Patrakar Priyanshi Chaturvedi
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है जब मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा तत्काल प्रभाव से रोक दिया। ये वही स्कूल हैं जिन्हें उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद प्रमाणपत्र दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच कुल 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा मिला। पहला प्रमाणपत्र 28 जनवरी को दोपहर 3:09 बजे जारी हुआ, वही दिन था जब अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई। वर्तमान में विभाग उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री Sunetra Pawar के नियंत्रण में है। उन्होंने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए और कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवधि में जारी सभी प्रमाणपत्रों, स्वीकृतियों और अनुदानों पर अस्थायी रोक लगाई है। जांच में यह देखा जाएगा कि प्रमाणपत्र किस प्रक्रिया के तहत दिए गए, नियमों का पालन हुआ या नहीं और किसी प्रतिबंध को औपचारिक रूप से हटाया गया या नहीं। विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है; Rohit Pawar ने जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की, जबकि राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष Pyare Khan ने सीआईडी जांच की मांग की। उनके अनुसार 95% स्कूल फर्जी पाए गए और इसमें 6-7 हजार लोगों की संलिप्तता सामने आई, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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