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भोपाल । आत्मीय संवाद और संवेदनशील व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित आठ दिवसीय प्रेम पूर्वक आत्मीय संवाद कार्यशाला का शुभारंभ शनिवार को दीप प्रज्जवलित कर किया। उद्घाटन सत्र में पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश अर्गल, निदेशक सत्यप्रकाश आर्य और प्रवोधक डॉ. श्याम कुमार की गरिमामय उपस्थिति रही।
पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्गल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि संवाद की असली शक्ति संवेदनशीलता, धैर्य और समझ में छिपी होती है। उन्होंने कहा कि जब हम शब्दों के साथ-साथ उनके पीछे छिपे भावों को समझते हैं, तभी संवाद प्रभावी बन पाता है। अर्गल ने प्रतिभागियों से जीवन प्रसंग साझा करवाते हुए बताया कि खुला और आत्मीय संवाद रिश्तों को मजबूत करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।
भाव–विचार की पवित्रता ही व्यवहार को सुंदर बनाती है
कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए निदेशक सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि व्यक्ति का व्यवहार उसके आंतरिक भावों और विचारों की अभिव्यक्ति होती है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ते तनाव और दूरी का मूल कारण अक्सर दूसरों के व्यवहार को दोष देना है, जबकि समाधान अपने भावों को प्रेम, सहानुभूति और समझ के साथ देखने में है। आर्य ने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को आत्म-जुड़ाव, संवाद कुशलता और आत्मीय व्यवहार की दिशा में सशक्त बनाएगी।
कौशल अभ्यास से ही निखरते हैं
कार्यशाला का संचालन करते हुए डॉ. श्याम कुमार ने कहा कि अध्ययन और अभ्यास दोनों जीवन कौशल के दो पंख हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तैराकी की पुस्तकें पढ़कर कोई तैरना नहीं सीख सकता, उसके लिए पानी में उतरकर अभ्यास करना ही पड़ता है। उसी प्रकार संवाद कौशल भी निरंतर अभ्यास से ही विकसित होते हैं।
70 प्रतिभागियों के साथ 8 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू
29 नवंबर से 6 दिसंबर तक चलने वाले इस आवासीय प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से 70 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। इसमें मास्टर ट्रेनर और जिले के सक्रिय आनंदक इस विशेष कार्यशाला का हिस्सा बन रहे हैं।
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