Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला में इन दिनों दिवाली जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। न्यायालय द्वारा मंदिर के रूप में मान्यता मिलने और वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति के बाद मंगलवार को यहां महासत्याग्रह और दीपोत्सव की शुरुआत हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु गर्भगृह में मां वाग्देवी के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे। भोजशाला परिसर में अखंड ज्योति की स्थापना के बाद आस्था और उल्लास का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है। धार के साथ इंदौर, झाबुआ, खरगोन सहित आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु परिवार सहित यहां पहुंच रहे हैं।
करीब 700 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद पूजा का अधिकार मिलने से हिंदू समाज में विशेष उत्साह है। भोज उत्सव समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर रही है और यह निर्णय सनातन आस्था की जीत है। मंगलवार को परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिसके बाद दीपोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं से अपने घरों से दीपक और पटाखे लाकर उत्सव में शामिल होने की अपील भी की गई।
भोजशाला में बढ़ती भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इंदौर कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े और आईजी अनुराग ने धार पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। भोजशाला परिसर और शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरएएफ, एसएफ और स्थानीय पुलिस लगातार निगरानी कर रही है, जबकि आने वाले दिनों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाने की भी संभावना है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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