Patrakar Priyanshi Chaturvedi
अनूपपुर । जिला कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अध्यक्ष गुड्डू चौहान के बनते ही कांग्रेस की गुटबाजी सड़क पर आ गई। सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के कार्यक्रम में गुटबाजी का आलम यह रहा कि कांग्रेस जिला जिलाध्यक्ष ने समंवयक समिति की बैठक बिना पुष्पराजगढ़ विधायक से मिलकर कार्यक्रम अपने हिसाब से बनाकर तय कर किरकिरी करा दी। वहीं जिला मुख्यालय अनूपपुर में कांग्रेस के पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश सिंह, पूर्व विधायक सुनील सर्राफ एवं अशीष त्रिपाठी के नेतत्वक में आयोजित स्वाषगत समारोह की भीड़ देख नेता प्रतिपक्ष गदगद हो गये। कांग्रेस के सत्ता् के बाहर जाते ही जिले का बड़ा नेता बनने की होड में पूरी कांग्रेस को गर्त में डाला गया। जिसका नतीजा यह रहा हैं जीती हुई सीट को गंवाना पड़ा।
अनूपपुर जिले मे कांग्रेस का पतन वर्ष 2020-21 में अमरकंटक में आयोजित नर्मदा महोत्समव से शुरू हो गया था जब मंच में कमलनाथ और दिग्वि जय सिंह के सामने कॉंग्रेस के कद्दावर आदिवसी नेता व विधायाक बिसाहू लाल सिंह की उपेक्षा कर पुष्पराजगढ़ विधायक ने धक्काप मुक्कीक कर अपमानित किया। इस अपमान का घूट पी कर पार्टी हाई कमान से कार्यवाही की प्रतीक्षा की किन्तुक कार्यवाही न होने से नराज विधायाक बिसाहू लाल सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया और कांग्रेस को भारी अंतर से शिकस्तप दी। इसके बाद भी पार्टी से कांग्रेस तोड़ने वाले विधायक को जिला अध्यलक्ष बना कर आग में घी डालने का काम किया। जिला अध्येक्ष बने पुष्पराजगढ़ विधायक ने अपने कार्यकाल में पार्टी को निचले स्तार पर लाकर खढ़ा कर दिया। पुष्पराजगढ़ विधायक जिला अध्यवक्ष जिम्मेदारी छोड़ सिर्फ पुष्पराजगढ़ विधायक की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।इससे कांग्रेस के कार्यकर्ता निराश और मायूस हो गये और कटते चले गये।
जिसका फायदा भाजपा ने उठाते हुए अपनी पैठ बना ली।
गुटबाजी से कमजोर होती कांग्रेस
जिला कांग्रेस में दशकों से चली आ रही गुटबाजी खत्म करने प्रदेश नेतृत्व ने विधायक फुंदेलाल सिंह के बाद प्रशासनिक अधिकारी रहें रमेश सिंह को जिला अध्यक्ष बनाकर संगठन को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी सौपी। लेकिन इन्हेंन भी जिले के विधायक और जी20 के नेताओं से आपेक्षित सहयोग नहीं मिला। जिसमें कोतमा के पूर्व विधायक और आज के जिला कांग्रेस अध्यक्ष शामिल रहें। इस दौरान ही कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतविधियों के कारण इन दोनों सहित करीब 10 नेताओं को बाहर का रास्तास दिखाया गया। जिन्हेंर आज तक वापस नहीं लिया गया और दो बार के निष्कासित नेता श्याम गुड्डू चौहान को आज अध्यक्ष की कमान सौंपी दी गई। रमेश सिंह अपने कार्यकाल में जिला पंचायत में भाजपा को मात देते हुए कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर पहली सफलता हासिल की। इसके बाइ भी कांग्रेस के अंदर गुटबाजी कम नहीं हुई।
एक ओर जिलाध्यक्ष गुड्डू चौहान और विधायक फुंदेलाल सिंह के गुट है, तो दूसरी ओर पूर्व अध्यक्ष रमेश सिंह और पूर्व विधायक सुनील सराफ हैं। अब यह देखने होगा कि गुटबाजी में उलझी कांग्रेस जनता के मुद्दों तक पहुंच पाती है या फिर चार दीवारों तक ही सिमटकर रह जाएगी।
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