Patrakar Priyanshi Chaturvedi
4 से 6 महीने रहता था रास्ता बंद
कहते है मन में लगन हो तो पहाड़ को भी चीर कर रास्ता बनाया जा सकता है कुछ इसी तरह का काम छतरपुर के ग्रामीणों ने कर डाला चार से छह महीने से नाले पर पानी रहने की वजह से रास्ता बंद रहता था जिसके कारण छात्र छात्राओं को स्कूल जाने में दिक्कत होती थी जिसके बाद ग्रामीणों इस नाले पर अस्थायी कच्चे पुल का निर्माण कर दियाराजनगर तहसील के गुडपारा गांव मे स्कूल जाने के लिये छात्र छात्राओ को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ता था बरसात के समय नाले मे पानी आ जाने की वजह से पारवा गांव घूमकर 15 किलोमीटर दूर स्कूल जाना पडता था बच्चो की इस परेशानी को गांव वालो ने देखा और फिर इस नाले पर पुल बनाने की ठानी फिर क्या था ग्रामीणों की दस सदस्यीय टीम ने बांस काटकर रस्सी के सहारे नाले पर अस्थाई कच्चे पुल का निमार्ण कर दिया अब इस नाले पर पुल बनने से स्कूल के छात्र छात्राएं केवल डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल जाते है गांव वालो का कहना है कि उन्होंने नाले पर स्टापडेम बनाने के लिये नेताओं और अधिकारियों को अपनी समस्या के बारे मे बताया लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नही किया.
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