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सभी छोटे बड़े मसले पर तड़ाक तपाक टिप्पणी करने वाले अजीत अंजुम अपने इस्तीफे जैसे बड़े घटनाक्रम पर लंबी चुप्पी साध गए. उनकी कोशिश थी कि इंडिया टीवी से हटाए जाने की सूचना ज्यादा चर्चा में न आए क्योंकि इससे संपादक का मार्केट डाउन होता है, सो वह अपनी विदाई के मसले पर मुंह सिए रहे. पर अब उन्होंने धीरे से अपने एफबी एकाउंट में खुद को इंडिया टीवी का पूर्व मैनेजिंग एडिटर घोषित कर दिया है. इस तरह अजीत अंजुम के इंडिया टीवी से विदा होने को लेकर कायम सस्पेंस खत्म हो गया है और भड़ास पर प्रकाशित खबर सही साबित हुई.
सबसे अच्छी बात ये हुई है कि सभी टीवी संपादकों ने मिलकर अपने बेरोजगार साथी अजीत अंजुम को ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन का जनरल सेक्रेट्री बनाकर एक नया काम सौंप दिया है ताकि उनकी सक्रियता बनी रहे और वे बेरोजगारी जैसा कुछ फील न कर सकें. पर अजीत अंजुम प्रतिभाशाली पत्रकार हैं और ढेर सारे संबंधों-संपर्कों के धनी हैं, इसलिए वे बहुत दिन तक घर न बैठेंगे. जल्द ही वे नई पारी शुरू करने का धमाका कर सकते हैं. कुछ और नहीं तो स्टार वाले उदय शंकर ही कोई न कोई प्रोजेक्ट दे देंगे ताकि रोजी रोटी चलती रहे.
दरअसल न्यूज चैनल्स के बड़े लोगों यानि संपादकों / प्रबंधकों में आपस में खूब एकता होती है. ये एक दूसरे की जमकर तारीफ करते रहते हैं और एक दूसरे के बुरे वक्त में आड़ ढाल बनकर मदद करने को तैयार रहते हैं, हां इसके चलते मालिकों को भले ही ठीकठाक चून लग जाए. इनकी ये एकता एक तरह से हिंदी टीवी पत्रकारिता का दुर्भाग्य भी है जिसके चलते अच्छे भले प्रतिभावान पत्रकार कई बार इस संपादकों के रैकेट का कोपभाजन बन जाते हैं और अपने ठीकठाक करियर को बर्बाद कर बैठते हैं. जो लोग इस रैकेट को सलाम नमस्ते करते हुए 'यस सर यस सर' ठोंकते रहते हैं वह खूब तरक्की करते हैं. न्यूज चैनल्स के संपादकों पर 'तेरा आदमी मेरा आदमी' करने का गंभीर आरोप लगता रहा है लेकिन यही संपादक लोग पब्लिक डोमेन में किसी भी किस्म के डिसक्रिमिनेशन की मुखालफत करते पाए जाते हैं.[भड़ास फॉर मीडिया से साभार ]
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