Patrakar Priyanshi Chaturvedi
अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर लगातार हमलों के बीच वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर अब भारत पर भी पड़ने लगा है। तेल और गैस की किल्लत के बाद अब भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग संकट में है। API (Active Pharmaceutical Ingredient) और KSM (Key Starting Material) जैसे दवा के कच्चे माल की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे दवा निर्माण महंगा होने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि KSM और API दवाओं के लिए अत्यंत जरूरी घटक हैं और इनकी कीमतों में उछाल का मुख्य कारण डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव है। युद्ध की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण कई ट्रेडर नए ऑर्डर लेने से बच रहे हैं, जिससे इन कच्चे माल की कमी का खतरा बढ़ रहा है।
इसके अलावा सॉल्वैंट्स (विलायक) की कीमतों में हाल के दिनों में 20–25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। लॉजिस्टिक्स में रुकावटें, सुरक्षा चिंताएं और समुद्री मार्गों पर असर की वजह से कंटेनरों और जहाजों की आवाजाही में देरी हो रही है। इन सभी कारणों से भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए उत्पादन लागत में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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