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कांग्रेस नेता जीतू पटवारी की पत्रकार वार्ता को भोपाल के दो प्रमुख समाचार पत्रों में नहीं मिला स्थान। बताया जा रहा है मध्यप्रदेश सरकार के एक प्रमुख अधिकारी ने दो प्रमुख समाचार पत्रों को कहा था कि जीतू पटवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस न छापें और बाद में ऐसा ही हुआ।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य जीतू पटवारी पत्रकारों से बात कर रहे थे। वह उन आरोपों का खंडन कर रहे थे जिसमे कुछ आन्दोलनकारी किसान युवकों के बारे में कहा जारहा है कि उनके नाम पर एक इंच ज़मीन भी नहीं है तो फिर वह किसान कैसे हो सकते हैं। पटवारी ने स्पष्ट किया कि देश - प्रदेश में लाखों युवा ऐसे हैं जिनके नाम पर ज़मीन नहीं है, ज़मीन उनके पिता चाचा अथवा दादा - काका के नाम पर है, लेकिन यह बात सिर्फ किसान ही समझता है।
कांग्रेस नेता ने शिवराज के उपवास को भाजपा नेता - कार्यकर्ता सम्मलेन करार देते हुए कहा कि उस कार्यक्रम में भाजपा के लोगों का जमावड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिवराज जी का उपवास तुड़वाने के लिए जिस किसान के आने की बात कही गयी है, उसका जवान बेटा पुलिस की गोली से मारा गया है और उसकी अभी तेरवीं भी नहीं हुयी है। पटवारी ने सवाल किया कि कौन पिता तेरवीं से पहले मुख्यमंत्री का उपवास तुड़वाने आएगा ? उन्होंने आरोप लगाया कि उस किसान को विधायक - अधिकारी डरा - धमका कर भोपाल लाए थे।
इसके अलावा भी जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार पर बहुत गंभीर आरोप लगाए।
लेकिन पत्रकारिता का दुर्भाग्य देखिये अपने आपको पत्रकारिता का सूरमा समझने वाले राजधानी के दो प्रमुख समाचार पत्रों ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेता की इस पत्रकार वार्ता को अपने अखबार में ही स्थान नहीं दिया।
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