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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'नईदुनिया संसदीय सम्मान' 2017 समारोह में प्रदेश के श्रेष्ठ 10 विधायकों को सम्मानित किया गया।
विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि, राजनीति तोड़ती है, लेकिन नईदुनिया ने जोड़ दिया।
उन्होंने सम्मानित विधायकों को बधाई देते हुए कहा, यह हम सब का सम्मान है। मैं अभिनंदन करता हूं। अच्छे काम का सम्मान होना ही चाहिए।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा मैं बधाई देना चाहता हूं सम्मानित मित्रों को।जयंत मलैया जी खजाने को संभालने की कोशिश करते हैं लेकिन हम भावांतर जैसी योजना ले आते हैं तो एक झटके में 4 हजार करोड़ खजाने से निकल जाते हैं। लेकिन मैं आश्वस्त रहता हूं कि जयंत भाई के हाथ में प्रदेश का खजाना सुरक्षित है।हमारे सारे साथी गण बड़ी कुशलता से अपने कार्य को अंजाम देते हैं। डाॅ गोविंद सिंह जी जो सच होता है वही बोलते हैं, बाकी लोग तो सीआर खराब होने के डर से बोलते नहीं हैं।भाई यशपाल जी जब जरूरत पड़ती है तो हमेशा याद आते हैं। हमारी बहनें भी सम्मानित हुईं हैं। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है | राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन संजय जी (जागरण समूह के प्रधान संपादक) आपको धन्यवाद देना चाहूंगा कि आजकल हमारा मिलना-जुलना कम हो गया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि राजनीति तोड़ती है और नईदुनिया ने आज सबको जोड़ दिया। डॉक्टर साहब थोड़ा शरमा रहे थे कि गले लगें या नहीं, लेकिन आखिर गले लग ही गए।आजकल प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया अक्सर दिखाता रहता है कि माननीय ने ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया। माननीय शब्द एक व्यंग्य हो गया है।लेकिन यदि आप दिनचर्या देखें। सुबह से लेकर देर रात तक काम में व्यस्त रहते हैं।आज सुबह सात बजे टेलीफोन पर मैंने बात करना शुरू की। सुबह 10 बजे पहली मीटिंग की। उसके बाद 15-20 विधायक साथियों से चर्चा की। उसके बाद वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक, नर्मदा संघ की बैठक। वहां से निपटे तो पुलिस स्पोर्टस के कार्यक्रम में पहुंचे। उसके बाद खिलाडि़यों को पुरस्कृत करके आए। वहां से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में कुछ को सस्पेंड कर आए। और यहां आकर अब पुरस्कार दे रहे हैं। अभी रात में मैं एक मीटिंग करूंगा जिसमें फूलों की स्थिति पर बात करना है कि कितने आ रहे हैं, जा रहे हैं। गोपालन का काम भी देखना है।
ये मेरी कहानी नहीं है। हर विधायक की, सांसद की, निर्वाचित जनप्रतिनिधि की यही कहानी है। सुबह से लेकर देर रात तक वे व्यस्त रहते हैं। घनघोर परिश्रम करते हैं।
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