Patrakar Priyanshi Chaturvedi
Madhya Pradesh में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।Kanha Tiger Reserve में एक ही बाघिन के तीन शावकों की छह दिनों के भीतर मौत हो गई, जिससे विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों में चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक जांच में कुछ मामलों में भुखमरी को कारण बताया गया है, जबकि अन्य की विस्तृत जांच जारी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल के बीच प्रदेश में 23 बाघों की मौत दर्ज की गई है। इनमें टेरिटोरियल संघर्ष, बीमारी और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतें शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में भी यह आंकड़ा लगातार बढ़ता दिख रहा है, जिससे वन विभाग की निगरानी और प्रबंधन प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
भारत में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य होने के बावजूदMadhya Pradesh अब संरक्षण चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह मौतों का सिलसिला जारी रहा तो ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान कमजोर पड़ सकती है। वन विभाग ने सभी मामलों की जांच और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के पालन की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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