बिलासपुर हाईकोर्ट ने लंबी सेवा के आधार पर नियमितीकरण याचिका खारिज की
Bilaspur High Court dismisses regularization petition,grounds,long service

बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा कि अस्थायी या गेस्ट कर्मचारियों को सिर्फ लंबी सेवा के आधार पर स्थायी होने का कोई अधिकार नहीं है। यह आदेश एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के अस्थायी पोस्ट ग्रेजुएट (पीजीटी) शिक्षकों की नियमितीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता लागू भर्ती नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो केंद्र और राज्य सरकार उनके मामलों पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

 

याचिकाकर्ता सरोज कुमार गुप्ता, अनूप तिर्की सहित अन्य को 2016 से 2022 तक गेस्ट टीचर के रूप में नियुक्त किया गया था। उनके पास संबंधित विषय में पीजी और बीएड डिग्री है और कई छह वर्ष से अधिक समय तक संस्थान में कार्यरत रहे हैं। जस्टिस ए.के. प्रसाद की बेंच ने स्पष्ट किया कि उनकी नियुक्ति अस्थायी थी और किसी नियमित भर्ती नियम के तहत नहीं हुई, इसलिए उन्हें स्थायी बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

 

कोर्ट ने न्यायहित में यह निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकार उन कर्मचारियों के अनुभव को लागू भर्ती नियमों और नीतियों के तहत उचित वेटेज या प्राथमिकता देने के लिए विचार कर सकते हैं। केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार, नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स राज्यों के लिए शिक्षक भर्ती का काम स्वतंत्र एजेंसी को सौंप सकती है, लेकिन क्लॉज 9.3(ई) और (एफ) के तहत टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती की जिम्मेदारी राज्य शासन पर है। विज्ञापन में पहले से कार्यरत पीजीटी शिक्षकों का कोई उल्लेख नहीं था।

Priyanshi Chaturvedi 17 February 2026

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