ब्राह्मण कार्ड के सहारे 2027 की तैयारी, बसपा ने बदली चुनावी रणनीति
विधानसभा चुनाव–2027 को लेकर बसपा ने सवर्णों, खासकर ब्राह्मण समाज पर फोकस बढ़ा दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती लगातार ब्राह्मणों के सम्मान और हितों के मुद्दे उठा रही हैं और पदाधिकारियों को साफ संकेत दे रही हैं कि आगामी चुनाव में यही वर्ग अहम भूमिका निभा सकता है। बसपा का मानना है कि अतीत में सवर्ण समाज ने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया है, इसलिए इस बार उसी सामाजिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
हाल के दिनों में मायावती ने विवादित वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर ब्राह्मण समाज के पक्ष में खुलकर बयान दिया और इसे अपमानजनक बताते हुए प्रतिबंध की मांग की। इससे पहले भी वह प्रेसवार्ता और बयानों में कह चुकी हैं कि ब्राह्मणों को ‘बाटी-चोखा नहीं, सम्मान चाहिए’। एक महीने में तीसरी बार इस मुद्दे को उठाकर उन्होंने साफ कर दिया है कि बसपा आगामी चुनाव में ब्राह्मण कार्ड को केंद्र में रखेगी।
इसके साथ ही मायावती ने भाजपा सरकार पर एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण, यूसीसी और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष जनहित के सवालों की बजाय आपसी टकराव में उलझे हैं। संगठन को मजबूत करने के लिए बसपा ने बड़े पैमाने पर फेरबदल और मंडल-स्तरीय प्रभारियों की नियुक्ति भी की है। पार्टी का दावा है कि मिशन-2027 को मिशन-2007 की तर्ज पर पूरा कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की दिशा में यह रणनीति निर्णायक साबित होगी।