Patrakar Priyanshi Chaturvedi
बसंत पंचमी और जुमे की नमाज के एक ही दिन पड़ने से धार में एक बार फिर तनावपूर्ण माहौल बन गया है। इतिहास के कड़वे अनुभवों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शुक्रवार को मां सरस्वती की पूजा और जुमे की नमाज एक साथ संपन्न होनी है, ऐसे में शहर का धैर्य और प्रशासन की तैयारियां कड़ी परीक्षा से गुजर रही हैं। भोजशाला और उसके आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, जहां भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग, कंटीले तार और ड्रोन से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बसंत पंचमी की पूजा और जुमे की नमाज दोनों एक ही दिन होंगी। कोर्ट ने नमाज के लिए दोपहर 1 से 3 बजे का समय तय किया है और परिसर में अलग स्थान तथा प्रवेश-निकास मार्ग सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। हिंदू पक्ष सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा और हवन की मांग पर अडिग है, वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने संतुलित समाधान अपनाते हुए शांतिपूर्ण आयोजन पर जोर दिया है।
पिछले वर्षों—2006, 2012 और 2016—में इसी तरह के संयोग पर हुए विवादों को देखते हुए इस बार प्रशासन कोई चूक नहीं चाहता। करीब दस हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती, शहर की सीमाओं की सीलिंग और भोजशाला को कई सेक्टरों में बांटकर निगरानी की जा रही है। एक ओर भगवा यात्राएं और दूसरी ओर नमाज की तैयारियां, दोनों समुदाय अपनी आस्था को लेकर सक्रिय हैं। ऐसे में पूरे प्रदेश की नजरें धार पर टिकी हैं—क्या इस बार आस्था की दोनों धाराएं शांति और सौहार्द के साथ एक ही दिन बह पाएंगी, यही सबसे बड़ा सवाल है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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