Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भोपाल के वीआईपी रोड पर कोहेफिजा स्क्वायर के पास नगर निगम का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट खुद ही बड़े तालाब के प्रदूषण की वजह बन रहा है। जिस सिरीन नदी के पानी को साफ करने के लिए यह प्लांट लगाया गया है, उसका करीब 60 प्रतिशत गंदा पानी शोधन से पहले ही सीधे तालाब में गिर रहा है। प्लांट से निकलने वाला साफ पानी बेहद कम मात्रा में तालाब तक पहुंच रहा है, जबकि आसपास के कई नाले और सीवर लाइनें बिना ट्रीटमेंट के सीधे बड़े तालाब में मिल रही हैं। इससे तालाब के किनारे बदबू, जलकुंभी और गंदगी साफ नजर आ रही है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बड़ा तालाब भोपाल की जीवनरेखा माना जाता है और इसी से शहर की करीब 30 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि शहर के कई छोटे तालाबों में फीकल कोलीफार्म बैक्टीरिया सामान्य से हजारों गुना ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी मेडिकल वेस्ट, कीटनाशक और रासायनिक तत्वों को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते, जिससे जलीय जीवन तेजी से नष्ट हो रहा है और बीते 20 साल में बड़े तालाब की जैव विविधता में भारी गिरावट आई है।
पर्यावरणविदों के मुताबिक, इस तरह का दूषित पानी पीने से पेट की बीमारियों, चर्मरोग और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। नगर निगम की ओर से पानी की जांच सीमित मानकों तक ही की जाती है, जबकि खतरनाक रसायनों पर कोई ठोस निगरानी नहीं है। निगम का दावा है कि अमृत-2 योजना के तहत नालों पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे और बड़े तालाब के लिए इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।
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