पूर्व CM गोविंद नारायण सिंह का जमीन सौदा संदिग्ध, हाईकोर्ट बोला– अपंजीकृत सेल डीड से नहीं मिलता मालिकाना हक
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह द्वारा अपने बेटे को बेची गई सतना जिले की 11.57 एकड़ जमीन के स्वामित्व को संदेहास्पद करार दिया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि अपंजीकृत और अपर्याप्त स्टाम्प पर बनी सेल डीड के आधार पर न तो जमीन का मालिकाना हक मिलता है और न ही अस्थायी निषेधाज्ञा दी जा सकती है। कोर्ट ने अधीनस्थ अपीलीय अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों की याचिका खारिज कर दी।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि वर्ष 1992 में शिव बहादुर सिंह ने अपने पिता गोविंद नारायण सिंह से अपंजीकृत सेल डीड के जरिए यह भूमि खरीदी थी और तब से उनके कब्जे में है। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने फरवरी 2025 में अस्थायी निषेधाज्ञा दी थी। हालांकि जिला अदालत ने इस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवादित जमीन के मूल मालिक सेठ मनोहर लाल थे और कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर यह सौदा किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि ऐसे दस्तावेज कानूनन स्वामित्व सिद्ध नहीं करते। इसलिए ट्रायल कोर्ट की रोक हटाने का जिला अदालत का फैसला सही है और पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों को किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।