Patrakar Priyanshi Chaturvedi
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और यूरोपीय संघ (EU) तेजी से रणनीतिक साझेदार बनते जा रहे हैं। दोनों के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर है। दावोस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया कि EU और भारत ऐतिहासिक ट्रेड डील के बेहद करीब हैं। अगर यह समझौता होता है, तो यह दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक साझेदारियों में से एक होगा, जिससे करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार जुड़ेगा।
इस डील के तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे के उत्पादों पर टैक्स और व्यापारिक बाधाएं कम करेंगे, जिससे निर्यात-आयात को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि कृषि उत्पादों का व्यापार, EU के सख्त पर्यावरण नियम और कार्बन टैक्स (CBAM), साथ ही पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे कुछ मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। इन अटके मसलों पर राजनीतिक स्तर पर फैसला लिया जाना जरूरी माना जा रहा है।
EU के शीर्ष नेता 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर आएंगे, जहां 16वां EU-भारत शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इसी दौरान डील पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। खास बात यह है कि EU प्रतिनिधिमंडल भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होगा। यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा और लोगों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में भी भारत-EU रिश्तों को नई मजबूती दे सकती है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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