सरदार सरोवर समझौते पर सियासी घमासान, सरकार ने बचत का दावा किया तो कांग्रेस ने उठाए सवाल
सरदार सरोवर परियोजना को लेकर हुए अंतरराज्यीय समझौते पर मध्य प्रदेश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्य सरकार का दावा है कि समझौते के तहत गुजरात को देय राशि 1,500 करोड़ रुपये से घटकर 231.80 करोड़ रुपये रह गई, जिससे प्रदेश के 1,268 करोड़ रुपये की बचत हुई है। हालांकि, कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान मंत्री चेतन्य कश्यप ने देय राशि 217 करोड़ रुपये बताई, जबकि बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे 231.80 करोड़ रुपये बताया। दोनों आंकड़ों में अंतर आने से भ्रम की स्थिति भी बनी।
वहीं, कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरदार सरोवर परियोजना में सबसे अधिक जमीन और विस्थापन का नुकसान मध्य प्रदेश ने झेला, फिर भी सरकार गुजरात के पक्ष में झुक गई। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि समझौते से प्रदेश को 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली और 31 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लाभ मिलता रहेगा। उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील की।