Patrakar Priyanshi Chaturvedi
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए अमर्यादित बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों ने मध्य प्रदेश सरकार को दुविधा में डाल दिया है। एक ओर आदिवासी वोट बैंक की राजनीतिक अहमियत है, तो दूसरी ओर न्यायपालिका के स्पष्ट निर्देश। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार विधि विभाग और महाधिवक्ता से कानूनी राय लेने की तैयारी कर रही है, वहीं मंत्री विजय शाह भी रिव्यू याचिका दायर करने की संभावना तलाश रहे हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए और बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने अगस्त 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर अभियोजन पर फैसला लेने को कहा है। साथ ही मंत्री के अन्य विवादित बयानों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी पहले ही मंत्री को फटकार लगा चुकी है और सार्वजनिक माफी भी दिलाई जा चुकी है, लेकिन कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने पर सरकार के लिए मंत्री को पद पर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
राजनीतिक दृष्टि से आदिवासी वोट बैंक भाजपा के लिए बेहद अहम माना जाता है। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लिए 47 विधानसभा और चार लोकसभा सीटें आरक्षित हैं। 2018 में आदिवासी मतों के खिसकने से भाजपा सत्ता से बाहर हो गई थी, जबकि 2023 में इसी वर्ग के समर्थन से पार्टी ने वापसी की। ऐसे में कांग्रेस के नए सामाजिक एजेंडे के बीच विजय शाह पर कार्रवाई को लेकर सत्ता और संगठन दोनों ही असमंजस में हैं। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी सरकार के लिए संभव नहीं है और कार्रवाई टालने पर अवमानना की स्थिति बन सकती है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved © 2026 Dakhal News.
Created By:
Medha Innovation & Development |