Patrakar Priyanshi Chaturvedi
युसूफ खान कैसे बने दिलीप कुमार:
बॉलीवुड में ट्रेजडी किंग के नाम से फेमस दिलीप कुमार आज हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी फिल्में आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। आज (11 दिसंबर) को उनकी 100वीं बर्थ एनिवर्सरी हैं | दिलीप कुमार सिर्फ अभिनेता ही नहीं, एक युग थे | हिंदी सिनेमा के एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने पुरे फिल्म इंडस्ट्री का चेहरा ही बदल दिया | आज वे हमारे बीच में नहीं है लेकिन आज भो उनके चाहने वालों की कमी नहीं है | दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर, 1922 को ब्रिटिश इंडिया के पेशावर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। दिलीप साहब के पिता लाला गुलाम सरवर खान और माता आयशा बेगम ने अपने बेटे का नाम यूसुफ खान रखा था | 1944 में फिल्म 'ज्वार भाटा' रिलीज हुई थी। इस फिल्म के जरिए इंडियन सिनेमा की पहली स्टार एक्ट्रेस देविका रानी ने यूसुफ खान को दिलीप कुमार के नाम से पेश किया।दिलीप कुमार ने नाम बदलने का किस्सा अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘Dilip Kumar : The Substance and the Shadow’ में लिखा है। जिसमें उन्होंने बताया की 1944 में जब उनकी फिल्म 'ज्वार भाटा' रिलीज हुई थी। इस फिल्म के जरिए इंडियन सिनेमा की पहली स्टार एक्ट्रेस देविका रानी ने यूसुफ खान को दिलीप कुमार के नाम से पेश किया। दिलीप साहब ने बताया की देविका ने कहा की उन्हें एक ऐसा नाम देना चाहिए जो कि स्क्रीन पर दिखने वाली आपकी रोमांटिक छवि के हिसाब से होगा। और दिलीप कुमार को उनका ये आइडिया पसंद आया और उन्होंने हामी भर दी। उन्होंने दिलीप कुमार नाम से फिल्मी करियर की शुरुआत करने का फैसला किया और अपनी बेमिसाल अदाकारी की बदौलत देखते ही देखते ही दुनिया भर में मशहूर हो गए। कहा जाता है कि दिलीप कुमार को पिटाई के डर से नाम बदलना पड़ा था। इस बात का खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में खुद ही किया था। उन्होंने कहा- मेरे वालिद फिल्मों के सख्त खिलाफ थे। उनके एक बहुत अच्छे दोस्त थे, जिनका नाम लाला बंसी नाथ था। इनके बटे फिल्मों में एक्टिंग करते थे। मेरे वालिद अक्सर उनसे शिकायत करते थे कि ये तुमने क्या कर रखा है। तुम्हारा नौजवान और इतना सेहतमंद लड़का देखो क्या काम करता है। दिलीप कुमार ने बताया- मैं जब फिल्मों में आया तो मुझे बहुत खौफ हुआ कि जब उन्हें मालूम होगा, तो वह बहुत नाराज होंगे। मेरी पिटाई भी कर सकते हैं। उस समय मेरे सामने तीन नाम रखे गए। युसूफ खान, दिलीप कुमार और बासुदेव। मैंने कहा कि यूसुफ खान मत रखिए, बाकी जो आपके दिल में आए वो नाम रख दीजिए।
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