Patrakar Priyanshi Chaturvedi
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कोर्ट में लंबित मामलों पर की जाने वाली बाहरी टिप्पणियों और नैरेटिव निर्माण पर चिंता जताते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान जज की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और इससे अनावश्यक विवाद खड़े होते हैं। CJI ने साफ कहा— “सोचना भी नहीं, कोई मुझे डरा-धमका सकता है।” यह टिप्पणी उन्होंने पूर्व सांसद प्रज्जवल रेवन्ना की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें रेवन्ना ने अपने खिलाफ चल रहे रेप केस के ट्रायल को दूसरी जगह ट्रांसफर करने की मांग की थी। माना जा रहा है कि CJI की यह प्रतिक्रिया हाल ही में पूर्व जजों और वकीलों के उस ओपन लेटर से जुड़ी है, जिसमें रोहिंग्या मुद्दे पर उनके बयान पर आपत्ति जताई गई थी।
रेवन्ना की ओर से पेश वकीलों सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि ट्रायल के दौरान जजों द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं और उन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने इन्हीं टिप्पणियों के आधार पर ट्रायल ट्रांसफर की मांग की। हालांकि, CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि न्यायिक टिप्पणियों को पक्षपात का आधार नहीं माना जा सकता। बेंच ने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण नहीं लगता कि जज पुराने मामलों के आधार पर प्रभावित होंगे या वर्तमान केस में सबूतों से अलग निष्कर्ष निकालेंगे।
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