत्ता की दलाली करने वाले पत्रकार व मीडिया मालिकों की आंख की किरकिरी बना रहता है। हालांकि भड़ास पर भी आरोप लगता रहा है कि वह एकतरफा रिपोर्टिंग के जरिये सनसनी की तरह खबरें प्रकाशित करता है और गाहे-बगाहे चिरकुट किस्म के धंधेबाजों को जरूरत से ज्यादा स्पेस देता है। ऐसे वक्त में जब भारत में मीडिया का कारपोरेटीकरण तेजी से हो रहा हैे, और मीडिया संस्थाओं के न्यूज़ रूम में साजिशों, षडयंत्रों का सिलसिला पहले से और भयावह होता जा रहा है, तब भड़ास जैसी संस्थाओं का होना और भी बेहद जरूरी है। ऐसे में भड़ास की बंदी का ऐलान हम सब जो भी उसके चाहने वाले हैं, के लिए एक बुरी खबर है। इस पर हम मातम ही मना सकते हैं! यशवंत की हिम्मत अब अगर जवाब दे रही है और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि  भड़ास के लिए अब मौत ही बेहतर विकल्प है तो यही सही! नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं! [लेखक दीपक आज़ाद उत्तराखंड के तेजतर्रार पत्रकार और 'वाचडाग' के एडिटर हैं.]

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Dakhal News 19 July 2017


 नर्मदा सेवा यात्रा

सरकारी खर्चे पर अपने प्रचार-प्रसार का पागलपन किस हद तक जा सकता है। इसका नमूना सामने आया है। शिवराज सिंह सरकार ने भारत ही नहीं बल्कि विदेशी अखबार तक में नर्मदा सेवा यात्रा का विज्ञापन छपवाया। हर विज्ञापन में सीएम शिवराज सिंह चौहान का फोटो था। सरकार ने सेवा यात्रा के प्रचार-प्रसार पर करीब 22 करोड़ रुपए फूंक दिए वो भी उस समय जबकि मध्यप्रदेश पर डेढ़ लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है और यह बढ़ता ही जा रहा है। सरकार ने न्यूयार्क से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र 'इंडिया एब्रॉड' में विज्ञापन दिया। न्यूयार्क के इस समाचार पत्र को 10 लाख 26 हजार रुपए का विज्ञापन दिया गया था। यह जानकारी विधानसभा में सरकार ने कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह और जीतू पटवारी के लिखित प्रश्न के उत्तर में दी है।  नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के पत्र-पत्रिकाओं, इलेक्ट्रॉनिक चैनल और होर्डिंग्स के माध्यम से प्रचार-प्रसार पर सरकार ने 21 करोड़ 58 लाख 40 हजार 344 रुपए खर्च किए। हालांकि सरकार ने यह स्वीकारा कि न्यूयार्क के समाचार पत्र के अलावा किसी विदेशी चैनल को विज्ञापन नहीं दिया। यात्रा के लिए दो इवेंट फर्म मेसर्स भोपाल ग्लास एंड टेंट स्टोर और मेसर्स विजन फोर्स भोपाल को कार्य दिया गया था। यह भी बताया गया है कि नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा के लिए जनसंपर्क विभाग की तरफ से प्रिंट मीडिया को 10.77 करोड़ रुपए, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को 1.74 करोड़ रुपए का विज्ञापन दिया गया तो इसके मुद्रण कार्य पर 48.71 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके अलावा माध्यम ने भी इसके विज्ञापन और प्रचार-प्रसार पर 8 करोड़ 58 लाख 69 हजार 344 रुपए का खर्च किए।

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Dakhal News 19 July 2017


अमिताभ अग्निहोत्री ईटीवी

'के न्यूज' नामक चैनल के संपादक पद से इस्तीफा देकर अमिताभ अग्निहोत्री ईटीवी समूह पहुंच गए हैं. उन्हें ईटीवी में एक्जीक्यूटिव एडिटर बनाया गया है. अमिताभ 'के न्यूज' से पहले टोटल टीवी, समाचार प्लस समेत कई चैनलों में कार्यरत रहे. अमिताभ मीडिया में 30 साल से सक्रिय हैं. जेएनयू से पढ़ाई करने वाले अमिताभ मूलतः फर्रूखाबाद के रहने वाले हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 1990 में उन्होंने दैनिक जागरण के दिल्ली से की थी. वे दैनिक आज, दैनिक भास्कर, देशबंधु में भी नौकरी कर चुके हैं.  

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Dakhal News 17 July 2017


रायपुर दैनिक भास्‍कर

दैनिक भास्‍कर, रायपुर को 1985 में कांग्रेस द्वारा प्रेस लगाने के लिए (अविभाजित मध्‍य प्रदेश में) पट्टे पर दी गई ज़मीन को छत्‍तीसगढ़ प्रशासन ने शुक्रवार 7 जुलाई के एक शासनादेश के माध्‍यम से रद्द कर के उस पर प्रशासनिक कब्‍ज़े का आदेश दे दिया है। ज़मीन का कुल आकार 45725 वर्गफुट और अतिरिक्‍त 9212 वर्ग फुट है यानी कुल करीब 5000 वर्ग मीटर है। नजूल की यह ज़मीन रायपुर भास्‍कर को प्रेस लगाने के लिए इस शर्त पर कांग्रेस शासन द्वारा दी गई थी कि संस्‍थान अगर प्रेस लगाने के विशिष्‍ट प्रयोजन से मिली ज़मीन को किसी और प्रयोजन के लिए इस्‍तेमाल करेगा तो शासन उसे वापस ले लेगा। इस ज़मीन का पट्टा 31 मार्च 2015 को समाप्‍त हो चुका था और दैनिक भास्‍कर ने इसके नवीनीकरण के लिए अग्रिम आवेदन किया था। छत्‍तीसगढ़ सरकार के राजस्‍व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 7 जुलाई को जारी आदेश कहता है कि कलेक्‍टर रायपुर से प्राप्‍त स्‍थल निरीक्षण प्रतिवेदन में पाया गया है कि ”उक्‍त भूमि पर 7 मंजिला पक्‍का व्‍यावसायिक कांपलेक्‍स बनाया गया है तथा प्रत्‍येक मंजिल पर प्रेस स्‍थापना से भिन्‍न अन्‍य व्‍यावसायिक प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग किया जा रहा है।” इसके बाद शासन ने कई बार अख़बार से इस संबंध में जवाब मांगा लेकिन अखबार प्रबंधन ने जवाब देने के लिए लगातार वक्‍त मांगा और जवाब दाखिल नहीं किया। आदेश कहता है, ”तदनुसार उक्‍त भूमियों पर निर्मित परिसंपत्तियों को निर्माण सहित नियमानुसार राजसात कर बेदखली की कार्यवाही करने हेतु कलेक्‍टर, रायपुर को आदेशित किया जाता है।” आदेश की प्रति प्रधान संपादक, दैनिक भास्‍कर, रायपुर को भी भेजी गई है। सवाल है कि रमन सिंह किस बात पर बिफर गए हैं कि उन्‍होंने रायपुर से दैनिक भास्‍कर का डेरा-डंडा ही उखाड़ने का आदेश दे डाला? सवाल यह भी उठता है कि करीब तीन दशक से रायपुर शहर के भीतर अपना धंधा चला रहा यह अख़बार अब क्‍या करेगा?(साभार- मीडिया विजिल)  

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Dakhal News 16 July 2017


नईदुनिया जागरण समूह

  नईदुनिया जागरण समूह के भारत रक्षा रथ को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना। शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को भारत रक्षा रथ पूरे दिन राजधानी रायपुर में घूमेगा। इसके बाद यह रथ बिलासपुर के लिए रवाना हो जाएगा। वहां ये यह रथ जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर होते हुए 2 अगस्त को जम्मू पहुंचेगा।

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Dakhal News 14 July 2017


 आनंद पांडे

पत्रकारिता जगत में अभी आनंद पांडे का नईदुनिया से इस्तीफा गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसने भी इस खबर को सुना, चौंक गया। आनंद पांडेय के फ़ोन घनघनने लगे। जो उन्हें सीधे कॉल नहीं कर सकते थे, वो करीबियों से पर्दे के पीछे की कहानी समझने की कोशिश करते रहे। अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। लेकिन हकीकत किसी को पता नहीं कि आखिर इस्तीफा हुआ क्यों? इसके लिए थोड़ा बैक ग्राउंड जानना जरूरी है। नवंबर 2014 में पांडे जी ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा दिया था। उस वक़्त वो भास्कर ग्रुप में शिखर पर थे। उनकी तेज तर्रार कार्यशैली के भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल इतने प्रभावित हुए कि उनका प्रमोशन पर प्रमोशन होता गया। एडिटोरियल से लेकर ब्रांड और अवार्ड organising कमिटी के वो मेंबर बन गए। हर महत्वपूर्ण इवेंट के लिए उनकी राय ली जाने लगी। पांडेजी के बढ़ते कद से ग्रुप एडिटर कल्पेश याग्निक तक को अपनी कुर्सी का खतरा महसूस होने लगा। सुधीरजी ने पांडे जी के काम को देखते हुए उन्हें गुजरात की बड़ी जिम्मेदारी दी। भाषायी प्रॉब्लम के कारण आनंदजी जाना नहीं चाहते थे और खुलकर इस बात को सुधीरजी के समाने रख भी नहीं पा रहे थे। इसी दौरान उन्हें नईदुनिया से आफर आया। एडिटर इन चीफ संजय गुप्ता से 2-3मीटिंग के बाद उन्होंने नईदुनिया जॉइन कर लिया। पद-पैसा दोनों की तरक्की हुई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि श्रवण गर्ग के कार्यकाल में पहले से ही कमजोर हो चुका नईदुनिया रसातल में जा चुका था। पांडे जी ने challenge स्वीकारा। उन्हें काम करने की पूरी आजादी दी गई। वो भास्कर संस्थान के ही महत्वपूर्ण व्यक्ति मनोज प्रियदर्शी को नईदुनिया लाने में कामयाब रहे। सीनियर न्यूज़ एडिटर प्रियदर्शी को महत्वपूर्ण सेंट्रल डेस्क (एमपी-सीजी) की जिम्मेदारी उन्होंने दी। शुरुआती विरोध के बाद पांडे जी ने अपनी कार्य योजना को अंजाम देना शुरू किया। नए-नए आईडिया पर काम शुरू हुआ। अखबार चर्चा में आने लगा। चूंकि पांडे और प्रियदर्शी, दोनों भास्कर को बखूबी समझते थे, इसलिए अनेकों बार लोग फ्रंट पेज पढ़कर आश्चर्य में पड़ जाते थे कि भास्कर और नईदुनिया लगभग एक जैसा न्यूज़ कंटेंट और पैकेज कैसे दे रहे हैं? इसके बाद रुमनी घोष के काम से संतुष्ट नहीं होने के कारण सिटी की जिम्मेदारी प्रमोद त्रिवेदी को दी गई। उससे पहले भोपाल का संपादक भी बदल दिया गया और भास्कर के ही सुनील शुक्ला को वहां बैठाया गया। नईदुनिया ने अपने कामों से मुकाम हासिल करना शुरू किया। 'निःशब्द ' वाली तस्वीर हो या रेत-शराब के ठेके जैसी खबरें... सरकार हिलने लगी। जागरण के मालिकों को ये सूट नहीं कर रहा था। इस बीच संजय शुक्ला ने बतौर सीओओ जॉइन किया। उन्हें भी पांडेजी की तेज-तर्रार कार्यशैली से परेशानी होने लगी। वे खुद की मनमानी नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने मालिकों के कान भरने शुरू किए। पांडेजी अखबार को आगे ले जाना चाहते थे। लेकिन संजय शुक्ला के हर बात में टांग अड़ाने से वो इसे अंजाम नहीं दे पा रहे थे। कई कोशिशों के बाद भी रायपुर संपादक का प्रिंट लाइन में नाम नहीं दिया गया। जागरण ग्रुप के संजय गुप्ता ने कई दफे संजय शुक्ला को फटकार लगाई, चेतावनी दी, लेकिन उसके बावजूद वो एडिटोरियल और उनके खिलाफ साजिश करता रहा। लोग कहते हैं कि स्थानीय संपादक आशीष व्यास भी इसमें पर्दे के पीछे शामिल हो गए। इस बीच अचानक बिना जानकारी दिए जागरण मैनेजमेंट ने वाराणसी यूनिट प्रभारी आलोक मिश्र को रायपुर में राज्य संपादक बनाकर बैठा दिया। तीन ब्यूरो बंद कर दिए गए। पांडेजी जो सोचकर आए थे, उसमें उन्हें निराशा हाथ लगी। काम से ज्यादा सियासत होने लगी। इस बात को संजय गुप्ता भी नहीं समझ सके। इस बीच भास्कर ग्रुप से हर दो-तीन महीने में पांडेजी का बुलावा आने लगा। एमडी हर हाल में चाहते थे कि आनंद पांडे जल्द से जल्द जॉइन करें। चूंकि नईदुनिया और जागरण ग्रुप से उनका नेचर जेल नहीं कर रहा था और सियासत भी तेज हो गई थी, लिहाजा उन्होंने नईदुनिया को छोड़ना ही बेहतर समझा। भास्कर की भी कोशिश है कि नईदुनिया के सिर्फ 4-5 प्रमुख लोगों को वो तोड़े, जिससे इस अखबार का बचा-खुचा अस्त्तित्व भी खत्म हो जाए। इसके लिए वह इन्हें मुँह मांगी कीमत भी देने को तैयार है। वैसे ये चर्चा आम हो चली है कि पांडे जी के जाने के बाद नईदुनिया सामान्य अखबार बन जायेगा। उनके साथ जुड़े लोगों के साथ ही 2-3 और लोगों के भी नईदुनिया छोड़ने की अफवाह है। इसमें सबसे फायदे में आशीष व्यास हैं, जो लंबे वक्त से बड़ी कुर्सी पर नजर गड़ाए हैं। लोगों का कहना है कि श्रवण गर्ग को हटाने और आनंन्द पांडे का संबंध मैनेजमेंट से बिगाड़ने में उनकी बड़ी भूमिका हैं। [एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.भड़ास फॉर मीडिया से ]

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Dakhal News 12 July 2017


 प्रदीप परिहार

जी मप्र और छग के एसाइनमेंट हेड प्रदीप परिहार ने इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है वे किसी बड़े समूह के साथ जल्द ही अपनी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं. प्रदीप करीब तीन सालों से जी मीडिया के साथ जुडे हुए थे. इसके पहले वे ANI के साथ काम कर चुके हैं. प्रदीप की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पकड़ काफी मजूबत मानी जाती है. साथ ही उनका रीजनल नेटवर्क भी बहुत तगड़ा है. प्रदीप ने जी में रहते हुए भोपाल और रायपुर में अच्छी रिपोर्टिंग भी की है. प्रदीप का इस्तीफा देना जी मप्र–छग के तगड़ा झटका माना जा रहा है.

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Dakhal News 11 July 2017


RSS की वेबसाइट सेवा गाथा

    मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सबसे बड़ा धर्म जरूरतमंद की सेवा है। मदद के अच्छे कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिये। अच्छे कार्यों की जानकारियाँ लोगों को प्रोत्साहित करेंगी। इससे अच्छाई को मजबूती मिलेगी। समाज में सकारात्मक वातावरण बनेगा। श्री चौहान आज समन्वय भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा प्रभाग की वेबसाईट 'सेवा गाथा' का लोकार्पण कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारतीय चिंतन सारे विश्व को परिवार मानता है। एक ही चेतना सभी प्राणियों में देखता है। स्वयंसेवक संघ ऐसा ही विशाल हृदय वाला राष्ट्रवादी संगठन है। यह संगठन समाज के लिये जीने वाले नागरिकों का निर्माण करता है। सेवा के संकल्प में सर्वस्व अर्पित कर, समाज को रोशन करने का कार्य, इसके स्वयंसेवक करते हैं। उन्होंने मातृ छाया, आनंद धाम आदि सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ के रहवासियों का स्वावलंबी और समरस जीवन देख आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। ऐसे कार्यों का व्यापक प्रचार–प्रसार किया जाना चाहिये। इससे नैराश्य का भाव दूर होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वेबसाइट से समाज को अच्छे कार्यों की प्रेरणा और नई ऊर्जा मिलेगी। संघ के सरकार्यवाह श्री सदाशिव सुरेश जोशी भैय्या जी ने कहा कि भारतीय जीवन-शैली में सेवा का संस्कार रचा-बसा है। यहाँ मानव सेवा ईश्वर की सेवा मानकर की जाती है। उन्होंने कहा कि सेवा कार्य निश्चित धारणा के साथ नहीं हो सकता है। इसके लिये दृष्टि और संवेदनशील विचारधारा की जरूरत है। बंधु भाव के साथ जरूरतमंद की पीड़ा, वेदना और दुर्बलता को समझ सेवा कार्य किया जाना चाहिये। इस भावना के साथ किये गये कार्यों के परिणाम सदैव अच्छे होते हैं। उन्होंने कहा कि गलत सामाजिक मान्यताओं से पीड़ित, अस्थिर जीवन शैली और दूरस्थ अंचलों में रहने वालों का एक बहुत बड़ा ऐसा वर्ग है, जो अपने मौलिक सामाजिक अधिकारों से वंचित है। उनमें बेहतर जीवन का आत्म-विश्वास जगाने के लिये समाज को विचार करना होगा। सामाजिक प्रश्नों के हल समाज को ही खोजने होंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वेबसाइट की गाथाएँ, सेवा कार्य के लिये लोगों को आगे आने के लिये प्रेरित करेंगी। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संचालक मध्य भारत श्री सुरेश पिंपलीकर ने किया। आभार प्रदर्शन सह प्रांत संचालक मध्य भारत श्री अशोक पांडे ने किया। सेवा गाथा वेबसाइट की संपादक श्रीमती विजय लक्ष्मी ने गाथाओं के संकलन, वेबसाइट के स्वरूप और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। वेबसाइट सृजक श्री स्वप्निल पारखिया ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोबाइल फ्रेंडली होने के साथ ही फेसबुक और ट्वीटर पर शेयर भी की जा सकेगी।

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Dakhal News 10 July 2017


पत्रकार  शैलेन्द्र तिवारी

जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र को आज पत्रकार और लेखक श्री शैलेन्द्र तिवारी ने हाल ही में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'रावण एक अपराजित योद्धा' पुस्तक भेंट की। मंत्री डॉ. मिश्र ने लेखक श्री तिवारी को रचनात्मक लेखन और पुस्तक प्रकाशन के लिए बधाई दी

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Dakhal News 9 July 2017


पत्रकार अनुराग उपाध्याय की कविता

आक्रामक शैली में लिखने वाले चर्चित पत्रकार अनुराग उपाध्याय एक बेहतरीन कवि भी हैं। उनकी रचनाएँ जिंदगी और प्रकृति के इर्दगिर्द बतियाती हुई प्रतीत होती हैं। ऐसी ही उनकी एक रचना।  संपादक    //धूप // सुबह सुबह बिन बताये  तुम्हारी तरह  धूप जीने से उतर आई मेरे अँधेरे कमरे में । सुबह की धूप  का मिजाज तुम सा ही है, एकदम सिंदूरी  तमाम सौम्य लालिमा को खुद में समेटे।   दोपहर में तमतमाती हुई धूप तुम्हारी तरह घुस आई मेरे कमरे में, जैसे हो उसे मुझसे झगड़ना ठीक तुम जैसा उग्र रूप मैं समझ ही नहीं पाया तुम थीं या धूप  अद्भुत है धूप का ये रूप।   विदा हो रही थी धूप साँझ को मेरे कमरे से  तुम्हारी तरह, कुछ ठिठकी सी, कुछ अनमनी सी कुछ कहना चाहती लेकिन चुप सी कल आने का कुछ कहने का वादा करके  मेरे कमरे से रुखसत हो गई धूप। *अनुराग उपाध्याय

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Dakhal News 8 July 2017


रजत शर्मा -इंडिया टीवी की वाट लगी

बार्क की 26 वें सप्ताह की टीआरपी ने रजत शर्मा एण्ड कंपनी के होश उड़ा दिए हैं। रजत शर्मा के इंडिया टीवी को ऐसा झटका लगा कि वो खिसक कर  छठवे नंबर पर पहुँच गया है। इंडिया टीवी के महादफ्तर ब्रॉडकास्ट सेंटर में आपातकालीन बैठकों के दौर शुरू हो गई हैं और पूरे सम्पादकीय विभाग को नए सिरे से खड़ा करने पर विचार किया जा रहा है। इण्डिया टीवी में प्रमुख पदों पर बैठे लोगों को बहार करने पर भी कंपनी विचार कर रही है।    नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 26 Aaj Tak 16.6 up 0.1  Zee News 16.0 up 1  ABP News 12.0 dn 0.3  News18 India 10.5 dn 0.3  News Nation 10.0 up 0.2  India TV 9.7 dn 0.3  India News 8.8 dn 0.5  News 24 7.4 up 0.2  Tez 3.5 same   NDTV India 2.8 dn 0.2  DD News 2.7 up 0.2    TG: CSAB Male 22+ Zee News 17.7 up 2.1  Aaj Tak 16.3 same   ABP News 11.7 same   News18 India 11.3 dn 0.7  India TV 10.2 dn 0.5  News Nation 9.0 dn 0.4  India News 7.5 dn 0.6  News 24 6.8 up 0.1  Tez 3.8 up 0.1  NDTV India 3.2 dn 0.6  DD News 2.5 up 0.5 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 26   Zee                       64.6 Etv.                        21.8 Ibc 24                   10.0 Sahara  sa            1.7 Bansal                   0.9

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Dakhal News 6 July 2017


पत्रकार शिवअनुराग पटैरया

  मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटैरया साल में एक दो किताबें तो लिख ही देते हैं। उनके इस अंदाज पर भोपाल के प्रदेश टुडे अखबार के कॉलम सूरमा की फैंक में खूब लिखा गया है।  सूरमा ने लिखा -ए खुदा अता कर मुझे इल्म की दौलत, इतनी अता कर जितना समंदर का पानी। शिवअनुराग पटैरया, सूबे के वो सहाफी हैं जो इल्मो-अदब से भी बावस्ता हैं। गोया के पत्रकार तो भोत सारे होते हैं बाकी ज्ञान, रिफरेंस और भाषा पे हरएक का अधिकार नहीं होता। पटैरयाजी के बारे में इस बात से हर कोई इत्तफाक रखता है कि मियां खां पत्रकारिता के साथ ही सूबे की तारीख, रिवायत, कल्चर वगैरह का जीता जागता रिफरेंस हैं। मध्यप्रदेश की सियासत और यहां के तमाम मुख्यमंत्रियों की खासियतें और किस्सों की तो खान हैं पंडितजी। जाहिर है छतरपुर के इस बुंदेली खांटी पत्रकार ने सहाफत में अड़तीस-चालीस साल ऐसेई नर्इं बिता दिये। चीजों को समझना, मेहसूस करना और अपने इल्म को दूसरों में बांटने की इनकी अदा ही निराली है। पत्रकारिता का कोई भी तालिबे इल्म इनसे कभी भी कोई रिफरेंस या जानकारी बेखटके ले सकता है। भैया ने कई किताबें लिखीं। हाल ही में इनकी एक और किताब आई है। मध्यप्रदेश: अतीत और आज। 453 पेज की इस किताब को मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी ने शाया किया है। इसके 56 चेप्टरों में सूबे की भाषा, बोली, शिल्प, कल्चर, मेले, तीज-त्यौहार, लोकनाट्य, खानपान वगैरह पे बेहद सटीक सामग्री है। इसे लिखने में कोई ढाई साल रिसर्च की पटैरयाजी ने। बिलाशक ये किताब पत्रकारिता के तालिबेइल्म बच्चों के लिए भी भोत सटीक साबित होगी। इस नायाब किताब के लिए मुबारकबाद कुबूल करें जनाब। 

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Dakhal News 5 July 2017


ईटीवी भारत

इनाडु ग्रुप ‘ईटीवी भारत’ लांच कर रहा है. यह इनाडु समूह का डिजिटल नेशनल न्यूज प्लेटफॉर्म होगा. इसमें ढेर सारे मीडियाकर्मियों की जरूरत है. न्यूज कोऑर्डिनेटर, रीजनल न्यूज कोऑर्डिनेटर, न्यूज एडिटर, ब्यूरो चीफ, चीफ-सीनियर कंटेंट एडिटर (शिफ्ट इंचार्ज), कंटेंट एडिटर, रिपोर्टर, बुलेटिन प्रड्यूसर, पैनल प्रड्यूसर, न्यूज कास्टर, कंटेंट रिसर्चर आदि के लिए आवेदन मांगा गया है. ये सभी पद हैदराबाद स्थित रामोजी फिल्म सिटी के लिए हैं. अनुभवीं लोगों को प्राथमिकताएं दी जाएगी. फ्रेशर भी आवेदन कर सकते हैं.

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Dakhal News 4 July 2017


etv up

  इसे 'जल्दबाज़ी जो न कराए' तभी कहा जाएगा जब यह मानवीय गलती हो. यानि 24 घंटे की जगह 25 घंटे गलती से टाइप हो गया हो. पर अगर जानबूझ कर 25 घंटे लिखा और दिखाया गया है तो इसका मतलब साफ है कि ईटीवी समूह योगी को तेल लगाने के चक्कर में खुद को अनपढ़-गंवार चैनल साबित करने से भी गुरेज नहीं कर रहा है. वैसे कहा भी जाता है कि मुख्यधारा की मीडिया में मोदी और योगी के प्रति प्रेम इस कदर उमड़ा है कि इनके अलावा देश में कोई दूसरा कायदे का नेता ही नहीं नजर आता है. फिलहाल सोशल मीडिया पर ईटीवी की इस गंभीर चूक को लेकर लोग खूब मजे ले रहे हैं.[साभार भड़ास फॉर मीडिया ]

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Dakhal News 1 July 2017


इंडिया टीवी की हालत ख़राब ,पहुंचा पांचवे नंबर पर

इस साल के 25 सप्ताह बीत जाने पर सबसे ज्यादा नुक्सान रजत शर्मा के इंडिया टीवी को हुआ है। चैनल पहले नंबर से खिसक खिसक पर पांचवे नंबर पर पहुँच गया है।  इंडिया टीवी की जितनी हालत अजीत अंजुम के आने के बाद ख़राब हुई है इतनी बुरी स्थिति उसके शुरुवाती दौर 2004 में भी नहीं रही। इंडिया टीवी के सूत्र बताते हैं अजीत अंजुम की कार्यप्रणाली से वहां का सारा स्टाफ नाराज़ है और उनकी चैनल में फैलाई गुटबाजी का नतीजा चैनल को भोगना पड़ रहा है। खबर तो यहाँ तक है कि अजीत अंजुम अपनी कार्यप्रणाली नहीं ठीक करते हैं तो इंडिया टीवी प्रबंधन तत्काल उनका विकल्प खोजना पडेगा। इंडिया टीवी के हाल इस कदर ख़राब हुए हैं कि अब न तो उसके पास दमदार ख़बरें न ही कोई बड़ी ब्रेकिंग ख़बरें। चैनल के रिपोर्टर भी सुस्त पड़े हैं और किसी का भी बड़ी ख़बरों  से कोई लेनादेना नजर नहीं आता है।    नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 25 Aaj Tak 16.6 dn 0.3  Zee News 15.0 up 0.7  ABP News 12.3 up 0.4  News18 India 10.8 up 0.3  India TV 10.1 dn 0.6  News Nation 9.8 dn 0.7  India News 9.3 up 0.1  News 24 7.2 dn 0.3  Tez 3.4 up 0.1  NDTV India 3.0 up 0.2  DD News 2.5 up 0.2    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.4 same   Zee News 15.6 up 0.5  News18 India 12.0 up 0.4  ABP News 11.7 up 0.2  India TV 10.7 dn 0.8  News Nation 9.4 dn 0.6  India News 8.1 dn 0.1  News 24 6.7 dn 0.2  NDTV India 3.8 up 0.5  Tez 3.7 up 0.1  DD News 2.0 dn 0.1   मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 25   Zee                       61.7 Etv.                        23.9 Ibc 24                   10.5 Sahara  sa            1.6 Bansal                   1.0  

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Dakhal News 29 June 2017


एबीपी न्यूज़  जीएसटी

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में  जी.एस.टी. पर एबीपी न्यूज़ द्वारा आयोजित चर्चा में कहा कि जी.एस.टी. राज्य और देश के आर्थिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। जी.एस.टी. से देश का फायदा होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नई सोच और पहल एवं वित्त मंत्री  अरुण जेटली के अथक प्रयास के कारण ही जीएसटी लागू होने से एक देश और एक कर व्यवस्था पूरे देश में आगामी एक जुलाई से लागू होगी। श्री चौहान ने कहा कि 30 जून को रात्रि 12 बजे पार्लियामेंट हाउस के प्रांगण में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी नई कर व्यवस्था का शुभारम्भ करेंगे। यह एक ऐतिहासिक पल होगा जिसजी.एस.टी. राज्य और देश के आर्थिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होगा से जनता को 16 करों और उपकरों से आजादी मिलेगी, 1150 चुंगियों से निजात मिलेगी, टैक्स पर टैक्स लगने से आजादी मिलेगी, टैक्स ऑफिस के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और पूरे देश में अलग-अलग कीमतों से छुटकारा मिलेगा तथा कर की जटिलताओं से आजादी मिलेगी। श्री चौहान ने बताया कि जी.एस.टी. लागू होने से कारोबार करना और आसान हो जायेगा। नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि किसान सबसे बड़ा उपभोक्ता है वह भी इस नई कर प्रणाली से लाभ उठायेगा। आम आदमी के उपयोग की वस्तुओं के दाम घटेंगे और महँगाई कम होगी। वहीं दूसरी तरफ विलासिता वाली चीजों के दाम बढ़ेंगे। आम आदमी को राहत मिलेगी। नाके और चेक-पोस्ट खत्म होंगे। छोटे व्यापारियों को लाभ होगा। इंस्पेक्टर राज की समाप्ति होगी। उन्होंने बताया कि नयी कर प्रणाली से जुड़ी राज्यों की सभी आशंकाओं का निराकरण किया जा चुका है। इसके बाद भी जी.एस.टी. काउंसिल में राज्यों के वित्त मंत्रियों के माध्यम से शेष आशंकाओं को दूर किया जा सकेगा। श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा प्रत्येक स्तर पर जी.एस.टी. हेल्प डेस्क बनाई गई है। इस तरह की हेल्प डेस्क की संख्या 101 है। विभाग के अधिकारियों को जी.एस.टी. का प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा पूरे प्रदेश में लगभग 300 से अधिक कार्यशालाएँ आयोजित की गई हैं जिसमें नई कर प्रणाली जी.एस.टी. की बारीकियों को समझाया गया है। जी.एस.टी. के आने से राज्यों की आय में वृद्धि होगी और राज्य का विकास होगा।  

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Dakhal News 28 June 2017


पत्रकार राघवेंद्र की कलम से

राघवेंद्र सिंह राजनीति में एक जमाना था खास तौर पर कांग्रेस में, जब यह जुमला चलता था खाता न बही केसरी कहे वही सही... केसरी से तात्पर्य श्री सीताराम केसरी था। केसरी कांग्र्रेस के कोषाध्यक्ष थे बाद में वे राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। कांग्र्रेस सत्ता में थी और सत्ताधारी दल के पास नामी-बेनामी चंदा बहुत आता है। सो उनके पास भी पैसे देने वालों की रेलमपेल मची रहती थी। मगर सत्ता के तमाम दुर्गुणों से भरी कांग्रेस में काजल की कोठरी में बैठे केसरी जी जो कहे वह सही माना जाता था। इसके पीछे नेतृत्व, कार्यकर्ता और जनता का भरोसा होना बड़ी बात थी। मगर यह गुजरे जमाने की बात हो रही है। अब सबसे ज्यादा संकट भरोसे का है और यह हर दिन टूट रहा है। यह मुसीबत तो देशव्यापी है मगर हम फोकस कर रहे हैैं मध्यप्रदेश पर। सत्ता संगठन और नौकरशाही ....सब के सब चाहते हैैं कि जो वह कहे वही सही लेकिन कोई ऐसा केसरी नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस भी अपने केसरी की तरह नहीं। वह जनता के लिये संघर्ष करने एकजुट होने की बही तो खोलती है लेकिन खाते में सब सही नहीं दिखता। धर्म आधारित राजनीति का झंडा उठाने वाली भाजपा के धर्मराजों के रथ भी जो कभी जमीन से उपर चलते थे नीचे आ रहे हैैं। सात किसानों की मौत पर सत्ताग्र्रह करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उपवास पर ही प्रश्न खड़े हो चुके हैैं। वे किसान व जनहितैषी छवि को उजला करने के लिये पसीने-पसीने हो रहे हैैं। इसमें प्रदेश भाजपा और मंत्रीगण मदद तो कर रहे हैैं मगर अटपटी सी। प्रदेश अध्यक्ष नंदू भैया कहते हैैं किसानों की आत्महत्या के पीछे कर्ज को कारण बताना फैशन हो गया है। यह जख्मों पर नमक जैसा लगता है। कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन कहते हैैं दो सौ करोड़ की प्याज किसानों से खरीदेंगे भले ही भंडारण के अभाव में वह सड़ जाये। तेरह साल की सरकार भंडारण की व्यवस्था नहीं कर पाई, उचित दाम तय नहीं कर पाई जबकि उसका वादा दावा था कि किसानी लाभ का धंधा बनायेंगे और वह बन गया आत्महत्या का धंधा। विश्वास के टूटने की हजारों हजार वजहों में एक बड़ी वजह है। आमजन 2003 से भरोसा करके ही भाजपा को वोट देते आ रहे हैैं।  लेकिन खेती को लाभ का धंधा बनाने की तोता रटंत झूठ ही साबित हो रही है। भोला किसान इस सदमे को सह नहीं कर पा रहा है और उसकी आत्महत्या को सत्ताधारी दल तरह तरह के नाम दे रहे हैैं। इससे मुख्यमंत्री की छवि और भाजपा का ब्रांड मटियामेट हो रहा है। नेताओं के टूटते भरोसे के बीच करेला और नीम चढ़ा यह हो रहा है कि नौकरशाही ने झूठ बोलने में नेताओं को भी मात दे दी है। सबसे भयानक उदाहरण मंदसौर किसान गोलीकांड का है। जिसमें कलेक्टर एसपी तो होम मिनिस्टर से लेकर सीएम तक से झूठ बोलते रहे हैैं कि आंदोलनकारी किसानों की मौत पुलिस गोली से नहीं हुई। हालांकि बाद में सरकार ने स्वीकार किया पुलिस से ही किसान मरे। यह अपराध करने वाले कलेक्टर एसपी पंद्रह दिन बाद सस्पेंड किये गये। अभी इस सदमे से सूबा और सरकार उबरे भी नहीं थे कि भोपाल के कलेक्टर (अब इंदौर) निशांत बरबड़े ने अपने वरिष्ठ अफसरों को बता दिया कि किसानों से खरीदी गई हजारों क्विंटल प्याज का नब्बे फीसदी परिवहन हो गया है। वे सीएम की आंख के तारे अफसर हैैं सो भोपाल सिम्मी जेल तोड़ कांड के बाद भी उन्हें राज्य की आर्थिक राजनीति इंदौर की कमान लगता है इन्हीं काबिलियत भरी बातों के कारण सौैंप दी गई। हालांकि मुख्य सचिव वी.पी. सिंह ने तंज कसा कि यही है सक्सेसफुल अफसर की निशानी। लेकिन यहां मुख्य सचिव थोड़ा कमजोर साबित हुये उन्होंने सदन में गलत जानकारी देने से लेकर गोलीकांड और प्याज परिवहन के मसले पर कठोर कार्रवाई नहीं की।  ऐसी तमाम कमजोरियों के लिये कार्रवाई नहीं करने के लिये इतिहास में नेता-अफसरों को दागी के रूप में याद किया जायेगा। अफसर झूठ बोल रहे हैैं साथ ही नेताओं पर अवांछित टिप्पणी कर नियम कायदों का उल्लंघन कर रहे हैैं। लगता है कोई देखने सुनने वाला नहीं है। भाजपा का टूटता विधान नियम अनुशासन से चलने वाली प्रदेश भाजपा में लगता है स्वेच्छाचारिता हावी है। बयानवीरों को छोड़ दें  तो संगठन चलाने वालों का रवैया ऐसा है मानो वे पालिटिकल टूरिज्म पर आये हैैं। प्रदेश युवा मोर्चा पार्टी संविधान के बाहर जाकर निर्णय कर रहा है। मनमाने तरीके से तेरह समितियां गठित कर दीं। उस पर एतराज के बाद मोर्चा अध्यक्ष का बयान आता है कि जिन्हें आपत्ति है वे अपने पदों से त्यागपत्र दे दें। ऐसा लगता है पार्टी में इवेंट का नशा उसे जन संगठन के बजाये प्राइवेट प्रापर्टी में बदल रहा है। यह बीमारी प्रदेश भाजपा को भी लगी है। इसकी एक मिसाल यह है कि परंपरा के मुताबिक जिला भाजपा अध्यक्षों के द्वारा अपने जिले में भाजयुमो से लेकर अन्य मोर्चो की इकाइयां घोषित की जाती हैैं। ताकि वे मोर्चा उनके आग्र्रह पर पार्टी हित में काम करे। इसे समझने के लिये एक उदाहरण यह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ही प्रदेश के मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा करते हैैं न कि राष्ट्रीय अध्यक्ष। अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश के मोर्चा अध्यक्षों का ऐलान दिल्ली से  करे तो केसा रहेगा? होगा यह कि दिल्ली से घोषित मोर्चा अध्यक्ष अपने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की सुनेंगे ही नहीं। अब हो यह रहा है कि प्रदेश भाजपा कार्यालय से जिलों के मोर्चा अध्यक्षों की घोषणा हो रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जिला भाजपा अध्यक्षों की पकड़ से मोर्चा नेता निकल जायेंगे। वे मनमानी करेंगे तो उन्हें रोकने वाला कोई नहीं होगा क्योंकि वे तो प्रदेश नेतृत्व सीधे जुड़े हैं उनके द्वारा घोषित किये गये हैैं। इसके अलावा हर मोर्चा की कार्यकारिणी सदस्यों की संख्या जो कि अध्यक्ष समेत छियालीस होनी चाहिये उसका भी पालन नहीं हो रहा है। चिंताजनक यह है कि प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री से लेकर प्रदेश प्रभारी सब खामोश है। जबकि पार्टी विधान में पेज 32 के कालम छह में सब स्पष्ट है। मगर सब टूट फूट रहा है। नियम, परंपरा और भावनाएं भी...।

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Dakhal News 27 June 2017


इंडिया टीवी -अजीत अंजुम

इंडिया टीवी चैनल की टीआरपी लगातार गिरने से चैनल में हड़कंप मचा हुआ है. रजत शर्मा एंड कंपनी धांय-धूंय पर आमादा दिख रही है. सबसे भारी दबाव में अजीत अंजुम हैं. अंजुम जी के खासमखास आउटपुट हेड संत प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया है. अब अंजुम पर दबाव है कि हफ्ते-दो हफ्ते में टीआरपी दुरुस्त करो वरना जाओ. बताया जा रहा है कि अजीत अंजुम ने अपने खास लोगों को इशारा कर दिया है कि जो अपनी जहां व्यवस्था कर पा रहा हो, कर ले. उधर, चर्चा है कि शाजी जमां या विनोद कापड़ी में से कोई एक इंडिया टीवी आ सकता है. विनोद कापड़ी लगातार फ्लाप फिल्में बनाने से काफी संकट में आ गए हैं और आजकल शिद्दत से नौकरी तलाश रहे हैं. पर उनके अतीत को देखते हुए कहीं कोई घास नहीं डाल रहा. ऐसे में वह अपने पुराने बॉस रजत शर्मा के पास रिरियाते हुए पहुंचे. कहा जा रहा है कि विनोद कापड़ी के चाल चरित्र चेहरे को देखते हुए इंडिया टीवी प्रबंधन उन्हें पूरा दायित्व नहीं देना चाह रहा. इसलिए संभव है कि वे संपादकीय सलाहकार टाइप का कोई पद पा जाएं. हालांकि यह अभी तक फाइनल नहीं है कि उनकी इंट्री किसी भी रूप में इंडिया टीवी में हो रही है या नहीं.  हां, रजत शर्मा और विनोद कापड़ी के बीच एक लंबी बैठक हो चुकी है, यह तो कनफर्म है. शाजी जमां एबीपी न्यूज से इस्तीफा देने के बाद से खाली बैठे हैं. अकबर पर एक किताब लिखने के बाद शाजी जमां किसी उपयुक्त मंच की तलाश में हैं. पर इंडिया टीवी का जो भाजपाई तेवर है, उसमें शाजी जमां वहां खुद को कैसे एडजस्ट करेंगे या रजत शर्मा उन्हें लाने को कितना उत्सुक होंगे, ये दोनों सवाल मुंह बाए खड़े हैं. इंडिया टीवी के सूत्रों का कहना है कि अजीत अंजुम को प्रबंधन ने दो हफ्ते का नोटिस दे रखा है. खासकर रजत शर्मा की पत्नी रीतू धवन बहुत नाराज चल रही हैं और उन्होंने इंडिया टीवी के पांच नंबर पर लुढ़क कर गिरने के बाद अजीत अंजुम की लंबी क्लास ली है. ज्ञात हो कि अजीत अंजुम इंडिया टीवी में आने के बाद यहां काम कर रहे कई पुराने लोगों की नौकरी खा चुके हैं और अपने कई खास लोगों की भर्ती कर चुके हैं. बावजूद इसके टीआरपी न आने से प्रबंधन नाराज है. उधर, चौथी दुनिया में लंबे समय से कार्यरत मनीष कुमार ने भी इंडिया टीवी ज्वाइन कर लिया है. मनीष लंबे समय तक चौथी दुनिया के एडिटर इन चीफ संतोष भारतीय के खासमखास हुआ करते थे.[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]  

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Dakhal News 26 June 2017


इंडिया टीवी की हालत पतली

इण्डिया टीवी की हालत लगातार पतली हो रही है ,रजत शर्मा का जादू भी दर्शकों पर असर नहीं डाल पा रहा है और ऐसे में कमजोर खबरदारी ने सात साल में पहली बार उसे चौथे नंबर पर धकेला है। वहीँ एबीपी न्यूज़ भी कुछ ख़ास नहीं कर पाया। ऐसे में आजतक नंबर वन और ज़ी न्यूज़ नंबर दो की पोजीशन पर कायम है।  नेशनल न्यूज़ चैनल Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 24 Aaj Tak 16.8 up 0.2  Zee News 14.3 dn 0.3  ABP News 12.0 dn 0.5  India TV 10.7 dn 0.1  News18 India 10.5 dn 0.1  News Nation 10.5 same   India News 9.2 up 0.2  News 24 7.5 up 0.5  Tez 3.3 up 0.3  NDTV India 2.9 dn 0.1  DD News 2.3 dn 0.1    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.4 dn 0.2  Zee News 15.0 dn 1.2  News18 India 11.6 up 0.6  ABP News 11.5 dn 0.2  India TV 11.5 up 0.1  News Nation 10.0 up 0.4  India News 8.2 up 0.4  News 24 6.9 up 0.2  Tez 3.6 up 0.2  NDTV India 3.3 dn 0.2  DD News 2.1 dn 0.1 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 24   Zee                       72.4 Etv.                        13.7 Ibc 24                    9.4 Sahara  sa            2.8 Bansal                   0.8

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Dakhal News 22 June 2017


राज्य सभा टीवी

राज्य सभा टीवी में जॉब की चाह रखने वालों के लिए सुनहरा मौका है। यहां विभिन्न पदों के लिए आवेदन निकाले गए हैं, जिसके लिए उसने वॉक इन इंटरव्यू/स्किल टेस्ट का सिस्टम अपनाया है। ये पोस्ट प्रड्यूसर (हिंदी), असोसिएट कॉपी एडिटर (न्यूज मीडिया- हिंदी व अंग्रेजी), सीनियर एंकर (हिंदी), एंकर (हिंदी), सीनियर गेस्ट कोआर्डिनेटर, गेस्ट कोआर्डिनेटर, जूनियर गेस्ट कोआर्डिनेटर, विडियो लाइब्रेरियन, विडियो लाइब्रेरियन  के लिए निकाली गई हैं। बता दें कि इन पदों के लिए 21 से 58 साल तक के योग्य व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवारों को राज्य सभा टीवी की वेबसाइट पर मौजूद फॉर्म डाउनलोड कर भरने के बाद इंटरव्यू के लिए दी गई तारीखों पर राज्य सभा टीवी के नीचे दिए ऑफिस में पहुंचना है। इसके आवेदन फॉर्म के साथ सेल्फ अटेस्ट किए हुए क्वॉलिफिकेशन डॉक्युमेंट्स की कॉपीज ले जानी जरूरी है। ओरिजनल क्वॉलिफिकेशन डॉक्युमेंट्स नहीं ले जाने हैं। अधिक जानकारी के लिए आप लिंक http://rajyasabha.nic.in/rsnew/rstv/rstvrec.pdf पर क्लिक कर सकते हैं या फिर नीचे पढ़ सकते हैं: पता: Rajya Sabha Television, 3rd Floor, Talkatora Stadium Annexe Building, New Delhi-110001

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Dakhal News 21 June 2017


किशन कृष्णा युवक मंडल

  जनसंपर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज किशन कृष्णा युवक मंडल, ग्वालियर की स्मारिका का विमोचन किया। इस अवसर पर स्मारिका के संपादक श्री सौरभ सक्सेना सहित पत्रकार श्री संजय जैन, श्री संतोष हिंगणकर उपस्थित थे।

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Dakhal News 20 June 2017


tv एंकर

अरशद अली खान  एक जमाना था, जब दूरदर्शन ही था, तब प्रतिमा पुरी, मुक्ता श्रीवास्तव, सलमा सुलतान और जेवी रमन ही खबर वाचन किया करते थे। वे ही एंकर होते थे, वे ही वाचक होते थे। उनके चेहरे हमेशा खबर देने की जिम्मेदारी के प्रति एकदम सजग दिखते और अंत में मुस्कुरा कर विदा लेते। जब निजी खबर चैनल आए तब भी दो हजार सात आठ तक एंकर खबर देते, चरचा कराते। इनमें एक अनुशासन रहता। एनडीटीवी में बरखा दत्ता का ‘‘वी द पीपल’ या विक्रम चंद्रा का ‘‘बिग फाइट’ तीखी बहसें कराते, लेकिन एंकर संतुलित और संयोजक की भूमिका में ही रहते।लेकिन जब अन्ना आंदोलन दिन-रात कवर हुआ, रामदेव का अनशन लाइव चौबीस बाई सात के भाव से कवर हुआ, जब निर्भया कवरेज हुआ तो एंकरों की मुखमुद्रा बदलने लगी। वे दिन भर बैठते। फील्ड से आतीं रपटों को कंट्रोल करते। बहसें कराते और अांदोलनकर्ता के भाव में आ जाते, आह्वानकर्ता बनने लगते। जनता से कहने लगते कि निकल पड़ो। चुप मत बैठो। कब तक सहोगे। जनता जवाब मांगती है। लाइनें खुली हैं। आप बताइए कि क्या करना है? यह चैनल और एंकरों और रिपोर्टरों के ‘‘एक्टिविस्ट’ ‘‘विजिलांत’ होने की शुरुआत थी। पगार पर काम करने वाले एंकरों और रिपोर्टरों को लगने लगा कि वे चाहें तो ‘‘एक धरने’ को आंदोलन बना सकते हैं। सरकार को मजबूर कर सकते हैं। वे चाहें तो एक बर्बर बलात्कार को एक राष्ट्रीय आंदोलन बना सकते हैं। वे समाज का ‘‘आईना’ बनने की जगह उसे ‘‘हांकने वाले’ बन गए! तब भी एंकरों के चेहरे उतने क्रुद्ध नहीं दिखते थे, जितने आज दिखते हैं जबकि आज एंकर किसी आंदोलन को हवा न देकर सिर्फ विपक्ष का एक्सपोजे ज्यादा कर रहे हैं। तब वे किस बात पर इतने नाराज, इतने भड़के हुए, इतने कुपित, इतने आक्रामक नजर आते हैं? तीन लाख से पचास लाख की पगार लेने वालों को इतना गुस्सा क्यों आता है? हमें दो-तीन कारण नजर आते हैं: एक : यह वह दौर है जिसमें ‘‘बदतमीज’ और ‘‘बदमिजाज’ की कीमत है (सौजन्य : सोशल मीडिया); दूसरा : एंकर और उनके चैनल अपनी खास आवाज, अपनी खबर की प्रस्तुति शैली की जगह अपने क्षुब्ध और क्रुद्ध चेहरे को ही अपना ब्रांड समझते हैं। तीसरा : अस्थायी और ठेके की नौकरी की अस्थिरता, कभी भी नोकरी जाने का डर, एंकरों व रिपोर्टरों को दिन-रात ‘‘अंतस्फोट’ की स्थिति में पहुंचाते रहते हैं। इसलिए भी वे गुर्राते दिखते हैं। कारण जो भी हो, एक-दो घंटे तक ऐसा गुर्राना अगर अभिनय भी है, तो भी सेहत के लिए तो हानिकारक हो ही सकता है। 

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Dakhal News 19 June 2017


अखबारों पर एक्शन

269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त होंगे सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने  स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार छोटे या मझौले अखबारों पर कार्रवाई नहीं कर रही है| केवल उन्हीं अखबारों पर कार्रवाई होगी जो केवल फाइलों में छपते हैं। दिल्ली में अपने अन्य मंत्रालय से जुड़ी एक प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा, ‘‘एक भी चलने वाला अखबार प्रभावित नहीं हुआ है| जो पेपर में पेपर हैं उन्हीं के ऊपर कार्यवाही की गई है| जो केवल विज्ञापन के लिए डीएवीपी के लिए छापे जाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे अखबारों को अलग रखा गया है जो नियमित छप रहे हैं| चाहे वह छोटा हो या बड़ा हो किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि एक तंत्र विकसित किया गया है कि अंग्रेजी, हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं के लिए डीएवीपी के तहत क्या ज़रूरी है । उन्होंने कहा कि एक छवि बनाई जा रही है कि हम छोटे अखबारों पर कारवाई कर रहे हैं| अगर किसी को लगता है कि उनके अखबार के साथ गलत हुआ है तो वह उनसे या उनके अधिकारी से मिलकर पुन: जांच का आग्रह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रिंटिंग प्रेस में 65 अखबार छप रहे हैं, क्या यह संभव है? हमने राज्यों से भी सहायता मांगी है कि वह प्रिंटिंग प्रेस के बिजली के बिल चेक करें| उसी से पता चल जाएगा कितने अखबार छप रहे हैं। पिछले काफी समय से मोदी सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है। आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दिया है। समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए।

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Dakhal News 18 June 2017


ifwj

सिंगरौली में  इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट की जिला इकाई के तत्वाधान में 20 मई से लगातार चलाये जा रहे आंदोलन को विराम लगा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सूर्य कांत शर्मा, एसडीएम श्री विकास सिंह, एस्सार प्रबंधन के जनसंपर्क अधिकारी श्री सुधांशु चर्तुवेदी, सिक्योरिटी चीफ श्री परमिन्दर सिंह तथा आईएफडब्लूजे के प्रतिनिधियों के बीच हुयी त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान मांगी गयी मांगो पर चर्चा की गयी। चर्चा के दौरान एस्सार प्रबंधन ने स्वीकार किया कि विस्थापितों के पुर्नवास में विसंगतियां है। उन्होंने पुर्नवास की विसंगतियों को सुधारने का वचन दिया।  हालांकि एस्सार प्रबंधन ने जो अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था उसमें उनके अनुसार पुर्नवास की समुचित व्यवस्था की गयी है। लेकिन कलमकारों तथा एसडीएम श्री विकास सिंह के तर्को का वे जवाब नहीं दे पाये।  एस्सार प्रबंधन के लिए हो रहे कोयला परिवहन के सवाल पर प्रबंधन ने विकल्प प्रस्तुत करते हुए बताया कि छ: माह के अंदर महुआगांव में कोल यार्ड की व्यवस्था की जायेगी तथा फिर वही से कोयले का परिवहन कराया जायेगा। ऐसी स्थिति में गोरबी से लेकर कर्सुआलाल तक हो रहे प्रदूषण पर भी पूर्ण विराम लगाया जा सकेगा।  प्रत्येक तीन महीने पर होगी कार्य समीक्षा वार्ता के दौरान लिखित रूप से तय किया गया कि एस्सार प्रबंधन प्रत्येक तीन माह पर सारी समस्याओं को लेकर शिविर का आयोजन करेगा। जिसमें प्रशासन तथा आईएफडब्लूजे के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जायेगा। विस्थापितों की समस्याओं को लेकर होने वाली इस मानीटरिंग बैठक में सारे लंबित मामले सुलझाये जायेंगे। इस संदर्भ में 20 जुलाई के आस-पास एस्सार प्रबंधन द्वारा नंदविहार में कैंप का आयोजन किया जायेगा।  कलमकारों का अभूतपूर्व आंदोलन प्रदूषण, बेरोजगारी, विस्थापन, पुर्नवास जैसी जन समस्याओं को लेकर कलमकारो का आंदोलनरत होना संभाग की ऐतिहासिक घटना कही जा सकती है। जिले में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण, बीमारियां, बेरोजगारी तथा विस्थापन जैसी संवेदनशील समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट के कलमकारो ने सड़क पर उतर कर 25 दिनो तक तपती दोपहरी में पंडाल में बैठकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन किया। प्रदूषण की रोकथाम, बेरोजगारो को नौकरी, विस्थापितों को पुनर्वास का लाभ दिलाने की इस मुहिम में वे अपने मुकाम तक पहुंचे। पत्रकारों का यह मिशन अनवरत जारी रहेगा। प्रबंधन के साथ सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बनाकर पीड़ितो को न्याय दिलाना पत्रकारो का उद्देश्य था आगे भी जारी रहेगा। मांगी गयी मांगो के क्रियान्वयन तक कलमकार अपनी प्रतिबद्धता कायम रखने के लिए प्रयासरत रहेंगे। पत्रकारों के इस आंदोलन में शिवसेना, ऊर्जांचल विस्थापित एवं कामगार यूनियन, माकपा, भाकपा तथा अन्य पत्रकार संगठनो ने भी अपना योगदान दिया।  त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सूर्यकांत शर्मा, एसडीएम श्री विकास सिंह, एस्सार प्रबंधन के जनसंपर्क अधिकारी श्री सुधांशु चर्तुवेदी, सिक्योरिटी चीफ श्री परमिन्दर सिंह के साथ आईएफडब्लूजे के प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री आरके श्रीवास्तव, संभागीय उपाध्यक्ष आरएन पांडेय, संभागीय उपाध्यक्ष सुरेश पांडेय, जिलाध्यक्ष विकास देव पांडेय, महासचिव राजकिशोर पांडेय, कोषाध्यक्ष शशिकांत कुशवाहा, जिला सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष विजय वर्मा, दीपक वर्मा आदि उपस्थित थे।    

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Dakhal News 16 June 2017


trp इंडिया टीवी चौथे नंबर पर

ज़ी टीवी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है इस सप्ताह उसकी टीआरपी 74. 8 रही है। वहीँ नेशनल चैनल में आज तक नंबर वन बना हुआ है। पूरी ताकत लगाने के बाद एबीपी तीसरे नंबर पर और रजत शर्मा का इण्डिया टीवी चौथे नंबर पर आ गया है। हिंदी भाषी इलाके में इण्डिया टीवी की रिपोर्टिंग टीम ने चैनल का भट्टा बैठा दिया है। मध्यप्रदेश ,राजस्थान ,यूपी ,बिहार में इण्डिया टीवी और एबीपी के दर्शक तेजी से घटे हैं।    BARC MARKET SHARE THIS WEEK IN MPCG:  ZEE MPCG 74.8 %,  ETV 11.7%,  IBC 7.8%   Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 23 Aaj Tak 16.7 up 0.2  Zee News 14.6 dn 0.5  ABP News 12.5 up 0.3  India TV 10.8 dn 0.1  News18 India 10.6 up 0.1  News Nation 10.5 up 0.2  India News 9.0 dn 0.1  News 24 7.0 up 0.2  Tez 3.1 dn 0.3  NDTV India 2.9 up 0.1  DD News 2.4 same     TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.5 up 1.1  Zee News 16.2 dn 0.5  ABP News 11.7 up 0.2  India TV 11.4 dn 0.3  News18 India 11.0 dn 0.7  News Nation 9.6 up 0.1  India News 7.8 same   News 24 6.7 up 0.5  NDTV India 3.5 same   Tez 3.4 dn 0.3  DD News 2.2 up 0.1

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Dakhal News 15 June 2017


jitu patvari

  कांग्रेस नेता जीतू पटवारी की पत्रकार वार्ता को भोपाल के दो प्रमुख समाचार पत्रों में नहीं मिला स्थान। बताया जा रहा है मध्यप्रदेश सरकार के एक प्रमुख अधिकारी ने दो प्रमुख समाचार पत्रों को कहा था कि जीतू पटवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस न छापें और बाद में ऐसा ही हुआ।  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य जीतू पटवारी पत्रकारों से बात कर रहे थे। वह उन आरोपों का खंडन कर रहे थे जिसमे कुछ आन्दोलनकारी किसान युवकों के बारे में कहा जारहा है कि उनके नाम पर एक इंच ज़मीन भी नहीं है तो फिर वह किसान कैसे हो सकते हैं। पटवारी ने स्पष्ट किया कि देश - प्रदेश में लाखों युवा ऐसे हैं जिनके नाम पर ज़मीन नहीं है, ज़मीन उनके पिता चाचा अथवा दादा - काका के नाम पर है, लेकिन यह बात सिर्फ किसान ही समझता है। कांग्रेस नेता ने शिवराज के उपवास को भाजपा नेता - कार्यकर्ता सम्मलेन करार देते हुए कहा कि उस कार्यक्रम में भाजपा के लोगों का जमावड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिवराज जी का उपवास तुड़वाने के लिए जिस किसान के आने की बात कही गयी है, उसका जवान बेटा पुलिस की गोली से मारा गया है और उसकी अभी तेरवीं भी नहीं हुयी है। पटवारी ने सवाल किया कि कौन पिता तेरवीं से पहले मुख्यमंत्री का उपवास तुड़वाने आएगा ? उन्होंने आरोप लगाया कि उस किसान को विधायक - अधिकारी डरा - धमका कर भोपाल लाए थे।  इसके अलावा भी जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार पर बहुत गंभीर आरोप लगाए।  लेकिन पत्रकारिता का दुर्भाग्य देखिये अपने आपको पत्रकारिता का सूरमा समझने वाले राजधानी के दो प्रमुख समाचार पत्रों ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेता की इस पत्रकार वार्ता को अपने अखबार में ही स्थान नहीं दिया।  

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Dakhal News 14 June 2017


shiv sena-shivraj

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह निशाने पर आ गए हैं। इस बार शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए लिखा है कि पहले तो किसानों पर गोली चलाई और अब उपवास का ड्रामा किया जा रहा है। सामना के संपादकीय में छपे लेख के मुताबिक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माहात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान को एक बेकार मुख्यमंत्री के तौर पर देखा गया। किसानों, महिलाओं और आम लोगों के लिए कल्याणकारी नीतियों के बावजूद किसान आंदोलन कर रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। शिवसेना ने कहा कि शिवराज ने कभी किसानों का कभी अपमान नहीं किया और न प्रदर्शन को समाज-विरोधी गतिविधि कर कोई राजनीति करने की कोशिश की। शिवसेना ने कहा कि जब दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में आंदोलन का आह्वान किया तो बीजेपी ने अपना डबल स्टैंडर्ड दिखाया। शिवसेना ने कहा, 'हाल ही में बीजेपी ने केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले दिल्ली के सीएम की आलोचना की। उन्हें प्रदर्शन करने की जगह नीतियों को सुलझाने कहा गया।' संपादकीय के मुताबिक, 'यह शिवराज सिंह चौहान पर भी लागू होता, जो कि फास्ट पर जाकर महात्मा गांधी की विचाराधारा का अनुसरण कर रहे हैं। क्या गाधी की विचाराधारा का अनुसरण करने से हर समस्या का समाधान हो जाएगा? पहले वे बुलेट चलाते हैं,फिर फास्ट पर जाते हैं।' उल्लेखनीय है कि कर्जमाफी और एमएसपी की मांग को लेकर मंदसौर में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। इन प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी जिसमें 5 किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद किसानों का आंदोलन राज्य के दूसरे हिस्से में भी फैल गया।   

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Dakhal News 12 June 2017


अरुण शौरी

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्तनशीं था, उसको भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था. शुक्रवार की शाम दिल्ली के प्रेस क्लब में इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक और लेखक अरुण शौरी ने जब पाकिस्तानी शायर हबीब जालिब का ये शेर पढ़ा तो वहाँ मौजूद 500 से ज़्यादा पत्रकारों को मालूम था कि शेर दरअसल किसके लिए पढ़ा गया है. उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट से शेर का स्वागत किया. प्राइवेट टीवी चैनल एनडीटीवी के प्रोमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के घर और दफ़्तरों पर पिछले हफ़्ते सीबीआई के छापों के ख़िलाफ़ दिल्ली के पत्रकारों की ये दुर्लभ बैठक थी और अरुण शौरी के सीधे निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे. हिंदुत्व की राजनीति के वो अकेले बुद्धिजीवी हैं जो खुले मंच पर नरेंद्र मोदी का नाम लेकर उनकी आलोचना करते हैं और मज़ाक उड़ाते हैं. पिछले तीन बरस में पत्रकारों को मोदी के साथ कई बार सेल्फ़ी खींचने की होड़ लगाते देखा गया है, लेकिन दिल्ली में उनकी ओर से विरोध की ये पहली तीखी आवाज़ थी. अपनी बात की शुरुआत में अरुण शौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया कि "मोदी के कारण इतनी बड़ी संख्या में पुराने दोस्त यहाँ इकट्ठा हुए हैं." उन्होंने ये बातें प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ से सिर्फ़ डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर प्रेस क्लब में कहीं. और अगर मोदी की टीम ने इस बैठक का नोटिस नहीं लिया या इसको उसी तरह अपने ठहाके लगाकर हवा में उड़ा दिया जैसा कि वो राहुल गाँधी की राजनीति को हवा में उड़ाते हैं तो इसका सिर्फ़ एक ही मतलब है कि ये सरकार धरातल से छह इंच ऊपर तैर रही है. मंच पर वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर, एचके दुआ, शेखर गुप्ता, प्रणय रॉय के साथ क़ानूनविद् फली एस नरीमन आदि वो लोग बैठे थे जिनमें से ज़्यादातर ने इंदिरा गाँधी की इमर्जेंसी का दौर देखा था. तब बोलने की आज़ादी ख़त्म कर दी गई थी और प्रेस की आवाज़ दबा दी गई थी. हबीब जालिब का शेर पढ़ने के बाद अरुण शौरी ने मुस्कुराते हुए कहा कि ये पाकिस्तानी शायर का शेर था, पर मैं ख़ुद को बचाने के लिए गुरुग्रंथ साहिब में लिखी बात कहता हूँ: राम गयो, रावण गयो- जा के बहु परिवार. और थोड़ा रुककर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- "राम गए, रावण गए… ये भी जाएँगे." अरुण शौरी और कुलदीप नैयर जैसे पत्रकार 1988 में भी सत्ता का प्रतिकार करने को ठीक इसी जगह पर एकजुट हुए थे जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने मानहानि विधेयक लाकर प्रेस (तब प्राइवेट टीवी चैनल नहीं हुआ करते थे) पर लगाम लगाने की कोशिश की थी. प्रेस बिल के ख़िलाफ़ विरोध जताने के लिए दिल्ली के पत्रकारों ने इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक जुलूस निकाला था जिसमें कई नामी-गिरामी संपादक शामिल हुए थे. सफ़ेद कुर्ता और धोती पहने रामनाथ गोयनका इस जुलूस की सबसे अगली क़तार में चले थे. उन दिनों राजीव गाँधी के मीडिया मैनेजरों ने बड़े जतन से उनकी 'मिस्टर क्लीन' की छवि गढ़ी थी. उनके पास लोकसभा में जैसा बहुमत था वैसा नरेंद्र मोदी के पास आज भी नहीं है. पर राजीव गाँधी को इस सबका कोई फ़ायदा नहीं हुआ. इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर पर सवार होकर सत्ता में पहुँचे राजीव गाँधी की 'गुडविल' मुट्ठी की रेत की तरह तेज़ी से छीजी जा रही थी. राजीव गाँधी के मंत्री जिस शहर में जाते उनसे सबसे पहले सवाल पूछा जाता कि क्या आप मानहानि विधेयक का समर्थन करते हैं या नहीं? अगर मंत्री गोलमोल जवाब देते या कहते कि हाँ, तो बिना कुछ कहे सभी पत्रकार चुपचाप उठकर प्रेस कांफ़्रेंस से बाहर आ जाते. ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक राजीव गाँधी ने अपनी कैबिनेट की बैठक बुलाकर मानहानि विधेयक को वापिस लेने का ऐलान नहीं कर दिया, हालाँकि इसे लोकसभा में पास किया जा चुका था. शुक्रवार को प्रेस क्लब में अरुण शौरी ने उन पुरानी घटनाओं को याद किया और पत्रकारों से नरेंद्र मोदी के मंत्रियों के लिए भी यही नुस्ख़ा अपनाने को कहा. उन्होंने कहा,"बॉयकॉट कीजिए. उनकी (मंत्रियों की) प्रेस कांफ़्रेंस का बॉयकॉट कीजिए. उन्हें (यानी मंत्रियों को) अपने किसी समारोह या सभा में आमंत्रित मत कीजिए." शौरी ने मीडिया के साथ नरेंद्र मोदी सरकार के रिश्तों पर बिना लाग लपेट के अपनी बात कही. उन्होंने कहा मोदी सरकार ने कई तरह से मीडिया को चुप कराने या उसे बहलाने की कोशिश की- "पहले विज्ञापन देकर मीडिया का पेट भरा- एक ज़ुलू कहावत है कि कुत्ते के मुँह में हड्डी डाल दो तो वो भौंकना बंद कर देता है. और अब भय फैलाया जा रहा है कि 'मोदी सब कुछ सुन रहे हैं'. 'अमित शाह सीबीआई को कंट्रोल करते हैं'." अपनी बात के आख़िर में उन्होंने कहा, "भारत में जिस किसी ने प्रेस के ख़िलाफ़ हाथ उठाया है, उसका हाथ जल गया है और उसे अपना हाथ वापिस खींचना पड़ा है." अरुण शौरी के ऐसे तेवर तब दिखाई पड़ते थे जब वो इमरजंसी और उसके बाद के दिनों में मानवाधिकार आंदोलनों में सक्रिय थे और सरकारें उन्हें चुप कराने की कोशिश करती थीं. अस्सी के दशक में जब इंडियन एक्सप्रेस के संपादक के तौर पर उन्हें हिंदुस्तान का सबसे बड़ा प्रतिष्ठान विरोधी पत्रकार माना जाता था. आम तौर पर एक्टिविज़्म या राजनीतिक विचारधाराओं के विवाद से दूर रहने वाले प्रणय रॉय तक का चेहरा बोलते वक़्त तमतमा उठा और उन्होंने मौजूद पत्रकारों से कहा - "अगर आप इनके सामने रेंगने लगे तो ये आप को छोड़ेंगे नहीं. लेकिन अगर आप डिगे नहीं और इनके सामने तने रहे तो आपको ये परेशान नहीं कर पाएँगे." इंडिया टुडे ग्रुप के संपादक और मालिक अरुण पुरी ने एक लिखित बयान जारी करके एनडीटीवी का खुलकर समर्थन किया, बुज़ुर्ग हो चले कुलदीप नैयर ने सत्ताधीशों के साथ अपने संघर्षों को याद किया, शेखर गुप्ता, ओम थानवी और कई दूसरे पत्रकारों ने मीडिया हाउस पर सीबीआई के छापे को आने वाले काले दिनों का संकेत बताया, कुलदीप नैयर ने कहा कि मैं सोचता था कि इमर्जेंसी के बाद अब ये और इमर्जेंसी नहीं लगाएँगे मगर इन्होंने फिर से वैसा ही कर दिया. और क़ानूनविद् फली एस नरीमन ने नात्सी विरोधी जर्मन पादरी मार्टिन निमोलर की वो प्रसिद्ध कविता सुनाई: पहले वो कम्युनिस्टों को दबोचने आए, पर मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था… पर तीन बरस में क्या हुआ कि देश के बड़े संपादक मोदी की नाव के चप्पू चलाने की बजाए उनके सामने कमर पर हाथ रखकर खड़े हो गए हैं? एनडीटीवी और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच की कड़वाहट कुछ वैसी ही होती जा रही है जैसी इमरजेंसी में और उससे पहले इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप और इंदिरा गाँधी के बीच हो गई थी. इंदिरा गाँधी जब एक्सप्रेस की पत्रकारिता को क़ाबू में करने में नाकाम रहीं तो उन्होंने एक्सप्रेस के मैनेजमेंट को हड़पने की कोशिश की. उनकी हत्या के बाद राजीव गाँधी और एक्सप्रेस के बीच भी वैसी ही कड़वाहट जारी रही. राजीव ने एक्सप्रेस ग्रुप पर और रामनाथ गोयनका के सुंदरनगर गेस्ट हाउस पर सीबीआई, इनकम टैक्स और एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट के छापे डलवाए. बाद की घटनाओं ने साबित कर दिया कि इस लड़ाई में न इंदिरा गाँधी जीतीं और न ही राजीव गाँधी. अरुण शौरी ने ठीक कहा कि जब भी सत्ताधीशों ने मीडिया पर हाथ डाला है तो उनका हाथ जला ही है. इंदिरा गाँधी को इमरजेंसी का भुगतान करना पड़ा और रोड रोलर बहुमत के दम पर मीडिया की बाँह मरोड़ने की हिम्मत करना राजीव गाँधी को भी भारी पड़ा. ये कोशिश उनसे पहले बिहार के काँग्रेसी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र ने भी की थी और अपनी इसी कोशिश में उन्होंने बिखरे हुए मीडिया को एकजुट करने में मदद की. ठीक यही काम आज भी हो रहा है वरना शेखर गुप्ता, राज चेंगप्पा, अरुण पुरी और यहाँ तक कि ख़ुद प्रणय रॉय कब से सत्ता-प्रतिष्ठान विरोधी पत्रकार हो गए? इन सबका पाँच सौ पत्रकारों की मौजूदगी में कुलदीप नैयर और अरुण शौरी के साथ एक मंच पर बैठना ही ये साबित करता है कि नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के नॉन-स्टॉप बोलने वाले तमाम प्रवक्तागणों ने एनडीटीवी को भारत में प्रेस की आज़ादी का प्रतीक बना दिया है. देश में इमरजेंसी न होने के बावजूद बीजेपी सरकार ने एनडीटीवी को अपनी स्क्रीन काली करके विरोध दर्ज करने का मौक़ा दिया और अब सीबीआई के छापे डलवाकर प्रेस और सरकार के बीच एक नए और खुले द्वंद्व का बीज बो दिया है. पिछले तीन बरस में शायद ही किसी राजनीतिक पार्टी के किसी नेता ने मोदी और उनकी सरकार पर इतना सीधा और तीखा हमला बोलने की हिम्मत की हो. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ज़रूर 'घुस कर मारूँगा' की तर्ज़ पर राजनीति की शुरुआत की थी पर पंजाब, गोवा विधानसभा चुनावों और दिल्ली के स्थानीय चुनावों में हार के बाद वो भी चुप्पी साध गए हैं. क्योंकि उन्हें चुनावी राजनीति करनी है और वोटर फ़िलहाल नरेंद्र मोदी के बारे में कोई सवाल सुनने के मूड में नहीं है. पर अरुण शौरी कोई अरविंद केजरीवाल नहीं हैं. उन्हें न कोई चुनाव लड़ना है, न किसी वोट बैंक को मनाए रखने के लिए सोच समझ कर, सधी भाषा में बोलना है. मोदी ने जिस तरह लालकृषण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा को बर्फ़ में लगाया उसी तरह शौरी को भी किनारे कर दिया. संघ परिवार से गर्भनाल का संबंध आडवाणी-जोशी का मुँह बंद रखने पर मजबूर करता है पर शौरी ने निक्कर-टोपी पहनकर संघ की शाखा में कभी ध्वज-प्रणाम नहीं किया. वो अगर अपनी पर उतारू हो गए तो हर फ़ोरम पर बोलने, लिखने और मोदी और उनके मंत्रियों का मखौल उड़ाने से उन्हें कौन रोकेगा? मसलन, मोदी के कैबिनेट मंत्री वेंकैया नायडू के बारे में उन्होंने कहा ही कि वेंकैया को तीसरी जमात की किताब से एक पन्ना लिखने को कहा जाए तो उन्हें नहीं आएगा और उनसे इंडियन एक्सप्रेस में लेख लिखवाए जाते हैं ! इसी तरह अरुण शौरी अभेद्य से लगने वाले मोदी के उस इमेज कवच को धीरे धीरे कुछ हद तक प्रभावहीन करने की ताक़त रखते हैं जो विज्ञापन और इमेज-मेकिंग कंपनियों ने कई वर्षों की मेहनत से तैयार किया है. अगर मोदी की इमेज के ये कवच-कुंडल एक बार उतर गए तो उन्हें हर मर्ज़ की दवा, हर सवाल का जवाब और हर समस्या का समाधान मानने वाले लोगों की नज़र बदलते देर नहीं लगेगी. लेकिन अभी वहाँ पहुँचने के लिए प्रेस और मीडिया पर कई छापे और डालने होंगे.[साभार ]

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Dakhal News 12 June 2017


news paper

सरकार ने  277 अखबारों की मान्यता खत्म कर दी है जो केवल विज्ञापन लेने के लिए  प्रकाशित करते थे। पिछले एक साल में इन प्रकाशनों ने करीब दो करोड़ रपए का विज्ञापन बटोरा है। एक-एक प्रिंटिंग प्रेस से 70 अखबार छापे जा रहे हैं। सरकार केवल आफिस कापी छापने वाले अखबारों से विज्ञापन की राशि वापस लेने की कार्रवाई भी शुरू कर सकती है और उन नौ प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है जो एक दिन में 70 से अधिक अखबार छाप रहे थे।सामान्य तौर पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के विज्ञापन पाने के लिए कुछ लोग प्रिंटिंग प्रेस, डीएवीपी और राज्यों के सूचना निदेशालयों के साथ मिलकर केवल आधिकारिक कापी छापते हैं और उनको दिखाकर विज्ञापन ले लेते हैं। डीएवीपी के नियम के अनुसार प्रत्येक प्रकाशक को हर महीने अपने अंकों को जमा करना होता है। छोटे अखबारों को सीए सर्टिफिकेट देने की भी छूट है। प्रकाशक डीएवीपी में जमा करने लायक ही अखबार छापते हैं और बाजार में उनकी उपस्थिति नहीं होती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू के निर्देश पर आरएनआई और डीएवीपी से अधिकारियों ने कुछ प्रिंटिंग प्रेस और अखबारों के कार्यालयों पर छापेमारी की। चार दिल्ली की और चार लखनऊ की प्रिंटिंग प्रेसों से 70-70 अखबार छापे जा रहे थे। एक प्रिंटिंग प्रेस को एक से अधिक अखबार छापना भारी पड़ जाता है। ऐसे में 70 से अधिक अखबार छापने पर डीएवीपी और आरएनआई ने 277 प्रकाशकों और प्रिंटरों को नोटिस भेजा जिसमें से 118 ने सफाई दी जबकि 159 ने नोटिस का जवाब ही नहीं दिया। डीएवीपी ने इन अखबारों की मान्यता खत्म कर दी। अब इन अखबारों को विज्ञापन नहीं दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि झूठे काजग-पत्रों के मार्फत इम्पैनलमेंट कराने और विज्ञापन हासिल करने पर इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इनसे विज्ञापन की राशि वापस ली जा सकती है। इन अखबारों ने अकेले वर्ष 2015-16 के दौरान दो करोड़ रपए के विज्ञापन ले लिए थे। डीएवीपी के जो लोग इस घपले में शामिल हैं उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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Dakhal News 10 June 2017


एनडीटीवी फाउण्डर प्रणय रॉय

एनडीटीवी के को-फाउण्डर प्रणय रॉय के यहां सीबीआई के छापे के बाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीटर पर हर्षातिरेक में किलक उठना गौरतलब है कि 'कानून का डर हर किसी के अंदर होना चाहिए, फिर वो चाहे कितनी बड़ी शख्सियत क्यों न हो?' स्वामी का ट्वीटर सरकारी भयादोहन की उन काली परछाइयों की ओर इशारा करता है, जो कूट-संरचनाओं की काली दीवारों पर राजनीतिक हिकमत के साथ मंडरा रही हैं। केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने इस छापे के बाद कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है। वैसे जब कानून अपना काम करता है, तो  लोगों को डर नहीं लगता है। डर उस वक्त पैदा होता है, जब कानून 'अपना' काम करने के बजाय 'सरकार' का काम करने लगता है।  स्वामी का ट्वीट सीधे सवालों को आमंत्रित करता है कि क्या सही अर्थो में कानून का डर सब लोगों को समान रूप से आशंकित, आतंकित और आरोपित कर रहा है? स्वामी के ट्वीटर से उपजे डर के परिदृश्यै पर अदृश्या भयादोहन की इन परछाइयों के पीछे छिपी राजनीतिक हिकमतों को समझना और सुलझाना मुश्किल नहीं है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने यह कहकर घटना को वैधानिक-तिलिस्म की चादर से ढंकने की कोशिश की है कि कानून अपना काम कर रहा है। लेकिन नायडू का यह कानूनी-दांव पिलपिला है, क्योंकि प्रणय रॉय पर कार्रवाई के बाद 7.33 लाख करोड़ के लोन पर ऐश कर रहे देश के दस बड़े उद्योगपतियों के एनपीए अकाउंट्स, विराट प्रश्न-चिन्ह बनकर खड़े हो जाते हैं कि इन लोगों में कानून का भय कैसे अंकुरित होगा?  स्वामी क्या यह बता पाएंगे कि प्रणय रॉय के मन में डर पैदा करने को ये कोशिशें 1.14 लाख करोड़ के कर्जदार अनिल अंबानी को कैसे अपनी गिरफ्त में लेंगी? हाल ही में रिलायंस कम्युनिकेशन के नाम पर दस बैंको के कर्जदार अनिल अंबानी के लिए 25 हजार करोड़ की ऋण चुकाने की अवधि दिसम्बर 2017 तक क्यों बढ़ा दी गई है?  अनचीन्हे और अपर्याप्त आरोपों से घिरे प्रणय रॉय को डराने से पहले क्या केन्द्र सरकार को गौतम अडानी, रुईया ब्रदर्स, जिंदल, जयप्रकाश गौड़ या राजकुमार धूत जैसे अरबों के कर्जदारों को डराने की जरूरत नहीं हैं? प्रणय रॉय के मुताबिक ऋण की यह रकम भी वे सात-आठ साल पहले अदा कर चुके है।        एनडीटीवी घोषित रूप से मोदी-सरकार की रीति-नीति पर तीखे सवाल उठाता रहा है। यह बात आसानी से गले उतरने वाली नहीं है कि कोई भी, भले ही वह एनडीटीवी क्यों नहीं हो, दल-दल में खड़े होकर सरकार पर कीचड़ उछालने का दुस्साहस करेगा...? एनडीटीवी पर सीबीआई के छापे की प्रतिध्वनि में कानून की कम, सरकार की टंकार ज्यादा सुनाई दे रही है। एनडीटीवी से सरकार की नाराजी पुरानी है। उस पर शिकंजा कसने की कोशिशें भी नई नहीं हैं। नवम्बर 2016 के पहले सप्ताह में भी मोदी-सरकार ने एनडीटीवी के प्रसारण पर एक दिन की रोक लगाने की कोशिश की थी। मीडिया की आजादी के सवालों में उलझने के कारण आदेश को वापस लिया गया था। इस मर्तबा सरकार ने आपराधिक मामले को आगे रखा है ताकि कार्रवाई को मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से नहीं जोड़ा जा सके। लेकिन एनडीटीवी व्दारा प्रस्तुत तथ्यों के बाद कार्रवाई में बदनीयती सिर उठाती महसूस हो रही है।  एनडीटीवी के बहाने मीडिया में डर पैदा करने की कोशिशें आपातकाल की चालीसवीं सालगिरह पर प्रकाशित लालकृष्ण आडवाणी की उन आंशकाओं को गहरा कर रही हैं कि आपातकाल की प्रवृत्तियों से सावधान रहना जरूरी है। मोदी-सरकार सवालों से परहेज करती है, जो मीडिया सवाल करेगा, वह परेशान होगा। दशकों तक मीडिया-फ्रेण्डली रही भाजपा का यह कठोर राजनीतिक चेहरा मीडिया के लिए अजनबी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नकेल डालने के साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रिंट मीडिया पर फंदा कसने का क्रम शुरू कर दिया है। मध्यम और छोटे अखबारों का अस्तित्व सवालिया होता जा रहा है। अभिव्यक्ति के आजाद परिन्दों को कार्पोरेट-मीडिया के पिंजरों में बंद करने की साजिशें परवान चढ़ने लगी हैं।  2003 में फिल्म डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने फिल्म बनाई थी- 'डरना मना है' ... 2006 में उन्होंने इसके सिक्वल का नाम रखा था- 'डरना जरूरी है'... रामगोपाल सुब्रमण्यम स्वामी जैसे ही विवादास्पद व्यक्ति हैं, जो कानून की लाठी से सबको डराना चाहते हैं। स्वामी ने प्रणय रॉय के मसले में कहा है कि सबका 'डरना जरूरी है।'  इसका जवाब 1975 में प्रदर्शित शोले फिल्म में गब्बर का यह डॉयलॉग है कि 'जो डर गया, वह मर गया' … मीडिया का तो मूल-मंत्र ही यही है कि वह डरे नहीं, क्योंकि 'जो डर गया, वह मर गया' ...। - उमेश त्रिवेदी - लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।

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Dakhal News 9 June 2017


abp-india tv

  22 वें सप्ताह के न्यूज़ टेलीविजन रेटिंग पॉइंट बताते हैं कि अब नंबर वन होने की दौड़ आज तक और ज़ी न्यूज़ के बीच है ,trp देखें तो पता चलता है abp न्यूज़ और इण्डिया टीवी के बीच तीसरे और चौथे नंबर पर बने रहने  का संघर्ष चल रहा है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 22 Aaj Tak 16.5 up 0.5  Zee News 15.1 up 0.2  ABP News 12.2 dn 0.6  India TV 10.9 dn 0.6  News18 India 10.5 up 0.3  News Nation 10.2 up 0.5  India News 9.1 dn 1.0  News 24 6.8 dn 0.2  Tez 3.4 up 0.3  NDTV India 2.9 up 0.3  DD News 2.4 up 0.2    TG: CSAB Male 22+ Zee News 16.7 up 0.5  Aaj Tak 15.5 same   India TV 11.7 dn 0.1  News18 India 11.7 up 1.0  ABP News 11.5 dn 1.2  News Nation 9.5 up 0.3  India News 7.9 dn 0.9  News 24 6.3 dn 0.2  Tez 3.7 up 0.4  NDTV India 3.5 up 0.4  DD News 2.1 dn 0.1 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 22 Zee                       66.7 Ibc 24                   14.6 Etv                         9.9 Sahara  sa            5.8 Bansal                   1.4

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Dakhal News 8 June 2017


प्रदेश टुडे

मध्यप्रदेश के प्रमुख सांध्य दैनिक प्रदेश टुडे अखबार ने छ किसानों की सरकारी गोलीबारी में मौत के बाद अपने सम्पादकीय को  खाली छोड़ दिया है। प्रदेश टुडे के इस कदम की सराहना की जा रही है। ऐसा तब ही होता है जब विचार होते हुए भी शब्द कम पड़ जाएँ।  प्रदेश टुडे ने सम्पादकीय स्थान भले ही रिक्त छोड़ा हो लेकिन सच्चाई यही है कि किसान आंदोलन को अब तक असामाजिक तत्वों का आंदोलन कह रही शिवराज सरकार अब बैकफुट पर है। पुलिस की गोलाबारी में छ किसानों की मौत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अफसर उन्हें किस तरह गुमराह करते रहते हैं। पहला मौका है जब मीडिया ने भी सरकार के साथ मुख्यमंत्री को भी इस सब का जिम्मेदार माना है। जाहिर है जब अच्छे कामों का श्रेय शिवराज सिंह लेते हैं तो छ निर्दोष किसानों की मौत की जवाबदारी भी उनकी बनती है।   

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Dakhal News 7 June 2017


इंदौर  प्रेस क्लब

इंदौर  प्रेस क्लब के 'संवाद' कार्यक्रम पत्रकार  खबर इंदौर से। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी पत्रकार सुरक्षा कानून जल्दी से जल्दी लागू किया जाए, इसका लाभ सभी पत्रकारों को मिले और इसके प्रावधान ऐसे हों कि उनको शारीरिक और संपत्ति की सुरक्षा मिले। आज पत्रकार चौतरफा संघर्ष में घिरा है और हमें एकजुट होकर अपनी बात को आगे बढ़ाना चाहिए, तभी हम सरकार से पत्रकारों के हित में उक्त कानून लागू करवा पाएंगे और इसका लाभ हर श्रेणी के पत्रकार को मिले। यह बात इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकार सुरक्षा कानून पर आयोजित 'संवाद' कार्यक्रम में इंदौर-उज्जैन संभाग के पत्रकारों के प्रतिनिधि संगठनों के नुमाइंदों ने कही। सभी ने एकमत से कहा कि एक लंबी लड़ाई का हम सूत्रपात कर रहे हैं। संवाद की शुरुआत में इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने प्रेस क्लब द्वारा विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए गए पत्रकार सुरक्षा कानून प्रारूप के कानून की जानकारी दी और कहा कि इसे लागू करवाने के लिए हमारा एकजुट होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो सकता है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। इस कानून में यह प्रावधान भी होना चाहिए कि कोई भी पत्रकार इसका दुरुपयोग भी न कर सके। इस मुद्दे पर जल्दी ही पत्रकार संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।  इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सतीश जोशी ने कहा कि सरकार व्यापक स्वरूप में पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल प्रभाव से लागू करे। यह बहुत ही गंभीर विषय है और इसके लिए हमें जिस भी स्तर पर संघर्ष करना पड़े हम उससे पीछे नहीं हटेंगे। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि सरकार हमारी सुरक्षा की व्यवस्था करे, उक्त कानून में हमारी संपत्ति और शरीर की सुरक्षा का प्रावधान हो। कानून लागू करने से पहले सरकार इस पर हमारी राय भी ले। वरिष्ठ पत्रकार हेमन्त पाल ने कहा कि एक्ट के दायरे में अंशकालिक पत्रकारों को भी लाया जाना चाहिए और पत्रकारों की भी एक परिभाषा तय होना चाहिए।  देवास प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिलसिंह सिकरवार ने कहा कि हम एक लम्बी लड़ाई का सूत्रपात कर रहे हैं। पत्रकार सुरक्षा कानून के दायरे में हर श्रेणी के पत्रकारों को शामिल करना चाहिए। इसके लिए हम तहसील व जिला स्तर से भी आवाज उठाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार छोटू शा ी ने कहा कि उक्त कानून में ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रेस क्लब महासचिव नवनीत शुक्ला ने कहा कि हम जल्दी ही उक्त प्रारूप के आधार पर एक अंतिम प्रारूप तैयार करेंगे, इस पर अलग-अलग पत्रकार संगठनों से भी चर्चा की जाएगी और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रेस की आजादी में भरोसा रखने वाले संगठनों को साथ लेकर सरकार के सामने अपना पक्ष रखेंगे। प्रेस क्लब उपाध्यक्ष संजय जोशी ने कहा इस कानून के दायरे में हर पत्रकार को लाना चाहिए भले ही वह किसी भी पत्रकार संगठन से वास्ता रखता हो। सूरज उपाध्याय ने कहा हम अपनी लड़ाई में नेता, समाजसेवी और जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करेंगे। प्रदीप जोशी ने कहा कि कवरेज के दौरान सुरक्षा का विशेष प्रावधान कानून में किया जाना चाहिए। संजय त्रिपाठी ने कहा कि महाराष्ट्र जैसा कानून मध्यप्रदेश में भी लागू हो और पत्रकारिता करने वाला हर शख्स इस कानून के दायरे में लाया जाए। मुकेश मिश्रा ने कहा हम एकजुट हो जाएंगे तो सरकार को निर्णय लेना ही पड़ेगा। प्रदीप मिश्रा ने कहा हम जनप्रतिनिधियों से बार-बार यह सवाल करें कि आखिर मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून क्यों लागू नहीं हो पा रहा है। म.प्र. श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शर्मा ने कहा एक होकर ही हम इस कानून को लागू करवा पाएंगे। सुरक्षा मिलेगी तो ही हम मजबूती से काम कर पाएंगे। राहुल वावीकर ने कहा कि इसमें डॉक्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट जैसे ही प्रावधान होना चाहिए। प्रेस क्लब सचिव हेमन्त शर्मा, कोषाध्यक्ष दीपक कर्दम, वरिष्ठ पत्रकार विमल गर्ग, अनुराग पुरोहित ने भी इंदौर प्रेस क्लब द्वारा तैयार ड्राफ्ट पर अपनी राय प्रकट की। संवाद में उज्जैन प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री विशाल हाड़ा, नीमच प्रेस क्लब के अध्यक्ष भूपेन्द्र गौड़ बाबा, देवास प्रेस क्लब के सचिव मोदी, वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु राठौर, पवन शर्मा, प्रकाश त्रिवेदी, अनिलसिंह भाटी, कपिल पंवार, अभिषेक चेंडके, राजीव उपाध्याय, वरिष्ठ छायाकार राजू रायकवार, आशु पटेल सहित कई पत्रकार इस संवाद में शामिल हुए।

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Dakhal News 6 June 2017


पत्रकार आंद्रे वॉकर

  ब्रिटेन के एक पत्रकार ने लंदन ब्रिज पर हुए आतंकी हमले के बाद इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को चुनौती दी है। इस हमले में आतंकियों ने सात लोगों की हत्या कर दी थी। हमले के कुछ समय बाद न्यूयॉर्क ऑब्जर्वर में पत्रकार आंद्रे वॉकर ने एक ट्वीट कर इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को उन पर हमला करने की चुनौती दी है। आंद्रे ने आतंकी संगठन को चुनौती देते हुए ट्वीट किया, 'मैं अपने सिर पर खुद इनाम रखता हूं। अगर कोई भी आईएस का आतंकी मुझे मारता है, तो उसे 50 हजार पाउंड (41 लाख 42 हजार 209 रुपए) मिलेंगे। मैं आपको अपना पता देता हूं। पुलिस भी तुम्हें नहीं रोकेगी, लेकिन मैं बता दूं कि मेरे पास एक तलवार है। शुभकामनाएं।' आंद्रे ने इस युद्ध में अपना सिर काटने वाले आतंकी को 50 हजार पाउंड देने की बात लिखने के साथ ही थेम्स नदी के किनारे वेस्टमिंस्टर टेरस पर खींची गई एक तस्वीर भी लगाई है। इसमें दिख रहा है कि वह अपने दोनों हाथों में एक तलवार पकड़े हैं। उन्होंने आगे लिखा, 'मुझे इस बात की फिक्र नहीं कि ऐसा करके मैं कुछ लोगों को बेवकूफ दिख सकता हूं, न ही मैं आईएस के बारे में सोचकर परेशान हूं। आओ आओ, कोशिश करो।' लंदन ब्रिज और बरो मार्केट इलाके में हुए आतंकी हमले में 7 लोगों की हत्या और 48 लोगों के घायल हो जाने के बाद उन्होंने आईएस के आतंकियों को अपने साथ तलवारबाजी करने की चुनौती दी है। हालांकि, अब आंद्रे के इस ट्वीट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस ट्वीट को मजाकिया तौर पर ले रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे पोस्ट किए जाने की टाइमिंग के कारण इसकी आलोचना कर रहे हैं। एक शख्स ने कमेंट किया कि मैं नहीं जानता कि यह चुनौती देकर तुम क्या कहना चाहते हो? वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि सीधे-सीधे बोलो कि तुम आतंकवाद की फंडिंग करने का प्रस्ताव दे रहे हो?' एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया कि इस तरह सड़क पर तलवार लेकर चलना शायद गैरकानूनी है। आज सुबह तक ट्विटर पर मैंने इससे ज्यादा बेवकूफाना चीज नहीं देखी थी। इन आलोचनाओं पर आंद्रे ने कहा कि यह प्रस्ताव देने का कारण काफी सरल है। आतंकियों को किसी ऐसे इंसान से लड़ना चाहिए, जो उनके बराबर का हो। बच्चों को कुचलने में क्या बहादुरी है?' पुलिस ने लंदन ब्रिज में शामिल 3 आतंकवादियों को भी मार गिराया है और करीब दर्जनभर संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। मार्च से अब तक यह तीसरा बड़ा आतंकी हमला लंदन में हुआ है।  

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Dakhal News 5 June 2017


प्रणय रॉय के घर CBI का छापा

ndtv ने कहा- फंसा रहे झूठे केस में सीबीआई ने एनडीटीवी के को-फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन प्रणय रॉय और उनकी पत्नी के घर छापामार कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार यह छापा उनके दिल्ली स्थित आवास पर पड़ा है। प्रणय रॉय पर फंड डायवर्जन का आरोप है। इस मामले में सीबीआइ ने केस दर्ज कर लिया है। इसके बाद चैनल ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि झूठे आरोप में रॉय को फंसाया जा रहा है। हम लोकतंत्र को इस तरह से कमजोर करने की कोशिशों के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। सीबीआइ ने बताया कि दिल्ली और देहहरादून में छापेमारी की है। प्रणय रॉय पर आईसीआईसीआई बैंक को 48 करोड़ का घाटा पहुंचाने का आरोप लगा है। इस मामले पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि कानून का डर हर किसी के अंदर होना चाहिए फिर वो चाहे कितनी बड़ी ही शख्सियत क्यों न हो। सोमवार सुबह 8.00 बजे के करीब केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की टीम एनडीटीवी न्यूज चैनल के प्रमोटर प्रणय रॉय के ग्रेटर कैलाश-1 स्थित घर पर पहुंची और छापेमारी की। प्रणय रॉय पर फंड डायवर्जन और बैंक से फ्रॉड का आरोप है। सीबीआइ की टीम प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय से बैंक फ्रॉड के मामले में भी पूछताछ कर रही है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने फेमा प्रावधानों का उल्लंघन करने को लेकर एनडीटीवी के खिलाफ 2,030 करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया था। ईडी का ये नोटिस प्रणय रॉय, राधिका रॉय और सीनियर एग्जीक्यूटिंव केवीएल नारायण राव के खिलाफ जारी किया गया था।  

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Dakhal News 5 June 2017


हिंदी वाले पत्रकार राहुल देव

देश के प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता पुरस्कार से प्रसिद्ध पत्रकार राहुल देव को सम्मानित किया गया।  राहुल देव ने पत्रकारिता की शुरूआत 1979 में स्नातकोत्तर पढ़ाई के दौरान लखनऊ में ‘दि पायोनियर’ से की। इस तरह वे आपातकाल की छाया से ताजा-ताजा मुक्त हुए वातावरण में पत्रकार बने थे, जो एक तरह से देश के दूसरे मोहभंग (नेहरू से विरक्ति के बाद) का काल था। इंदिरा गांधी को हराकर विपक्षी दलों ने केंद्र में जो सरकार बनाई थी, उसमें विखंडन और टूट-फूट का दौर चरम पर था। खोजी पत्रकारिता से प्रारंभ उनका सफर अंग्रेजी साप्ताहिक ‘करेंट’ के जरिए राजनैतिक और विश्लेषणात्मक लेखन की ओर मुड़ गया। ‘दि इलेस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ (दोनों दिल्ली), 'दि वीक’ व 'प्रोब इंडिया’ (दोनों लखनऊ) तक वे अंगरेजी के पत्रकार रहे। बाद में लोकप्रिय हिन्दी पत्रिका 'माया’ के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख बने। तत्पश्चात कुछ समय वे अंगरेजी पत्रिका 'सूर्या इंडिया’ के संपादक भी रहे। 1989 में वे 'दैनिक जनसत्ता’ के मुंबई संस्करण के स्थानीय संपादक बने। सही कहा जाए तो यहीं से असली राहुल देव के बनने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। उनके नेतृत्व गुणों, संगठन कौशल तथा मानवीय गुणों का उत्कर्ष हमें यहीं देखने को मिलता है। उन्होंने जनसत्ता में कार्यरत विभिन्न विचारधाराओं तथा मिजाजों के साथियों को संभालते-संवारते हुए जनसत्ता को मुंबई और गैर हिन्दी प्रदेश महाराष्ट्र में लोकप्रिय ही नहीं, जीवन की आवश्यकता ही बनाया। उन्होंने जनसत्ता के दौरान 1993 में सिर्फ 11 दिन की अवधि में सांध्य दैनिक 'संझा जनसत्ता’ का प्रकाशन प्रारंभ किया। साप्ताहिक पत्रिका 'सबरंग’ भी उन्होंने ही शुरू की और ये तीनों प्रकाशन सामूहिक तौर पर मुंबई के साथ देशभर के पाठकों और लेखकों की अभिव्यक्ति का प्रभावी मंच साबित हुआ।  जब मुंबई में बाल ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना ने धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील  ताकतों व पत्रकारिता के खिलाफ हल्ला बोला था और कुछ पत्रकारों पर हमले भी हुए थे, तब राहुल देव ने ही शिवसेना भवन के ठीक सामने पत्रकारों का बड़ा धरना देकर शिवसेना को झुकाया था। यह इस मायने में ऐतिहासिक घटना थी कि वह ठोकशाही में विश्वास करने वाली पार्टी के कार्यालय के सामने हुआ और उसमें देश के अनेक बड़े पत्रकार शामिल हुए थे। इसके कारण राहुल देव को करीब दो महीने पुलिस सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी। जिस प्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी सांप्रदायिक सौहार्द्र के बड़े सेनानी थे, वैसे ही राहुल देव ने बाबरी मस्जिद के गिरने के कारण मुंबई में उपजी हिंसा को खत्म करने के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हुए अनेक दंगाग्रस्त क्षेत्रों में काम किया। शांति के लिए कार्यरत व्यक्तियों और संगठनों के साथ सामूहिक तौर पर तो कभी एकाकी रूप से उन्होंने काम किया। कुछ अशांत क्षेत्रों से राहुलजी ने अल्पसंख्यक परिवारों को सुरक्षित बाहर निकालने में भी मदद की।  जनसत्ता के माध्यम से राहुल देव ने मुंबई के हिन्दीभाषी समुदाय को सामाजिक और बौद्धिक नेतृत्व प्रदान किया। 100 से अधिक मंडलियों को जोड़कर रामलीला महासंघ बनाया और हिन्दीभाषियों को मुंबई में गरिमामय स्थान प्राप्त करने में मदद की। अनेक हिन्दीभाषी समुदायों की उपलब्धियों और गतिविधियों का प्रतिबिंब जनसत्ता बना।  बाद में राहुल देव जनसत्ता के दिल्ली में संपादक बने। फिर ‘आज तक’, ‘जी टीवी’, ‘सीएनईबी’, ‘दूरदर्शन’ आदि में कभी नियमित तो कभी बतौर फ्रीलांसर जुड़े और इलेक्ट्रानिक मीडिया को अपनी वैचारिकता, संवेदनशीलता और  प्रतिभा से संपन्न किया। अगर उनके प्रोफेशनल आयाम को एक तरफ रख दिया जाए, वर्तमान दौर में वे हिन्दी और भारतीय भाषाओं को बचाने का बड़ा अभियान छेड़े हुए हैं। हिन्दी की गहनता और ऊंचाइयों को दर्शाने वाले कार्यक्रम वे अपनी संस्था सम्यक न्यास की ओर से बनाते हैं तथा स्वयं देश भर में घूम-घूमकर हिन्दी को सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित करने तथा उसके अधिकाधिक उपयोग करने जनजागरण में रत हैं।  गणेश शंकर विद्यार्थी (26 अक्टूबर 1890-25 मार्च 1931) और राहुल देव के कालखंड चाहे पृथक हों, परंतु साम्प्रदायिक सद्भाव और हिन्दी की प्राणप्रतिष्ठा दो ऐसे तथ्य हैं, जो इन दोनों पत्रकारों को आपस में जोड़ते हैं। राहुलजी की पत्रकारिता चाहे देश के नैराश्यकाल से प्रारंभ हुई हो, परंतु उनके लेखन को आशावाद हमेशा दमकाता चला आया है। 

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Dakhal News 3 June 2017


निधि राजदान-संबित पात्रा

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा और अंग्रेजी न्यूज चैनल एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान के बीच इतनी तीखी बहस हो गई कि संबित पात्रा को शो से बाहर निकाल दिया गया। शो की एंकर निधि राजदान ने संबित को लगभग डांटते हुए ये कह दिया कि ये मेरा शो है मैं आपको निकाल रही हूं। दरअसल इस शो में केरल में कांग्रेस कार्यकतार्ओं द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई गोहत्या पर डिबेट की जा रही थी । इस मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ से अपना पक्ष रखने के लिए शर्मिष्ठा मुखर्जी मौजूद थीं तो वहीं भाजपा की तरफ से संबित पात्रा मौजूद थे। इन दोनों के साथ कुछ मेहमान और भी शो से जुड़े थे। इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे दूसरे मेहमानों के बोलने के दौरान ही बीच में संबित बोलने लगे। बीजेपी प्रवक्ता को दूसरों की बात के बीच में टोकता देख एंकर निधि राजदान ने पहले तो उन्हें आराम से समझाया कि आप दूसरों को इंटरप्ट ना करें। एंकर की ये बात सुनकर संबित ने कहा कि मैं दूसरों चैनलों पर भी जाता हूं वहां मैं किसी को डिस्टर्ब नहीं करता हूं लेकिन यहां मुझे करना पड़ रहा है क्योंकि एनडीटीवी एक एजेंडे पर काम कर रही है। संबित ने कहा कि चैनल गाय को बार-बार बैल बताने की कोशिश कर रहा है। पात्रा ने कहा कि एनडीटीवी का झुकाव कांग्रेस के प्रति है। संबित पात्रा की ये बातें सुनकर शो की एंकर निधि राजदान गुस्से में आ गईं। उन्होंने संबित से नम्रतापूर्वक उठकर चले जाने को कह दिया। एंकर के शो छोड़ने के लिए कहने वाली बात पर संबित और ज्यादा उखड़ गए और बोलने लगे कि आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझसे ऐसा बोलने की। एंकर ने कहा कि ये मेरा शो है मैं जो मर्जी करूंगी..आपकी हिम्मत कैसे हुई कि आप मेरे चैनल पर इस तरह का आरोप लगा रहे हैं। एंकर के बार-बार बोलने पर भी संबित शो छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए और बोलने लगे कि आपने मुझे बुलाया है मैं शो खत्म होने तक नहीं जाउंगा यहां से। संबित को अड़ता देख एंकर निधि राजदान ने कहा कि ठीक है आप बैठिये लेकिन पहले आपने चैनल के बारे में जो कहा उसके लिए माफी मांगिए। संबित माफी मांगने के लिए राजी नहीं हुए तो मजबूरन एंकर ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस डिबेट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है। लोग लिख रहे हैं कि आखिरकार वह दिन आ ही गया जब संबित पात्रा को टीवी पर से उठा कर भगाया गया।[जनसत्ता से साभार ]  

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Dakhal News 2 June 2017


india tv trp

21 वें सप्ताह में इण्डिया टीवी को झटका लगा और वो लुढ़क के चौथे नंबर पर आ गया है। रजत शर्मा की व्यू रचना और अजीत अंजुम का स्टाइल भी चैनल को नंबर वन नहीं बना पा रहे हैं। इंडिया टीवी को लगातार अपनी स्टेटजी बदलना पड़ रही है। एडिटोरियल से लेकर नेटवर्क सम्हालने वाले तक सभी को ठीक से काम करने के लिए ताकीद किया गया है।    नेशनल न्यूज चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 21 Aaj Tak 15.9 up 0.3  Zee News 14.9 up 1.3  ABP News 12.8 up 0.2  India TV 11.6 dn 1.3  News18 India 10.1 dn 0.3  India News 10.1 dn 0.2  News Nation 9.7 up 0.4  News 24 7.0 dn 0.2  Tez 3.1 same   NDTV India 2.5 dn 0.3  DD News 2.2 same    TG: CSAB Male 22+ Zee News 16.2 up 0.7  Aaj Tak 15.5 up 0.3  ABP News 12.7 up 0.3  India TV 11.8 dn 1.3  News18 India 10.7 dn 0.8  News Nation 9.3 up 0.7  India News 8.8 up 0.6  News 24 6.5 dn 0.1  Tez 3.3 same   NDTV India 3.1 dn 0.5  DD News 2.2 up 0.1     Mp/cg के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल TRP Regional Channels WK 21 ज़ी           59.2 Ibc24      25.3 Etv          7.9 सहारा     4.0 Smbc     1.8

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Dakhal News 2 June 2017


पत्रकार कमलेश जैन हत्या

मध्यप्रदेश में मंदसौर के पिपलियामंडी में बुधवार शाम समाजसेवी और नईदुनिया के पत्रकार कमलेश जैन की दो अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। प्रारंभिक जांच में जैन का एक माह पहले किसी से विवाद का मामला सामने आ रहा है। इस मामले में पुलिस के लापरवाही सामने आई है। वैसे भी मध्यप्रदेश में पुलिस की छवि पहले जैसी नहीं है और उसके अपराधियों से मिलीभगत के कई किस्से सामने आ चुके है।  कमलेश जैन (43) पिपलियामंडी में अन्नपूर्णा टॉकिज रोड स्थित लवली चौराहे पर अपने कार्यालय पर थे। टीआई अनिलसिंह ठाकुर ने बताया कि बाइक से दो बदमाश आए और कार्यालय में जाकर जैन पर गोली चला दी। गोली उनके सीने में लगी। हमले के बाद दोनों बदमाश बाइक से खात्याखेड़ी की तरफ भाग गए। घायल हालत में जैन को जिला अस्पताल लाया जा रहा था, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पिपलियामंडी में व्यवसायियों ने अपनी दुकानें बंद कर लीं। जिला अस्पताल में एडीशनल एसपी अजयप्रतापसिंह, शहर थाना प्रभारी विनोदसिंह कुशवाह सहित पुलिस बल भी पहुंचा। पिपलियामंडी और आसपास क्षेत्र में पुलिस ने नाकाबंदी की। कमलेश गत 12 सालों से नईदुनिया वितरक के रूप में जुड़े हुए थे। पिपलियामंडी टीआई ठाकुर ने बताया कि करीब एक माह पहले एनडीपीएस एक्ट के मामले में जेल से छूटकर आए एक बदमाश से जैन का कुछ विवाद हुआ था। हत्या में उसका भी हाथ हो सकता है। यह बदमाश नाहरगढ़ क्षेत्र का है। इस विवाद के आधार पर भी जांच की जा रही है। कमलेश जैन के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा : सीएम पिपलियामंडी में समाजसेवी और नईदुनिया वितरक ,पत्रकार कमलेश जैन की हत्या पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हत्यारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानून की कड़ी से कड़ी सजा हत्यारों को दी जाएगी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कमलेश जैन की आत्मा की शांति के लिए सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। कमलेश जैन की हत्या के विरोध में नागदा में पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को ज्ञापन देकर प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की। बुरहानपुर में भी हत्या के खिलाफ रैली निकालकर कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन दिया। आलीराजपुर में भी हत्या पर एसएसपी को ज्ञापन दिया गया।

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Dakhal News 1 June 2017


rakesh achal patrkar

ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान ग्वालियर अपने अलग तरह के कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है । पत्रकारिता में आने वाले बदलावों , इनके विकास और विस्तार के चलते इसके नफा ,नुक्सान और चुनौतियों से निपटने के तरीको की खोजबीन  के सतत् प्रयास करता है । विचार और विमर्श । बदलाव पर चर्चा  और सम्मान ।हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थी देश की जानी मानी ब्लॉगर , ई पत्रिका की संस्थापक और सुप्रसिद्ध कवियित्री सुश्री प्रीति 'अज्ञात' । अज्ञात  अन्तर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मलेन में सम्मानित हो चुकी है । उल्लेखनीय यह कि वे भिंड में जन्मी और पली , बढ़ी है । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार  राकेश अचल थे । अध्यक्षता संसथान के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार श्री देव श्रीमाली ने की । विशिष्ठ अतिथि के तौर पर सहायक संचालक जन संपर्क श्री मधु सोलपुरकर और पीआरओ हितेन्द्र भदौरिया मोजूद रहे । इस मौके पर स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर देश के नव निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की गौरावशाली भूमिका , वर्तमान दशा और दिशा , शक्तिशाली होती सोशल और डिजिटल मीडिया और उससे जुडी समस्याओ तथा भाषा पर होने वाले अतिक्रमण आदि विषयो पर गंभीर चिंतन हुआ । इस मौके पर सुश्री प्रीति अज्ञात को हिंदी सेवी गौरव सम्मान भी दिया गया । कार्यक्रम का सफल सञ्चालन पत्रकार साहित्यकार श्री राजेश अवस्थी लावा ने किया । कार्यक्रम में प्रो एस  के जैन , विनोद शर्मा , जावेद खान,नासिर गौरी,तेजपाल सिंह,अतुल मल्होत्रा ,सुरेन्द्र ठाकुर ,रवि सिकरवार ,अजय दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार ,पत्रकार मौजूद थे ।

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Dakhal News 31 May 2017


 आईसना

म.प्र.मीडिया की विशेष बैठक दैनिक भारत मत के एमपी नगर स्थित प्रदेश कार्यालय मेअध्यक्ष आईसना व अवधेश भार्गव जी की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई। बैठक मे कई पत्रकारो ने ज्वलन्त विषयो पर चर्चा की। जिसमे पत्रकारो ने एक स्वर से मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चोहान से मांग की हे कि म.प्र.मे तत्काल  प्रभाव से पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाये। म.प्र.सरकार मे कई पत्रकार झुठे मुकदमो का शिकार हुये है और इस बात को म.प्र मीडिया  संघ विभिन्न जिलो से जन-जागरण अभियान शुरु किया जायेगा। जिस तरह से महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट लागु किया है इसी प्रकार म.प्र.सरकार भी पत्रकार हित मे त्वरित निर्णय ले।  बैठक मे म.प्र.मीडीया सँघ के प्रदेश अध्यक्ष  जयवन्त ठाकरे,प्रदेश प्रवक्ता  शुभकरण पान्डेय,प्रदेश मीडीया प्रभारी अनुज सक्सेना,आदित्य नारायण उपाध्याय(सम्पादक पालिटिकल व्यु),संजय रायजादा(सम्पादक),विमल कुँवर(सम्पादक ब्रह्म भारत),सन्तोष कुमार (सम्पादक अमन संवाद)दीपक शर्मा(सम्पादक प्रतिवाद ),समीम (सम्पादक दैनिक समाचार).जावेद अख्तर सिद्दिकी(सम्पादक समाचार का असर),नदीम भाई(सम्पादक नदीम एक्सप्रेस),गुलफान खान(सम्पादक मन समाचार) मौजूद थे। 

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Dakhal News 26 May 2017


पत्रकार अनुराग उपाध्याय की कविता

गोरे हों या फिर काले देखो सत्ता वालों  के साले देखो ...  भरे पड़े '' गोदाम'' तुम्हारे  आंत में अन्न के लाले देखो ...  वोट हमारे और सूरज तुम  हमारी आँख में  जाले देखो ... सड़कों सी अब टूटी निंदिया  कितने  सपने पाले देखो ... जनता को आस झोपड़ी की   नेताजी के कई माले देखो ... =================

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Dakhal News 23 May 2017


टॉप एंकर

कल्पना कीजिए....  एक टॉप का एंकर छह महीने तक गायब रहे, फिर एक दिन अपना चैनल लेकर आए और एक ही सप्ताह में अपने चैनल को सबसे ज्यादा इक्यावन फीसद दर्शक खींचने वाला बताए तो आप क्या कहेंगे ? इन आंकड़ों को देखकर कोई भी चौंकेगा। एक चैनल ने इस आंकड़े को  खारिज ही कर दिया। एक वक्त में एक ही चैनल टॉप पर हो सकता है। फिर भी सभी अपने को नंबर वन सिद्ध करने वाले आंकड़े दिखाते रहते हैं। जाहिर है कि सभी कुछ न कुछ गड़बड़ करते हैं वरना यह संभव नहीं कि एक ही सप्ताह में सब नंबर वन पर रहें। नंबर वन पर रहने की हवस इसलिए है क्योंकि दर्शक संख्या के हिसाब से ही इनको विज्ञापनों के रेट मिलते हैं। निजी चैनलों की कमाई का जरिया विज्ञापन ही होते हैं। अगर विज्ञापन न हों तो निजी खबर चैनल दो दिन में खत्म हो जाएं।खबर जुटाना एक महंगा काम है। अगर आपकी कमाई अधिक है तभी आप फील्ड रिपोर्टरों, कैमरामैनों और ओबी वैनों की तामझाम रख सकते हैं और विविध खबरें जुटा सकते हैं वरना नहीं। इसीलिए चैनल विविध खबरों की जगह ‘‘ओपिनियनों और चरचाओं’ से काम चलाते हैं। अगर बहुत हुआ तो पांच मिनट में पचास या दस मिनट में सौ खबरों की ‘‘कटपीस’ बांचकर काम चलाया जाता है जिनमें खबर पलभर आकर गायब हो जाती है। एक ही खबर को खींचतान कर, दिनभर बजाकर, बहुत सी खबरों की कमी को, पूरा किया जाता है और शाम से प्राइम टाइम तक किसी एक खबर की राजनीति पर बहस चलाके खबर चैनल होने का कर्तव्य पूरा किया जाता है। अगर किसी चैनल को किसी से किसी का ‘‘एक्सपोजे’ मिल गया या स्टिंग हाथ लग गया है तो उसी में दो-तीन दिन निकाले जा सकते हैं। इसीलिए हमारे चैनलों का रवैया किसी एनजीओ या एक्टिविस्ट जैसा नजर आरहा है कि अपने लक्षित दल या नेता को पहले नंगा करो; इसमें भी निशाने पर प्राय: विपक्ष ही रहता है, सत्ता पक्ष की सिर्फ उपलब्धियां ही गिनाई जाती हैं। फिर कहो कि कहां छिपा है? आकर बताता क्यों नहीं क्या सचाई है? यह एंकरों का ‘‘एक्टिविज्म’ है।कंपटीशन भी यहीं हैं : तरह-तरह के एक्सपोजे दिखाने में सब लगे हैं, लेकिन एक चैनल उनको नरम भाषा में दिखाता है और दूसरा चैनल गरम भाषा में दिखाता है तो बताइए कौन-सा चैनल ज्यादा देखा जाएगा? जाहिर है कि गरम भाषा वाला चैनल ही ज्यादा पसंद आएगा। अगर एक अंग्रेजी चैनल दिनभर लालू के या चिदम्बरम के या थरूर के पीछे पड़ा रहता है और उसका एंकर लालू को कहता है कि वह घर में बंद हो गए हैं और हमारा चैनल देख रहे हैं या कहता है कि ‘‘थरूर तुम; चारों तरफ से घेर लिए गए हो, अब तुम बचके नहीं जा सकते’ तो बताइए उसे अधिक दर्शक मिलेंगे कि नहीं? आजकल टीवी की खबरों के दर्शकों का मिजाज भी बिगड़ गया है। उनका मिजाज एक्टिविस्ट एंकरों ने बिगाड़ा है। वे बदल गए हैं। अब उनको सिर्फ ‘‘सूखी सूचना’ नहीं चाहिए। उनको हर पल नए से नया भंडाफोड़ चाहिए। हर वक्त एक खलनायक चाहिए। हर बड़े आदमी संदिग्ध है। उसे नंगा किया जाना चाहिए। यह ‘‘सूडो समाजवाद’ है,‘‘न्याय की चाहत’ है, जिसे हर एक्सपोजे के जरिए एंकरों ने दिन-रात बेचा है। समाजवाद लाना तो बेहद कष्टकर और फिलहाल असंभव-सा है, लेकिन एक-दो घंटे के आनंदकारी ड्रामे में एक प्रकार का ‘‘सूडो समाजवादी मजा’ तो पैदा किया जा सकता है। एंकर आजकल यही करते हैं। असली न सही तो ‘‘सूडो समाजवाद’ ही सही। इसी का बाजार है।विपक्ष ही खलनायक है/विपक्ष ही सारी समस्याओं की जड़ है/ विपक्ष से बड़ा कोई पापी नहीं है/ सारे भ्रष्टाचार के काम विपक्ष के नाम है/ सत्तर साल से ऐसा ही होता चला आया है /कभी कहा जाता है कि साठ साल से ऐसा ही होता चला आया है अब आकर उस पर रोक लगी है।बाहुबली ने पंद्रह दिन में पंद्रह सौ करोड़ कमा लिए। मीडिया ने उसे जिस तरह से उठाया वैसा कम ही फिल्मों को नसीब हुआ। पंद्रह दिन पहले से पंद्रह दिन बाद तक उसको जमाया जाता रहा। पिछले दिनों चार दशमलव आठ प्रतिशत के हिसाब से प्रिंट मीडिया बढ़ा है दुनिया के हर देश में प्रिंट मीडिया पिट रहा है कम छप रहा है खत्म हो रहा है, लेकिन हिंदुस्तान में वह बढ़ रहा है। कारण क्या हैं? सर्वे ने सीधे कारण तो नहीं बताए, लेकिन संकेत दे दिए कि क्या-क्या कारण हो सकते हैं।

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Dakhal News 22 May 2017


trp week 19

  टीआरपी बताती है कि एबीपी न्यूज़ अपनी गलतियों से सबक नहीं ले रहा है और चौथे नंबर का चैनल बना हुआ है। आज तक और इण्डिया टीवी को चौनौती देना फिलहाल उसके बूते की बात नहीं है।  नेशनल न्यूज़ trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 19 Aaj Tak 15.7 dn 0.4  India TV 13.6 dn 0.4  Zee News 13.3 dn 0.3  ABP News 12.1 up 0.1  News18 India 10.7 same   India News 10.3 up 0.5  News Nation 9.6 dn 0.5  News 24 6.6 up 0.5  Tez 3.2 up 0.3  NDTV India 2.8 up 0.1  DD News 2.2 up 0.1   TG: CSAB Male 22+ Zee News 15.6 up 0.8  Aaj Tak 15.2 dn 0.8  India TV 12.8 dn 1.1  ABP News 12.4 up 0.2  News18 India 11.3 dn 0.5  India News 9.0 up 0.4  News Nation 8.8 dn 0.1  News 24 5.8 up 0.4  NDTV India 3.6 up 0.2  Tez 3.3 up 0.2  DD News 2.3 up 0.3   Mp/cg के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल week-19 Zee         59.5 Ibc24      26.5 Etv          9.0 सहारा      4.9 बंसल        1.5

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Dakhal News 18 May 2017


vijay das patrkar

  भोपाल से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी मेल के प्रधान संपादक विजयकुमार दास  को पिछले दिनों भुवनेश्वर में आयोजित सम्मान समारोह में हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में किये गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए चिंतामणि पाणिग्रही अवार्ड से सम्मानित किया गया। श्री दास मध्यप्रदेश के एक मात्र ऐसे पत्रकार हैं,जिन्हें यह सम्मान मिला है।  

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Dakhal News 16 May 2017


राघवेंद्र सिंह

राघवेंद्र सिंह आज जब हम यह लिख रहे हैं तब अंग्रेजियत के हिसाब से पूरी दुनिया मदर्स डे मना रही है। यानि मां जैसा दुनिया में कोई नहीं। जब भगवान स्वर्ग से पृश्वी पर भेज रहे थे उनके साथ रहने की जिद करने वालों से उन्होंने कहा मैं तो साथ रहूंगा नहीं मगर तुम्हारे साथ मां रहेगी जो मेरी तरह तुम्हारा ध्यान रखेगी। जैसे मैं दिल से मांगी गई माफी से हर गुनाह माफ कर देता हूं वैसे ही मां भी करेगी, इसलिए सृष्टि की हर मां को नमन करते हुए यह बात कर रहे हैं। मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों की जीवन दायिनी है मां नर्मदा। इसके अलावा पापियों को तो केवल दर्शनभर करने से ही पाप मुक्त कर देती हैं। उसके जल के आचमन करने का तो पुण्य ही अलग है। इसलिए नालायक बेटों ने उसके जल को लगता है आचमन करने लायक भी नहीं छोड़ा और भविष्य में दर्शन करने लायक भी नहीं छोड़ेगे, क्योंकि दुनिया के जानकार कहते हैं कि जैसा सुलूक मां नर्मदा के साथ हो रहा है आने वाले कुछ सालों में वह खेल का मैदान बन जाएगा। उसके बेटे नर्मदा मैया की जय के साथ हर दिन मार रहे हैं। जयकारे का नाद का दायरा बढता है उसी रफ्तार से उसपर प्रहार की गति बढ़ती है। सोमवार 15 मई को गुजरात के लाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमरकंटक आ रहे हैं। नर्मदा सेवा के समापन पर। यह उद्गम है माई का। मगर अपने आरंभ से कुछ ही किलोमीटर बाद वह सूख चुकी हैं। यह लिखते हुए हाथ कांपते हैं और शब्द ठिठक जाते हैं।  लेकिन सच यही है। कपिलधारा से लेकर कबीरकुंडी के पास आते आते इसके प्रमाण भी मिल जाते हैं। बस यहीं से मां नर्मदा की सांसें उखड़ने की कहानी शुरू होती है, जो पूरे प्रदेश में रेत उलीचने और नोंचने खचोटने तक चल रही है। उसे अब बेटों ने जीवित होने का दर्जा देने का ऐलान किया है। मगर यह तब जब उसके मरने की ताऱीखें लोग तय करने लगे हैं। इसके आभूषण रूपी पहाडों सतपुड़ा,विन्ध्याचल काटकर सड़कें बनाई जा रही हैं और गहनों के रूप में लगे सागौन और साल के वृक्षों को बेतहाशा काटकर फर्नीचल बनाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर एक मां की बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम है। अब नर्मदा माई जगह जगह से कमजोर हैं। धाराएं टूट फूट गई हैं। उसकी शिराओं से रक्तरूपी जल और मज्जा में रेत खत्म सी हो रही है। लुटेरे बेटों ने लीवर,आंत,किडनी,दिल, जिगर सब छलनी सा कर दिया है। उसकी मदद करने वाली सखियां(सहायक नदियां) भी मर रही हैं। अब वे साल में कुछ महीने ही बहती हैं। बेटों के गांव से लेकर शहरों का मलमूत्र मिलना तो एक मां को मंजूर था लेकिन फैक्ट्री और शुगर मिलों का जहर उसे मारे डाल रहा है। हालात खतरनाक हैं और जीवन देने वाली नर्मदा माई वेंटीलेटर पर हैं। नरेन्द्रमोदी उसके उद्गम पर आकर क्या कहेंगे उसे सुनने समझने के लिए माई अपने दिल दिमाग को चैतन्य किए हुए है। मोदी ने भी कुछ नहीं किया तो अमेरिका की एक एजेंसी समेत कई जल के जानकारों ने उसे मरती हुई माई तो घोषित कर ही दिया है। हालात नहीं बदले तो कुछ ही सालों की मेहमान है वह। इस सबके बाद भी मां नर्मदा गुजरात और मध्यप्रदेश को बददुआ नहीं दे रही हैं क्योंकि वो मां जो है।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि नर्मदा माई को नहीं बचाया तो वह खेल का मैदान बन जाएगी। बेटे के मुंह से मां के मरने का यह अघोषित ऐलान भला किसे अच्छा लगेगा लेकिन ऐसा भी हो रहा है। सत्ता पर बारह साल से काबिज एक परमज्ञानी,चुनाव जीतने वाले पराक्रमी बेटे का परमहंसी भाव हो सकता है। दुनिया कई बार बनी है और मिटी है । आगे भी ऐसा होगा। विकास के लिए रेत निकालों मगर आहिस्ता आहिस्ता ताकि तकलीफ न हो। विकास पुरुष बने बेटे इससे ज्यादा क्या संवेदना जता सकते हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि मां को तो मरना ही है। मरणासन्न मां को शायद इसी बात का सबसे ज्यादा दुख होगा कि उसे नोंचने वालों में उसके अपने बेटे की सबसे ज्यादा हैं। अब अपने बड़े बेटे नरेन्द्र मोदी से कुछ करने की आस लगाए होगी जैसे वह लुटेरे बेटों को डराएगा,धमकाएगा नहीं माने तो दंडित भी करेगा। क्योंकि उसके ही जल से तो साबरमती जिंदा हुई है। गुजरात के कच्छ में हरियाली आई है और धरती सोना उगलने लगी है। क्या इसका कोई मोल बेटा नहीं चुकाएगा। अभी तो उसके बचाने का जितना ढिंढोरा पीटा जा रहा है पैसा और श्रम बर्बाद हो रहा है उसे अगर उसके किनारे रहने वाले लोगों पर खर्च किया जाता तो हालात बिगड़ने से बचते। मां के दुख की कहानी यहीं नहीं रुकती। एक साल पहले बहन क्षिप्रा में उसे मिला दिया गया था, अरबों रुपए लगाकर, मगर सिंहस्थ के बाद क्षिप्रा भी नाले की तरह बनी हुई है। पैंतालिस छोटे बड़े शहर और कस्बों की गंदगी उसमें मिल रही है। जनअभियान परिषद ने तो उसमें मिलने वाले गंदे नालों का आंकड़ा सात सौ बताया है। हालत यह है कि उसमें पलने वाले जीव जंतु मर रहे हैं। साफ पानी में रहने वाली दुर्लभ प्रजाति की महाशीर मछली और पातल भी खत्म होने की कगार पर है। नर्मदा माई के दर्शन से पुण्य पाने वाले जल प्रदूषण के कारण अब उसके आचमन के लिए भी तरस रहे हैं। कभी पानी में कई फीट नीचे की रेत चांदी जैसी चमकती थी अब वह दिखना भी दुर्लभ हो गया है। इसलिए तो उसे डाईंग रिभर कहने लगे हैं। यह सुन कलेजा कांप उठता है। उसके प्राण ले रहे पुत्रों से इतना ही कहना है क्या भगवान से जरा भी डर नहीं लगता। नर्मदा माई की तलहटी में कई विजेता सदियों से मिट्टी बने पड़े हैं। कम से कम यह बात तो सबको याद रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और प्रधानमंत्री मोदीजी को भी। लिखने को बहुत कुछ है लेकिन अभी दिल भारी है और शब्द भी साथ नहीं दे रहे हैं। मामला मां का है और मदर्स डे भी तो है। तो शायर मुनव्वर राना का शेर तो बनता है... ‘किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई’ (लेखक IND24 के समूह प्रबंध संपादक हैं)

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Dakhal News 16 May 2017


 महबूबा मुफ्ती

    जम्मू कश्मीर राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मीडिया से अनुरोध किया है कि वे घाटी के लोगों के खिलाफ घृणा फैलाने वाली चर्चाएं टीवी पर ना दिखाए। क्योंकि इससे राज्य के लोगों पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी करने में कुछ छात्रों का हाथ जरूर है लेकिन इसके लिए सभी छात्राओं को गुनहगार समझा नहीं जा सकता। अगर सारे छात्र पत्थरबाजी करते होते तो हाल ही में निकले परिणाम में इतने छात्र पास ही ना होते।  उल्लेखनीय है कि कश्मीर में छात्रों के साथ-साथ अब छात्राएं भी पत्थरबाजी करने पर उतर आई हैं। सोपोर में छात्राओं द्वारा किए जा रहे हिंसक प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें 8 छात्र घायल हुए और 20 छात्राएं बेहोश हो गईं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब स्कूल की यूनिफॉरम पहन कर छात्राएं इस तरह से हिंसक प्रदर्शन में शामिल हुई हैं। इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 

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Dakhal News 8 May 2017


अरशद अली खान bhopal

अरशद अली खान  अपने चैनल खबर कम देते हैं बहसें ज्यादा। बहसों को भी ‘‘शो’ की तरह दिया जाता है। ‘‘शो’ में अतिरिक्त प्रदर्शन का तत्व होता है, जिसे एंकर अतिरिक्त उत्तेजना पैदा करके बनाए रखता है। ‘‘शो’ में आकर खबर अचानक विचार, और विचार अचानक ‘‘शो’ बन जाते हैं। हम विचार नहीं ओपिनियन भी नहीं विचारों या ओपिनियनों के शो को चुनते हैं।चूंकि एंकर इस तरह के शोज के संयोजक होते हैं, सवाल पूछने वाले होते हैं, नतीजे निकालने वाले और आखिरी फैसला देने वाले होते हैं, इसलिए दर्शक समझने लगते हैं कि असली ज्ञानी एंकर ही होते हैं, और कुछ एंकर भी ऐसा मान लेते हैं कि वे ही ज्ञानी हैं। कुछ एंकर तो ऐसे भी हो गए हैं, जो मानते रहे हैं कि वे अपने शो से देश का एजेंडा तय करते हैं, उसे हांकते हैं, उसे दिशा देते हैं। लेकिन जब उनके चैनलों के मालिकों ने किसी कारण से उनको काम से हटा दिया तो मालूम हुआ कि वे न देश चला रहे थे, न समाज को चला रहे थे बल्कि चैनल ही उनको चला रहा था। हमारा टीवी इसी शोबाजी की प्रक्रिया में खबर का माध्यम न रह कर शो बिज का माध्यम बन गया है। चैनलों के सबसे अच्छे दिन शनिवार और रविवार होते हैं, जब उनको अपने स्टूडियो को फिल्मी दुनिया के हवाले कर देना होता है, या इंपेक्ट फीर्चस यानी किराए के शो के हवाले कर देना पड़ता है। इन दिनों कॉनक्लेव, एन्कलेव, समिट आदि कराना भी विचारों के नए लाइव शोज की तरह आने लगा है, जिनमें खबरें ब्रेक की जाती हैं, ताली मिलती हैं, सलेक्टेड जनता सवाल करती है, और जवाब दिए जाते हैं। यह भी राजनीति के परफारमेंस में बदल जाने का परिणाम है कि खबर के स्रेत अब पांच सितारा होटल बनने लगे हैं।यह खबर की ऐलीट (श्रेष्ठि वर्ग) से ऐलीट तक की एक जैसी यात्रा है। ऐलीट ही खबर बना रहा है। इधर विचार चल रहा है, सवाल पूछे जा रहे हैं, जवाब दिए जा रहे हैं। उधर सामने बैठा उच्चवर्गीय ऐलीट विचारों के साथ अपने सामने रखी मेज पर रखी प्लेट से मेवे कुटक रहा है, भोजन कर रहा है, और पी-पिला रहा है, और ताली बजा रहा है, हंस रहा है। यह है ‘‘ओपिनियन का उपभोग’! ओपिनियन आई, हमने खाने के संग खाई और हजम। हम ओपिनियनों को हजम करते रहते हैं। वे हमें न सताती हैं, न परेशान करती हैं। वे हमें सिर्फ ‘‘आनंद’ देती हैं।ऐसा नहीं है कि टीवी में खबरें नहीं हैं। वे हैं लेकिन खंडित और टूटी हुई दो-चार खबरों की तरह होती हैं। एक खबर को तोड़कर उसकी दस टुकड़ा खबर बनाई जाती हैं, और बीच-बीच में तीखा म्यूजिक डाल कर सनसनी के अंदाज में दिखाई जाती हैं। इस तरह से हम खबर नहीं खबरों की चिंदियां देखते सुनते हैं। बाकी समय हम फीचर या ओपिनियनों के शो देखते हैं। ऐसे शोज में आप किसी के विचार की गुणवत्ता पर नहीं जाते। आप विचार को बोलने वाले की अदा, उसके शोर-शराबे, उसकी धमकी, उसकी ताल ठोकू मुद्रा के कायल होते हैं। आप विचार नहीं, विचारों का दंगल देखा करते हैं, जहां जो कुश्ती मार ले, वही सही माना जाता है। यानी विचार की सही-गलत होना उतना महत्त्वपूर्ण नहीं जितना कि कुश्ती मारने वाले की जीत की मुद्रा। इसलिए हम तर्क, तय, प्रति-तर्क या प्रति-तय की चिंता न करके शोर-शराबे और हल्ले को सत्य समझने लगते हैं। हम खबर की जगह हल्ले को देखते-सुनते हैं। अगर हमारे समाज में विचार-वितर्क की आदत कम हो रही है, एक दूसरे के विचार को सहने की आदत कम हुई जा रही है, तो उसका एक बड़ा कारण बहसों का शो में बदलना भी है, जिनकी नकल करके हम विचार की जगह हल्ले को सही समझते हैं। हम भी उसकी नकल पर हल्ले का शो ही करते हैं। इस खेल को बनाए रखने का कारण यह भी है कि खबर जुटाना महंगा पड़ता है। ओपिनियन जुटाना सस्ता पड़ता है। ओपिनियन जुटाने से एंकर का जनसंपर्क बढ़ता है। बुद्धिजीवी हलकों में गुडविल बनती है। अब हम जरा ‘‘डिबेट शोज’ की बात करें। डिबेट शो अपने आप में वैचारिक कट्टरता के हामी बन चले हैं। इन दिनों इन शोज से ‘‘वैचारिक विविधता’ का अवसान हो गया है। कई एंकर तो स्वयं कट्टर वैचारिकता के प्रवक्ता बन जाते हैं। यह हमारी वैचारिकता का संकट है। सवा सौ करोड़ की जनता में सत्तर से अस्सी करोड़ तक टीवी की पहुंच कही जाती है, यानी अस्सी करोड़ जनता तो दर्शक है ही लेकिन उसे समझाने वाले, नसीहत देने वालों की संख्या है कुल सौ से डेढ़ सौ। टीवी हमें इसी तरह विचार-विपन्न और विचार-संकीर्ण बना रहा है।{पत्रकार अरशद अली की वॉल से }

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Dakhal News 7 May 2017


trp week 17

  इस साल हर सप्ताह टीआरपी आने के बाद ये तय हो गया है कि सभी न्यूज़ चैनल आज तक की नक़ल करते हैं लेकिन उसकी जगह पर उसके बावजूद कोई चैनल नहीं पहुँच पा रहा। इंडिया टीवी और ज़ी न्यूज़ कुछ सम्हले हैं। लेकिन एबीपी की हालत अब भी पतली है।  नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 17 Aaj Tak 16.1 up 0.6  India TV 13.9 dn 0.3  ABP News 13.6 up 0.9  Zee News 13.5 up 0.5  News18 India 10.1 dn 0.5  News Nation 9.5 dn 0.4  India News 9.3 dn 1.0  News 24 5.9 dn 0.4  Tez 3.3 up 0.3  NDTV India 2.6 up 0.2  DD News 2.2 same    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.1 up 1.4  Zee News 14.6 up 0.6  India TV 14.1 dn 0.9  ABP News 13.9 up 1.6  News18 India 10.8 dn 0.9  News Nation 8.8 dn 0.5  India News 7.9 dn 0.6  News 24 5.0 dn 0.7  Tez 3.6 up 0.2  NDTV India 3.2 up 0.2  DD News 2.0 dn 0.3 =========================== Mp/cg के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल week-17 Zee         46.1 Ibc24      35.7 Etv          10.0 सहारा      3.8 बंसल        2.2

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Dakhal News 4 May 2017


भारतीय मीडिया

उमेश त्रिवेदी 22-23 मार्च 2017 को राज्यसभा में भारत में मीडिया के दर्दनाक हालात पर सम्पन्न एक सार्थक बहस को 'ब्लैलक-आउट' करने वाले भारतीय मीडिया में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर पत्रकारिता की आजादी पर जारी शानदार बहस (?) सुनने के बाद कतई भ्रमित होने की जरूरत नहीं हैं कि हिन्दुस्तान में प्रेस की आजादी बेहतरीन दौर से गुजर रही है। दुनिया भर में 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व 'प्रेस फ्रीडम-डे' पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीटर पर यह  औपचारिक संदेश दिया है कि 'विश्व प्रेस-फ्रीडम डे' पर हम स्वतंत्र और बहुमुखी पत्रकारिता का समर्थन करते हैं। यह लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।'  सवा महीने पहले राज्यसभा में भी कई विपक्षी नेताओं ने 'प्रेस-फ्रीडम' के मसले पर भारत में मीडिया की बरबादी को लेकर कुछ इसी प्रकार की भावनाओं को व्यक्त किया था।  राज्यसभा की बहस में शरद यादव जैसे कई नेताओं ने कई सार्थक सवाल उठाए थे। राज्यसभा व्दारा व्यक्त प्रेस की आजादी से जुड़ी चिंताओं का 'ब्लैपक-आउट' करके मीडिया के कर्ताधर्ताओं ने खुद ही काला नकाब पहन लिया था। भारत में मीडिया का स्व-आरोपित 'ब्लैलक-आउट' ही मीडिया का असली चेहरा है। भारत दुनिया के उन 72 देशों में शामिल है, जहां प्रेस की आजादी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 180 देशों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने का दावा करने वाला भारत वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 136 वें स्थान पर खड़ा है। पिछले साल की तुलना में भारत तीन स्थान नीचे उतरा है।  वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम के ये आंकड़े 2002 से जारी किए जा रहे हैं। इस रैंकिंग में विविधता, आजादी, वैधानिक-व्यवस्थाओं और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े कारकों का अध्ययन किया जाता है। इन 180 देशों के विशेषज्ञों से एक प्रश्नावली के आधार पर जानकारी जुटाई जाती है। 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि लोकतांत्रिक देशों में प्रेस की आजादी पर परोक्ष-अपरोक्ष नियंत्रण के चील-कौए मंडरा रहे हैं और उनसे बचाव के मामले में वहां की सरकारों का अजीबोगरीब उपेक्षा का भाव नजर आ रहा है। प्रेस की आजादी की यह हदबंदी बेहद चिंताजनक है।  तानाशाह देशों का जिक्र बेमानी है, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी इससे अछूते नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव-अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस प्रकार मीडिया विरोधी-अभियान चलाया, उन्हे अच्छे संकेत नहीं कहा जा सकता है। ब्रिटेन में 'ब्रेक्जिट' जनमत संग्रह के दौरान मीडिया को हाशिए पर ढकेलने की कोशिशें चेतावनी हैं कि आने वाले दिन मीडिया के लिए मुनासिब नहीं हैं। भारत में सूचना के अधिकारों को बेड़ियों में जकड़ा जा रहा है और वैचारिक-खुलेपन को राष्ट्रसवाद की लक्ष्मण-रेखाओं में घेरा जा रहा है।  वैचारिक लक्ष्मण-रेखाओं का रेखांकन और राष्ट्रहित के नाम पर सूचना के दायरों को समेटना प्रेस की आजाद आबोहवा में जहर घोलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन इस प्रक्रिया के साथ यह सवाल भी नत्थी है कि सरकारी प्रतिष्ठान इतने दुस्साहसी कैसे हो पा रहे हैं कि वो प्रेस की आजादी की हदबंदी और नसबंदी करने लगें...। मोटेतौर पर राजनेताओं और समाज में यह धारणा विकसित होती जा रही है कि मीडिया के अपने निहित-स्वार्थों और पूर्वाग्रहों ने तटस्थ पत्रकारिता के मानदंडों को छोटा कर दिया है। अमेरिका में मीडिया के प्रति डोनाल्ड ट्रम्प की बदमिजाजी और भारत में वैचारिक-लक्ष्मण-रेखाओं की घेराबंदी इन कमजोरियों को लिपिबध्द करने वाली है। आर्थिक-सर्वेक्षण कहते हैं कि भारत में मीडिया का कारोबार 1300 अरब रूपयों के आंकड़े को छू रहा है। मीडिया कारोबार की दुनिया में मानवीय सरोकारों और लोकतंत्र की संवेदनाओं का कद खुद छोटा होता जा रहा है। भारत में मीडिया काला-सफेद धंधा करने वाले सभी कारोबारियों का मुखौटा बन चुका है। सही अर्थों में एक व्यवसाय के रूप में मीडिया का आकलन कहता है कि यह पूंजी और कॉरपोरेट घरानों की कारोबारी जुगलबंदी है, जिसके तार निहित-स्वार्थों की लय पर तान छेड़ते हैं। सरकारों का यह उपेक्षा-भाव उन परिस्थितियों की देन है, जिन्हें मीडिया ने खुद अपने सामने खड़ा कर लिया है। सवाल यह है कि भारत में प्रेस की आजादी से जुड़ी इऩ 'इंटरनेशनल-एकडेमिक' चिंताओं को वैधानिकता और नैतिकता के  कौन से तराजू पर तौलना मुनासिब होगा। एक तराजू वह है, जहां मीडिया ने खुद को अनैतिक-दुराग्रहों के चक्रव्यूह में कैद कर रखा है। दूसरे तराजू में संवैधानिक व्यवस्थाओं की छत्रछाया झीनी पड़ने लगी है, जिसके लिए सरकारी प्रतिष्ठान उत्तरदायी हैं। भारत का मीडिया उस बुलबुल की तरह है, जिसने खुद को  निहित स्वार्थों के पिंजरे में कैद कर लिया है। पिंजरे के सामने यदि सत्ता के सैयाद मुस्कुरा रहे हैं तो इसके लिए दोषी किसे माना जाएगा...?  किसी ने ठीक ही कहा है- 'कैद में है बुलबुल सैयाद मुस्कुराए, रहा भी न जाए, कुछ कहा भी न जाए...?' मीडिया जब तक खुद अपनी बेडियां नहीं तोड़ेगा, तब तक प्रेस की आजादी से जुड़ी इन रिपोर्टों को तवज्जो नहीं मिल पाएगी।[लेखक भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]

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Dakhal News 4 May 2017


हिन्दी पत्रकारिता पर समग्र चिंतन

जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज निवास पर श्री निलय श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ''हिन्दी पत्रकारिता पर समग्र चिंतन'' का विमोचन किया। पुस्तक में पिछले आठ दशक के दौरान मध्यप्रदेश की हिन्दी पत्रकारिता पर केन्द्रित सामग्री का सचित्र विवरण है। इस अवसर पर सहारा एमपी के ब्यूरो प्रमुख वीरेंद्र शर्मा और बीजेपी मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर भी उपस्थित थे।  

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Dakhal News 3 May 2017


भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन

भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की परिचर्चा में जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र   जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र आज भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा ''समाचार-पत्रों में पाठकों का स्थान'' पर परिचर्चा में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा लिए गए पत्रकार कल्याण के फैसलों के लिए जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र का एसोसिएशन की ओर से अभिनंदन किया गया। परिचर्चा के मुख्य अतिथि जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकार कल्याण के निर्णय लेकर पत्रकारों को उनका हक ही दिया है। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित यह परिचर्चा प्रासांगिक है क्योंकि आज पाठकों के मनोनुकूल अनेक स्तंभ सीमित हो गए हैं। नए संचार साधनों के उपयोग के बाद भी पत्र-पत्रिकाओं के स्तंभों और उन्हें लिखने वालों का महत्व बना रहेगा। इसलिए पाठक की भूमिका भी कम नहीं होगी। डॉ. मिश्र ने कहा कि संगठन की ओर से दिए गए सुझाव पर विचारोपरांत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार और मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि आज पत्रकारिता की स्थिति ऐसी है कि ''जान निकली है, मगर साँस अभी बाकी है।'' कहने का आशय पत्रकारिता का प्राण तत्व कम जरूर हुआ है लेकिन अभी कायम है। समय के साथ परिवर्तन हुए हैं। पाठक अखबार की रीढ़ है। वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश त्रिवेदी ने कहा कि अखबारों में पाठक का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रख्यात संपादक श्री राजेन्द्र माथुर ने अखबार में पाठकों के विचारों के लिए अधिक स्थान सुरक्षित रखा था। श्री उमेश त्रिवेदी ने जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र को सुदर्शन व्यक्तित्व का धनी बताया। परिचर्चा को श्री अलीम बज़मी ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सतीश सक्सेना ने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को हल करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने सक्रिय भूमिका निभाई है। संचालन श्री पंकज शुक्ला ने किया। एसोसिएशन के महासचिव श्री संजय सक्सेना के अलावा श्री प्रेमनारायण प्रेमी, श्री आनंद सक्सेना, श्री राधेश्याम सोमानी आदि उपस्थित थे।

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Dakhal News 2 May 2017


 एंकर सोनिका सिंह चौहान

कोलकाता में  एंकर सोनिका सिंह चौहान (28) की तड़के कार हादसे में मौत हो गई, जबकि कार चला रहे बांग्ला धारावाहिकों के अभिनेता विक्रम चटर्जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर पर चोट लगी है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कार के परखच्चे उड़ गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पार्टी करने के बाद तड़के करीब 3.30 बजे दोनों कार से लौट रहे थे। टॉलीगंज थाना अंतर्गत लेक मॉल के पास उनकी कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराकर फुटपाथ पर चढ़ गई। घटना में गंभीर रूप से घायल दोनों को रुबी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान प्रातः पांच बजे के करीब सोनिका ने दम तोड़ दिया। टॉलीगंज थाने की पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। पार्टी में मौजूद उनके दोस्तों से पूछताछ कर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां से निकलने से पहले दोनों की मानसिक स्थिति कैसी थी। गौरतलब है कि सोनिका 2013 में "दीवा मिस इंडिया कांटेस्ट" की विजेता रह चुकी हैं। वह एक न्यूज चैनल में एंकरिग भी करती थीं। बताया जा रहा है कि कार विक्रम की है। घटना के समय वह काफी तेज गति से कार चला रहे थे। जब गाड़ी डिवाइडर से टकराकर फुटपाथ पर चढ़ी उस समय कार में मौजूद पांच एयरबैग में से एक भी नहीं खुला। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। इस बीच लापरवाही से गाड़ी चलाने को लेकर विक्रम के खिलाफ टॉलीगंज थाने में मामला दर्ज किया गया है।  

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Dakhal News 30 April 2017


पत्रकार-अखिलेश

समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया अखिलेश यादव ने कल एक पत्रकार पर गम्भीर टिप्पणी करने के मामले पर सफाई देते हुए कहा कि पत्रकार ने जो सवाल किया था, वह अच्छा नहीं था. वह सवाल पूछने वाले पहले सपा का संविधान पढ़ें. अखिलेश ने कल एक वरिष्ठ टीवी संवाददाता पर तल्ख टिप्पणी के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा ‘देखिये, पत्रकार ने जो सवाल किया था, वह अच्छा नहीं था. वह कुछ जानते ही नहीं हैं मेरे बारे में. एक वरिष्ठ पत्रकार ने मुझसे कहा कि आपके घर का झगड़ा टीवी चैनलों पर बहुत ज्यादा चल गया, जिसकी वजह से चुनाव में सपा की हार हुई.’सपा प्रमुख ने कहा ‘अरे, क्या आपको मेरा ही घर मिला था. मैं नहीं चाहता कि कोई सवाल बार-बार पूछा जाए. आखिर किसके परिवार में झगड़ा नहीं होता है.’ हालांकि उन्होंने माना कि परिवार में रार भी पार्टी की हार का एक कारण है. इस सवाल पर कि सपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक शिवपाल सिंह यादव कह रहे हैं कि अखिलेश को चुनाव के बाद अपने वादे के मुताबिक सपा अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिये, उन्होंने कहा ‘आप हमारी पार्टी का संविधान पढ़ लें, चुनाव आयोग का संविधान पढ़ लें, फिर सवाल करें.’ हालांकि कल इसी सवाल पर अखिलेश ने एक टीवी चैनल के वरिष्ठ संवाददाता पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था ‘तुम्हारे जैसे लोगों की वजह से ही देश बरबाद हो रहा है.’ बहरहाल, अखिलेश ने आज भी मीडिया पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में होने वाली किसी भी घटना की खबर को टीवी पर उनकी तस्वीर के साथ दिखाया जाता था. ‘क्या अब आप में से किसी की हिम्मत है कि मौजूदा मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) की तस्वीर लगाकर खबर दिखा दे.’उन्होंने कहा कि सहारनपुर में दंगा हुआ, इलाहाबाद में एक परिवार की हत्या की गयी और प्रतापगढ़ में एक वकील का कत्ल हो गया. क्या ये खबरें मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ दिखायी गयीं?

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Dakhal News 26 April 2017


 के. विक्रमराव

 विक्रमराव बोले इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट के  सम्मेलन में  आंध्रप्रदेश के विशाखापट्नम में इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट(IFWJ) के 126 वे वर्किंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई । इस बैठक के मुख्यतिथि भारत सरकार में केंद्रीय स्टील मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह  और हरियाणा की विधायक श्रीमती प्रेमलता सिंह  थी। बैठक  की अध्यक्षता फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रमराव ने की । इस कार्यक्रम में देश के सभी राज्यो से आये पत्रकारो ने हिस्सा लिया।साथ ही पत्रकारों को अपने कार्य के दौरान हो रही दिक्कतों पर मंत्री बीरेंद्र सिंह  का ध्यान आकर्षित कराया, चर्चा के दौरान पत्रकारो की सुरक्षा के विषय में अतिशीघ्र कानून पास कराने के लिए अपनी मांग मंत्री  के सामने रखी और प्रधानमंत्री तक पत्रकारो की बात पहुँचाने के लिए भी कहाँ जिस पर मंत्री बीरेंद्र सिंह  ने आश्वासन दिया।  तमिलनाडु के पत्रकारों ने पुरे देश में पत्रकारों को टोल प्लाजा में छूट देने की मांग की जिसपर मंत्री ने शीघ्र नितिन गड़करी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से बात कर पत्रकारो को राहत देने की बात कही । देश के विभिन्न राज्यो से आये पत्रकारों ने इस कार्यक्रम में अपनी -अपनी बात रखी, मुख्यअतिथि ने देश के चौथे स्तभ को  मजबूत बताया और कहाँ की आप सब की जागरूकता से ही सरकार बेहतर कार्य कर पा रही है । कार्यक्रम के अंत में सभी राज्यो की इकाइयों ने मुख्यतिथि को स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित गया । वर्किंग कमेटी के दूसरे सत्र की बैठक पाढ़ेरु में रखी गई थी, जहां पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की बात पर सभी राज्यो की मांगों को देखते हुए सभी की राय लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के.विक्रमराव ने कहाँ की शीघ्र ही देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से समय लेकर  पत्रकार सुरक्षा सबंधी मांगपत्र लेकर फेडरेशन उनसे मिलेगा और कानून बनाने की मांग करेगा अगर हमारी मांग पर कोई हिला-हवाला किया गया तो IFWJ  में अपने हजारों सदस्यों के साथ  दिल्ली कूच करेगा और आर-पार, की लड़ाई पत्रकारो के हित के लिए सरकार से लड़ेगी । इस कार्यक्रम में फेडरेशन के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी,सभी प्रदेशों के अध्यक्षो के साथ उत्तर प्रदेश व  बिहार,दिल्ली,हरियाणा,मध्यप्रदेश,केरला, तमिलनाडू, आसाम,राजस्थान,काश्मीर,महाराष्ट्र,ओडिशा,तेलंगाना सहित अन्य राज्यो के पत्रकारो ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया । पत्रकार साथी कार्यक्रम में शामिल हुए । कार्यक्रम के समापन अवसर पर आंध्रप्रदेश के अध्यक्ष वीरभद्र राव ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए देशभर से आये सभी पत्रकारो का आभार व्यक्त किया ।   

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Dakhal News 24 April 2017


dijital mediya

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया पत्रकारों को भी श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम के दायरे में लाने के लिए कदम उठाने शुरूकर दिए हैं। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो बीजेपी नीत एनडीए सरकार श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम में संशोधन करेगी ताकि इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया को भी इसके दायरे में लाया जा सके। उन्होंने कहा, 'हम श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम के तहत डिजिटल मीडिया समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक चैनलों को लाने के लिए कदम उठा रहे हैं। अगर जरूरत पडी तो हम अधिनियम में संशोधन करेंगे।' कोच्चि में दत्तात्रेय ने  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी श्रमजीवी पत्रकार कानून के अंदर लाने की तैयारी कर रही है। दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार सुनिश्चित कर रही है कि न्यूज पेपर्स में श्रम कानून और वेजबोर्ड के सिफारिशो को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा, 'मैंने सभी मुख्यमंत्रियों को लिखा है कि अगर किसी कर्मी को पर्याप्त मुआवजा और पारिश्रमिक नहीं मिल रही है तो उसपर ध्यान दिया जाए।' मंत्री ने कहा कि वह न्यूज आर्गनाइजेशन में श्रम से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मीडिया संगठन, जर्नलिस्ट असोसिएशन और श्रम मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक बुलाएंगे।

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Dakhal News 23 April 2017


फर्जी प्रेस

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा वाहनों पर फर्जी तरीके से प्रेस या पुलिस लिखकर धौंस जमाने वालों की अब खैर नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में निर्देश जारी कर दिए हैं । इसके तहत अब यदि कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से अपने वाहन पर प्रेस या पुलिस लिखवाएगा, तो उसके खिलाफ 420 धारा के तहत कार्रवाई होगी। कोर्ट के निर्णय के बाद फर्जी पत्रकारों में हडकम्प मचा हुआ है। ख़ास तौर पर प्रेस लिखवाने वाले व्यक्ति से पत्रकारिता से सम्बंधित चीज़े भी पूछी जा सकती है व् पैसे देकर प्रेस कार्ड बनाने वाले व्यक्ति को एवं बनवाने वाले व्यक्ति को भारी जुर्माने के साथ साथ 7 वर्ष की कैद भी हो सकती है साथ ही सम्बंधित वहन सीज़ कर दिया जायेगा। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत किसी को व्यक्ति को कपट पूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित कर आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, संपत्ति या ख्याति संबंधी क्षति पहुंचाना शामिल है। यह एक दंडनीय अपराध है। इसके तहत सात साल तक के कारावास की सजा का प्रावधान है।  

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Dakhal News 22 April 2017


मोदी सरकार - मीडिया

  प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मीडिया पर प्रचार खरीदने के लिए सौ दो सौ करोड़ रुपये नही पूरे 11 अरब (1100करोड़) रुपये से ज्यादा खर्च किए।मीडिया को बिकाऊ कहने वाले बीजेपी के समर्थक भक्तों के लिए ये खबर झटका देने वाली हो सकती है। नोटबंदी को लेकर कठघरे में खड़ी भाजपा सरकार इस खुलासे के बाद और घिर सकती है। आर.टी.आई.के मुताबिक मोदी सरकार ने पिछले ढाई सालों के भीतर अपने प्रचार-प्रसार पर 11 अरब रुपए से ज्याघदा खर्च किए हैं। ग्रेटर नोएडा के आर.टी.आई. एक्टिविस्टे रामवीर तंवर ने 29 अगस्त 2016 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से सूचना के अधिकार के जरिए पूछा था कि केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनाने से लेकर अगस्ते 2016 तक विज्ञापन पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है।तीन माह बाद जब आर.टी.आई.के जरिए मिले इस जवाब को देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे. इसमें बताया गया है कि पिछले ढाई साल में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर ग्यारह अरब रुपए से भी ज्यादा खर्च कर चुकी है। आर.टी.आई. के जरिए मंत्रालय से मिले विज्ञापन की जानकारी में बताया गया कि ब्रॉडकास्डह, कम्यु—निटी रेडियो, इंटरनेट, दूरदर्शन, डिजिटल सिनेमा, प्रोडक्शान, टेलीकास्ट, एसएमएस के अलावा अन्य खर्च शामिल हैं। प्रचार प्रसार के इन माध्यमों पर किया गया इतना खर्च SMS –  2014 – 9. 07 करोड़ 2015 – 5.15 करोड़ अगस्त 2016 तक – 3. 86 करोड़ इंटरनेट –  2014 – 6. 61 करोड़ 2015 – 14.13 करोड़ अगस्त 2016 तक – 1.99 करोड़ ब्राडकास्ट – 2014 – 64. 39 करोड़ 2015 – 94.54 करोड़ अगस्त 2016 तक – 40.63 करोड़ कम्युनिटी रेडियो – 2014 – 88.40 लाख 2015 – 2.27 करोड अगस्त 2016 तक – 81.45 लाख डिजिटल सिनेमा  2014 -77 करोड़ 2015 – 1.06 अरब अगस्त 2016 तक – 6.23 करोड़ टेलीकास्ट – 2014 – 2.36 अरब 2015-2.45 अरब अगस्त 2016 तक – 38.71 करोड़ प्रोडक्शन – 2014 – 8.20 करोड़ 2015 – 13.90 करोड़ अगस्त 2016 तक -1.29 करोड़ तीन साल में हर साल इतना किया खर्च 2014 – एक जून 2014 से 31 मार्च 2015 तक करीब 4.48 अरब रुपए खर्च 2015 – 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 5.42 अरब रुपए खर्च 2016 – 1 अप्रैल 2016 से 31 अगस्त 2016 तक 1.20 अरब रुपए खर्च जब ढाई साल में 1100 सौ करोड़ का खर्च आया है केवल विज्ञापन पर तो पूरे पांच साल में मोदी जी के विज्ञापनों पर 3000 हजार करोड़ का खर्च आ सकता है।इसकी तुलना उन्होंने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी की और कहा कि वहां सरकार के चुनाव प्रचार में 800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। जबकि हमारे देश में एक केंद्र सरकार इतना पैसा खर्च कर दिया ये बहुत ही निंदनीय है। हुकुमत मुँह भराई के हुनर से खूब वाकिफ है, ये हर शख़्स के आगे शाही टुकड़ा डाल देती है  

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Dakhal News 21 April 2017


साइबर न्यूज बुलेटिन्स

 राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने साइबर सुरक्षा संबंधी वीडियो और न्यूज पोर्टल साइबर न्यूज बुलेटिन्स का विमोचन किया। यह न्यूज बुलेटिन यू-ट्यूब पर दिखेगा। श्री गुप्ता ने कहा कि इस न्यूज बुलेटिन्स के माध्यम से लोग साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे। बुलेटिन में वाट्सएप सुरक्षा, जी-मेल सुरक्षा, फेसबुक प्रोफाइल सुरक्षा और इंटरनेट गतिविधियों को सुरक्षित करने संबंधी 25 वीडियो देखे जा सकते हैं। वीडियो को देखने के लिए यू-ट्यूब पर सोसाइटी ऑफ एमटेक फॉर साइबर एथिक्स, भोपाल के चेनल को सब्सक्राइब करना होगा। एक वीडियो में यह भी बताया गया है कि साइबर सेल में किन साइबर क्राइम के खिलाफ किस तरह की शिकायत दर्ज करवाना है। पोर्टल का एड्रेस http://www.cybernewsbulletins.com/ है। बुलेटिन और वीडियो साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट श्री अक्षय वाजपेयी द्वारा तैयार किया गया है।  

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Dakhal News 20 April 2017


पत्रकार को जेल भेजने वाला SDM सस्पेंड

  वरिष्ठ पत्रकार दशरथ सिंह परिहार  के साथ मारपीट क्रर खुद को सरकारी गुंडा साबित करने वाले श्योपुर एडीएम वीरेंद्र सिंह को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया है। सीएम ने घटना पर नाराजगी जताते हुए एडीएम के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आश्वासन दिया है। फिलहाल के लिए वीरेंद्र सिंह को ग्वालियर अटैच कर दिया गया है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर कई लोगों ने विरोध जताया था। वरिष्ठ पत्रकार दशरथ सिंह परिहार  के साथ हुई मारपीट के विरोध में पत्रकारों का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को स्टेट हैंगर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिला था। पत्रकारों ने सीएम को वरिष्ठ पत्रकार के साथ हुई घटना की जानकारी देते हुए श्योपुर के एडीएम वीरेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। इस पर सीएम ने उचित कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए वीरेंद्र सिंह को सस्पेंड करते हुए ग्वालियर अटैच कर दिया है। मंगलवार को दशरथ सिंह परिहार को उस समय गिरफ्तार करवाया गया, जब वे जिला जनसंपर्क कार्यालय में बैठे थे। परिहार दैनिक भास्कर के श्योपुर ब्यूरोचीफ हैं।एडीएम के गनमैन उन्हें एडीएम के चेंबर में ले गए। वहां एडीएम वीरेंद्र सिंह मौजूद थे। गनमैन ने दशरथ से मारपीट शुरु कर दी। रीडर ने भी दशरथ के साथ मारपीट की।इस बीच पुलिस को बुलवाकर एडीएम ने दशरथ को गिरफ्तार करवा दिया। सूचना मिलने पर कई पत्रकार वहां पहुंचे तो एडीएम ने उन्हें भी धमकी दी कि यदि किसी ने बीच में हस्तक्षेप किया तो उसे भी जेल भिजवा दूंगा।इसके बाद में एडीएम ने दशरथ सिंह को जेल भिजवा दिया गया। उनसे मिलने जेल पहुंचे पत्रकारों ने बताया कि उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं। उनके कपड़े भी मारपीट में फट गए थे।पत्रकारों ने उनकी जमानत लेने का प्रयास किया था लेकिन एडीएम के इशारे पर उनकी जमानत भी नहीं हो सकी। जेल में हालत बिगड़ने पर पत्रकारों की मांग पर दशरथ सिंह को इलाज के लिए देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना की प्रदेश के पत्रकार संगठनों ने निंदा की हैं। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शलभ भदौरिया ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया था।

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Dakhal News 19 April 2017


मजीठिया वेज नई दुनिया

छत्तीसगढ़ के श्रम आयुक्त ने मजीठिया वेज लागू करने के लिए नई दुनिया प्रबंधन को नोटिस किया है. नोटिस के साथ उन कर्मचारियों की सूची भी संलग्न की है  जिन्होंने मजीठिया वेज का क्लेम किया है. नोटिस में श्रम आयुक्त ने कहा है की क्लेम करने वाले कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में क्लेम की राशि जमा कर 2 मई 17 को उनके कार्यालय को बैंक स्लीप सहित दस्तावेज प्रस्तुत करें. छत्तीसगढ़ श्रम आयुक्त की इस कार्रवाई से जहां नई दुनिया प्रबंधन सकते में है , वहीं कर्मचारियों में हर्ष है. लगभग छह सात माह से मजीठिया वेज के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को सफलता मिली है.  

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Dakhal News 18 April 2017


मजीठिया वेज नई दुनिया

छत्तीसगढ़ के श्रम आयुक्त ने मजीठिया वेज लागू करने के लिए नई दुनिया प्रबंधन को नोटिस किया है. नोटिस के साथ उन कर्मचारियों की सूची भी संलग्न की है  जिन्होंने मजीठिया वेज का क्लेम किया है. नोटिस में श्रम आयुक्त ने कहा है की क्लेम करने वाले कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में क्लेम की राशि जमा कर 2 मई 17 को उनके कार्यालय को बैंक स्लीप सहित दस्तावेज प्रस्तुत करें. छत्तीसगढ़ श्रम आयुक्त की इस कार्रवाई से जहां नई दुनिया प्रबंधन सकते में है , वहीं कर्मचारियों में हर्ष है. लगभग छह सात माह से मजीठिया वेज के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को सफलता मिली है.  

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Dakhal News 18 April 2017


शिवसेना के सामना का सम्पादकीय

शिवसेना के सामना का सम्पादकीय  भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा, ‘भाजपा के लिए स्वर्णिम काल आ गया हो लेकिन जम्मू कश्मीर में हिंसा जारी है। पाकिस्तान ने कुलभूषण के मामले में रूख सख्त किया हुआ है, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसान सामूहिक आत्महत्या करने पर आमादा हैं, मुद्रस्फीति कम नहीं हुई साथ ही रोजगार दर बढ़ा नहीं है। देश का स्वर्णिम काल अभी नहीं शुरू हुआ है।’ उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी ने कहा कि उसका मानना है कि किसी एक पार्टी के लिए स्वर्णिम काल नहीं हो सकता बल्कि पूरे देश के लिए होना चाहिए।’ संपादकीय के अनुसार, प्रत्येक राज्य में पार्टी की सत्ता होने के बारे में सोचना काफी सुखद और उत्साहजनक है लेकिन भाजपा को राजग के 33 सहयोगियों के बारे में अपनी नीतियां स्पष्ट करनी चाहिए जिनके लिए हाल ही में (प्रधानमंत्री द्वारा) रात्रि भोज आयोजित किया गया था। शिवसेना, अकाली दल और तेदेपा जैसी पार्टियां अपने-अपने राज्यों में मजबूती के साथ खड़ी हैं। यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि हमारी मित्रता की आवश्यकता (भाजपा को) है या नहीं।   संपादकीय में आगे कहा गया कि भाजपा पंचायत से संसद तक शासन के अपने अभियान में आगे बढ़ती रहे लेकिन जो उनके खिलाफ बोलते हैं उन्हें देश विरोधी नहीं कहा जाना चाहिए नहीं तो लोकतंत्र में जो भी बचा है वह भी खो जाएगा।  प्रत्येक राजनीतिक दल को अपना विस्तार करने का हक है लेकिन भारत जैसे विशाल देश में, सत्तासीन दल पर विपक्षी पार्टियों को मजबूती देने और संसदीय लोकतंत्र चलता रहे यह सुनिश्चत करने की भी जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल को भाजपा के 2 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था, ‘भाजपा को अभी अपने शीर्ष पर पहुंचना बाकी है उसका स्वर्ण काल तब आएगा जब वह पंचायत से देशभर की विधानसभाओं और संसद तक उसका शासन होगा।

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Dakhal News 17 April 2017


आईएएस को धमकी के मामले में पत्रकार पर केस

भोपाल जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आईएएस अफसर आशीष भार्गव को फोन पर मिली धमकी के मामले में पुलिस को प्रकरण दर्ज करने में 1 साल लग गया। पुलिस ने कॉल डिटेल निकलने के बाद नामजद आरोपी पत्रकार के खिलाफ हत्या की धमकी देने का प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी जमीन के एक मामले को अपने पक्ष में निपटाने के लिए दबाव बना रहा था। बैरसिया पुलिस के अनुसार तत्कालीन एसडीएम बैरसिया आशीष भार्गव ने 16 मार्च 2016 में बैरसिया पुलिस से फोन पर धमकी मिलने की शिकायत की थी। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन नंबर की कॉल डिटेल निकालने के लिए कंपनी से जानकारी मांगी। पुलिस के कई बार आवेदन करने के बाद शनिवार को पुलिस को आरोपी की कॉल डिटेल मिल पाई। इसके बाद बैरसिया पुलिस ने शनिवार देर रात भोपाल निवासी पत्रकार अरशद अली खान के खिलाफ फोन पर धमकी देने का प्रकरण दर्ज किया। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसडीएम भार्गव की कोर्ट में जमीन के नामांतरण संबंधी एक मामला चल रहा था। यह जमीन अरशद के रिश्तेदारों के नाम पर बताई जाती है। इस संबंध में अरशद ने कई बार एसडीएम को फोन कर मामला निपटाने के लिए दबाव बनाया। उसने धमकाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने फैसला उसके हक में नहीं दिया तो अंजाम बुरा होगा। टीआई एचसी लाडिया ने बताया कि जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। उसके बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो पाएगा कि आखिर वह तत्कालीन एसडीएम को क्यों धमका रहा था?  

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Dakhal News 16 April 2017


शिवराज के करीबी नेता ने पत्रकार को धमकाया

पत्रकारवार्ता बुलाकर पत्रिका के ब्यूरो चीफ के साथ की बदसलूकी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे खास और विदिशा के स्वयंभू सीएम व विदिशा नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन, तो लगता है सज्जन, सहज और प्रदेश की जनता के सर्वप्रिय शिवराज सिंह  की लुटिया डुबोकर दम लेंगे। अभी तक तो टंडन की दहशत  से विदिशा की जनता, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्त्ता और अफसर ही परेशान थे, अब टंडन खुलेआम मीडिया को धमकाने लगे हैं।  सीएम के खास सिपहसालार टंडन ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता बुलाकर पत्रिका के ब्यूरो चीफ  गोविंद सक्सेना के साथ नगर पालिका की वाहवाही न छापने के लिए न केवल उनसे बदसलूकी की, अभद्रता की, बल्कि उन्हें धमकाया कि, यदि बच्चे पालना है, तो चुपचाप  पत्रकारिता करो, हम जो कहें वो छापो, वर्ना हमें ठीक करना आता है(देखें वीडियो)। प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन (PMJA) के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महासचिव  महेश दीक्षित ने टंडन की मीडिया के साथ इस बदसलूकी की तीखी भर्त्सना की है। तथा इसे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला करार दिया है। श्री दीक्षित ने मुख्यमंत्री से टंडन पर कड़ी कार्रवाई के साथ उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने की भी मांग की है।  

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Dakhal News 14 April 2017


 रमेशचंद्र अग्रवाल

  दैनिक भास्कर ग्रुप के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल (73) गुरुवार सुबह पंचतत्व में विलीन हो गए। अंतिम संस्कार भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर हुआ। इसमें एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत, बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी कैलाश विजयवर्गीय समेत अादि शामिल हुए। बुधवार सुबह 11 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पर रमेशजी को हार्ट अटैक आया था। उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका।  रमेशजी को अंतिम विदाई देने के लिए छत्तीसगढ़ के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, एएस सिंह देव, मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग और नरोत्तम मिश्रा भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। विधायक रामेश्वर शर्मा, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव भी शोक की इस घड़ी पर मौजूद थे।उमाशंकर गुप्ता, सुरेश पचौरी, मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने भी रमेशजी को अंतिम विदाई दी। जब लोगों ने मेरा मजाक बनाया, तब रमेशजी ने हौसला बढ़ाया था: शिवराज सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रमेशजी को याद करते हुए भास्कर में लिखे एक लेख में कहा, "मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया था, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। "उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया, बल्कि खुलकर सहयोग दिया। उनके ही सुझावों और व्यक्तिगत संबंधों से उस समिट में देश के ही नहीं, बल्कि विदेश के भी कई प्रतिष्ठित उद्योग समूहों ने भाग लिया। यह उन्हीं के प्रयासों का ही परिणाम था कि कई औद्योगिक घरानों ने मप्र में पूंजी निवेश किया। वे मप्र की बेहतर छवि बनाने के लिए प्रयत्नशील रहे।हर बार उनका अतुलनीय सहयोग हमें प्राप्त हुआ। इसे प्रदेशवासी कभी भूल नहीं पाएंगे। असल में वे पूरे मध्य प्रदेश के ब्रांड एम्बेसडर थे। रमेशजी प्रदेश में हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध थे। रियल एस्टेट, सोयाबीन उद्योग, टेक्सटाइल्स, चेंबर ऑफ कॉमर्स और वैश्य समाज, सभी लोगों से उनका जीवंत संवाद बना रहता था।" 'उनके पास समस्याओं के समाधान रहते थे' शिवराज ने आगे कहा, "वह अक्सर लोगों के साथ मेरे पास समस्याओं को लेकर आते थे। किंतु उनकी एक अच्छी बात यह थी कि वह समस्याओं के साथ समाधान और सुझाव भी लेकर आते थे।वे सरकार की सीमाओं को समझते थे। जिन लोगों के साथ मांग और समस्याओं को लेकर आते थे, वे उनसे कहते थे कि हमें राज्य के हितों व राजस्व का भी ध्यान रखना है। हम सभी को मिलकर सरकार का सहयोग भी करना है। उनकी यह बात मुझे बहुत ही अच्छी लगती थी।"  "उन्होंने पूरे देश में दैनिक भास्कर को आगे बढ़ाया। यह सिर्फ भास्कर समूह या एक कंपनी का ही प्रसार नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में मप्र के वर्चस्व का प्रसार था। दैनिक भास्कर आगे बढ़ा तो प्रदेश का नाम भी बढ़ा। हमें सदैव गर्व रहा कि मप्र का एक उद्योगपति इतना सफल हुआ। मुझे याद है कि दैनिक भास्कर पुराने भोपाल से निकलता था। वहां से प्रगति करते हुए वह आज सिर्फ भारत का ही नहीं, विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय अखबार बन गया है।" "दैनिक भास्कर की सफलता के शिखर पर पहुंचने की यह यात्रा रमेशजी के अथक परिश्रम, बुद्धिमत्ता एवं दूरदर्शिता का ही परिणाम है। दैनिक भास्कर आज अपनी निष्पक्ष लेखनी के लिए स्थापित हो चुका है। पत्रकारिता में नए प्रतिमान छूने के साथ ही रमेशजी हमेशा सामाजिक सरोकारों के लिए संवेदनशील भी रहे। पानी बचाने के अभियान में उनके मार्गदर्शन में भास्कर ने लोगों में जागृति लाने और उनके व्यवहार परिवर्तन में अतुलनीय सहयोग दिया।चाहे सूखे रंगों की होली हो या सिंहस्थ में वैश्य महासभा के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यस्था, ये पुण्य कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। एक बड़े पत्र समूह की बागडोर संभालने की महती जिम्मेदारी के साथ ही वे सामाजिक एकता और समरसता के लिए हमेशा कार्यरत रहे। उनकी कोशिश होती थी कि सभी धर्मों और वर्गों के लोग मिल-जुलकर रहें। उनके होली-मिलन और ईद-मिलन जैसे कार्यक्रम समाज को यही संदेश देते रहे। यह उनका ही निरंतर योगदान रहा, जिससे राजधानी का भोपाल उत्सव मेला प्रदेश की पहचान बन गया।" मोदी-सोनिया ने दी श्रद्धांजलि नरेंद्र मोदी ने कहा, "मीडिया जगत में अपने योगदान की वजह से रमेशजी हमेशा याद किए जाएंगे।सोनिया गांधी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "मीडिया और समाजसेवा के क्षेत्र में रमेशजी का योगदान सराहनीय है। उनके जाने से रिक्त हुई जगह भरने में समय लगेगा।लोकसभा स्पीकर ने सुमित्रा महाजन ने कहा, "मीडिया के मॉडर्नाइजेशन के लिए रमेशजी याद किए जाएंगे। वे मीडिया ही नहीं, सामाजिक कार्यों में भी सदा आगे रहते थे।मोरारी बापू ने कहा, "परमात्मा के निर्णय को स्वीकारना ही पड़ता है। चैत्र नवरात्रि में उन्होंने पूरी रामकथा सुनी। प्रसन्नता के साथ उन्होंने कथा की पूर्णाहुति की और खुद का जीवन रामायण को अर्पण कर गए। इस निर्वाण को मेरा प्रणाम और श्रद्धांजलि।आचार्य महाश्रमण ने कहा, "ज्ञात हुआ कि श्री रमेशजी का देहावसान हो गया। इस समय उनके सभी पारिवारिक व संबंधीजन धैर्य और मनोबल का परिचय दें। आध्यात्मिक मंगलकामना।"  

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Dakhal News 13 April 2017


 रमेशचंद्र अग्रवाल

भास्कर समूह के चेयरमेन रमेशचंद्र अग्रवाल का अहमदाबाद में आज सुबह 11 बजे हृदयाघात से  निधन हो गया। वे 73  वर्ष के थे। श्री अग्रवाल अहमदाबाद से एक फ्लाइट में जा रहे थे जब उन्हें हार्ट अटैक हुआ। उनके पार्थिक शरीर को आज शाम भोपाल लाया गया । श्री अग्रवाल का अंतिम संस्कार गुरूवार को भोपाल में किया जाएगा। एयरपोर्ट पर मध्यप्रदेश सरकार के जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ,राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये।  रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर दुख प्रकट किया। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी ट्वीट कर अपनी संवेदना प्रकट की। शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट किया, 'भास्कर समूह के चेयरमैन रमेश अग्रवाल जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखदायी है। वह संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय हेतु याद किये जायेंगे।' श्री अग्रवाल ने भोपाल विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान डिग्री प्राप्त की थी है। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे द्वारा उन्हें भारत के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दैनिक भास्कर समूह के अध्यक्ष श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री चौहान ने कहा कि स्वर्गीय श्री अग्रवाल पत्रकारिता के उदात्त सिद्धांतों और मूल्यों से जुड़े थे। उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता को समृद्ध बनाने में अमूल्य योगदान दिया है। श्री चौहान ने कहा कि पत्रकारिता के साथ-साथ वे सामाजिक मुद्दों में गहरी रूचि लेते थे और एक प्रतिबद्ध समाज सेवक के रूप में उन्होंने कई प्रकल्प सफलतापूर्वक संपादित किये। इसके अलावा स्वर्गीय श्री रमेश जी आध्यात्मिक व्यक्ति थे और धर्म-संस्कृति के काम को तन-मन से पूरा करते थे। उनके निधन से प्रदेश ने एक कर्मठ पत्रकार, समाजसेवक और साधक को खो दिया है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकमग्न परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

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Dakhal News 12 April 2017


rni

नरेंद्र मोदी सरकार की सख्ती की गाज छोटे अखबारों और पत्रिकाओं पर पड़ी है. इससे दूर दराज की आवाज उठाने वाली पत्र-पत्रिकाओं का संचालन ठप पड़ गया है, साथ ही इससे जुड़े लाखों लोग बेरोजगार भी हो गए हैं. ऐसे दौर में जब बड़े मीडिया घराने पूरी तरह कारपोरेट के चंगुल में आ चुके हैं और असल मुद्दों को दरकिनार कर नकली खबरों को हाईलाइट करने में लगे हैं, मोदी सरकार उन छोटे अखबारों और पत्रिकाओं की गर्दन दबोचने में लगी है जो अपने साहस के बल पर असली खबरों को प्रकाशित कर भंडाफोड़ किया करते थे. हालांकि दूसरा पक्ष यह है कि उन हजारों लोगों की अकल ठिकाने आ गई है जो अखबारों पत्रिकाओं की आड़ में सिर्फ और सिर्फ सरकारी विज्ञापन हासिल करने की जुगत में लगे रहते थे और उनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं हुआ करता था. वो अखबार पत्रिका के जरिए ब्लैकमेलिंग और उगाही के धंधे में लिप्त थे. मोदी सरकार द्वारा सख्ती के इशारे के बाद आरएनआई यानि समाचार पत्रों के पंजीयक का कार्यालय और डीएवीपी यानि विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय काफी सख्त हो चुके हैं. समाचार पत्र के संचालन में जरा भी नियमों को नजरअंदाज किया गया तो आरएनआई समाचार पत्र के टाईटल पर रोक लगाने को तत्पर हो जा रहा है. उधर, डीएवीपी विज्ञापन देने पर प्रतिबंध लगा दे रहा है. देश के इतिहास में पहली बार हुआ है जब लगभग 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए गए और 804 अखबारों को डीएवीपी ने अपनी विज्ञापन सूची से बाहर निकाल दिया है. इस कदम से लघु और माध्यम समाचार पत्रों के संचालकों में हड़कम्प मच गया है. पिछले काफी समय से मोदी सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है. आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दिया है. समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल निरस्त कर दिए. इसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के अखबार-मैग्जीन (संख्या 59703) और फिर उत्तर प्रदेश के अखबार-मैग्जीन (संख्या 36822) हैं. इन दो के अलावा बाकी कहां कितने टाइटिल निरस्त हुए हैं  बिहार 4796, उत्तराखंड 1860, गुजरात 11970, हरियाणा 5613, हिमाचल प्रदेश 1055, छत्तीसगढ़ 2249, झारखंड 478, कर्नाटक 23931, केरल 15754, गोआ 655, मध्य प्रदेश 21371, मणिपुर 790, मेघालय 173, मिजोरम 872, नागालैंड 49, उड़ीसा 7649, पंजाब 7457, चंडीगढ़ 1560, राजस्थान 12591, सिक्किम 108, तमिलनाडु 16001, त्रिपुरा 230, पश्चिम बंगाल 16579, अरुणाचल प्रदेश 52, असम 1854, लक्षद्वीप 6, दिल्ली 3170 और पुडुचेरी 52. [भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]    

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Dakhal News 11 April 2017


पत्रकार की मौत

रजनीश जैन  पत्रकारों के सम्मान और पत्रकारिता पर व्याख्यानों की नियमित श्रंखला के इस नृशंस दौर में वाट्सएप पर पत्रकारों के एक ग्रुप में तफरी कर रहा था कि तीन तस्वीरें एक साथ सरकीं। पत्रकारनुमा भाजपा कार्यकर्ता ने अपने इलाके सागर के भूतेश्वर रोड से वे तस्वीरें दो लाइन के मैसेज के साथ पोस्ट की थीं। 'एक वृद्ध को सड़क किनारे लावारिस पड़े पाया गया,108 बुला कर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।उनकी जेब से ये कागजात मिले हैं।'दो कागज थे ,एक आधार कार्ड और दूसरा साप्ताहिक अखबार का परिचय पत्र जिसे देखकर मैं ठिठक गया था। वे छोटेलाल भारतीय थे, 'सैनिक गर्जना' अखबार के संपादक। इस मैसेज पर दिनभर और कोई डीटेल नहीं आया।अगले दिन के अखबारों में भी इस बाबत कुछ नहीं था। मैंने पोस्ट डालने वाले भाजपा कार्यकर्ता को संपर्क किया कि उन बुजुर्ग के बारे में कोई अपडेट है क्या? उसने बताया कि उनकी हालत गंभीर थी कुछ ही घंटे जीवित रहे।उनके परिवार का पता चल गया , वे लोग लाश लेने पहुँच गये थे।  कुछ साप्ताहिक अखबार वालों को मैंने जब यह खबर दी तो वे उनकी मौत पर दुखी तो हुए लेकिन लावारिस पड़े मिलने पर उन्हें कोई हैरत न थी। एक ने कहा हम लोगों की हालत अब यही है, गनीमत है कि उनका परिवार पहुँच गया था, यहां तो यह उम्मीद भी खत्म है। खामोश कथन था लेकिन हजार सवालों से भरा हुआ। लेकिन मैं चुप नहीं रह सकता।छोटेलाल भारतीय पर लिख रहा हूँ यह जानते हुए कि इस लेख को पाठक नहीं मिलेंगे ,...तो क्या सिर्फ इस वजह से मुझे भी खामोश रह जाना चाहिए। वह भी तब जब मुझे इल्म है कि यह सिर्फ साप्ताहिक वाले छोटेलाल की लावारिस मौत नहीं है बल्कि अखबारी दुनिया की एक दुर्धुष विधा की सोची समझी हत्या है जिसमें हमारी सरकारें और समाज शामिल है। छोटेलाल दलित थे ,'भारतीय' सरनेम लिखते थे।लेकिन इस निष्ठुर देश में नाम बदलने भर से जाति का फंदा काटा नहीं जा सकता। 1975 की एमरजेंसी के दमनकारी वक्त में जब अखबार और अखबार वाले बंद किए जा रहे थे, छोटेलाल अखबार निकालने की जिद पर काम कर रहे थे। लगातार निकालने पर 1976 में उनके अखबार को आरएनआई नंबर भी मिल गया। सागर,भोपाल और दिल्ली के गलियारों में वे कांग्रेस नेताओं के यहाँ सागर के ग्रामीण दलित समाज की समस्याएं ले जाते थे, समस्याओं के हल कराते समय ही सरकारी विज्ञापन भी लिखा लेते थे जिससे उनका और उनके अखबार का खर्च चलता था। पचास साल की उम्र तक शादी नहीं की।बाद में समाज की ही एक विवाहिता को उसकी संतानों सहित अपना मान लिया। एक दशक तक यही उनका परिवार था। वह परिवार बर्बादी जिसके मुखिया का इंतजार कर रही थी। मुख्यमंत्री रहते दिग्विजय सिंह को अपने परवर्ती काल में साप्ताहिकों की घातकता और व्यर्थता का बोध हुआ और उन्होंने साप्ताहिकों को मिलने वाले सरकारी विज्ञापनों पर सख्ती शुरु कर दी। अभी तक जिलों और कस्बों से सैकड़ों की तादाद में निकल रहे टेबलायड साइज के छोटे छोटे साप्ताहिकों को सरकारी विज्ञापनों की कुल राशि के 40 प्रतिशत एड दिए जाते थे। इसी वित्तीय आधार पर साप्ताहिकों की काली, सफेद, नीली, लाल, पीली दुनिया चलती थी। इनमें विभिन्न क्षेत्रीय और छोटी विचारधाराओं को भी खाद पानी मिलता था। दूरस्थ और गुमनाम इलाकों के भ्रष्टाचार और समस्याएं उजागर होती थीं। बिजली, पानी, सड़़कों की बढ़ती समस्याएं छाप रहे इन सैकड़ों इदारों पर नियंत्रण में असफल होता देख दिग्गी राजा ने इनका गला घोंटने की ठानी और बड़े अखबारी संस्थानों की तरफ फण्ड का प्रवाह बढ़ा दिया। राजा की गौरमेंट भी साप्ताहिकों के साथ ही रसातल में चली गयी। भाजपा आई तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की चमक में खो गयी। दिग्विजय की विज्ञापननीति को भाजपा नेतृत्व ने और कड़ाई से लागू किया।उधर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रमोद महाजन ने सन 77 में आडवाणी द्वारा लागू की गई विज्ञापननीति को बदलते हुए साप्ताहिक अखबारनवीसी को सूली पर चढ़ा दिया। यहां से साप्ताहिकों की उम्मीद का आखिरी चिराग बुझ गया। तकनीक के मंहगे दौर में जब बड़े संस्थानों के साप्ताहिक काल के गाल में समा गये तो छोटेलाल भारतीय की 'सैनिक गर्जना' कब तक गरजती। आखिरी बार चार पाँच साल पहले 'सैनिक गर्जना' का अंक लिए छोटेलाल भारतीय को सागर सर्किट हाऊस में ठहरे पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर से मिलते देखा गया।वे अखबार की कापी देने आए थे। इस अंक में उन्होंने एक लेख छापा जिसमें पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा पत्रकारों को दी जाने वाली मंथली पर तीक्ष्ण रिपोर्ट छपी थी। विभाग ने यह रसद रोक दी।कुछ स्थानीय पत्रकार लंबे समय तक छोटेलाल को कोसते रहे। पर किसी ने यह मालूम करने की कोशिश नहीं की कि परिवार के भरणपोषण में नाकाम भारतीय को अपना घर छोड़ देना पड़ा था। दस साल से वे अकेले शहर के एक रेस्टोरेंट के बाजू की छपरी में सो रहे थे और बचा खुचा खा रहे थे। कभी कभी उनके कोई शिष्य उनकी बौद्धिक मदद लेने के बहाने ठीकठाक खिला देते थे। शहर में वृद्धों के मुफ्त भोजन के ठिकाने सीताराम रसोई भी वे चले जाते थे। अपने मौसरे भाई के पास नजदीक के गांव कुड़ारी में भी कुछ दिन काट लेते थे। गांव में अब भी लोग उनसे सरकारी योजनाओं के आवेदन भरवाते और शहर भिजवा देते थे। बीमारी में कई कई दिन अस्पताल में कटे।एक थैला उनकी कुल संपत्ति था। जेब में हमेशा की तरह खुद के अखबार का ,खुद के हस्ताक्षर से , खुद को जारी आईडेंटिटी कार्ड और आधारकार्ड की फोटोकापी रहती थी। पर यह सब अब निराधार है। लावारिस ही सही,74 साल की पकी उम्र में वे चले गये हैं। अच्छा ही हुआ। छोटेलाल भारतीय विकास की राजनीति का ये दौर शायद ही बर्दाश्त कर पाते जिसके पैकेज में गरीब को 5 रु की थाली से लेकर सबको घर , कर्जामाफी, मुफ्त शिक्षा स्वास्थ्य तीर्थयात्राएं हैं। सचमुच जिंदगी घोषणापत्रों में कितनी आसान लगती है।...पर हम प्रदेश का पहला दैनिक निकालने वाले मास्टर बल्देवप्रसाद के शहर के लोग एक छोटे से अखबार वाले की मौत किस पन्ने पर लिखें।...कौन छापता है ऐसी मौतों को। शीर्षक की दूसरी पंक्ति दुष्यंत के शब्दों में कुछ यूं है,जोड़ कर पढ़ लें ...घर अंधेरा देख तू आकाश के तारे न देख।'  (पत्रकार रजनीश जैन की वॉल से )  

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Dakhal News 10 April 2017


navlok bharat

प्रचंड जनादेश: चुनौतियाँ और संभावनाएँ विषय पर हुई संगोष्ठी जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज पाक्षिक पत्रिका 'नवलोक भारत', भोपाल द्वारा आयोजित वैचारिक संगोष्ठी प्रचंड जनोदश: चुनौतियाँ और संभावनाएँ में हिस्सा लिया। मंत्री डॉ. मिश्र ने समन्वय भवन में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता की। जनसंपर्क मंत्री ने संगोष्ठी में आए अतिथि वक्ताओं श्री सुधांशु त्रिवेदी और सुश्री शाज़िया इल्मी का मध्यप्रदेश आगमन पर स्वागत किया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राजनैतिक दल को प्राप्त प्रचंड बहुमत अधिक अपेक्षाओं को साथ लाता है। उन्होंने कहा कि अपेक्षाओं के ज्वार और उत्तरदायित्वों के भार का संगम हाल ही में उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव परिणामों में देखने को मिला है। श्री त्रिवेदी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में विकास का नया युग प्रारंभ होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व का यह नैतिक प्रभाव ही है कि उनके स्वच्छता अभियान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के आव्हान को जनता ने अंगीकार्य किया। श्री त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की नेतृत्व क्षमता से विश्व के कई राष्ट्र प्रभावित हुए हैं। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रीय एकता समिति मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने किया। संगोष्ठी को दैनिक भास्कर समाचार पत्र समूह के प्रमुख श्री रमेशचंद्र अग्रवाल और सुश्री शाजिया इल्मी,  ने भी सम्बोधित किया। सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग ने प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत किया। संचालन श्री विवेक सारंग ने किया। पत्रिका के संस्थापक संपादक वरिष्ठ राजनेता श्री कैलाश सारंग ने कहा कि पत्रिका द्वारा ऐसी विचार संगोष्ठियों का आयोजन भविष्य में भी किया जाएगा। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति-चिन्ह किए गए। कार्यक्रम में श्री राजीव मोहन गुप्त प्रधान संपादक दैनिक जागरण, श्री राजेन्द्र शर्मा प्रधान संपादक दैनिक स्वदेश, श्री भरत पटेल प्रधान संपादक दैनिक सांध्य प्रकाश, वरिष्ठ साहित्यकार श्री बटुक चतुर्वेदी के साथ ही राजधानी के अनेक वरिष्ठ पत्रकार, जन-प्रतिनिधि और प्रबुद्धजन उपस्थित थे। शुरूआत सुश्री उपासना सारंग के वन्दे-मातरम् गायन से हुई।  

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Dakhal News 9 April 2017


ibc 24 एन्कर सुरप्रीत

छत्तीसगढ़ में एक टीवी न्यूज एंकर सुरप्रीत कौर ने ब्रेकिंग न्यूज में अपने ही पति की मौत की खबर पढ़ डाली। यह न्यूज रीडर कौर छत्तीसगढ़ के एक प्राईवेट चैनल आईबीसी-24 में काम करती है। शनिवार सुबह वह रोजाना की तरह ऑफिस आई और न्यूज बुलेटिन पढ़ने लगी। इसी दौरान महासमु्ंद जिले के पिथौरा में हुए एक सड़क हादसे की जानकारी आई तो महिला एंकर ने उसकी ब्रेकिंग न्यूज पढ़ी। हालांकि इस दौरान महिला को पता नहीं था कि इस हादसे में उसके पति की भी मौत हो गई है। इसके बाद महिला एंकर ने रिपोर्टर को फोन करके घटना की जानकारी हासिल की। रिपोर्टर ने बताया कि हादसे में व्हीकल में पांच लोग सवार थे जिसमें से तीन की मौत हो गई है। रिपोर्टर ने यह भी बताया कि मरने वाले तीन लोगों की पहचान नहीं हो सकी है।  इस दौरान महिला एंकर कौर को याद आया कि जहां ये हादसा हुआ है उसी रूट से उस वक्त उसके पति अपने चार साथियों के साथ जाते हैं।  यह खबर सुनने के बाद महिला एंकर टूट गई और न्यूज अवर खत्म करने के बाद टीवी स्टूडियो से निकल गई। महिला एंकर के साथियों का कहना है कि वह बहुत बहादुर महिला है। हमें गर्व है कि वह हमारी एंकर है लेकिन इस घटना से आज हम सभी सदमे में हैं। 28 वर्षीय कौर आईबीसी-24 न्यूज चैनल में एंकर है। कौर की शादी एक साल पहले हरशद कवादे के साथ हुई थी और ये दंपत्ति रायपुर में रहता है। कौर न्यूज अवर के बाद हादसे वाली जगह गई थी, लेकिन उसके बाद वापस ऑफिस लौटी। खबर साभार- लाइव हिन्‍दुस्‍तान

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Dakhal News 8 April 2017


पत्रकार सुरक्षा कानून

महाराष्ट्र में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमले करने वालों की अब खैर नहीं है। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को पत्रकार सुरक्षा कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है। संभवत: महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है जहां की कैबिनेट ने पत्रकार सुरक्षा कानून पास किया है। राज्य में पत्रकारों पर हमले की घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ दिनों पहले विधानसभा ने आश्वासन दिया था कि इससे जुड़ा विधेयक इसी सत्र में लाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट में मसौदे को मंजूरी देने के बाद सरकार शुक्रवार को बजट सत्र के आखिरी दिन दोनों सदनों में पारित करा सकती है। सरकार ने जो मसौदा तैयार किया है उसके मुताबिक पत्रकारों, मीडिया संस्थानों के साथ कांट्रैक्ट पर काम करने वाले पत्रकारों पर हमला करना गैरजमानती अपराध होगा। हमला करने वाले को इलाज का खर्च और मुआवजा भी अदा करना होगा। मुआवजा न देने पर आरोपियों के खिलाफ दीवानी न्यायालय में मुकदमा चलाया जाएगा। वही, विधेयक में कानून का दुरुपयोग रोकने का भी प्रावधान है। यदि जांच में शिकायत झूठी पाई गई तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग 2005 से ही हो रही है। तत्कालीन गृहमंत्री दिवंगत एनसीपी नेता आरआर पाटिल ने पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बनाने का वादा किया था। इसको लेकर नारायण राणे की अध्यक्षता  में समिति गठित की गई थी लेकिन कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार इस कानून को पारित करने में टालमटोल करती रही।

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Dakhal News 8 April 2017


पत्रकारअनुराग उपाध्याय

       // माकूल ज़वाब // उस के पास सवाल बहुत थे मेरे पास थे कुछ माकूल जवाब... सिलसिला चला तो मैं सवाल बन गया ,लेकिन उसके पास जवाब नहीं था ...  सवालों के जवाब उसकी खूबसूरत झुकी पलकें देती रहती थीं ... और लब ख़ामोशी अख्तियार  कर लेते थे ... उँगलियों पर सजे नाख़ून  दूसरे नाख़ून से नेलपेंट कुरेदने में लग जाते जैस पुराने जख्मों को शिद्दत से कुरेदा जा रहा हो... जवाब ढूंढते हुये हम सवालों की दीवार खड़ी करते रहे  पता ही नहीं चला वो दीवार गिर पड़ी ,हमारे रिश्ते उसमें लहूलुहान हो गए ... अनसुलझे सवाल अब भी उसके जहन में होंगे, कुछ माकूल हल मैंने भी लिख लिए थे उसके लिए ... शायद उम्र के किसी मोड़ पर उसे जरूरत पड़े तो ... "अनुराग उपाध्याय" 11/7/2016 * पत्रकार ,लेखक- कवि अनुराग उपाध्याय समाज के हर विषय पर अपनी कलम चलाते हैं।  साफ़ साफ़ और बिना लाग लपेट के सच बयान कर देना उनके लेखन की सबसे बड़ी खूबी है। अनुराग की कवितायेँ  कई बार रुमानियत की सरहदों पर चहलकदमी करती नज़र आती हैं तो कई दफ़ा सामाजिक बदलाव के लिए हल्ला बोलती प्रतीत होती हैं।  संपादक   

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Dakhal News 7 April 2017


एक्जिट पोल प्रतिबंधित

भारत निर्वाचन आयोग ने एक्जिट पोल के संबंध में निर्देश जारी किये हैं। उप निर्वाचन के संबंध में किसी भी प्रकार के एक्जिट पोल का संचालन तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा उसका प्रकाशन या प्रचार अथवा किसी भी तरीके से उसके प्रसार पर प्रतिबंध रहेगा। किसी भी प्रकार के निर्वाचन संबंधी मामले का किसी भी ओपीनियन पोल या अन्य किसी पोल सर्वे के परिणामों सहित प्रदर्शन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से करवाने पर प्रतिबंध रहेगा।  

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Dakhal News 7 April 2017


trp week 13 indiatv

नेशनल न्यूज़ चैनल्स में आज तक सिरमौर बना हुआ है। लेकिन इण्डिया टीवी के लिए पिछले दो हफ्ते बहुत ही ख़राब साबित हुए हैं। ऐसा लग रहा है 2004 से लेकर अबतक  इंडिया टीवी के इतिहास का सबसे ख़राब दौर चल रहा है। रजत शर्मा की टीम के परफॉर्मेंस को दर्शकों ने नकार दिया है। इण्डिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम ने 12  वें सप्ताह में में इंडिया टीवी के ख़राब प्रदर्शन के चलते आधा दर्जन पत्रकारों को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अब देखना है 13 वें सप्ताह भी इंडिया टीवी के ख़राब प्रदर्शन की गाज किस पर गिरती है। देश के साथ मध्यप्रदेश में भी इंडिया टीवी पहले दूसरे नंबर से खिसक कर पांचवे और छठवे नम्बर पर पहुँच गया है। मध्यप्रदेश में पिछले एक साल से लगातार इंडिया टीवी की trp डाउन हुई है।  बीत सप्ताह हर दृष्टि से एबीपी न्यूज़ के लिए बेहतरीन परिणाम देने वाला रहा है।  -------------------------------------------------------------------- Mp/cg के रीजनल टॉप फाइव न्यूज़ चैनल trp week  13    --------------------------------------------------------------------     ज़ी न्यूज........  51.5  आईबीसी.....    21.8 ईटीवी.......       17.5 सहारा समय....    5.1 बंसल न्यूज.....     2.1 ------------------------------------- नेशनल न्यूज़ चैनल्स  trp Wk 13 Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs,  Aaj Tak 16.8 dn 0.5  ABP News 15.4 same   India TV 12.8 dn 0.3  Zee News 12.8 dn 0.8  News18 India 9.7 up 1.7  India News 9.4 same   News Nation 8.6 dn 0.1  News 24 6.9 dn 0.4  Tez 3.2 up 0.2  NDTV India 2.3 up 0.1  DD News 2.1 up 0.1    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.1 dn 1.0  ABP News 15.3 up 0.3  Zee News 14.0 dn 0.6  India TV 13.2 dn 0.7  News18 India 10.1 up 1.6  India News 8.1 same   News Nation 8.0 dn 0.4  News 24 6.5 up 0.1  Tez 3.6 up 0.4  NDTV India 2.9 up 0.1  DD News 2.2 up 0.2 ------------------------------------------------------------------------  

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Dakhal News 6 April 2017


 शलभ भदौरिया

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा विधानसभा में पत्रकारों के लिए पत्रकार कौशल विकास प्रकोष्ठ की स्थापना तथा श्रद्धानिधि की राशि में वृद्धि और आयु सीमा घटाकर62 से 60 वर्ष किए तथा फोटो जर्नलिस्ट, कैमरामेन को भी श्रद्धानिधि की पात्रता दिए जाने का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।  इसके लिए संघ मुख्यमंत्री व जनसंपर्क मंत्री का अभिनंदन करेगा।  संघ के प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया तथा मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष शरद जोशी ने कहा कि जनसंपर्क मंत्रीजी ने पत्रकार चिकित्सा सहायता योजना में पत्रकार के आश्रित माता-पिता को भी इलाज के लिए सहायता देने, गंभीर रोगों के इलाज के लिए अब तक दिए जाने वाले अधिकतम सहायता राशि को 50 हजार से एक लाख रुपए करने, गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी बीमा योजना में शामिल करने, श्रद्धानिधि की राशि को 6 हजार से 7 हजार रुपए बढ़ाने,राज्य तथा राज्य से बाहर पत्रकारों के लिए अध्ययन योजना लागू करने तथा पत्रकारों की समस्याओं के अध्ययन के निराकरण के लिए राज्य स्तर पर समिति का गठन करने, राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं से फाउंडेशन कोर्स प्रशिक्षण प्राप्त करने पर 50 प्रतिशत शुल्क शासन द्वारा वहन करने की घोषणा की है। शासन का यह निर्णय स्वागत योग्य है।  श्री भदौरिया तथा श्री जोशी ने बताया कि संघ विगत कई वर्षों से पत्रकारों के कल्याण और समस्याओं को लेकर संघर्षरत है। कई बार शासन को इस संबंध में ज्ञापन भी दिए है, जिसमें से अधिकांश मांगें शासन द्वारा स्वीकृत की गई, जिसमें श्रद्धानिधि की राशि में वृद्धि करने, आयु सीमा 62 से घटाकर 60 वर्ष करने, गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बीमा योजना में शामिल करने, अधिमान्य पत्रकारों को लेपटाप देने, स्वास्थ्य योजना मे पत्रकारों के माता-पिता को शामिल करने, अधिमान्य कार्ड की अवधि 2 वर्ष करने, टोल नाकों पर पत्रकारों को छूट देने, पत्रकारों की कार्यशाला आयोजित करने, तहसील स्तर पर अधिमान्यता देने, पत्रकार भवन के लिए अनुदान देने, पत्रकार प्रताडऩा के मामले में गृह मँत्रालय के परिपत्र का कड़ाई से पालन करने जैसी अनेक मांगे शासन ने संघ की पहल  पर स्वीकृत की है।  जनसंपर्क मंत्री श्री मिश्रा ने सलकनपुर सिहोर में आयोजित सम्मेलन के अवसर संघ के ज्ञापन के प्रति उत्तर में मांगे  शीघ्र स्वीकृत करने का आश्वासन दिया था और यह आश्वासन उन्होने विधानसभा में घोषणा कर पूरा कर दिया है। पूर्व जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने भी सिहोर में आयोजित जिला सम्मेलन में संघ के ज्ञापन को सरकार के लिए मार्गदर्शन भी बताया था और कहा था कि पत्रकारों की समस्याओं को लेकर इससे बढिय़ा कोई मांग पत्र नहीं हो सकता।  श्री भदौरिया व श्री जोशी ने बताया कि देश व  प्रदेश में पत्रकारों पर हो रहे हमलों और प्रताडऩा के मामलों को देखते हुए संघ   केंद्र व राज्य सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग वर्षों से कर रहा है, जिस प्रकार से डाक्टरों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट बना है, इसी प्रकार पत्रकारों के लिए भी एक्ट बनाया जाए, ताकि पत्रकार निर्भिक होकर अपने दायित्व का निर्वहन कर सके। इस संबंध मे सांसदोंं एवं केंंद्रिय मंत्री के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी भेजे गए  और प्रदेश स्तर पर पोस्टकार्ड अभियान भी चलाया गया,जिसमें लगभग 10 हजार पोस्टकार्ड प्रधानमंत्रीजी को भेजे गए।   प्रदेश में टोल नाकों को सरकार समाप्त करे या पत्रकारों को रियायत दें। अधिमान्य पत्रकारों को राष्ट्रीय राजमार्ग के टोलनाकों पर छूट  दे। पत्रकार पंचायत बुलाने,  जिला स्तर पर  पत्रकार प्रताडऩा जांच सेल गठित करने, तहसील व ब्लाक स्तर पर पत्रकारों के नाम शासन की सूची में दर्ज करने, शासन की कमेटियों में संघ के सदस्यों को शामिल करने सहित कुछ ओर मांगे लंबित है,जिसकी ओर भी शासन का ध्यान आकर्षित किया गया है।  श्रम दिवस 1 मई को इन मांगों को लेकर पुन: शासन का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। 

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Dakhal News 5 April 2017


यशवंत सिंह

यशवंत सिंह कहने को तो ये बड़े लोग होते हैं लेकिन दिल इनका इतना छोटा होता है कि ये अपने इर्द-गिर्द रहने वालों के दुखों-भावनाओं को भी नहीं समझते. इंडिया न्यूज चैनल के मालिक कार्तिक शर्मा उर्फ कार्तिकेय शर्मा अरबों-खरबों के मालिक हैं. होटल, मीडिया समेत कई किस्म के बिजनेस हैं. इनके पिता विनोद शर्मा हरियाणा के बड़े नेता हैं. एक भाई मनु शर्मा इन दिनों तिहाड़ जेल में जेसिका लाल मर्डर केस की सजा काट रहा है. सारे कारोबार का दारोमदार कार्तिक शर्मा के कंधों पर है. लेकिन इनकी ओछी मेंटलटी के चलते इनसे काफी लोग नाराज रहते हैं. इन महाशय ने अपने ड्राइवर तक को कई महीने की सेलरी नहीं दी थी. खफा ड्राइवर ने हिसाब बराबर करने का ऐसा खौफनाक प्लान बनाया कि सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. नोएडा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कार्तिकेय शर्मा अपने मित्र अशोक डोगरा के साथ इंडिया न्यूज चैनल के आफिस से दिल्ली के जोरबाग स्थित अपने घर जा रहे थे. बात 27-28 मार्च की रात की है. इंडिया न्यूज़ चैनल का आफिस नोएडा के सेक्टर तीन में है. कार्तिकेय शर्मा के ड्राइवर राम प्रकाश ने उनकी मर्सिडीज कार निकाली और दोनों को लेकर चल पड़ा. कार चालक रामप्रकाश मर्सिडीज को लेकर रजनीगंधा चौराहे के अंडरपास पर पहुंचा. इसके बाद उसने कार की स्पीड असामान्य रूप से बढ़ा दी. कार्तिकेय शर्मा के तो होश उड़ गये. उन्होंने ड्राइवर को डांटा और स्पीड कम करने को कहा. चालक रामप्रकाश ने सेलरी कई महीने से न देने की बात कहते हुए कार्तिकेय शर्मा को गरियाना शुरू किया और कहा- ''तुझसे तो आज हिसाब बराबर करके रहूंगा, तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.'' ड्राइवर रामप्रकाश कार को डीएनडी पर ले जाकर साइड से दीवार में टक्कर मारना शुरू कर दिया. टक्कर पीछे के उस साइड से मार रहा था जिस तरफ कार्तिकेय शर्मा बैठे हुए थे. इसके बाद उसने कार को बैक करते हुए कस कर टक्कर मारी. कार्तिकेय शर्मा और उनके मित्र को मौत साक्षात नजर आने लगी. ये लोग चिल्लाने लगे और अपनी जान की गुहार लगाने लगे. किसी तरह ये लोग कार से निकल कर भागे. पुलिस ने सूचना मिलते ही ड्राइवर को अरेस्ट कर लिया और आईपीसी की धारा 307 में मुकदमा लिखकर उसे जेल भेज दिया. फिलहाल यह बड़ी खबर न किसी चैनल के क्राइम शो में दिखी न किसी चैनल के टिकर में झलकी. मीडिया के धंधेबाज और काले दिल के मालिक अपनी एकता कायम रखते हुए इस बड़े घटनाक्रम को पी गए. हां नोएडा में कुछ एक अखबारों में खबर है लेकिन किसकी पक्षधरता लेकर लिखी गई है, उसे आप पढ़ कर जान सकते हैं.  सवाल यह है कि क्या इससे मीडिया मालिक सबक लेंगे? वे कई महीनों तक लोगों से काम कराते हैं और सेलरी दिए बिना निकाल देते हैं. एक ड्राइवर ने जिस तरह से बदला लिया, उससे समझा जा रहा है कि उसने बाकियों को भी रास्ता दिखा दिया है. नोएडा दिल्ली जैसे महंगे इलाके में कोई कर्मचारी बिना सेलरी कैसे अपने परिवार को जिंदा रख सकता है. एक ब्वायलिंग प्वाइंट आता है जिसके बाद खुद को कीड़े मकोड़े की तरह जिंदा रखने की जगह आर-पार करने का फैसला लेते हुए मरने मारने पर उतारू हो जाता है.[bhadas4media.com से साभार लेखक भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं ]  

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Dakhal News 4 April 2017


अनुराग उपाध्याय की कविता

  * पेशे से पत्रकार ,लेखक- कवि अनुराग उपाध्याय समाज के हर विषय पर अपनी कलम चलाते हैं।  साफ़ साफ़ और बिना लाग लपेट के सच बयान कर देना उनके लेखन की सबसे बड़ी खूबी है। संपादक      //दंगा // अनुराग उपाध्याय    उस भीड़ में  तुम ही नहीं  हम भी थे ...  कुचले गए  सपने पाँव से  वो तुम्हारे नहीं  हमारे भी थे ...  टपकता रहा  शरीर से वह  लाल-लाल सा लहू  तुम्हारा नहीं  हमारा ही था ...  बदहवासी का आलम  चीखों का सिसकना  लाशों का सड़ना  जिस सहारे बैठे थे तुम  वो लहूलुहान जिस्म  हमारा ही था ...  ------------------------------------

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Dakhal News 2 April 2017


patrkar madhyprdesh

राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को अधिमान्यता देने के लिये राज्य स्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है। समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। समिति में आयुक्त जनसंपर्क या उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। समिति में श्री आनंद पांडे नवदुनिया इंदौर, श्री मनीष दीक्षित दैनिक भास्कर भोपाल, श्री मृगेन्द्र सिंह दैनिक जागरण भोपाल, श्री राजेन्द्र शर्मा टाइम्स ऑफ इंडिया भोपाल, श्री मनोज शर्मा आईबीएन 7 भोपाल, श्री प्रकाश तिवारी न्यूज आर्बजर भोपाल, श्री शरद द्विवेदी बंसल न्यूज भोपाल, श्री अक्षत शर्मा स्वेदश भोपाल, श्री नवीन पुरोहित आईएनडी 24 भोपाल, श्री गिरजा शंकर स्वतंत्र पत्रकार भोपाल, श्री राजेश सिरोठिया अग्निबाण भोपाल, श्री उमेश निगम एमपी न्यूज टुडे डॉट कॉम, श्री नितेन्द्र शर्मा फ्री प्रेस भोपाल, श्री प्रवीण दुबे ईटीवी भोपाल, श्री प्रशांत जैन यूएनआई भोपाल, श्री सोमित्र जोशी तरूण भारत नागपुर, भोपाल, श्रीमती दीप्ति चौरसिया इंडिया न्यूज भोपाल, श्री रमेश राजपूत दैनिक भास्कर ग्वालियर, श्री अरविन्द तिवारी अध्यक्ष प्रेस क्लब इंदौर, श्री विशाल हाडा अध्यक्ष, प्रेस क्लब उज्जैन, श्री सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी दैनिक यश भारत भोपाल, श्री रमाकांत द्विवेदी दैनिक भास्कर रीवा, श्री योगेश सोनी दैनिक भास्कर जबलपुर और श्री सुरेश शर्मा आचरण ग्वालियर को सदस्य बनाया गया है। राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को जिला एवं तहसील-स्तरीय अधिमान्यता देने के लिये संभाग-स्तरीय अधिमान्यता समिति का गठन किया गया है। समिति दो साल के लिये प्रभावशील रहेगी। भोपाल संभाग श्री अनिल गुप्ता दैनिक भास्कर भोपाल, श्री कन्हैया लाल लोधी राज एक्सप्रेस भोपाल, श्री सीताराम ठाकुर पीपुल्स समाचार भोपाल, श्री अरूण त्रिवेदी दैनिक भास्कर विदिशा, श्री दिनेश निगम त्यागी हरिभूमि भोपाल, श्री कमल खस दैनिक जागरण राजगढ़, श्री रघुवीर तिवारी ब्यूरो चीफ स्वदेश ग्वालियर और श्री महेन्द्र सिंह पीटीआई सीहोर। ग्वालियर संभाग श्री उमेश भारद्वाज स्वदेश शिवपुरी, श्री गणेश सांवला दैनिक भास्कर दतिया, श्री लाजपत राय अग्रवाल दैनिक भास्कर भिण्ड, श्री रजनीश दुबे दैनिक भास्कर मुरैना, श्री सत्यप्रकाश शर्मा फ्री प्रेस ग्वालियर, श्री हरीश चंद्रा नव दुनिया ग्वालियर, श्री राजकुमार दुबे दैनिक जागरण मुरैना और श्री प्रवीण मिश्रा पत्रिका गुना। उज्जैन संभाग श्री राजेन्द्र पुरोहित दैनिक नई दुनिया उज्जैन, श्री अर्जुन सिंह चंदेल दैनिक अग्निपथ उज्जैन, श्री तरूण मेहता दैनिक अग्निबाण देवास, श्री शौकीन जैन दैनिक नवभारत नीमच, श्री दिलीप पाटनी पीटीआई रतलाम, श्री महेश शर्मा यूनीवार्ता आगर, श्री बृजेश परमार टाइम्स ऑफ इंडिया उज्जैन और श्री धनश्याम बटवाल स्वतंत्र पत्रकार मंदसौर। इंदौर संभाग श्री राजेश राठौर दैनिक प्रभात किरण इंदौर, श्री राजेश ज्वेल दैनिक अग्निबाण इंदौर, श्री कपीश दुबे नई दुनिया इंदौर, श्री ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी धार, श्री राजेश शर्मा चौथा संसार धार, श्री हरिनारायण शर्मा दैनिक भास्कर इंदौर, श्री दिलीप वर्मा वार्ता झाबुआ और श्री हर्ष भान तिवारी निमाड़ दर्शन खण्डवा। रीवा संभाग श्री अजय सिंह दैनिक नव स्वदेश रीवा, श्री संजय कुमार पयासी दैनिक नवभारत सतना, श्री राम अवतार गुप्ता यूएनआई शहडोल, श्री राजेश शुक्ला दैनिक स्वतंत्र मत अनूपपुर, श्री ब्रजेश पाठक दैनिक स्टार समाचार सीधी, श्री गोपाल अवस्थी दैनिक भास्कर सिंगरौली, श्री देवेन्द्र सिंह दैनिक जागरण रीवा और श्री संतोष गुप्ता दैनिक जन-दुनिया उमरिया। जबलपुर संभाग श्री अंशुमान भार्गव दैनिक हितवाद जबलपुर, श्री जहीर अंसारी ईएमएस जबलपुर, श्री संजय सिंह जनपक्ष सिवनी, श्री आशीष शुक्ला दैनिक नई दुनिया डिण्डोरी, श्री धर्मेन्द्र दैनिक लोकमत समाचार छिन्दवाड़ा, श्री आदित्य पंडित दैनिक यशभारत बालाघाट, श्री कुशलेन्द्र श्रीवास्तव नरसिंहपुर और श्री संजय जैन कटनी। सागर संभाग श्री सुनील गौतम दैनिक भास्कर दमोह, श्री बी.एन. जोशी दैनिक आचरण पन्ना, श्री श्याम अग्रवाल दैनिक शुभ भारत छतरपुर, श्री जितेन्द्र सोनकिया दैनिक भास्कर सतना, टीकमगढ़, श्री रामशंकर तिवारी दैनिक सागर दिनकर सागर, श्री राघवेन्द्र दुबे दैनिक जागरण सागर, श्री अमित कृष्ण श्रीवास्तव दैनिक नई दुनिया सागर, श्री प्रमोद चौबे दैनिक नवदुनिया सागर। होशंगाबाद संभाग श्री पंकज पटेरिया स्वतंत्र पत्रकार, श्री प्रकाश मंडलोई सा. पिपरिया प्रकाश होशंगाबाद, श्री विनोद सोमवंशी दैनिक भास्कर, श्री सौरभ तिवारी पीटीआई, श्री नवनीत कोहली दैनिक पायनियर, श्री लोमेश गौर दैनिक नई दुनिया हरदा, श्री प्रकाश भारद्वाज दैनिक देशबंधु होशंगाबाद और श्री विनय वर्मा दैनिक नवदुनिया बैतूल को सदस्य बनाया गया है। पत्रकार संचार कल्याण समिति गठित  राज्य शासन द्वारा पत्रकारों को आर्थिक सहायता देने के लिये मध्यप्रदेश पत्रकार संचार कल्याण समिति का गठन किया गया है। समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। समिति में आयुक्त जनसंपर्क या उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। श्री विजय मनोहर तिवारी दैनिक भास्कर भोपाल, श्री प्रकाश भटनागर एलएन स्टार भोपाल, श्री सुनील शुक्ला नवदुनिया भोपाल, श्री रंजन श्रीवास्तव हिन्दुस्तान टाइम्स भोपाल, श्री आशुतोष गुप्ता आईएनडी 24 भोपाल, श्री वीरेन्द्र शर्मा सहारा समय भोपाल, श्री विनोद तिवारी बी.टी.वी. भोपाल, श्री बृजेश राजपूत एबीपी न्यूज भोपाल, श्री सिंकदर अहमद सांध्य प्रकाश भोपाल, श्री सुनील शर्मा प्रदेश टुडे भोपाल, श्री शिव अनुराग पटेरिया लोकमत समाचार भोपाल, श्री अजय त्रिपाठी आईबीसी 24 भोपाल, डॉ. नवीन आनंद जोशी स्वदेश इंदौर, श्री सुरेश शर्मा शिखर वाणी भोपाल, श्री मनीष श्रीवास्तव पीटीआई भोपाल, श्री राकेश अग्निहोत्री नया इंडिया भोपाल, श्री विजय दास राष्ट्रीय हिन्दी मेल भोपाल, श्री हरीश दिवेकर डी. बी. पोस्ट भोपाल, श्री अवधेश गुप्ता संपादक नव स्वदेश रीवा, श्री श्याम अवस्थी सा. स्पूतनिक इंदौर, श्री सुदेश तिवारी आचरण सागर, श्री विनय अग्रवाल नवभारत ग्वालियर, श्री अनूप शाह नई दुनिया जबलपुर और श्री राजेश माली दैनिक भास्कर उज्जैन को समिति का सदस्य बनाया गया है।  

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Dakhal News 1 April 2017


चुनावी भविष्यवाणी पर भी रोक

चुनाव में नेताओं और पार्टियों की जीत की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषियों से चुनाव आयोग नाराज है। एक्जिट पोल के प्रसारण पर प्रतिबंध से बचने के लिए मीडिया में [प्रकाशित /प्रसारित ] दिखाए जाने वाले ज्योतिषियों और टैरो कार्ड रीडरों की चुनावी भविष्यवाणी पर सख्त ऐतराज जताया है। आयोग ने अब इन ज्योतिषियों की चुनावी भविष्यवाणी पर भी रोक लगा दी है।  दिल्ली में चुनाव आयोग ने गुरुवार को इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया दोनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य के चुनावों में प्रतिबंधित काल में ज्योतिषियों के माध्यम से भी ऐसी खबरों का प्रसारण और प्रकाशन न किया जाए। ताकि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न हो सकें। मीडिया संगठनों को भेजी गई एडवाइजरी में कहा गया है कि जनप्रतिनिधि कानून की धारा 126 ए के तहत किसी भी व्यक्ति कोई एक्जिट पोल नहीं कराना चाहिए। साथ ही इसका प्रकाशन या किसी भी तरीके से प्रिंट या इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिए उसका प्रचार-प्रसार नहीं करना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित एक निश्चित अवधि में किसी भी एक्जिट पोल का प्रसारण नहीं होना चाहिए।  

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Dakhal News 31 March 2017


trp 12 week इंडिया टीवी चौथे नंबर पर पहुंचा

  12 वें सप्ताह के टेलीविजन रेटिंग पॉइंट में रजत शर्मा का इंडिया टीवी लुढ़क कर चौथे नंबर पर आ गया है। लगता है दर्शकों को इंडिया टीवी  पर बीजेपी का गुणगान पसंद नहीं आया। आजतक पहले ,एबीपी दूसरे और ज़ी न्यूज़ तीसरे नंबर पर रहे। वहीँ एमपी -छत्तीसगढ़ में रीजनल ज़ी नंबर वन बना हुआ है लेकिन ibc 24 और etv तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।     Mp/cg रीजनल टॉप फाइव न्यूज़ चैनल  Trp week-12 ज़ी न्यूज............  45.1 आईबीसी............ 24.7 ईटीवी.........         20.7 सहारा.........          4.6 बंसल.......             2.9 नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 12 Aaj Tak 17.2 up 0.9  ABP News 15.4 up 0.4  Zee News 13.6 up 0.7  India TV 13.1 up 0.6  India News 9.4 dn 0.1  News Nation 8.7 up 0.2  News18 India 8.0 dn 1.4  News 24 7.3 dn 2.0  Tez 3.1 up 0.6  NDTV India 2.2 dn 0.1  DD News 2.0 up 0.1   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 17.1 up 0.9  ABP News 15.0 up 0.2  Zee News 14.6 up 0.9  India TV 13.9 up 0.9  News18 India 8.5 dn 1.5  News Nation 8.4 dn 0.5  India News 8.1 up 0.3  News 24 6.4 dn 1.5  Tez 3.1 up 0.5  NDTV India 2.8 same   DD News 1.9 dn 0.1

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Dakhal News 30 March 2017


मीडियाकर्मी से बदसलूकी

मध्यप्रदेश में पत्रकारों पर पुलिसिया जुल्म के पिछले दिनों 15 मामले सामने आये। कल एक ट्रेनी आईपीएस ने फिर पत्रकारों से बदसलूकी की। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई तो उन्होंने कहा वो ऐसे अफसरों पर नकेल कसेंगे।   भोपाल में नव दुनिया अखबार के प्रेस फोटोग्राफर निर्मल व्यास  का 70 हज़ार का कैमरा प्रशिक्षु आईपीएस धर्मराज मीना ने फेका ज़मीन पर और  कलेक्टर से शिकायत कर  निर्मल व्यास को बंद करने की  दी धमकी । अयोध्या नगर थाना इलाके में दिनदहाड़े महिला को बंधक बनाकर लूट के मामले में इस नए नवेले अफसर ने  मीडिया पर निकाला गुस्सा। लूट की घटना को दरकिनार करते हुए इस अफसर ने पूरे मामले को किया दबाने का प्रयास किया और कहा मेरा थाना क्षेत्र  है यहाँ नही कर सकते पीड़िता से बात। इनके बाद जब पीड़िता मीडिया को अपना पक्ष  बताने लगी तो लूट की घटना न होने के लिए पीड़िता को भी धमकाया ,मीडियाकर्मियों के साथ की अभद्रता। कैमरामैनों के कैमरा छीनकर तोड़े । मीणा को प्रशिक्षु के तौर पर एक दिन पहले ही 3 माह के लिए बनाया गया है थाना प्रभारी। आयोध्या नगर थाने में कवरेज के दौरन फोटो जर्नलिस्ट वेल फेयर समिति के संयोजक ,नव दुनिया के सीनियर फोटो जर्नलिस्ट  निर्मल व्यास का कैमरा  छीनने के कारण कैमरा बुरी तरहा से छतिग्रस्त हो  चुका है जिसके चलते नवदुनिया के फोटोग्राफर निर्मल व्यास  के द्वारा अयोध्या थाने में धर्मराज मीणा के खिलाफ आवेदन दिया गया। 

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Dakhal News 29 March 2017


सागर पत्रकारिता विभाग

पहला छात्र मिलन समारोह दिल्ली के एमपी भवन में आयोजित हुआ।  मध्यप्रदेश के सागर के डॉ हरिसिंह गौर विवि के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विद्यार्थियों का पहला मिलन समारोह दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में आयोजित हुआ। इसमे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो कृष्णा आत्रे, प्रो श्याम कश्यप सहित दिल्ली में कार्यरत पत्रकार और अधिकारी शामिल हुए।  निर्णय लिया गया कि पहले भोपाल और उसके बाद सागर विवि में 25 और 26 नवंबर को एल्युमिनी कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।  दिल्ली में आयोजित छात्र मिलान आयोजन को संबोधित करते हुए प्रो कृष्णा आत्रे ने कहा कि मैं दुनिया भर में घूमता रहा लेकिन सागर ले जैसी प्रतिभा और क्षमता कहीं नहीं मिली। प्रो श्याम कश्यप वा मुकेश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए। इस कार्यक्रम में प्रो कृष्णा आत्रे, प्रो श्याम कश्यप, आलोक मोहन नायक, मुकेश कुमार, विनय मिश्रा, सूर्यकांत पाठक, मनोज वर्गीस, अखलेश श्रीवास्तव रामनारायण श्रीवास्तव,राज पाठक, अथोवा मिथी, दीपनारायण,ऋतु त्रिपाठी शामिल हुए।   

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Dakhal News 28 March 2017


 डा. एम एल सोनी बने साधना न्यूज के सीएमडी

भोपाल के जानेमाने शिक्षाविद एवं सामजिक कार्यकर्ता डा. एम एल सोनी साधना न्यूज मप्र छग के सीएमडी  (चेयरमेन व प्रबंध संचालक) नियुक्त किए गए हैं। यह जानकारी चेनल हेड रवीन्द्र जैन ने दी है। जैन ने बताया कि डा. सोनी लगभग 32 वर्ष तक उच्च शिक्षा विभाग में रहे। उन्होंने तत्कालीन सहकारिता मंत्री गोविंदसिंह व जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा के ओएसडी के रूप में सफलतापूर्वक काम किया। वे भोपाल के एमएलबी कन्या महाविद्यालय में वाणिज्य विभाग के हेड आफ द डिपार्टमेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। साधना न्यूज मप्र व छग को संचालित करने वाली एक्यूट डेली मीडिया प्रा लि में उन्हें सीएमडी बनाया गया है। डा.सोनी के आने के बाद साधना न्यूज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। डा.सोनी सरल, सहज व नेतृत्व क्षमता के धनी हैं, उनके निर्देशन में साधना न्यूज अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफल होगा। शनिवार को साधना न्यूज के समस्त स्टाफ  ने डा.सोनी के सीएमडी बनने पर उन्हें बधाईयां दी हैं।

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Dakhal News 27 March 2017


शरद यादव बोले यह भाषण कोई नहीं छापेगा

पत्रकारिता छोड़कर सब धंधे कर रहे मीडिया मालिक जदयू सांसद शरद यादव ने यह भाषण 22 मार्च, 2017 को राज्यसभा में दिया. अपनी बात रखते हुए उन्होंने देश में पत्रकारिता की दशा और दिशा पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. पढ़ें पूरा भाषण… हिंदुस्तान का जो लोकतंत्र है, जो पार्लियामेंट है, उसमें दोनों सदन चुने हुए सदन हैं. इन दोनों सदनों के ऊपर हिंदुस्तान के पूरे लोगों की हिफाजत का जिम्मा है. हम सब लोगों की बात का हिंदुस्तान के लोगों के पास पहुंचने का रास्ता एक ही है और वह मीडिया है. आज हालत ऐसी है, एक नया मीडिया, विजुअल मीडिया आया है, सोशल मीडिया आया है. मैंने एक-दो बात सच्ची कही, उपसभापति जी, मैं आपसे कह नहीं सकता कि सोशल मीडिया किस तरह से बढ़ा है, उसमें कई तरह की अफवाह चल रही है, लेकिन किस तरह से गाली-गलौज चल रही है, उसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है. मजीठिया कमीशन कब से मीडिया के लिए बना हुआ है. आज ये सारा मीडिया- हम लोकतंत्र में चुनाव सुधार की बात कर रहे हैं कि चुनाव सुधार कैसे हो? इस चुनाव सुधार की सबसे बड़ी बात है- हमारी लोकशाही और लोकतंत्र कहां जा रहा है, इसको वहां पहुंचाने वाले कौन लोग हैं? वह तो मीडिया ही है, जिसको चौथा खंभा कहते हैं, वही है ना? उसकी क्या हालत है? पत्रकार के लिए मजीठिया कमीशन बना हुआ है. याद रखना मीडिया और पत्रकारिता का मतलब है पत्रकार और वह उसकी आत्मा है. यह लोकशाही या लोकतंत्र जो खतरे में हैं, उसका एक कारण यह है कि हमने पत्रकार को ठेके में नहीं डाल दिया, बल्कि हायर एंड फायर एक नई चीज़ यूरोप से आई है यानी सबसे ज्यादा हायर एंड फायर का शिकार यदि कोई है, तो वह पत्रकार है. मैं बड़े-बड़े पत्रकार के साथ रहा हूं, मैं बड़े-बड़े लोगों के साथ रहा हूं. हमने पहले भी मीडिया देखा है, आज का मीडिया भी देखा है. उसकी सबसे बड़ी आत्मा कौन है? सच्ची खबर आए कहां से? राम गोपाल जी, जब पिछला चुनाव विधानसभा का हो रहा था, तो मैंने खुद जाकर चुनाव आयोग को कहा था कि यह पेड न्यूज है. आज जो पत्रकार है, वे बहुत बेचैन और परेशान हैं, पत्रकार के पास ईमान भी है, लेकिन वह लिख नहीं सकता. मालिक के सामने उसे कह दिया जाता है कि इस लाइन पर लिखो, इस तरह से लिखो. उसका अपना परिवार है, वह कहां जाए? वह सच्चाई के लिए कुछ लिखना चाहता है. हमारे लोकतंत्र में बाजार आया, खूब आए लेकिन यह जो मीडिया है, इसको हमने किनके हाथों में सौंप दिया है? यह किन-किन लोगों के पास चला गया है? एक पूंजीपति है इस देश का, उसने 40 से 60 फीसदी मीडिया खरीद लिया है. इस देश का क्या होगा? अब हिंदुस्तान टाइम्स भी बिकने वाला है. कल बिक गया? कैसे चलेगा यह देश? यह चुनाव सुधार, यह बहस, ये सारी चीजें कहां आएंगी? कोई यहां पर बोलने के लिए तैयार नहीं है? निश्चित तौर पर मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जो मीडिया है, लोकशाही में, लोकतंत्र में, यह आपके हाथ में है, इस पार्लियामेंट के हाथ में है. कोई रास्ता निकलेगा या नहीं निकलेगा? ये जो पत्रकार है, ये चौथा खंभा है, उसके मालिक नहीं हैं और हिंदुस्तान में जब से बाजार आया है, तब से तो लोगों की पूंजी इतने बड़े पैमाने पर बढ़ी है. मै आज बोल रहा हूं, तो यह मीडिया मेरे खिलाफ तंज कसेगा, वह बुरा लिखेगा. लेकिन मेरे जैसा आदमी, जब चार-साढ़े चार साल जेल में बंद रहकर आजाद भारत में आया, तो अगर अब मैं रुक जाऊंगा तो मैं समझता हूं कि मैं हिंदुस्तान की जनता के साथ विश्वासघात कर के जाऊंगा. सर, आज सबसे ज्यादा ठेके पर लोग रखे जा रहे हैं और पूरे हिंदुस्तान में लोगों के लिए कोई नौकरी या रोजगार नहीं पैदा हो रहा है. सब जगह पूंजीपति और सारे प्राइवेट सेक्टर के लोग हैं. अखबार में सबसे ज्यादा लोगों को ठेके पर रखा जाता है. इस तरह मजीठिया कमीशन कौन लागू करेगा? इनके कर्मचारियों को कोई यूनियन नहीं बनाने देता है. आप किसी पत्रकार से सच्ची बात कहो, तो वह दहशत में आ जाएगा क्योेंकि उसका मालिक दूसरे दिन उसे निकाल कर बाहर करेगा. तो यह मीडिया कैसे सुधरेगा? अगर वह नहीं सुधरेगा तो चुनाव सुधार की यह बहस यहीं मर जाएगी. ये भी उसे छांट-छांटकर देंगे. उसका मालिक बोलेगा कि किस का देना है, किस का नहीं देना है. हम रोज यहां बोलते हैं और ये रोज बोलता है कि हमारे जैसे आदमी को मत छापो क्योंकि यह सच बोल रहा है और सच ही इस बैलेट पेपर का ईमान है. इस ईमान को चारों तरफ से पूंजी ने घेर लिया है. बड़े पैसे वालों ने घेर लिया है और अब सब से बड़ी मुश्किल यह है कि बहस करें तो कैसे करें? सर यह देश बहुत बड़ा है, एक कांटिनेंट है, लेकिन हमारी बहस और हमारी बात कहीं जाने को तैयार नहीं है, कहीं पहुंचने को तैयार नहीं है. ये अखबार के पूंजीपति मालिक कई धंधे कर रहे हैं. इन्होंने बड़ी-बड़ी जमीनें ले ली हैं और कई तरह के धंधे कर रहे हैं. वे यहां भी घुस आते हैं. इनको सब लोग टिकट दे देते हैं. मैं आपसे कह रहा हूं इस तरह यह लोकतंत्र कभी नहीं बचेगा. सर, इसके लिए एक कानून बनना चाहिए कि अगर कोई मीडिया हाउस चलाता है या अखबार चलाता है , तो वह कोई दूसरा धंधा नहीं कर सकता है. सर, इस देश में क्रास होल्डिंग बंद होनी चाहिए. यह कानून पास करो, फिर देखेंगे कि कैसे हिंदुस्तान नहीं सुधरता? हमारे जैसे कई लोग हिंदुस्तान में हैं जिन्होंने सच को बहुत बगावत के साथ बोला है. पहले भी हिंदुस्तान को बनाने में ऐसे लोगों ने काम किया है. मैं नहीं मानता कि आज ऐसे लोग नहीं है. ऐसे बहुत लोग हैं जो सच को जमीन पर उतारना चाहते हैं लेकिन कैसे उतारें? यानी इस चौथे खंबे पर आपातकाल लग गया है. हिंदुस्तान में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है. यह जो पत्रकार ऊपर बैठा हुआ है, वह कुछ नहीं लिख सकता है क्योंकि उसके हाथ में कुछ नहीं है. यही जब सूबे में जाता है तो मीडिया वहां की सरकार की मुट्ठी में चला जाता है. जो पत्रकार सच लिखते हैं उसे निकालकर बाहर कर दिया जाता है. फिर यह देश कैसे बनेगा? आप कैसे सुधार कर लोगे? मैं आप से ही नहीं सब से पूछना चाहता हूं कि सुधार कैसे होगा? सर, इस देश में मीडिया के बारे में बहस क्यों नहीं होती? इस देश में ऐसा कानून क्यों नहीं बनता कि कोई भी व्यापार या किसी तरह की क्रास होल्डिंग नहीं कर सकता? तब हिंदुस्तान बनेगा. सर, हिंदुस्तान जिस दिन आजाद हुआ था, तो इसी तरह था. गणेश शंकर विद्यार्थी थे, जिन्होंने हिंदुस्तान के लिए जान दे दी थी. मैं इस पार्लियामेंट में रविशंकर प्रसाद जी आप से निवेदन करना चाहता हूं कि आज आप वहां हैं, हम यहां हैं, कल चले जाएंगे, लेकिन आने वाले हिंदुस्तान के गरीब, मजदूर, किसान से लोकतंत्र दूर हट गया है. आप कितने ही तरीके से स्टैंड-अप करिए, आप कितनी भी तरह की योजनाएं, लेकिन वह दूर हटता जाएगा. हम सभी ने बहुत ताकत लगाई है, लेकिन वह गरीब तक नहीं पहुंच पाता है. सर, जब इनके यहां चुनाव हो रहा था, तो मैं तीन अखबारों के पास गया था. उन अखबार में मेरा कहा नहीं छप रहा था. मै महीने भर से कंप्लेंट कर रहा था, लेकिन उनमें मेरे बारे में एक लाइन नहीं आई. वे आज भी नहीं छापेंगे क्योंकि वहां मालिक बैठा हुआ है. वे सारे पत्रकार मेरी बात को हृदय से जब्त करेंगे, लेकिन उसका मालिक उसकी तबाही करेगा.  

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Dakhal News 25 March 2017


डॉ. अनिल सिरवैया

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान को आज पत्रकारों ,लेखकों द्वारा मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास पर आधारित पुस्तकें भेंट की गयी। श्री चौहान ने सराहना करते हुए लेखकों को शुभकामनाएँ दी। मध्यप्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति और विकास कार्य एवं इनसे आम जन-मानस के जीवन में आये बदलाव पर आधारित इन पुस्तकों में पत्रकार  सरमन नगेले द्वारा लिखित पुस्तक 'डिजिटल मध्यप्रदेश', डॉ. अनिल सिरवैया द्वारा 'समुदाय और सरकार' पुस्तक एवं 'नॉलेज केलेण्डर' भेंट किया गया। मुख्यमंत्री को सुश्री रूबी सरकार ने 'नारी शक्ति का उदय', सुश्री पूजा सिंह ने 'मिसाल बनी महिलाएँ' एवं  राकेश मालवीय ने 'खेत-खलिहान की पुरवैया' पुस्तक भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान को श्री नगेले ने बताया कि डिजिटल मध्यप्रदेश का विमोचन विगत दिवस जापान में किया गया। पुस्तक में मध्यप्रदेश में सूचना तकनीक के विस्तार और इसके प्रयोग से आम-जनता के जीवन में आये बदलाव शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन पुस्तकों का सेट प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया। इस मौके पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस.के. मिश्रा मौजूद थे।  

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Dakhal News 24 March 2017


डॉ. अनिल सिरवैया

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान को आज पत्रकारों ,लेखकों द्वारा मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास पर आधारित पुस्तकें भेंट की गयी। श्री चौहान ने सराहना करते हुए लेखकों को शुभकामनाएँ दी। मध्यप्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति और विकास कार्य एवं इनसे आम जन-मानस के जीवन में आये बदलाव पर आधारित इन पुस्तकों में पत्रकार  सरमन नगेले द्वारा लिखित पुस्तक 'डिजिटल मध्यप्रदेश', डॉ. अनिल सिरवैया द्वारा 'समुदाय और सरकार' पुस्तक एवं 'नॉलेज केलेण्डर' भेंट किया गया। मुख्यमंत्री को सुश्री रूबी सरकार ने 'नारी शक्ति का उदय', सुश्री पूजा सिंह ने 'मिसाल बनी महिलाएँ' एवं  राकेश मालवीय ने 'खेत-खलिहान की पुरवैया' पुस्तक भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान को श्री नगेले ने बताया कि डिजिटल मध्यप्रदेश का विमोचन विगत दिवस जापान में किया गया। पुस्तक में मध्यप्रदेश में सूचना तकनीक के विस्तार और इसके प्रयोग से आम-जनता के जीवन में आये बदलाव शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन पुस्तकों का सेट प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया। इस मौके पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस.के. मिश्रा मौजूद थे।  

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Dakhal News 24 March 2017


डाउन टू अर्थ पत्रिका

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नर्मदा सेवा यात्रा नदी को स्वच्छ बनाने का उदाहरण प्रस्तुत करने का प्रयास है। श्री चौहान आज 'डाउन टू अर्थ' पत्रिका के हिन्दी संस्करण के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि दुनिया को बचाने के लिये प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ को बंद करना होगा। नर्मदा सेवा यात्रा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर दुनिया को बचाने का विनम्र प्रयास है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दृष्टिकोण से नदियों के संरक्षण के प्रति सक्रिय व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को एकत्रित करने का मंच देने की कोशिश नर्मदा सेवा यात्रा है। प्रयास है कि पर्यावरणविद् वैज्ञानिक, समाज, धर्म, राजनीतिक कार्यकर्ता, साहित्कार, कलाकार, आस्था, विश्वास, श्रद्धा आदि हर दृष्टिकोण के लोग नदी संरक्षण के लिये यात्रा के माध्यम से आगे आये। श्री चौहान ने नर्मदा नदी संरक्षण के लिये फलदार पेड़ लगवाने, विसर्जन कुंड, मुक्तिधाम, ट्रीटमेंट प्लांट, शौचालय बनवाने के कायों की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा से सामाजिक सोच में परिवर्तन आया है। पूजन पद्धति में बदलाव की प्रभावी कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 2 जुलाई को नर्मदा के उद्गम से प्रदेश की सीमा तक नर्मदा के दोनों तट पर एक दिन में फलदार पौधों का रोपण करवाया जायेगा। इस दिन पचास लाख से अधिक व्यक्ति नर्मदा तट पर एकत्रित होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ ही सामाजिक मुद्दों, बेटी बचाओ, साक्षरता और नशामुक्ति के लिये भी जन चेतना निर्माण के प्रयास किये गये हैं। प्रदेश में 1 अप्रैल से नर्मदा तट के दोनों ओर शराब की दुकानें बंद हो जायेगी। क्षिप्रा, ताप्ती और बेतवा नदी के संरक्षण का कार्य भी करवाया जायेगा। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र की निदेशक सुश्री सुनीता नारायण ने कहा कि समाज को नदी से जल की जितनी आवश्यकता है, उतनी ही नदी को भी है। प्रदेश में नर्मदा नदी संरक्षण की समय रहते पहल शुरू हुई है। नर्मदा की इस चिंता से वह निरंतर बहती रहेगी, अविरल रहेगी। उन्होंने कहा कि सामान्यत:पर्यावरण बचाने की कोशिशें तब शुरू की जाती हैं, जब तबाही हो चुकी होती है। नर्मदा नदी के साथ ऐसा नहीं हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने 'डाउन टू अर्थ' पत्रिका के हिन्दी संस्करण और प्रकाशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।  इस अवसर पर विधायक और प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के.मिश्रा भी मौजूद थे।  

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Dakhal News 24 March 2017


योगी को लेकर मीडिया

उमेश त्रिवेदी टीआरपी के लिहाज से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मीडिया के लिए इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बने हुए हैं कि उनके बारे में लिखा सबसे ज्यादा पढ़ा जा रहा है। उनके 'विजुअल्स' ज्यादा बिकाऊ सिध्द हो रहे हैं। सोशल मीडिया के घाट उनके समर्थकों के हिलोरों से लहलहा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के बारे में राजनीतिक कौतुक और कौतूहल जल्दी ठंडा होना वाला नही हैं। मीडिया उनके पीछे दौड़ लगाता रहेगा।  सोशल मीडिया पर योगी को लेकर आमजनों की सक्रियता बयां करती है कि लोगों की यह उत्सुकता और उन्माद कितना संवेदनशील है? मुख्यमंत्री के हर शॉट की समीक्षा के लिए उनके राजनीतिक वजूद की हितरक्षक रहीं धार्मिक और सांस्कृतिक कसौटियां मौजूद हैं। भाजपा और उनके समर्थक इस बात को समझ रहे हैं कि आदित्यनाथ अपने ही वैचारिक नाग-पाश में बुरी तरह बंधे हैं। जकड़न इतनी गहरी है कि राजनीतिक पिच पर योगी के लिए 'बैक-फुट' पर खेलना भी कठिन होगा और 'फारवर्ड-हिट' करना भी मुश्किल होगा। अभी तक योगी विपक्ष की राजनीति कर रहे थे, जहां प्रतिक्रियाओं के बाउन्सर को 'हैंडल' करके चौके-छक्के जड़ना आसान था। अब वो मुख्यमंत्री हैं और उन्हें सरकारी-प्रक्रियाओं की सधी हुई 'गुड-लेंग्थ' गेंदों पर रन बटोरना हैं। इसीलिए सोशल मीडिया पर उनके समर्थक इस धारणा को घनीभूत कर रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। मुद्दा यह है कि मीडिया की इस स्क्रीनिंग के पैमाने क्या और कैसे हों? लेकिन  लोगों के कौतूहल के मद्देनजर लगता नहीं है कि योगी आदित्यनाथ मीडिया के फ्लश-लाइट से बच पाएंगे?       मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'एक्शन-मोड' को लोगों ने शूट करना प्रारंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री के रूप में तीन सूर्योदय देखने वाले महंत आदित्यनाथ के संबंध में मीडिया की हेडलाइन्स भी अजब-गजब चमत्कार पैदा कर रही हैं। एक जानी-मानी वेबसाइट तीन दिनों में ही इस निष्कर्ष पर पहुंच गई है कि योगी के सत्ता संभालते ही ताजनगरी में क्राइम का ग्राफ बढ़ गया है। योगी-राज में किसान की हत्या से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। कार्य-भार संभालने के बाद जहां मीडिया योगी के पहले दिल्ली–प्रवास की राजनीतिक-वजनदारी को टटोलता रहा है, वहीं लखनऊ में उसने यह हिसाब भी लगा लिया कि गृह-प्रवेश के पहले शुध्दि के उपक्रम में गाय के कितने दूध से किस प्रकार मुख्यमंत्री निवास की धुलाई हुई? पांच पंडित की पूजा-अर्चना कितनी देर चली और आवास के गेट को किस प्रकार काले से सफेद किया गया?  मीडिया ने यह हिसाब भी लगा लिया है कि तीन दिनों में योगी-सरकार पांच महत्वपूर्ण फैसले ले चुकी है। योगी-सरकार ने सभी जिलों मे एंटी-रोमियो दल गठित कर दिए हैं। गाजियाबाद में 15 अवैध बूचड़खानों को सील कर दिया गया है। नव-रात्रि और राम-नवमी के मद्देनजर सभी शक्तिपीठों और अयोध्या की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। राम म्यूजियम परियोजना को आगे बढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया है।           योगी आदित्यनाथ अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत से ही चर्चित चेहरा रहे हैं। लव-जेहाद से लेकर घर-वापसी जैसे मुद्दों  पर उन्होंने जमकर राजनीति की है। आदित्यनाथ के बारे में लोग बहुत कुछ जानना चाहते हैं। उनके पुराने भाषणों को खंगाला जा रहा है। विवादास्पद वीडियो वायरल हो रहे हैं। तीखे बयानों के लिए योगी आदित्यनाथ को जेल की सीखचों के पीछे भेजने वाले अनुपम खेर जैसे बड़बोले एक्टर बगलें झांक रहे हैं।  मुख्यमंत्री बनने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने वाले व्यक्तियों में योगी आदित्यनाथ अव्वल थे। शपथ ग्रहण के पहले चौबीस घंटों में उनके सोशल मीडिया पेज को लाइक करने वालों की संख्या में 50 हजार से ज्यादा इजाफा हुआ था। यह सिलसिला अभी भी थमा नहीं है। महंत आदित्यनाथ के रूप में उनके फेसबुक पर अधिकृत पेज को 3,74,779 लोग लाइक करते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह संख्या 4,08,940 को पार कर निरन्तर बढ़ रही है। माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्वीटर पर योगी के फॉलोअर 1 लाख 58 हजार से बढ़कर 2 लाख 10 हजार से ज्यादा हो चुके हैं। [ लेखक उमेश त्रिवेदी सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 23 March 2017


पेड पर न्यूज पर निगरानी

 मध्यप्रदेश के अटेर एवं बाँधवगढ़ विधानसभा उप चुनाव के दौरान संदेहास्पद पेड न्यूज पर निगरानी के लिए राज्य स्तरीय एमसीएमसी (मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनीटरिंग कमेटी) की आज बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती सलीना सिंह ने की। श्रीमती सलीना सिंह ने समिति के सदस्यों को बताया कि राज्य स्तरीय कमेटी पेड न्यूज एवं मीडिया सर्टिफिकेशन पर जिला स्तरीय कमेटी के निर्णय के विरुद्ध की गई अपील पर भी सुनवाई करेगी। कमेटी जिला एवं राज्य स्तरीय विज्ञापन प्रमाणन समिति के निर्णय के विरुद्ध अपील पर सुनवाई निर्णय करेगी। जिला एमसीएमसी द्वारा संदेहास्पद पेड न्यूज पर पारित निर्णयों के विरुद्ध सुनवाई कर और निर्णय लिया जायेगा। साथ ही पेड न्यूज के प्रकरणों को स्व-विवेक से संज्ञान में लेकर रिटर्निंग ऑफिसर को कार्यवाही के लिए भेजा जायेगा। श्रीमती सलीना सिंह ने सदस्यों से अपेक्षा की कि वे अटेर व बाँधवगढ़ उप चुनाव को देखते हुए समाचार-पत्रों, दूरदर्शन इत्यादि के विज्ञापन समाचार का अवलोकन और विश्लेषण करें। आयोग के निर्देशों का उल्लंघन होने पर उसे कमेटी के संज्ञान में लाया जाये। बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री एस.एस. बसंल, समिति के सदस्य यूनीवार्ता के ब्यूरो प्रमुख श्री प्रशांत जैन, पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख श्री मनीष श्रीवास्तव, दूरदर्शन केन्द्र के श्री शशिन राय और आकाशवाणी के श्री शारिक नूर उपस्थित थे।  

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Dakhal News 22 March 2017


शारद जोशी

  मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ बाजना  रावटी जनपद[रतलाम] क्षेत्र के तथा सैलाना ब्लाक के शिवगढ़ के सदस्यों का कार्ड वितरण कार्यक्रम यंहा जैन स्कूल में संपन्न हुआ।             .         मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष शरद जोशी ने इस अवसर पर पत्रकारों से श्रमजीवी पत्रकार आंदोलन को मजबूत बनाने की आवश्यक्ता पर जोर देते हूए कंहा कि आज कई त्योहारी पत्रकार संगठन बन गये है उसमें असल पत्रकार (कलमकार) कम फर्जी पत्रकार अधिक होते है जिनका पत्रकारिता मिशन से कोई वास्ता नही होता।एसे पत्रकार संगठनों के कारण पत्रकारों की साख प्रभावित हो रही है और सम्मान में कमी आ रही है।सरकार को चाहिये कि वह एसे पत्रकार संगठनों पर लगाम लगायें  जो पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहूंचा रहे है।पत्रकारों को भी चाहिये कि वह एसे पत्रकार संगठनों से सावधान रहें जो कलमकार न होकर केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करने केलिये पत्रकार का नकली चोला पहने हुए है।।         .                    श्री जोशी ने श्रमजीवी पत्रकार संघ की गतिविधियों तथा पत्रकारों के हितो के लिये किये गये प्रयासों की जानकारी दी तथा कहा कि आने वाले समय में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने ,पत्रकार आयोग बनाने ,टोल नाको को समाप्त करने सहित पत्रकारों की शेष रही मांगों के संबंध में शासन का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। साथ ही जिले की विभिन्न समस्याओं का एक ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया जाएगा सभी ब्लाक ईकाइयां इसकी तैयारी करें।जुलाई अगस्त में जिले का वृहद सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।                                      संभागीय उपाध्यक्ष विनोद मांडोत,जिला महा सचिव दिनेश दवे,वरिष्ठ साथी हिम्मत मेहता,रावटी,दिलीप देवड़ा बाजना,भेरूलाल टांक, मनोज भंडारी सैलाना,ने भी संबोधित कर संगठन को मजबुत बनाने तथा क्षैत्रिय समस्याओं के लियेे संघर्ष करने का आव्हान किया।सभी ने जिले में ब्लाक ईकाइयों के गठन पर प्रसन्नता व्यक्त की।।               इस अवसर पर विमल मांडोत,सैलाना संजय शर्मा करिया,संजय टांक,पवन पितलिया,केलाश टांक जे.पी.कटारिया,शुभम पालरेचा,जगदीश टांक, कृष्णचंद पंवार, बाजना, आशिष टांक,मोहन टांक,डी.बाघेला शिवगढ़ तथा रावटी केपुरषोतम पांचाल,प्रकाश जैन,अवधेश प्रताप सिह,दीपक राठोड़,यशवन्त सिंहचौहान,नंद किशोर टांक सोयलकटारिया,अशोक टांक सहित सदस्यगण उपस्थित थे।आभार सुशील कटारिया ने व्यक्त किया।  

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Dakhal News 21 March 2017


 जीमेल

गूगल की ईमेल सर्विस, जीमेल हर हफ्ते कोई न कोई नया फीचर रिलीज करती है। इस बार भी जीमेल एक और नया फीचर लेकर आया है, जिसमें आप वीडियो को लाइव स्‍ट्रीमिंग तकनीक से देख सकेंगे। अब जीमेल में 50 मेगाबाइट तक के वीडियो अचैटमेंट फाइल के लिए सपोर्ट मिलना शुरूहो गया था। जीमेल वेब पर वीडियो सीधे स्ट्रीम हो जाएंगे और आपको उन्‍हें देखने के लिए पहले डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी। अभी जीमेल में किसी वीडियो अटैचमेंट को देखने के लिए पहले डाउनलोड करना होता है। डाउनलोड करने पर काफी समय तथा डेटा खर्च हो जाता है। इसके बाद आपको किसी वीडियो प्‍लेयर की मदद से वीडियो का देखना होता है। लेकिन ऑनलाइन स्‍ट्रीमिंग में इन सब झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी। इसमें आपको ईमेल में वीडियो अटैचमेंट के साथ क्लिप का एक थंबनेल दिखाई देगा। डबल टैप करने पर यह वीडियो प्लेयर में स्ट्रीम होने लगेगा। यूजर प्लेबैक स्पीड को अपनी सुविधानुसार एडजस्ट भी कर सकते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में जीमेल एंड्रॉयड ऐप पर सेंड एंड रिसीव मनी फीचर को भी शुरू किया गया है। हालांकि यह फीचर भारत में काम नहीं करेगा। इससे यूजर जीमेल ऐप से किसी यूजर को पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। पैसे भेजने के लिए आप अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए गूगल वॉलेट को रीचार्ज कर सकते हैं और फिर दुनियाभर में किसी भी जीमेल एंड्रॉयड और वेब यूजर को अटैचमेंट के रूप में पैसे भेज सकते हैं।    

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Dakhal News 18 March 2017


इंडिया टुडे कान्क्लेव

मुंबई में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वे तथा किसी अन्य राज्य के मुख्यमंत्री केंद्र में मंत्री नहीं बनने जा रहे हैं। इस तरह की अफवाहें लोग जबरन चला रहे हैं। हम राज्य में ही रहेंगे और केंद्र में नहीं जाएंगे। मेरे अलावा महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फड़नवीस, छत्तीसगढ़ के रमन सिंह और राजस्थान की वसुंधरा राजे सिंधिया राज्य में ही काम करेंगे। सीएम चौहान ने आज मुंबई में इंडिया टुडे कान्क्लेव में ये बातें कहीं। इस कान्क्लेव में तीन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए जिसमें मध्यप्रदेश के सीएम चौहान के अलावा महाराष्ट्र के देवेन्द्र फड़नवीस और जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती भी मौजूद रहीं। उन्होंने केंद्र में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर एमपी, महाराष्ट्र के सीएम को दिल्ली में मंत्रालय देने संबंधी सवाल के जवाब में कहा कि हर राज्य में अफवाह चल रही है। केंद्र में कौन सा मंत्रालय संभालेंगे, इस सवाल के जवाब को देने से इनकार करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह राजनीतिक सवाल है। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण व नदी संरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि नर्मदा नदी के संरक्षण का काम एमपी में चल रहा है। सीएम चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमंडल तथा राज्यों के मुख्यमंत्री टीम इंडिया की तरह काम कर रहे हैं। नीति आयोग को लेकर किए गए सवाल के जवाब में सीएम चौहान ने कहा कि इस आयोग के बनने के बाद विकास की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। नीति आयोग किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। इस दौरान जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र के सीएम ने इन्हीं मसलों पर अपनी राय व्यक्त की। पब्लिक के बीच रहने वाला मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वे पब्लिक में रहने वाले मुख्यमंत्री हैं। इसलिए पब्लिक की समस्याओं को समझता हूं और उसका निदान भी करता हूं। नोटबंदी से मध्यप्रदेश में किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई। किसी को गुस्सा नहीं आया। कुछ नेताओं ने नोटबंदी के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश की तो भीड़ ने पीएम मोदी जिंदाबाद के नारे लगाकर उन्हें चुप करा दिया।  मुख्यमंत्री चौहान ने नोटबंदी के मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस की नादानी थी कि नोटबंदी को लेकर बैठ गई और खुद विरोध झेला। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने पब्लिक की नस नहीं पकड़ी तो खत्म हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने पहले ही कहा था कि लोगों को थोड़ा परेशानी होगी और थोड़ी परेशानी लोगों ने झेली लेकिन मध्यप्रदेश में किसी ने उनसे शिकायत नहीं की।  

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Dakhal News 17 March 2017


इण्डिया टीवी पीछे खिसका ,एबीपी चौथे नम्बर पर

  मध्यप्रदेश में बिना कुछ किये भी ज़ी न्यूज़ एमपी /सीजी की बादशाहत कायम है। दसवें सप्ताह की टीआरपी में ज़ी न्यूज़ 51.5 के साथ टॉप पर बना हुआ है। वहीँ नेशनल चैनल में आज तक को पछाड़ने के चक्कर में इण्डिया टीवी पीछे खिसक गया है। एबीपी अब चार नंबर का चैनल हो गया है। एबीपी की सारी कोशिशें फ्लॉप साबित हो रही हैं। यूपी इलेक्शन के बाद अब नंबर गेम में टॉप पोजिशन पर बने रहने के लिए सभी नेशनल चैनल्स को नए सिरे से कवायत करना पड़ रही हैं।  --------------------------------------------------------- Mp/cg के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल ज़ी न्यूज........  51.5 आईबीसी 24 .......23.6  ईटीवी........... 18.9 बंसल......          2.6 सहारा....            2.2 -------------------------------------------------------- नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 10 Aaj Tak 16.9 up 0.8  India TV 13.9 dn 0.2  Zee News 13.2 up 0.7  ABP News 12.4 same   India News 9.9 dn 0.5  News18 India 9.0 up 0.2  News Nation 8.8 dn 0.2  News 24 8.6 dn 0.5  Tez 2.8 dn 0.8  NDTV India 2.3 up 0.1  DD News 2.1 up 0.4    TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.9 up 1.6  Zee News 14.2 up 0.7  India TV 14.0 dn 0.2  ABP News 12.3 up 0.4  News18 India 9.7 same   News Nation 8.9 dn 0.5  India News 8.3 dn 0.5  News 24 7.7 dn 0.6  NDTV India 3.0 same   Tez 2.8 dn 1.0  DD News 2.1 up 0.1

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Dakhal News 16 March 2017


अभिव्यक्ति नगर

  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रहने के लिये स्थान और प्रतिभा का सम्मान प्रदेश की धरती पर हर व्यक्ति का अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आवास के लिये भूमि के अधिकार का कानून बनाने जा रही है। प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के प्रोत्साहन के लिये मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना बनाई गयी है। योजना के तहत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों की फीस राज्य सरकार भरेगी। श्री चौहान भोपाल में पत्रकारों के अभिव्यक्ति नगर लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह, प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के.मिश्रा, आयुक्त जनसंपर्क श्री अनुपम राजन भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज का जीवन संघर्ष भरा है। हर व्यक्ति की यह कामना होती है कि वह अपनी संतान के लिये एक मकान बनाकर जाये। उन्होंने कहा कि समाज में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे अपनी कर्तव्य परायणता से स्थितियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यह आवासीय कॉलोनी उनके प्रति समाज के कर्तव्य की पूर्ति का प्रतीक है। कॉलोनी का लेआउट भारतीय संस्कृति का सुव्यवस्थित स्वरूप है। आशा व्यक्त कि आवासों का निर्माण भी ऐसा ही होगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थियों, जिनका चयन विधि, चिकित्सा, इंजीनियरिंग आदि पाठ्यक्रमों के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में होगा, उनकी फीस राज्य सरकार भरेगी। इससे कम अंक वाले विद्यार्थियों की भी फीस राज्य सरकार भरवायेगी। किन्तु नौकरी मिलने पर उन्हें फीस की राशि बिना ब्याज के लौटाना होगी। कार्यक्रम के दौरान कालोनी की सदस्यों की ओर से मुख्यमंत्री को अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। वरिष्ठ पत्रकार  दिनेश गुप्ता ने कॉलोनी विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।  

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Dakhal News 15 March 2017


 विजय मत  बोनस

मीडिया संस्थानों में आमतौर पर कर्मचारियों को  दीवाली पर  बोनस देने की परम्परा है। मगर  भोपाल से प्रकाशित अखबार विजय मत ने अपने कर्मचारियों को होली के त्यौहार में वेतन के साथ बोनस देकर पत्रकारिता में एक नई परिपाटी शुरू की है। बीते रविवार को कर्मचारियों को वेतन के साथ जब बोनस का लिफाफा मिला तो उनके चेहरे खिल उठे। विजय मत पत्रकार विजय शुक्ला का अखबार है और पिछले दिनों उन्होंने इसकी विधिवत शुरुवात की।   

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Dakhal News 14 March 2017


trp week 9

नंबर गेम में लुढ़कने के बाद भी आजतक नौवे सप्ताह में नंबर वन बना हुआ है। वहीँ मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में ज़ी न्यूज़ mp/cg अब भी सब पर भारी है। बाकि चेनलों की trp उससे आधी रही।    Mp/cg के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल trp week 9 ज़ी न्यूज.   ..... 49.3 आईबीसी.....    20.5 ईटीवी.........     20.4 सहारा.........       4.4 बंसल....              3.2   नेशनल न्यूज चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 9 Aaj Tak 16.1 dn 0.9  India TV 14.1 up 0.2  Zee News 12.5 up 0.1  ABP News 12.4 dn 0.1  India News 10.4 up 0.6  News 24 9.1 up 0.2  News Nation 9.1 dn 0.6  News18 India 8.8 up 0.5  Tez 3.6 up 0.5  NDTV India 2.2 dn 0.1  DD News 1.7 dn 0.4   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 15.3 dn 0.9  India TV 14.2 dn 0.1  Zee News 13.6 dn 0.2  ABP News 11.9 dn 0.6  News18 India 9.7 up 0.9  News Nation 9.5 dn 0.4  India News 8.8 up 0.7  News 24 8.3 up 0.5  Tez 3.8 up 0.6  NDTV India 2.9 dn 0.2  DD News 2 dn 0.2  

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Dakhal News 10 March 2017


ETV की पहल विधवा महिला कही जाएंगी कल्याणी

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में विधवा महिलाओं को पेंशन स्वीकृति में अब बीपीएल होने की शर्त नहीं रहेगी। उनको कल्याणी के नाम से संबोधित किया जाएगा। राज्य की कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता देने के साथ ही उनकी ऊर्जा और शक्ति का प्रदेश के कल्याण और दूसरों की बेहतरी में भी उपयोग किया जाएगा। श्री चौहान  भोपाल में  ETV  के नारायणी नम: कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जीवन की विपरीत परिस्थितियों के साथ संघर्ष कर मुकाम बनाने वाली हर उम्र की 10 महिलाओं और तीन महिला अधिकारियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महिलाओं ने हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर यह दिखा दिया है कि अब महिलाएँ अबला नहीं सबला है। उनमें बुद्धिमत्ता, संकल्प और प्रतिबद्धता की कोई कमी नहीं है। अवसर मिले तो वे दूसरों का भी जीवन रोशन कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया है। बेटियाँ परिवार पर बोझ नहीं रहे। उनका सशक्तीकरण करने के लिये अनेक योजनाएँ बनाई गई हैं। श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार दुराचारियों को मृत्युदंड देने संबंधी कानून का प्रारूप बनाकर राष्ट्रपति को भेजेगी। मुख्यमंत्री द्वारा धार जिले की गुलाबो बाई, मंडला की तबस्सुम, देवास की मानकुंवर, भोपाल की फातिमा और पूनम श्रोती, बड़वानी की दया, कटनी की डॉ. स्नेह चौधरी, झाबुआ की तिजोबाई, इन्दौर की दिशा तिवारी और जबलपुर की शैली दुबे, आई.ए.एस. श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, पुलिस अधिकारी इरमिन शाह और श्रद्धा तिवारी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या विवाह, लाड़ली लक्ष्मी और तेजस्विनी योजनाओं के प्रथम हितग्राहियों और बालिकाओं के समूह ने मुख्यमंत्री से भेंट की। बालिकाओं ने महिला के साथ दुराचार करने वाले विकृत मानसिकता के अपराधियों को मृत्युदंड देने का ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, स्वास्थ्य मंत्री श्री रूस्तम सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह, राज्य मंत्री सामान्य प्रशासन श्री लाल सिंह आर्य, राज्य मंत्री पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्रीमती ललिता यादव और राज्य मंत्री सहकारिता श्री विश्वास सारंग उपस्थित थे।  

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Dakhal News 9 March 2017


माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

  माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में दो नये विभाग भाषा विज्ञान अध्ययन विभाग और सांस्कृतिक अध्ययन विभाग स्थापित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान की अध्यक्षता में सम्पन्न विश्वविद्यालय की प्रबंध समिति की बैठक में इस संबंध में स्वीकृति दी गयी। बैठक में विश्वविद्यालय के रीवा और खण्डवा परिसर के निर्माण की स्वीकृति दी गई। इन दोनों परिसर के निर्माण पर करीब 120 करोड़ रूपये का व्यय होगा। बताया गया कि दोनों नये विभाग में विभिन्न विषय पर शोध के लिये तीन-तीन छात्रवृत्ति दी जायेंगी। बैठक में वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, कुलपति श्री बी.के. कुठियाला, प्रबंध समिति के सदस्य श्री उमेश उपाध्याय, प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के. मिश्रा और कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा उपस्थित थे।

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Dakhal News 8 March 2017


सबधाणी कोचिंग इंस्टिटयूट

  सम्मान समारोह 2017 में भोपाल के सबधाणी कोचिंग इंस्टिटयूट ने समस्त समाज सेवियो एवं पत्रकार जगत की हस्तियों का सम्मान किया।  भोपाल के सासंद अलोक संजर बी जे पी के  जिला उपाध्यक्ष कुलदीप खरे ,भोपाल  सबधाणी कोचिंग के संचालक  आनन्द सबधाणी  और महिला खिलाडी सुश्री बबीता फोगाट ने भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार वा समाजसेवी  राधेश्याम अग्रवाल , विनोद सूर्यवंशी एवं अन्य पत्रकारों का सम्मान किया।     

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Dakhal News 8 March 2017


पत्रकार अर्जुन रिछारिया

अर्जुन रिछारिया को भुवन भूषण देवलिया सम्मान सोशल मीडिया का सोशल ऑडिट जरूरी सहकारिता, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  विश्वास सारंग ने कहा है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग हो, यह एक बड़ी चुनौती है। यह मीडिया जिम्मेदार बने और इसका उपयोग जन-हित में हो, इसके लिये सोशल ऑडिट की व्यवस्था सबकी सहमति से की जाना जरूरी है। श्री सारंग आज भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान में 'सोशल मीडिया-अवसर और चुनौतियाँ'' विषय पर बोल रहे थे।राज्य मंत्री श्री सारंग ने इस मौके पर युवा पत्रकार  अर्जुन रिछारिया को भुवन भूषण देवलिया सम्मान से अलंकृत किया। राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि सोशल मीडिया की शुरूआत एक सकारात्मक उद्देश्य के साथ आपस में बेहतर संवाद के लिये हुई। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारा अधिकार जरूर है, लेकिन इसके साथ हमारी जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया में नकारात्मकता का भी प्रवेश हो गया है। इस स्वस्थ माध्यम के जरिये नीचा दिखाने के भी प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस माध्यम का उपयोग करने में अनुशासन और संयम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिये जरूरी है कि हम व्यक्ति का निर्माण करें, जो पिछले 70 साल में नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का निर्माण यदि होगा, तो हम न केवल सोशल मीडिया, बल्कि हर क्षेत्र में स्वस्थ मानसिकता के साथ विचार प्रक्रिया की स्थापना कर सकेंगे। श्री सारंग ने कहा कि आजादी के पूर्व नेता शब्द गौरव और सम्मान का प्रतीक था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाषचन्द्र बोस को नेताजी का खिताब जनता द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में हम लोगों के कारण विकार न आने पायें और संवाद के इस जीवंत माध्यम का दुरुपयोग न हो, इसके लिये समाज को ही आचार संहिता बनाना होगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग हो, नई पीढ़ी प्रशिक्षित हो, इसके लिये पाठ्यक्रम में यह विषय रहे, इस पर सरकार विचार करेगी। मुख्य वक्ता राज्यसभा टी.व्ही. के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश बादल ने कहा कि सोशल मीडिया के अच्छे और बुरे दोनों पक्ष हैं। डायरेक्टर रिसर्च एण्ड स्ट्रेटेजिक प्लानिंग जॉन्स हॉपकिन्स वुनवर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ श्री प्रदीप कृष्णात्रे ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि जिस युग में आज हम रह रहे हैं, उसमें आगे बढ़ने में टेक्नालॉजी का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन के क्षेत्र में उपकरण बड़े से इतने छोटे हो गये हैं कि अब हम उन्हें अपने साथ में लेकर संवाद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का समाज में व्यापक प्रभाव पड़ा है और इसने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में मूलभूत परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि आज यह माध्यम लोगों के जीवन में इस तरह जरूरी हो गये हैं कि अगर इनका उपयोग न करें, तो हम पिछड़ते जायेंगे। जिस तेजी से सोशल मीडिया का विकास हो रहा है, उसके परिणाम क्या होंगे यह अभी भविष्य की गर्त में है। उन्होंने कहा कि फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्स-एप सहित अन्य माध्यमों की लोकप्रियता जिस तेजी से बढ़ी है, वह एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि यह माध्यम बिछड़े हुए लोगों के बीच व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंध स्थापित करने का माध्यम बना है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ता सोशल मीडिया हमारे जीवन को किस तरह प्रभावित करे, इसकी लाइन खुद हमें तय करना होगी। राज्य मंत्री श्री सारंग ने इस मौके पर युवा पत्रकार श्री अर्जुन रिछारिया को भुवन भूषण देवलिया सम्मान से अलंकृत किया। एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। अतिथियों को स्मृति-चिन्ह के साथ तुलसी का पौधा भी भेंट किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्री कमल दीक्षित, सुश्री देवेन्दर कौर उप्पल और बड़ी संख्या में पत्रकार तथा प्रबुद्धजन उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार श्री शिव अनुराग पटेरिया ने आयोजन की रूपरेखा की जानकारी दी।  

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Dakhal News 6 March 2017


गूगल में वैकेंसी

 गूगल ने हाल ही में नोटिफिकेशन जारी कर कई पदों पर आवेदन आमंत्रित किया हैं। पद: मेजरमेंट एंड एट्रीब्यूशन स्पेशलिस्ट        इंडिया और डिस्प्ले परफॉर्मेंस स्पेशलिस्ट मेजरमेंट एंड एट्रीब्यूशन स्पेशलिस्ट पद के लिए न्यूनतम योग्यता बीए/बीएस डिग्री है। स्टैटिसटिकल डाटा अनालिसिस और एक्सपेरिमेंटल डिजाइन कैपसिटी में अनुभव। वेब एनालिटिक्स और एप एनालिटिक्स का अनुभव होना भी आवश्यक है। डिस्प्ले परफॉर्मेंस स्पेशलिस्ट के लिए बीए/बीएस डिग्री या इसके समानान्तर डिग्री। एडवरटाइजिंग सेल्स, मार्केटिंग, कंसल्ट‍िंग या मीडिया में चार साल का अनुभव होना जरूरी है।

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Dakhal News 6 March 2017


एग्जिट पोल पर प्रतिबंध

चुनाव आयोग ने 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के मतदान बाद सर्वेक्षण पर रोक की अवधि बढ़ाकर 9 मार्च कर दी है। आयोग की  अधिसूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में 9 मार्च को शाम साढ़े 5 बजे तक मतदान बाद सर्वेक्षण करने तथा उसके परिणामों को प्रकाशित और प्रसारित पर प्रतिबंध रहेगा।  आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश के अलापुर (सु) सीट से प्रत्याशी चंद्रशेखर और उत्तराखंड के कर्णप्रयाग सीट से प्रत्याशी कुलदीप सिंह कनवासी के निधन के कारण इन सीटों पर मतदान टाल दिया गया था। आयोग ने इन सीटों पर 9 मार्च को मतदान करवाने का फैसला किया है। इसके मद्देनजर मतदान बाद सर्वेक्षण को प्रकाशित-प्रसारित करने की अवधि बढ़ा दी गई है।   

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Dakhal News 5 March 2017


news world india

 न्यूज वर्ल्ड इंडिया ने अब मध्यप्रदेश में सीएसआर जनरल के साथ अपने चैनल का शुभारंभ किया  भोपाल के होटल जहांनुमा में न्यूज़ वर्ल्ड इण्डिया की लॉन्चिंग सेरेमनी में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ,एमपी के  जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ,राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ,सहकारिता मंत्री  विश्वास सारंग ,भोपाल के सांसद आलोक संजर स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक जोशी मं एवं कई व्यवसायियों ने भाग लिया।  न्यूज़ वर्ल्ड इण्डिया के शुभारंभ के  मौके पर पर कंपनी की ओर से सृष्टि जिंदल ,अमित उपाध्याय ,समीर प्रभाकर एवं रजनीश शुक्ला उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश की खबरों को प्रमुखता से सीएसआर जनरल अब न्यूज़ वर्ल्ड पर दिखाया जाएगा ।    

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Dakhal News 4 March 2017


sadhana news

भोपाल में एमपी नगर पुलिस ने एक रीजनल न्यूज चैनल साधना के तत्कालीन डायरेक्टर्स के खिलाफ सात लाख की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।  टीआई आशीष धुर्वे ने बताया कि ओल्ड पलासिया इंदौर निवासी घनश्याम पटेल ने शिकायत की है कि चैनल के डायरेक्टर राकेश गुप्ता, भाग्यश्री तिवारी, मनीकिशोर तिवारी, संदीप कुमार पांडे, उपासना पांडे, विनोद राय, मोनिका जैन ने उन्हें इंदौर और उज्जैन संभाग का ब्यूरो चीफ बनाने के एवज में सात लाख रुपए लिए थे। लेकिन उन्होंने शर्तें पूरी नहीं की।  इस मामले की जांच के बाद एमपी नगर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।   

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Dakhal News 3 March 2017


trp week 8

  आज तक ने अपनी खबरदारी को एक बार फिर शानदार तरीके से प्रस्तुत कर आठवें सप्ताह में अपनी बादशाहत को कायम रखा है। इण्डिया टीवी लाख कोशिश के बाद बीते सप्ताह नंबर दो ही पर रहा। वही मध्यप्रदेश /छत्तीसगढ़ के रीजनल चैनल में ज़ी न्यूज़ ने वापस अपने नंबर बढ़ा लिए हैं और 50 फीसदी से ज्यादा trp उसके पास हैं।    Mp/cg के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल Trp week 8 ज़ी न्यूज...  51.7  ईटीवी.......  23.3 आईबीसी...  15.2 सहारा.....     5  बंसल....       3 --------------------------------------------------- नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 8 Aaj Tak 17.0 up 1.3  India TV 13.9 dn 0.5  ABP News 12.5 up 1.7 Zee News 12.4 up 0.2   India News 9.8 dn 0.8  News Nation 9.6 up 0.8  News 24 8.9 dn 0.4  News18 India 8.3 dn 3.1 Tez 3.1 up 0.3 NDTV India 2.3 up 0.2 DD News 2.2 up 0.3   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.2 up 1.2  India TV 14.3 dn 0.1 Zee News 13.8 up 0.4 ABP News 12.4 up 1.8  News Nation 9.8 up 0.6 News18 India 8.8 dn 3.6n India News 8.2 dn 0.5 News 24 7.8 dn 0.7 Tez 3.3 up 0.2 NDTV India 3.1 up 0.3 DD News 2.2 up 0.4

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Dakhal News 2 March 2017


शाजिया इल्मी

  नई दिल्ली के जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गई पुरानी पत्रकार और अब भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने आरोप लगाया है कि उन्हें कार्यक्रम में ट्रिपल तलाक पर नहीं बोलने दिया गया। शाजिया के अनुसार 16 फरवरी को उन्हें जामिया विश्वविद्यालय में तीन तलाक पर एक लेक्चर देने जाना था लेकिन विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की ओर से कहा गया कि शाजिया के वहां आने से माहौल खराब हो जाएगा। आपको बता दें कि शाजिया पूर्व में जामिया विश्वविद्यालय की छात्रा रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के आयोजक मुझे बुलाना चाहते थे लेकिन दबाव की वजह से मुझे नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि उमर खालिद, शेहला को देश के टुकड़े करने की आजादी है लेकिन शाजिया इल्मी ने कांग्रेस का भ्रष्टाचार उजागर किया और बीजेपी का साथ दिया इसलिए उन्हें बोलने की आजादी नहीं दी गई। शाजिया का आरोप है कि वो भाजपा नेता हैं और इसी कारण उन्हें जामिया में बोलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी के बात करते हैं अब वो मेरी अभिव्यक्ति के छीने जाने पर चुप क्यों हैं। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में एक सेमिनार को लेकर दो छात्र संगठनों के विवाद हुआ था जिसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा ने आरोप लगाया था कि एबीवीपी के विरोध में आवाज़ उठाने पर उसे सोशल मीडिया पर रेप की धमकी मिल रही है।  

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Dakhal News 1 March 2017


विदिशा प्रेस क्लब

मुख्यमंत्री ने विदिशा प्रेस क्लब के जीर्णोद्धार कार्यों का लोकार्पण किया मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने आज विदिशा में प्रेस क्लब में जीर्णोद्धार कार्यों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री  सूर्यप्रकाश मीणा, सांसद श्री लक्ष्मीनारायण यादव, कुरवाई विधायक  वीर सिंह पंवार, विदिशा नगरपालिका अध्यक्ष  मुकेश टण्डन और जिला पंचायत अध्यक्ष  तोरण सिंह दांगी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी विदिशा के पत्रकारों ने प्रेस की गरिमा को बढाया है। फोटोग्राफरों के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता है। उन्होंने कमियों के साथ-साथ रचनात्मक कार्यो को भी अखबारों में स्थान देने की बात कही। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समाज में जो अच्छे कार्य हो रहे है उन्हें भी मीडिया बंधु प्रमुखता से प्रकाशित करें ताकि अन्य के लिए प्रेरणादायी हों। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विदिशा जिले का प्रेस क्लब प्रदेश का पहला प्रेस क्लब होगा जहाँ जिला स्तर पर पत्रकारों के लिए रूकने की व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकारों के लिए पृथक से कॉलोनी की मांग पर कहा कि परीक्षण उपरांत उचित स्थान पर पत्रकारों के लिए आवासीय कॉलोनी की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में पत्रकार एवं उनके परिवारों को स्थान देने पर सहमति व्यक्त की। इससे पहले कार्यक्रम को वरिष्ठ द्वय पत्रकार श्री बृजेन्द्र पांडे, श्री अतुल शाह ने भी सम्बोधित किया।  विदिशा प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री भरत राजपूत ने प्रेस क्लब के जीर्णोद्वार कार्यो में राशि का सहयोग करने वालो के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रेस क्लब में कराए गए कार्यो का ब्यौरा उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री राजपूत ने चार सूत्रीय मांग पत्र भी मुख्यमंत्री जी को सौंपा।  इससे पहले मुख्यमंत्री जी समेत अन्य अतिथियों का का प्रेस क्लब के अध्यक्ष द्वारा शाल, श्रीफल से स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रेस क्लब के सभी सदस्यगणों के अलावा कलेक्टर  अनिल सुचारी, पुलिस अधीक्षक  धर्मेन्द्र चौधरी समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।  

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Dakhal News 26 February 2017


barc survey

BARC survey NEW DELHI: Okay it’s out and the data does reflect that television is thriving in India and growing. According to the latest BARC India figures, the all-India TV universe has increased to 183 million from the earlier collated figure of 154 million with the growth in rural audience showing a quantum jump signifying that upswing is coming from non-urban areas. The data highlights that while the total urban TV universe stood at 84,414 (in ‘000) in 2017, the comparative rural figure is 98,639 (in ‘000), signifying that the rural segment has grown at a faster rate, which opens up whole new marketing options for broadcasters and advertisers. The comparative old figures as per BARC estimates in 2015 were 77544,000 (urban) vs. 75967,000 (rural). These data, part of the latest BARC India’s Broadcast India Survey 2017, shows that while the urban-rural audience mix was almost equal earlier, the rural segment has outpaced the urban as per latest figures in rate of growth. The new TV universe figures will be implemented from Week 8, 2017 by BARC India, though the latest audience data released by the measurement organisation pertaining to Week 6 adheres to the old figures of the total TV universe in India being 154 million. The data reiterates BARC’s recent reiterations that that since it started surveying rural audience, a whole new world has opened up for subscribers of the data, which, incidentally, also include government organisations apart from the traditional TV channels and advertising agencies. What are the few highlights of the latest BARCC India findings, which were surveyed over a four-month period from November 2015 to February 2016? First, the total TV universe has grown. Second, there has been a sizeable increase in audience in B and C category, signifying an upswing in general prosperity and purchasing power. Third, the rate of growth of rural and small towns is higher than their urban counterparts. With respect to the NCCS classification of a household (or BARC’s version of earlier classifications known as SEC), it is based on two main variables: education of the household’s chief wage earner, defined as the person who contributes the most to payment of household expenses and household ownership of 11 specific durable goods, which clearly catch the household’s worth. The 11 durables collectively owned by household members and considered in the NCCS classification of households in India are electricity connection, ceiling fan, LPG stove, two-wheeler, colour TV, refrigerator, washing machine, personal computer/laptop, car/jeep/van, aircon and agricultural land. As digital viewing proliferates, BARC India is readying itself to measure the digital world too and the data is expected to flow in sometime late 2017 or early 2018.

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Dakhal News 24 February 2017


trp week 7

इण्डिया टीवी दो सप्ताह नंबर दो रहा लेकिन वह इस मुकाम पर खुद को सम्हाल नहीं पाया और उसे आज तक ने फिर झटका देकर नंबर वन की पोजिशन हांसिल कर ली है। ज़ी न्यूज़ तीसरे और एबीपी पांचवे नंबर पर पहुँच गया है।    नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 7 Aaj Tak 15.6 up 0.2  India TV 14.4 dn 2.3  Zee News 12.3 up 0.4  News18 India 11.5 up 0.5  ABP News 10.9 up 0.1  India News 10.6 up 0.3  News 24 9.3 up 0.5  News Nation 8.7 same Tez 2.8 up 0.1  NDTV India 2.1 up 0.1  DD News 1.8 up 0.2   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 15.0 up 0.5  India TV 14.5 dn 3.2  Zee News 13.4 up 0.8  News18 India 12.4 up 0.1  ABP News 10.6 same News Nation 9.2 up 0.2  India News 8.6 up 0.3  News 24 8.5 up 0.6  Tez 3.1 up 0.1  NDTV India 2.8 up 0.1  DD News 1.9 up 0.4   एमपी/सीजी के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल Zee MP..........  28  Bansal..........   26  ETV MP.........   21 IBC 24.........     17  Sahara.......       5

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Dakhal News 23 February 2017


वीडियो जनर्लिस्ट सुशील

अम्बिकापुर शहर के गुदरी बाजार और कंपनी बाजार मे अपनी दबंगई और एकजुटता से किसानो की सब्जी औने पौने दाम मे खरीदने वाले सब्जी माफिया  अब बेखौफ हो चुके है। इन पर ना ही पुलिस का खौफ है और ना ही समाज का । जिसके परिणाम स्वरूप अब इन लोगों ने  पत्रकारो पर हमला करने से भी गुरेज नही कर रहे है। मामला रविवार की रात तकरीबन 10.30 बजे का है। जब शहर के दरिमा मोड पर पिकप वाहन पलटने की खबर पर एक इलेक्ट्रानिक मीडिया चैनल का वीडियो जनर्लिस्ट घटना का फुटेज बनाने पंहुचा था। हांलाकि मामले की सूचना पर तत्परता दिखाते हुए कोतवाली थाना के प्रभारी और प्रशिक्षु डीएसपी मणिशंकर चंद्रा ने पीडित पत्रकार को अस्पताल तक पंहुचाया , जहां पर गंभीर रुप से घायल पत्रकार का इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक शहर से लगे दरिमा मोड पर रविवार की रात करीब पौने बारह बजे एक पिकप वाहन पलटने और कुछ लोगो के हताहत होने की सूचना पर नवापारा निवासी वीडियो जनर्लिस्ट सुशील कुमार अपने अन्य दो मीडिया कर्मियो के साथ मौके पर पंहुचा और वहां पहुंच कर वो घटना को अपने कैमरे मे कैद करने लगा। चूंकि पिकप वाहन मे सब्डी लोड थी, लिहाजा इस सूचना मे शराब के नशे मे धुत्त सब्जी कोचिया रविशंकर गुप्ता, राजू सोनी उर्फ टीटी भी अपने अन्य पांच साथियो के मौके पर पंहुचे और उन्होने बिना बात किए वीडियो जनर्लिस्ट  पर हलमा कर दिया। घायल सुशील के मुताबिक पहले सब्जी कोचियो ने उसे लाठी डंडे से पीटा और जब वो जमीन पर गिर गया तो उनमे से एक दो लोगो ने अपने पास रखे धारदार हथियार से उसके सर और पेट पर हमला कर उसे जान से मारने का प्रयास किया। इधर धारदार हथियार से हमले मे सुशील के पेट से लेकर छाती तक कई सेंटीमीटर तक उसको चोट आई है वही पेट और सर पर आई गंभीर चोट के बाद सुशील बेहोश हो गया। इस जानलेवा हमला के दौरान उसके साथियो ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन शराब के नशे मे धुत्त लोगो पर ना जाने क्या सवार था वो नही माने और घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। बाद मे घायल के साथियो ने मामले की सूचना कोतवाली थाना पुलिस को दी , जिसके बाद कोतवाली प्रभारी , प्रशिक्षु डीएसपी मणिशंकर चंद्रा खुद मौके पर पंहुचे। जिसके बाद पीडित वीडियो जनर्लिस्ट को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया। इलाज के दौरान घायल सुशील के पेट मे 25 टांके लगे है वही डाक्टरो ने सुशील ने अस्पताल मे एडमिट कर लिया है। इधर इलाज के लिए भर्ती कराने के बाद रात मे कोतावाली पुलिस ने सभी काजगी कार्यवाही रात मे ही कर ली थी , चूंकि मामला एक आदिवासी युवक के साथ मारपीट का था, लिहाजा मामले मे विशेष थाना मे अपराध पंजीबद्द किया गया है। पुलिस ने इस घटना पर दो नामजद्द आरोपियो के साथ पांच अन्य लोगो के साथ मुकदमा कायम कर लिया है। चूंकि मामला जान से मारने के प्रयाक का है इसलिए पुलिस ने जांच कर मामले मे हत्या के प्रयास का मामला कायम करने का आश्वासन दिया है। फिलहाल वीडियो जनर्लिस्ट सुशील कुमार बखला का अम्बिकापुर मेडिकल कालेज मे इलाज चल रहा है और बाहरी चोट के साथ शरीर की अंदुरुनी चोट के लिए सुशील का सीसी स्केन और बहुत सी जांच कराई जा रही है। फिलहाल सभी आरोपी फरार बताए जा रहे है लेकिन पुलिस उन्हे जल्द पकडने का भरोसा दिला रही है। दिव्यांग बहन की पढाई के लिए करता है काम सब्जी माफिया  की दरिंदगी का शिकार 27 वर्षीय वीडियो जनर्लिस्ट सुशील बखला पिता राम प्रकाश बखला जिले के बतौली का रहने वाला है। साधारण किसान का बेटा मिलनसार सुशील शहर मे एक इलेक्ट्रानिक मीडिया चैनल मे काम कर मिलने वाली पगार से अपनी दिव्यांग बहन की बेहतरी के लिए खर्च कर करता है। दरअसल शरीर के कई अंग कार्य नही करते है वो अपनी बहन को अपने साथ शहर मे रखकर एक प्रयावेट स्कूल मे पढाता है।   

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Dakhal News 21 February 2017


vedprkash sharma

उमेश त्रिवेदी मीडिया में हिन्दी के एक लेखक वेदप्रकाश शर्मा की मौत की खबर ने साठ-सत्तर के दशक का वह रचनात्मक जगत सामने खड़ा कर दिया है, जो 'हुस्नो-इश्क' और 'रूमानी-मिजाज' को कल्पनाशीलता में पिरोकर 'लुगदी' कहा जाने वाला साहित्य रचता था। समाज के दो छोरों पर खड़े व्यक्तियों की ज्ञान-पिपासा को शांत करने के लिए रचना की इन अलग-अलग धाराओं का ब्यो रा दिलचस्प है। साहित्य में नागार्जुन या निदा फाजली जैसे रचनाकार बौध्दिकता में पगे मध्यम वर्ग के 'सेण्टीमेण्ट्स' को 'एड्रेस' करते हैं, जबकि लुगदी-साहित्य के रचयिता न्यूनताओं और अभावों के गली-कूचों में तड़पते-तरसते रूमानी-संसार की विडम्बनाओं और व्यग्रताओं को अभिव्यक्त करते थे। 'ज्ञानपीठ' की कसौटियों पर खारिज यह रचना-संसार राज-पथ के 'लिंक-रोड्स' से दूर उन गली-कूचों के आखिरी मकान तक आत्मीय गहराई के साथ घुला-मिला दिखता है, जहां जीवन की विधाओं के रंगों में मटमैलापन और भूरापन है। साठ के दशक में भारत में सरकारी स्कूलों का दौर था, जहां निम्नु मध्यम वर्गीय माट'साब जी-जान से बच्चों को पढ़ाते थे। अंग्रेजी-विरोध के कारण हिन्दी का जोर उफान पर था। नीरज जैसे कवि भी साहित्यकारों की तीसरी-चौथी पांत में बैठा करते थे। पाठ्य पुस्तकों में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, शिवमंगलसिंह सुमन, माखनलाल चतुर्वेदी की जबरदस्त उपस्थिति के बावजूद लुगदी-लेखकों की एक ऐसी जमात मौजूद थी, जो साहित्य के इन कालजयी रचनाकारों से ज्यादा चर्चा में रहते थे।    वेदप्रकाश शर्मा के प्रति जाग्रत इस कौतूहल के समानान्तर आप यह जान लें कि मैंने खुद इन ख्यातिप्राप्त शर्माजी की कोई रचना नहीं पढ़ी है। यह जानकारी भी  मेरे लिए नई है कि प्रकाशन के पहले दिन ही उनके उपन्यास 'वर्दी वाला गुंडा' की 15 लाख प्रतियां बिक गई थीं। उनके बारे में      जिज्ञासा इसलिए जागी कि साठ के दशक के उनके हमनाम लेखक वेदप्रकाश कम्बोज की किताबों पर प्यार के 'जुनूनी-मंजर' और प्रतिशोध के 'खूनी-खंजर' दर्शाने वाले कवर-पेज आज भी जहन में बतियाते रहते हैं। उन दिनों प्रबुध्द परिवारों में  इन लेखकों के नाम और नॉवेल प्रतिबंधित थे। शायद इसीलिए उत्सुकतावश हम जैसे लोग बस-स्टैण्ड की चवन्नी छाप दुकानों पर आने-दो आने देकर इनके उपन्यासों को पढ़ लिया करते थे। इनमें प्यारेलाल 'आवारा' सबसे बदनाम नाम था, जिनकी किताब का नाम भर ले लेने पर सिर पर चपत पड़ती थी। प्रेम वाजपेयी जैसे लेखकों के नॉवेल की कहानी भले ही याद नहीं हो, लेकिन उनके शीर्षक आज भी जहन में टकराते रहते है, जैसे 'गुनाह, जो मैंने किया',  'दर्द, जो मैंने पिया', 'जलती सिगरेट की कसम' या 'चलते फिरते चकले' ... आदि-आदि। इब्ने सफी, बीए के जासूसी उपन्यासों को इजाजत इसलिए मिल जाती थी कि उनमें रोमांस कम, रोमांच ज्यादा होता था और घर के बड़े-बूढ़ों की दिलचस्पी का जासूसी मसाला उनमें होता था।   वेदप्रकाश शर्मा के बहाने साठ और सत्तर के दशकों के लुगदी-लेखकों को याद करना बौध्दिक-संरचना के उन बागी और बेपरवाह इरादों को रेखांकित करना है, जो सामाजिक और साहित्यिक आचार-संहिता को अंगूठा बताते महसूस होते हैं। मसाला फिल्मों की तरह इन उपन्यासों में इमोशन्स, सेक्स, ड्रामा, अपराध और सुहाग-रात के वो सारे जीवंत और भाव-विव्हल 'इनग्रेडिएण्ट्स' होते हैं, जो अभाव की दहलीज पर खड़े युवा-मन के स्वप्नलोक को रचते हैं। लोकप्रियता के पैमाने पर लुगदी-साहित्य के वजूद को नकारना मुश्किल है। साल भर में हिंदी की जितनी साहित्यिक किताबें छपती हैं, लुगदी साहित्य की उतनी किताबें महीने-डेढ़ महीने में छप जाती हैं। साहित्य के रचनात्मक कलेवरों और मुखपृष्ठों की परम्परा से दूर 'रिजेक्टेड' और घटिया अखबारी कागजों पर छपे इन उपन्यासों की मांग भी गजब रही है । इनके कवर पर खूबसूरत महिला के सीने में खंजर के साथ खून की बूंदें टपकती हैं या आलिंगनबध्द जोड़े की रूमानियत नजर आती है।  भले ही ये किताबें हजारों लाखों की संख्या में बिकती रही हों लेकिन 'भारतीय ज्ञानपीठ' ने  इन लेखकों को हमेशा नकारा है। हिन्द पॉकेट बुक्स जैसे व्यावसायिक प्रकाशन भी इऩ लेखकों की किताबें नहीं छापते थे। बहरहाल, दिलचस्प यह है कि प्रेम वाजपेयी, इब्ने सफी, प्यारेलाल आवारा, वेदप्रकाश कंबोज, ओमप्रकाश पाठक, ऋतुराज, रानू जैसे सभी लेखकों के उपन्यासों का आंकड़ा दो-ढाई सौ से कम नहीं है। सवाल यह है कि हिंदी के मौजूदा लेखकों में ज्यादा बिकने वाला कौन है- निर्मल वर्मा, कमलेश्वर या राजेन्द्र यादव, अज्ञेय, जैनेन्द्र कुमार, धर्मवीर भारती या मुक्तिबोध...? वेदप्रकाश शर्मा या प्रेम वाजपेयी अथवा गुलशन नंदा जैसे रूमानी लेखकों की तुलना में हिन्दी साहित्य के ये पुरोधा कहीं भी नहीं टिकते हैं...। [ लेखक सुबह सवेरे के प्रधान संपादक है।]  

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Dakhal News 20 February 2017


ईश्वर दुबे अध्यक्ष बने

छ.ग. जर्नलिस्ट यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी गठित छत्तीसगढ़  जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश पदाधिकारियों का निर्वाचन विगत दिनों  रायपुर में किया गया। निर्वाचित पदाधिकारियों में प्रदेश संरक्षक सर्वश्री शंकर पांडेय (रायपुर), अनिल साखरे (भिलाई), कुलवंत सलुजा (जांजगीर चांपा), प्रदेश संयोजक सर्वश्री सुभाष शर्मा (रायपुर), ब्यास पाठक (रायपुर), योगेश गुप्ता (भिलाई), प्रदेश अध्यक्ष- श्री ईश्वर दुबे ( भिलाई), प्रदेश महासचिव श्री पूरन साहू (राजनांदगांव), प्रदेश उपाध्यक्ष सर्वश्री चंद्रशेखर शर्मा (कबीरधाम), शेलेश शर्मा (जांजगीर चांपा),  कमलेश स्वर्णकार (राजनांदगांव), किशोर तिवारी (बेमेतरा), रवि शुक्ला (मुंगेली), प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री राजेश मिश्रा (भिलाई), प्रदेश सचिव सर्वश्री मुकेश तिवारी (बिलासपुर), योगेश कबुलपुरिया (खरसिया जिला रायगढ़), शिव कुमार तिवारी ( बिलासपुर), रणवीर सिंह (सरगुजा), ठाकुर रणजीत प्रसाद सिंह (भिलाई), सहसचिव सर्वश्री ज्वालाप्रसाद अग्रवाल (दुर्ग), हरदीप छाबड़ा (अंबागढ़ चौकी), राजेश पुराणिक (रायपुर), प्रदीप सान्याल (भिलाई), रामेंश्वर प्रताप सिंह (कवर्धा), कार्यालय सचिव श्री खुमान सिंह जांगड़े (भिलाई) प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती किरण दुबे ( भिलाई), श्री लोकेश साहू (रायपुर), श्री संतोष तिवारी (भिलाई), श्री शकील अहमद (दंतेवाड़ा), श्री दिलीप सिंह (जांजगीर चांपा), श्री नरेंद्र जैन (मनेंद्रगढ), श्री संतोष राजपूत ( डोगढग़ढ), श्री हरप्रीत सिंह भाटिया (भिलाई), श्री सोनकुमार सिन्हा (राजनांदगांव), अशोक चंद्राकर (बालोद) निर्वाचित घोषित किए गए। इस प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के पश्चात प्रदेश पदाधिकारियों की सलाह से अतिशीघ्र सभी संभाग अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष की सूची शीघ्र ही घोषित करने का निर्णय लिया गया है।            

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Dakhal News 19 February 2017


तहसीन मुनव्वर

जाने माने युवा कवि, ग़ज़लकार, शायर और पत्रकार तहसीन मुनव्वर ने ईटीवी के साथ नई पारी की शुरुआत की है. उन्हें ईटीवी उर्दू में सीनियर एडिटर नियुक्त किया गया है. वे पहले भी ईटीवी के हिस्से रह चुके हैं. ईटीवी के ग्रुप एडिटर राजेश रैना ने तहसीन मुनव्वर को ईटीवी नोएडा आफिस में सारे स्टाफ से रूबरू कराया और उनकी तैनाती के बारे में जानकारी दी. इस मौके पर राजेश रैना ने तहसीन मुनव्वर और पूरे स्टाफ के साथ एक सेल्फी लेकर फेसबुक पर प्रकाशित किया. बहुमुखी प्रतिभा के धनी तहसीन मुनव्वर उर्दू के जाने माने साहित्यकार हैं. उनके शायरी के दो संग्रह ‘धूप चांदनी’ और ‘सहरा में शजर’ प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली उर्दू अकादमी ने उनके कहानी संग्रह ‘मासूम’ के लिए 2004 में उन्हें पुरस्कृत किया था. वह उर्दू अकादमी दिल्ली की गवर्निग कौंसिल के सदस्य भी रहे हैं. उर्दू के अलावा कई भाषाओँ के ज्ञाता हैं तथा पंजाबी में भी शायरी करते हैं. इसके अलावा मीडिया सलाहकार के रूप में चार-चार केंद्रीय रेल मंत्रियों के साथ जुड़े रहे जिनमें लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी भी शामिल हैं.  तहसीन मुनव्वर उर्दू समाचार वाचक और एंकर के रूप में आकाशवाणी, दूरदर्शन और ईटीवी से भी जुड़े रहे हैं. 1990 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था उस समय दूरदर्शन पर समाचार वाचक के रूप में उन्होंने सेवाएं दी. कई धारावाहिक लिखे हैं तथा अभिनय भी किया. एक फीचर फिल्म के गीत भी इनके नाम हैं. देश विदेश में मुशायरों और कवि सम्मलेन में अपनी अलग छाप छोड़ते रहे हैं. रेडियो, टीवी और फिल्म के अलावा उर्दू व् हिंदी समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में विभिन विषयों पर उनके लेख तथा स्तंभ प्रकशित होते रहते हैं. एक उर्दू पाक्षिक समाचारपत्र ‘पर्वाना ए हिन्द’ का स्वयं प्रकाशन व संपादन भी करते रहे हैं. देश के कई नामी पत्रकारिता विद्यालयों से भी जुड़े हैं. [भड़ास फॉर मीडिया से ]

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Dakhal News 18 February 2017


तहसीन मुनव्वर

 जाने माने युवा कवि, ग़ज़लकार, शायर और पत्रकार तहसीन मुनव्वर ने ईटीवी के साथ नई पारी की शुरुआत की है. उन्हें ईटीवी उर्दू में सीनियर एडिटर नियुक्त किया गया है. वे पहले भी ईटीवी के हिस्से रह चुके हैं. ईटीवी के ग्रुप एडिटर राजेश रैना ने तहसीन मुनव्वर को ईटीवी नोएडा आफिस में सारे स्टाफ से रूबरू कराया और उनकी तैनाती के बारे में जानकारी दी. इस मौके पर राजेश रैना ने तहसीन मुनव्वर और पूरे स्टाफ के साथ एक सेल्फी लेकर फेसबुक पर प्रकाशित किया. बहुमुखी प्रतिभा के धनी तहसीन मुनव्वर उर्दू के जाने माने साहित्यकार हैं. उनके शायरी के दो संग्रह ‘धूप चांदनी’ और ‘सहरा में शजर’ प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली उर्दू अकादमी ने उनके कहानी संग्रह ‘मासूम’ के लिए 2004 में उन्हें पुरस्कृत किया था. वह उर्दू अकादमी दिल्ली की गवर्निग कौंसिल के सदस्य भी रहे हैं. उर्दू के अलावा कई भाषाओँ के ज्ञाता हैं तथा पंजाबी में भी शायरी करते हैं. इसके अलावा मीडिया सलाहकार के रूप में चार-चार केंद्रीय रेल मंत्रियों के साथ जुड़े रहे जिनमें लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी भी शामिल हैं.  तहसीन मुनव्वर उर्दू समाचार वाचक और एंकर के रूप में आकाशवाणी, दूरदर्शन और ईटीवी से भी जुड़े रहे हैं. 1990 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था उस समय दूरदर्शन पर समाचार वाचक के रूप में उन्होंने सेवाएं दी. कई धारावाहिक लिखे हैं तथा अभिनय भी किया. एक फीचर फिल्म के गीत भी इनके नाम हैं. देश विदेश में मुशायरों और कवि सम्मलेन में अपनी अलग छाप छोड़ते रहे हैं. रेडियो, टीवी और फिल्म के अलावा उर्दू व् हिंदी समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में विभिन विषयों पर उनके लेख तथा स्तंभ प्रकशित होते रहते हैं. एक उर्दू पाक्षिक समाचारपत्र ‘पर्वाना ए हिन्द’ का स्वयं प्रकाशन व संपादन भी करते रहे हैं. देश के कई नामी पत्रकारिता विद्यालयों से भी जुड़े हैं. [भड़ास फॉर मीडिया से ]

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Dakhal News 18 February 2017


इंडिया टीवी

  दिलीप मंडल  सपा के दोस्तों, इंडिया टीवी वाले जिस शर्मा साहेब को अखिलेश जी ने 11 लाख रुपए और 50,000 रुपए मासिक पेंशन वाली यश भारती दी, उनसे पूछिए कि वे अखिलेश के पक्ष में पहला शब्द कब बोलेंगे। ऐसे सैकड़ों उपकृत लोग हैं, उनसे बात कीजिए। दैनिक जागरण के मालिक को राज्यसभा भेजा था, उनसे पूछिए। विनीत जैन को नोएडा में 104 एकड़ ज़मीन दी है, टाइम्स ऑफ इंडिया से पूछिए। लखनऊ में जिन पत्रकारों को ज़मीन दी है, उनसे बात कीजिए। Zee न्यूज के मालिक पर आपके इतने उपकार हैं, मुलायम परिवार की शादी की पार्टी उनके फ़ार्म हाउस में होती है, उनको बोलिए कि आपके लिए गाएँ। उनमें लगभग सारे बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं। मैं क्यों? मैं किसी सरकार या पार्टी का उपकार नहीं लेता। अपने मन की लिखता हूँ। मुझसे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ आप एक शब्द नहीं लिखवा सकते। वैसे भी मेरा क्या है? मैं तो आपका दैनिक इतिहास लेखक हूँ। डाटा पैक भी अपना है। रोज़नामचा लिखता हूँ। सही लगा तो कल फिर आपकी तारीफ कर दूँगा। मेरा डाटा पैक, मेरी मर्ज़ी। मैंने आपका पेंशन नहीं खाया है। आपके नमक का एक दाना नहीं खाया है। पेंशनहरामी करने वालों को पकड़िए। हर चैनल और अखबार या तो BSP को कमज़ोर दिखा रहे हैं या नहीं दिखा रहे हैं। उनका ईश्वर न करे, अगर बीएसपी पाँचवीं बार सत्ता में आ गई तो वे बेचारे क्या करेंगे? क्या करेंगे? कटोरा लेकर सरकारी विज्ञापन के लिए सरकार के दरवाज़े पर खड़े हो जाएँगे। और क्या? [वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की एफबी वॉल से]

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Dakhal News 17 February 2017


rajat sharma

दिलीप मंडल  सपा के दोस्तों, इंडिया टीवी वाले जिस शर्मा साहेब को अखिलेश जी ने 11 लाख रुपए और 50,000 रुपए मासिक पेंशन वाली यश भारती दी, उनसे पूछिए कि वे अखिलेश के पक्ष में पहला शब्द कब बोलेंगे। ऐसे सैकड़ों उपकृत लोग हैं, उनसे बात कीजिए। दैनिक जागरण के मालिक को राज्यसभा भेजा था, उनसे पूछिए। विनीत जैन को नोएडा में 104 एकड़ ज़मीन दी है, टाइम्स ऑफ इंडिया से पूछिए। लखनऊ में जिन पत्रकारों को ज़मीन दी है, उनसे बात कीजिए। Zee न्यूज के मालिक पर आपके इतने उपकार हैं, मुलायम परिवार की शादी की पार्टी उनके फ़ार्म हाउस में होती है, उनको बोलिए कि आपके लिए गाएँ। उनमें लगभग सारे बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं। मैं क्यों? मैं किसी सरकार या पार्टी का उपकार नहीं लेता। अपने मन की लिखता हूँ। मुझसे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ आप एक शब्द नहीं लिखवा सकते। वैसे भी मेरा क्या है? मैं तो आपका दैनिक इतिहास लेखक हूँ। डाटा पैक भी अपना है। रोज़नामचा लिखता हूँ। सही लगा तो कल फिर आपकी तारीफ कर दूँगा। मेरा डाटा पैक, मेरी मर्ज़ी। मैंने आपका पेंशन नहीं खाया है। आपके नमक का एक दाना नहीं खाया है। पेंशनहरामी करने वालों को पकड़िए। हर चैनल और अखबार या तो BSP को कमज़ोर दिखा रहे हैं या नहीं दिखा रहे हैं। उनका ईश्वर न करे, अगर बीएसपी पाँचवीं बार सत्ता में आ गई तो वे बेचारे क्या करेंगे? क्या करेंगे? कटोरा लेकर सरकारी विज्ञापन के लिए सरकार के दरवाज़े पर खड़े हो जाएँगे। और क्या? [वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की एफबी वॉल से]

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Dakhal News 17 February 2017


trp week 6 इण्डिया टीवी नंबर वन

एबीपी न्यूज़ को झटके लग रहे हैं और वह छटवे सप्ताह में खिसक कर पांचवे नंबर पर आ गया है। वहीँ यूपी इलेक्शन के चलते इण्डिया टीवी दूसरे सप्ताह भी नंबर वन बना हुआ है।  मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week-6  ज़ी न्यूज.............. 30.1 बंसल................   22.7 ईटीवी.................. 19.3 आईबीसी.........      16.7 सहारा..................   7.1   नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 6 India TV 16.7 up 1.5  Aaj Tak 15.4 up 0.2  Zee News 11.9 dn 0.7  News18 India 11.0 up 1.5  ABP News 10.8 same   India News 10.2 dn 0.5  News 24 8.9 dn 1.3  News Nation 8.7 dn 0.5  Tez 2.7 same   NDTV India 2.1 same   DD News 1.6 dn 0.1   TG: CSAB Male 22+ India TV 17.7 up 2  Aaj Tak 14.6 dn 0.2  Zee News 12.6 dn 0.9  News18 India 12.2 up 1.8  ABP News 10.6 dn 0.5  News Nation 8.9 dn 0.7  India News 8.3 dn 0.1  News 24 7.9 dn 1.3  Tez 3.0 up 0.2  NDTV India 2.7 same   DD News 1.5 dn 0.2  

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Dakhal News 16 February 2017


इण्डिया टुडे एडीटर अंशुमान तिवारी

इण्डिया टुडे के एडीटर अंशुमान तिवारी ने कहा राज्य निर्वाचन आयोग के 23वें स्थापना दिवस पर 'पंचायत एवं नगरपालिका निर्वाचनों एवं जमीनी-स्तर पर गवर्नेंस की उभरती चुनौतियों'' पर पेनल संवाद हुआ। पेनल संवाद में इण्डिया टुडे के एडीटर श्री अंशुमान तिवारी ने कहा कि रिप्रेजेंटेटिव डेमोक्रेसी को पार्टिसिपेटरी डेमोक्रेसी में बदलना होगा। पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त  सत्यानंद मिश्रा ने कहा कि आडंबर नहीं कंटेंट में ध्यान दें। नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी की प्रो. डॉ. गीता ओबेराय ने कहा कि महिला जन-प्रतिनिधियों को पूरे अधिकार मिलने चाहिये। पेनल संवाद में सहभागियों ने कहा कि जन-प्रतिनिधियों की योग्यताएँ पहले सांसद और विधायकों के लिये निर्धारित हो। इसके बाद पार्षदों और पंचों की। चुनाव में खर्च की मॉनीटरिंग और धारा-40 के औचित्य पर भी राय दी गयी। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री आर. परशुराम ने पेनल संवाद के विषय पर प्रकाश डाला। संवाद में अध्यक्ष, मध्यप्रदेश भू-संपदा विनायमक प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अंटोनी डिसा, पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री पी.के. दास, सलाहकार राज्य योजना आयोग श्री मंगेश त्यागी, उप सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री गिरीश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार श्री एल.एस. हरदेनिया, श्री महेश श्रीवास्तव, श्री विजय तिवारी, श्री पलाश सुरजन सहित अन्य सहभागियों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस मौके पर उत्कृष्ट कार्यों के लिये कलेक्टर मंदसौर श्री स्वतंत्र सिंह सहित अन्य अधिकारियों को सम्मानित किया गया।संवाद का संचालन पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री एन.बी. लोहनी ने किया। आभार सचिव श्रीमती सुनीता त्रिपाठी ने माना।  

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Dakhal News 15 February 2017


संपादक शेखर त्रिपाठी

  दैनिक जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी को गाजियाबाद की कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दैनिक जागरण की वेबसाइट पर यूपी चुनाव के पहले चरण के बाद ही एग्जिट पोल दे दिया गया. इस पर चुनाव आयोग ने दैनिक जागरण के  प्रबंध संपादक, संपादक और एग्जिट पोल कराने वाली संस्था रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड यानि आरडीआई के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे. इसी के बाद पहली गिरफ्तारी जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी के रूप में हुई है. कुछ लोगों का कहना है कि संभव है बीजेपी से खबर चलने के लिए पैसा लिया होगा मालिक ने, लेकिन जेल गए शेखर त्रिपाठी. यूपी में 11 फरवरी को पहले चरण के चुनाव हुए थे. इनमें पश्चिमी यूपी की 73 सीटों पर वोट डाले गए थे.  इन्हीं सीटों के एग्जिट पोल जागरण ने अपनी वेबसाइट पर डाले थे. दैनिक जागरण की ओर से सफाई भी दी गई है. जागरण की ओर से कहा गया है- ‘’डिजिटल इंग्लिश प्लेटफॉर्म के अलावा एग्जिट पोल से संबंधित खबर दैनिक जागरण अखबार में नहीं छापी गयी. इंग्लिश वेबसाइट पर एग्जिट पोल से जुड़ी एक खबर अनजाने में डाली गयी थी, इस भूल को फौरन सुधार लिया गया और संज्ञान में आते ही वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से संबंधित न्यूज रिपोर्ट को तुरंत हटा दिया गया था.’’ लेकिन चुनाव आयोग अपने आदेश पर कायम रहा. जिसके बाद 15 जिलों में जागरण और आरडीआई के खिलाफ केस दर्ज किए गए. चुनाव के सभी चरणों का मतदान पूरा होने से पहले एग्जिट पोल छापना आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए के मुताबिक यूपी चुनाव पर कोई भी व्यक्ति, 4 फरवरी की सुबह 7 बजे से लेकर 8 मार्च के शाम साढ़े 5 बजे तक कोई एग्जिट पोल नहीं कर सकता या इनके नतीजों को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रकाशित नहीं कर सकता. दोषी पाए जाने पर दो साल की कैद या जुर्माना या दोनों ही सजा का प्रावधान है.[भड़ास फॉर मीडिया से ]  

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Dakhal News 14 February 2017


मुकेश अंबानी  हिंदुस्तान टाइम्स

शशिकान्त सिंह शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिंदुस्तान टाइम्स के बारे में चर्चा है कि इस अखबार को पांच हजार करोड़ रुपये में देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस के मुकेश अंबानी को बेच दिया गया है। चर्चा है कि प्रिंट मीडिया की इस सबसे बड़ी डील के बाद शोभना भरतिया 31 मार्च को अपना मालिकाना हक रिलायंस को सौंप देंगी और एक अप्रैल 2017 से हिंदुस्तान टाइम्स रिलायंस का अखबार हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो एक अप्रैल 2017 से रिलायंस प्रिंट मीडिया पर अपना कब्जा जमाने के लिए मुफ्त में ग्राहकों को हिंदुस्तान टाइम्स बांटेगा। ये मुफ्त की स्कीम कहां कहाँ चलेगी, इसका पता नहीं चल पाया है और इस पांच हजार करोड़ की डील में कौन कौन से हिंदुस्तान टाइम्स के एडिशन है और क्या हिंदुस्तान हिंदी अखबार भी शामिल है, इसका पता नहीं चल पाया है लेकिन ये हिंदुस्तान टाइम्स में चर्चा तेजी से उभरी है कि हिंदुस्तान टाइम्स को रिलायंस ने पांच हजार करोड़ रुपये में ख़रीदा है। अगर ये खबर सच है तो हिंदुस्तान टाइम्स के कर्मचारी 1 अप्रैल से रिलायंस के कर्मचारी हो जाएंगे। फिलहाल रिलायंस द्वारा प्रिंट मीडिया में उतरने और हिंदुस्तान टाइम्स को खरीदने तथा मुफ्त में अखबार बाटने की खबर से देश भर के अखबार मॉलिकों में हड़कंप का माहौल है। सबसे ज्यादा टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। शोभना भरतिया और रिलायंस के बीच यह डील कोलकाता में कुछ हुयी। [लेखक पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट हैं ] भड़ास फॉर मीडिया से 

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Dakhal News 13 February 2017


पत्रकार विजय मनोहर तिवारी

  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देशभक्ति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दूसरे की देशभक्ति को मापने का अधिकार किसी को नहीं है। यदि कोई खुद को देश का कर्ताधर्ता माने तो भी वो किसी की देशभक्ति नहीं नाप सकता। पत्रकार विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक ‘भारत की खोज में मेरे पांच साल’ के विमोचन समारोह में भागवत ने शनिवार को यहां कहा, ‘दूसरे की देशभक्ति मापने का अधिकार किसी को नहीं है। किसी को भी नहीं, मुझे भी नहीं। कोई अपने आपको इस देश का कर्ताधर्ता माने तो भी वो किसी की देशभक्ति कितनी है, यह नाप नहीं सकता या नाप कर उस पर बोल नहीं सकता।’ उन्होंने कहा कि हमारी आशा सागर का कोई किनारा नहीं है। ऐसी भक्ति की आंखों से देश को देखने के बाद देश समझ में आता है। इस पुस्तक के लेखों से यह आभास होता कि लेखक द्वारा ऐसी भक्ति की नजर से देश को देखा गया है।  

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Dakhal News 12 February 2017


सामना के निशाने पर पीएम

 शिवसेना मुखपत्र सामना के निशाने पर पीएम मोदी  शिवसेना ने केंद्र में एक के बाद एक कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए विकास कार्यों की सराहना की और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। शिवसेना ने कहा कि मोदी नोटबंदी के कारण पैदा हुई अराजकता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई रेनकोट वाली टिप्पणी के बारे में शिवसेना ने कहा कि भ्रष्ट के साथ सत्ता में होना भी भ्रष्टाचार है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में शुक्रवार को कहा गया कि यदि कांग्रेस सरकारों ने काम न किया होता तो मोदी आज अफ्रीका के किसी पिछड़े देश का राजकाज संभाल रहे होते। यदि पिछले 60 साल में यह सब न हुआ होता तो मोदी आज सोमालिया या बुरूंडी जैसे किसी देश की कमान संभाल रहे होते। शिवसेना ने कहा कि मोदी नोटबंदी के कारण पैदा हुई अराजकता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका निजी प्रचार तंत्र उनकी सरकार की हर गलत नीति को छिपाने की कोशिश करता है और कांग्रेस पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। मोदी को अब इस नकारात्मक धारणा से बाहर निकल आना चाहिए। शिवसेना ने कहा कि यदि किसी को लगता भी है कि कांग्रेस ने भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हुए शासन किया, तो उन्हें यह जान लेना चाहिए कि कांग्रेस ने देश का कायाकल्प कर दिया, जिसमें स्वतंत्रता के दौरान एक सुई तक नहीं बनती थी। आज वही देश आर्थिक एवं औद्योगिक विकास के अग्रिम स्थान पर खड़ा है। भारत के पिछले शासकों ने ही आज के देश को खड़ा किया है। यदि कोई रेनकोट पहनकर नहा भी ले तो भी उसका शरीर भीगेगा ही। सत्तारूढ़ दल शिवसेना ने तंज कसते हुए कहा, आज यदि आप आंखें मूंद कर नहीं मानते हैं कि पिछली सरकार सिर्फ भ्रष्टाचार ही कर रही थी तो आपको राष्ट्रविरोधी करार दे दिया जाएगा और मार डाला जाएगा। इंदिरा गांधी का उल्लेख करते हुए शिवसेना ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को वर्ष 1971 के युद्ध में एक सबक सिखाया, राष्ट्रविरोधियों पर कभी पाखंडी रुख नहीं अपनाया, नोटबंदी करके कभी गरीबों को परेशान नहीं किया इसीलिए उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी ने "दुर्गा" की संज्ञा दी थी। शिवसेना ने कहा, इंदिरा गांधी की दृढ़ इच्छाशक्ति देश का कवच थी। उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाया, खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया और यह संदेश दिया कि भारत आतंकियों के समक्ष झुकेगा नहीं। उन्होंने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। राजीव गांधी की सराहना करते हुए शिवसेना ने कहा, उनके पास स्वच्छ तरीके से कामकाज करने की इच्छाशक्ति थी। उन पर बोफोर्स का दाग भले ही लगा लेकिन भारत में कंप्यूटर युग लाने का श्रेय उन्हें ही है। आज टेक्नोलॉजी का विकास सिर्फ इसीलिए हुआ क्योंकि उन्होंने एक मजबूत नींव रखी। संपादकीय में कहा गया, नरसिंह राव और मनमोहन सिंह देश को आर्थिक असंतुलन से बचाने में सफल रहे।  

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Dakhal News 11 February 2017


इण्डिया टीवी नंबर वन ,एबीपी चौथे नंबर पर

मप्र -छग में तेजी से बढ़ रहा है बंसल न्यूज़  साल के पांचवे सप्ताह में आज तक को नंबर वन से पीछे धकेल कर रजत शर्मा का  इण्डिया टीवी नंबर वन बन गया है। ज़ी न्यूज़ तीसरे और एबीपी न्यूज़ चौथे नंबर पर पहुँच गया है। बीते सप्ताह सबसे जोर का झटका एबीपी को ही लगा है। लाख जातान के बावजूद एबीपी अपनी स्थिति नहीं सम्हाल पा रहा है। मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में ज़ी न्यूज़ तेजी से नीचे खिसक रहा है लेकिन इसके बावजूद वह नंबर वन है ,बंसल न्यूज़ तेजी से आगे बढ़ते हुए नंबर दो पर पहुँच गया है।    मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव रीजनल न्यूज़ चैनल Week 5 ज़ी न्यूज...   34.6  बंसल न्यूज..  29.9 ईटीवी....       14.3 आईबीसी 24..13.1 सहारा समय.   5.3     नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 5 India TV 15.3 up 0.9  Aaj Tak 15.3 dn 0.3  Zee News 12.6 dn 0.6  ABP News 10.8 dn 1.2  India News 10.7 up 0.1  News 24 10.2 up 0.1  News18 India 9.4 up 1.2  News Nation 9.3 dn 0.1  Tez 2.7 up 0.1  NDTV India 2.0 dn 0.2  DD News 1.7 dn 0.2    TG: CSAB Male 22+ India TV 15.7 up 1.0  Aaj Tak 14.8 dn 0.3  Zee News 13.5 dn 0.2  ABP News 11.1 dn 0.8  News18 India 10.4 up 1.3  News Nation 9.7 up 0.2  News 24 9.2 dn 0.3  India News 8.4 dn 0.6  Tez 2.8 up 0.1  NDTV India 2.7 dn 0.1  DD News 1.7 dn 0.3

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Dakhal News 9 February 2017


अनिल शर्मा

अनिल शर्मा  जब हम बाज़ार से कोई जानवर ख़रीदते हैं तो सबसे पहले उसकी नस्ल के बारे में पूछते हैं! जब हम  बीज ख़रीदने जाते हैं तो भी बीज उन्नत-शील- नस्ल के बारे में पूछते हैं ,लेकिन पूरे देश में जो करोड़ों की संख्या में पांच फ़ुट, साढ़े पांच फ़ुट के सांवले या काले रंग के पुरुष तथा साढ़े चार फ़ुट, पांच फ़ुट की महिला को देखते हैं तो आला दर्जे के ज़हीन आदमी से लेकर अनपढ़ व्यक्ति तक के मन में यह विचार क्यों नहीं आता कि आख़िर इसकी नस्ल कौन-सी है ? इस देश में जब विदेशी आक्रमणकारियों, क्रमशः सिकन्दर, महमूद,गज़नवी, नादिरशाह आदि के आक्रमण हुए – वे मात्र इस देश की धन दौलत, जानवर, घोड़े,हाथी, गाय, बकरी,भेड़ आदि की लूट के लिए हुए ! इसके बाद वे अपनी सेना सहित वापिस लौट गए ! लेकिन सम्राट बाबर ने दिल्ली का ताज़ जीतने और देश का बादशाह बनने के बाद, इस देश में ही परिवार सहित रहने का मन बनाया ! इसके बाद सम्राट अकबर के कालखंड में गंगा-जमुनी संस्कृति का -उदय! आक्रमणकारी राजाओं की तलवार के आगे लाखों हिन्दुओं ने धर्म-परिवर्तन किया लेकिन तैमुर लंग, नादिरशाह की बर्बरता के साथ इस देश के लोंगों को सम्राट अकबर जैसा रहमदिल तथाहिन्दू-मुस्लिम के बीच सच्ची एकता कायम करने वाला एक अनोखा बादशाह भी मिला !सोचने की बात यह है कि अफ़गानिस्तान या अन्य दूसरे देशों से जितने भी आक्रमणकारी आये, उनकी तथा उनकी कौमों के जवानों की नस्ल कैसी थी ? वे सात फ़ुट ऊँचे कद वाले गोरे-चिट्टे लोग थे ! उस कद काठी व रंग-रूप के इंसान, कहीं आज दिखाई पड़ते हैं तो वह उस कद काठी व् रंग-रूप के इंसान, कहीं आज दिखाई पड़ते हैं तो वह पंजाब प्रदेश में सरदार तथा कश्मीर प्रदेश में कश्मीरी हैं ! तो बाकी औसत कद-काठी तथा सामान्य रंग-रूप के करोड़ों मुसलमान हिन्दू कहाँ से आये ? निश्चित रूप से सब भाई-भाई हैं ! उनका खून एक है ! सवाल यह है कि हिन्दू-मुस्लिम के बीच वैमनस्यता और नफरत के बीज किसने बोए ? उत्तर एकदम साफ़ है राजनीति ने ! सबसे पहले अंग्रेज सरकार ने हिन्दू-मुस्लिम को लड़वाकर नफ़रत के बीज बोए ! राजनीति ने, कुर्सी व् पद की चाहत में, भारत देश का वर्ष 1947 में बंटवारा कराया ! उस समय के नेताओं ने दोनों देशों के लोगों को आपस में भाई-भाई का रिश्ता महसूस कराने और उन्हें एक दूसरे से जोड़ने के बजाय उनको अपनी सत्ता और कुर्सी के लिए आपस में लड़ाना शुरू किया ! भारत पाकिस्तान के बँटवारे के समय दोनों आज़ाद मुल्कों में हिन्दुओं-मुसलमानों का क़त्ल-आम हुआ ! यह सब तो अंग्रेजों की राजनीति के कारण हुआ, लेकिन आज़ादी के 67 साल बाद भी सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं ने इसे सत्ता पाने का मूलमन्त्र समझ लिया जिसके चलते आज़ादी के 67 साल में लाखों हिन्दू-मुस्लिम दंगे राजनीतिज्ञों ने योजनाबद्ध तरीक़े से कराये ! जिसके कारण यहाँ लाखों हिन्दू-मुस्लिम, निर्दोष लोगों की जान गई ! वहीँ अरबों-खरबों की संपत्ति की लूट खसोट की गई या फिर या फिर उसे जला कर रख कर दिया गया ! हमें सोचने की जरुरत है कि आख़िर इन दंगों से किस का लाभ हुआ ? निश्चित रूप से सिर्फ राजनीतिज्ञों का ! ज्यादा नहीं, सिर्फ हम 50-60 वर्ष पहले के गावों का स्मरण करें तो दृश्य बिल्कुल साफ़ नज़र आता है कि यदि किसी हिन्दू परिवार की जवान लड़की बिना कारण घर के बाहर खड़ी दिखती थी तो बिना किसी खौफ़ के कोई बुजुर्ग मुसलमान डांटकर उसे घर के भीतर जाने को कह देता था, क्यों कि हिन्दू मुसलामानों के बीच चाचा, ताऊ, भाई, चाची आदि के स्वाभाविक रिश्ते थे ! आज किसी गाँव या शहर के किसी मोहल्ले में कोई कल्पना कर सकता है कि कोई हिन्दू या मुसलमान बुजुर्ग दूसरे वर्ग की जवान लड़की को उसी तरह डांट सकता है ! अब तो इतनी-सी बात में दंगा-फ़साद हो जायेगा ! हमारे देश में नफ़रत के बीज जो बरसों पहले बोए पना पल्ला झाड़ लेते हैं ! इस साज़िश से दोनों वर्गों के लोगों को न केवल सावधान रहना होगा, बल्कि ऐसी ताक़तों के ख़िलाफ़ गोलबंद होना होगा ! दूसरी तरफ़ बाहरी मुल्कों में क्या स्थिति है, देंखें ! मुझे याद है वर्ष 1992-93 में, जब ‘जनसत्ता’ मुंबई में रिपोर्टर के रूप में काम करता था ! उस समय ‘मलाड-ईस्ट’ (मुंबई) में रहने वाले जब्बार खान ट्रक ड्राइवर तथा मुमताज़ खान राजगीर मिस्त्री ने इराक़ से लौटकर बड़ी तकलीफ़ भरी आवाज़ में बताया था कि हम वहां से पैसा ज़रूर कमा लाये लेकिन इराक़ में हमें शहर से 30-35 किलोमीटर दूर रखा जाता था ! वे हमें ‘हिंदी’ (यानि हिन्दुस्तानी) मुसलमान मानते थे ! उन्हें डर था कि यदि हमें शहर में उनके साथ ठहराया जायेगा तो उनका ‘रॉयल ब्लड’ ख़राब हो जायेगा ! इतना ही नहीं, आज भी इराक़, ईरान और अरब मुल्कों में भारतीय, बंगलादेशी तथा पाकिस्तान के मुहाजिर मुसलमानों को ‘हिंदी मुसलमानों’ के रूप में देखा जाता है ! जब बाहरी देशों में हमें हिंदी-मुसलमान कहा जाता है, कनवरटीड मुसलमान के रूप में देखा जाता है तो समय की माँग है कि हम सभी हिन्दू-मुस्लिम भाई-बहन इस अकाट्य तथ्य को समझें कि हम सब भारत माता की संतान हैं ! हमारा रूप-रंग क़द-काठी, नस्ल सब एक है ! सबसे बड़ी बात ये हमारे खून का रंग और रिश्ता एक हैं ! यदि हम राजनीतिज्ञों की हिन्दू-मुस्लिम जैसे दो सगे-भाइयों को आपस में लड़ाने की, उनकी सत्ता और कुर्सी की राजनीति को समझ पाए तथा ऐसे राजनीतिज्ञों के विरूद्ध हम हिन्दू-मुस्लिम गोलबंद हुए तो महात्मा गाँधी, चंद्रशेखर आज़ाद, अशफाक़उल्ला खां, खुदीराम बोस, ऊधम सिंह, जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया जैसे नेताओं तथा उस्ताद तानसेन, बैजू बावरा, अकबर अली खां, पं. रविशंकर, पं. भीमसेन पं. जसराज बिरजू महाराज सोनल मानसिंह जैसे कलाकारों और डॉ. इक़बाल, दद्दा मैथली शरण गुप्त, गीतकार प्रदीप, गोपालदास नीरज, फ़िराक गोरखपुरी, महाप्राण निराला, मुंशी प्रेमचंद, बाबा नागार्जुन, दुष्यंत कुमार आदि साहित्यकारों के सपनों का भारत बना पायेंगे, जहाँ हिन्दू-मुस्लिम अपने को एक खून और खानदान समझें ![लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ]

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Dakhal News 7 February 2017


shivpuri patrkar dharna

अपारदर्शी लोह कपाट तोड़ेगी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शिवपुरी में मीडिया कवरेज पर प्रतिबंध लगाने के लिए मीडिया को व्यवस्था के नाम पर रोकने वाली प्रभारी कलेक्टर की कार्यशैली के खिलाफ 11 दिन से चल रहा विरोध और स्थागित धरना फिर शुरू होने वाला है। वरिष्ठ पत्रकारों ने स्थगित धरने के निर्णय को अनुचित ठहराते हुए धरना पुन: शुरू करने का निर्णय ले लिया है। रूप रेखा और तय नीति पर धरना देने के लिए तैयार पत्रकारों ने दमदारी से कहा है कि मीडिया पर पहरे लगाकर प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या अपारदर्शिता के जो लोह कपाट लगा रही हैं उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तोड़कर रहेगी। पत्रकारों ने प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या की कार्यशैली और मनमाने अंदाज में लिए गए निर्णय को पत्रकारिता की स्वतंत्रता के खिलाफ माना है। सनद रहे! प्रभारी कलेक्टर ने पीआरओ (सरकारी पत्रकार) को प्लेग्राउण्ड में गणतंत्र पर्व की व्यवस्था के नाम पर पत्रकारों की उपस्थिति(कवरेज) को लेकर जिस अंदाज में बेईज्जत (नौकरी खा जाऊंगी)किया ,वह पत्रकारों की साख पर सीधा हमला था। उन्होंने अस्पताल में  जो पास सिस्टम लागू करने का मन बनाया और प्रशिक्षु आईएएस अंकित अष्ठाना ने जो उसका प्रचार किया वह पत्रकारों के लिए विरोध करने का सशक्त कारण था और भी कई कारण हैं जो पत्रकारों के 11 दिनी विरोध को उचित ठहराते हैं। जिस अंदाज में जिस वजह से पत्रकारों ने धरना प्रदर्शन बंद किया है वह पत्रकारों के लिए सम्मान जनक नहीं है पत्रकारों अभी कुछ नहीं बिगड़ा है। एक कदम हम फिर बढ़ायेंगे। हमें कसम है हम पत्रकारिता की लाज बचायेंगे। आज से हिम्मती हौंसलों के साथ हम अपनी कलम की ताकत से हुक्मरानों को यह बता देंगे कि आप लोकतंत्र में व्यवस्था का हिस्सा हो न कि स्वयं में व्यवस्था।  उपलब्धि और योग्यता कभी एक दूसरे के पूरक पूरी तरह नहीं रहे हैं। यही बजह है कि कई मर्तवा उपलब्धि प्राप्त चेहरे (प्रसंगवंश नेहा मारव्या) योग्य (मीडिया) व्यक्तियों को आगे बढऩे से रोकने का काम करने लगते हैं। यह पूर्वाग्राही और आत्मकेन्द्रित होने की निशानी है। दुर्भाग्य जनक सत्य यह है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था विषाक्त है और इसका प्रमाण यह है कि वह नेहा मारव्या जैसे अधिकारी उत्पन्न कर रही है। जो अधिकार संपन्न होने के बाद लिए जाने वाले अपने निर्णयों से लोकतंत्र के पवित्र नाद लोकमंगल को खुली चुनौती दे रहीं हैं। उनके द्वारा लिए गए एक-एक निर्णय (जो सामने आ गए) में उनका जो मिजाज (तेवर) दिखाई दे रहा है वह  घोषित तौर पर तानाशाहों जैसा है। वह पूरी व्यवस्था को खुद में केन्द्रित करना चाहती हैं जो उनके अनुसार चलने को तैयार नहीं हैं। वह उनके आक्रोश का और उनके द्वारा तय की गई सीमाओं का शिकार तत्काल हो जाता है। उन्होंने प्लेग्राउण्ड में पुलिस के साथ जो व्यवहार 25 जनवरी को प्लेग्राउण्ड में किया वह उनके व्यवहार की एक वानगी भर है जिसका नतीजा यह निकला कि उनके व्यवहार से आहत पुलिस उन्हें प्लेग्राउण्ड में छोड़कर सामूहिक तौर पर निकल गई। पुलिस अनुशासित है और उसका मौन विरोध (चुपचाप चले जाना) बहुत हद तक अनुशासित था लेकिन लोकतंत्र और मौजूदा दौर में मीडिया मुखर है। मीडिया पर जब प्रतिबंध लगाए जाने के प्रारंभिक प्रयास किए गए तो मीडिया ने खौलकर प्रभारी कलेक्टर की कार्यशैली का विरोध करना शुरू कर दिया। 11 दिन तक विरोध चला तत्पश्चात न समझ में आने वाली सुलह से धरना स्थागित हो गया जिसे पत्रकारों का समर्थन नहीं मिला और धरना फिर शुरू होने जा रहा है। पत्रकारों ने तय किया है कि हम प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या से संवाद कायम करेंगे और उन्हें बतायेंगे कि आपके निर्णय लोकतंत्र के प्राण तत्व पारदर्शिता का गला घोंटने वाले हैं। पत्रकार किसी तानाशाही तेवर के अधिकारी की कार्यशैली कोचुपचाप सहन नहीं करेंगे हम आपके निर्णयों के खिलाफ तर्क तथ्य और प्रमाण देंगे। संवाद और लेखनी हमारी ताकत है।  पत्रकारों को करो कॉपरेट:प्रभारी मंत्री सर्किट हाउस में प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह ने कलेक्टर की पत्रकारों को लेकर अपनाई जहा रही कार्यशैली पर नाखुशी व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनसे हमें सटीक सूचनायें प्राप्त होती है। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार सेमुअल दास की मौके पर तारीफ करते हुए नेहा मारव्या से कहा कि मुझे इन्होंने कई महत्वपूर्ण सूचनायें दी हैं। यह (पत्रकार)जैसा चाहते हैं वैसा कॉपरेट करो।  प्रशासन और पत्रकारों के द्वंद में संवाद जरूरी प्रशासन और पत्रकारों के बीच चल रहे मतभेद पूर्ण द्वंद में संवाद महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ पत्रकारों ने संवाद की महत्वता को स्वीकार करते हुए कहा है कि हम शीघ्र ही प्रभारी कलेक्टर से उनकी कार्यशैली और उनसे प्रभावित हो रही मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर संवाद कायम करेंगे। अधिकांश पत्रकारों ने कहा है कि संवाद से किसी भी समस्या का हल संभव है और लड़ाई व्यक्तिगत न होकर व्यवस्थागत हैं।  

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Dakhal News 6 February 2017


trp week 4

  न्यूज़ चेनल्स की टीआरपी कहती है कि abp न्यूज़ का समय ख़राब चल रहा है। चैनल ने खुद में लाख बदलाव कर लिए लेकिन वह इसके बावजूद टॉप थ्री से बहार है। मध्यप्रदेश में जी न्यूज़ का किला ढह रहा है। ज़ी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ को आईबीसी 24 और बंसल और ईटीवी से कड़ी चुनौती मिल रही है।  Trp week 4 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Zee MP...  35.8 ETV....       17.7 IBC 24..... 20.8 Bansal....  18 Sahara...   5.3   नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 4 Aaj Tak 15.5 dn 0.7  India TV 14.4 up 0.1  Zee News 13.1 same   ABP News 12.0 dn 0.3  India News 10.6 up 0.6  News 24 10.1 up 0.3  News Nation 9.3 dn 0.5  News18 India 8.2 up 0.3  Tez 2.5 dn 0.2  NDTV India 2.2 same   DD News 1.9 up 0.3   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 15.2 dn 0.8  India TV 14.7 dn 0.4  Zee News 13.7 dn 0.2  ABP News 11.9 dn 0.2  News 24 9.5 up 0.3  News Nation 9.5 dn 0.5  News18 India 9.1 up 0.6  India News 9 up 0.6  NDTV India 2.8 up   Tez 2.7 dn 0.2  DD News 2.0 up 0.7  

Patrakar Anurag Upadhyay

Anurag Upadhyay 2 February 2017


अरुण जेटली मीडिया

बुधवार को संसद में बजट पेश करने के बाद वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि बजट के उद्देश्‍य साफ हैं, ग्रामीण क्षेत्रों पर जोर के साथ ही कालेधन पर लगाम और जो क्षेत्र सफल है वहां पैसा लगाना। हमने रक्षा क्षेत्र को भी ज्‍यादा फंड दिया और जरूरत हुई तो और ज्‍यादा देंगे। हर क्षेत्र में सफलता की कहानी है और जो क्षेत्र सफल थे वहां पैसा लगाया है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि कालेधन को लेकर लड़ाई जारी रहेगी। इसके लिए हमने लोगों को टैक्‍स के अनुरुप बनाने की कोशिश की है। हम चाहते हैं इमानदारी से टैक्‍स भरने वालों को फायदा हो। टैक्‍स रेट कम करने का उद्देश्‍य है कि ज्‍यादा लोग टैक्‍स दें। बजट में ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता है। राजनीतिक दलों के चंदे को लेकर उठाए कदम राजनीतिक चंदे पर सफाई और आर्थिक पारदर्शिता के लिए है। राजनीतिक दलों को जो बॉन्‍ड जारी होंगे वो अपने आधिकारिक अकाउंट में ही कैश होंगे। अगर दान देने वाले और लेने वाले दोनों ने ही टैक्‍स रिटर्न भरा है तो उन्‍हें राजनीतिक चंदे पर लगने वाले टैक्‍स में राहत मिलेगी। रोजगार को लेकर वित्‍त मंत्री ने कहा कि इस बजट में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, यह कोई सेपरेट चैप्‍टर नहीं है।  

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Dakhal News 1 February 2017


tv riportar anurag upadhyay

नए रिपोर्टर छाये ,बड़े-बड़े हुए फेल  अनुराग उपाध्याय  लगातार टेलीविजन न्यूज़ देखने पर लगा कि मध्यप्रदेश में न्यूज़ 24 के  गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव एक बेहतरीन पत्रकार के रूप में उभर के सामने आये हैं। पिछले एक बरस से मध्यप्रदेश की टेलीविजन पत्रकारिता को सांप सूंघा हुआ लगता है। खबर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति इसे धीरे धीरे छत्तीसगढ़ की राह पर ले जा रही है। हालात ऐसे ही रहे तो हो सकता है एमपी में 18 के चुनाव के बाद दिल्ली में बैठे एडिटर मध्यप्रदेश को भी छतीसगढ़ की तर्ज पर ख़बरों के नजरिये से ड्राय स्टेट मान लें।  तमाम मित्र इस इलाके मध्यक्षेत्र में टीवी पत्रकारिता कर रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के नेशनल टीवी न्यूज़ रिपोर्टरों की दृष्टि से बीता साल 2016 ठीक नहीं कहा जा सकता। इस दरम्यान कोई रिपोर्टर ख़ास और बड़ी खबर नहीं कर पाया। जिससे उसे राष्ट्रीय परिदृश्य पर पहचाना जाए। एक दो ख़बरें हुईं भी तो टेलीविजन रिपोर्टर उसमे सिर्फ लकीर पीटते नजर आये क्योंकि वेब मीडिया के मित्र उन ख़बरों पर उनसे पहले ही जम के खेल चुके थे। अब से पहले होता ये था कि पहले खबर और विज्युअल या फोटोग्राफ टीवी के पास होते थे और बाद में वेब ,सोशल और प्रिंट मीडिया के पास पहुँचते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा। अब बाजी वेब मीडिया मार रहा है ,प्रिंट मीडिया मार रहा है और टीवी का बड़ा और महान माने जाने वाला रिपोर्टर सिर्फ उनकी बासी खबर चैनल पर चलवा के अपनी नौकरी बचाता प्रतीत होता है। ऐसे में टीवी रिपोर्टरों को ani के रिपोर्टर भी बड़ा झटका देते नजर आते हैं। उनकी तेजी के सामने कई बड़े -बड़े टीवी पत्रकार पानी भरते नजर आ रहे हैं।  समीक्षा करना ,सवाल उठाना मेरी आदत है ,उसके मुताबिक मैंने पाया कि पिछले कुछ सालों में मेरे [ins ,इण्डिया टीवी ] ,तब आजतक के राजेश बदल ,अमित कुमार दीप्ती चौरसिया ,तब ज़ी न्यूज़ के राजेन्द्र शर्मा ,तब न्यूज़ 24 के प्रवीण दुबे ,स्टार [बाद में एबीपी ]के बृजेश राजपूत ndtv की रुबीना खान बाद में सिद्धार्थ दास के बीच एक अघोषित मुकाबला था कि कौन बड़ी खबर करता है कौन सबसे पहले खबर करता है,तबके आईबीएन 7 के मनोज शर्मा का जिक्र इसलिए नहीं कर रहा हूँ कि वे उस दौर में ही खबर करने की तासीर खो कर इस मुकाबाले से खुद ही बाहर हो चुके थे। आईबीएन 7 लोड लेने का विषय नहीं था । इस अघोषित कॉम्पटीशन में हम सब एक से बढ़कर एक ख़बरें सामने लाते थे। ख़बरें भी ऐसीं की जिनसे जनता का ,समाज का भला तो होता ही था ,सरकार को घेर कर कटघरे में खड़ा कर देते थे। कौन खबर करता है यह उस समय  बहुत महत्वपूर्ण नहीं था ,महत्वपूर्ण यह था कि खबर पहले टीवी पर प्रसारित हुई और बाद में प्रिंट या वेब मीडिया की हैडलाइन बनी। अब मध्यप्रदेश /छत्तीसगढ़ के टीवी रिपोर्टर्स में उस कॉम्पटीशन का अभाव साफ़ नजर आता है।  ऐसे में अगर नेशनल न्यूज़ चैनल की बात करें तो सबसे अलग अलग तरह की ख़बरों को स्वीकार करने और उसे टेलीकास्ट करने का सर्वाधिक माद्दा इंडिया टीवी में हैं लेकिन उनके रिपोर्ट पुष्पेंद्र वैद्य सिवाए भर्ती की ख़बरें और ऊपर से मिले असाइनमेंट के आलावा कुछ नहीं कर पाए। उनके कारण इस इलाके में इण्डिया टीवी का भट्टा ही बैठ गया है। चैनल को इस इलाके में नंबर बढ़ाने के लिए अब ख़बरों के भरोसे नहीं नेटवर्किंग टीम के भरोसे काम करना पड़ रहा है।  दूसरे बड़े चैनल आजतक का एमपी /सीजी में नाम ही काफी है। आज तक अपने नाम और ब्रांड के दम पर सबका विश्वसनीय है ,काम करने वाला फिर अमित कुमार हो या हेमेंद्र शर्मा इससे आजतक की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कई लोग वहां आये गए होते रहते हैं।  तीसरे बड़े चैनल में शुमार एबीपी न्यूज़ पिछले कुछ समय से खुद को ही आगे नहीं रख पा रहा है ,दर्शकों को आगे कैसे रखे । एक उम्दा रिपोर्टर बृजेश राजपूत चैनल की शुरुवात से जुड़े हैं। लंबे अरसे बाद उन्हें भी नहीं सूझता है कि खबर के नाम पर क्या करें ?या वो खुद को दोहराना नहीं चाहते। बहरहाल जो भी हो एबीपी की पकड़ दर्शकों पर लगातार कमजोर हुई है और दर्शकों ने फ़िलहाल इस एबीपी न्यूज़ को पीछे रख दिया है।  नेशनल न्यूज़ चैनल के मध्य क्षेत्र में ठन्डे रवैये के बीच ndtv का भोपाल दफ्तर बंद होने का फरमान जाहिर करता है सब कुछ ठीकठाक नहीं है। ऐसे में इस इलाके के दो रिपोर्टर न्यूज़ 24 के गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव ने बीते साल शानदार और ख़ास ख़बरें कीं। वो ख़बरें जिनकी टेलीविजन और दर्शक दोनों को जरुरत होती है। न्यूज़ नेशन और न्यूज़ 24 नंबर गेम में जहाँ भी हों लेकिन खबरदारी जोरदार की। न्यूज़ 24 में गोविन्द गुर्जर की ख़बरें भी एक वजह बनी की उसे अब मध्यप्रदेश में दर्शकों की कमी नहीं है। 

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Dakhal News 31 January 2017


tv riportar anurag upadhyay

नए रिपोर्टर छाये ,बड़े-बड़े हुए फेल  अनुराग उपाध्याय  लगातार टेलीविजन न्यूज़ देखने पर लगा कि मध्यप्रदेश में न्यूज़ 24 के  गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव एक बेहतरीन पत्रकार के रूप में उभर के सामने आये हैं। पिछले एक बरस से मध्यप्रदेश की टेलीविजन पत्रकारिता को सांप सूंघा हुआ लगता है। खबर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति इसे धीरे धीरे छत्तीसगढ़ की राह पर ले जा रही है। हालात ऐसे ही रहे तो हो सकता है एमपी में 18 के चुनाव के बाद दिल्ली में बैठे एडिटर मध्यप्रदेश को भी छतीसगढ़ की तर्ज पर ख़बरों के नजरिये से ड्राय स्टेट मान लें।  तमाम मित्र इस इलाके मध्यक्षेत्र में टीवी पत्रकारिता कर रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के नेशनल टीवी न्यूज़ रिपोर्टरों की दृष्टि से बीता साल 2016 ठीक नहीं कहा जा सकता। इस दरम्यान कोई रिपोर्टर ख़ास और बड़ी खबर नहीं कर पाया। जिससे उसे राष्ट्रीय परिदृश्य पर पहचाना जाए। एक दो ख़बरें हुईं भी तो टेलीविजन रिपोर्टर उसमे सिर्फ लकीर पीटते नजर आये क्योंकि वेब मीडिया के मित्र उन ख़बरों पर उनसे पहले ही जम के खेल चुके थे। अब से पहले होता ये था कि पहले खबर और विज्युअल या फोटोग्राफ टीवी के पास होते थे और बाद में वेब ,सोशल और प्रिंट मीडिया के पास पहुँचते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा। अब बाजी वेब मीडिया मार रहा है ,प्रिंट मीडिया मार रहा है और टीवी का बड़ा और महान माने जाने वाला रिपोर्टर सिर्फ उनकी बासी खबर चैनल पर चलवा के अपनी नौकरी बचाता प्रतीत होता है। ऐसे में टीवी रिपोर्टरों को ani के रिपोर्टर भी बड़ा झटका देते नजर आते हैं। उनकी तेजी के सामने कई बड़े -बड़े टीवी पत्रकार पानी भरते नजर आ रहे हैं।  समीक्षा करना ,सवाल उठाना मेरी आदत है ,उसके मुताबिक मैंने पाया कि पिछले कुछ सालों में मेरे [ins ,इण्डिया टीवी ] ,तब आजतक के राजेश बदल ,अमित कुमार दीप्ती चौरसिया ,तब ज़ी न्यूज़ के राजेन्द्र शर्मा ,तब न्यूज़ 24 के प्रवीण दुबे ,स्टार [बाद में एबीपी ]के बृजेश राजपूत ndtv की रुबीना खान बाद में सिद्धार्थ दास के बीच एक अघोषित मुकाबला था कि कौन बड़ी खबर करता है कौन सबसे पहले खबर करता है,तबके आईबीएन 7 के मनोज शर्मा का जिक्र इसलिए नहीं कर रहा हूँ कि वे उस दौर में ही खबर करने की तासीर खो कर इस मुकाबाले से खुद ही बाहर हो चुके थे। आईबीएन 7 लोड लेने का विषय नहीं था । इस अघोषित कॉम्पटीशन में हम सब एक से बढ़कर एक ख़बरें सामने लाते थे। ख़बरें भी ऐसीं की जिनसे जनता का ,समाज का भला तो होता ही था ,सरकार को घेर कर कटघरे में खड़ा कर देते थे। कौन खबर करता है यह उस समय  बहुत महत्वपूर्ण नहीं था ,महत्वपूर्ण यह था कि खबर पहले टीवी पर प्रसारित हुई और बाद में प्रिंट या वेब मीडिया की हैडलाइन बनी। अब मध्यप्रदेश /छत्तीसगढ़ के टीवी रिपोर्टर्स में उस कॉम्पटीशन का अभाव साफ़ नजर आता है।  ऐसे में अगर नेशनल न्यूज़ चैनल की बात करें तो सबसे अलग अलग तरह की ख़बरों को स्वीकार करने और उसे टेलीकास्ट करने का सर्वाधिक माद्दा इंडिया टीवी में हैं लेकिन उनके रिपोर्ट पुष्पेंद्र वैद्य सिवाए भर्ती की ख़बरें और ऊपर से मिले असाइनमेंट के आलावा कुछ नहीं कर पाए। उनके कारण इस इलाके में इण्डिया टीवी का भट्टा ही बैठ गया है। चैनल को इस इलाके में नंबर बढ़ाने के लिए अब ख़बरों के भरोसे नहीं नेटवर्किंग टीम के भरोसे काम करना पड़ रहा है।  दूसरे बड़े चैनल आजतक का एमपी /सीजी में नाम ही काफी है। आज तक अपने नाम और ब्रांड के दम पर सबका विश्वसनीय है ,काम करने वाला फिर अमित कुमार हो या हेमेंद्र शर्मा इससे आजतक की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कई लोग वहां आये गए होते रहते हैं।  तीसरे बड़े चैनल में शुमार एबीपी न्यूज़ पिछले कुछ समय से खुद को ही आगे नहीं रख पा रहा है ,दर्शकों को आगे कैसे रखे । एक उम्दा रिपोर्टर बृजेश राजपूत चैनल की शुरुवात से जुड़े हैं। लंबे अरसे बाद उन्हें भी नहीं सूझता है कि खबर के नाम पर क्या करें ?या वो खुद को दोहराना नहीं चाहते। बहरहाल जो भी हो एबीपी की पकड़ दर्शकों पर लगातार कमजोर हुई है और दर्शकों ने फ़िलहाल इस एबीपी न्यूज़ को पीछे रख दिया है।  नेशनल न्यूज़ चैनल के मध्य क्षेत्र में ठन्डे रवैये के बीच ndtv का भोपाल दफ्तर बंद होने का फरमान जाहिर करता है सब कुछ ठीकठाक नहीं है। ऐसे में इस इलाके के दो रिपोर्टर न्यूज़ 24 के गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव ने बीते साल शानदार और ख़ास ख़बरें कीं। वो ख़बरें जिनकी टेलीविजन और दर्शक दोनों को जरुरत होती है। न्यूज़ नेशन और न्यूज़ 24 नंबर गेम में जहाँ भी हों लेकिन खबरदारी जोरदार की। न्यूज़ 24 में गोविन्द गुर्जर की ख़बरें भी एक वजह बनी की उसे अब मध्यप्रदेश में दर्शकों की कमी नहीं है। 

Patrakar Anurag Upadhyay

Anurag Upadhyay 30 January 2017


rajesh sansthapak

  सहारा समय के पूर्व संवाददाता & ANI इलेक्ट्रानिक मिडिया के पत्रकार राजेश स्थापक का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया भोपाल से सिवनी लौटते समय परासिया घाट में एक्सीडेंट हो गया कल ही राजेश स्थापक को भोपाल में ABP न्यूज़ का सिवनी संवाददाता बनाया था ।   

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Dakhal News 25 January 2017


vijay mat

भोपाल दबंग दुनिया से निकाले गए वरिष्ठ पत्रकार विजय शुक्ला ने खुद का अख़बार विजय मत शुरू करने का फैसला किया।  भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार  रामकुमार तिवारी को  विजय मत परिवार में बतौर पॉलिटकल एडिटर शामिल किया है । विजय मत अखबार के प्रधान संपादक  विजय शुक्ला ने गुलदस्ता भेट कर तिवारी का स्वागत किया।इस मौके पर विजय मत  टीम के सांथी भी मौजूद रहे। तिवारी  ने सांध्य प्रकाश,प्रदेश टुडे, राज एक्सप्रेस जैसे अखबारों में अपनी सेवाएं दीं हैं ।  

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Dakhal News 22 January 2017


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

    कोलकाता में  राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मीडिया को खबरों के प्रस्तुतीकरण के मामले में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी है। गुरुवार को महानगर में एक बांग्ला दैनिक के 35वें वार्षिकी समारोह को संबोधित करते हुए प्रणब ने कहा कि सभी लोग सुबह उठने के बाद अखबार पढ़ते हैं। इसलिए मीडिया को खबरों के प्रस्तुतीकरण के मामले में बेहद सावधान रहने की जरुरत है, खासकर ऐसी खबरें जिसमें विचारों में मतभेद देखने को मिले। महामहिम ने कहा कि लोकतंत्र में असहिष्णुता को खत्म किया जाना चाहिए, चाहे वो मीडिया के क्षेत्र में हो या कहीं और। समारोह में राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी, राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली समेत अन्य उपस्थित थे।      

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Dakhal News 20 January 2017


मोदी टॉप नेता

बराक ओबामा के अमेरिकी राष्ट्रपति पद से रिटायर होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हो गए हैं, जिनके सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फॉलोअर हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया के सभी मंचों-फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और गूगल प्लस मिलाकर मोदी के सबसे ज्यादा फॉलोअर हैं। इतनी तादाद में दुनिया के किसी नेता के फॉलोअर नहीं हैं। मोदी के ट्विटर पर दो करोड़, 65 लाख, फेसबुक पर तीन करोड़, 92 लाख, गूगल प्लस पर 32 लाख और लिंक्डइन पर 19 लाख, 90 हजार फॉलोअर हैं। इंस्टाग्राम पर पीएम के फॉलोअरों की संख्या 58 लाख और यूट्यूब पर 5.91 लाख है। इसके अलावा उनके नाम पर बने मोबाइल एप को भी लगभग एक करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो एक रिकार्ड है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले ओबामा टॉप नेता थे , कल गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर आखिरी दिन था। अब उनकी जगह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्र प्रमुख होंगे।  

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Dakhal News 20 January 2017


trp week 2

एबीपी और इण्डिया टीवी को दूसरे सप्ताह में झटके लगे हैं और इनके टेलीविजन रेटिंग पॉइंट कम हुए है। आज तक हमेशा की तरह नंबर वन पर कायम है। वहीँ न्यूज़ 24 का कहना है की वह पिछले 21 सप्ताह से मध्यप्रदेश में नंबर वन हैं।  Trp नेशनल न्यूज़ चैनल Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 2' 2017 Aaj Tak 17.0 up 0.1   India TV 14.1 dn 0.2  Zee News 12.9 up 0.1   ABP News 12.7 dn 1.4  India News 10.2 up 0.5  News 24 9.5 up 0.6  News Nation 8.9 up 0.4  News18 India 7.9 up 0.4  Tez 2.5 dn 0.2  NDTV India 2.4 same   DD News 1.8 dn 0.2  TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 15.8 dn 0.3  India TV 14.9 dn 0.3  Zee News 13.3 up 0.1  ABP News 12.9 dn 1.2  News Nation 9.1 up 0.6  News18 India 8.9 up 0.5  India News 8.9 up 0.5  News 24 8.8 up 0.6  NDTV India 3.0 dn 0.1  Tez 2.7 dn 0.1  DD News 1.8 dn 0.2 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के रीजनल न्यूज़ चैनल्स की स्थिति  BARC WK 2,  6 JAN-13 JAN TG: CS 15+ YRS  MP Market RELATIVE SHARE %  Bansal-40 Z MP-31 ETV-22 IBC24-5 Swaraj-1 India News-1 REACH'000 Z MP-1569 ETV-1415 Bansal-1026 IBC24-585 Swaraj-191 India News-119 TSV IN MINS Bansal-18:30 Z MP-10:55 ETV-08:20 India News-07:03 IBC24-05:34 Swaraj-04:48 GRP Bansal-6 Z MP-4 ETV-3 IBC24-1 Swaraj-0 India News-0 CG MARKET RELATIVE SHARE %  Z MP-38 IBC24-37 ETV-19 Bansal-5 Swaraj-1 India News-0 REACH'000 Z MP-1037 IBC24-919 ETV-627 Bansal-273 Swaraj-203 India News-46 TSV IN MINS Z MP-14:08 IBC24-12:26 ETV-10:57 Bansal-05:53 Swaraj-02:46 India News-02:00 GRP Z MP-9 IBC24-9 ETV-5 Bansal-1 Swaraj-0 India News-0 MPCG MRKT  RELATIVE SHARE %  Z MP-33 Bansal-26 ETV-21 IBC24-18 Swaraj-1 India News-1 REACH'000 Z MP-2606 ETV-2043 IBC24-1504 Bansal-1299 Swaraj-393 India News-165 TSV IN MINS Bansal-15:53 Z MP-12:10 IBC24-10:23 ETV-09:09 India News-05:04 Swaraj-03:46 GRP Z MP-6 Bansal-4 ETV-4 IBC24-3 Swaraj-0 India News-0

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Dakhal News 19 January 2017


arnab goswami

टीवी न्यूज एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल यानि एएनआई ANI को नई दिल्ली कार्यालय के लिए कॉपी एडिटर (प्रिंट) और सब एडिटर्स (प्रिंट/सोशल मीडिया) की तलाश है।  कापी एडिटर पद के लिए तीन साल अनुभव की जरूरत है।  अंग्रेजी भाषा में अच्छी पकड़ होनी चाहिए।  खबरों की ठीकठाक समझ हो।  सब-एडिटर पद के लिए अनुभव की कोई बाध्यता नहीं है।  रिज्यूम  jaibans@aniin.com पर भेजा जा सकता है।  एएनआई की तरफ से इन जरूरतों के बारे में जो ट्वीट किया गया है, वह इस प्रकार है- @ANI_news  ANI is looking for sub-editors for Print/Social media. Experienced/Freshers may apply. Location-New Delhi. Contact: jaibans@aniin.com   @ANI_news ANI is looking for Print Copy-editor; minimum 3 yrs experience,news sense&strong command over English. New Delhi. Contact jaibans@aniin.com नए चैनल रिपब्लिक में वैकेंसी अरनब गोस्‍वामी नया न्यूज चैनल रिपब्लिक नाम से ला रहे हैं।  वे चैनल के लिए भर्ती जोर शोर से करने में जुटे हैं। इस बाबत दिल्‍ली समेत मुंबई, बेंगलुरु, श्रीनगर, जम्‍मू, हैदराबाद व कोलकाता के लिए पत्रकारों से आवेदन मांगे गए हैं।  चैनल को ग्राफिक डिजाइनरों की भी तलाश है। अरनब का कहना है कि उन्हें पत्रकार के रूप में किसी प्रवक्‍ता या पीआर एजेंट नहीं चाहिए।  हमें निर्भीक, जुझारू और न्‍यूज ब्रेक करने वाला पत्रकार चाहिए। जो लोग अरनब गोस्वामी के साथ काम करना चाहते हैं तो वो बायोडाटा careers@republicworld.com पर मेल कर सकते हैं।     

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Dakhal News 17 January 2017


samna

सामना का विरोधियों पर हमला  शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में विरोधियों पर हमला बोला है। महाराष्ट्र की 10 नगरपालिकाओं के लिए 21 फरवरी को चुनाव होने हैं। जिसके बाद 23 फरवरी को वोटों की गिनती होगी। सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है। बीएमसी पर हमेशा से कब्जा करने वाली शिवसेना ने सामना लिखा है कि मुंबई के अस्तिव की लड़ाई अब तक शिवसेना अकेली लड़ती रही है। बीएमसी पर भगवा झंडा ही लहराया है। इस झंडे को जिसने भी उतारने की कोशिश की है उनकी राजनैतिक कब्र यही बन गई।मुखपत्र कहा गया है कि शिवसेना ने मुंबई की रक्षा ही नहीं की बल्कि मुबंई की सभी जातियों और धर्मबंधुओं को मातृत्व का आधार देकर उन्हें उत्तम सुविधा देने का वचन भी निभाया है। शिवसेना ने कहा कि मुबंई पर आए सकंट के समय जिन्होंने दुम दबा ली, वे मुंबई को बचाने के लिए सीने पर घाव झेलनेवाली शिवसेना के आड़े न आएं तो ही अच्छा है। शिवसेना ने मुखपत्र के माध्यम में लिखा कि मुंबई को लूटकर अपनी जेब भरने की परंपरा पिछले 60 सालों से भी अधिक समय से जारी है और आज भी उसका अंत नहीं हुआ है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि ठाणे जैसे शहरों को विकास के नाम पर केंद्र की ओर से जो कुछ भी दिया जाता है उसमें राजनैतिक स्वार्थ अधिक होता है। शिवसेना ने पूछा कि बुलेट ट्रेन और मेट्रो ट्रेन जैसे विकास के बुलडोजर तले जो परिवार बेघर और निर्वासित होने वाले हैं उनके भविष्य का क्या? क्या उनको उनके घर मिलेगें? नोटबंदी को लेकर केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के कारण जो लोग नाहक़ मारे गए, क्या उसे भी विकास के नाम पर बली कहा जाए? सामना में लिखा गया है कि कम से कम महाराष्ट्र और मुंबई में तो शिवसेना निरपराधियों को इस तरह नाहक़ कुचलने नहीं देगी। हमारी पीठ पर कितने ही वार क्यों ना हों, हमें परवाह नहीं है। शिवसैनिकों के रक्त में स्वार्थ नहीं है।  

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Dakhal News 14 January 2017


trp week 1

  साल के पहले सप्ताह की trp इंडिया टीवी और आज तक के लिए ठीक नहीं रही। दोनों चैनल इस सप्ताह डाउन हुए हैं ,इसके बावजूद आजतक नंबर वन और इण्डिया टीवी नंबर टू पर बना हुआ है।    नेशनल न्यूज़ चैनल  trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 1' 2017 Aaj Tak 16.9 dn 1.2  India TV 14.3 dn 1.6  ABP News 14.2 dn 0.2  Zee News 12.8 up 0.7  India News 9.7 up 0.7  News 24 8.8 up 0.3  News Nation 8.5 up 0.3  News18 India 7.5 same   Tez 2.8 up 0.4  NDTV India 2.4 up 0.2  DD News 2.1 up 0.3   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 16.1 dn 1.2  India TV 15.2 dn 1.8  ABP News 14.1 up 0.6  Zee News 13.2 up 0.4  News Nation 8.5 up 0.5  News18 India 8.4 up 0.3  India News 8.4 up 0.1  News 24 8.2 up 0.1  NDTV India 3.1 up 0.2  Tez 2.8 up 0.6  DD News 2.0 up 0.3

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Dakhal News 13 January 2017


भाजपा में जुबानबंदी

डॉ. वेदप्रताप वैदिक अपना देश भी कितना अदभुत है? एक तरफ भाजपा की कार्यकारिणी अपने अधिवेशन में नरेंद्र मोदी को नोटबंदी पर हार्दिक बधाई दे रही है और दूसरी तरफ भारत के प्रमुख सांख्यशास्त्री देश की आर्थिक दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। भारत के मुख्य सांख्यशास्त्री टीसीए अनंत का कहना है कि भारत का सकल उत्पाद (जीडीपी) इस साल 0.5 प्रतिशत घट गया है। याने 7.6 से वह 7.1 प्रतिशत रह गया है। देखने में यह आंकड़ा बहुत छोटा लगता है- सिर्फ आधा प्रतिशत लेकिन इसे जरा फैलाएं तो अपने आप मालूम पड़ जाएगा कि भारत की अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा झटका लगा है। आधा प्रतिशत की कमी का अर्थ है- लगभग 8 लाख करोड़ का झटका। भारत की कुल नगद मुद्रा के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है, यह राशि ! यह झटका अक्तूबर 2016 तक का है। नोटबंदी का भस्मासुर उतरा है, नवंबर और दिसंबर 2016 में। अभी इसका मूल्याकंन आना बाकी है लेकिन अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इससे उबरने में लंबा वक्त लगेगा। अभी किसी की हिम्मत नहीं पड़ रही, यह बताने की कि 2017 में देश के सकल उत्पाद (जीडीपी) में कितनी कमी होने वाली है। जब नोटबंदी पर बोलते हुए डाॅ. मनमोहनसिंह ने संसद में कहा कि जीडीपी अब 2 प्रतिशत घट जाएगी तो मुझे लगा कि वे विरोधी नेता हैं, इसीलिए ऐसा बोल रहे हैं लेकिन सारा देश जानता है कि वे अर्थशास्त्र के पंडित हैं और रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे हैं। यदि सचमुच देश की जीडीपी यदि दो प्रतिशत या थोड़ी ज्यादा घट गई तो देश की अर्थव्यवस्था को संभलने में कई वर्ष लग जाएंगे। करोड़ों लोग बेकारी, भुखमरी और गरीबी के शिकार हो जाएंगे। जैसे मोदी जी की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने हमारे सीमांत पर दर्जनों सर्जिकल स्ट्राइकें कर दीं और 100 से ज्यादा लोगों को मार दिया, वैसे ही यह नोटबंदी भी फर्जीकल स्ट्राइक ही सिद्ध हो रही है। लेकिन कमाल है, हमारे भाजपा नेताओं की बोलती ही बंद है। कार्यकारिणी की इस बैठक में सब बैठे ही रहे। कोई खड़ा नहीं हुआ। किसी ने खड़े होकर कान नहीं खीचे। किसी ने यह नहीं पूछा कि तुमने देश को नोटबंदी के इस मूर्खतापूर्ण चक्कर में क्यों फंसाया और इतना आत्मघाती कदम उठाने के पहले किसी से क्यों नहीं पूछा? अब लगता है कि नोटबंदी के साथ-साथ भाजपा में जुबानबंदी का भी दौर शुरु हो गया है। देश के लोकतंत्र के लिए यह खतरे की घंटी है।[डॉ वेद प्रताप वैदिक दुनिया के चर्चित पत्रकार हैं ]

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Dakhal News 12 January 2017


प्रवीण दुबे

    ज़ी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के स्टेट हैड प्रवीण दुबे ने ज़ी को अलविदा कह दिया और ईटीवी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ का दामन थाम लिया है। प्रवीण ईटीवी में बतौर स्टेट हेड काम करेंगे। वहीँ वरिष्ठ पत्रकार श्रीपाल शक्तावत बने ईटीवी राजस्थान के स्टेट हेड बनाये गए हैं।  प्रवीण दुबे ने 2016 अगस्त में ही ज़ी न्यूज़ ज्वाइन किया था और उनकी यह सबसे छोटी पारी रही। प्रवीण दुबे के ईटीवी जाने के बाद ज़ी न्यूज़ में एक बार फिर संकट आ गया है क्योंकि प्रवीण दुबे की टक्कर का पत्रकार मिलना थोड़ा कठिन है। वैसे ज़ी के नए प्रमुख जगदीश चंद्रा ने मध्यप्रदेश के लिए अपने पुराने संपर्कों को टटोलना शुरू कर दिया है।  प्रवीण दुबे ज़ी से पहले भास्कर डॉट कॉम और न्यूज़ 24 और नईदुनिया में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ईटीवी में प्रवीण दुबे को लाने के पीछे एक प्रमुख वजह ईटीवी की गिरती साख और टीआरपी रही है। प्रवीण दुबे को इन दोनों मोर्चों पर काम करना होगा। प्रवीण 14 तारीख को एईटीवी विधिवत ज्वाइन करेंगे।  जगदीश चंद्र और उनके सिपहसालारों के ज़ी ग्रुप में जाने के बाद ईटीवी का जयपुर ऑफिस वीरान पड़ गया है। ईटीवी ने राजस्थान में एक ऐसे शख्स को ईटीवी की कमान सौंपी है जिसने राजस्थान की कई सरकारों को अपनी ख़बरों से हिला दिया था। ये नाम है श्रीपाल शक्तावत। श्रीपाल ने P7 चैनल में रहते हुए मंत्री मदेरणा की सीडी का भण्डाफोड़ करते हुए सत्ता में हलचल मचा दी थी। श्रीपाल शक्तावत अभी इंडिया न्यूज़ में थे। चैनल से इस्तीफा देते हुए ईटीवी बतौर स्टेट हेड ज्वाइन किया है। गौरतलब है कि ईटीवी से कई बड़े लोगों के जाने के बाद चैनल बैसाखी पर है। जगदीश चंद्रा के जाने के बाद उनके साथ करीब 50 से ज्यादा लोगों ने ज़ी न्यूज़ ज्वाइन कर लिया। इसके बाद नेटवर्क 18 के लोगों ने अपने सिपहसालारों को जयपुर भेजा। कई दिन की मशक्कत के बाद आखिरकार ईटीवी को राजस्थान में हेड मिल गया। श्रीपाल शक्तावत के आने के बाद ईटीवी के अधिकारियों ने चैन की सांस ली है।   

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Dakhal News 10 January 2017


अवधेश बजाज

अवधेश बजाज रोजाना प्रमाणिक और सकारात्मक पत्रकारिता का दम्भ भरने वाले देश के सबसे बड़े समाचार पत्र ने देश के सबसे प्रतिभावान चरित्र अभिनेता और अर्ध्द सत्य के नायक ओम पुरी की स्वाभाविक और नैसर्गिक मृत्यु को जिस तरह से आज (शनिवार) अपने प्रथम पृष्ठ पर रहस्य मौत बनाकर प्रकाशित किया है और उनकी मृत्यु पर जो तथ्य पेश कर सवाल उठाए हैं, वह घटिया पत्रकारिता का नायाब नमूना है।  पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में उनके सिर में ड़ेढ़ इंच गहरा घाव निकला है। तथा एक्सीडेंटल डेथ माना है। ऐसे में अखबार द्वारा ओमपुरी की दूसरी पत्नी नंदिता के आरोप और प्रोड्यूसर खालिद किदवयी के कथन के आधार पर ओमपुरी की स्वाभाविक मृत्यु को रहस्यमयी बनाकर पेश करना और उनकी मौत पर सवाल उठाना अत्यंत शर्मनाक है। ओमपुरी मेरे पारिवारिक मित्र थे। तथा उनका मेरे घर आना-जाना था। वे जेहनी रिश्तों को जीने वाले इंसान थे। अखबार ने जिस तरह से ओमपुरी की मृत्यु की खबर को पेश किया है, वह एक तरह से पारिवारिक जेहनी रिश्तों को सनसनीखेज भरा और खबर को बिकाऊ बनाने की कोशिश है। यह रोजाना नो-नेगेटिव न्यूज की बात करने वाले और  देश के सबसे बड़े समाचार पत्र की खुजलीभरी पत्रकारिता का परिचायक भी है। इस तरह की पत्रकारिता जितनी भर्त्सना की जाए उतनी कम है।[ वरिष्ठ पत्रकार अवधेश बजाज की वॉल से ]  

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Dakhal News 8 January 2017


ईटीवी में इस्तीफों की झड़ी लगी

देश के सबसे बड़े रीजनल न्यूज नेटवर्क ईटीवी में हड़कम्प मचा हुआ है। ईटीवी नेटवर्क के हेड पद से रिजाइन करके ज़ी रीजनल चैनलों के सीईओ बने जगदीश चंद्र के समर्थन में ईटीवी में इस्तीफों की लाइन लग गयी है। उनके समर्थन में ईटीवी राजस्थान समेत अन्य राज्यों के बड़े चेहरों ने पैरेंट कंपनी नेटवर्क18 को इस्तीफे भेजे हैं। सूत्रों के मुताबिक ईटीवी से संपादक रैंक के गिरिराज शर्मा, मीना शर्मा, ईटीवी राजस्थान डेस्क हेड रमाकांत चतुर्वेदी, 10 रिपोर्टर समेत करीब 40 लोगों ने कंपनी को इस्तीफा भेजा है। अन्य राज्यों से भी करीब 80-85 लोगों के संस्थान छोड़ने की खबर है।  अशित कुणाल ने भी ईटीवी से इस्तीफा देकर ज़ी मीडिया रीजनल ज्वाइन कर लिया है। वे पोलिटिकल एडिटर थे और इसी पद पर जी के हिस्से बने हैं। ईटीवी नेटवर्क के मार्केटिंग सैक्शन से आशीष दवे ने भी कंपनी को इस्तीफा भेजा है। ईटीवी में बड़े पैमाने पर इस्तीफे से हड़कम्प मच गया है। कामकाज ठप सा पड़ चुका है। हालात संभालने के लिए नेटवर्क18 के बड़े अधिकारी जयपुर पहुंचे हैं। ईटीवी न्यूज नेटवर्क के नए हेड राहुल जोशी भी जयपुर में कैम्प किए हुए हैं।  इस बीच जगदीश चंद्रा ने अपने जानने वालों को सन्देश भेज कर नई पारी के बारे में सूचित कर दिया है। उनकी तरफ से भेजा गया सन्देश इस प्रकार है-    ''I am glad to say that after serving ETV for more than 8 years, this morning, I have joined Zee Media Corporation Limited. In my new role, I will function as CEO , Zee regional channels , which includes Zee Rajasthan, MP-Chattisgarh, UP-Uttarakhand, Bihar-Jharkhand, Haryana-Himachal-Punjab, Zee Salam, Zee 24 Ghanta and Zee 24 Taas. At this juncture, I seek your good wishes and your valuable support in my new assignment.  Regards – Jagdeesh Chandra''   ज्ञात हो कि यूपी में ईटीवी के रीढ़ रहे वरिष्ठ संपादक बृजेश मिश्र ने इस्तीफा देकर चैनल को घुटनों के बल ला दिया। बृजेश के समर्थन में भी दर्जनों इस्तीफे यूपी में हुए। बृजेश अब खुद का यूपी यूके का रीजनल न्यूज़ चैनल ला रहे हैं जिससे ईटीवी के दर्जनों लोग इस्तीफा देकर जुड़ रहे हैं। अब जगदीश चंद्र और उनके चाहने वालों ने ईटीवी से रिजाइन करके चैनल के ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी है। आने वाले दिनों में ईटीवी के थर्ड ग्रेड चैनल बन कर रह जाने की सम्भावना है। ईटीवी : अब छंटनी का दौर शुरू होने वाला है एक अन्य जानकारी के अनुसार ईटीवी में अब नेटवर्क18 के लोग पूरी तरह हावी होने लगे हैं जिससे चैनल के रीजनल स्वरूप पर संकट के बादल छाने लगे हैं। ईटीवी एमपी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भोपाल असाइनमेंट से दो लोगों का हैदराबाद ट्रांसफर हुआ है। ये दोनों ही नए लोग थे। एक साल पहले हुई थी ज्वाइनिंग। ईटीवी भोपाल ऑफिस में करीब 50 से ज्यादा लोगों का स्टाफ है। नेटवर्क 18 का फरमान है कि स्टाफ कम किया जाए। इससे लगता है कि छंटनी का दौर शुरू होने वाला है। अभी एकाएक आदेश आ गया कि ग्वालियर ब्यूरो बन्द हो रहा है। सारा सामान भोपाल ऑफिस मंगवाया जा रहा है। ईटीवी की पूरी कमान नेटवर्क18 के पास आने के बाद ये भी कहा जा रहा है कि इंदौर और जबलपुर ब्यूरो भी जल्द बन्द करने की तैयारी है। फिलहाल तो ईटीवी एमपी में हड़कम्प मचा हुआ है। कब किसको हैदराबाद ट्रांसफर कर दिया जाए। हर कोई चुप है। कहा जा रहा है कि जगदीश चंद्र के द्वारा लाए गए लोग निशाने पर हैं। ब्यूरो बन्द करने और कई लोगों के तबादले का फरमान बस शुरुआत भर है।[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]

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Dakhal News 7 January 2017


trp Wk 52

    साल 2016 में नेशनल न्यूज़ चैनल्स में आजतक की बादशाहत कायम रही ,वहीँ मध्यप्रदेश में ज़ी एमपी-छत्तीसगढ़ का जलवा कायम रहा। बीते  पूरे साल पहले नंबर पर आजतक और उसके बाद इण्डिया टीवी रहा। इस साल सबसे ज्यादा हालात खस्ता एबीपी न्यूज़ की रही। मध्यप्रदेश में भी रीजनल न्यूज़ चैनल्स के ज़ी को टक्कर देने का सामर्थ कोई चैनल नहीं उठा पाया। ज़ी के बाद ibc 24 और ईटीवी में नंबर दो होने की जंग चलती रही।    मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप फाइव न्यूज़ चैनल Week 52 TRp Zee MPCG.    56.7% ETV MP CG   18.4% IBC 24.           12.0% Bansal.           11.3℅ Ind News       01.1%   नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 52 Aaj Tak 18.1 up 0.2  India TV 15.9 up 0.7  ABP News 14.4 up 0.9  Zee News 12.1 dn 0.1  India News 9.0 dn 1.4  News 24 8.5 dn 0.2  News Nation 8.1 up 0.1  News18 India 7.5 same   Tez 2.4 same   NDTV India 2.3 dn 0.3  DD News 1.8 up 0.2   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 17.3 dn 0.1  India TV 16.9 up 0.5  ABP News 13.5 up 0.2  Zee News 12.8 dn 0.3  India News 8.3 dn 0.2  News18 India 8.1 same   News 24 8.1 up 0.4  News Nation 8.1 same   NDTV India 2.9 dn 0.3  Tez 2.3 dn 0.1  DD News 1.6 dn 0.1  

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Dakhal News 5 January 2017


Jagdeesh Chandra quits ETV

The longest serving CEO of any regional network in the country in the recent times, Jagdeesh Chandra, who was heading ETV for the last more than 8 years, has finally moved out from Network18 (which also controls ETV) to pursue other major opportunities and his future entrepreneurship designs.  Mr.Chandra was the initial choice of Shri Ramoji Rao and when Reliance took over the Network in 2012, Mr.Chandra also continued with Network18 and during the last five years, Reliance launched 8 new regional News channels under his leadership. Mr.Chandra is credited to completely turnaround a loss-making regional News Network ETV into a profit-making venture.  Under his leadership, only during the last Financial Year (FY15-16), ETV Hindi and Urdu channels made a record EBITDA of Rs.87.04 crores. During the first six months (April-September) of the current year, under Mr.Chandra’s command, the entire ETV Network (13 ETV channels across 22 states), registered a record Ad revenue growth of 58.12%, as compared to the previous year. On the editorial front, he succeeded in converting the ETV News channel, especially in the Hindi heartland, as the voice of the common man.  Mr.Chandra’s 8 year ETV contract had expired on 31st August, 2016 and since then he was working on an extended tenure.   At this emotional moment, Mr.Chandra says that it was a great experience and a learning to work under the dynamic leadership of Shri Ramoji Rao and Reliance under Shri Mukesh Bhai and Manoj Bhai (Reliance). While making a special reference to Shri Manoj Modi, Mr.Chandra says that he is an execution miracle in the country. In fact, Reliance is a unique combination of Mukesh Bhai’s vision and Manoj Bhai’s execution. After relinquishing his Etv Charge this afternoon, soon after Mr.Chandra joined Zee Media Corporation as its CEO of Regional channels which includes Zee Marudhara Rajasthan, Zee Madhyapradesh-Chhatisgarh, Zee Purvaiya ( Bihar-Jharkhand), Zee Uttarpradesh-Uttrakhand (India 24x7), Zee Salam, 24 Ghanta, Zee 24 Taas and Zee Punjab-Hariyana-Himachal Pradesh. Mr Chandra will be on a 5 year contract , which can be further extended with mutual consent. Mr.Chandra says that he is proud to be associated with the country’s largest and oldest television network Zee, which is controlled by an another legendary media icon Dr.Subhash Chandra.  

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Dakhal News 5 January 2017


माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय

  माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान ने राज्य स्तरीय पत्रकारिता पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। राजेश शर्मा को जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं अपर संचालक जनसंपर्क मंगलाप्रसाद मिश्र को संतोष कुमार शुक्ल लोक संप्रेषण पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनके अलावा अजित वर्मा, राकेश दुबे, वेब मीडिया में ममता यादव, अजीत सिंह, टीवी न्यूज़ के लिए प्रवीण दुबे, श्रद्धा देसाई, वेद कुमार मौर्य व ऋचा नेमा राय, पृथ्वीराज सिंह, आदेश प्रताप सिंह भदौरिया, शाहिद कामिल, शशिकांत तिवारी को भी अन्य पुरस्कारों के लिए चुना गया है।   

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Dakhal News 1 January 2017


trp week 51

इस सप्ताह एबीपी न्यूज़ को झटका लगा है और वो तीसरे नंबर पर बना हुआ है। abp इस बार डाउन हुआ है वहीँ आजतक का तोड़ किसी चैनल के पास नजर नहीं आया है। आज तक नंबर वन तो इण्डिया टीवी दूसरे नंबर पर हैं। मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में ज़ी न्यूज़ एमपी सीजी का कोई और चैनल मुकाबला नहीं कर पा रहा है। उसे चुनौती देने वाले चैनल ज़ी से आधी trp भी नहीं ला पा रहे हैं।  मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के टॉप थ्री रीजनल न्यूज़ चैनल weekl r s s   wk 51 Zee       51.6 Etv        19.3 Ibc 24    14.4 ------------------------------------------------------------ नेशनल न्यूज़ चैनल trp Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 51 Aaj Tak 17.9 up 0.3  India TV 15.2 up 1.2  ABP News 13.5 dn 0.3  Zee News 12.3 dn 0.5  India News 10.4 dn 0.8  News 24 8.7 dn 0.1  News Nation 8.0 same   News18 India 7.5 up 0.2  NDTV India 2.6 dn 0.2  Tez 2.3 up 0.1  DD News 1.6 up 0.2   TG: CSAB Male 22+ Aaj Tak 17.4 up 1.1  India TV 16.5 up 1.8  ABP News 13.3 dn 0.1  Zee News 13.1 dn 0.4  India News 8.5 dn 1.6  News18 India 8.1 same   News Nation 8.1 dn 0.1  News 24 7.7 dn 0.9  NDTV India 3.2 dn 0.1  Tez 2.4 up 0.1  DD News 1.7 up 0.3  

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Dakhal News 29 December 2016


पत्रिकाएं

 फूलचंद मानव कल जो साहित्य पुस्तकाकार संकलित होकर आएगा, आज उससे पत्रिकाएं भरी पड़ी हैं। यह सतत प्रक्रिया जारी रहती है। साहित्य में स्थायी महत्व की सामग्री सहेज, संभालकर रखने योग्य भी आ रही है। साल दो हजार सोलह में तमाम पत्रिकाओं के विशेषांक मेरे सामने हैं। देशभर में हिंदी भाषी प्रांत, अकादमियों और भाषा विभाग ज्ञान, सूचना के साथ रचना-धर्म का निर्वाह करते आ रहे हैं। प्रकाशन घराने भी आज जानकारी देने वाली, रचनात्मक सामग्री के साथ अनेक पत्रिकाएं छपवा रहे हैं। पल प्रतिपल, कथा समय, सुगंधा, रेल पथ, देस हरियाणा आदि के साथ शब्द सरोकार, साहित्य कलश, शीराजा, काश्मीर संदेश, विकास जागृति, पंजाब सौरभ जैसे दर्जनों साहित्यिक पत्र यहीं आसपास दिखाई देते हैं। कुछ अहिंदी भाषी प्रांतों में भी पत्रिकाएं अब मुखरित हैं। भारत सरकार के विविध उपक्रम भी गगनांचल, आजकल, योजना, समाज कल्याण आदि के माध्यम से साहित्यिक क्षेत्र में सक्रिय, सार्थक भूमिका निभा रहे हैं। समकालीन भारतीय साहित्य, कथा बिम्ब, छपते-छपते जैसी पत्रिकाओं की तरह ही उद‍्भावना, मीडिया-विमर्श, पाखी, अभिनव इमरोज, साहित्य अमृत लमही, जनपथ, नया ज्ञानोदय, शुक्रवार, इंडिया टुडे, पक्षधर, जनसत्ता, समिधा सरीखी दर्जनों पत्रिकाओं के दिवाली विशेषांक, वार्षिक अंक अथवा महाविशेषांक पाठक को बांध रहे हैं। निश्चय ही पत्रिका में संजोया साहित्य ताजगी की ऊर्जा लेकर आता है। जन्मशताब्दी समारोह के अधीन, भीष्म साहनी पर 386 पृष्ठों का सितंबर-अक्तूबर-16 का उद‍्भावना, हरियश राय के संपादन में एक पठनीय सौगात है। पठन-पाठन के लिए भी शोध-खोज के लिए भी यहां भरपूर सामग्री संस्मरण, आत्मकथा-आज के अतीत, साक्षात्कार, भीष्म के उपन्यास, नाटक, कहानी कला पर समीक्षा लेख पाठक को बांधते हैं। अजात शत्रु भीष्मजी (अजेय कुमार), अतिथि संपादकीय और संगठनकर्ता प्रतिबद्ध कार्यकर्ता भीष्म साहनी बहुत कुछ बताते-समझाते या दिखाते हैं। कृष्णा सोबती, नामवर, बलराज साहनी, राजेंद्र यादव, नित्यानंद तिवारी, मैनेजर पांडेय तक ने खुद को भीष्म जी के साथ जोड़कर अपने आलेखों में इनकी चर्चा की है। चित्रों का संकलन विशेषांक को स्मरणीय बना रहा है। 20dcdt3विदेशों में हिंदी कहानियों की गुलदोजी, अभिनव इमरोज में नासिरा शर्मा ने 252 पृष्ठों में दिखाई-बताई है। इनमें विदेश में लिखी जा रही कहानियों का जायजा हम ले सकते हैं। देवेंद्र कुमार बहल के संपादन में आ रही मासिक पत्रिका अभिनव ‍‍इमरोज में आठ कॉलम का संपादकीय देकर नासिरा शर्मा ने न्याय ही किया है। ‘पाखी’ मन्नू भंडारी पर केंद्रित विशेषांक जनवरी में सचित्र, 578 पन्नों का मिला था। बगैर दस्तक दरवाजा खुलना, प्रेम भारद्वाज का संपादकीय ध्यान चाहता है। साहित्य अमृत, नया ज्ञानोदय, समकालीन साहित्य समाचार, सामयिक सरस्वती, विभोम समाचार, बया, ज्ञानपीठ समाचार हिंदी प्रचारक पत्रिका आदि हिंदी प्रकाशन, संस्थानों से निकलती ऐसी पत्रिकाएं हैं जहां ताजा प्रकाशनों, किताबों, गतिविधियों के साथ सृजन-साहित्य भी पठनीय रहता है। नया ज्ञानोदय ने जनवरी-16 में साहित्य वार्षिकी-264 पृष्ठों की प्रकाशित की। अनेक गद्य-पद्य रचनाएं संजोयी हैं। कालजयी, नये और बीच के मझौले हस्ताक्षर यहां विद्यमान हैं। ‘पक्षधर’ साल के पूर्वार्द्ध जन-जनांक के तौर पर उपन्यास आलोचना पर महाविशेषांक-2, संपादक विनोद तिवारी के संपादन में आया। दूधनाथ सिंह ने 1975 में पक्षधर पत्रिका शुरू की थी। शोधार्थी, गहन अध्येताओं के लिए यहां 260 पृष्ठों में बीसेक ठोस आलेख छपे हैं। हिंदी कहानी के 100 वर्ष पर जुलाई में अभिधा ने एक विशेषांक दिया, जिसमें कथालोचन पर आलेख, कथाएं, बातचीत, भाषांतर-सा 186 पृष्ठों में बहुत कुछ संग्रहणीय है। यों ही औपन्यासिक-2 ‘लमही’ वाराणसी से जुलाई-सितंबर में अर्चना वर्मा प्रियम अंकित, ज्योति चावला, प्रांजलधर, मधुर कांकरिया और राकेश कुमार सिंह उपन्यासों पर मुखर हुए हैं। ‘साहित्य अमृत’ प्रभात प्रकाशन ने कई विशेषांक इस साल दिए हैं। स्वतंत्रता अंक में त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी का संपादकीय ध्यान मांगता है। प्रतिस्मृति नाटक, पुस्तक अंश के साथ दर्जनों लेख विषय के आसपास हैं। सेतु (देवेंद्र गुप्ता) शिमला, प्रगतिशील वसुधा संयुक्तांक-98 (राजेंद्र शर्मा) भोपाल, बया पथ (चंचल चौहान) अंबेडकरवाद और मार्क्सवाद : पारम्परकिता के धरातल-दिल्ली, तद‍्भव (पूर्णांक 33, अखिलेश) लखनऊ, नया प्रतिमान-12 (राजेंद्र मल्होत्रा, श्याम किशोर) इलाहाबाद, वैचारिकी (भारतीय विद्या मंदिर-डॉ. बाबूलाल शर्मा) मुंबई, अकार-44 (प्रियवंद) कानपुर, संप्रेक्षण-162 ग्रीष्म (चंद्रभानु भारद्वाज) जयपुर और सदानीरा (आग्नेय) भोपाल दसेक ऐसी त्रैमासिक पत्रिकाएं हैं जो समकालीन साहित्य धारा को प्रोत्साहित करके छात्रों को भी उपयोगी सामग्री, शोध सिद्धांतों के जरिये प्रदान करती हैं। सदानीरा के हर अंक में विदेशी और भारतीय कवितानुवाद रहते हैं। तद‍्भव, नया पथ, वसुधा आदि प्रगतिवादी, जनवादी लेखक के लिए भी जानी जाती है। मुंबई के गांधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर से हिंदुस्तानी जवान (सुशीला गुप्ता) और कथा बिंब (अरविंद), मंतव्य (लखनऊ-हरे प्रकाश उपाध्याय) के तीनों विशेष अंक पाठक को प्रभावित भी कर रहे हैं। लंबी कहानियों के अतिरिक्त अंक-6 में पंजाबी के आठ-दस युवा कवियों की कविताएं बांध रही हैं। पहल (ज्ञानरंजन), जबलपुर ने 102 से 105 अंक तक पांच पुस्तकें सदा की तरह संग्रहणीय दी हैं। पहल-105 अंक, नवंबर, 16 में रचनाकार नहीं, यहां रचना को तरजीह है। उद‍्भावना इसी तरह जरूरी पत्रिका हो रही है। हर अंक में सामग्री चयन, प्रस्तुति और स्तर पर ध्यान रहता है। राष्ट्रवाद निदा फाजली पर यहां संयुक्तांक 123-24 में पर्याप्त पठनीय रचनाएं शामिल हैं। लालटू, मंगलेश डबराल, सुभाष गाताडे, रोमिला थापर, कृष्णा सोबती, प्रमोद रंजन के साथ हरि मृदुल जानकी प्रसाद शर्मा भी यहां मौजूद हैं। अजेय कुमार एक आंदोलन, मिशन की तरह इसे निकालते आ रहे हैं। कोलकाता से निर्भय देव्यांश के संपादन में मासिक निकलने वाली विवाद व चर्चित सामग्री के लिए मशहूर लहक के संयुक्तांक ही अभी आ रहे हैं। मासिक पत्रिकाओं में मानो प्रतियोगिता चल रही है। समय पर निकलने, वक्त पर पहुंचने की होड़ के साथ आवरण पृष्ठ की सज्जा, संपादकीय सूझबूझ में ये पत्रिकाएं एक-दूसरे से आगे आने पर उतारू हैं। पत्रिका ककसाड सांस्कृतिक उद‍्घोष अणुव्रत भावना, प्रेस वाणी, गृहलक्ष्मी, तुलसी, हर्बल हेल्थ, तीसरी दुनिया, शब्द शिल्पी, आसपास, पंजाबी धारा, लाइफ पॉजिटिव से लेकर परिंदे, समाहुत, जनपथ, परिशोध, आधारशिला, परिकथा, रूपरेखा, शेष तक दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, हल्द्वानी, जोधपुर जैसे केंद्रों से विभिन्न क्षेत्रों में छपती रही है। स्वास्थ्य, समाज, संस्कृति, मीडिया, अध्यात्म, आत्मज्ञान से लेकर सूचना, सम्प्रदाय साहित्य तक इनकी पहुंच है। सेहत, मानसिक और शारीरिक पर भी एक बाढ़ आई है पत्रिकाओं की। ‘रूपाम्बरा’ स्वदेश भारती के संपादन में कोलकाता से आ रहा वार्षिक प्रकाशन है। भाषा साहित्य विशेषांक-26 में हिंदी साहित्य अकादमी के इस संकलन में संपादकीय के साथ संस्मरण-निबंध, कविता, कहानी, आलेख, गीत व आलोचना बहुत कुछ है। रचना की परख, चुनाव, बोलता-बतियाता है। मां पर पूरा एक अंक समर्पित करके अप्रैल जून के साहित्य कलश में सागर सूद ने जो दस्तावेजी काम किया है। ‘छपते-छपते’ 444 पृष्ठीय वृहताकार सालाना दीपांक सचित्र, प्राय: हर प्रांत से लेखकों का बेहतर सहयोग लिए हुए है। डॉ. श्रीनिवास शर्मा के चयन में कसाव और प्रतिनिधित्व है। मुंबई से ‘चिंतन दिशा’ के संपादक हृदयेश मयंक ने इसके तिमाही स्तर को बना रखा है। ‘वैचारिकी’ की तरह गहन मगर सुगम पठनीयता इस पत्रिका की खूबी ही है। प्रेम जनमानस दिल्ली से श्रेष्ठ पत्रिका व्यंग्य यात्रा के संपादक हैं। अपनी-अपनी अकादमी से तिमाही, मासिक, साहित्यिक पत्रिकाएं कम मूल्य में निकालती हैं। भाषा, वार्षिकी, समकालीन भारतीय साहित्य, संक्षेप, आलोक मधुमती, साक्षात्कार, हरिगंधा, पंजाब सौरभ, हिमप्रस्थ, विपाशा जैसी दर्जनभर पत्रिकाएं महत्वपूर्ण हैं। रणजीत साहा, खुर्शीद आलम, देवेंद्र कुमार देवेश, ये तीनों केंद्रीय साहित्य अकादमी, रवीन्द्रभवन के संपादक, मनोयोग से प्रयासरत हैं। मधुमती (उदयपुर), साक्षात्कार (भोपाल), पंजाब सौरभ (पटियाला), हरिगंधा, कथा समय (पंचकूला), विपाशा, हिमप्रस्थ (शिमला), उत्तर प्रदेश (लखनऊ) से छपती है। एनवीटी से पुस्तक संस्कृति, हिंदी अकादमी दिल्ली से इंद्रप्रस्थ भारती, दिल्ली सरकार से आजकल हिंदी तीनों ही स्तरीय, उल्लेखनीय पत्रिकाएं हैं। अहा जिंदगी, पाखी, अक्षर पर्व, हंस, कादम्बिनी, कथादेश, नया ज्ञानोदय के अतिरिक्त समयांतर नवनीत, वागर्थ सहित दर्जनों अन्य मासिक पत्रिकाएं भी उल्लेखनीय हैं। हंस अथवा कादम्बिनी या नवनीत कहीं-कहीं रेलवे बुक स्टाल पर भी इधर देखी जाती हैं। समयांतर, वागर्थ, अक्षर पर्व, पाखी प्राय: आदेश, आर्डर पर पहुंचती हैं। सामान्य पाठक तक छोटे शहरों में इनकी जानकारी भी नहीं रखते। साप्ताहिक पत्रकारिता में पापुलर मैगजीन आउटलुक, इंडिया टुडे, शुक्रवार, तहलका, यथावत, रविवार, उदय इंडिया जैसे पाक्षिक नाम भी बाजार का हिस्सा हैं। ‘बदल गयी दुनिया’ सालाना अंक, पृष्ठ 240 वाला, इंडिया टुडे उम्दा कागज पर अनेक व्यक्तित्व को रेखांकित मुखर कर पाया है। व्यावसायिक स्तंभकारों के कालम साप्ताहिक पत्रिकाओं में विधिवत हाजिर रहते हैं। रविवार दिल्ली, नवंबर में प्रवेशांक के साथ उतरा है, पर कलकत्ता के सुपरिचित रविवार से बिल्कुल अलग आउटलुक ने फिल्मों से जगमग 2016, जनवरी प्रथमांकेय संग्रहणीय-स्मरणीय सामग्री देकर गया है। ‘समावर्तन’ निरंजन क्षोत्रिय के संपादन में रंगीन मासिक शुद्ध ताजा साहित्य की मासिकी पत्रिका रही। समीक्षा, त्रैमासिक का गोपालराय स्मृति अंक मुंह बोलता संकलन है। छोटी-मोटी, बड़ी महत्वपूर्ण और सामान्य साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन 2016 में नया, ताजा, दस्तावेजी साहित्य भी दे पाया है। गत वर्ष 2015 की अपेक्षा साल 2016 में गुणवत्ता स्तर और गंभीरता की दिशा में सराहनीय कहा जा सकता है।

Dakhal News

Dakhal News 28 December 2016


प्रिंट मीडिया

प्रिंट मीडिया ने पिछले वित्तीय वर्ष में (last fiscal) 5.13  प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और इस दौरान 5423 नए रजिस्‍ट्रेशन किए गए। ‘Press in India 2015-16’ रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 31 तक कुल पब्लिकेशंस की संख्‍या 1,10,851 तक पहुंच गई। इनमें हिन्‍दी में सबसे ज्‍यादा और उसके बाद अंग्रेजी में पब्लिकेशंस रजिस्टर्ड हुए हैं रिपोर्ट के अनुसार, इनमें हिन्‍दी अखबार और पत्रिकाओं की संख्‍या 44,557  थी जबकि अंग्रेजी में पब्लिकेशंस की संख्‍या 14,083 थी!सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू द्वारा एक कार्यक्रम में जारी की गई इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रजिस्टर्ड हुए कुल पब्लिकेशंस1,10,851 में दैनिक (dailies) और पाक्षिक-साप्ताहिक (bi-tri weeklies) की संख्‍या 16136 रही जबकि अन्‍य पीरियडिकल्‍स (periodicities) शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ भी मौजूद थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, यदि प्रसार संख्या (circulations) की बात करें तो हिन्दी पब्लिकेशंस की संख्या रोजाना सबसे ज्यादा 31,44,55,106 प्रतियां (copies) रही जबकि अंग्रेजी में यह संख्या 6,54,13,443 और उर्दू में 5,17,75,006 प्रतियां रहीं। बंगाल में ‘आनंद बाजार पत्रिका’ (Anand Bazar Patrika) की सबसे ज्यादा बिक्री 11,50,038 प्रतियां रही। दूसरा सबसे ज्यादा प्रसार संख्