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गोरे हों या फिर काले देखो
सत्ता वालों के साले देखो ...
भरे पड़े '' गोदाम'' तुम्हारे
आंत में अन्न के लाले देखो ...
वोट हमारे और सूरज तुम
हमारी आँख में जाले देखो ...
सड़कों सी अब टूटी निंदिया
कितने सपने पाले देखो ...
जनता को आस झोपड़ी की
नेताजी के कई माले देखो ...
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