Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गुरुवार को बहस उस वक्त और तेज हो गई, जब चुनाव आयोग ने अमेरिका और वेनेजुएला से जुड़े उदाहरणों का जिक्र किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अमेरिकी अदालतों के फैसलों का हवाला दिए जाने पर चुनाव आयोग ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका खुद कई मामलों में कानून की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करता। आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का उदाहरण दिया।
राकेश द्विवेदी ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का अधिकार है और इसकी प्रक्रिया तय करने का अधिकार भी आयोग के पास ही है। उन्होंने बताया कि पिछले SIR के बाद नागरिकता कानून में संशोधन हुआ है, जिसके तहत अब मतदाता बनने के लिए दोनों माता-पिता का भारतीय होना अनिवार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप किसी विदेशी राष्ट्रपति को मुकदमे के लिए चुन सकते हैं या ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कर सकते हैं, तो वहां कानून की उचित प्रक्रिया कहां है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें विभिन्न राज्यों में SIR कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। पिछले साल आयोग ने बिहार में SIR कराने का निर्देश दिया था, जिसे एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW) सहित कई संगठनों ने अदालत में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक न मिलने के बाद आयोग ने बिहार में प्रक्रिया जारी रखी और बाद में पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी SIR का विस्तार किया, जिसके खिलाफ नई याचिकाएं दायर की गईं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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