Patrakar Priyanshi Chaturvedi
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 से 20 फरवरी के भारत दौरे से पहले रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक फरवरी के दूसरे हफ्ते में होने की संभावना है। बैठक में सबसे अहम प्रस्ताव 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस डील के तहत 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से फ्लाई-अवे कंडीशन में खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे। इनमें करीब 60% स्वदेशी सामग्री शामिल होगी और कुल 114 में से लगभग 80% विमान भारत में उत्पादित होंगे। भारतीय वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर राफेल विमान मिलेंगे। परियोजना में फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी कंपनियों के बीच साझेदारी होगी।
इस समय भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन है। पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरे के बीच यह डील सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। राफेल को ‘4.5 जेनरेशन का राजा’ कहा जाता है, जिसमें मेटियोर मिसाइल, स्कल्प मिसाइल और लेजर-गाइडेड बम शामिल हैं। इन हथियारों के साथ यह विमान बेहद घातक और भरोसेमंद माना जाता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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