Patrakar Priyanshi Chaturvedi
केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 26.60 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय निर्णायक भूमिका निभा सकता है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे जिलों में इनका खास प्रभाव है। इसके अलावा करीब 18.40 प्रतिशत ईसाई वोटर मध्य केरल के कोट्टायम, इडुक्की और एर्नाकुलम में सियासी समीकरण तय कर सकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल हर समुदाय को लुभाने के लिए विभिन्न वादे और रणनीतियाँ अपनाए हुए हैं।
बीजेपी इस बार ईसाई समुदाय पर फोकस कर रही है और लव जिहाद व भूमि विवाद जैसे मुद्दों के जरिए मुस्लिम-ईसाई समीकरण में दरार डालने का प्रयास कर रही है। वहीं एलडीएफ, सीएम Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में मुस्लिम वोट बैंक पर मजबूती से पकड़ बनाए हुए है। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध ने मुस्लिम वोटरों को एलडीएफ के पक्ष में झुकाया है, जबकि कांग्रेस (मणि) के नेतृत्व वाला यूडीएफ परंपरागत तौर पर मुस्लिम और ईसाई वोट बैंक का दावेदार माना जाता है।
चुनाव के दिन सबसे बड़ा फैक्टर ‘साइलेंट वोट’ होगा। कई अल्पसंख्यक वोटर खुलकर अपना रुख नहीं दिखा रहे हैं, और यही वोट तय करेगा कि केरल की सत्ता किस गठबंधन के हाथों में जाएगी। कांग्रेस और एलडीएफ दोनों ही मुस्लिम और ईसाई वोटरों को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ अपनाए हुए हैं, जिससे राज्य की राजनीति इस बार पहले से ज्यादा जटिल और रोमांचक बनी हुई है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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