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मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बुधवार को दो चीतों को छोड़े जाने के साथ ही यह देश में चीता संरक्षण का नया केंद्र बन गया है। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चीतों को सॉफ्ट रिलीज इनक्लोजर में छोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कूनो और गांधी सागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी चीता और बाघ दोनों मौजूद होंगे। उन्होंने बताया कि अगले महीने दो और चीतों को यहां लाने की योजना है। रिजर्व से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से होम स्टे को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गिद्ध संख्या आकलन-2026 रिपोर्ट जारी की, जिसमें मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या में 123 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा बुंदेली भाषा में तैयार ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चीता संरक्षण को मध्य प्रदेश की वन्यजीव संरक्षण उपलब्धियों से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में कई दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की मौजूदगी को चीता प्रोजेक्ट के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। भारत में 1952 में चीते विलुप्त घोषित किए गए थे, जिसके बाद सितंबर 2022 में नामीबिया से चीतों को लाकर कूनो में बसाने की शुरुआत हुई। इसके बाद भारत में चीतों का प्रजनन भी हुआ और देश में जन्मे चीतों की संख्या लगातार बढ़ी। करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व खुले जंगल, घास के मैदान और पर्याप्त शिकार आधार के कारण चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है। अब कूनो और गांधी सागर के बाद यह मध्य प्रदेश का तीसरा चीता हैबिटेट है, जिससे संरक्षण की रणनीति को एक से अधिक सुरक्षित क्षेत्रों तक विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
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