Patrakar Priyanshi Chaturvedi
एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने अपने शोध में कैंसर इलाज की एक बड़ी गुत्थी सुलझाई है। अध्ययन में सामने आया है कि ट्यूमर के भीतर ऑक्सीजन की कमी ही कैंसर को ज्यादा खतरनाक और दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बना देती है। शोध के अनुसार, ट्यूमर वाले हिस्से में रक्त संचार अनियमित होने से ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है, जिसे ‘हाइपोक्सिया’ कहा जाता है। यही स्थिति कैंसर कोशिकाओं के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है, जिससे महीनों तक कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बावजूद बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती।
शोधकर्ता डॉ. सुखेस मुखर्जी के मुताबिक, ऑक्सीजन की कमी न सिर्फ कीमो और रेडिएशन के असर को कमजोर कर देती है, बल्कि शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली की टी-सेल्स को भी निष्क्रिय कर देती है। इससे कैंसर कोशिकाएं तेजी से फैलने लगती हैं और इलाज के बाद भी दोबारा उभरने का खतरा बना रहता है। यही वजह है कि कई मामलों में इलाज के बाद भी मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाते।
इस शोध में समाधान के संकेत भी मिले हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, मधुमेह में वर्षों से इस्तेमाल हो रही दवा मेटफार्मिन और ऑक्सीजन सप्लीमेंटेशन से ट्यूमर के भीतर ऑक्सीजन स्तर बढ़ाया जा सकता है। इससे कैंसर का सुरक्षा कवच टूटेगा और इलाज ज्यादा प्रभावी होगा। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ट्यूमर के प्रभावित हिस्सों की पहचान कर टारगेटेड थेरेपी दी जा सकेगी। यह खोज स्तन, फेफड़े और पैंक्रियाज कैंसर के मरीजों के लिए नई उम्मीद मानी जा रही है और इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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