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मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए जरूरी खबर है। प्रदेश के 21 निजी अस्पतालों को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (NABH) का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। इनमें भोपाल के 10, ग्वालियर के आठ और इंदौर के तीन अस्पताल शामिल हैं। हालांकि, समयसीमा बढ़ने के बावजूद इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज की सुविधा फिलहाल बहाल नहीं हुई है। दोबारा योजना से संबद्धता मिलने तक मरीजों को इलाज के लिए दूसरे संबद्ध अस्पतालों का विकल्प चुनना पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, निर्धारित गुणवत्ता मानकों और प्रमाणपत्र संबंधी शर्तों को पूरा नहीं करने पर प्रदेश के 60 निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से बाहर किया गया है। इनमें भोपाल के 27, इंदौर के 17, ग्वालियर के नौ और जबलपुर के सात अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा, भोपाल के तीन अस्पतालों ने प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज जमा नहीं किए, जबकि एक अस्पताल के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई की गई। वहीं, तीन अन्य अस्पतालों को पिछले छह महीने से एमपी-एबीएन के तहत मरीजों का इलाज नहीं करने के कारण योजना से बाहर किया गया है।
प्रदेश में एमपी-एबीएन के तहत कुल 1,953 सरकारी और निजी अस्पताल इलाज की सुविधा देते हैं, जिनमें 813 निजी अस्पताल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में ही 423 निजी अस्पताल योजना से जुड़े हैं। एनएबीएच प्रमाणपत्र अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से संबंधित मानकों को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। ऐसे में आयुष्मान कार्डधारकों को इलाज के लिए अस्पताल जाने से पहले उसकी मौजूदा संबद्धता की पुष्टि कर लेनी चाहिए, ताकि उन्हें उपचार के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।
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