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केंद्र सरकार देश में अगले तीन साल में चार लाख नए आंगनवाड़ी केंद्र खोले जाएंगे और सरकार साल 2030 तक भूख और कुपोषण को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने बताया कि आंगनवाड़ियों की सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका है और पोषण, मातृत्व, बाल विकास और महिला स्वास्थ्य में उनकी भूमिका को देखते हुए देश में अगले तीन साल में चार लाख नए आंगनवाड़ी केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार साल 2030 तक भूख और कुपोषण को समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ियों की लगातार निगरानी के साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उचित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चार लाख आंगनवाड़ियां देश में दस करोड़ बच्चों की देखभाल करती हैं लेकिन यह कार्यक्रम बिना उचित निगरानी और प्रशिक्षण के चल रहा है।उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जाहिर किया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मतदान, जनगणना और ऐसे ही अन्य सरकारी कार्यों में लगाया दिया जाता है। मेनका गांधी ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि किसी भी राज्य में बच्चों के पोषण की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
इसके लिए उन्होंने बाजरा, रागी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आंगनवाड़ी केंद्रों में बढ़ावा दिए जाने की योजना साझा की। उन्होंने आर्गेनिक भोजन पदार्थ की दिशा में सिक्किम राज्य के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लिंगभेद को समाप्त करना।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में उनके मंत्रालय की ओर से किए गए प्रयासों के चलते लिंगानुपात को 830 से बढ़ाकर 907 तक पहुंचाने में कामयाबी मिली है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को राज्यों के साथ मिलकर ही हासिल किया जा सकता है।इस मामले में उन्होंने पश्चिकम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भी सराहना की और प्रदेश की तर्ज पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बाजरे को प्रमुखता से शामिल किए जाने की वकालत की।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि महिला सशक्तिकरण के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ मिलकर महिला सरपंचों को गांव में कराए जाने वाले विभिन्न कार्यों जैसे नालियां बनवाना, बैठक बुलाना, खातों को अपडेट करना आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि इससे महिला सरपंचों के स्थान पर काम करने वाले सरपंच पति या प्रधान पति की भूमिका समाप्त होगी और महिलाएं सशक्त बनेंगी।
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