कांग्रेस–लेफ्ट की ‘एकला चलो’ नीति से ममता को बढ़त
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा कि लगातार गठबंधनों की वजह से जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ता हतोत्साहित हुए हैं, इसलिए पार्टी ने अब स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने का फैसला किया है। इसके साथ ही यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि लेफ्ट फ्रंट भी इस बार कांग्रेस से दूरी बनाए रख सकता है।

 

2021 में कांग्रेस और वाम मोर्चे ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार दोनों का अलग-अलग रास्ता विपक्षी एकता को कमजोर करता दिख रहा है। कांग्रेस–लेफ्ट के अलग लड़ने से वोटों के बंटवारे की स्थिति बनेगी, जिससे ममता बनर्जी की टीएमसी को सीधा फायदा मिल सकता है। कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला (TMC बनाम BJP बनाम Congress/Left) उभरने की संभावना है, जहां बंटे हुए विपक्षी वोटों का लाभ बीजेपी को भी मिल सकता है।

 

इस रणनीति का असर मुस्लिम वोट बैंक पर भी पड़ सकता है, जो बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है। राज्य में करीब 27–30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और कांग्रेस व लेफ्ट का परंपरागत मुस्लिम वोट काफी हद तक साझा रहा है। दोनों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से यह वोट बैंक बिखर सकता है, जिससे उसकी राजनीतिक ताकत कमजोर होगी। कुल मिलाकर, विपक्ष की ‘एकला चलो’ नीति से जहां कांग्रेस और लेफ्ट कमजोर नजर आ सकते हैं, वहीं ममता बनर्जी और बीजेपी को इसका रणनीतिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है।

Priyanshi Chaturvedi 6 February 2026

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