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श्रावण माह के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर ओंकारेश्वर मंदिर में भव्य गुलाब उत्सव का आयोजन किया गया .... इस अवसर पर निकली बाबा ओंकारेश्वर की पालकी यात्रा में आस्था,भक्ति और उत्साह का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला.... भोलेनाथ की पालकी की शुरुआत वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा गगनभेदी मंत्रोच्चार के साथ हुई.... जहाँ 151 ढोलों की गूंज ने वातावरण को शिवमय कर दिया.... पालकी के आगे 21 घोड़े और ऊंट सजे-धजे चल रहे थे.... जिनके पीछे विभिन्न झांकियों और कलाकारों की टोली श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही थी....
इस यात्रा में कई झांकी शामिल थी जिसमें 12 हाथ ठेलों पर सजी द्वादशज्योतिर्लिंगों की दिव्य झाँकी, विशाल नंदी झाँकी,,,कमल के फूलों के बीच मगर पर सवार माँ नर्मदा की मनमोहक झांकी यात्रा में शामिल रही ..... और इस यात्रा में अघोरी वेशभूषा में कलाकारों का दमदार तांडव ,
कालबेलिया नृत्य,आदिवासी नृत्य किया ....तो वही यात्रा के साथ चल रही शिव भजन मंडलियों ने भजनों से पूरे नगर को शिवमय बना दिया.... और 3 प्रसिद्ध बैंड पार्टियों ने पारंपरिक धुनों से माहौल को और भक्ति कर दिया ..... इस पालकी यात्रा के मार्ग में 11 क्विंटल गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की गई..... जिससे वातावरण सुगंधित और रंगीन हो उठा ... सैकड़ों भगवा ध्वज चारों ओर लहरा रहे थे ..... जो भक्ति और गौरव का प्रतीक बने .. पालकी यात्रा के अंत में भव्य आतिशबाजी ने आसमान को भी शिव के रंगों में रंग दिया..बता दे की पालकी यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया..... बाबा ओंकारेश्वर की झलक पाने को श्रद्धालु रास्ते भर कतारों में खड़े रहे ....... आयोजन में मंदिर ट्रस्ट के सवारी प्रभारी आशीष दीक्षित और प्रशासन की भूमिका भी सराहनीय रही.........
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