विदा होती बेटियां पुस्तक में बेटी के संस्कार और माता-पिता के स्नेह की झलक

सिंगरौली एनटीपीसी में उप मानव संसाधन विकास पद पर पदस्थ ओमप्रकाश जी ने अपनी नई पुस्तक विदा होती बेटियां के माध्यम से समाज में बेटियों के महत्व को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें खुद दो बेटियां हैं, और इसी प्रेरणा से इस किताब का निर्माण हुआ। पुस्तक में 80 कविताएं शामिल हैं, जो शादी के बाद विदा होने वाली बेटियों के साथ माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के स्नेह और संस्कारों को व्यक्त करती हैं। ओमप्रकाश जी ने कहा कि बेटियां अपने संस्कार पूरे परिवार में बिखेरती हैं और यही भाव उन्होंने कविता के माध्यम से पिरोया है।

 

ओमप्रकाश जी ने बताया कि विदा होती बेटियां पुस्तक को अमेजन पर उपलब्ध कराया गया था और सभी प्रतियां बिक चुकी हैं। देश के प्रतिष्ठित कवियों ने उनकी रचना पर आशीर्वाद दिया है और इसका दूसरा संस्करण भी जारी हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के जरिए वे समाज को संदेश देना चाहते हैं कि बेटियों को हर घर में प्यार और स्नेह मिले। वर्तमान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा सहित कई राज्यों में बेटियों के नाम पर विभिन्न योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

Priyanshi Chaturvedi 20 January 2026

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