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पूरे विश्व में बाघ संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2010 में सेंट पीटरसबर्ग बाघ शिखर सम्मेलन के बाद से बाघ दिवस को उत्साहपूर्वक विश्व भर में मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन के पीछे बाघों की सुरक्षा तथा उनके रहवास स्थलों को प्राकृतिक रूप में संजोए रखने की परिकल्पना है। आज भारत के चुनिंदा बाघ जिलों में पन्ना भी अग्रणी रूप में सम्मिलित है, जहां 35 से ज्यादा बाघ विचरण करते हैं।
बाघों तथा उनके रहवास स्थलों के प्रति संवेदनशीलता, जागरुकता तथा लगाव बढ़ाने के उद्देश्य के साथ 29 जुलाई को दक्षिण पन्ना के वनमंडल अधिकारी अनुपम सहाय, उप वनमंडल अधिकारी पवई रामनरेश द्विवेदी, वन परिक्षेत्र अधिकारी पवई सुचिता मेश्राम तथा नबी अहमद वन परिक्षेत्र अधिकारी मोहन्द्रा तथा 100 से अधिक वनकर्मियों ने अरण्य भवन पवई में बड़े उत्साह के साथ इस दिवस का आयोजन किया।
वन मंडल के वनकर्मियों को बाघों की पहचान, उनके जीवन चक्र, व्यवहार तथा प्राकृतिक रहवास के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया। दक्षिण वन मंडल पन्ना को कॉरीडोर के रूप में उपयोग कर रहे बाघों की सुरक्षा किस प्रकार से की जाये तथा इसके लिए अद्यतन तकनीकों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वनमंडल में कार्यरत उत्साही वन रक्षकों ने बाघों के चित्र तथा समुच्चित्र (कोलॉज) की प्रदर्शनी का आयोजन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी वन कर्मियों को जंगल में गश्त के दौरान उपयोगी बैग तथा आवश्यक पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
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