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महाराष्ट्र में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमले करने वालों की अब खैर नहीं है। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को पत्रकार सुरक्षा कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है। संभवत: महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है जहां की कैबिनेट ने पत्रकार सुरक्षा कानून पास किया है।
राज्य में पत्रकारों पर हमले की घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ दिनों पहले विधानसभा ने आश्वासन दिया था कि इससे जुड़ा विधेयक इसी सत्र में लाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि कैबिनेट में मसौदे को मंजूरी देने के बाद सरकार शुक्रवार को बजट सत्र के आखिरी दिन दोनों सदनों में पारित करा सकती है।
सरकार ने जो मसौदा तैयार किया है उसके मुताबिक पत्रकारों, मीडिया संस्थानों के साथ कांट्रैक्ट पर काम करने वाले पत्रकारों पर हमला करना गैरजमानती अपराध होगा। हमला करने वाले को इलाज का खर्च और मुआवजा भी अदा करना होगा।
मुआवजा न देने पर आरोपियों के खिलाफ दीवानी न्यायालय में मुकदमा चलाया जाएगा। वही, विधेयक में कानून का दुरुपयोग रोकने का भी प्रावधान है। यदि जांच में शिकायत झूठी पाई गई तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग 2005 से ही हो रही है। तत्कालीन गृहमंत्री दिवंगत एनसीपी नेता आरआर पाटिल ने पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बनाने का वादा किया था। इसको लेकर नारायण राणे की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी लेकिन कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार इस कानून को पारित करने में टालमटोल करती रही।
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