Patrakar Priyanshi Chaturvedi
दिल्ली का ऐतिहासिक तीन मूर्ति भवन, जो आज प्राइम मिनिस्टर्स म्यूजियम के नाम से जाना जाता है, कभी स्थायी प्रधानमंत्री आवास बनने की कगार पर था। यह इच्छा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की थी, जिन्होंने अपने पिता और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ इस भवन में करीब 16 साल बिताए थे। 1966 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा गांधी चाहती थीं कि तीन मूर्ति भवन को हमेशा के लिए प्रधानमंत्री आवास घोषित कर दिया जाए और उन्होंने इस विचार पर अमल करने की कोशिश भी की।
इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए इंदिरा गांधी ने तब विपक्ष में बैठे अटल बिहारी वाजपेयी से समर्थन का पत्र लिखने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्र लिखने से इनकार कर दिया और साफ कहा कि प्रधानमंत्री होते हुए यह निर्णय लेने के लिए इंदिरा गांधी स्वयं सक्षम हैं। अटल के इस रुख के बाद इंदिरा गांधी ने तीन मूर्ति भवन को अपना आवास बनाने का इरादा छोड़ दिया।
नेहरू के निधन के बाद वर्षों तक यह परिसर नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के रूप में संचालित होता रहा। साल 2022 में नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे सभी प्रधानमंत्रियों को समर्पित प्राइम मिनिस्टर्स म्यूजियम में बदल दिया, जिस पर कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने इसे नेहरू की विरासत को कमतर करने का प्रयास बताया, जबकि सरकार का तर्क रहा कि यह स्थान अब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को दर्शाने वाला राष्ट्रीय संग्रहालय है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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