नशे के खिलाफ जंग या चुनावी मुद्दा पंजाब में बढ़ी सियासी हलचल
 A war against drugs or an election issue? Political stir intensifies in Punjab.

 

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की हालिया हत्याओं के बाद भगवंत मान सरकार पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब दौरे के दौरान पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। मानसा में 13 अक्टूबर को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, 15 अक्टूबर को बटाला के पास मारी पनवां गांव में बिक्रमजीत सिंह की हत्या हुई। दोनों मामलों में परिजनों ने नशा तस्करी का विरोध करने के कारण हत्या किए जाने के आरोप लगाए हैं। इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इसके अलावा, सितंबर में संगरूर के दिरबा क्षेत्र में गुलजार सिंह की जहर खाने से मौत के बाद भी नशे की समस्या को लेकर सवाल उठे थे।

पंजाब सरकार नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ और ‘बिग 5’ एक्शन प्लान के तहत अभियान चला रही है। पंजाब पुलिस के 6 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के दौरान 64,598 एफआईआर दर्ज की गईं, 82,739 कथित तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 4,198 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई। इसके अलावा, 22.58 करोड़ रुपये की ड्रग मनी भी जब्त की गई। ये आंकड़े बड़े पैमाने पर कार्रवाई को दर्शाते हैं, लेकिन गांवों में नशे की उपलब्धता को लेकर शिकायतें और हालिया घटनाएं अभियान के असर पर सवाल खड़े कर रही हैं। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बन गई है।

नशे के मुद्दे पर पंजाब की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपनी रणनीति बना रही हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार अपने एंटी-ड्रग अभियान और पुलिस कार्रवाई का हवाला दे रही है, जबकि बीजेपी ने हालिया घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी ने सितंबर 2026 में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ भी निकाली थी और सत्ता में आने पर पंजाब को नशामुक्त करने का दावा किया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार के साथ-साथ सीमा पार से होने वाली कथित तस्करी रोकने को लेकर केंद्र की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने ‘मावां-धियां इंसाफ यात्रा’ के जरिए नशे से प्रभावित परिवारों की चिंताओं को उठाया है। ऐसे में सवाल है कि क्या नशा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा, या राजनीतिक दलों की बहस के बीच इसकी रोकथाम और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा ही असली कसौटी साबित होगी।

 

Dakhal News 23 October 2026

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