Patrakar Priyanshi Chaturvedi
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में अपने आदेश की आलोचना को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि कुत्तों को भोजन कराने वालों की जिम्मेदारी तय करने संबंधी टिप्पणी व्यंग्यात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह गंभीर थी। हालांकि, कोर्ट ने उदारता दिखाते हुए मेनका गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं करने का फैसला किया। पीठ ने कहा कि जन सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मेनका गांधी से सवाल किया कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने बजटीय आवंटन दिलाने में क्या योगदान दिया है। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि एक पूर्व मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता होने के नाते उनसे ठोस पहल की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर जब कार्यवाही का सीधा प्रसारण होता है।
मेनका गांधी की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन और प्रशांत भूषण ने समाधान के तौर पर एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) नियमों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नसबंदी कार्यक्रम से आवारा कुत्तों की संख्या और आक्रामकता में कमी आती है, लेकिन इसे पारदर्शी और जवाबदेह बनाना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समस्या का स्थायी समाधान केवल आश्रय स्थलों में नहीं, बल्कि मौजूदा नीतियों के प्रभावी अमल में निहित है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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