Patrakar Priyanshi Chaturvedi
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश को खेलने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। यह याचिका एक लॉ स्टूडेंट की ओर से दायर की गई थी, जिसमें बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ कथित अत्याचारों का हवाला दिया गया था। याचिकाकर्ता ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से यह भी अनुरोध किया था कि मानवाधिकार उल्लंघन न होने की पुष्टि के बाद ही बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने दिया जाए।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिका के औचित्य पर सवाल उठाते हुए इसे अनुचित करार दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा कि यह किस तरह की जनहित याचिका है और इसका उद्देश्य क्या है। कोर्ट ने कहा कि खेल आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े मामलों में इस तरह की याचिकाएं न्यायिक दायरे से बाहर हैं।
हाई कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं दायर कर अदालत का कीमती समय बर्बाद किया जा रहा है। पीठ ने याचिकाकर्ता को रचनात्मक और सार्थक मुद्दों पर काम करने की सलाह दी और चेतावनी दी कि यदि याचिका पर जोर दिया गया तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद याचिका पर आगे सुनवाई नहीं हुई।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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