Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अधिसूचना पारित की, जिसके कहा गया है कि हाई कोर्ट के अलावा राज्य की सभी अदालतों को ‘अधीनस्थ न्यायपालिका’ की जगह ‘जिला न्यायपालिका’ कहा जाएगा। साथ ही हाई कोर्ट के अलावा सभी अदालतों को अधीनस्थ न्यायालय की जगह ‘ट्रायल कोर्ट’ कहने का भी संकल्प पारित किया गया। गुरुवार को हुई पूर्ण कोर्ट की बैठक में मप्र हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमथ और जजों ने यह संकल्प पारित किया। फैसले को लागू करने का आदेश शुक्रवार को मप्र हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रामकुमार चौबे ने जारी किया।हाई कोर्ट का मानना है कि कोई भी कोर्ट, किसी भी कोर्ट के अधीन नहीं होती और न कोई निचली अदालत होती है। हाई कोर्ट में जिला कोर्ट और संबंधित जिले की कोर्ट के फैसलों पर रिव्यू पिटीशन, जमानत याचिका समेत अन्य आवेदनों में जिला कोर्ट को अधीनस्थ कोर्ट, निचली अदालत (अधीनस्थ न्यायालय) से संबोधित किया जाता था। हाई कोर्ट जजेस की फुल कोर्ट मीटिंग में लिए गए फैसले के बाद अब ऐसा नहीं होगा। मध्य प्रदेश ऐसा प्रस्ताव पारित करने वाला देश का दूसरा हाई कोर्ट है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने 2 अगस्त 2021 को ऐसा प्रस्ताव पास किया था। तब जस्टिस रवि मलिमथ हिमाचल हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे।मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ के अलावा इंदौर और ग्वालियर में दो खंडपीठ हैं। मप्र में 52 जिला न्यायालय हैं, जिनमें 1200 से अधिक सेशन कोर्ट हैं। करीब 1500 से अधिक मजिस्ट्रेट स्तर की कोर्ट हैं। सेशन कोर्ट और मजिस्ट्रेट स्तर की कोर्ट को सबऑर्डिनेट (अधीनस्थ ) कोर्ट कहा जाता था।
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