Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है। देश 2029 तक 52 अत्याधुनिक सैन्य निगरानी उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जो स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III (SBS-3) परियोजना के तहत होंगे। कुल अनुमानित लागत करीब ₹26,968 करोड़ है। इस बहु-ऑर्बिट नेटवर्क से भारत को लो-अर्थ, मीडियम और जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में निगरानी करने की क्षमता मिलेगी, जिससे चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
SBS-3 उपग्रह अत्याधुनिक सेंसर और तकनीक से लैस होंगे। इनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे, सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और इन्फ्रारेड सेंसर शामिल हैं, जो दिन-रात और हर मौसम में गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेंगे। इस तकनीक से भारत के जमीनी और समुद्री क्षेत्रों की व्यापक कवरेज सुनिश्चित होगी, ब्लाइंड स्पॉट्स खत्म होंगे और दुश्मनों की हर हलचल पर निगरानी रखी जा सकेगी। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उपग्रह संभावित खतरों की पहचान करेंगे और जरूरी डेटा सीधे ग्राउंड स्टेशनों पर भेजा जाएगा।
इस परियोजना में ISRO और निजी क्षेत्र दोनों शामिल हैं। ISRO 21 उपग्रह बनाएगा और लॉन्च करेगा, जबकि 31 उपग्रह निजी कंपनियों द्वारा विकसित किए जाएंगे, जो किसी भी भारतीय सैन्य अंतरिक्ष परियोजना में निजी क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है। इन उपग्रहों का ऑपरेशनल कंट्रोल डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) के पास रहेगा। इस नेटवर्क से भारत की ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनेसन) क्षमता मजबूत होगी, सीमाओं पर निगरानी सटीक होगी और हिंद महासागर में देश की सैन्य ताकत और रणनीतिक तैयारी बढ़ेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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