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देशभर में पद्मावती को लेकर विरोध प्रदर्शनजारी हैं और वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर दखल से इन्कार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज रोकने के लिए लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस खारिज कर दिया है। अदालत ने इसके साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा फिल्म को लेकर दिए बयानों पर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट में निर्माता की तरफ से कहा गया कि सेंसर बोर्ड के प्रमाणपत्र के बाद ही फिल्म रिलीज होगी।
अदालत ने कहा कि बिना फिल्म देखे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आखिर कैसे इसे लेकर बयान दे सकते हैं। अदालत ने सभी जिम्मेदार लोगों से कहा कि वो फिल्म को लेकर बयानबाजी बंद करे क्योंकि इससे सेंसर बोर्ड के दिमाग में पक्षपात पैदा होगा। जब तक मामला सेंसर बोर्ड के पास लंबित हो तब तक ऐसे मामलों में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
आपको बता दें कि वकील मनोहर लाल शर्मा ने फिल्म पद्मावती की रिलीज पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि करणी सेना और राजपूत समुदाय 'पद्मावती' पर बैन की मांग लगातार कर रहे हैं। कुछ सींस को लेकर उन्हें आपत्ति है।
राजपूत समुदाय के प्रतिनिधियों को लगता है कि उन दृश्यों की वजह से रानी पद्मावती की तौहीन हो जाएगी। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भंसाली ने कुछ पत्रकारों को भी फिल्म दिखायी थी, जिसके बाद उन्होंने फिल्म के पक्ष में अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
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