34 किताबों को मिली मंजूरी, जनरल नरवणे की आत्मकथा अब भी अटकी—RTI से हुआ खुलासा
पिछले चार सालों में रक्षा मंत्रालय के पास कुल 35 किताबों के टाइटल मंजूरी के लिए आए, जिनमें से 34 को हरी झंडी मिल चुकी है। लेकिन पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा अब भी मंजूरी का इंतजार कर रही है। न तो रक्षा मंत्रालय और न ही पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस ने इस देरी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी दी है, जिससे इस मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक, पहले ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) जीवन राजपुरोहित की किताब लीडरशिप बियॉन्ड बैरक्स और कारगिल युद्ध के दौरान DGMO रहे जनरल एनसी विज की किताब अलोन इन द रिंग भी प्रक्रियाधीन थीं। बाद में इन दोनों किताबों को मंजूरी मिल गई। जनरल एनसी विज की किताब मई 2025 में रिलीज भी हो चुकी है, जबकि जनरल नरवणे की फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी अब भी अटकी हुई है।
जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे और उनके कार्यकाल के दौरान ही चीन के साथ LAC पर तनाव चरम पर था। उनकी आत्मकथा के कुछ अंश 2023 में सामने आए थे, जिनमें गलवान और पूर्वी लद्दाख से जुड़े संवेदनशील घटनाक्रम का जिक्र था। किताब को लेकर सियासी विवाद भी हुआ, जिस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार पूर्व सेना प्रमुख का पूरा सम्मान करती है और विपक्ष बेवजह मुद्दा बना रहा है। इसके बावजूद, उनकी किताब को अब तक रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिल पाई है।