सड़क के बीच बिछी नर्मदा लाइन, एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना चुनौतीपूर्ण
इंदौर में छह किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना पर काम किया जा रहा है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। दरअसल, करीब 15 साल पहले बने बीआरटीएस कॉरिडोर के दौरान नर्मदा लाइन सड़क के बीचोंबीच डाली गई थी। इसके अलावा लगभग हर चौराहे पर सीवरेज की बड़ी पाइपलाइन क्रॉस होती है। ऐसे में यदि एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाता है तो कई जगह इन लाइनों को शिफ्ट करना पड़ेगा, जिससे परियोजना में लंबा समय लग सकता है।
पहले भी बीआरटीएस निर्माण के दौरान ऐसी ही दिक्कतें सामने आई थीं। हालांकि उसकी समयसीमा दो साल तय की गई थी, लेकिन भारी ट्रैफिक दबाव और सीमित डायवर्जन के कारण उसे पूरा होने में पांच साल से ज्यादा समय लग गया। यही समस्या एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में भी आने की आशंका है। खासकर गीता भवन से जीपीओ के बीच जमीन पथरीली होने के कारण कॉलम निर्माण के लिए गहरी खुदाई करनी पड़ेगी, जिससे काम और जटिल हो जाएगा।
वहीं, शहर में रिंग रोड के लगातार बेहतर होते नेटवर्क के चलते एबी रोड पर लंबी दूरी के ट्रैफिक का दबाव पहले ही कम होने लगा है। खजराना, बंगाली, वर्ल्ड कप और पालदा चौराहों पर बने ब्रिज और मुसाखेड़ी व आईटी चौराहे पर निर्माणाधीन पुलों से रिंग रोड और ज्यादा सुगम होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर याचिकाकर्ता अतुल शेठ का कहना है कि रिंग रोड के कारण एबी रोड पर ट्रैफिक अपने आप कम हो जाएगा, ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर की उपयोगिता सीमित रह सकती है।