Patrakar Priyanshi Chaturvedi
तमिलनाडु विधानसभा सत्र की शुरुआत एक बार फिर राज्यपाल आर.एन. रवि और स्टालिन सरकार के टकराव की वजह बन गई। परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण से सत्र शुरू होना था, लेकिन आर.एन. रवि बिना भाषण पढ़े सदन छोड़कर चले गए। बाद में राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल को उम्मीद थी कि सत्र की शुरुआत के बाद राष्ट्रगान बजेगा, लेकिन उसकी जगह तमिल मातृ दिवस का गीत बजाया गया, जिससे वे नाराज हो गए। राजभवन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की रिपोर्ट में गलत जानकारियां थीं और राज्यपाल का माइक्रोफोन बार-बार बंद किया गया।
राष्ट्रगान को लेकर देशभर की विधानसभाओं में अलग-अलग परंपराएं रही हैं। संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान राष्ट्रगान बजाने का एक तय प्रोटोकॉल है, लेकिन राज्यों की विधानसभाएं अपने रिवाजों के अनुसार इसका पालन करती हैं। कई राज्यों में लंबे समय तक राष्ट्रगान नहीं बजाया गया, जबकि कुछ जगहों पर इसे सत्र के अंत में बजाने की परंपरा रही है। संविधान के अनुच्छेद 51(A) के तहत नागरिकों का कर्तव्य है कि वे राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें, लेकिन इसे बजाने के लिए कोई अनिवार्य संवैधानिक आदेश नहीं है।
तमिलनाडु सरकार ने राज्यपाल की नाराजगी पर सफाई देते हुए कहा कि विधानसभा में भाषण की शुरुआत में ‘तमिल थाई वज़्थु’ और अंत में राष्ट्रगान बजाने की परंपरा दशकों से चली आ रही है। यह व्यवस्था 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता के कार्यकाल में तय की गई थी। सरकार का कहना है कि वह स्थापित प्रोटोकॉल का ही पालन कर रही है। इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर कोई सख्त कानूनी बाध्यता नहीं है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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