भूपेन बोरा के जाने से बदला सियासी समीकरण, राहुल गांधी को भी बदलना पड़ा रुख
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असम में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा देकर साफ कर दिया है कि वे बीजेपी का दामन थामेंगे। उनके फैसले ने न सिर्फ राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी, बल्कि राहुल गांधी को भी सक्रिय दखल देने पर मजबूर कर दिया। बताया जाता है कि बोरा के इस्तीफे की खबर मिलते ही राहुल गांधी ने उन्हें फोन कर मनाने की कोशिश की, जबकि प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई और प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह भी उनसे लगातार संपर्क में थे।

 

असम कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान इस घटनाक्रम की बड़ी वजह मानी जा रही है। बोरा ने खुलकर आरोप लगाया कि फैसलों की कमान रकीबुल हुसैन के हाथों में सिमट गई है और एपीसीसी “एपीसीसी-आर” बन चुकी है। 2024 लोकसभा चुनाव में धुबरी से जीत के बाद रकीबुल का कद बढ़ा है, जहां उन्होंने एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को बड़े अंतर से हराया था। बोरा खेमे का आरोप है कि टिकट वितरण से लेकर संगठनात्मक नियुक्तियों तक में रकीबुल का प्रभाव बढ़ता गया, जिससे असंतोष गहराता गया।

 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी बोरा को लेकर बयान दिए और उन्हें कांग्रेस का आखिरी बड़ा हिंदू असमिया चेहरा बताया। गौरतलब है कि एक समय बोरा और सरमा कांग्रेस में साथ काम कर चुके हैं। अब बोरा के बीजेपी में जाने से असम की सियासत में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने चुनाव की तैयारी तेज करते हुए प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी की कमान सौंप दी है

Priyanshi Chaturvedi 18 February 2026

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