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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ शिखरवार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा कि जापानी प्रौद्योगिकी और भारतीय प्रतिभा एक विजयी संयोजन है। दोनों देशों ने आज अगले दशक के लिए एक कार्ययोजना बनाई है। साथ ही अपनी विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी में एक नए और सुनहरे अध्याय की मजबूत नींव रखी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उनकी प्रधानमंत्री इशिबा के साथ चर्चा उत्पादक और उद्देश्यपूर्ण रही। हमने अपनी विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी में एक नए और सुनहरे अध्याय की मजबूत नींव रखी है। हमने अगले दशक के लिए एक कार्ययोजना बनाई है। उन्होंने कहा कि हमारे दृष्टिकोण के केंद्र में निवेश, नवोन्मेष, आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, आवागमन, जन-से-जन संवाद और राज्य-प्रान्त साझेदारी है। हम टिकाऊ ईंधन पहल और बैटरी आपूर्ति शृंखला साझेदारी भी शुरू कर रहे हैं। हम आर्थिक सुरक्षा सहयोग पहल आरंभ कर रहे हैं। इसके तहत, महत्त्वपूर्ण और सामरिक क्षेत्रों में एक व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग हम दोनों की प्राथमिकता है। इस संदर्भ में डिजिटल साझेदारी 2.0 और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग पहल ली जा रही है। सेमीकंडक्टर और दुर्लभ खनिज हमारे कार्यसूची में सबसे ऊपर रहेंगे। उन्होंने कहा कि जहां हम उच्च गति रेल पर काम कर रहे हैं, वहीं अगली पीढ़ी आवागमन साझेदारी के अंतर्गत बंदरगाह, विमानन और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से प्रगति करेंगे। हमने निर्णय किया है कि रक्षा उद्योग और नवोन्मेष के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और सशक्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और नियम-आधारित हिन्द-प्रशांत के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। आतंकवाद और साइबर सुरक्षा को लेकर हमारी चिंताएं समान हैं। रक्षा और समुद्री सुरक्षा से हमारे साझे हित जुड़े हुए हैं। मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी आपसी विश्वास पर आधारित है। हम सब मिलकर अपने लोगों और विश्व के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि का साझा सपना लेकर चलते हैं।
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