Patrakar Priyanshi Chaturvedi
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान Central Bureau of Investigation को 11 एफआईआर की जांच पर दो हफ्ते के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुझाव दिया कि इन मामलों की निगरानी अब सुप्रीम कोर्ट के बजाय Manipur High Court या Gauhati High Court द्वारा की जाए ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी सुनवाई संभव हो।
कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार को जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की सिफारिशों को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया। यह कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण के लिए गठित की गई थी और अब तक कई रिपोर्ट सौंप चुकी है। अदालत ने कहा कि पीड़ितों को मुफ्त कानूनी मदद मिले और आवश्यकता पड़ने पर गुवाहाटी बार से वकील भेजे जाएं। कमेटी का कार्यकाल 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है ताकि राहत और पुनर्वास कार्य जारी रह सकें।
मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हुए हैं। यह हिंसा तब भड़की थी जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को तय की है और जांच तथा पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता व तेजी लाने पर जोर दिया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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