Patrakar Priyanshi Chaturvedi
संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा बैठक शुरू हो गई है, जिसमें ईरान को उपाध्यक्ष चुना गया है। इस फैसले का अमेरिका ने कड़ा विरोध किया, लेकिन 121 देशों के समर्थन के चलते उसे सफलता नहीं मिली। हर पांच साल में होने वाली इस प्रक्रिया में एक अध्यक्ष और 34 उपाध्यक्ष चुने जाते हैं, और इस बार अध्यक्ष पद वियतनाम को मिला है।
अमेरिका ने इस फैसले को एनपीटी की विश्वसनीयता के लिए नुकसानदायक बताया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान लंबे समय से परमाणु अप्रसार प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता रहा है, ऐसे में उसे यह पद देना गलत संदेश देता है। वहीं, ईरान ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका खुद परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका है और उसके आरोप बेबुनियाद हैं।
एनपीटी की स्थापना 1970 में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए की गई थी। इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं—परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, मौजूदा हथियारों को कम करना और परमाणु ऊर्जा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों, जैसे बिजली उत्पादन, के लिए सुनिश्चित करना। वर्तमान में 190 से अधिक देश इस संधि का हिस्सा हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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