Patrakar Priyanshi Chaturvedi
इंडिगो संकट गहराने के बाद अब मामला केंद्र सरकार और DGCA की गहन जांच के दायरे में आ गया है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने साफ कहा कि यह फेलियर मामूली गलती नहीं लगता, बल्कि इसमें जानबूझकर की गई लापरवाही के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार यह जांच कर रही है कि ऑपरेशंस जारी होने के बावजूद हालात बिगड़े क्यों। यात्रियों को हुई भारी परेशानी के लिए मंत्री ने माफी भी मांगी और कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। CEO को हटाए जाने के सवाल पर नायडू ने कहा—जरूरत पड़ी तो कार्रवाई तय है।
DGCA की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इंडिगो ने अपनी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक उड़ानें शेड्यूल कर लीं। कंपनी ने 403 विमान दिखाकर 6% ज्यादा विंटर स्लॉट ले लिए, जबकि अक्टूबर–नवंबर में उसके औसतन 340 विमान ही उड़ान भर सके। इससे सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा और बड़े पैमाने पर फ्लाइट रद्द करनी पड़ीं। स्थिति गंभीर होते ही सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इंडिगो की उड़ानों में 10% कटौती का आदेश दिया है। इससे रोजाना चलने वाली 2300 में से करीब 230 उड़ानें अब कम होंगी। Meanwhile, पिछले 8 दिनों में करीब 5,000 फ्लाइटें रद्द हो चुकी हैं और मामले की सुनवाई आज दिल्ली हाईकोर्ट में होनी है।
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